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स्ट्रॉबेरी किस मौसम मे उगायी जाती है ?
(hn)
स्ट्रॉबेरी सर्दियों में उगाई जाती है जी
I want to know about pearl farming ?
(en)
Punjab
Pearl farming is one of the best aquaculture businesses in India. In commercial pearl farming project, the first year investment will be more as you need fixed asset set up. You can assume 3/4 to a 1-acre, the cost of the pearl project would be around 4 lakhs rupees approximately. When it comes to profits in commercial pearl farming project, you can expect 50 to 60% under ideal aquaculture management practices. However, if you put more dedication and hard work into the project even 100% profit possible. There are mainly three types of pearls. • Natural pearls: in this type, the shape of the pearl depends on the original shape of the foreign body. • Artificial pearls: These are artificially made and coated with a synthetic material. • Cultured pearls (freshwater): These are cultured pearls in freshwater such as ponds, rivers etc..you can get the desired shape in this type. • You must have a good source of Oysters to culture in the pond. • You must have some skills of grafting techniques in pearl culture as this is essential for commercial pearl farming project. You can visit nearby pearl farms to learn these tips of freshwater pearl culture. first of all you have to attend 3 days practical training. According to your location you can get training from vinod kumar. he is successful pearl farmer. He is also providing training to new farmers. his contact number is 9050555757.Thank You.
मोती की खेती कैसे करें ?
(hn)
Punjab
Moti ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
इस महीने में मेथी बोयी जा सकती है जल्दी जवाब दें ?
(hn)
Maharashtra
वानस्पतिक उद्देश्य के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर का पहला सप्ताह बिजाई के लिए अनुकूल होता है जब कि बीज उद्देश्य के लिए नवंबर का महीना बिजाई के लिए उत्तम समय होता है बीजों को पूरी धूप में बोयें
मोती के उत्पादन की पूरी जानकारी दें ?
(hn)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
about dairy farm ?
(en)
Punjab
डेयरी फार्म के लिए आप एक बार में इक्ट्ठे पशु ना खरीदें पशुओं को 2—2 महीने के अंतराल पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीद लें और 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आएगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि तीन समय का दूध निकालकर ही पशु को खरीदें भैंसों को खरीदने का सही समय रखड़ी से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है पशुओं के लिए शैड परिवहन वाली सड़क पर ना बनाए और शैड सड़क से कम से कम 100 गज हटवा जरूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर बनाएं शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनाए क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनाई जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़े होने के लिए एक पशु को तकरीबन तीन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनाए पशुओं का दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना बहुत जरूरी है शैड का फर्श पक्का, तिलकने रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोड़ें और पानी और दाना पूरा दें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी क्षमता और जरूरत मुताबिक ही समान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक पशु का बीमा जरूर करवायें.
मोती उत्पादन की पुरी जनकारी ?
(hn)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Rajasthan
dhanyawad apke support ke liye
मोती की खेती कैसे करनी होती है ?
(hn)
Punjab
Moti ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
मोती के उत्पादन के लिये क्या करना पड़ता है ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Vinod Kumar 9050555757 सम्पर्क करे
धन्यवाद
potato marketing rate ?
(en)
Punjab
harpreet ji potato market rate id 400-450 rupees per quintal.
Pearl Farming ?
(en)
Punjab
Pearl farming is one of the best aquaculture businesses in India. In commercial pearl farming project, the first year investment will be more as you need fixed asset set up. You can assume 3/4 to a 1-acre, the cost of the pearl project would be around 4 lakhs rupees approximately. When it comes to profits in commercial pearl farming project, you can expect 50 to 60% under ideal aquaculture management practices. However, if you put more dedication and hard work into the project even 100% profit possible. There are mainly three types of pearls. • Natural pearls: in this type, the shape of the pearl depends on the original shape of the foreign body. • Artificial pearls: These are artificially made and coated with a synthetic material. • Cultured pearls (freshwater): These are cultured pearls in freshwater such as ponds, rivers etc..you can get the desired shape in this type. • You must have a good source of Oysters to culture in the pond. • You must have some skills of grafting techniques in pearl culture as this is essential for commercial pearl farming project. You can visit nearby pearl farms to learn these tips of freshwater pearl culture. first of all you have to attend 3 days practical training. According to your location you can get training from vinod kumar. he is successful pearl farmer. He is also providing training to new farmers. his contact number is 9050555757.Thank You.
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Pearl farming is one of the best aquaculture businesses in India. In commercial pearl farming project, the first year investment will be more as you need fixed asset set up. You can assume 3/4 to a 1-acre, the cost of the pearl project would be around 4 lakhs rupees approximately. When it comes to profits in commercial pearl farming project, you can expect 50 to 60% under ideal aquaculture management practices. However, if you put more dedication and hard work into the project even 100% profit possible. There are mainly three types of pearls. • Natural pearls: in this type, the shape of the pearl depends on the original shape of the foreign body. • Artificial pearls: These are artificially made and coated with a synthetic material. • Cultured pearls (freshwater): These are cultured pearls in freshwater such as ponds, rivers etc..you can get the desired shape in this type. • You must have a good source of Oysters to culture in the pond. • You must have some skills of grafting techniques in pearl culture as this is essential for commercial pearl farming project. You can visit nearby pearl farms to learn these tips of freshwater pearl culture. first of all you have to attend 3 days practical training. According to your location you can get training from vinod kumar. he is successful pearl farmer. He is also providing training to new farmers. his contact number is 9050555757.Thank You.
