पौधे की देखभाल
- हानिकारक कीट और रोकथाम
सब्जी के तौर पर उपयोग के लिए इस फसल की कटाई बिजाई के 20-25 दिनों के बाद करें। बीज प्राप्त करने के लिए इसकी कटाई बिजाई के 90-100 दिनों के बाद करें। दानों के लिए इसकी कटाई निचले पत्तों के पीले होने और झड़ने पर और फलियों के पीले रंग के होने पर करें। कटाई के लिए दरांती का प्रयोग करें।
कटाई के बाद फसल की गठरी बनाकर बांध लें और 6-7 दिन सूरज की रोशनी में रखें। अच्छी तरह से सूखने पर इसकी छंटाई करें, फिर सफाई करके ग्रेडिंग करें। उसके बाद दानों को बैग में भरा जाता है।
मेथी का मूल दक्षिण यूरोप है। एशिया में इसके पत्ते सब्जी के तौर पर और बीज स्वाद बढ़ाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। इसके पीसे हुए बीजों की चाय के औषधिय गुण हैं, मेथी रक्तचाप और कोलैस्ट्रोल को कम करने में सहायक होते हैं। इसे चारे के तौर पर भी प्रयोग किया जाता है। भारत में राज्यस्थान मुख्य मेथी उत्पादक राज्य है। मध्य प्रदेश, तामिलनाडू, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और पंजाब अन्य मेथी उत्पादक राज्य हैं। सिकर, पाली, नागपुर, अलवर, उदयपुर, कोटा, बुंदी और जाहलावर राजस्थान के मुख्य मेथी उत्पादक जिले हैं।
इसे सभी प्रकार की मिट्टी जिनमें कार्बनिक पदार्थ उच्च मात्रा में हो, उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली बालुई और रेतली बालुई मिट्टी में अच्छे परिणाम देती है। यह मिट्टी की 5.3 से 8.2 पी एच को सहन कर सकती है।
मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो - तीन बार जोताई करें उसके बाद सुहागे की सहायता से ज़मीन को समतल करें। आखिरी जोताई के समय 8-10 टन प्रति एकड़ अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद डालें। बिजाई के लिए 3x2 मीटर समतल बीज बैड तैयार करें।
| फंगसनाशी/कीटनाशी दवाई | मात्रा (प्रति किलोग्राम बीज) |
| Carbendazim | 3gm |
| Thiram | 4gm |
खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)
| UREA | SSP | MOP |
| 12 | 100 | - |
तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)
| NITROGEN | PHOSPHORUS | POTASH |
| 5 | 16 | - |
अच्छी वृद्धि के लिए आमतौर पर पांच से सात सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। बिजाई के बाद 30वें दिन, 70-75वें दिन, 85-90वें दिन और 105-110वें दिन सिंचाई करें। फली के विकास और बीज के विकास के समय पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए क्योंकि इससे पैदावार में भारी नुकसान होता है।
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