आम जानकारी
यह एक बहुवर्षी कांटेदार पौधा है, जिसकी लंबाई 40 सैं.मी.- 120 सैं.मी. होती है। यह एक फलीदार पौधा है, जो एक बार उगाने पर 5 वर्षों तक उपज देता है। राजस्थान में इसे सोनामुखी और संस्कृत में मारकंडी आदि के नाम से जाना जाता है। इसका वनस्पतिक नाम केसिया एंग्सटीफोलिया है और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में इसे भारतीय सेन्ना या टिनेवेली सेन्ना के नाम से जाना जाता है। सोनामुखी मूल रूप से अरब मूल का पौधा है और भारत में इसकी पहली बार खेती तामिलनाडू में की गई थी। वर्तमान में इस पौधे को बड़े स्तर पर केरला और राजस्थान में उगाया जाता है। सनाय की पत्तियां औषधियां बनाने के लिए उपयोग में लायी जाती हैं। सनाय से बनी दवाइयों का प्रयोग कब्ज, बवासीर और वजन कम करने के लिए किया जाता है।
