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hydroponic ke bare main jankari de ?
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पानी में की जाने वाली खेती को Hydroponics कहते है, इसमें हम चारा ऊगा सकते है लेकिन वो बहुत कम मात्रा में ऊगा सकते है फसल के पालन के लिए जरुरी तत्व उसे तरल रूप में दिए जाते है इसमें हम ट्रे में बीजों को उगते है
sir m kya kam kru, koi aisa kam btaye jisme m safal ho sku ?
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jatt ji aap koi bhi kam agar aap proper training ke sath shuru karenege to aap usme safal ho sakte hai. aap murgi palan, sooar palan, bakri palan, dairy farm shuru kar sakte hai lekin in sab se jyada jaruri yeh hai ke aapka interest kisme hai kyuki aap wahi kaam sahi tareeke se kar sakte hai jisme aapka interest ho. kripya aap btaye ke aapka interest knse kam men hai ta ki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
moti ki kheti ke bare me jankari ?
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
ਕੀ, ਬਾਈ ਜੀ ਕਰੰਟ ਅਕਾਉਂਟ ਵਿੱਚ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਜੋ 6000 ਰੁਪਏ ਸਲਾਨਾ ਸਕੀਮ ਦੇ ਪੈਸੇ ਨਹੀ ਆਉਂਦੇ ?
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ਕਰੰਟ ਅਕਾਉਂਟ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਇਦ ਨਹੀ ਪੈਸੇ ਆਉਣਗੇ ਜੀ ਕਿਉਕੀ ਕਰੰਟ ਅਕਾਉਟ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਪੈਸਿਆ ਦਾ ਲੈਣ ਦੇਣ ਬੈਕ ਨਾਲ ਰੱਖਣ ਲਈ ਖੁੱਲਦਾ ਹੈ ਇਹ ਗੱਲ ਕਰਕੇ ਰੁਕਾਵਟ ਆ ਸਕਦੀ ਹੈ ਕਿ ਜਿਮੀਦਾਰ ਦਾ ਕਰੰਟ ਅਕਾਉਟ ਕਿਓ ਖੁੱਲਿਆ
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theek a sir ji
sir ji Sadi gai de ik than Cho dudh boht ghat aonda aa, koi ilaj daso ji ?
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Narinder ji tuci cow nu milkout powder 2-2 chamch swere sham, Lactin bolus 1-1 swere sham ate Anabolite liqued 100ml rojana dena suru kro ..
Os nu powder milk out 900gm 2 chamach swere 2 chamach shame nu deo Liquid Vitum H 10ml swere 10ml shame nu deo nall hi liquid Bovimen-GL 150ml 7ml rojana deo ji es nall farak pe jawega ji
seep kaha se le ?
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
what is the farming of caviar ?
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sir Biyane wali cow ko khali(cotton seed) de sakte hai usse paani me Gilli krke ?
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Aap use pkakar or pani me gilli krke de sakte hai ji iske sath aap use Liquid Vitamor H 10ml swere 10ml shame ko dein or isse cow ki sehat or bhi bhadiya hogi.
sir fish farming shuru kar raha hu plz Kuch help kare ?
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यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है यह डिपार्टमेंट जहाँ खेतीबाड़ी अफसर बैठता है जैसे जैसे कचिहरी, डी सी दफ्तर बोल देते है उसमें बना होता है, मछली पालन के लिए सेम वाले इलाके में 90% सब्सिडी होती है और बाकि इलाकों में 40% सब्सिडी होती है आप अपने ज़िले के FFDA ( fish farming development agency ) दफ्तर में जाएं जो कि आमतौर पर डी सी दफ्तर या कचिहरी में बना होता है, आप वहां ज़मीन की फर्द, स10th र्टिफिकेट और जहाँ तालाब बनाना है वहां की 2 फोटो लेकर जाएं उसके बाद FFDA के अफ़सर आपको फाइल तैयार करवाएंगे और आपकी ज़मीन देखकर तालाब बनाने का तरीका बताएंगे और फिर आपको 40% सब्सिडी के लिए फाइल तैयार कर लोन अप्लाई के बारे में समझा देंगे
क्लोबेंन (chlorimuron) का उपयोग पुदीना(मेंथा) की फसल पर कर सकते है अगर हां तो इसकी मात्रा कितनी होगी ?
