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mushroom farming ?
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खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
केसर की खेती कैसे करें और इसका पौधा कहाँ से लें ?
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जो वास्तविक केसर होता है इसके लिए तापमान सामान्य से भी कम चाहिए इसलिए यह UP में नहीं हो सकता अगर आप इसकी पुष्टि करना चाहते हैं तो majeed wari जी से 9419009209 पर कॉल करके जानकारी लें ये जम्मू कश्मीर में पिछले काफी समय से केसर की खेती कर रहे हैं
सर गिर गाय कहाँ मिलेगी ?
(hn)
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अच्छी नसल की गिर गाय लेने के लिए आप Ameer Khan Pathan 9414745465 से सम्पर्क करे
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अच्छी नसल की गिर गाय लेने के लिए आप Ameer Khan Pathan 9414745465 से सम्पर्क करे
जीरा की खेती ?
(hn)
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जीरा भारत का महत्तवपूर्ण मसाला है अच्छे निकास वाली और उच्च कार्बनिक पदार्थों वाली मिट्टी जीरे की खेती के लिए उपयुक्त होती है जीरे की खेती के लिए उस ज़मीन का चयन करें जहां 3-4 वर्ष जीरे की खेती ना की गई हो प्रसिद्ध किस्में:-RZ 19,RZ 209,Gujarat Jeera 2,RZ 223,GC 4 जीरे की खेती के लिए अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें और मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें जीरे की बिजाई के लिए 15 से 30 नवंबर सही समय होता है कतारों में बिजाई के लिए दो पंक्तियों में 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 10 सैं.मी. की गहराई में बोयें बिजाई के लिए बुरकाव ढंग या कतार में बिजाई ढंग का प्रयोग करें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 4-6 किलो बीज पर्याप्त होते हैं बिजाई से पहले कार्बेनडाज़िम 2 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें यह बीजों का फंगस संक्रमक से बचाव करेगा खादों की सही मात्रा के लिए और अतिरिक्त प्रयोग ना करने के लिए मिट्टी की जांच सबसे महत्तवपूर्ण कदम है फसल की अच्छी वृद्धि और अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन 15 किलो (यूरिया 32 किलो) फासफोरस 11 किलो (एस एस पी 66 किलो) और पोटाश 7 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 12 किलो) को गाय के गले हुए गोबर 2 टन के साथ प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के 35 दिनों के बाद डालें बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें दूसरी सिंचाई बिजाई के 10 दिनों के बाद अंकुरण के समय करें उसके बाद तीन सिंचाइयां पर्याप्त होती हैं बाकी की सिंचाइयां बिजाई के 35वें, 60वें और 85वें दिन बाद करें एक बार फसल पक जाये तब सिंचाई ना करें बीज भरने की अवस्था में सिंचाई पत्तों के ऊपरी धब्बा रोग, चेपे और झुलस रोग के हमले को बढ़ाती है जीरे की फसल में नदीन गंभीर समस्या होते हैं नदीनों की जांच के लिए लगातार गोडाई और निराई करें पहली गोडाई बिजाई के 30-35 दिनों के बाद करें जब जीरे की फसल 5 सैं.मी. कद की हो जाये दूसरी गोडाई पहली गोडाई के 20-25 दिन बाद करें और खेत को नदीन रहित रखें रासायनिक रोकथाम के लिए बिजाई के 1-2 दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें जीरे की फसल 100-115 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है कटाई दरांती की सहायता से की जाती है फसल की कटाई के बाद पौधों को फर्श पर खिलार दें और धूप में सुखाने के लिए छोड़ दें धूप में अच्छे से सुखाने के बाद पौधों से दाने अलग कर लें
मोती की खेती ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
सर मुझे भी मोती की खेती करनी है ?
(hn)
Punjab
Pearl Farming ke bare me puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
मैं सीप की खेती करना चाहता हूं ?
(hn)
Punjab
इसके बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से संपर्क कर सकते है इनसे आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी
Goat farming ?
(en)
Punjab
यह बहुत ही लाभदायक व्यापार है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं इनकी खुराक अवस्था भी कम होती है इन्हें आप वृक्षों के पत्ते, हरा चारा, हरे घास के साथ पाल सकते हैं आप बीटल और देसी नसल की बकरियां खरीद सकते हैं , एक तंदरूस्त बकरी 12 -15000 के करीब मिल जायेगी एक तंदरूस्त बकरी एक ब्यांत में 160-190 किलो तक दूध दे देती है इनका एक दिन का दूध 2-4 किलो तक का होता है यह साल में 2-5 बच्चे दे देती है भारतीय मंडी में बकरी के दूध और मीट की बहुत ही मांग है जिस कारण हम इसका आसानी से मंडीकरण भी कर सकते हैं और इसके मीट से खुद प्रोडक्ट तैयार करके या त्योहार के दिनों में खुद मंडीकरण करके अधिक मुनाफा ले सकते हैं
मोती की खेती कैसे शुरू करें ?
