ग्लेडियोलस की फसल

आम जानकारी

ग्लेडियोलस के फूलों को सारे विश्व के लोग बहुत पसंद करते हैं|यह एक सदाबाहार फूल का पौधा है जिसके पत्ते तलवार जैसे,फूल का बहरी हिस्सा चिमनी के जैसे मुड़े हुए और  शाखाएं चम्मच की तरह होती है| इसके फूल अक्तूबर-मार्च के महीने में खिलते हैं|इससे कई प्रकार के फूल बनते हैंजैसे गुलाबी से लाल, हल्के जामुनी से सफेद, सफेद से क्रीम और संतरी से लाल आदि| यह कई बीमारीयों जैसे ज़ुकाम, दस्त, फफूंद संक्रमण और गर्दन तोड़ बुखार आदि के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है| भारत में पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र आदि मुख्य उत्पादन क्षेत्र है|

जलवायु

  • Season

    Temperature

    25-30°C

मिट्टी

यह फसल बढ़िया उपजाऊ और पानी के अच्छे निकास में बढ़िया परिणाम देती है| चिपकने वाली और तेज़ाबी मिट्टी में इसकी खेती ना करें और खेत में पानी खड़ा ना होने दें|

प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

White prosperity: यह किस्म 110-120 दिनों में पक जाती है| इसकी 75 सैं.मी. की डंडी पर 17 छोटे फूल गुच्छों में लगते हैं।

Nova Lux: यह किस्म 110-120 दिनों में पक जाती है| डंडी की लंबाई 79 सैं.मी. होती है जिस पर पीले रंग के फूलों का उत्पादन होता है। प्रत्येक पौधा लगभग 47 गांठे तैयार करता है।

Urovian: यह किस्म 110-120 दिनों में पक जाती है| इसकी 84 सैं.मी. की डंडी पर 16 लाल छोटे फूल गुच्छों में लगते हैं।

Golden Melody: यह किस्म 90-100 दिनों में पक जाती है| इसकी 87 सैं.मी. की डंडी पर 15 छोटे फूल गुच्छों में लगते हैं। प्रत्येक पौधा लगभग 67 गांठे तैयार करता है। इसके किस्म हल्के पीले रंग के फूल होते हैं।

Snow Princess: यह किस्म 80-90 दिनों में पक जाती है| इसकी 65 सैं.मी. की डंडी पर 11-14 छोटे फूल गुच्छों में लगते हैं। प्रत्येक पौधा लगभग 15 गांठे तैयार करता है। यह किस्म सफेद रंग के फूल तैयार करती है|

Silvia: यह किस्म 120 दिनों में पक जाती है| इसकी 75 सैं.मी. की डंडी पर 13-15 छोटे फूल गुच्छों में लगते हैं। प्रत्येक पौधा लगभग 15 गांठे तैयार करता है। यह किस्म सुनहरे पीले रंग के फूल तैयार करती है|

Sansray: यह किस्म 120 दिनों में पक जाती है| इसकी 75.5 सैं.मी. की डंडी पर 15-17 छोटे फूल गुच्छों में लगते हैं। प्रत्येक पौधा लगभग 91 गांठे तैयार करता है। यह किस्म सफेद रंग के फूल तैयार करती है|

Suchitra: यह किस्म 90-95 दिनों में पक जाती है| इसकी 83 सैं.मी. की डंडी पर 15-16 छोटे फूल गुच्छों में लगते हैं। प्रत्येक पौधा लगभग 85 गांठे तैयार करता है। यह किस्म गुलाबी रंग के फूल तैयार करती है|

Mayur: यह किस्म 100-110 दिनों में पक जाती है| है। इसकी 76.6 सैं.मी. की डंडी पर 14-16 छोटे फूल गुच्छों में लगते हैं। प्रत्येक पौधा लगभग 88 गांठे तैयार करता है। यह किस्म जामुनी रंग के फूल तैयार करती है|