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Punjab
Dupont klonen mein chlorimuron ethyl 25%WP naam ka salt hota hai jo weed ko control krta hai.Company ke according eski spray ki sifarish soyabean ki fasl mein hi krne ki sifarish ki jati hai.
मोती की खेती के लिये सीप कहा से खरीदे ?
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Hello sir where can I get oysters for pearl cultivation in Assam ?
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Mr Kabindra for All Information and Training please contact with ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture(Indian Council of Agricultural Research)(An ISO 9001:2015 Certified Institute) Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, Odisha, India Tel: +91-674-2465421, 2465446, Fax: +91-674-2465407 E-mail: director.cifa@icar.gov.in, Website: www.cifa.nic.in
these trees where available ?
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Gurjit kaur ji please ask your question in detail about which trees you want to know so that we can provide you proper information. Thank you
Eh chana or baag vich ke kami h peela kyu h ?
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kaka ji faldar paudhe de uper tat di kami hai isde layi tuc zinc sulphate @3gm nu prati litre pani de hisab nal spray karo ate chane di kirpa karke nede di photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake. tuhade dwara bheji gayi photo vich kuch v clear nahi dikh reha. dhanwad
HF Gaye ka seman kahan se le ?
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Rajnish ji HF cow ka seman app apne jille ke sarkari hospital se lee skte hai waha apko jyada dudh dene wala seman jo unke pass hogga mill jayega ya fir app kisi private dealer se mngwa skte hai app unse jyada duudh dene wale seman ko mngwa skte hai .
Pearl farming ?
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
ਸਰ ਜੀ ਐਚ ਐਫ ਗਾਂ ਹੈ ਉਹਦੇ ਸਿੰਗ ਕੋਈ 6,7 ਲੰਬੇ ਨੇ ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਵੱਢਣ ਦਾ ਸਹੀ ਢੰਗ ਤੇ ਦਵਾਈ ਦੱਸੋ ਜੀ ?
(en)
Tuci us no nazdeeki vetnery hospital le ke jao. Doctor ton usde sing krtva ke leyao, jinne v sing kattan yog honege doctor one hi katt deinge, ohna kol special sing kattan vali taar hundi hai, us nal katte jaange.
Punjab
ਸਰ ਕੀ ਸਿੰਗ ਸਾਰੇ ਨਹੀਂ ਕੱਟੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਮੁੱਢ ਤੱਕ
madhumakhiyo ko prag purn bhojan bnane ki vidhi kya hai ?
(en)
Uttarakhand
अगर पराग संचित करके रखा हो तो पराग में थोडा सा पानी मिला हुआ शहद मिलाकर मधुमक्खियों के बक्सों के अंदर दिया जा सकता है या बाहर एक बडी ट्रे में रखकर दे सकते है.. अगर संचित पराग न हो तो चने या सोयबीन या गेहूँ के आटे में शहद को पानी में मिलाकर और इस घोल का आटे के ऊपर छींटा मारकर बक्सों के बाहर एक बडी ट्रे में रखकर दे सकते हैं
ਵੀਰ ਜੀ ਮੈਂ ਆਰਗੈਨਿਕ ਸਬਜੀਆ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹਾਂ ਆਰਗੈਨਿਕ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਕੋਈ ਵਧੀਆ ਵਿਧੀ ਦੱਸੋ ਜੀ ਜੋ ਕਿ ਤੇਲਾ ਅਤੇ ਸੁੰਡੀਆਂ ਤੋ ਛੁਟਕਾਰਾ ਪਾਉਣ ਲਈ ਕੰਮ ਆ ਸਕੇ ਜੀ ?
(en)
SOONDI DI ROKTHAM: Soondi di roktham de lyi tuc hari mirch 5 kg , lasan 5 kg, akk de patte 5 kg, sukhchain de patte 5 kg, dhatura 5 kg, arind 5 kg nu 10 leetr gau mootar de vich 4 dina de lyi bhio ke rakho. 4 dina baad ihna pattya nu gau mootar de vich maslo ate 1 din lyi fir iss nu shaawe rakh deo. Iss nu dhakk ke ate shaawe rakhna jruri hunda hai. iss ghol nu kise kpde de nal pun lao ate fir 100 ltr paani de hisaab nal ikk acre de vich iss di spray kro. Iss nal soondi control ho jandi hai.
