Raj 1482: इस किस्म का गहरे हरे रंग का पौधा, जिसका कद 80-90 सैं.मी. होता है। इसकी अधिक फलियां, मोटे दाने, चमकदार और हल्के रंग के दाने होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व होती है। इसका मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है।
PBW 502: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के अनुकूल है। पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है। यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह करनाल बंट के प्रतिरोधी है। इसकी औसतन पैदावार 18-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
PBW 550: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है। यह किस्म 128-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके दाने मोटे सुनहरे पीले रंग के होते हैं। इसके 1000 दानों का भार लगभग 38 ग्राम होता है। इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
HD 2697: पौधे का कद 83-91 सैं.मी. होता है। यह किस्म 128-133 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। भारी ज़मीनें इस किस्म की खेती के लिए अच्छी रहती हैं। इसके दाने मोटे सुनहरे रंग के होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 18-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Raj 6560: यह किस्म सिंचित क्षेत्रों में उगाने के लिए अनुकूल है। पौधे का कद 90-100 सैं.मी. होता है। यह किस्म 130-135 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 18-22 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Raj 3077: इस किस्म को वंडर गेहूं के नाम से जाना जाता है। पौधे का कद 115-118 सैं.मी. होता है। इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म 126-134 दिनों में परिपक्व हो जाती है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए किया जाता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12.5 प्रतिशत होती है।
Raj 4079: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके पौधे का कद 75-80 सैं.मी. होता है। यह सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है। यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी किस्म है। इसकी औसतन पैदावार 19-21 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं। यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है।
Raj 4037: इसके पौधे का कद 83-95 सैं.मी. होता है। इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म 120 दिनों में परिपक्व हो जाती है। यह मुख्य रूप से ब्रैड बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 11-12 प्रतिशत होती है। यह किस्म काली जंग और तने पर जंग के प्रतिरोधी है।
Raj 4120: यह किस्म 110-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके पौधे का कद 80-94 सैं.मी. होता है। यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है। इसका तना मजबूत होता है और गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी होता है। इसकी औसतन पैदावार 20-24 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म राजस्थान के गर्म जलवायु को सहने योग्य किस्म है और अच्छी उपज देती है।
DBW 17: इसके पौधे का कद 80-85 सैं.मी. होता है। यह किस्म 130-132 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है। इसका तना मजबूत होता है जो कि यह दर्शाता है कि यह गर्दन तोड़ के प्रतिरोधी है। इसके दाने मोटे, मध्यम आकार के और सख्त होते हैं। यह किस्म सामान्य और सिंचित हालातों में अच्छे परिणाम देती है। इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Raj 4238: यह किस्म 115-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके पौधे का कद 82-86 सैं.मी. होती है। इसका तना मजबूत होता है जो कि फसल को गर्दन तोड़ से बचाता है। यह करनाल बंट के प्रतिरोधी किस्म है। इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं और औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
WH 1080: यह किस्म 127-133 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके पौधे का कद 85-101 सैं.मी. होती है। सिंचित हालातों में यह 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ उपज देती है। इसके दाने सुनहरे, मध्यम मोटे और सख्त होते हैं।
PBW 175: यह किस्म 130-132 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके पौधे का कद 15-16 सैं.मी. होता है। इसके दाने सुनहरे, मध्यम मोटे और सख्त होते हैं। इसकी औसतन पैदावार 15-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