0 dril wali kank nu sundi kyo hai ?
(pb)
Punjab
jagpreet ji zero drill vali kanak vich sundi is layi paindi hai ke isde vich maujood prali jaldi galdi nahi hai ate isde karn usde vich sundi pai jandi hai. dhanwad
मोती के लिये सीप की खेती किस प्रकार करते है मार्गदर्शन चाहिए ?
(hn)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 पर कॉल कर सकते है
sir bathinda kisan Mela kado hai ?
(pb)
Punjab
Hardee Sran g Bathinda kisan mela lgg chukeya hai g jo 1 March 2019 nu lgeya c g..
वर्मी कंपोस्ट कैसे तैयार करते हैं ?
(hn)
Maharashtra
बढ़िया वर्मी कंपोस्ट निम्नलिखित तरीके अनुसार बनायी जा सकती है इसलिए ऐसा स्थान लें जहां धूप ना आये और हवादार हो इस स्थान पर ईंटों या पत्थर के टुकड़े और मिट्टी की 2—3 इंच मोटी परत बिछायें मिट्टी पर थोड़ा सा पानी छिड़ककर गीला करें मिट्टी में 25 प्रतिशत से अधिक नमी नहीं होनी चाहिए इसके ऊपर गंडोए (40 गंडोए प्रति वर्ग फीट जगह) में मिलायें इसके बाद वेस्ट जैसे कि बची कुची सब्जियां, फल, कच्चा गोबर, गोबर की सलरी की 8—10 इंच मोटी परत डालें दूसरी परत के बाद इसके ऊपर सूखे पत्ते या पराली से ढक दें हर परत के बाद पानी छिड़कें ताकि नमी बनी रहे वर्मीकंपोस्ट के बैड को 3—4 इंच मोटी गोबर की परत से ढक दें और इसके ऊपर बोरा या तिरपाल रखें ताकि नमी बनी रहे रसोई, फसलों या डेयरी के बचे कुचे की परत को रैक से पलटते रहें और आवश्यकतानुसार थोड़ा थोड़ा करके और वेस्ट भी डाल सकते हैं इसके ऊपर कच्चा गोबर भी डाल सकते हैं पर ध्यान रखें कि यह परत पहले जितनी ही मोटी रहें वर्मी कंपोस्ट की खाद मौसम के हिसाब से 45—60 दिनों में तैयार हो जाती है सबसे ऊपर वाली परत को हटाकर गंडोए छलनी से अलग कर लें और निचली छोड़ दें इसके ऊपर दोबारा रसोई या एग्रो वेस्ट की 6 इंच मोटी परत बिछाकर दोबारा खाद तैयार की जा सकती हैं 45 दिनों के बाद पानी छिड़कना बंद करने से भी गंडोए निचली परत में चले जाते हैं और छलनी से अलग करने में समय कम लगता है तैयार वर्मी कंपोस्ट काले भूरे रंग की गंध रहित और चाय पत्ती जैसी होती है इसे छांव में हवा में सुखकर आवश्यकतानुसार थैले या बोरियों में डालकर रखा जा सकता है एक टन वर्मी कंपोस्ट में 1.0—1.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 5—10 किलोग्राम पोटाश और 3.5—5.0 किलो फासफोरस होता है इसके अलावा इसमें कई तरह के एन्ज़ाइम और सूक्ष्म तत्व कॉपर, आयरन, जिंक, सल्फर, कैलशियम और मैगनीशियम आदि होते हैं
sir kanak nu aah problem aa rahi hai kirpa isdi dwai bare jankari deo ?
(pb)
Punjab
Nisahn ji eh machar di sikhayat hai isde uper tuc imidacloprid@60ml ja thiamethoxam@80 gm nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal sprya karo. dhanwad
vegetable plants takecare ?
(en)
Punjab
ramandeep ji please tell us in detail about which vegetable crop you want to know so that we can provide you proper information. thank you
my fish magur eat each other and got black dot on body ?
(en)
Sir mangur is ban by state centre and ffda so and it s not eating each other it s a fungus affection.
ਅਸੀ ਸ਼ਹਿਰ ਵਿਚ ਆਪਣੇ ਮਕਾਨ ਦੀ ਛੱਤ ਤੇ ਸਬਜੀਆ ਕਿਵੇਂ ਉਗਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ?
(pb)
Punjab
ਗੌਰਵ ਜੀ ਤੁਸੀ ਮਕਾਨ ਦੀ ਚੈਟ ਤੇ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਉਗਾਉਣ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇ ਲਈ ਨਾਲ ਦਿਤੀ ਵੀਡੀਓ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦੇ ਵਿਚ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਾਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਗਈ ਹੈ https://www.youtube.com/watch?v=mEjZ9LLov6I
jo grmi rutt dia sbjia vich bhundi aundi hai te chek kr dindi hai te oh nuksan bahut krdi hai te control ni hundi, te apni kheti app ch is related update ayi c ohde ch ik nuskha dssea gya c kirpa kr ke mainnu us bare dsso ki oh ghol kiwe tyar krna hai ?