MITES DI ROKTHAM:::::Mites di roktham de lyi khatti lassi ate neem oil di spray kiti ja skdi hai. Iss de vich HEENG 40gm nu paani de vich pa k boil kro. Ihh heeng powder form de vich nai honi chaidi. Jo heeng gum di form vich hundi hai uss di varto krni chaidi hai. iss nu 100 ltr paani de nal mila k prati acre te spray kro. Iss ton ilaava Khatti lassi ja neem oil di v zoo di roktham de lyi spray kiti jandi hai. fasal de upper growth de lyi 4-6ltr khatti lassi ja 1 ltr NEEM oil nu 150 ltr paani de nal mila k prati acre te spray kro
जैविक कीट नियंत्रण का सबसे अच्छा उपाय – नीमास्त्र नीमास्त्र - करें कीट प्रबंधन का घरेलु उपाय जैविक तरीके से नीमास्त्र - एक अकेला ऐसा कीटनाशक जो दिला सकता है आपको कीटों से निज़ात जैविक तरीके से नीमास्त्र का प्रयोग रस चूसने वाले कीटों और छोटी सुंडियों के नियंत्रण के लिए किया जाता है आइये जानें इसे बनाने और प्रयोग करने की विधि सामग्री • 5 किलो नीम या टहनियां • 5 किलो नीम फल • 5 लीटर गोमूत्र • 1 किलो गाय का गोबर बनाने की विधि • सबसे पहले प्लास्टिक के बर्तन में 5 किलो कूटी हुई नीम की पत्तियां लें और 5 किलो नीम के फल पीस कर या कूटकर डालें • उसके बाद 5 लीटर गोमूत्र और 1 किलो गाय का गोबर डालें • इन सभी सामग्री को डंडे से हिलाकर जालीदार कपड़े से ढक दें • यह 48 घंटे में तैयार हो जायेगा 48 घंटे में चार बार डंडे से हिलाएं अवधि प्रयोग - नीमास्त्र का प्रयोग 6 महीने तक कर सकते हैं सावधानियां – • नीमास्त्र को छांव में रखें और धूप से बचाएं • गोमूत्र प्लास्टिक के बर्तन में लें या रखें छिड़काव - 100 लीटर पानी में तैयार नीमास्त्र को छान कर मिलायें और स्प्रे मशीन से छिड़काव करें
sir ki bhindi nu tray de vich tyar sakde han ?
(en)
Daljeet ji bhindi di sidhi bijai kiti jandi hai isnu tray vich nahi ugaya janda. dhanwad
देसी मुर्गी में 45 दिन के बाद चूजों को 1 दिन में कितना दाना देना होता है ?
(en)
Punjab
देसी मुर्गी में 45 दिन के बाद चूजों को 1 दिन में कम से कम 30 ग्राम दाना देना चाहिए
Madhya Pradesh
Thanks sir ji
Sheep farming ?
(en)
Punjab
Commercial sheep farming is a process of rearing sheep for commercial production of meat, milk and wool (leather). Commercial sheep production is increasing day by day as the demand for meat is growing. Youth and other people from different professions getting into sheep farming business as this has huge scope of getting
Punjab
ashivan breed lene ke liye ap dr p mina ji se 7597104404 par call kare.
sir g mycorrhiza bio fertilizer ਕਮਾਦ di bajai time payie ja baad vich ate isda ki fayda hai ?
(en)
Punjab
Mychorhiza ekk bio fertilizer hai jo root formation and nutrient availability lyi bhut vdia kmm krda hai. Sugarcane di fasal vich esnu germination to baad vich hi paoun nal benefit milega.
what is the meaning of CoPb in sugarcane varieties?
(en)
Punjab
Aritapl ji Co denotes for Coimbatore also known as kovia which is a major city in Tamil nadu , Sugarcane Breeding Institute (SBI) is a central research institute in Coimbatore, India. It was established in 1912 and is affiliated to Indian Council of Agricultural Reserch. Pb means Punjab the variety that is researched for Punjab region. Thank you
ਵੀਰ ਜੀ ਜੇ ਗਾਂ ਦੀ ਵਸ਼ੀ ਦਾ ਭਾਰ ਵਧਾਉਣਾ ਹੋਵੇ ਤਾ ਕਿਹੜੀ ਫੀਡ ਪਾਈਏ ਜਿਸ ਕਰ ਕੇ ਜਲਦੀ ਗਬਨ ਹੋਵੇ ਕਿਰਪਾ ਕਰ ਕੇ ਦਸੋ ਜੀ ?
