KS 2 (1991): यह जल्दी पकने वाली किस्म है जो 80-90 दिनों में परिपक्व हो जाती है। यह किस्म शुष्क क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है। इसके मध्यम आकार के बीज होते हैं जो भूरे रंग के होते हैं। बारानी क्षेत्रों में इसकी औसतन पैदावार 2.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
दूसरे राज्यों की किस्में
CO 1 (1953): यह किस्म 110 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसके पौधे का कद 30-40 सैं.मी. होता है। इसके दाने चमड़े के रंग जैसे होते हैं (100 दानों का भार 4.6 ग्राम)। यह किस्म बारानी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है। इसकी औसतन पैदावार 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Paiyur 1 (1988): यह किस्म 110 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसके पौधे का कद 35-40 सैं.मी. होता है। इसके दाने हल्के भूरे रंग के होते हैं (100 दानों का भार 3.4 ग्राम)। यह किस्म बारानी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है। इसकी औसतन पैदावार 4-4.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Paiyur 2 (1998): यह किस्म 110-105 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसके पौधे का कद 40-45 सैं.मी. होता है। इसके दाने हल्के भूरे रंग के होते हैं (100 दानों का भार 3.56 ग्राम)। यह किस्म बारानी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है। इसकी औसतन पैदावार 3.5-4.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।