चुकंदर के बारे में जानकारी

आम जानकारी

चुकंदर को गार्डन बीट के रूप में भी जाना जाता है। यह स्वाद में मीठा होता है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं। इसके औषधीय मुल्य भी हैं जैसे इसका उपयोग कैंसर से बचाव और दिल की बीमारियों के उपचार के लिए किया जाता है। इसे आसानी से उगाया जा सकता है और भारत में सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली पहली 10 सब्जियों में से एक है।

मिट्टी

चुकंदर के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। मिट्टी की 9.5 पी एच की आवश्यकता होती है। इस फसल को सामान्य मिट्टी में भी उगाया जा सकता है।

प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

Shubhra: यह किस्म स्वीडन देश में विकसित की गई है। इसमें सुक्रॉस की मात्रा 18 प्रतिशत होती है और अशुद्धता  गुणांक 330 होता है। इसकी औसतन पैदावार 56-62 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इस किस्म में पत्तों के धब्बा रोग होने की संभावना काफी कम होती है।
 
Magna Poly: यह किस्म डेनमार्क देश में विकसित की गई है जो कि 56-62 क्विंटल प्रति एकड़ औसतन पैदावार देती है। इसमें सुक्रॉस की मात्रा 14-16 प्रतिशत होती है और अशुद्धता गुणांक 880 होता है।
 
Tribal: यह चुकंदर की विदेशी किस्म है जो कि 40 क्विंटल प्रति एकड़ औसतन पैदावार देती है। इसमें सुक्रॉस की मात्रा 14-16 प्रतिशत होती है और इसमें अशुद्धता गुणांक 1178 होता है।
IISR Compost: यह किस्म लखनऊ सेंटर द्वारा जारी की गई है। इसकी औसतन पैदावार 37-40 क्विंटल प्रति एकड़ देती है। इसमें सुक्रॉस की मात्रा 14-18 प्रतिशत होती है और अशुद्धता गुणांक 790 होता है।
Remanskaya: यह किस्म रूस द्वारा जारी की गई है। इसकी औसतन पैदावार 35-37 क्विंटल प्रति एकड़ देती है। इसमें सुक्रॉस की मात्रा 16 प्रतिशत होती है और अशुद्धता गुणांक 1180 होता है।
 

ज़मीन की तैयारी

खेत में 3-4 बार हैरो से जोताई करें। बीज के अच्छे उत्पादन के लिए, ज़मीन को अच्छे से तैयार करें और उसमें उपयुक्त नमी बनाये रखें। 

बिजाई

बिजाई का समय
बिजाई के लिए सितंबर के आखिरी सप्ताह से मध्य अक्तूबर का समय उपयुक्त होता है।
 
फासला
बिजाई के लिए कतारों में 45-50 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें।
 
बीज की गहराई
बीजों को 3 सैं.मी. की गहराई में बोयें।
 
बिजाई का ढंग
बिजाई सीड ड्रिल से की जाती है।
 

बीज

बीज की मात्रा
1.5-2.5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें।
 
बीज का उपचार
बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 50 डब्लयू पी या थीरम 2 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें। 
 

खाद

खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)

UREA SSP MOP
25 66 30

 

तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)

NITROGEN PHOSPHORUS POTASSIUM
12 5 20

 

खेत की तैयारी के समय 5 टन गाय का गोबर प्रयोग करें। खादों की मात्रा नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 25 किलो), फासफोरस 5 किलो (एस एस पी 12 किलो) और पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 30 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें।
 
फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय मिट्टी में मिलायें। इसी समय बोरैक्स पाउडर 2 किलो प्रति एकड़ में मिलायें। बिजाई के दो महीने बाद नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा डालें।
 

 

 

सिंचाई

चुकंदर को 8 सिंचाइयों द्वारा 80-100 सैं.मी. की आवश्यकता होती है। पहली सिंचाई बिजाई के 25 दिन बाद और अगली 4 सिंचाइयां 25 दिनों के अंतराल पर करें और बाकी की सिंचाइयां 20 दिनों के अंतराल पर करें।

खरपतवार नियंत्रण

अंकुरण के 25-30 दिनों के बाद कमज़ोर नए पौधों की गोडाई करें। पौधे से पौधे में 15-20 सैं.मी. का फासला जरूर होना चाहिए। दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 15-20 दिनों के बाद करें। खरपतवार नियंत्रण के लिए 2-3 गोडाइयों की आवश्यकता होती है।

पौधे की देखभाल

सुंडी
  • हानिकारक कीट और रोकथाम
सुंडी : यदि इसका हमला दिखे तो इसके बचाव के लिए डाइमैथोएट 30 ई सी 200 मि.ली. को प्रति एकड़ में डालें।
 
भुंडी

भुंडी : यदि इसका हमला दिखे तो इससे बचाव के लिए मिथाइल पैराथियॉन 2 प्रतिशत 2.5 किलो को प्रति एकड़ में डालें।

हरा तेला और चेपा
चेपा और तेला : यदि इसका हमला दिखे तो चेपे और तेले से बचाव के लिए क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 300 मि.ली. को प्रति एकड़ में डालें।
 
पत्तों पर धब्बे और पत्तों पर धब्बा रोग
  • बीमारियां और रोकथाम
आल्टरनेरिया और सरकोस्पोरा पत्तों के धब्बा रोग : यदि इसका हमला दिखे तो इस बीमारी को दूर करने के लिए मैनकोजेब 400 ग्राम को 100-130 लीटर में डालकर स्प्रे करें।
 

फसल की कटाई

इस फसल की तुड़ाई अंत मार्च से मई महीने में की जाती है। जब पत्तों की निचली सतह पीले रंग की हो जाये तब तुड़ाई की जाती है। कटाई के 1-3 दिन पहले हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है। यह चुकंदर की औसतन पैदावार 30- 40 क्विंटल प्रति एकड़ और हरे चारे की पैदावार 5-10 क्विंटल प्रति एकड़ देती है।