(en)
Punjab
veer g aap ji da bht bht dhanvaad
Sir Ludhiana university vicho narme da seed mil juga ?
(en)
Punjab
Gurpinder Singh ji Narme da beej tusi PAU Ludhiana to khreed sakde ho. (kisam = F-2228, Packing = 3.5 KG, Rate = 210/rs)
sir where can I get training of pearl farming in Punjab, is it profitable ?
(en)
Punjab
Sandeep Singh ji punjab vich training len lai tusi Manish Vasudev 9417652857 nal samparak kar sakde ho.
sir chandan de bute laune aa ?
(en)
Punjab
hnji tusi punjab vich chandan de plant lga sakde ho. jeyada tazarba pushan layi tusi satnam singh 097798 46777 number te gal kar sakde ho ehna ne lgaye hoe hun.
मुझे मोती(सीप) पालने का प्रशिक्षण चाहिये कहाँ से मिलेगाअच्छे संस्थान की जानकारी देने की कृपा करें ?
(en)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
digital soil testing matter da price daso je te e kitho milaga je ?
(en)
Punjab
digital soil testing matter da lagpag 75000-80000 rupees rak milega te eh kharidan layi tusi 9958733844 number te harsh ji nal contact kar sakde ho.
SML 668 moong kitne din me tyar hoti hai ?
(en)
Punjab
SML-668 moong variety 61 days mein harvesting ke liye tyar ho jati hai.
how to grow a pear tree ?
(en)
Punjab
It can be grown on variety of soil ranging from sandy loam to clay loam. It gives best results when grown in deep, well drained, fertile soil without having any hard pan upto 2meter depth. pH of soil should not be more than 8.7.POPULAR VARIETIES :- Patharnakh,Punjab Nakh,Punjab Gold,Punjab Nectar.Planting is completed in January Month. One year old plants are used for planting.Plants are planted at distance of 8 x 4 m. Before planting, clear land and remove remains of earlier plants. Then levelled land properly and give gentle slope for water drainage. Dig a pit of 1x1x1 m size and fill pits one month before planting in November month with top soil and add well rotten farm yard manure and then allow it to settle. Finally pit should be filled with sub soil mixed with 10-15 kg of well decomposed cow dung, 500 kg SSP and drench the pit with Chlorpyriphos@50ml/10litre of water per pit. After planting, irrigation should be done.For planting, square or rectangular planting can be adopted. In hilly areas contour system of planting is used for cultivation.The seedling rootstocks used for pear are Kainth. Collect fully mature seeds of Kainth from September end to October first week crops. Extract seeds and place them in wooden box containing alternate layer of moist sand in December month for 30days. In January month sow them in nursery. In 10days seeds get germinate. Seedling is ready for grafting in January of next year. Place seeds in wooden box containing moist sand layer for germinate. They get germinated with 10-12days. After then, place seedling in field at distance of 10cm. Keep 60cm distance after every four lines. Seedling is ready for grafting in December-January.When Crop is 1-3 year, apply 10-20 kg of well decomposed cow dung, 100-300 gm of Urea, SSP@200-600 gm, MOP@150-450 gm per Tree. For 4-6 year old crop, apply 25-35 kg of cowdung, Urea@400-600 gm, SSS@800-1200 gm and MOP@600-900 gm per Tree. For 7-9 year old crop, apply Cowdung@40-60 kg, Urea@700-900 gm, SSP@1400-1800 gm, MOP@1050-1350 gm per tree. For 10 year and above, apply 60 kg of Cowdung, Urea@1000 gm, SSP@2000 gm, MOP@1500 gm per tree.Spray with Diuron @ 1.6 kg/acre as pre-emergence after completing ploughing. The weeds can be controlled as post emergence by Glyphosate @ 1.2 Ltr/acre or Paraquat @ 1.2 Ltr/acre in 200Ltr of water when weeds are 15-20 cm in height.A well distributed average rainfall of 75–100cm is required throughout the year for pear cultivation. It needs regular irrigation after transplantation. In summer irrigate crop with 5-7days interval whereas increased irrigation interval to 15days in winter months. In January month stop irrigating trees. Give flood irrigation to bearing tree in summer month it will help to increased fruit quality and size.For local markets fruits are harvested at fully mature stage and in case of distant markets firm and green fruits are picked. Delayed picking reduces storage life, unattractive colour and insipid flavour. Hard peach variety required near about 145days to mature whereas semi soft peach varieties required near about 135-140days for harvesting. Thank you
बटेर औरंगाबाद महाराष्ट्र में कहां मिलेगी ?