(en)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757, Manish Vasudev 9417652857 से सम्पर्क करें
Rajasthan
thnxxx
hf nsal di gaa hai ji sui nu lghbhg 6 mhine ho gye milk 2 2 litre de rhi hai naale rehndi nhi ji 4 vaar tike rkhwa dita ji ?
(pb)
Punjab
ਪਹਿਲਾਂ ਉਸ ਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-OZ ਦੀ ਦਵਾਈ 60ml 3 ਦਿਨ ਭਰਾਉ ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Bolus Flukired DS 6gm ਦਿਉ Powder Agrimen super 1kg 50gm ਰੋਜਾਨਾ Bolus Minotas 7x3 ਡੱਬੀਆ 1 ਗੋਲੀ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਉ, ਫਿਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਉਸ ਨੂੰ Powder Prag Stay gold 600gm 2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਦਿਉ.
ਜਦੋ ਕਰਾਉਦੇ ਹੋ ਉਸ ਨੂੰ ਨਾਲ ਹੀ ਸਰੋ ਦਾ ਤੇਲ ਦਵੋ ਉਸ ਟਾਈਮ ਇੱਕ ਗਲਾਸ
what will be the expenses for pearls farming with 5000 oysters ?
(en)
Punjab
to get proper information about pearl farming you can contact to ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, Odisha, India Tel: +91-674-2465421, 2465446.
ਸਰ ਸੋਲਰ ਪਲਾਟ ਤੇ ਸਬਸਿਡੀ ਕਿਨੀ ਐ, ਕਿਨੇ ਖਰਚ ਦਾ ਪਲਾਟ ਐ ਕਡੈਕਟ ਨੰਬਰ ਦਿਓ ਜੀ ?
(en)
Punjab
ਸੋਲਰ ਸਿਸਟਮ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ Amrik Singh 9814221784 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Hybrid jhona konsa 3 no. pani vich badiya rahega ?
(pb)
Amandeep g 2 ja 3 no. pani ke liye 27p31 dhaan hi thik rehta hai. yeh halke pani mein aur halki jameen mein kaamjaab rehta hai.
Punjab
432 Or 27p31 Or koi hor
मैं मोती की खेती करना चाहता हूँ, यह बताएं कि शुरुआत कैसे करें ?
(hn)
Punjab
Motio ki kheti ke bare me puri jankari or is ki training ke lia aap Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 se samparak kare.
सर मोती की खेती कैसे करते है ?
(hn)
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
ਵਾਈ ਜੀ ਕਣਕ 3086 ਨੂੰ ਪੀਲੀ ਕੁਗੀ ਪੈ ਗਈ ਹੈ ਜੋ ਲਗਭਗ 25 ਦਿਨ ਤੱਕ ਕੱਟਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਵੇ ਗੀ। ਕੀ ਇਸ ਤੇ ਕੋਈ ਸਪਰੇ ਕਰਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ ਜਾਂ ਨਹੀਂ ?
(en)
Binder g peeli kungi da attack fasal de bhut nuksaandayak hai. iss de upper Tilt@200ml ja bumper@200ml nu 150ltr pani de nal mila ke prati acre te spray kro.
iss de upper spray krni pwegi.
मोती की खेती कैसे करें, कितनी लागत लगानी पड़ेगी ?
(hn)
Punjab
Motio ki kheti ke bare me puri jankari or is ki training ke lia aap Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 se samparak kare.
कद्दू (pumpkins ) का सुखारा रोग है, इसके लिए दवाई क्या है ?
(hn)
Anuj g kirpa apni audio record kr ke bheje aur uss mein vistaar se btayein ki pumpkins ko kyaa bimaari hai..woh sookh rhe hai ja fir gaala padh rha hai.
Hello g 128 din di Kanak ho gyi a g Hun usnu pani lgayiye ja nhi g, 2967/Barbat/3086 beej a g ?