(en)
Punjab
manpreet ji khet vich ghade nap ke roktham bare update payi gayi c oh seonk de layi c fruit fly layi nahi. isde layi tuc apne khet vich yellow sticky trap jo ke bajar vich asani nal mil janda hai usda istemal kar sakde ho. dhanwad
2967 ਨੂੰ ਪੀਲੀ ਕੁੰਗੀ ਤੇ ਤੇਲਾ ਹੈ ਕਿਹੜੀ ਸਪਰੇਅ ਕਰੀਏ ?
(pb)
Punjab
ਸ੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ HD-2967 ਵਿੱਚ ਪੀਲੀ ਕੁੰਗੀ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਟਿਲਟ @200 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਐਕਟਾਰਾ @80 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ।
मैं मोती की खेती करना चाहता हूं इसके बारे में पूरी जानकारी दें ?
(hn)
Punjab
Motio ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
Rajasthan
आपको जानकरी मिले तो मुझे भी बता देना
mujhe pearl ki kheti ki training leni h to mai kaise le skta hu or kaha kaha se le skta hu, or ICRA se training lena chahu to kaise le skta hu, kis time mai apply kr skta hu or kb kb ye training provide krte h ?
(en)
Punjab
Motio ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture (Indian Council of Agricultural Research) (An ISO 9001:2015 Certified Institute) Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, Odisha, India Tel: +91-674-2465421, 2465446, Fax: +91-674-2465407, Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
मोती की खेती करना चाहता हूं सर उसके लिए ज़मीन, पानी और बीज के बारे में जानकारी दीजिए ?
(hn)
Punjab
Ram ji Motio ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, ODISHA, INDIA Phone: 91-674-2465421,2465446 FAX: 91-674-2465407 se samparak kare.
hello sir eh lemon de plants three years de han and ehna te ajj tak fruit nhi lagya. please give some advice. 3 vigha Ch han ?
(en)
Punjab
Shubdeep Singh ji jekar boote beej nal lage han ta isnu 7-8 saal lagde han fal aun nu jekar boote kalm de nal laye gaye han ta isnu 3-4 saal lagde han. dhanwad
thanks g
ehna vicho ik tree de utte flowers han and us d height bakia to small hai
मैं मछली और मुर्गी पालन के साथ सब्जी की खेती का काम करना चाहता हूं ?
(hn)
Punjab
जी आप सब्ज़ी की खेती कर सकते है कृप्या आप यह बताएं कि आप कितनी ज़मीन पर सब्ज़ी की खेती करना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके
I want to know about pearl kheti, everything sell market also ?
(en)
Punjab
Motio ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Regional Research Centre, Anand ATIC, Anand Agricultural University, Anand , Gujarat Ph. & Fax: +91-2692-263699, -388001 se samparak kare.
makki di height nhi ho reha ?
(pb)
Maharashtra
makki de uper tuc hoshi@400ml nu 150 litre pani vich mila ke spray karo isde nal makki di height honi shuru ho jayegi. dhanwad
Rajasthan
yuriya khad daliye
ਕਪਾਹ ਲਾਉਣ ਸਮਾਂ ਕਿਹੜਾ ਹੈ ਸਰ ਜੀ ?
(en)
Punjab
ਕਪਾਹ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਮਾਂ 1 ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ 15 ਮਈ ਤਕ ਦਾ ਹੈ ਜੀ।।
ਜਵੀਂ ਪੱਕ ਗਈ ਜੀ ਉਸ ਨੂੰ ਅਚਾਰ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਚਾਰੇ ਲਈ ਕਿਸ ਤਰਾਂ ਸੰਭਾਲ ਕੇ ਰੱਖ ਸਖਦੇ ਆ ਜੀ, ?
(pb)
Punjab
ਰਣਜੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸਦਾ Hay ਬਣਾ ਕੇ ਇਸਦੀ ਸਾਂਭ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
ਇਸਦਾ hay ਕਿਸ ਤਰਾਂ ਬਣਾਇਆ ਜਾਵੇ ਜੀ
sir rabbit farm lgon bare detail vich jankari chahidi haii , es bare training da ki hisab hai subsidy vgerah sara kuch dso ji ?
(en)
Punjab
ਖਰਗੋਸ਼ ਪਾਲਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਕੰਪਨੀਆਂ ਨਾਲ ਕੋਨਟਰੈਕਟ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਤੁਸੀ 1 ਯੂਨਿਟ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਕ ਯੂਨਿਟ ਵਿੱਚ 3 ਮੇਲ ਤੇ 10 ਫੀਮੇਲ ਖਰਗੋਸ਼ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇੱਕ ਯੂਨਿਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੱਗਭੱਗ 30000 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਸ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ 30X35 ਦਾ ਸ਼ੈਡ ਬਣਾਉਣਾ ਪਵੇਗਾ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਫੀਡ ਅਤੇ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਪੱਠੇ ਖਵਾਉਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲੱਗਭੱਗ 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੇਚਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤੁਸੀ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਲਈ ਪੈਰਾਡਾਈਜ਼ ਕੰਪਨੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਿੰਨਾਂ ਦਾ ਸੰਪਰਕ ਨੰਬਰ 9466419455 ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਅਤੇ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਦੀ ਸਾਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਇਹ ਕੰਪਨੀ ਹੀ ਦੇਵੇਗੀ ਜੀ ਇਸ ਤੇ ਸਬਸਿਡੀ ਕੋਈ ਨਹੀ ਹੈ ਜੀ
Punjab
Thankuu gg
ਜੌਆਂ ਉੱਤੇ ਪੀਲੀ ਕੁੰਗੀ ਪੈ ਗੲੀ ਹੈ। ਜੇਕਰ ਕੱਟ ਕੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਪਾਈਏ ਤਾਂ ਕੋਈ ਨੁਕਸਾਨ ਤਾਂ ਨਹੀਂ ?