(en)
Punjab
सीताराम जी बटेर चूजे लेने के लिए आप Jogesh hire 9075749975,9049218008 से सम्पर्क कर सकते है
sugarcane ki full jankari 98014 variety ?
(en)
Punjab
Co 98014: यह अगेती बिजाई वाली किस्म Sugarcane Breeding Institute, Regional Centre, Karnal द्वारा Co 8316 x Co 8213 के क्रॉस से तैयार की गई है यह किस्म लंबी और मध्यम पतले गन्नों वाली होती है गन्नों का रंग हरा पीला होता है इसमें फाइबर की मात्रा 14 प्रतिशत होती है इसका गुड़ भूरे रंग का होता है यह किस्म काफी हद तक रतुआ रोग के प्रतिरोधक है यह किस्म सामान्य वातावरण, कम उपजाऊ मिट्टी और जल जमाव वाली स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म Coj 64 किस्म से 22 प्रतिशत अधिक उपज देती है
कोकोपीट कैसे यूज़ करते हैं क्या खीरा लौकी उगाने में प्रयोग कर सकते हैं ?
(en)
Punjab
संजीव की कोकोपीट एक माध्यम है जिसमे सब्जियों के बीज उगाये जाते है हांजी आप लौकी और खीरा की नर्सरी त्यार करने के लिए ट्रे में इसका इस्तेमाल कर सकते है धन्यवाद
Madhya Pradesh
कोकोपिट को पानी मे डालकर रख दें और फिर उसका उपयोग कर सकते हैं, इसका उपयोग ट्रे में किया जाता है, जिसमें 104 खाने होते और उसी में बीज को उगाया जाता है फिर खेत में उसका लगाया जाता है
sir ji es bar kanak da ki Price hai ji ?
(en)
Punjab
knak da Government rate @1840 rupees per quiental hai g.
ਮੈ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਖੋਲ੍ਹਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ ਮੈ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਇਸ ਦੀ ਟਰੇਨਿੰਗ ਕਿੱਥੇ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਫਿਰੋਜ਼ਪੁਰ ਜਿਲੇ ਵਿੱਚ ਮੈ ਰਹਿੰਦਾ ਹਾਂ ?
(en)
Punjab
ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੀ ਮਿਤੀ ਅਜੇ ਜਾਰੀ ਨਹੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣਾ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਾਲਾ ਫਾਰਮ ਗੁਰੁ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ ਭਰ ਆਉ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਹੁਣ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਹੋਵੇਗੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਨਾਭਾ, ਗੁਰਦਾਰਪੁਰ ਤੇ ਖਰੜ ਵਿੱਚੋ ਵੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਹ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਹਨ ਜਿੱਥੇ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਬਾਕੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਹ ਫਾਰਮ ਭੇਜ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਫਾਰਮ ਨੂੰ ਭਰ ਕੇ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਪਤੇ ਤੇ ਕੋਰੀਅਰ ਭੇਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਫਿਰ ਆਪ ਜਾ ਕੇ ਫੜਾ ਸਕਦੇ ਹੋ
Punjab
Tusi KVK frozpur sparnk kar sakday. Tusi call kar kay name address phone number lakha do training tay ap no bla lan gay. kvk da no 18001801551 lay sakday ho.
mai pig farm kholna chahunda hnn isdi traning kithe hundi hai ?