(en)
Punjab
ਸਮੇ ਸਿਰ ਬੀਜੀ ਕਣਕ ਨੂੰ ਦਾਣੇ ਪੈਣ ਵੇਲੇ ਤਾਪਮਾਨ ਦੇ ਲੋੜ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਵਾਧੇ ਤੋਂ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਮੀਹ ਨੂੰ ਧਿਆਨ ਵਿਚ ਰੱਖਦੇ ਹੋਏ ਮਾਰਚ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੱਕ ਪਾਣੀ ਲਗਾਓ ਇਹ ਖਿਆਲ ਰੱਖੋ ਕਿ ਪਾਣੀ ਉਸ ਵੇਲੇ ਲਗਾਓ ਜਦੋ ਹਵਾ ਨਾ ਚਲਦੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਕ ਫਸਲ ਡਿਗ ਨਾ ਪਵੇ ਪੰਜ ਦਸੰਬਰ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬੀਜੀ ਗਈ ਫਸਲ ਨੂੰ 10 ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ ਪਾਣੀ ਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ
ਦੇਸੀ ਮੁਰਗੀ ਫਾਰਮ ਦੀ ਸਿਖਲਾਈ ਲੈਣੀ ਹੈ ਮੈ, ਕੋਰਸ ਕਦੋ ਸੁਰੂ ਹੋਣਗੇ ?
(pb)
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ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਲਈ ਇਹ ਜਾਨਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਦਾ ਧੰਦਾ ਦੋ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਮੀਟ ਦਾ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਂਡਿਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੇਇਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਮੀਟ ਦਾ ਧੰਦਾ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਪਾਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬਰਾਇਲਰ ਮੁਰਗੀ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 10 ਹਜਾਰ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦਾ ਧੰਦਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 4 ਤੋਂ 5 ਲੱਖ ਦਾ ਇੰਤਜਾਮ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ , ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਆਡਿਆਂ ਲਈ 500 ਮੁਰਗੀਆਂ ਨਾਲ ਲੇਇਰ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇੱਕ ਮੁਰਗੀ ਦੇ ਇੱਕ ਬੱਚੇ ਤੇ ਤੇ ਜਨਮ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅੰਡੇ ਦੇਣ ਤੱਕ 250-300 ਤੱਕ ਖਰਚਾ ਆ ਜਾਵੇਗਾ ਤੇ ਇਸ ਲਈ 1250 ਸਕੇਅਰ ਫੁੱਟ ਦੇ ਸ਼ੈੱਡ ਜਗਾਂ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਪਵੇਗੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਨਾਬਾਰਡ ਤੋਂ ਲੋਨ ਲੈਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ 25 ਤੋਂ 35 % ਤੱਕ ਸਬਸਿਡੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵਿੱਭਾਗ ਵੱਲੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਵੀ ਦਿਨ ਆਪਣੇ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਤੇ ਪਹੁੰਚ ਕੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈਣ ਲਈ ਫਾਰਮ ਭਰ ਆਊ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਵੀ ਪੋਲਟਰੀ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਆਵੇਗੀ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਦਰ ਵੱਲੋਂ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਦਾ ਹੈ
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thanku sir
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ਮੁਰਗੀ ਪਾਲਣ ਲਈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿੱਚ ਕੇ ਵੀ ਕੇ ਪਠਾਨਕੋਟ ਅਤੇ ਮਾਨਸਾ ਵਿੱਚ ਸਿਖਲਾਈ ਕੋਰਸ ਉਪਲਬਦ ਹਨ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ: 01652-235590 (ਮਾਨਸਾ) 98723-54170 (ਪਠਾਨਕੋਟ)
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ਪਟਿਆਲੇ ਜਾ ਮੋਹਾਲੀ ਕਦੋ ਏ ਸਿਖਲਾਈ
ਕੀ ਰੋਗ ਏ ?
(en)
Sukhbire g ihh bareek machar de kaarn ho reha hai. iss de upper 60ml prati 150ltr pani de hisaab nal mila ke imidacloprid di spray kro. jekar dholi nal spray krni hai tan 10-15ml prati dholi mila skde ho.
rakhda farm mala ?
(pb)
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vikram ji kirpa karke apna swal vistar nal pucho ke tuc ki jankari lena chahunde ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake, dhanwad.
मोतियों की खेती कैसे करें ?
(hn)
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Motio ki kheti ke bare puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
ਤੇਲੇ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰਨ ਦਾ ਔਰਗੈਨਿਕ ਤਰੀਕਾ ਦਸੋ ?
