सफेद छिल्के वाली किस्में
Kufri Chandramukhi: यह किस्म मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, उड़ीसा और पश्चिमी बंगाल राज्यों में उगाने के लिए उपयुक्त है। इसकी गांठे बड़े अंडाकार आकार की होती हैं, जो कि थोड़ी चपटी होती है और हल्का सफेद रंग का गुद्दा होता है। यह किस्म 80-90 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 100 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म चिपस और फ्लेक्स बनाने के लिए उपयुक्त है।
Kufri Ashoka: इस फसल की सी पी आई यू द्वारा विकसित की गई है और बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में खेती करने के लिए अनुकूल है। इसका पौधा मध्यम लंबा और तना दरमियाना मोटा होता है। यह किस्म 70-80 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसके आलू बड़े, गोलाकार, सफेद और नर्म छिल्के वाले होते हैं। यह पिछेती झुलस रोग को सहने योग्य किस्म है।
Kufri Jyoti: यह किस्म बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटका, पश्चिमी बंगाल, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों में उगाने के लिए उपयुक्त है। इसकी गोल आकार की गांठे होती हैं। गर्म जलवायु में उगाने पर यह अच्छी उपज देती है। यह किस्म 75-80 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 85 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म चिपस बनाने के लिए उपयुक्त है।
Kufri Bahar: इस किस्म के पौधे लंबे और तने मोटे होते हैं। तनों की संख्या 4-5 प्रति पौधा होती है। इसके आलू बड़े, सफेद रंग के, गोलाकार से अंडाकार होते हैं। यह किस्म 90-100 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसे ज्यादा देर तक स्टोर करके रखा जा सकता है। यह पिछेती और अगेती झुलस रोग और पत्ता मरोड़ रोग की रोधक है।
Kufri Pukhraj: इसके बूटे लंबे और तने संख्या में कम और दरमियाने मोटे होते हैं। आलू सफेद, बड़े, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं यह किस्म 70-80 दिनों में पकती है। इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ है। यह अगेती झुलस रोग की रोधक किस्म है और नए उत्पाद बनाने के लिए उचित नहीं है।
Kufri Badshah: इसके पौधे लंबे और 4-5 तने प्रति पौधा होते हैं। इसके आलू गोल, बड़े से दरमियाने, गोलाकार और हल्के सफेद रंग के होते हैं। इसके आलू स्वाद होते हैं यह किस्म 90-100 दिनों में पक जाती है। यह किस्म कोहरे को सहनेयोग्य है और पिछेती, अगेती झुलस रोग की प्रतिरोधक है।
Kufri Sutlej: इस किस्म के पौधे घने और मोटे तने वाले होते हैं। पत्ते हल्के हरे रंग के होते हैं। आलू बड़े आकार के, गोलाकार और नर्म छिल्के वाले होते हैं। यह किस्म 90-100 दिनों में पकती है। इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म खाने के लिए अच्छी और स्वादिष्ट होती है। इन आलुओं को पकाना आसान होता है। यह नए उत्पाद बनाने के लिए उचित किस्म नहीं है।
लाल छिल्के वाली किस्में
Kufri Sindhuri: यह किस्म कर्नाटका, बिहार, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और पंजाब राज्यों में उगाने के लिए उपयुक्त है। यह किस्म कुछ हद तक अगेते झुलस रोग के प्रतिरोधी और आलू के पत्ता मरोड़ रोग और पिछेते झुलस रोग को सहनेयोग्य है। यह किस्म 110-120 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 165 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Kufri Lalima: यह किस्म बिहार और उत्तर प्रदेश राज्यों में बोने के लिए उपयुक्त है। इसकी मध्यम गोल आकार की गांठे होती हैं। यह किस्म 110-120 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 165 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म कुछ हद तक अगेते झुलस रोग और आलू के विषाणु रोग की प्रतिरोधक होती है।
प्रक्रिया के लिए उपयुक्त किस्में
Kufri Chipsona 1: यह किस्म बिहार और उत्तर प्रदेश में उगाने के लिए उपयुक्त है। इसकी गांठे या आलू मध्यम से बड़े आकार के लाल आंखों वाले होते हैं। फसल 90-110 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 165 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म पिछेते झुलस रोग के प्रतिरोधक और कोहरे को सहनेयोग्य है। यह किस्म चिपस बनाने और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उपयुक्त है।
Kufri Chipsona 2: इस किस्म के पौधे दरमियाने कद के और कम तनों वाले होते हैं इसके पत्ते गहरे हरे और फूल सफेद रंग के होते हैं। आलू सफेद, दरमियाने आकार के, गोलाकार, अंडाकार और नर्म होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह पिछेती झुलस रोग की रोधक किस्म है। यह किस्म चिपस और फरैंच फ्राइज़ बनाने के लिए उचित है।
दूसरे राज्यों की किस्में
Kufri Chipsona 3: यह दरमियाने समय की किस्म 100-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 120-140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Kufri Anand: यह दरमियाने समय की किस्म पिछेती झुलस रोग और कोहरा की प्रतिरोधक है। इसकी औसतन पैदावार 140-160 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Kufri Pushkar: यह दरमियाने समय की किस्म है। इसकी औसतन पैदावार 120-140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।