(pb)
Rajasthan
ਸਰਦਾਰ ਜੀ ਜੌਆਂ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰ ਇਸਦਾ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਹਿੱਸਾ ਬਿਮਾਰੀ ਰਹਿਤ ਹੈ ਉਹ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਪਾਓ
ਸਰ ਕੁੱਤੀ ਗੰਦ ਖਾਂਦੀ ਹੈ, 1 ਮਹੀਨੇ ਦੀ ਹੈ ?
(en)
ਉਸ ਨੂੰ easypet ਨਾਮ ਦੀਆਂ ਗੋਲੀਆਂ ਅੱਧੀ ਦੇ ਕੇ ਤੇ ਅੱਧੀ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਦੇ ਕੇ ਫਿਰ ਇੱਕ ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰਾਂ ਇਹ ਦਵਾਈ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ Nutrich ਨਾਮ ਦੀ ਇੱਕ ਗੋਲੀ ਹਰ ਰੋਜ਼ 10 ਦਿਨ ਦਿਓ
मोती की खेती कैसे शुरू करें ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Regional Research Centre, Anand ATIC, Anand Agricultural University, Anand , Gujarat Ph. & Fax: +91-2692-263699, -388001 से सम्पर्क करे
Keise
मोती बनाने की खेती के लिए कहाँ सम्पर्क करें ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Vinod Kumar 9050555757 सम्पर्क करे
मोती की खेती की प्रशिक्षण कहाँ से ले ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 सम्पर्क करे
खजूर की फसल के बारे मे बताये ?
(hn)
Maharashtra
इसकी खेती किसी भी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी पैदावार और अच्छी उपज के लिए अच्छे निकास वाली, गहरी रेतली दोमट मिट्टी जिसकी पी एच 7-8 हो , उचित रहती है जिस मिट्टी की 2 मीटर नीचे तक सतह सख्त हो, उन मिट्टी में उगाने से परहेज़ करें क्षारीय और नमक वाली मिट्टी भी इसकी खेती के लिए उपयुक्त होती है लेकिन इनमें खजूर की कम पैदावार होती है प्रसिद्ध किस्में :-Halawy,Medjool,Khunezi मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो से तीन बार जोताई करें मिट्टी के समतल होने के बाद, गर्मियों में 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के खड्ढे खोदें इन खड्ढों को दो सप्ताह के लिए खुला रखें उसके बाद अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर और उपजाऊ मिट्टी से खड्ढों को भरें क्लोरपाइरीफॉस@20 मि.ली. प्रत्येक खड्ढे में डालें मॉनसून में खजूर की खेती के लिए जुलाई-अगस्त का समय उपयुक्त होता है जबकि बसंत के मौसम में फरवरी-मार्च के महीने में रोपाई पूरी कर लें रोपाई के लिए 6मीटर या 8 मीटर के फासले पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के खड्ढे खोदें रोपाई के लिए 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के खड्ढे खोदें मुख्य खेत में वानस्पतिक भाग की रोपाई की जाती है जब कतार से कतार और पौधे से पौधे में 6 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है, तब एक एकड़ में 112 नए पौधों का प्रयोग करें, जबकि 8 मीटर x 8 मीटर के फासले पर 63 नए पौधों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें खड्ढों में जड़ के भाग की रोपाई से पहले जड़ के आधार को IBA 1000 पी पी एम और क्लोरपाइरीफॉस 5 मि.ली. को प्रति लीटर पानी में दो से पांच मिनट के लिए डुबोकर रखें खजूर का प्रजणन जड़ के भाग की सहायता से किया जाता है मुख्य पौधे से जड़ के भाग या टहनी को लें रोपाई के 4 या 5 साल बाद पौधे के वनस्पतिक भाग प्राप्त होते हैं वनस्पतिक भाग का उचित भार 15-20 किलोग्राम होना चाहिए जड़ के भाग को मुख्य पौधे से अलग करने से छ: महीने या साल पहले अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर, रेत और लकड़ी का बुरादा जड़ के आस-पास डालें अलग करने के समय पुराने पत्तों को निकाल दें और एक अकेला कट लें बीज प्रजनन की तरह ही जड़ के साथ प्रजनन की कुछ सीमाएं होती हैं राजस्थान में प्रजनन उद्देश्य के लिए टिशु कल्चर तकनीकों का प्रयोग किया जाता है टिशू कल्चर से प्राप्त पौधे बहुत महंगे होते हैं लेकिन राजस्थान सरकार ड्रिप किसानों को 75 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध करवाती है प्रत्येक वर्ष के अगस्त-सितंबर महीने में 40-50 किलो गाय का गला हुआ गोबर प्रति पौधे में डालें खजूर को नाइट्रोजन खाद 500-1500 ग्राम प्रति पौधा बिजाई से पहले और फूल निकलने के समय आवश्यक होती है प्रत्येक वर्ष फासफोरस 500-1000 ग्राम और पोटाश 250-500 