Punjab Pink Elegance: इस किस्म की डंडियां सजावट के उद्देश्य से उपयोग की जाती हैं। यह किस्म 86 दिनों में तैयार हो जाती है। प्रत्येक पौधा लगभग 39 छोटे आकार की गांठे तैयार करता है। यह किस्म हल्के गुलाबी रंग के फूल तैयार करती है और इसकी डंडी लंबी होती है।

Punjab flame: इस किस्म की डंडियां सजावट के उद्देश्य से उपयोग की जाती हैं। यह किस्म 114 दिनों में तैयार हो जाती है। प्रत्येक पौधा लगभग 60 छोटे आकार की गांठे तैयार करता है। यह किस्म हल्के गुलाबी लाल रंग के फूल तैयार करती है जो मध्य में से लाल रंग के होते हैं।

Punjab Glance: इस किस्म की डंडियां सजावट के उद्देश्य से उपयोग की जाती हैं। यह किस्म 78 दिनों में तैयार हो जाती है। प्रत्येक पौधा लगभग 14 छोटे आकार की गांठे तैयार करता है। यह किस्म संतरी रंग के फूल तैयार करती है और इसकी डंडी लंबी होती है।

Punjab Lemon Delight: इसे सजावटी उद्देश्य से उपयोग किया जाता है। यह किस्म 80 दिनों में तैयार हो जाती है। प्रत्येक पौधा लगभग 11 छोटे आकार की गांठे तैयार करता है। यह किस्म हल्के पीले रंग के फूल तैयार करती है और इसकी डंडी लंबी होती है।

Punjab Glad 1:
यह किस्म 90-100 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी 84 सैं.मी. की डंडी पर 15 छोटे फूल गुच्छों में लगते हैं। प्रत्येक पौधा लगभग 44 गांठे तैयार करता है। यह किस्म संतरी रंग के फूल तैयार करती है|

ज़मीन की तैयारी

ग्लेडियोलस की खेती के लिए, बिजाई से पहले खेत की अच्छी तरह से जोताई करें| मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए जोताई आवश्यक हैं| 20-25 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं| इसकी खेती मेड़ और ख़ालियाँ बनाकर की जाती है|

बिजाई

बिजाई का समय
बिजाई के लिए गांठो को सितंबर से मध्य-नवंबर के महीने में बोया जाता हैं|

फासला
कतार से कतार में 30 सैं.मी. का फासला रखें और गांठो में 20 सैं.मी. का फासला होना चाहिए|

बीज की गहराई
बढ़िया विकास के लिए, गांठो को 7 सैं.मी. गहरा बोयें|

बीज

बीज की मात्रा
प्रति एकड़ खेत के लिए 62500-67000 गांठों का प्रयोग करें|

बीज का उपचार
मिट्टी से होने वाली बिमारियों से बचाव के लिए बिजाई से पहले गांठों को 0.2% बविस्टिन के घोल में आधे घंटे के लिए भिगोएं|

खाद

खादें(किलोग्राम प्रति एकड़)

UREA SSP MOP
250 250 66

 

तत्व(किलोग्राम प्रति एकड़)

NITROGEN PHOSPHORUS POTASH
115 40 40


बीज को बोने के 20 दिन पहले 20 टन गली हुई रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलायें। खेत की तैयारी के समय नाइट्रोजन 115 किलो (यूरिया 250 किलो), फासफोरस 40 किलो (सिंगल फासफेट 250 किलो) और पोटाश 40 किलो (मिउरेट ऑफ़ पोटाश 66 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें। नाइट्रोजन की खुराक दो हिस्सों में, पहली आधी मात्रा 2-3 पत्ते निकलने पर और बाकी बची हुई मात्रा, जब 5-6 पत्ते निकलने पर डालें|

खरपतवार नियंत्रण

ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਦੇ ਲਈ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਗੁਡਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਮਜਦੂਰ ਦੀ ਲਾਗਤ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ । ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਪ੍ਰਭਾਵੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ  4-5  ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਗੁਡਾਈ ਜਰੂਰੀ ਹੈ । ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਫਸਲ ਦੀ ਗਰੋਥ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਸਟੋਪ 30 ਈ ਸੀ 650 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ।

