हिना की खेती बारे जानकारी

आम जानकारी

हिना को मेंहदी के रूप में भी जाना जाता है। मुख्य रूप से हथेलियों, पैरों, उंगलियों के नाखूनों और बालों को डाई करने के लिए उपयोग किया जाता है। हिना के फूलों से निकाला गया तेल परफ्यूम इंडस्ट्री में प्रयोग होता है। हिना के पत्ते, बीजों की भी औषधीय विशेषताएं हैं। इसके पत्तों का उपयोग रक्तस्त्राव को नियंत्रित करने के लिए और पेचिश के इलाज के लिए बीजों को घी में मिश्रित करके उपयोग किया जाता है। भारत में राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश हिना के मुख्य उत्पादक राज्य हैं। राजस्थान हिना के उत्पादन में 90 प्रतिशत का सहयोग देता है। राजस्थान में पाली जिला हिना का मुख्य उत्पादक क्षेत्र है और अच्छी गुणवत्ता वाला सोजत ब्रांड का उत्पादन करता है। 

जलवायु

  • Season

    Temperature

    30-40°C
  • Season

    Rainfall

    400mm
  • Season

    Temperature

    30-40°C
  • Season

    Rainfall

    400mm

मिट्टी

इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली, बारीक रेतली, गहरी, मध्यम मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है। हल्की क्षारीय मिट्टी में भी इसकी खेती की जा सकती है। हिना की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 4.3-8 होनी चाहिए।

प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

हिना और हजनी हिना की दो प्रसिद्ध किस्में हैं।

ज़मीन की तैयारी

गर्मियों के महीने में, मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की गहरी जोताई करें। जोताई के बाद, तवियों का प्रयोग करके क्रॉस जोताई करें।

बिजाई

बिजाई का समय
नर्सरी में बिजाई के लिए मार्च का पहला पखवाड़ा उपयुक्त समय होता है और रोपाई जुलाई-अगस्त के महीने में करें।
 
फासला
नए पौधों की रोपाई खालियों में करें। कतार से कतार में 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें। विभिन्न खोजों के अनुसार सूखे पत्तों की उपज बढ़ाने के लिए 45 सैं.मी. x 30 सैं.मी. या 60 सैं.मी. x 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें।
 
बिजाई का ढंग
 नए पौधों की रोपाई मुख्य खेत में की जाती है।
रोपण : समतल नर्सरी बैड पर बीजों को बोया जाता है। पोषक तत्वों के लिए अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 4 टन के साथ नाइट्रोजन 12 किलो (यूरिया 26 किलो ) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में डालें। बैड को लगातार 35-40 दिनों तक सिंचित करें और बैड में  नमी बनाए रखें। नए पौधे तीन से चार महीने में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। नए पौधे 30-40 सैं.मी. कद के होते हैं।
 

बीज

बीज की मात्रा
एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 2 से 4 किलो बीज पर्याप्त होते हैं।
 
बीज का उपचार
अंकुरण की प्रतिशतता बढ़ाने के लिए  बिजाई से पहले बीजों को 3 प्रतिशत नमक के घोल में डुबोयें।
 

खाद

खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)

UREA SSP MOP
76 100 -

 

तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)

NITROGEN PHOSPHORUS POTASH
32 16 -

 

अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए हिना की पूरी फसल को नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 76 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) की प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है। नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा पौधों की रोपाई के समय डालें। बाकी बची नाइट्रोजन एक महीने बाद डालें।

 

 

सिंचाई

जलवायु, मिट्टी की किस्म के आधार पर गर्मियों में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें। बारिश के मौसम में बारिश की तीव्रता के आधार पर सिंचाई करें।

खरपतवार नियंत्रण

नदीनों की तीव्रता के आधार पर रोपाई के एक महीना बाद हाथ से गोडाई करें। चौड़े पत्तों वाले नदीनों और वार्षिक घास की रोकथाम के लिए इनके अंकुरण होने से पहले एट्राज़िन 600 ग्राम प्रति एकड़ में डालें।

पौधे की देखभाल

दीमक
  • हानिकारक कीट और रोकथाम
दीमक : यह हिना का गंभीर कीट है। दीमक की जांच के लिए खेत की तैयारी के समय क्लोरपाइरीफॉस 10 किलो प्रति एकड़ में डालें। यदि दीमक का हमला दिखे तो खड़ी फसल में क्लोरपाइरीफॉस का छिड़काव करें।
 
सेमी लूपर
सेमी लूपर : इसका हमला बादलवाई के मौसम में होता है। यदि इसका हमला खेत में दिखे तो क्विनलफॉस 30 ई सी 300 मि.ली. को प्रति एकड़ में स्प्रे करें।
 

फसल की कटाई

हिना के अच्छे विस्थार के लिए तीन साल आवश्यक होते हैं। उसके बाद व्यापारिक उत्पादन शुरू होता है। कटाई वर्ष में दो बार की जा सकती है। पहली कटाई अक्तूबर-नवंबर के महीने में और दूसरी कटाई अप्रैल-जून के महीने में की जाती है। पत्तों के पूरी तरह पकने और गहरा हरा होने पर कटाई की जाती है। शाखाओं को ज़मीनी स्तर से 8-10 सैं.मी. के फासले पर दरांती के साथ काटा जाता है।

कटाई के बाद

कटाई के बाद शाखाओं को इक्ट्ठा किया जाता है और धूप में सुखाने के लिए छोड़ दिया जाता है। अच्छे से सुखाने के बाद पत्तों को इक्ट्ठा करके बोरियों में भरा जाता है।