ग्राम भी प्रति पौधे में डालें 10 वर्ष के पौधे के लिए अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 25 किलो, नाइट्रोजन 750 ग्राम, फासफोरस 125 ग्राम और पोटाश 125 ग्राम और सल्फर 50 ग्राम प्रति पौधे में अगस्त-सितंबर के महीने में डालें खेत को साफ और नदीन मुक्त रखें नदीनों की तीव्रता के आधार पर निराई और गोडाई करें नदीनों की रोकथाम के लिए मल्च का प्रयोग करें नई बोयी फसल के लिए तीन महीने तक नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है गर्मियों में सात दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जबकि सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने, फल बनने और पकने की अवस्थाओं पर सिंचाई की कमी ना होने दें मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखें कम से कम पानी प्रयोग करने के साथ साथ खरपतवार नियंत्रण के लिए मलचिंग एक प्रभावी तरीका है पौधे के आधार पर काली पॉलीथीन की शीट चढ़ाएं रोपाई के चार से पांच साल बाद खजूर का वृक्ष पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाता है फल की तुड़ाई की तीन अवस्थाएं होती हैं पहली जब फल पकने की अवस्था में होते हैं दूसरी, जब फल ताजे होते हैं तीसरी जब फल नर्म और पके हुए होते हैं और सूखी अवस्था जब फल सूख जाते हैं राजस्थान में चूहड़ा या पिंड खजूर के लिए फलों की तुड़ाई फल पकने की अवस्था में की जाती है मॉनसून का मौसम शुरू होने से पहले तुड़ाई पूरी कर लें
मशरूम की खेती के बारे में बताईये ?
(hn)
Maharashtra
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम इनमे से कुइ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी मशरुम का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली मशरुम का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली मशरुम लगा सकते है पराली मशरुम के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद मशरुम फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे मशरुम के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है मशरुम की तूडाई मशरुम के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी मशरुम मिलकी मशरुम के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है मशरुम का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में मशरुम के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है मशरुम की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
Haryana
जय प्रकाश जी मशरूम की खेती एक आधुनिक खेती है , इस से आप अच्छा मुनाफा कमा सकते है , सबसे अच्छी बात इसे करने के लिए आपको खेत की जरूरत भी नहीं होती, इसे बंद कमरों में किया जाता है , इसको आप बहुत कम लागत से भी शुरू करके अच्छी कमाई कर सकते है , मशरूम मिट्टी में नहीं उगती बल्कि आपको इसे उगाने के लिए कम्पोस्ट तेयार करना पड़ता , कम्पोस्ट तेयार करने के बाद आपको बस मुशरूम का सीड जिसे spawn कहते है वो आपको कम्पोस्ट के साथ मिलना होता है और फिर उसे क्रेट मे या पॉलिथीन में डाल कर अंधेरे कमरे में रख देते है और उसके बाद बस उसकी देख भाल करनी होती है जैसे की तापमान और नमी 35-40 दिन तक आपकी mushroom तोडने लाएक हो जाती है , मशरूम की खेती आप साल भर कर सकते है , आप इसके लिए ट्रेनिंग भी के सकते है जिसके लिए आपको अपने नजदीकी केवीके से सम्पर्क करना होगा
Uttar Pradesh
धन्यवाद
Uttar Pradesh
temprature &humidity (मिनिम-------- maxiimum) कितना होना चाहिए
Haryana
Button Mushroom के लिए शुरू में जब spawn run होता है उस वक़्त temperature 23- 25 degree तापमान रखना होता है । उसके बाद जब आप casing मिट्टी डाल देते है उसके 7-8 दिन बाद जब मशरूम बाहर आने लगती है तो temperature कम करना पड़ता है 15 -18 degree तक और फिर इतना ही रखा जाता है आखिरी तक। Humidity आप 80 - 90% तक रख सकते है । सभी mushroom के लिए अलग अलग temperature रखना पड़ता है। Oyster mushroom के लिए 20- 30 degree तापमान रखना पड़ता है और Milky mushroom के लिए 30-40 degree रखना पड़ता है।
Uttar Pradesh
बहुत बहुत धन्यवाद भाई
ਸਟੋਬਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਉ ?