CCNNRVOI (Raj Molya Rodhak-1: यह सिंचित हालातों में समय पर बोने के लिए उपयुक्त किस्म है। इसके पौधे का कद 84 सैं.मी. होता है। इसके दाने सुनहरे, मध्यम सख्त और गोल आकार के होते हैं। यह किस्म 120-125 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 15-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। यह किस्म नेमाटोड से प्रभावित क्षेत्रों में प्रसिद्ध है।
पिछेती बिजाई की किस्में
Raj 3765: यह किस्म दिसंबर से मध्य जनवरी के तीसरे सप्ताह में बोयी जा सकती है। इसके पौधे का कद 85-95 सैं.मी. होता है। यह किस्म 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसतन पैदावार 16-20 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
Raj 3777: यह किस्म 90-95 दिनों में परिपक्व हो जाती है। यह किस्म मध्य नवरी में बोने के लिए अनुकूल है। इसकी औसतन पैदावार 14-16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है।
रेतली मिट्टी वाली किस्में
इन किस्मों की वृद्धि के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है।
C 306: यह किस्म बंजर भूमि में उगाने के लिए प्रयोग की जाती है और इसे कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसका पौधे लंबे कद के होते हैं। इसके मध्यम आकार के दाने और रंग में सुनहरे होते हैं। इसकी औसतन उपज 14-16 प्रति एकड़ होती है।
P.B.W. 299: इसके पौधे का कद 95 सैं.मी. होता है। यह किस्म 150-160 दिनों में परिपक्व हो जाती है और इस किस्म की अगेती बिजाई की जाती है। इसकी औसतन पैदावार 16-18 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। इन किस्मों के साथ PBW 396 और WH 147 की भी खेती की जाती है।
क्षारीय मिट्टी की किस्में
क्षारीय क्षेत्रों में Raj 3077, K.R.L 1-4 और WH 157 जैसी किस्मों का प्रयोग करें, ये अच्छी उपज देती हैं।
दूसरे राज्यों की किस्में
RAJ-3765: यह किस्म 120-125 दिनों में पक जाती है। यह किस्म गर्मी को सहने योग्य, धारी जंग, भूरी जंग और करनाल बंट के प्रतिरोधी हैं इसकी औसत पैदावार 21 क्विंटल प्रति एकड़ है।
UP-2338: यह किस्म 130 से 135 दिनों में पकती है। इसके दाने सख्त, रंग शरबती और मध्यम आकार के होते हैं। यह किस्म सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। उसकी औसत उपज 20-22 क्विंटल प्रति एकड़ है।
UP-2328:यह किस्म 130 से 135 दिनों में पकती है। इसके दाने सख्त, रंग शरबती और मध्यम आकार के होते हैं। यह किस्म सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयंक्त है। असकी औसत उपज 20-22 क्विंटल प्रति एकड़ है।
Sonalika: यह एक जल्दी पकने वाली, छोटे कद वाली गेहूं की किस्म है। जो कि बहुत सारे हालातों के अनुकूल है। इसके दाने सुनहरी होते हैं। इसकी बुवाई पिछेती की जा सकती है। और यह फंगस की बीमारियों से रहित होती है।
Kalyansona: यह गेहूं की बहुत छोटे कद वाली किस्म है जो कि बहुत सारे हालातों के अनुकूल होती है। और पूरे भारत में इसको बीजने की सलाह दी जाती है। इसे बहुत जल्दी फंगस की बीमारी लगती है।इसलिए इसे फंगस रहित क्षेत्रों में बीजने की सलाह दी जाती है।
UP-(368): अधिक पैदावार वाली इस किस्म को पंतनगर द्वारा विकसित किया गया है। यह फंगस और पीलेपन की और बीमारियों से रहित होती है।
WL-(711): यह छोटे कद और अधिक पैदावार वाली और कम समय में पकने वाली किस्म है। यह कुछ हद तक सफेद धब्बे ओर पीलेपन की बीमारी से रहित होती है।
UP-(319): यह बहुत ज्यादा छोटे कद वाली गेहूं की किस्म है, जिसमें फंगस/उल्ली के प्रति प्रतिरोधकता काफी हद तक पाई जाती है। दानों को टूटने से बचाने के लिए इसकी समय से कटाई कर लेनी चाहिए।
देर से बोई जाने वाली किस्में
HD-2851, HD-2932, RAJ-3765, PBW-373, UP-2338, WH-306, 1025
PBW 590: यह किस्म पंजाब के सभी क्षेत्रों में उगाई जाती है। यह 128 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह किस्म पीले और भूरी जंग रोगों के लिए प्रतिरोधी किस्म है। इसका औसतन कद 80 सैं.मी. होता है।
PBW 509: यह किस्म पंजाब के उप पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सारे क्षेत्रों में उगाई जाती है। यह 130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह किस्म पीले और भूरी जंग रोगों के लिए प्रतिरोधी किस्म है। इसका औसतन कद 85 सैं.मी. होता है।
PBW 373: यह किस्म पंजाब के सभी क्षेत्रों में उगाई जाती है। यह 130 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह किस्म भूरी जंग की बीमारी के प्रतिरोधी है। इस किस्म का औसतन कद 90 सैं.मी. होता है।