राजस्थान में हरी मूंग की फसल
ब्लिस्टर बीटल
जूं : यदि इनका हमला दिखे दे तो डाइमैथोएट 30 ई सी 150 मि.ली. को प्रति एकड़ में स्प्रे करें।
 
ब्लिस्टर बीटल : यह कीड़े और सुंडियां दिन के समय हमला करती हैं यह सुंडियां फूल बनने के समय बहुत नुकसान करती हैं। यह फूलों को अपना भोजन बनाते हैं जिस कारण दानों पर प्रभाव पड़ता है।
 
इसकी रोकथाम के लिए इंडोएक्साकार्ब 14.5 एस सी 200 मि.ली. या एसीफेट 75 एस सी 800 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें। यह स्प्रे शाम के समय करें और दूसरी स्प्रे जरूरत पड़ने पर 10 दिनों के बाद कर सकते हैं।
 
फली छेदक सुंडी
फली छेदक सुंडी : यह फसल की बहुत नुकसानदायक सुंडी है। यह डोडियों और फूलों को भारी नुकसान करती है। इसकी रोकथाम के लिए इंडोएक्साकार्ब 14.5 एस सी 200 मि.ली. या एसीफेट 75 एस पी 800 ग्राम या स्पाइनोसैड 45 एस सी 60 मि.ली. प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें। दो सप्ताह बाद दोबारा फिर स्प्रे करें।
 
तंबाकू सुंडी
तंबाकू सुंडी : इसकी रोकथाम के लिए एसीफेट 75 एस पी 800 ग्राम प्रति एकड़ या क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 1.5 लीटर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें। जरूरत पड़ने पर 10 दिनों के बाद एक छिड़काव ओर करें।
 
बालों वाली सुंडी
बालों वाली सुंडी : इसकी रोकथाम के लिए प्रभावित पौधों को उखाड़कर ज़मीन में दबा दें। ज्यादा नुकसान होने पर क्विनलफॉस 300 मि.ली. या डाइक्लोरोवॉस 200 मि.ली. प्रति एकड़ के हिसाब से प्रयोग करें।
 
पीला चितकबरा रोग
  • बीमारियां और रोकथाम
पीला चितकबरा रोग : यह सफेद मक्खी के कारण फैलता है। जिससे पत्तों और पीले रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। प्रभावित पौधे पर फलियां नहीं बनती। इस रोग की प्रतिरोधक किस्में बीजनी चाहिए। इसकी रोकथाम के लिए 40 ग्राम थायामैथोक्स और ट्राइज़ोफॉस 300 मि.ली. प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें दूसरा छिड़काव 10 दिनों के बाद करें।
 
सरकोस्पोरा पत्तों के धब्बों का रोग
पत्तों के धब्बों का रोग : इसकी रोकथाम के लिए बीज का उपचार जरूरी होता है। इस रोग की प्रतिरोधक किस्में ही बोयें। ज़िनेब 400 ग्राम को 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। दो या तीन छिड़काव 10 दिनों के फासले पर करें।
 

फसल की कटाई

कटाई का सही समय तब होता है जब पत्ते झड़ जायें और 85 प्रतिशत फलियां पक जाती हैं। कटाई में देरी करने से फलियां झड़नी शुरू हो जाती है। कटाई द्राती से करें और बीज को धूप में साफ करके सुखाएं।

  • Season

    Temperature

    30-35°C
  • Season

    Rainfall

    60-90cm
  • Season

    Sowing Temperature

    25-30°C
  • Season

    Sowing Temperature

    30-35°C
  • Season

    Temperature

    30-35°C
  • Season

    Rainfall

    60-90cm
  • Season

    Sowing Temperature

    25-30°C
  • Season

    Sowing Temperature

    30-35°C
  • Season

    Temperature

    30-35°C
  • Season

    Rainfall

    60-90cm
  • Season

    Sowing Temperature

    25-30°C
  • Season

    Sowing Temperature

    30-35°C

मिट्टी

इसे हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली और रेतली सतह वाली ज़मीनों में ज्यादा पैदावार देती है। क्षारीय और जल जमाव वाली ज़मीन इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती।

प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

K 851 : यह किस्म 1984 में जारी की गई है। यह 60-80 दिनों में पक जाती है। इसकी औसतन पैदावर 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
RMG 62 : यह किस्म 1991 में जारी की गई है। यह 65-70 दिनों में पक जाती है। इसकी औसतन पैदावर 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसका पौधा मध्यम कद का होता है जो कि सीधा खड़ा होता है। इसके दाने हरे रंग के चमकदार होते हैं जो कि आकार में मध्यम होते हैं। यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग की प्रतिरोधक होती है।
 
