जलवायु
-
Temperature
23-35°C -
Rainfall
550-750mm -
Sowing Temperature
23-30°C -
Harvesting Temperature
30-35°C
दरमियानी से भारी मिट्टी में उगाने पर यह फसल अच्छे परिणाम देती है। इसे रेतली दोमट मिट्टी में भी उगाया जा सकता है परंतु इस मिट्टी में लगातार सिंचाई की आवश्यकता होती है। यह मिट्टी की उपजाऊ शक्ति, भौतिक और रासायनिक क्रिया को सुधारती है।
खादें (किलो प्रति एकड़)
| UREA | SSP | MOP | ZINC |
| 20-25 | 120-150 | # | # |
तत्व (किलो प्रति एकड़)
| NITROGEN | PHOSPHORUS | POTASH |
| 8-12 | 20-25 | # |
पहला पानी हल्की ज़मीनों में 3-5 दिनों में और भारी जमीनों में 8-10 दिनों के बाद लगाएं। सर्दियों में 10-15 दिनों के फासले पर और गर्मियों में 8-10 दिनों के फासले पर पानी लगाएं।
बुई बरसीम का खतरनाक नदीन है। इसकी रोकथाम के लिए फ्लूकलोरालिन 400 मि.ली. को 200 ली. पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में छिड़काव करें।
चने के सूण्डी : यह फसल के दानों को खाती है। इसकी रोकथाम के लिए फसल को टमाटर, चने और पिछेती गेहूं के नजदीक ना बोयें।इसकी रोकथाम के लिए क्लोरैनट्रानीलिप्रोल 18.5 एस सी 50 मि.ली. या स्पिनोसैड 48 एस सी 60 मि.ली. को 80-100 पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
फसल बीजों के 50 दिनों के बाद कटाई के योग्य हो जाती है। सर्दियों में 40 दिनों के फासले और बसंत के 30 दिनों पर कटाई करें। पशुओं के लिए आचार बनाने के इसे 20 प्रतिशत मक्की में मिलाकर तैयार किया जाता है।
बरसीम एक जल्दी बढ़ने वाली और अधिक गुणवत्ता वाली पशुओं के चारे की फसल है जिसकी मुख्य रूप से कटाई की जाती है और चारे के रूप में पशुओं को खिलाया जाता है। पशुओं विशेष तौर पर दूध देने वाले पशुओं के लिए बरसीम उच्च तत्वों और स्वादिष्ट हरा चारा होता है। यह फसल उपजाऊ ज़मीन में उगाने पर हरे चारे की अधिक मात्रा देती है। हरे चारे की अक्तूबर से मई तक 6 कटाई की जा सकती है। यह क्षारीय और खारी मिट्टी में भी सुधार करती है। इसके फूल पीले-सफेद रंग के होते हैं। बरसीम अकेले या अन्य मसाले वाली फसलों के साथ उगाई जाती है। इसे अच्छी गुणवत्ता वाला आचार बनाने के लिए रायी घास या जई के साथ भी मिलाया जा सकता है।
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