Narendra 6: यह दरमियाने समय की फसल है जो कि मध्य नवंबर से मध्य दिसंबर में बोयी जाती है। इसके फल मध्यम आकार के होते हैं जिनका भार 38.8 ग्राम होता है। इसमें रेशे की मात्रा सबसे कम 0.8 प्रतिशत होती है। इसमें एसकार्बिक एसिड 100 ग्राम होता है और कम मात्रा में फैनोलिक होता है। इसे जैमस और कैंडिज़ बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
Narendra 7 (Promising variety): यह दरमियाने मौसम की फसल है जो कि मध्य नवंबर से मध्य दिसंबर में बोयी जाती है। इसके फल मध्यम से बड़े आकार के होते हैं जिनका भार 44 ग्राम होता है और हरा-सफेद रंग होता है। इसके फल में रेशे की मात्रा 1.5 प्रतिशत होती है।
Krishna: यह जल्दी पकने वाली किस्म है जो कि मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर में परिपक्व हो जाती है। इसके फल मध्यम आकार के होते हैं जिनका भार 44.6 ग्राम होता है। इसका छिल्का नर्म और फल पर धारियां अच्छे से बनी होती हैं। इस किस्म में 1.4 प्रतिशत तक रेशा होता है।
Balwant: यह जल्दी पकने वाली किस्म है जो कि मध्य नवंबर के महीने में परिपक्व हो जाती है। इसके चपटे गोल आकार के मध्यम फल होते हैं इसके फल नर्म और रसदार, अंदर से सफेद गुद्दे वाले और बाहरे से छिल्का हरा होता है। इसकी औसतन पैदावार 121 किलोग्राम प्रति वृक्ष होती है।
दूसरे राज्यों की किस्में
Banarasi: यह जल्दी पकने वाली किस्म है जो कि मध्य अक्तूगर से मध्य नवंबर में परिपक्व हो जाती है। इसके फल बड़े आकार के होते हैं। जिनका भार 48 ग्राम होता है। इसका छिल्का मुलायम होता है और इसके फल रोग निवारक उद्देश्य से प्रयोग नहीं किये जाते। इस किस्म में 1.4 प्रतिशत रेशा होता है।
NA-9: यह भी जल्दी पकने वाली किस्म है जो कि मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर में परिपक्व हो जाती है। इसके फल बड़े आकार के होते हैं जिनका भार 50.3 ग्राम होता है जिनका आकार अंडाकार, छिल्का नर्म और पतला होता है। इस किस्म में रेशा कम होता है जिसकी मात्रा 0.9 प्रतिशत होती है और उच्च मात्रा में एसकार्बिक एसिड होता है। इससे जैमस, जैलीज़ और कैंडीज़ आदि बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
NA-10: यह भी जल्दी पकने वाली किस्म है जो कि मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर में परिपक्व हो जाती है। इसके फल मध्यम से बड़े आकार के होते हैं जिनका भार 41.5 ग्राम होता है। इसका छिल्का खुरदरा होता है और ऊपर धारियां बनी होती है। इसका गुद्दा हरे-सफेद रंग का होता है, जिसमें 1.5 प्रतिशत रेशा होता है।
Francis: यह दरमियाने मौसम की फसल है जो कि मध्य नवंबर से मध्य दिसंबर में बोयी जाती है। इसके फल बड़े आकार के होते हैं जिनका भार 45.8 ग्राम होता है। फल हरे-सफेद रंग का होता है। इसमें रेशे की मात्रा 1.5 प्रतिशत होता है। इस किस्म को हाथी झूल के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसकी शाखाएं लटकी हुई होती हैं।
NA-5(Kanchan): यह दरमियाने मौसम की फसल है जो कि मध्य नवंबर से मध्य दिसंबर में बोयी जाती है। इसके फल छोटे आकार के होते हैं जिनका भार 30.2 ग्राम होता है इसमें रेशे की मात्रा 1.5 प्रतिशत होती है और इसमें काफी मात्रा में एसकार्बिक एसिड पाया जाता है।
Chakaiya: यह देरी से पकने वाली किस्म है जो कि मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी में परिपक्व होती है। इसके फल मध्यम आकार के होते हैं जिनका भार 33.4 ग्राम होता है। इसमें 789 मि.ग्रा. प्रति 100 ग्राम एसकार्बिक एसिड, 3.4 प्रतिशत पैक्टिन और 2 प्रतिशत रेशा होता है। इसे आचार बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
NA-4 (Krishna) और BSR-1 (Bhavanisagar) भी अन्य राज्यों की कुछ प्रसिद्ध किस्में हैं।