कृषि
जलवायु
-
Temperature
25-30°C -
Rainfall
460-650mm
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Temperature
25-30°C -
Rainfall
460-650mm
मिट्टी
इसकी खेती मिट्टी की व्यापक श्रेणी में की जा सकती है। यह अच्छे निकास वाली और मिट्टी में हवादार उगाने पर अच्छे परिणाम देती है। मिट्टी की पी एच 5 से 8 होनी चाहिए। पौधा अम्लीय और खारी मिट्टी को भी सहनेयोग्य है। भारी और जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें। कम उपजाऊ वाली मिट्टी में भी इसकी खेती की जा सकती है। उपोष्णकटिबंधीय तटवर्ती भी जोजोबा की खेती के लिए उपयुक्त होते हैं।
ज़मीन की तैयारी
खेत की 2-3 बार जोताई करें, फिर तवियों से जोताई करें, डलियों को तोड़ें और मिट्टी को भुरभुरा करें। खेत को नदीन रहित बनाएं ताकि पानी और खादों का प्रयोग कम हो। तेज हवा के नुकसान से बचाव के लिए उत्तर-दक्षिण दिशा में कतारें बनायें।
बिजाई
बीज
बीज की मात्रा
एक एकड़ खेत में नए पौधों के लिए 2-2.4 किलोग्राम ताजे बीजों की आवश्यकता होती है।
बीज का उपचार
बिजाई से पहले बीजों को गर्म या ताजे पानी में 8-10 घंटे के लिए डुबोया जाता है। उसके बाद कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 3-5 मिनट के लिए बीजों का उपचार किया जाता है और फिर बीजों को हवा में सुखाने के बाद बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है।
पनीरी की देख-रेख और रोपण
अंतर-फसलें
बिजाई के शुरूआती वर्षों के दौरान, अतिरिक्त आय प्राप्त करने के लिए अंतरफसली भी अपनाई जा सकती है। छोटे कद वाली फसलों को ज्यादा खाद और पानी की आवश्यकता नहीं होती और रेगिस्तान में उगाने के लिए भी उपयुक्त होती हैं इसलिए इन्हें अंतरफसली के रूप में भी लिया जा सकता है। मोठ, चने, हरी मूंग, इमली, मूंगफली और ककड़ी परिवार से संबंधित सब्जियां आदि को जोजोबा के साथ अंतरफसली के तौर पर सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है।
खाद
खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
| UREA | SSP | MOP |
| 65 | 95 | 50 |
तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)
| NITROGEN | PHOSPHORUS |
POTASH |
| 30 | 15 | 30 |
पहले वर्ष में नाइट्रोजन 30 किलो (यूरिया 65 किलो), फासफोरस 15 किलो (एस एस पी 95 किलो) और पोटाश 30 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 50 किलो) प्रति एकड़ में डालें। पौधे की वृद्धि और विकास के साथ खादों की मात्रा बढ़ाकर नाइट्रोजन और पोटाश 6 किलो प्रति एकड़ में और फासफोरस 4 किलो प्रति एकड़ में डालें। खादों को दो भागों में आधी खाद की मात्रा जुलाई-अगस्त में और दूसरी मात्रा फरवरी महीने में डालें।
सिंचाई
कटाई और छंटाई
जून और जुलाई में कटाई के बाद, अच्छी उत्पादकता के लिए टहनियों और शाखाओं में हल्की छंटाई हर साल करें।
पौधे की देखभाल
- हानिकारक कीट और रोकथाम
फसल की कटाई
यह बिजाई के चौथे वर्ष से लेकर 150 वर्षों तक उपज देता है। तुड़ाई हाथों से ही की जाती है। पके फलों की तुड़ाई हाथों से की जाती है। सभी फल एक समय पर परिपक्व नहीं होते इसलिए फलों के पकने पर ही तुड़ाई की जाती है।
कटाई के बाद
जोजोबा के पूरे फल में 36 प्रतिशत छिल्का, 64 प्रतिशत बीज और 50 प्रतिशत तेल होता है। पके फलों की तुड़ाई के बाद, फलों के ऊपर से रेत/मिट्टी, पत्थर, मिट्टी की गीली परत, छोटी टहनियां और पत्तों को हटा दें। बीजों को साफ करें और धूप में सुखाएं और पी सी सी के सूखे फर्श पर रखें।
