PRC 1: यह किस्म 2008 में जारी की गई है। पौधा 110-125 सैं.मी. कद प्राप्त करता है। यह किस्म 70-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके दाने सुनहरे रंग के होते हैं। यह किस्म पत्तों के झुलस रोग के प्रतिरोधी है। इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
SiA 36: यह किस्म 1995 में जारी की गई है। पौधा 110 सैं.मी. कद प्राप्त करता है। यह किस्म 72-75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके दाने हल्के पीले रंग के होते हैं। यह किस्म कुछ हद तक पत्तों के निचले धब्बा रोग को सहनेयोग्य है। इसकी औसतन पैदावार 6-7 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Arjun: यह राष्ट्रीय अनुमोदित किस्म है। इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ और सूखे चारे की औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म 80-85 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसका पौधा 90-95 सैं.मी. कद प्राप्त करता है।
SiA 326: यह राष्ट्रीय अनुमोदित किस्म है। इसकी औसतन पैदावार 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ और यह किस्म 75-80 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसका पौधा 85-90 सैं.मी. कद प्राप्त करता है। इसके सूखे चारे की उपज 12-17 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसका सिट्टा 11-13 सैं.मी. लंबा होता है।
Gavri (RS 11) (1995): यह किस्म राजस्थान के लिए हाल ही में अनुमोदित हुई है। यह 6-7 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार देती है और सूखे चारे की पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति एकड़ देती है। यह किस्म 75-80 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसके पौधे का कद 125 सैं.मी. कद होता है। इसका सिट्टा 11-13 सैं.मी. लंबा होता है।
Meera (RS 16) (2000): इसका पौधा मध्यम आकार का होता है। पौधे का कद 105 सैं.मी. होता है। यह 6-7 क्विंटल प्रति एकड़ बीजों की उपज देती है और सूखे चारे की उपज 19-20 क्विंटल प्रति एकड़ देती है। यह किस्म 75-80 दिनों में पक जाती है। इसके बीज क्रीम रंग के होते हैं।
Pratatp kangni (SR 51) (2004): इसकी किस्म लंबे कद की होती है। पौधे का कद 110-130 सैं.मी. होता है। यह जल्दी पकने वाली किस्म है जो 62-68 दिनों में पक जाती है। इसके बीजों की औसतन पैदावार 6-7 क्विंटल प्रति एकड़ और सूखे चारे की पैदावार 19-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
दूसरी नयी किस्में : Prasad, Krishnadevaraya, Narasimharaya, Srilakshmi, Si A 3085, Si A 3156 और Suryanandini (Si A 3088) किस्में भी कांगणी की जारी की गई नयी किस्में हैं।