K 851 : यह किस्म 1984 में जारी की गई है। यह 60-80 दिनों में पक जाती है। इसकी औसतन पैदावर 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
RMG 62 : यह किस्म 1991 में जारी की गई है। यह 65-70 दिनों में पक जाती है। इसकी औसतन पैदावर 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसका पौधा मध्यम कद का होता है जो कि सीधा खड़ा होता है। इसके दाने हरे रंग के चमकदार होते हैं जो कि आकार में मध्यम होते हैं। यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग की प्रतिरोधक होती है।
RML 267: यह किस्म 1987 में जारी की गई है। यह किस्म मध्यम कद की होती है जो कि 80-90 दिनों में पक जाती है। इसकी औसतन पैदावर 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसके दाने मध्यम चमकदार और गहरे हरे रंग के होते हैं। यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग की कुछ हद तक प्रतिरोधक है।
RMG 268 : यह किस्म 1999 में जारी की गई है। यह किस्म 65-70 दिनों में पक जाती है। इसका पौधा मध्यम कद का और दाने मध्यम चमकदार होते हैं। यह किस्म पत्तों के झुलस रोग और धब्बा रोगों की प्रतिरोधक और सूखे को सहनेयोग्य है। इसकी औसतन पैदावार 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
SML 668 : यह किस्म 2002 में जारी की गई है। यह किस्म 75-85 दिनों में पक जाती है। इसकी औसतन पैदावार 2-3 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसके पत्ते चौड़े होते हैं जोकि गहरे हरे रंग के होते हैं। फलियां पकने पर गहरे भूरे रंग की हो जाती हैं।
GM 4 : यह किस्म 2003 में जारी की गई है। इसका पौधा 50-58 सैं.मी. लंबा और सीधा होता है। इस किस्म में फूलों का विकास 35-41 दिनों में हो जाता है और यह किस्म 61-68 दिनों में पक जाती है। इसके बीज हरे रंग के बड़े आकार के होते हैं।
RMG 492 : यह किस्म 2003 में जारी की गई है। यह किस्म असंवेदनशील होती है। यह किस्म 68-72 दिनों में पक जाती है। यह किस्म पत्तों के पीले धब्बों की प्रतिरोधक है। इसकी औसतन पैदावार 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है और 100 दानों का भार लगभग 4.1 ग्राम होता है।
दूसरे राज्यों की किस्में
ML 2056 : यह किस्म खरीफ मौसम में बोने के लिए उपयुक्त है। इसका पौधा मध्यम कद का होता है। यह किस्म 75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी प्रत्येक फली में 11-12 दाने होते हैं। यह किस्म पीले चितकबरे और सरकोस्पोरा रोग को सहनेयोग्य और बैक्टीरियल पत्ता धब्बा रोगों की प्रतिरोधक है। यह रस चूसने वाले कीट जैसे तेला और सफेद मक्खी को भी सहनेयोग्य है। इसकी औसतन पैदावार 4.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
ML 818 : यह किस्म खरीफ मौसम में बोने के लिए उपयुक्त है। इसका पौधा मध्यम कद का होता है। यह किस्म 80 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी प्रत्येक फली में 10-11 दाने होते हैं। यह किस्म पीले चितकबरे और सरकोस्पोरा रोग को सहनेयोग्य और बैक्टीरियल पत्ता धब्बा रोगों की प्रतिरोधक है। इसकी औसतन पैदावार 4.9 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
PAU 911: यह किस्म खरीफ मौसम में बोने के लिए उपयुक्त है। यह किस्म 75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी प्रत्येक फली में 9-11 दाने होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 4.9 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसके दाने मोटे और हरे होते हैं।
SML 832 : यह किस्म गर्मियों में बोने के लिए उपयुक्त है। इसका पौधा मध्यम कद का होता है। यह किस्म 62 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी प्रत्येक फली में 10 दाने होते हैं। इसके दाने मध्यम आकार के चमकदार हरे रंग के होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 4.6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
TMB 37 : यह किस्म बसंत और गर्मियों में बोने के लिए उपयुक्त है। यह किस्म पंजाब में सामान्य बिजाई के लिए पी ए यू द्वारा जारी की गई है। यह किस्म 60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
Jawahar- 45 : यह मध्यम समय की किस्म है। भारत के उत्तरी और पानी से घिरे हुए क्षेत्रों में बोने के लिए उपयुक्त है। यह किस्म 75-90 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 4-5.2 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
ML 1 : यह मध्यम समय की किस्म पंजाब और हरियाणा राज्यों में बोने के लिए उपयुक्त है। यह 90 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 3-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Type 1 : यह जल्दी पकने वाली किस्म है। यह किस्म 60-65 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह किस्म हरी खाद और दानों के उद्देश्य से उगाने के लिए उपयुक्त है। इसकी औसतन पैदावार 2.4-3.6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
PusaBaisakhi : यह किस्म 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 3.2-4 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Mohini : यह किस्म 60-70 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह किस्म पीले चितकबरे रोग और सरकोस्पोरा पत्तों के धब्बा रोगों को सहनेयोग्य है। इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
PS 16 : यह पूरे देश में खेती करने के लिए उपयुक्त किस्म है। यह 60-65 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 4-4.8 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।