Sankar Ganga Safed 2: यह सफेद बीजों वाली किस्म है। इसके पौधे की लंबाई 170-200 सैं.मी. होती है। यह किस्म 115-120 दिनों में पकती है और इसकी औसतन पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसके बीजों में 10 प्रतिशत प्रोटीन होता है।
Sankar Ganga 5: यह पीले बीजों वाली किस्म है। इसके पौधे की लंबाई 170-180 सैं.मी. होती है। यह किस्म 100-115 दिनों में पकती है और इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसके बीजों में 10-11 प्रतिशत प्रोटीन की मात्रा होती है।
Sankul Ageti 76: यह पीले बीजों वाली किस्म है। इसके पौधे की लंबाई 150-185 सैं.मी. होती है। यह किस्म 85-95 दिनों में पकती है और इसकी औसतन पैदावार 12-15 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसकी खेती बारानी क्षेत्रों में की जाती है।
Sankul Navjot (J-684): यह जल्दी पकने वाली पीले बीजों वाली किस्म है। यह किस्म 85 दिनों में पकती है और इसकी औसतन पैदावार 12-15 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसकी खेती बारानी क्षेत्रों में की जाती है। इसकी खेती बारानी क्षेत्रों में करने से अच्छी अपज देती है।
P.E.H.M.-2: यह जल्दी पकने वाली संकर मक्की की किस्म है। यह किस्म 80-90 दिनों में पकती है और इसकी औसतन पैदावार 18-19 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह पीले बीजों की किस्म है। (22 ग्राम भार प्रति 100 ग्राम बीज)
Pratap Sankar Maize 1: यह जल्दी पकने वाली किस्म 80-85 दिनों में पक जाती है । यह सफेद बीजों वाली किस्म (23-24ग्राम प्रति 100 बीज) है। इसकी औसतन पैदावार 12-14 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Pratap Maize 3: यह संकुल किस्म है। यह किस्म 80-85 दिनों में पकती है और इसकी औसतन पैदावार 10-11 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह सफेद बीजों वाली किस्म है, जिनका 22-23 ग्राम भार प्रति 100 बीज होता है। यह किस्म कम बारानी क्षेत्रों में उगाने के लिए उपयुक्त है।
Pratap Maize 5 : यह मध्यम पकने वाली किस्म है जो कि 90-95 दिनों में पक जाती है। यह संकुल मक्की की किस्म है। जो कि औसतन पैदावार 14-16 क्विंटल प्रति एकड़ देती है। यह सफेद बीजों वाली किस्म है इसका 25 ग्राम भार प्रति 100 बीज होता है।
Pratap QPM Sankar 1: यह मध्यम कद की किस्म (195-230 सैं.मी) है जो कि 85-90 दिनों में पक जाती है और इसकी औसतन पैदावार 24-25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसके बीजों में उच्च गुणवत्ता वाली प्रोटीन (8.87 प्रतिशत), लाईसिन (2.50 प्रतिशत) और ट्रिप्टोफेन (0.66 प्रतिशत) पाया जाता है।
दूसरे राज्यों की किस्में
PMH 1: यह किस्म सभी राज्यों में सिंचित स्थितियों में खरीफ/बसंत और गर्मियों के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है। यह लम्बे समय की किस्म है जो कि 95 दिनों में पकती है। इसका तना मजबूत और जामुनी रंग का होता है। इसकी औसतन उपज 21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Prabhat : यह लंबे समय की किस्म है। यह किस्म सभी राज्यों में सिंचित स्थितियों में खरीफ/बसंत और गर्मियों के मौसम में उगाने के लिए उपयुक्त है। इसका पौधा मध्यम कद का, मध्यम मोटा तना और गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है। यह किस्म 95 दिनों में पक जाती है। इसकी औसतन पैदावार 17.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Kesri : यह मध्यम समय की किस्म है, जो 85 दिनों में पकती है। इसके दाने संतरी रंग के होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
PMH-2 : यह कम समय की किस्म है, जो 83 दिनों में पकती है। इसकी खेती बारानी क्षेत्रों के साथ साथ सिंचित क्षेत्रों में की जा सकती है। यह हाइब्रिड किस्म सूखे को सहनेयोग्य है। इसकी बलियां मध्यम लंबी और संतरी रंग के दाने होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 16.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
JH 3459 : यह छोटे समय की किस्म है, जो 84 दिनों में पकती है। यह सूखे और गर्दन तोड़ को सहनेयोग्य है। इसके दाने संतरी रंग के दाने होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 17.5 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Prakash : यह सूखे को सहने योग्य, जल्दी पकने वाली (82 दिनों) हाइब्रिड किस्म है। इसकी औसतन पैदावार 15-17 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Megha : यह छोटे समय की किस्म है। 82 दिनों में पक जाती है। इसके पीले संतरी रंग के दाने होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Pratap Makka Chari 6: यह किस्म MPUA&T, उदयपुर द्वारा विकसित की गई है। यह मध्यम लंबी किस्म है। इसका तना मजबूत, मध्यम मोटा और गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है। यह 90-95 दिनों में पक जाती है। इसके हरे चारे की पैदावार 187-200 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
PEEHM 5 : यह मक्का की अगेती हाइब्रिड किस्म है। यह ज्यादा तापमान को सहनेयोग्य है। यह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है। इसकी औसतन पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
HQPM-1 Hybrid : यह हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है। इसकी औसतन पैदावार 25 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह पत्तों के झुलस रोग जैसे एम एल बी और टी एल बी की प्रतिरोधक किस्म है।