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Punjab
ਨਿੰਮ ਸਪਰੇਅ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਤਰੀਕਾ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੈ: ਨਿੰਮ ਦੀਆਂ 500 ਗ੍ਰਾਮ ਨਿਮੋਲੀਆਂ ਲਓ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨਿਮੋਲੀਆਂ ਨੂੰ ਕੁੱਟ ਕੇ ਪੇਸਟ ਬਣਾ ਲਓ ਇਸ ਪੇਸਟ ਨੂੰ ਸੂਤੀ ਕੱਪੜੇ ਦੀ ਦੋਹਰੀ ਪਰਤ ਵਿੱਚ ਲਪੇਟ ਕੇ ਰੱਖੋ ਅਤੇ 10 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪੂਰੀ ਰਾਤ ਡੁਬੋ ਕੇ ਰੱਖੋ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਕੱਪੜੇ ਨੂੰ ਬਾਰ-ਬਾਰ ਨਿਚੋੜੋ, ਤਾਂ ਜੋ ਸਾਰਾ ਨਿੰਮ ਦਾ ਸਾਰਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਚਲਾ ਜਾਵੇ ਫਿਰ ਇਸ ਘੋਲ ਨੂੰ ਛਾਣ ਲਓ ਅਤੇ ਇਸਨੂੰ ਸਿੱਧਾ ਹੀ ਫਸਲਾਂ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਜ਼ਮੀਨ ਲਈ 3.1 ਕਿਲੋ ਨਿਮੋਲੀਆਂ ਨੂੰ 80-200 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਓ ਅਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ
harvinder g karnal bunt rog da treatment dsso, pkka ilaj ?
(en)
Rajender g iss da koi pakka ilaaj nahi hai...jdo v ihh kanak nu paindi hai iss di spray krni paindi hai...ihh hwaa nal kanak de vich agge di agge fail jandi hai...iss di roktham de lyi tilt@200ml ja bumper@200ml nu 150ltr pani de nal mila ke prati acre te spray kro ..
मोती की खेती कैसे शुरू करें ?
(hn)
Punjab
Motio ki kheti ke bare me puri jankari or is ki training ke lia aap Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 se samparak kare.
sir bakri heat cha ne aundi ki.medicine treat kita jaave ?
(pb)
tuci bakri nu agrimin super powder 40gm rojana dena suru kro , iss nu tuci 20 din lagatr deo , iss nal mineral di kami puuri howegi atee heat vich v jldi aa jawegi .
thank you
bakri bacha sit de ha usda ilaz batein
call me sir
tell me vixen of goats
ਪੀਲੀ ਪੂਸਾ ਦਾ ਕੀ ਝਾੜ ਹੈ ਜੀ ?
(en)
Punjab
ਪੀਲੀ ਪੂਸਾ ਦਾ ਝਾੜ ਔਸਤਨ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ.
मुझे मोती की खेती करनी है ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, ODISHA, INDIA Phone: 91-674-2465421,2465446 FAX: 91-674-2465407 से सम्पर्क करे
सर मसाला प्रोसेसिंग की ट्रेनिंग कहाँ से मिलेगी ?
(hn)
Punjab
जयबीर मसाला प्रोसेसिंग की ट्रेनिंग के लिए आप अपने ज़िले के Krishi Vigyan Kendra, Ambala Phone: 01712822522 या फिर Indian Institute of Food Processing Technology Bathinda 9779289383,9750968424 से सम्पर्क करे
seep ki kheti ?
(en)
Punjab
Motio ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
ਜੀਰੀ ਦੇ ਕਿਸ ਬੀਜ ਦਾ ਸਭ ਤੋ ਵਁਧ ਝਾੜ ਹੈ ?
(en)
Punjab
ਝੋਨੇ ਦੀਆਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕਿਸਮਾਂ:-PR-126:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਘਟ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ 123 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ । PR:-127 ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 137 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ।PR121 ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 140 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।PR 124 ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 135 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।ਇਸ ਵਿੱਚ ਭੂਰੇ ਧੱਬੇ ਦਾ ਹਮਲਾ ਜਿਆਦਾ ਆਉਂਦਾ ਹੈ।PR 122 ਇਹ ਕਿਸਮ 147 ਦਿਨ ਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਝਾੜ 31.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ।PR 123 ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 29 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 143 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।PR-114 ਇਹ ਕਿਸਮ ਨਿਰਯਾਤ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀਂ ਹੈ।ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 27.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।
Punjab
THNXX Y
ke eh pr123 dai hi hai ?
(en)
Punjab
parmvir ji is tra daaneya nu dekh ke pusti nahi kiti ja sakdi ke eh kehdi kisam hai.
Uttar Pradesh
moti ki kheti ke bare me bataye
what is the price of sahiwal cow ?
(en)
Punjab
Sahiwal cow s price depend upon its age and milk capacity. normally sahiwal cow s price is 45000-60000 .if you want purchase please contact with Mr. Sarb Cheema 7508023218.
ਵੱਧ ਝਾੜ ਵਾਲੀ ਮੂੰਗੀ ਦਾ ਬੀਜ ਦੱਸੋ ?
(en)
Haryana
ਹਰਮਨ ਜੀ ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ SML 832,SML 668,ML 818 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਝਾੜ 4-4.9 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ.
