अगेती बोने वाली किस्में
Gola: उच्च उपज और जल्दी पकने वाली यह किस्म सूखे क्षेत्रों के लिए अनुकूल है। इसके फल गोल, हरे पीले रंग के होते हैं। इसके फल जनवरी के पहले सप्ताह में पक जाते हैं।
दरमियानी पकने वाली किस्में
Seb: इसके फल का औसतन भार 14 ग्राम होता है। इसकी औसतन पैदावार 80 किलो प्रति वृक्ष होती है। इसमें 20.7 प्रतिशत घुलनशील ठोस, 85 ग्राम प्रति 100 ग्राम विटामिन सी और 44 प्रतिशत तेजाब की मात्रा होती है। इसके फल जनवरी के पहले सप्ताह में पक जाते हैं।
Mundia: इसके फल घंटी के आकार के फल होते हैं जो कि पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं। इनमें घुलनशील ठोस की मात्रा 18.5 प्रतिशत, विटामिन सी 90.7 मि.ग्राम प्रति 100 ग्राम और तेजाब की मात्रा 29 प्रतिशत होती है। इसकी औसतन पैदावार 125 किलो प्रति वृक्ष होती है।
पिछेती बोने वाली किस्में
Umran: इस किस्म के फल अंडाकार आकार के चमकदार होते हैं इसके फल का रंग सुनहरी पीला होता है जो पूरी तरह पकने के बाद चॉकलेटी रंग के हो जाते हैं। यह किस्म मार्च के अंत से मध्य अप्रैल तक परिपक्व हो जाती है। इसके एक बूटे की पैदावार 150 से 200 किलोग्राम प्रति वृक्ष होती है।
Kaithli: इस किस्म के फल दरमियाने और अंडाकर आकार के होते हैं और फल का रंग हरा पीला होता है। इसकी फसल मार्च के आखिर में पककर तैयार हो जाती है। इसके फलों में मिठास भरपूर मात्रा में होती है। इसके बूटे से 75 किलोग्राम तक फल प्राप्त हो जाते हैं। इस किस्म को फफूंद के हमले का ज्यादा खतरा रहता है।
दूसरे राज्यों की किस्में
ZG 2: इस किस्म के बूटे का आकार काफी घना और फैला हुआ होता है। इसके फल छोटे और अंडाकार आकार के होते हैं। पकने के बाद इनका रंग हरा हो जाता है। इसका फल मिठास से भरपूर होता है। इस किस्म पर फफूंद का हमला नहीं होता। यह किस्म मार्च के आखिर में पककर तैयार हो जाती है। इस किस्म के प्रति बूटे की पैदावार 150 किलोग्राम तक हो सकती है।
Wallaiti: इस किस्म के फल दरमियाने से बड़े आकार के होते हैं। पकने पर इसके फल का रंग सुनहरी पीला हो जाता है। इसका गुद्दा नर्म और इसमें टी एस एस की मात्रा 13.8 से 15 प्रतिशत तक होती है। इस किस्म के प्रति बूटे की पैदावार 114 किलोग्राम तक हो सकती है।
Sanaur 2: इस के फल बड़े आकर और नर्म परत वाले होते हैं। इसका रंग सुनहरी पीला होता है। इसका फल भी बहुत मिठास भरपूर होता है जिसमें टी एस एस की मात्रा 19 प्रतिशत तक होती है। यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग की प्रतिरोधक होती है। मार्च के अंतिम पखवाड़े में इसका फल पककर तैयार हो जाता है। इस किस्म के प्रति बूटे की पैदावार 150 किलोग्राम तक हो सकता है।
Banarasi Kadaka
Mehrun
Parbhani
Elaichi
Sanam 5
iztuu