(en)
Punjab
ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੀ ਮਿਤੀ ਅਜੇ ਜਾਰੀ ਨਹੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣਾ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਾਲਾ ਫਾਰਮ ਗੁਰੁ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ ਭਰ ਆਉ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਹੁਣ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਹੋਵੇਗੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਨਾਭਾ, ਗੁਰਦਾਰਪੁਰ ਤੇ ਖਰੜ ਵਿੱਚੋ ਵੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਹ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਹਨ ਜਿੱਥੇ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਬਾਕੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਹ ਫਾਰਮ ਭੇਜ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਫਾਰਮ ਨੂੰ ਭਰ ਕੇ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਪਤੇ ਤੇ ਕੋਰੀਅਰ ਭੇਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਫਿਰ ਆਪ ਜਾ ਕੇ ਫੜਾ ਸਕਦੇ ਹੋ
Ludhiana kisan mela kini date da hai ?
(en)
Punjab
Amandeep Singh ji Pau Ludhiana Kisan Mela 15-16/3/19 nu hai ji.
ਸਰ ਸੋਲਰ ਮੋਟਰ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਉ ਜੀ ਸਬਸਿਡੀ ਹੈ ਕਿ ਨਹੀਂ ?
(en)
Punjab
Satnam ji Solar motar bare puri jankari lai tusi Amrik Singh 9814221784 ji nal samparak kar sakde ho ehna valo tuhanu visthar vich jankari diti javegi.
Punjab
ਧੰਨਵਾਦ ਜੀ
pearl farming ?
(en)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
pearl farming how to start and investment ?
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
ਇਹ ਵਛੀ ਕਿਸ ਨਸਲ ਦੀ ਹੈ ?
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ਗੁਰਧਿਆਨ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵਲੋਂ ਭੇਜੀ ਗਈ ਫੋਟੋ ਅੱਪਲੋਡ ਨਹੀਂ ਹੋਈ ਹੈ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਫੋਟੋ ਦੁਬਾਰਾ ਅੱਪਲੋਡ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸ ਵਾਰੇ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
moti ki kheti kaise karein ?
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Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Sir br105 da kinna man niklda hai ?
(en)
Haryana
Kuldeep ji Br105 kisam da jhaad lagbhag 72-75 man nikal janda hai.. dhanwad
seep farming aur fish farming ke liye training kaha uplabdh hogi iski jankari de ?
(en)
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है यह डिपार्टमेंट जहाँ खेतीबाड़ी अफसर बैठता है जैसे जैसे कचिहरी, डी सी दफ्तर बोल देते है उसमें बना होता है, मछली पालन के लिए सेम वाले इलाके में 90% सब्सिडी होती है और बाकि इलाकों में 40% सब्सिडी होती है आप अपने ज़िले के FFDA ( fish farming development agency ) दफ्तर में जाएं जो कि आमतौर पर डी सी दफ्तर या कचिहरी में बना होता है, आप वहां ज़मीन की फर्द, स10th र्टिफिकेट और जहाँ तालाब बनाना है वहां की 2 फोटो लेकर जाएं उसके बाद FFDA के अफ़सर आपको फाइल तैयार करवाएंगे और आपकी ज़मीन देखकर तालाब बनाने का तरीका बताएंगे और फिर आपको 40% सब्सिडी के लिए फाइल तैयार कर लोन अप्लाई के बारे में समझा देंगे
jankari deo kehda rog hai ki solution hai ?
(en)
khushwinder g kirpa kr ke photo dubaara upload kro. tuhade dwaara bheji gyi photo sahi nahi hai.
upload hi nahi ho rahi
sml 668 da kina time ha and is da jhaad kina ha ji ?
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Punjab
isda ostan jhaad 4.5q/acre hai ate eh 60 dina vich pakk k tyar ho jndi hai
fish farming ?
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FFDA (Fish Farming Development agency) is providing training for fish farming. In every agriculture department there is a specific department of FFDA which provide training for 5 days free of cost. Please visit FFDA (Fish Farming Development Agency) office of your district for Fishery training. And fill form for training. When any training will be organized by the, in future they will call you and inform you. There will be free training for 5 days. If you will start fish farming after training, you can earn more from it.
mujhe ek acre main fish farming karni plz Kuch btayein.
onion has yellow colour on the upper side which fungicide use to control the yellow colour ?
(en)
Punjab
In onion spray NPK 19.19.19 @1 kg per acre in 100 liter of water its overcome the nutrient deficiency..
मुर्गी पालन के लिए लोन कहा से ले, जिला. अमरोहा, यूपी ?