Sat Shri Akaal Sir mere kol hf cross cow hai jo lagataar bimar rehndi aa goha v naram krdi aa te susat rehndi aa treatment v karva lia pr kuz din baad fer ove ho jandi aa.Os nu de worming kr k antibiotics v ditta te RSYC BOLUS v dittiya pr koi farak nahi pai riha. koi ilaz dasso please
(en)
Os nu Liquid Livferol 1 litter 50ml rojana deo nall hi homeopathy Liquid Alfavet 50ml swere 50ml shame nu deo ji
अंडा उत्पादन के बारे में बताएं (लेयर फार्मिंग) ?
(hn)
Punjab
लेयर फार्मिंग के लिए आपको 50 फीट लंबाई वाली जगह और 20 फीट चौड़ाई वाली जगह की जरूरत होती है यह आपका 1000 वर्ग फुट जगह बन जाती है यहां आप 1000 बच्चों को रख सकते हैं और यदि आप लेयर का बच्चा अपने फार्म पर तैयार करते है तो आपको बच्चा अंडे देने तक 160—170 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से खर्चा आएगा यदि आप तैयार बच्चा लेकर आते है तो वो आपको 205—210 रूप्ये प्रति बच्चे के हिसाब से पड़ेगा फिर आप उस हिसाब से इनको खरीद सकते है और यदि आप छोटे बच्चों को लेकर आते है तो सबसे पहले आप फार्म पर लाकर 1 किलो गुड को बच्चों के हिसाब से पानी मिलाकर पिलायें फिर आप धीरे धीरे उनको खुराक देनी शुरू करें और यदि आप deep litter में लेयर फार्मिंग करना चाहते है तो उसमें भी कर सकते है उसमें इनका थोड़ा ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है
how can I start a dairy in minimum investment ?
(en)
Rajasthan
आप डेयरी फार्मिंग करना चाहते है तो सबसे पहले आप इनकी ट्रेनिंग जरूर लें, ट्रेनिंग आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केन्द्र से प्राप्त कर सकते है जिससे आपको इस काम के बारे में जानकारी प्राप्त होगी और इन्हें शुरू करने और इनमें लाभ कमाने का सही तरीका पता लग सकता है और आप शुरूआत कम जानवरों से करें जैसे जैसे आपको जानकारी होती रहेगी फिर आप इस काम को बढ़ा सकते है, आप एक बार में इक्ट्ठी गाय/भैंसे ना खरीदें, गायों/भैंसो को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर 1-2 खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है..
Jitna paisa hai laga do
sarson upper aa hai ?
(pb)
Punjab
Sarson vich white rust di problem hai jo fungus disease hai. esdi roktham lyi M-45 @500 gm per acre da spray kr skde ho..
मोती की खेती ?
(hn)
Punjab
Moti ki kheti ke bare me puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
चेपा की रोकथाम के लिए क्या करें ?
(hn)
Punjab
चेपा की रोकथाम के लिए आप imidacloprid@1.5ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
सर,मक्की j 1006 बिजाई का सही समय कब है ?
(hn)
Punjab
रविंदर जी इसकी बिजाई मार्च से सितम्बर महीने में की जाती है धन्यवाद
2 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਗਾਂ ਦੀ AI ਕਰਵਾਈ ਸੀ। ਅੱਜ ਫੇਰ ਮੋਟੀਆਂ ਲੇਸ਼ਦਾਰ ਤਾਰਾਂ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ ਕੀ ਉਹ ਦੁਬਾਰਾ ਹੀਟ ਵਿੱਚ ਆ ਗਈ ਹੈ AI ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਤਰਾਂ ਕਰਨਾ ਨੌਰਮਲ ਹੈ ?
(pb)
Punjab
ਤੁਸੀ Bovimin-b ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Agrimin-i ਗੋਲੀਆਂ ਦਿਓ ਇਸਦੀ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਅੰਦਰ ਤੋਂ ਇਨਫੈਕਸ਼ਨ ਖਤਮ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਤੁਸੀ pregstay gold ਪਾਊਡਰ 50gm ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ.
moti ki kheti ?
(en)
Punjab
Motio ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Regional Research Centre, Anand ATIC, Anand Agricultural University, Anand , Gujarat Ph. & Fax: +91-2692-263699, -388001 se samparak kare.
ਅਦਰਕ ਦੀ ਖੇਤੀ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਓ ਜੀ, ਜੇਕਰ ਹੁਣ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਪਸ਼ੇਤੀ ਤਾ ਨੀ ਹੋਵੇਗੀ ?
