उत्तर प्रदेश सरकार केंद्र की तरह अर्थव्यवस्था पर मंदी की आशंकाओं को न्यूनतम स्तर पर रोकने और राज्य की आय बढ़ाने के प्रयासों में जुट गई है। पेट्रोल-डीजल व बिजली की दरें बढ़ाने के अलावा वाहनों की नंबर पोर्टेबिलिटी के जरिए आय बढ़ाने की व्यवस्था पर अमल शुरू हो गया है। जीएसटी और आबकारी के साथ उन सेक्टरों में भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, जहां से थोड़ी सी भी आय की गुंजाइश है।

सरकार की कोशिश है कि अतिरिक्त प्रयासों से राज्य की विकास दर सात प्रतिशत प्राप्त करने के लिए सभी प्रयास किए जाएं। प्रदेश में निवेश व रोजगार के मोमेंटम को बनाए रखने के लिए इन्वेस्टर्स समिट में एमओयू से जुड़े प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने का प्रयास तेजी से हो रहा है। चालू वित्त वर्ष के बीच एक ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट व एक ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा सूक्ष्म व लघु उद्यम सेक्टर अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हैं।
सरकार एमएसएमई सेक्टर में ऋण वितरण की नई मुहिम शुरू करने जा रही है। अर्थव्यवस्था पर इस मुहिम का सकारात्मक असर पड़ेगा। इसके अलावा अन्य सेक्टर में आय बढ़ाने की संभावना पर भी काम किया जा रहा है। सरकार निजी सेक्टर के साथ सरकारी स्तर पर भी रोजगार के अधिकतम अवसर देने पर फोकस बनाए हुए है। सभी चयन व भर्ती आयोगों को रिक्त पदों पर नौकरियां देने की कार्यवाही तेजी से करने को कहा गया है। पिछले कुछ दिनों से इसके नतीजे आने लगे हैं।
इसी तरह प्रदेश सरकार फिजूलखर्ची और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ठोस काम कर रही है। एलईडी लाइट लगाकर व ई-पॉस मशीन से खाद्यान्न वितरण कर करीब 1,000 करोड़ रुपये बचाए हैं। इसके अलावा निर्यात बढ़ाने पर फोकस किया गया है।
2018-19 में राष्ट्रीयनिर्यात की वृद्धि दर जहां 18 प्रतिशत थी, उसमें यूपी की 28.18 फीसदी रही। पिछले दो वर्षों में करीब 25 हजार करोड़ रुपये निर्यात में वृद्धि हुई है। 2018-19 में 1,14,000 करोड़ का निर्यात हुआ। इन सेक्टर में और बेहतर करने के प्रयास हो रहे हैं।
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स्रोत: अमर उजाला