(en)
Punjab
मुर्गी पालन शुरू करने से पहले कुछ बेसिक बातों का ध्यान ज़रूर रखें जैसे आप ट्रेनिंग लेकर जरूर शुरू करें जिससे आपको फीड वगैरह का पता चलेगा और क्योंकि पोल्ट्री में बायोसिक्योरिटी रखनी बहुत जरूरी है यदि एक बार बीमारी फार्म पर आ गई तो बहुत कम समय में पूरे फार्म तक पहुंचती है इसलिए सभी बातें ध्यान में रखकर ही यह काम शुरू करें और यह भी सलाह है कि इस काम को बड़े स्तर पर एकदम से ना शुरू करें एक बार थोड़ी मुर्गियों से शुरू करें बाकी आपको बता दें कि व्यापारिक स्तर पर 5 एकड़ में आप 50000 मुर्गियां रख सकते हैं और इससे आपको कुल 5—7 लाख रूपये तक का खर्चा आ जाएगा यदि नस्ल की बात की जाए तो लेयर में अंडों के लिए BV 300 नस्ल सबसे बढ़िया रहेगी यह नस्ल 18 सप्ताह की उम्र में अंडे देना शुरू कर देती है और 19 सप्ताह से 80वें सप्ताह तक लगभग 370 अंडे देती है प्रति मुर्गी के लिए 1.5—2.0 फुट जगह की जरूरत पड़ती है पहले दिन से लेकर अंडे देने तक एक मुर्गी पर लगभग 250—300 रूपए खर्चा आ जाता है और ब्रॉयलर नस्लों में से वैनकोब 400 नस्ल बड़े स्तर पर सबसे बढ़िया मानी जाती है यह 35 दिनों तक लगभग 3 किलो फीड खाकर तकरीबन 1900—2000 ग्राम की हो जाती है और बाकी ज्यादा गर्मी और ठंड को काफी हद तक सहन करने की क्षमता रखती है बाकी आपके रख रखाव और बीमारियों पर टीकाकरण का खर्चा अलग है यह कुछ प्राथमिक जानकारी थी अंतत आप पहले किसी सफल पोल्ट्री फार्मर से जरूर मिलें आपको अन्य बातों एवं बारीकियों का पता लगेगा लोन लेने के लिए आपके पहले अपने नज़दीकी KVK से ट्रेनिंग लेनी होगी उस ट्रेनिंग के सर्टिफिकेट पर आप लोन के लिए अप्लाई कर सकते हो वहां आपको इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो जाएगी
Punjab
मुर्गी पालन शुरू करने से पहले कुछ बेसिक बातों का ध्यान ज़रूर रखें जैसे आप ट्रेनिंग लेकर जरूर शुरू करें जिससे आपको फीड वगैरह का पता चलेगा और क्योंकि पोल्ट्री में बायोसिक्योरिटी रखनी बहुत जरूरी है यदि एक बार बीमारी फार्म पर आ गई तो बहुत कम समय में पूरे फार्म तक पहुंचती है इसलिए सभी बातें ध्यान में रखकर ही यह काम शुरू करें और यह भी सलाह है कि इस काम को बड़े स्तर पर एकदम से ना शुरू करें एक बार थोड़ी मुर्गियों से शुरू करें बाकी आपको बता दें कि व्यापारिक स्तर पर 5 एकड़ में आप 50000 मुर्गियां रख सकते हैं और इससे आपको कुल 5—7 लाख रूपये तक का खर्चा आ जाएगा यदि नस्ल की बात की जाए तो लेयर में अंडों के लिए BV 300 नस्ल सबसे बढ़िया रहेगी यह नस्ल 18 सप्ताह की उम्र में अंडे देना शुरू कर देती है और 19 सप्ताह से 80वें सप्ताह तक लगभग 370 अंडे देती है प्रति मुर्गी के लिए 1.5—2.0 फुट जगह की जरूरत पड़ती है पहले दिन से लेकर अंडे देने तक एक मुर्गी पर लगभग 250—300 रूपए खर्चा आ जाता है और ब्रॉयलर नस्लों में से वैनकोब 400 नस्ल बड़े स्तर पर सबसे बढ़िया मानी जाती है यह 35 दिनों तक लगभग 3 किलो फीड खाकर तकरीबन 1900—2000 ग्राम की हो जाती है और बाकी ज्यादा गर्मी और ठंड को काफी हद तक सहन करने की क्षमता रखती है बाकी आपके रख रखाव और बीमारियों पर टीकाकरण का खर्चा अलग है यह कुछ प्राथमिक जानकारी थी अंतत आप पहले किसी सफल पोल्ट्री फार्मर से जरूर मिलें आपको अन्य बातों एवं बारीकियों का पता लगेगा लोन लेने के लिए आपके पहले अपने नज़दीकी KVK से ट्रेनिंग लेनी होगी उस ट्रेनिंग के सर्टिफिकेट पर आप लोन के लिए अप्लाई कर सकते हो वहां आपको इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो जाएगी
sir mujhe grampriya or karaknath ke chiks lene hain. bihar main kahan milengen ?