(en)
ਇਹ ਫਸਲ ਵਧੀਆ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਚੀਕਣੀ, ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਲਾਲ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਨਾ ਹੋਣ ਦਿਓ, ਕਿਉਂਕਿ ਖੜੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਇਹ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦੇਰ ਬੱਚ ਨਹੀਂ ਪਾਵੇਗੀ ਫਸਲ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ 6-6.5 pH ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਧੀਆ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਉਸ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਅਦਰਕ ਦੀ ਫਸਲ ਨਾ ਉਗਾਓ ਜਿੱਥੇ ਪਿੱਛਲੇ ਵਾਰ ਵੀ ਅਦਰਕ ਦੀ ਫਸਲ ਉਗਾਈ ਗਈ ਹੋਵੇ ਹਰ ਸਾਲ ਇੱਕੋ ਜ਼ਮੀਨ ਤੇ ਹੀ ਅਦਰਕ ਦੀ ਫਸਲ ਨਾ ਲਗਾਓ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ:- IISR Varada: ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਾਜ਼ਾ ਅਤੇ ਸੁੱਕੇ ਅਦਰਕ ਦੇ ਝਾੜ ਲਈ ਵਧੀਆ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ 200 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 90 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਮਈ -ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਾਜ਼ੇ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀ ਰਹਿਤ ਗੰਢੀਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 480-720 ਕਿੱਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬੀਜ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਇਸਦਾ ਬੀਜ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇੰਦਰ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸਦਾ ਪਤਾ ਹੈ Shamsher Nagar, Sirhind, Punjab 140406 ਧੰਨਵਾਦ
ਮਸਰਾ ਨੂੰ ਕਿਹੜੀ ਬਿਮਾਰੀ ਹੈ ਫੁੱਲ ਪੈਣ ਦੇ ਨਾਲ ਹੀ ਸੁੱਕ ਰਹੇ ਹਨ ?
(pb)
ਇਹ ਫੰਗਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਤੁਸੀ ਮ-45 @400 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ.
what is the price of kadaknath ?
(en)
Punjab
The price of Kadaknath 80-100/birds .
सर मैं मोती की खेती करना चाहता हूँ मेरा मार्गदर्शन करें ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757, Manish Vasudev 9417652857 से सम्पर्क करे
(1.) ithrel क्या है इसका प्रयोग भिंडी में कर सकते है, इसका काम क्या है। (2) omistar क्या फंगीसाइड है और इसका टेक्निकल क्या है ?
(hn)
Punjab
devendra जी ethrel एक प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर है जो फसल की ग्रोथ के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसकी मात्रा 5ml को 10 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें एक Amistar फंगसनाशी है जिसमे Azoxystrobin + Difenoconazole नाम का साल्ट मौजूद होता है इसकी स्प्रे ज्यादातर धान, गेंहू, कपास में की जाती है धन्यवाद
Punjab
Ethrel plant growth regulator hai jo fruit crops ki ripening ke liye use hota hai isse bhindi me use nhi krr skye. Or Amistar top me 2 chemicals hain Azoxystrobin and Difenoconazole yeh ek fungicide hai jo kafi diseases ko control krta hai jaise leaf spot in rice, powdery mildew in citrus
मोती की खेती ?
(hn)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, ODISHA, INDIA Phone: 91-674-2465421,2465446 FAX: 91-674-2465407 पर कॉल कर सकते है
nimbu de boote nu flower ta bahut lagde aa par flower jhad jande aa ki karna chahi da hai ?
(en)
Punjab
vikram ji nimbu de ful tat di kami ate fungus de karn digna shuru kar dinde han isd elayi tuc boote nu 3-4 killo vermi compost ate copper oxychloride@3gm prati litre pani de hisab nal spray karo. dhanwad
Punjab
Butte nu full pain to pehla ik spray 2-3% KNo3 di kro te ik spray full pain to baad
dear Sir I want to do gauva farming in my two acre of land can you suggest the variety so that I can proceed, basically I am from odisha rayagada district.
(en)
Punjab
prasanna kumar ji you can sow varieties like Lucknow 49, allahabad safeda, banarsi.Lucknow 49 is considered as commercial cultivar.thank you
ਸਰ ਜੀ ਗਾਂ ਦੇ ਥਨ ਤੇ ਪਹਿਲਾ ਸਿਕੜ ਆਇਆ ਸੀ ਹੁਣ ਸਿਕੜ ਲੱਥ ਕੇ ਉਸ ਥਾਂ ਤੇ ਜਖਮ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ ਕੀ ਇਲਾਜ ਕਰੀਏ ?
(pb)
Punjab
ਤੁਸੀਂ ਗਾਂ ਨੂੰ Liquid Vitum H 1 litter 10ml ਸਵੇਰੇ 10ml ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਦਿਓ Liquid Bovimen-GL 150ml 7ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਜਖਮ ਤੇ Coolmac tube ਲਾਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈਣ ਲਗ ਜਾਵੇਗਾ.
pig ki khansi ki wajah, konsi dvai sabse aacha hoga ?
(en)
Aap usse Injection Enrofloxacin or Avil lagwao ji, isse farak padd jayega aur khani aur infection khtam hoga.