(pb)
ਸਟੋਬਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੋਲੀਹਾਊਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਜਾਂ ਖੁੱਲੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਕਰ ਸਕਦੇਂ ਹੋ ਚੀਕਣੀ , ਬਾਲੂ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਨਿਕਾਸੀ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਲਈ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਏਸਿਡਿਕ ਵਿੱਚ PH level 5.0 to 6.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਨਾਜੁਕਤਾ ਤੀਹ ਤੋਂ ਚਾਲ੍ਹੀ ਸੇਂਟੀਮੀਟਰ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ ਲਈ ਦਿਨ ਵੇਲੇ ਤਾਪਮਾਨ 20-25° ਡਿਗਰੀ ਅਤੇ ਰਾਤ ਵੇਲੇ 7-12° ਡਿਗਰੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਦਾ ਕੰਮ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਤਕ ਕਰ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਹਨਾਂ ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੇ ਇਸਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਲਗਭਗ ਇਹੀ ਤਾਪਮਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਮਲਚਿੰਗ ਵਿਧੀ ਰਾਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਟਰੈਕਟਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਮਲਚਿੰਗ ਮਸ਼ੀਨ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਉਤਾਰਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਚਾਰ ਫੁੱਟ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਡਰਿੱਪ ਲਾਈਨ ਫਿੱਟ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਮਸ਼ੀਨ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਕਿਆਰੀਆਂ ਉੱਤੇ ਪਲਾਸਟਿਕ ਸ਼ੀਟ ਵਿਛਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮਲਚਿੰਗ ਲਈ ਹਲਕਾ ਅਤੇ ਲਚਕੀਲਾ ਪਦਾਰਥ ਲਵੋ ਤਾਂ ਜੋ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਉੱਤੇ ਅਸਰ ਨਾ ਪਵੇ ਜਿਸਨੂੰ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਦੋਨਾਂ ਪਾਸਿਆਂ ਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਦਬਾ ਦਿਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹੁਣ ਇਸ ਸ਼ੀਟ ਵਿਚ ਮੋਰੀਆਂ ਕੱਢ ਕੇ ਉਸ ਵਿਚ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਵੇਲੇ ਜੜ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਸੇਟ ਕਰ ਦਿਓ ਜੜ ਬਹਾਰ ਰਹਿਣ ਨਾਲ ਪੌਦੇ ਦੇ ਸੁੱਕਣ ਦਾ ਖ਼ਤਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਜਿਆਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਅਤੇ ਠੰਡ ਤੋਂ ਬਚਨ ਲਈ ਇਸਦੇ ਊਪਰ ਛਾਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਲੋ ਟਨਲ ਵਿਧੀ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਮੌਸਮ ਦਾ ਬਹੁਤ ਖਿਆਲ ਰੱਖਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਥੋੜੀ ਜਿਹੀ ਲਾਪਰਵਾਹੀ ਨਾਲ ਸਾਰੀ ਫ਼ਸਲ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ ਆਪਣੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਦਾ ਕੁੱਲ ਖਰਚਾ ਢਾਈ ਤੋ ਤਿੰਨ ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਆ ਜਾਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ ਡਰਿੱਪ ਸਿਸਟਮ ਅਤੇ ਫੁਆਰਿਆਂ ਆਦਿ ਤੇ ਵੀ ਖਰਚ ਕਰਨਾ ਪੈਦਾ ਹੈ ਪਰ ਅਗਲੇ ਸਾਲਾ ਵਿੱਚ ਕਿਸਾਨ ਦਾ ਇਹ ਖਰਚ ਬਚ ਜਾਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 40 ਬੈਡ ਬਣਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇੱਕ ਬੈਡ ਤੇ 1000 ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਪੌਦੇ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਇਸ ਤਰਾਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਚਾਲੀ ਹਜ਼ਾਰ ਪੌਦੇ ਲਾਏ ਜਾਦੇ ਹਨ, ਇੱਕ ਪੌਦਾ 3 ਤੋ 4 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 50 ਤੋ 60 ਕੁਇੰਟਲ ਤੱਕ ਨਿਕਲ ਆਉਦਾ ਹੈ 25-30 ਕੁਇੰਟਲ ਗੋਬਰ ਦੀ ਖਾਦ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਇਹ ਖਾਦ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਪਾਉਣੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਫਿਰ 20 : 40 : 40 NPK KG / ਹੇਕਟਏਰ ਪਾਉਣੀ ਹੈ ਚੰਗੀ ਫਸਲ ਲਈ ਯੂਰਿਆ ਦੋ ਫ਼ੀਸਦੀ ਜ਼ਿੰਕ ਸਲਫੇਟ , ਅੱਧਾ ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਕੈਲਸ਼ਿਅਮ ਸਲਫੇਟ ਅੱਧਾ ਫ਼ੀਸਦੀ ਅਤੇ ਬੋਰਿਕ ਏਸਿਡ 0 . 