प्रसिद्ध किस्में और पैदावार
इसकी दो किस्में हैं :
इसकी दो किस्में हैं :
खेत की अच्छे से जोताई करें। ज़मीन को डलियों और नदीन मुक्त रखें। जैतून जल जमाव वाले हालातों को सहन नहीं कर सकती इसलिए खेत की तैयारी के समय इसका ध्यान रखें।
खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
| Age |
FYM (Kg) |
CAN (gm) |
SSP (gm) |
MOP (gm) |
| 1st year | 10 | 300 | 300 | 80 |
| 2nd year | 15 | 600 | 600 | 160 |
| 3rd year | 20 | 900 | 900 | 240 |
| 10th year | 50 | 3000 | 3000 | 800 |
तत्व (ग्राम प्रति एकड़)
| Age |
FYM |
NITROGEN | PHOSPHORUS | POTASH |
| 1st year | 10 | 75 | 50 | 50 |
| 2nd year | 15 | 150 | 100 | 100 |
| 3rd year | 20 | 225 | 150 | 150 |
| 10th year | 50 | 750 | 500 | 500 |
इस फसल की वृद्धि के समय 100 सैं.मी. की वर्षा की आवश्यकता होती है। फूल निकलने, खिलने और फलों के निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए महत्तवपूर्ण होती है। फूल निकलने के दो सप्ताह पहले सिंचाई करें ताकि फूल अच्छे से खिलें और कलियां कम से कम गिरें। फूल खिलने के समय भी सिंचाई करें और फल के आने पर भी सिंचाई आवश्यक है। गर्म और सूखे हालातों में भी सिंचाई आवश्यक है।
नदीनों की वृद्धि को रोकने और मिट्टी को हवादार बनाने के लिए गोडाई और निराई करें। नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए उनकी तीव्रता के आधार पर ग्लाइसोफेट 800-1000 मि.ली. को 150 लीटर पानी में मिलाकर वृद्धि के दौरान दो तीन बार डालें। घास के नदीनों की रोकथाम के लिए सिमाज़िन + ड्यूरॉन 800 ग्राम प्रति एकड़ में डालें।
सूखा : यह जैतून की फसल की गंभीर फंगस वाली बीमारी है। विकास के मौसम में पत्तों का झड़ना इसके मुख्य लक्षण हैं। कई हालातों में वृक्ष पूरा सूख जाता है और सूखकर मर जाता है।
बिजाई से पहले बीजों को थीरम 3 ग्राम या कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर उपचार करें। बुरी तरह से प्रभावित क्षेत्रों में अगेती बिजाई ना करें। प्रभावित क्षेत्र को कार्बेनडाज़िम 5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर प्रभावित क्षेत्र में डालें।
राजस्थान ने जैतून के तेल का अपना ब्रान्ड "Raj Olive Oil" लॉन्च किया है। यह भारत में पहला जैतून तेल का उत्पाद है।
इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है। अच्छी उपज के लिए अच्छे निकास वाली, गहरी, उपजाऊ दोमट या चिकनी दोमट मिट्टी अनुकूल होती है। मिट्टी का पी एच 6-7.5 होना चाहिए। जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती करने से परहेज़ करें।
जैतून सदाबहार है और इसकी दुनिया भर में खेती की जाती है। इसे मुख्य रूप से तेल उद्देश्य के लिए उगाया जाता है। इसके बीजों से निकाला गया तेल खाने योग्य होता है, जिसके बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ हैं। यह विटामिन सी का अच्छा स्त्रोत है। कोलेस्ट्रोल, रक्तचाप को नियंत्रित करता है, कैंसर आदि को रोकता है। बेशक इसे हज़ारों सालों से जाना जाता है लेकिन भारत में इसके व्यापारिक खेती सीमित स्तर पर ही है। इसके स्वास्थ्य लाभ और अंतराराष्ट्रीय बाज़ार में मांग को देखते हुए भारत ने बड़े पैमाने पर जैतून की खेती को प्रोत्साहन करने का फैसला किया है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में जैतून की खेती के नए प्रोजैक्ट शुरू किए गए हैं। राजस्थान सरकार ने जैतून की खेती के लिए विभिन्न सबसिडी की घोषणा की है। राजस्थान में 800 हैक्टेयर के लगभग क्षेत्र में जैतून की खेती की जाती है।
You have successfully login.
Your email and password is incorrect!