RML 267: यह किस्म 1987 में जारी की गई है। यह किस्म मध्यम कद की होती है जो कि 80-90 दिनों में पक जाती है। इसकी औसतन पैदावर 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसके दाने मध्यम चमकदार और गहरे हरे रंग के होते हैं। यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग की कुछ हद तक प्रतिरोधक है।
RMG 268 : यह किस्म 1999 में जारी की गई है। यह किस्म 65-70 दिनों में पक जाती है। इसका पौधा मध्यम कद का और दाने मध्यम चमकदार होते हैं। यह किस्म पत्तों के झुलस रोग और धब्बा रोगों की प्रतिरोधक और सूखे को सहनेयोग्य है। इसकी औसतन पैदावार 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
SML 668 : यह किस्म 2002 में जारी की गई है। यह किस्म 75-85 दिनों में पक जाती है। इसकी औसतन पैदावार 2-3 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसके पत्ते चौड़े होते हैं जोकि गहरे हरे रंग के होते हैं। फलियां पकने पर गहरे भूरे रंग की हो जाती हैं।
 
GM 4 : यह किस्म 2003 में जारी की गई है। इसका पौधा 50-58 सैं.मी. लंबा और सीधा होता है। इस किस्म में फूलों का विकास 35-41 दिनों में हो जाता है और यह किस्म 61-68 दिनों में पक जाती है। इसके बीज हरे रंग के बड़े आकार के होते हैं।
RMG 492 : यह किस्म 2003 में जारी की गई है। यह किस्म असंवेदनशील होती है। यह किस्म 68-72 दिनों में पक जाती है। यह किस्म पत्तों के पीले धब्बों की प्रतिरोधक है। इसकी औसतन पैदावार 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है और 100 दानों का भार लगभग 4.1 ग्राम होता है।
दूसरे राज्यों की किस्में
 
ML 2056 : यह किस्म खरीफ मौसम में बोने के लिए उपयुक्त है। इसका पौधा मध्यम कद का होता है। यह किस्म 75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी प्रत्येक फली में 11-12 दाने होते हैं। यह किस्म पीले चितकबरे और सरकोस्पोरा रोग को सहनेयोग्य और बैक्टीरियल पत्ता धब्बा रोगों की प्रतिरोधक है। यह रस चूसने वाले कीट जैसे तेला और सफेद मक्खी को भी सहनेयोग्य है। इसकी औसतन पैदावार 4.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
ML 818 : यह किस्म खरीफ मौसम में बोने के लिए उपयुक्त है। इसका पौधा मध्यम कद का होता है। यह किस्म 80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी प्रत्येक फली में 10-11 दाने होते हैं। यह किस्म पीले चितकबरे और सरकोस्पोरा रोग को सहनेयोग्य और बैक्टीरियल पत्ता धब्बा रोगों की प्रतिरोधक है। इसकी औसतन पैदावार 4.9 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
PAU 911: यह किस्म खरीफ मौसम में बोने के लिए उपयुक्त है। यह किस्म 75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी प्रत्येक फली में 9-11 दाने होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 4.9 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसके दाने मोटे और हरे होते हैं।
 
SML 832 : यह किस्म गर्मियों में बोने के लिए उपयुक्त है। इसका पौधा मध्यम कद का होता है। यह किस्म 62 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी प्रत्येक फली में 10 दाने होते हैं। इसके दाने मध्यम आकार के चमकदार हरे रंग के होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 4.6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
TMB 37 : यह किस्म बसंत और गर्मियों में बोने के लिए उपयुक्त है। यह किस्म पंजाब में सामान्य बिजाई के लिए पी ए यू  द्वारा जारी की गई है। यह किस्म 60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
 
Jawahar- 45 : यह मध्यम समय की किस्म है। भारत के उत्तरी और पानी से घिरे हुए क्षेत्रों में बोने के लिए उपयुक्त है। यह किस्म 75-90 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 4-5.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
ML 1 : यह मध्यम समय की किस्म पंजाब और हरियाणा राज्यों में बोने के लिए उपयुक्त है। यह 90 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
Type 1 : यह जल्दी पकने वाली किस्म है। यह किस्म 60-65 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह किस्म हरी खाद और दानों के उद्देश्य से उगाने के लिए उपयुक्त है। इसकी औसतन पैदावार 2.4-3.6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
PusaBaisakhi :  यह किस्म 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 3.2-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
Mohini : यह किस्म 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह किस्म पीले चितकबरे रोग और सरकोस्पोरा पत्तों के धब्बा रोगों को सहनेयोग्य है। इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
PS 16 : यह पूरे देश में खेती करने के लिए उपयुक्त किस्म है। यह 60-65 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 