2 ਫ਼ੀਸਦੀ ਚੰਗੀ ਫਸਲ ਲਈ ਠੀਕ ਹੈ ਸਿੰਚਾਈ ਛੇਤੀ ਛੇਤੀ ਪਰ ਹਲਕੀ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਆਦਾ ਪਾਣੀ ਠੀਕ ਨਹੀਂ ਹੈ ਪੱਤੇ ਗਿੱਲੇ ਨਾ ਕਰੋ ਤੁਪਕਾ ਸਿੰਚਾਈ ਨਾਲ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਲੱਗ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਪਕਾ ਸਚਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੇ ਤਾਂ ਕਿਆਰੀਆਂ ਦੇ ਵਿਚਾਲੇ ਪਾਣੀ ਖਾਲ ਵਿੱਚ ਹੀ ਲਗਾਓ ਨਦੀਨ ਹੱਥ ਨਾਲ ਹਟਾਓ ਜਾਂ ਕੀੜੇ ਮਕੋੜੇ ਅਤੇ ਦੂਜੀਆ ਬਿਮਾਰਿਆ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਪੋਦਾ ਜਿਆਦਾ ਖਰਾਬ ਹੈ ਉਹਨੂੰ ਹਟਾ ਦਿਓ ਜਦੋਂ ਫਲ ਦਾ ਰੰਗ 70% ਲਾਲ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਤੋੜ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਮਾਰਕਿਟ ਦੂਰੀ ਉੱਤੇ ਹੈ ਤਾਂ ਥੋੜ੍ਹਾ ਸਖ਼ਤ ਹੀ ਤੋੜਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤੁੜਵਾਈ ਵੱਖ ਵੱਖ ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀਆਂ ਪਲੇਟਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਇਸਨ੍ਹੂੰ ਹਵਾਦਾਰ ਜਗ੍ਹਾ ਉੱਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਤਾਪਮਾਨ ਪੰਜ ਡਿਗਰੀ ਹੋ ਇੱਕ ਦਿਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਜ਼ੀਰੋ ਡਿਗਰੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਔਸਤ 200 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਤੱਕ ਵਿਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ ਪੰਜ ਲੱਖ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੋ ਇਸ ਦੀ ਆਮਦਨ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਅੱਗੇ ਆਪਣੀ ਮਿਹਨਤ ਨਾਲ ਕਿਸਾਨ ਆਮਦਨ ਵਿੱਚ ਭਰਪੂਰ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਪੌਦੇ ਸਤੰਬਰ ਤੋ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਲਾਏ ਜਾਦੇ ਹਨ ਅਤੇ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਇਹ ਫਲ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀ ਫਸਲ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ ਚਲਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਪਰੇਸ਼ਾਨੀ ਨਹੀ ਹੈ ਉਹ ਏਲਨਾਬਾਦ,ਸਿਰਸਾ,ਹਨੂੰਮਾਨਗੜ,ਗੰਗਾਨਗਰ ਤੋ ਇਲਾਵਾ ਬਠਿੰਡਾ,ਮੋਗਾ ਜਲੰਧਰ,ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਜੇਕਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਦਿੱਲੀ ਇਸ ਦੀ ਮੁੱਖ ਮਾਰਕੀਟ ਹੈ
Punjab
ਧੰਨਵਾਦ ਜੀ
मोती की खेती कैसे करें ?
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मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Vinod Kumar 9050555757 सम्पर्क करे
मशरूम की खेती के बारे बतायें ?
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Maharashtra
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
pyaj di fasal de ptte peele pai rhe han ?
(pb)
eh tat di kami de karn peele paine shuru ho jande han isde layi tuc NPk 19:19:19@7 gram nu prati litre pani vich mila ke spray karo is to ilava tuc m-45@4gram nu prati litre pani vich mila ke spray karo. dhanwad
सर, हमारे यहां पर हरी मटर, गेंहू और सरसों की खेती होती है। कुछ समय से यहाँ पर पिपरमिंट (मेंथा ) की खेती होने लगी है जिसकी वजह से खेत तो ख़राब हो हो रहे है साथ में पानी भी बहुत बर्बाद होता है। मगर मैं इस सब से हटकर कुछ और फसल की खेती करना चाहता हूँ, तो कृपया मुझे तुलसी और मोती की खेती के वारे में जानकारी प्राप्त करवाएं, धन्यवाद ?
(en)
Maharashtra
तुलसी का वानस्पातिक नाम ओसिमम सैंकशम है यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Drudriha Tulsi,Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum),Babi Tulsi,Tukashmiya Tulsi ज़मीन की तैयारी:- तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें रोपण के तीन महीने के बाद पौधा पैदावार देनी शुरू कर देता है इसकी तुड़ाई पूरी तरह से फूल निकलने के समय की जाती है पौधे को 15 सैं.मी. जमीन से ऊपर रखकर शाखाओं को काटें ताकि इनका दोबारा प्रयोग किया जा सकें भविष्य में प्रयोग करने के लिए इसके ताज़े पत्तों को धूप में सूखाया जाता है तुड़ाई के बाद, पत्तों को सूखाया जाता है फिर तेल की प्राप्ति के लिए इसका अर्क निकाला जाता है इसको परिवहन के लिए हवादार बैग में पैक किया जाता है पत्तों को सूखे स्थान पर स्टोर किया जाता है इसकी जड़ों से कई तरह के उत्पाद जैसे तुलसी अदरक, तुलसी पाउडर, तुलसी चाय और तुलसी कैप्सूल आदि तैयार किये जाते है मोती की खेती की जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
सीप की खेती करना चाहता हूँ इसके लिए सम्पूर्ण जानकारी दीजिये जैसे (जगह, वातावरण,व्यवस्थाएं) ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Vinod Kumar 9050555757 सम्पर्क करे
Dr Saab majh de muh vicho pani aa reha ?
