अलफाल्फा की फसल

आम जानकारी

यह ठंडे मौसम की सदाबहार फसल है, जिसमें पशुओं के लिए पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। इस फसल का चारा दूध देने वाले पशुओं में दूध की उपज को बढ़ाता है, भले ही वे कम मात्रा में भोजन करें। इसे रबी के मौसम में उगाया जाता है जो कि लगभग 3 वर्ष तक उपज देती है। यह फसल सूखा, ठंडे और गर्म हालातों के प्रतिरोधक है। इसकी जड़ों में राइज़ोबियम बैक्टीरिया की मात्रा होती है, जो कि मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने में मदद करती है।

मिट्टी

अलफाल्फा की फसल की खेती के लिए अच्छे निकास वाली दोमट मिट्टी अच्छी होती है। इसकी खेती रेतली दोमट से नर्म मिट्टी में भी की जा सकती है। यह फसल खारी और हल्के निकास वाली मिट्टी को भी सहन कर सकती है।

प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

Type-8, Type-9 (perennials), RL 88 (perennials), Anand 2 (annual) और LLC 3(annual) राजस्थान क्षेत्रों के लिए विकसित किस्में हैं।

ज़मीन की तैयारी

अलफाल्फा की रोपाई के लिए अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है। मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए 3-4 जोताई के बाद एक गहरी जोताई करें। उसके बाद सुहागे से खेत को समतल करें।

बिजाई

बिजाई का समय
बिजाई के लिए अक्तूबर का समय अच्छा होता है।
 
बीज की गहराई
बीज को बोने के लिए 1-3 सैं.मी. गहराई का प्रयोग करें।
 
फासला
कतार में 20 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें।
 

बीज

बीज की मात्रा
8-10 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें।
 
बीज का उपचार
बीजों की ऊपरली परत सख्त होने के कारण बीजों को 6-8 घंटे के लिए पानी में भिगोयें और फिर बिजाई के लिए प्रयोग करें।
 

खाद

खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)

UREA SSP MOP
15-30 150-200 -

 

तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)

NITROGEN PHOSPHORUS POTASH
8-14 25-33 -
 
खेत की तैयारी के समय गाय का गला हुआ गोबर 80 क्विंटल प्रति एकड़ में मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें। नाइट्रोजन 8-14 किलो (15-30 किलो यूरिया) और फासफोरस 25-33 किलो (एस एस पी 150-200 किलो) प्रति एकड़ में डालें।
 
नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें। बाकी बची नाइट्रोजन के तीन हिस्से करके दूसरी कटाई के बाद डालें।
 

 

सिंचाई

इसे कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। बिजाई के बाद 5-7 दिनों के अंतराल पर दो सिंचाइयां दें। अगली सिंचाई सर्दियों में, हल्की मिट्टी में 10-12 दिनों के बाद करें, मॉनसून में 7-8 दिनों के बाद करें और गर्मियों में 5-7 दिनों के बाद करें। भारी मिट्टी में सिंचाई गर्मियों में 10-15 दिनों के बाद करें, मॉनसून में 15-20 दिनों के बाद करें और गर्मियों में 20-25 दिनों के बाद करें।

खरपतवार नियंत्रण

फसल की अच्छी वृद्धि के लिए 2-3 गोडाई करें। अमरबेल नदीन से फसल को बचाने के लिए पैराकुएट 0.1-0.2 प्रतिशत की स्प्रे पहली और दूसरी कटाई के तुरंत बाद करें।

फसल की कटाई

बिजाई के 55-60 दिनों के बाद पहली कटाई की जाती है और उसके बाद अगली कटाई, पहली कटाई के बाद 30-35 दिनों के अंतराल पर की जाती है। 7-8 कटाइयों से प्रति वर्ष हरे चारे की औसतन पैदावार 280-320 क्विंटल प्रति एकड़ प्राप्त होती है।