 

ज़मीन की तैयारी

ज़मीन को भुरभुरा करने के लिए दो या तीन जोताई करनी ज़रूरी है। प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेर दें।

बिजाई

बिजाई का समय
खरीफ की ऋतु के लिए बिजाई का अनुकूल समय जुलाई महीने का पहला पखवाड़ा है। गर्मी की ऋतु की बिजाई के लिए सही समय मार्च से अप्रैल तक का है।
 
फासला
खरीफ की बिजाई के लिए पंक्ति  से पंक्ति का फासला 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 10 सैं.मी. रखें। रबी की बिजाई के लिए पंक्ति से पंक्ति का फासला 22.5 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 7 सैं.मी. रखें।

बीज की गहराई
बिजाई के लिए बीजों को 4-6 सैं.मी. गहरा बोयें।
 
बिजाई का ढंग
बिजाई के लिए बिजाई वाली मशीन, पोरा या केरा ढंग का प्रयोग किया जाता है।
 

बीज

बीज की मात्रा
7-9 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें।
 
बीज का उपचार
बिजाई से पहले बीजों को कप्तान या थीरम से 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज का उपचार करें।
 
Fungicide name Quantity (Dosage per kg seed)
Captan 3gm
Thiram 3gm
 
 

खाद

खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)

UREA SSP MOP
48 200 -

 

तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)

NITROGEN PHOSPHORUS POTASH
20 40 -

 

 यदि जड़ गलने की बीमारी का खतरा हो तो 10 किलो ट्राइकोडर्मा हरज़ेनियम को 60 किलो रूड़ी की खाद के साथ बिजाई के समय 1 एकड़ खेत में डालें। नाइट्रोजन 20 किलो (48 किलो यूरिया), 40 किलो फासफोरस (200 किलो सुपर फासफेट)बिजाई के समय डालें।

 

 

 

सिंचाई

पहली सिंचाई बिजाई के 50-55 दिनों के बाद करें और अगर दूसरी सिंचाई की जरूरत हो तो बिजाई के 45 दिनों के बाद करें। यदि सिर्फ एक सिंचाई ही उपलब्ध हो तो सिंचाई बिजाई के 50-60 दिनों के बाद करें।

खरपतवार नियंत्रण

खेत को नदीन मुक्त करने के लिए एक या दो गोडाई करें।पहली गोडाई बीजने के 4 सप्ताह बाद और दूसरी गोडाई, पहली गोडाई के 2 सप्ताह बाद करें। रासायनिक तरीके से नदीनों को ख्त्म करने के लिए फलूक्लोरालिन 600 मि.ली. प्रति एकड़ और ट्राइफलूरालिन 800 मि.ली. प्रति एकड़ में बिजाई से पहले डालें।इसके इलावा बिजाई के बाद दो दिनों के अंदर अंदर पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 100 से 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें।
 

आम जानकारी

इसे मूंग के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत की मुख्य दालों में से एक है। यह प्रोटीन के साथ साथ रेशे और लोहे का मुख्य स्त्रोत है। यह खरीफ की ऋतु और गर्मियों के मौसम में उगाई जाती है। भारत मूंग का लगभग 2/3 हिस्से का उत्पादन करता है। भारत में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार और हरियाणा राज्यों में इसकी खेती की जाती है।

पौधे की देखभाल

रस चूसने वाले कीड़े (हरा तेला, चेपा और सफेद मक्खी)
  • हानिकारक कीट और रोकथाम
रस चूसने वाले कीड़े (हरा तेला, चेपा और सफेद मक्खी) : यदि इन कीड़ों का नुकसान दिखे तो मैलाथियॉन 375 मि.ली. या डाइमैथोएट 250 मि.ली. या ऑक्सीडैमेटन मिथाइल 250 मि.ली. प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें। सफेद मक्खी की रोकथाम के लिए थाइमैथोक्सम 40 ग्राम या ट्राइज़ोफॉस 300 मि.ली. प्रयोग करें। यदि जरूरत पड़े तो पहले छिड़काव के बाद दूसरा छिड़काव 10 दिनों के फासले पर करें।
 

जलवायु

  • Season

    Temperature

    30-35°C
  • Season

    Rainfall

    60-90cm
  • Season

    Sowing Temperature

    25-30°C
  • Season

    Sowing Temperature

    30-35°C