जलवायु
-
Temperature
30-34°C (max)22-25°C (min) -
Rainfall
100cm -
Sowing Temperature
25-30°C -
Harvesting Temperature
37-40°C
इसको फिंगर बाजरा, अफ्रीकन रागी, लाल बाजरा आदि के नाम से भी जाना जाता है| यह सबसे पुरानी खाने वाली और पहली अनाज की फसल है, जो घरेलू स्तर पर प्रयोग की जाती है| इसका असली मूल स्थान इथिओपीआई उच्च ज़मीन है और यह भारत में लगभग 4000 साल पहले लायी गई थी| इसको शुष्क मौसम में उगाया जा सकता है| यह गंभीर सूखे को भी सहन कर सकती है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी उगाई जा सकती है| यह कम समय वाली फसल है और इसकी कटाई 65 दिनों में की जा सकती है| इसको बड़ी आसानी के साथ सारा साल उगाया जा सकता है| सारे बाजरे वाली फसलों में से यह सबसे ज्यादा उगाई जाने वाली फसल है| बाकी अनाज और बाजरे वाली फसलों के मुकाबले इसमें प्रोटीन और खनिजों की मात्रा ज्यादा होती है| इसमें महत्वपूर्ण अमीनो एसिडभी पाया जाता है| इसमें कैल्शियम(344 मि.ग्रा.) और पोटाशियम(408 मि.ग्रा.) की भरपूर मात्रा होती है| कम हीमोग्लोबिन वाले व्यक्ति के लिए यह बहुत लाभदायक है, क्योंकि इसमें लोह तत्वों की काफी मात्रा होती है|
इसको बहुत किस्म की मिट्टी में उगाया जा सकता है, जैसे कि बढ़िया दोमट से जैविक तत्वों वाली कम उपजाऊ पहाड़ी मिट्टी आदि| इसको बढ़िया निकास वाली काली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है, क्योंकि यह जल जमाव को काफी हद तक सहन कर सकती है| रागी के लिए pH 4.5-8 वाली मिट्टी सबसे बढ़िया मानी जाती है| पानी सोखने वाली मिट्टी को इसकी खेती के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता है|
| फंगसनाशी/कीटनाशी दवाई | मात्रा (प्रति किलोग्राम बीज) |
| Thiram | 4gm |
| Captan | 4gm |
| Carbendazim | 2gm |
जैसे कि रागी की फसल बारिश की ऋतु की फसल है, इसलिए इसको सिंचाई की जरूरत नहीं होती है पर जोताई और फूल निकलने के समय, अगर बारिश लम्बे समय तक ना हो तो पौधे के बढ़िया विकास के लिए और पैदावार के लिए सिंचाई जरूरी है| सिंचाई और निकास के लिए मेंड़ और खालियां तैयार करें| यह फसल पानी के जमा होने को सहन कर सकती है, इसलिए जरूरत ना होने वाले पानी को निकालने के लिए पूरी सुरक्षा रखें|
| सिंचाई की संख्या | सिंचाई का फासला |
| पहली सिंचाई | बिजाई से तुरंत बाद |
| दूसरी सिंचाई | बिजाई से 3 दिन बाद |
| तीसरी सिंचाई | बिजाई से 7 दिन बाद |
| चौथी सिंचाई | बिजाई से 12 दिन बाद |
| पांचवी सिंचाई | बिजाई से 18 दिन बाद |
खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
| UREA | SSP |
MOP |
| 33 | 54 | 10 |
| NITROGEN | PHOSPHORUS | POTASH |
| 16 | 8 | 8 |
बिजाई से एक महीना पहले 3-5 टन रूड़ी की खाद डालें| रागी की फसल खादें डालने के साथ, खास रूप से नाइट्रोजन और फासफोरस के साथ उत्तेजित होती है| मिट्टी में आवश्यक खादों की कमी को जानने के लिए मिट्टी का टैस्ट करें| अगर मिट्टी का टैस्ट उपलब्ध ना हो तो, 25:12:8 किलो प्रति एकड़ में डालें| फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें| बाकी की बची हुई नाइट्रोजन की मात्रा दो से तीन हिस्सों में (बिजाई से 30 और 50 दिन बाद) मिट्टी की नमी के अनुसार डालें|
आमतौर पर फसल 120-135 दिनों में पक जाती है, पर इसका समय प्रयोग की जाने वाली किस्म पर निर्भर करता है| कटाई दो बार की जानी चाहिए, बालियों को दराती के साथ काट लें और पौधे के बाकी हिस्से को ज़मीन के साथ में से काट लें| बालियों का ढेर बनाकर धुप में 3-4 दिनों के लिए सुखाएं| अच्छी तरह सुखाने के बाद थ्रेशिंग करें| कुछ जगह पर पूरा पौधा बालियों समेत काट लिया जाता है और फिर धूप में 2-3 दिन सुखाने के बाद थ्रेशिंग कर ली जाती है|
रागी का प्रयोग शराब के कच्चे माल, बच्चो के भोजन, दूध गहरा बनाने के लिए और दूध वाली बिवरेज़ बनाने के रूप में प्रयोग किया जाता है| देश के कुछ हिस्सों में उबालु ड्रिंक या बियर भी इसी से तैयार की जाती है|
You have successfully login.
Your email and password is incorrect!