शफतल की खेती

आम जानकारी

शफतल को भुकल के रूप में भी जाना जाता है। यह उच्च पोषक तत्वों वाली चारे की फसल है। यह सभी पशुओं द्वारा पसंद की जाती है। यह पिछेती मौसम में उगाई जाने वाली फसल है। इसे जई के साथ मिलाकर या राई घास के साथ उत्पादित किया जाता है।

जलवायु

  • Season

    Temperature

    12°C - 20°C
  • Season

    Rainfall

    500 mm
  • Season

    Sowing Temperature

    13°C
  • Season

    Harvesting Temperature

    20°C - 25°C
  • Season

    Temperature

    12°C - 20°C
  • Season

    Rainfall

    500 mm
  • Season

    Sowing Temperature

    13°C
  • Season

    Harvesting Temperature

    20°C - 25°C
  • Season

    Temperature

    12°C - 20°C
  • Season

    Rainfall

    500 mm
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    Sowing Temperature

    13°C
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    Harvesting Temperature

    20°C - 25°C
  • Season

    Temperature

    12°C - 20°C
  • Season

    Rainfall

    500 mm
  • Season

    Sowing Temperature

    13°C
  • Season

    Harvesting Temperature

    20°C - 25°C

मिट्टी

शफतल को मिट्टी की काफी किस्मों जैसे रेतली दोमट से भारी चिकनी मिट्टी में उगाया जा सकता है।

प्रसिद्ध किस्में और पैदावार

शफतल 48, SH 69, SH 48

Shaftal-69: इसके पत्ते की डंठल लम्बी और आकार में गोल होते हैं| फूल गुलाबी रंग के होते हैं| यह किस्म तना-गलन की रोधक है| इसके बीज हरे और पूरी तरह से विकसित होने के बाद पीले रंग के हो जाते है|

ज़मीन की तैयारी

सीड बैड तैयार करने के लिए ज़मीन की डिस्क हैरो से एक बार जोताई करें और कल्टीवेटर से दो बार जोताई करें।

बिजाई

बिजाई का समय
बीज बोने के लिए सितंबर के आखिरी सप्ताह से लेकर अक्तूबर का पहला सप्ताह अनुकूल होता है।

फासला
बीजों को बुरकाव द्वारा बोया जाता है।

बीज की गहराई
बीजों को खड़े पानी में बोया जाता है।

बिजाई का ढंग
बीजों को बुरकाव द्वारा बोया जाता है।

बीज

बीज की मात्रा
एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 4-5 किलो बीजों का प्रयोग करें। बढ़िया पैदावार लेने के लिए शफतल की बिजाई के समय सरसों के बीज 500 ग्राम और जई के बीज 12 किलो को भी मिलाएं।

खाद

खादें (किलोग्राम प्रति एकड़)

Urea SSP MOP
11 125 -

 

तत्व (किलोग्राम प्रति एकड़)

Nitrogen Phosphorus Potash
5 20 -

 

बिजाई के समय, नाइट्रोजन 5 किलो (यूरिया 11 किलो), फासफोरस 20 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 125 किलो) प्रति एकड़ में डालें।

सिंचाई

शफतल की फसल के लिए सिंचाई आवश्यक होती है। हल्की मिट्टी में बिजाई के 3-6 दिनों बाद पहली और भारी मिट्टी में बिजाई के 6-8 दिनों बाद सिंचाई करें। बाकी की सिंचाई जलवायु के हालातों के आधार पर गर्मियों में 9-10 दिनों के फासले और सर्दियों में 10-15 दिनों के फासले पर करें।

पौधे की देखभाल

बालों वाली सूण्डी
  • हानिकारक कीट और रोकथाम

बालों वाली सुंडी: यह पत्तों और तनों को खत्म कर देती है। इनके हमले से फसल का आर्थिक नुकसान होता है।
रोकथाम: इसे रोकने के लिए फ्लूबैनडीयामाइड 20 मि.ली. या क्विनलफॉस 400 मि.ली. को प्रति 150 लीटर  पानी में मिलाकर स्प्रे करें।

चने की सुंडी

चने की सुंडी: यह फसल को गंभीर रूप से नष्ट कर देती है।
रोकथाम: इसकी रोकथाम के लिए, 50 मि.ली. क्लोरनट्रैनिलीप्रोल 18.5 एस एल या 60 मि.ली ट्रेसर की स्प्रे करें। यदि आवश्यकता हो तो 10 दिनों के बाद दोबारा स्प्रे करें।

पत्तों का धब्बा रोग
  • बीमारियां और रोकथाम

पत्तों का धब्बा रोग: यह बीमारी जनवरी के महीने में हमला करती है। यह पौधे के शिखर पर दिखाई देते हैं, जो सलेटी कपास की तरह दिखते हैं। इससे तने का विकास रूक जाता है और पत्ते मुड़ जाते हैं।

रोकथाम: यदि इसका हमला दिखे तो ज़िनेब 75 डब्लयु पी 400 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें। 10 दिनों के अंतराल पर दो से तीन स्प्रे करें।

कुंगी

कुंगी: इससे पौधे के हरे भाग में लाल रंग के छोटे दाने दिखाई देते हैं। पहले पत्तों को जंग लगता है और बाद में पत्ते गिर जाते हैं| प्रभावित बीजों का वनज हल्का होता है।

रोकथाम: यदि इसका हमला दिखे तो ज़िनेब 75 डब्लयु पी 400 ग्राम या एम-45@400 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें।

फसल की कटाई

फसल 55-60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। बाकी की कटाई 30 दिनों के फासले पर करें।

रेफरेन्स

1.Punjab Agricultural University Ludhiana

2.Department of Agriculture

3.Indian Agricultural Research Instittute, New Delhi

4.Indian Institute of Wheat and Barley Research

5.Ministry of Agriculture & Farmers Welfare