Thank you sir
I want to grow mushrooms. please help me in this ?
(en)
Punjab
Mushroom cultivation can be done inside in well ventilated room, shed, basement, garage etc. Paddy straw mushroom can be grown outside in shady places. Three kinds of mushroom are grown in India. Button Mushroom Popular mushroom grown all over world. Can be grown throughout year. White button mushroom is highly proteinaceous. It is consumed as fresh or canned. It also has medicinal property. Himachal Pradesh, Uttar Pradesh, Punjab, Haryana, Maharashtra, Andhra Pradesh, Tamil Nadu and Karnataka are major mushroom growing states. November to March month is optimum period for growing of button mushroom in UP. For good growth, it requires temperature around 22-25oC, and at reproductive stage it requires temperature around 14-18oC. Straw Mushroom Straw Mushroom is the third popular mushroom variety grown all over world. They are grown on cotton waste mixed with small amount of straw. These are small mushroom having small cone shape cap. cap is dark brown at top. Its three species are cultivated V. diplasia, V. volvacea and V. esculenta in India. Out of these three species Volvariella volvacea is cultivated in Uttar Pradesh. It is also known as “Chinese” or “Paddy” mushroom. These are largely grown in tropical and subtropical regions. It can grow at temperature of 35oC. April to September is optimum period for cultivation of straw mushroom. Oyster Mushroom or Dhingri mushroom Common and edible mushroom. It has tender flesh, velvety texture with mild flavor. It is a rich source of protein, fiber and vitamin B1 to B12. All the varieties or species of oyster mushroom are edible except P. olearius and P. nidiformis which are poisonous. Orissa, Karnataka, Maharashtra, Andhra Pradesh, Madhya Pradesh, West Bengal and most of the North-Eastern hill states are major states which are producing mushroom. October to March is optimum period for growing of oyster mushroom. It survives well in moderate temperature range of 20-30oC with 80-85% relative humidity. Spawn/Mushroom seeds preparation These are available in markets. One can prepared or produce it on farm. Freshly prepared grain spawn is best for use. Substrate preparation Mushroom can be cultivated on a wide range of cellulosic farm waste or other materials like waste paper, cotton waste, cereals straws. Paddy straw or wheat straw is most commonly used material for substrate preparation. Oyster growing in Polythene bag Add Carbendazim@7 gm along with Formaline@125 ml in 100 Ltr water and prepare a mixture. Add 20 kg of wheat straw in above prepared mixture and keep it for 18 hours. After 18 hours, remove wheat straw and place it on firm or netted surface and remove extra water from it. Add 2% spawn in wheat straw and fill this mixture in polythene bag of 15 x 12 inch. Spawned straw is filled about 2/3rd of the capacity of the bag and then tied mouth of polythene bag. Polythene bag is perforated with 2 mm diam. holes, about 4 cm apart, all over the surface for air circulation purpose. Then place bags in shelves in the growing room having Relative Humidity of 80-85% and room temperature of 24-26°C. Keep these bags in safe places and maintain moisture by sprinkling water on it. White cottony mycelium is developed on straw. Wheat straw changes its color to brown and become sound and compact. At this stage cut and remove polythene covering. In polythene, straw become compacted and become cylinder shape. Arrange these cylinder shape straws on shelves and maintained moisture by spreading water on it. 18-20 days after spawning, first mushroom is appeared. With interval of week, two to three flushes will appears. Carry out harvesting of oyster mushroom, when cap of mushroom starts to fold. For harvesting use sharp knife and it can be harvested by twisting off it with fingers. It is consumed freshly or can be dried in sun or with mechanical dryer. Within 45-60 days period, from one ton of dry wheat straw more than 500 kg of fresh mushroom can be obtained.
नमस्कार, हम करेला की खेती करना चाहते है गेंदा के साथ साथ क्या संभव है, खेत में हमने 6 फीट ऊंचा तार का जाल बनाया हुआ है, गेंदा हमने पहली बार लगाया हुआ है। करेला के साथ साथ क्या क्या लगाया जा सकता है। कृपया मार्गदर्शन करे, धन्यवाद ?
(en)
Punjab
अवदेश जी करेले के साथ आप गेंदे की खेती कर सकते है लेकिन आप इसके सिर्फ boundry पर लगा सकते है करेले के साथ अंतर खेती में अगर आप कोई और सब्जी लगाना चाहते है तो वो सिर्फ Boundry पे लगा सकते है क्योंकि इसकी बेल को बढ़ने के लिए ज्यादा जगह चाहिए होती है
मोती की खेती ?