सिंचाई

सिंचाई मिट्टी और जलवायु के आधार पर करें| रेतली मिट्टी में 7-10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करने की सिफारिश की जाती है|

कमी और इसका इलाज

आयरन की कमी: ग्लेडियोलस की फसल में आयरन की कमी के लक्षण पत्तों का पीला पड़ना है| जब पौधे के 3-6 पत्ते निकलते है तब फेरस सल्फेट 0.2% की स्प्रे करें यह आयरन की कमी का इलाज करती है|

पौधे की देखभाल

गांठों का गलना
  • बीमारीयां और रोकथाम

गांठों का गलना: इस बीमारी के लक्षण अपरिपक्व पत्तों का पीला पड़ना, तने का सिकुड़ना और जड़ें और गांठे लाल-भूरी होकर सूख जाती है|

उपचार: यदि इसका हमला दिखे तो ज़िनेब 75 डब्लयु पी 400 ग्राम या एम 45, 400 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें।

गांठो पर काला-पन: यह बीमारी सेपटोरिया ग्लेडिओली के कारण होती है| इसके लक्षण गांठों पर अंदर की तरफ धसे हुए गहरे-भूरे और काले रंग के धब्बे पड़ जाते है|

उपचार: इस बीमारी की रोकथाम के लिए गांठों को थायोफानेट मिथाइल में 85-120° फारनहाइट तापमान पर और इप्रोडाइओन को अनुकूलित तापमान पर 15-30 मिन्ट भिगोएं|

जड़ों का गलना

जड़ों का गलना: यह बीमारी मैलोइडोगाइन इनकोगनिटा के कारण होती है| इसके लक्षण पत्तों का विकास रुक जाना, सूखना और पीले पड़ना, जड़ों का गलना आदि है।

उपचार: इसकी रोकथाम के लिए ऑक्ज़ामिल की स्प्रे प्रभावित खेत में करें|

चितकबरा रोग

चितकबरा रोग: इस बीमारी के लक्षण पौधे का पीला पड़ना, विकास का रुक जाना और रंग-बिरंगे और गोल धब्बे आदि होते है|

उपचार: इसकी रोकथाम के लिए ऐसीफेट 600 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ पर स्प्रे करें|

चेपा
  • कीट और रोकथाम

चेपा: यह पौधे के नए भाग को नष्ट करता है और बढ़ने से रोकता है|

उपचार: चेपे की रोकथाम के लिए रोगोर 30 ई सी या मैलाथिओन 50 ई सी 3 मि.ली. प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें|

चेपा

थ्रिप्स: यह पत्तों का रस चूस कर और फूलों को खाकर पौधे का नुकसान करता है|

उपचार: रोगोर 30 ई सी 3 मि.ली. या मैलाथियोन 50 ई सी 3 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में मिलाकर फूल निकलने के समय स्प्रे करें।

फसल की कटाई

तुड़ाई मुख्य तौर पर 3-4 महीने (90-120 ) पनीरी लगाने के बाद की जाती है| है। इसकी कटाई 4-5 शुरूआती पत्तों को छोड़कर की जाती है ताकि गांठों के उचित विकास में कोई बाधा ना आये। इसकी औसतन पैदावार 40000-125000 डंडियां प्रति एकड़ और 7500-8,000 गांठे प्रति एकड़ होती है|

गांठों की कटाई : फूलों की तुड़ाई के 6-8 हफ्ते बाद, गांठों की तुड़ाई करनी चाहिए| गांठों से पत्तों को हटा कर साफ करें| फिर गांठो को 0.2% बविस्टिन के घोल में आधे घंटे के लिए भिगोएं| भिगोने के बाद इसको 2-3 हफ्तों के लिए छाव में सुखाएं| सूखाने के बाद प्लास्टिक के लिफाफों में 4 °सै पर कोल्ड स्टोर में स्टोर किया जाता है|

कटाई के बाद

तुड़ाई के बाद ताज़े फूलों को गत्ते के बक्सों में स्टोर किया जाता है| इन बक्सों को नज़दीकी मंडियों में व्यापर के लिए भेजा जाता है|