(pb)
Punjab
Gurveer sidhu ji tuci turant iss nu nazdiki doctor to check krwao kyuki issdi janch krke he isda vdia ilagg ho skda hai.
मैं मोती की खेती के बारे में जानकारी कैसे ले सकता हूं ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Manish Vasudev 9417652857 सम्पर्क करे
Punjab
dhanyavad jankari dene k liye
ਕੀ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਰੋਟਾਵੇਟਰ ਤੇ ਸਬਸਿਡੀ ਹੈ ?
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ਲਖਵਿੰਦਰ ਜੀ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਰੋਟਾਵੇਟਰ ਤੇ ਸਬਸਿਡੀ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ Kuldeep Singh 9872028219, 9815387219 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
pearl ki kheti kaise kare ?
(en)
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Motio ki kheti ke bare me puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
कृषि परवेक्षक से कौन कौन सी मदद व सलाह ले सकते है ?
(hn)
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जोगेंद्र जी आप कृषि परवेक्षक से कृषि से संबंधित कोई भी जानकारी ले सकते है धन्यवाद
एक मरले मे कितने फुट होते है ?
(hn)
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सुरजीत जी एक मरले में 272.251 sq फ़ीट होते है धन्यवाद
wrong
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272 scare ft. hunda.
मोती की खेती के बारे में हमें ट्रेनिंग मिल सकती है क्या सर उसकी लागत बतायें कृप्या ?
(hn)
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मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 सम्पर्क करे
मोतियों की खेती के बारे में विस्ता में बतायें ?
(hn)
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 पर कॉल कर सकते है
moti ki kheti kaise hoti h ?
(en)
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Motia ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 se samparak kare.
मोती की खेती कैसे होती है ?
(hn)
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 पर कॉल कर सकते है
मेरे पास एक साहिवाल बछड़ी है जो पहली बार बच्चा दिया है थोड़े टाइम दूध देने के बाद टांगे मारने लग पड़ती है इसका कोई हल बताएं धन्यवाद ?
(hn)
उसे आप Liquid Lactomood 15ml 10-10 बूंदे दिन में तीन बार दें इसके साथ Tablet Lactomax 200 10—10 गोलियां सुबह शाम दें और Milkout पाउडर 1—1 चम्मच सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा
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धन्यवाद सर जी
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latta bann ke choyea kro
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वीर जी लगता बंद के चंदे या फिर भी छलांग मार के बाल्टी गेल इंडिया
ਕਣਕ ਤੇ ਸਪਰੇ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈਗੀ ਜੀ ਕੋਈ ਕੋਈ ਤੇਲਾ ਹੈਗਾ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦਾ ਲਾਸਟ ਪਾਣੀ ਲਾ ਰਹੇ ਆ 9/10 ਨਵੰਬਰ ਦੀ ਬੀਜੀ ਆ ?
(pb)
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ਅੰਮ੍ਰਿਤ ਜੀ ਕਣਕ ਦੀ ਬਲੀ ਵਿੱਚ 5 ਜਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਤੇਲੇ ਹਨ ਤਾਂ ਇਸ ਵਿੱਚ ਸਪਰੇਅ ਕਰਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ।ਇਸ ਲਈ ਤੁਸੀਂ ਐਕਟਾਰਾ @80 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ।
PAU ludhiana @20gram akh ry aa
kanak nu do paani lava fer dena pau ?
(pb)
Maharashtra
gurpreet ji kanak nu pani laun de layi poori jankari nal diti photo to lai sakde ho
Uttar Pradesh
HA DENA PDEGA OR APNI APNI JMIN KE OPR HOTA HAI AAP DEKH SAKTE HAI APNI FASAL KO KYA OSE PANI KI JRORT HAI KI NHI OK G
मोती का व्यवसाय ?
(hn)
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मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Pearl farming ?
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Punjab
Pearl farming is one of the best aquaculture businesses in India. In commercial pearl farming project, the first year investment will be more as you need fixed asset set up. You can assume 3/4 to a 1-acre, the cost of the pearl project would be around 4 lakhs rupees approximately. When it comes to profits in commercial pearl farming project, you can expect 50 to 60% under ideal aquaculture management practices. However, if you put more dedication and hard work into the project even 100% profit possible. There are mainly three types of pearls. • Natural pearls: in this type, the shape of the pearl depends on the original shape of the foreign body. • Artificial pearls: These are artificially made and coated with a synthetic material. • Cultured pearls (freshwater): These are cultured pearls in freshwater such as ponds, rivers etc..you can get the desired shape in this type. • You must have a good source of Oysters to culture in the pond. • You must have some skills of grafting techniques in pearl culture as this is essential for commercial pearl farming project. You can visit nearby pearl farms to learn these tips of freshwater pearl culture. first of all you have to attend 3 days practical training. According to your location you can get training from vinod kumar. he is successful pearl farmer. He is also providing training to new farmers. his contact number is 9050555757.Thank You.
Haryana
All Information and Training please contact with Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381.
Moti ke kheti kaise shuru kre ?
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Motio ki kheti ke bare me puri jankari or is ki training ke lia aap Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 se samparak kare.