कांगणी की खेती

आम जानकारी

कांगणी को भारतीय बाजरा, जर्मन बाजरा, इटालियन बाजरा, सिबेरियन बाजरा और कांगणी ब्रिस्टल घास के नाम से भी जाना जाता है। यह वार्षिक और गर्म मौसम की फसल है। पौधे का कद 2-5 फुट (60-152 सैं.मी.) होता है। इसका तना मोटा और पत्तेदार होता है। इसके दाने मध्य में से मोटे, विभिन्न रंगों जैसे हल्के पीले से भूरे रंग के, जंगी और काले होते हैं। इसे भारत, चीन, रूस, संयुक्त राज्य और अफ्रीका में उगाया जाता है। इसे मुख्य रूप से उच्च गुणवत्ता के हरे चारे, सूखे घास के रूप में प्रयोग किया जाता है।

मिट्टी

इसे अच्छी रेतली से दोमट मिट्टी में उगाया जाता है। मिट्टी की 5.5-7 पी एच की आवश्यकता होती है।

प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

PRC 1: यह किस्म 2008 में जारी की गई है। पौधा 110-125 सैं.मी. कद प्राप्त करता है। यह किस्म 70-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके दाने सुनहरे रंग के होते हैं। यह किस्म पत्तों के झुलस रोग के प्रतिरोधी है। इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
SiA 36: यह किस्म 1995 में जारी की गई है। पौधा 110 सैं.मी. कद प्राप्त करता है। यह किस्म 72-75 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके दाने हल्के पीले रंग के होते हैं। यह किस्म कुछ हद तक पत्तों के निचले धब्बा रोग को सहनेयोग्य है। इसकी औसतन पैदावार 6-7 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
 
Arjun: यह राष्ट्रीय अनुमोदित किस्म है। इसकी औसतन पैदावार 5-6 क्विंटल प्रति एकड़ और सूखे चारे की औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म 80-85 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसका पौधा 90-95 सैं.मी. कद प्राप्त करता है।

SiA 326: यह राष्ट्रीय अनुमोदित किस्म है। इसकी औसतन पैदावार 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ और यह किस्म 75-80 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसका पौधा 85-90 सैं.मी. कद प्राप्त करता है। इसके सूखे चारे की उपज 12-17 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसका सिट्टा 11-13 सैं.मी. लंबा होता है।
 
Gavri (RS 11) (1995): यह किस्म राजस्थान के लिए हाल ही में अनुमोदित हुई है। यह 6-7 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार देती है और सूखे चारे की पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति एकड़ देती है। यह किस्म 75-80 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसके पौधे का कद 125 सैं.मी. कद होता है। इसका सिट्टा 11-13 सैं.मी. लंबा होता है।

Meera (RS 16) (2000): इसका पौधा मध्यम आकार का होता है। पौधे का कद 105 सैं.मी. होता है। यह 6-7 क्विंटल प्रति एकड़ बीजों की उपज देती है और सूखे चारे की उपज 19-20 क्विंटल प्रति एकड़ देती है। यह किस्म 75-80 दिनों में पक जाती है। इसके बीज क्रीम रंग के होते हैं।

Pratatp kangni (SR 51) (2004): इसकी किस्म लंबे कद की होती है। पौधे का कद 110-130 सैं.मी. होता है। यह जल्दी पकने वाली किस्म है जो 62-68 दिनों में पक जाती है। इसके बीजों की औसतन पैदावार 6-7 क्विंटल प्रति एकड़ और सूखे चारे की पैदावार 19-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। 

दूसरी नयी किस्में :   Prasad, Krishnadevaraya, Narasimharaya, Srilakshmi, Si A 3085, Si A 3156 और Suryanandini (Si A 3088) किस्में भी कांगणी की जारी की गई नयी किस्में हैं। 
 

ज़मीन की तैयारी

कांगणी की खेती के लिए अच्छी तरह से जोतकर खेत को तैयार किया जाता है। मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा बनाने के लिए हलों से ज़मीन की गहरी जोताई करें और 2-3 बार तवियों से जोताई करें।

बिजाई

बिजाई का समय
बीजों को जून के आखिरी सप्ताह से मध्य जुलाई में बोयें।
 
फासला
कतारों में 25 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें।
 
बीज की गहराई
बीजों को 3 सैं.मी. की गहराई में बोयें।
 
बिजाई का ढंग
कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग किया जाता है।
 

बीज

बीज की मात्रा
3-4 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें।

बीज का उपचार
फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए कार्बेनडाज़िम 3 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें।
 

खाद

खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)

UREA SSP MOP
35 50 -

 

तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)

NITROGEN PHOSPHORUS POTASH
16 8 -

 

नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें और बाकी की मात्रा को गोडाई के समय डालें।

 

 

सिंचाई

फसल की पानी की आवश्यकता बारिश के द्वारा पूरी हो जाती है। मैदानों खेतों में 40-45 सैं.मी. के फासले पर गहरी खालियां बनाएं ताकि खेतों में से अनआवश्यक पानी को निकाला जा सके।

खरपतवार नियंत्रण

अच्छी उपज के लिए बिजाई के 30-40 दिन बाद गोडाई करें।

पौधे की देखभाल

भुरड़ रोग
  • बीमारियां और रोकथाम
झुलस, जंग और भूरे धब्बे : यदि इनका हमला फसल की शुरूआती अवस्था में दिखे तो इस बीमारी से बचाव के लिए मैनकोजेब 0.2 प्रतिशत की स्प्रे करें।
 
दानों का गलना
दानों का गलना : इस बीमारी से बचाव के लिए बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम में प्रति किलो बीजों को भिगोयें।
 
पत्तों के निचले धब्बे
पत्तों के निचले धब्बे : इस बीमारी से बचाव के लिए बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम में प्रति किलो बीजों को भिगोयें और मैनकोजेब को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें।
सैनिक सुंडी
  • हानिकारक कीट और रोकथाम
सैनिक सुंडी, कुतरा सुंडी और पत्ते खाने वाली सुंडी : यदि इन कीटों का हमला दिखे तो मैनकोजेब 5 प्रतिशत 1.3-1.6 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें।
 

फसल की कटाई

मुख्य रूप से सूखे चारे के लिए कटाई 65-70 दिनों में और दानों के लिए 75-90 दिनों में की जाती है। यह हरे चारे की औसतन पैदावार 6000-8000 किलो प्रति एकड़ और सूखे चारे की 1250-1600 किलो प्रति एकड़ दानों की 330-375 किलो प्रति एकड़ पैदावार देती है।