(hn)
Punjab
Pearl farming is one of the best aquaculture businesses in India. In commercial pearl farming project, the first year investment will be more as you need fixed asset set up. You can assume 3/4 to a 1-acre, the cost of the pearl project would be around 4 lakhs rupees approximately. When it comes to profits in commercial pearl farming project, you can expect 50 to 60% under ideal aquaculture management practices. However, if you put more dedication and hard work into the project even 100% profit possible. There are mainly three types of pearls. • Natural pearls: in this type, the shape of the pearl depends on the original shape of the foreign body. • Artificial pearls: These are artificially made and coated with a synthetic material. • Cultured pearls (freshwater): These are cultured pearls in freshwater such as ponds, rivers etc..you can get the desired shape in this type. • You must have a good source of Oysters to culture in the pond. • You must have some skills of grafting techniques in pearl culture as this is essential for commercial pearl farming project. You can visit nearby pearl farms to learn these tips of freshwater pearl culture. first of all you have to attend 3 days practical training. According to your location you can get training from vinod kumar. he is successful pearl farmer. He is also providing training to new farmers. his contact number is 9050555757.Thank You.
ਮੈਂ ਮੇਰੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚੋ ਮਿੱਟੀ ਚੁਕੋਉਣੀ ਹੈ ਜੀ 1 ਜਾ 1,5 ਫੁੱਟ 14 ਬਿੱਘੇ ਬਾਹਣ ਆ ਕੋਈ ਸਲਾਹ ਦਿਯੋ ਜੀ ਕੀ ਸਾਬ ਕਿਤਾਬ ਹੁੰਦਾ ਫੁੱਟ ਦਾ ਜਾ ਕਿਸੇ ਹੋਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਰੇਟ ?
(pb)
Punjab
ਦਲਵੀਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਦੱਸੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਕੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ, ਧੰਨਵਾਦ.
Punjab
ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਮਿੱਟੀ ਚੁਕਵਾਉਣ ਦਾ ਕੀ ਰੇਟ ਹੈ ਜੀ ਇਸ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣ ਲਈ ਕਿਹਾ ਸੀ ਕਿਉਂਕਿ ਮੈਂ ਆਪਣੇ 3 acer ਵਿਚੋਂ ਮਿੱਟੀ ਚੱਕਣੀ(ਬੇਚਨੀ) ਹੈ
Punjab
ਏਦਾ ਤਾਂ ਵਾਈ ਟਰਾਲੀਆਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ, ਜਿਵੇ 200 rs. ਟਰਾਲੀ
मुझे मशरुम की खेती करनी है ?
(hn)
Maharashtra
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरुम का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं, इससे हम 1 फसल ही ले सकते है, पराली मशरुम का समय अप्रैल से अगस्त तक है, इससे हम 4 फसले ले सकते है, मिलकी मशरुम का समय अप्रैल से सितंबर तक है, आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली मशरुम लगा सकते है, पराली मशरुम के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है, पराली के पूले: धान की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे के साथ बांध कर तैयार किये जाते है. पूले के सिरे काट कर बराबर कर लिए जाते हैं. पूलो की क्यिारी लगाना : पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए भिगो दें, गिले पूलो को ढलान पर रख कर अधिक पानी को निकलने दे, कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये, इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये, जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले. इसके ऊपर की सतह उलट होती है. इस प्रकार 5-5 पूलो की 4 सेट में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार की जाती है. सबसे ऊपर 2 पूलो को खोलकर रख दिए जाते हैं. मशरुम का फुटाव करना : बिजाई से 7-9 दिनो के बाद का फुटाव होने लगता है. पानी और हवा का संचार : बिजाई के 2 दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका किया जाता है. मशरुम के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है. मशरुम की तुड़ाई : मशरुम का फुटाव के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है. मिलकी मशरुम : मिलकी मशरुम के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे (12×16), सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि चाहिए. तूडी की तैयारी : सूखी तुड़ी को पक्के फर्श पर खिलार कर 16-20 घंटे पा नी से गिला करे, गीली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे. इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें, तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर खिलार कर ठंडा करे. यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है. बिजाई : ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें. एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज डाला जाता है. लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे. केसिंग : बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 के सेट बना दें, केसिंग में रूडी और रेतली मिट्टी (4:1) होती है. 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित की जाती है. मशरुम का फुटाव: केसिंग मिट्टी डालने के लगभग 2 हफतो में मशरुम के छोटे-छोटे कण निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है. मशरुम की तुड़ाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
ਸਰ ਗਾ ਦੇ ਪੈਰਾਂ ਤੇ ਸਾਲੇ ਹੋ ਗਏ ਪਹਿਲਾ ਮੂੰਹ ਵਿਚ ਸੀ, ਦੁਜੇ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਦਸੋ ਦੁਜੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਵੀ ਹੋ ਰਹੇ ਨੇ ?
(pb)