(en)
Punjab
Inamul जी चूज़े और इनके बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए आप 04024018687 Poultry Chicks Hydrabad से संपर्क कर सकते है
call me 7903647427
ਸਰ ਕਣਕ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਲਾਣਾ ਹੈ ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰਕੇ ਮੌਸਮ ਸੰਬੰਧੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਉ ਜੀ ਧੰਨਵਾਦ ?
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Punjab
ਹਰਪਿੰਦਰ ਜੀ ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਕੱਲ੍ਹ ਹਲਕੀ ਬੱਦਲਵਾਈ ਰਹੇਗੀ ਪਰਸੋ ਮੀਹ ਪੈਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਲਾਹ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕੇ ਕਣਕ ਨੂੰ ਹਾਲੇ ਪਾਣੀ ਨਾ ਲਾਓ
सुअर पालन में जाति का कोई बंधन तो नहीं है कि इस जाति वाला यह काम नहीं कर सकता कृप्या बतायें ?
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सुअर पालन में जाती का कोई बंधन नहीं है यह कोई भी कर सकता है इसमें तो काम करने वाले की सोच के ऊपर ही निर्भर करता है के वह क्या सोचता है जी
ludhiana kisan mela kini date da a ?
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Punjab
pau kisan mela 15-16 march 2019 da hai.
sir vachha hai 6 mahine da ohdi akh te stt lg gyi. suj gyi hai te vicho pani aunda ohnu kehdi dwai deyie te je injection laune hon taa kehde layie khnde aa ik course hunda 3 dina da injection da kehde kehde hunde a, boric acid paa ti hai akh ch ?
(en)
Punjab
Bhag ji tuci vashe nu Betnesol injection 1ml, Monocef injection 1gm lgwao, isde nal farak pann lgg jawega, baki tuci boric acid di varto krde rho, ehna nal jldi thik ho jawega.
jankari deo ji kehda rog hai te ki hal hai ?
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Punjab
Khushwinder singh g tuhade dobara bheji gyi photo upload nhi hoyi hai.kirpa krke photo dobara bhejo ta jo tuhanu poori jankari ditti ja ske g..Dhanwaad
Machli ko uske body weight ka kitna parsent khna dena chahiye puri jankari ?
(en)
Machli ko 5 % of body weight ke hissab se daana dena chahiye.
sir safed musli ki kheti krna chahta hu yha tapman june me 40 deg july se october me 30 deg aur november se jan me 10-15 deg rhta hai kripya btaye yha kheti safal ho skti hai ek acre me kitna beej lgega fasal kb prapt hogi sukhi fasal ek acre me kb prapt hogi lagat labh btaye ?
(en)
Punjab
सनत जी सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्टी का pH 6.5-8.5 होना चाहिए आप इसकी किस्मे जैसे RC-2, RC-16, RC-36, RC-20, RC-23, RC-37 and CT-1,MDB-13 and MDB-14 की बिजाई कर सकते है सफेद मूसली के लिए अच्छी तरह से तैयार बैडों की जरूरत होती है बिजाई से पहले ज़मीन की तैयारी के लिए एक बार 2-3 गहरी जोताई करें ज़मीन की तैयारी आम-तौर पर अप्रैल-मई के महीने में की जाती है सफेद मूसली की बिजाई के लिए उचित समय जून से अगस्त तक का होता है पौधे के विकास के अनुसार पौधों के बीच 10x12 इंच का फासला रखें इसकी बिजाई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है इसकी बिजाइसके प्रजनन के लिए आम-तौर पर गांठों या बीजों का प्रयोग करें इसके उचित विकास के लिए 450 किलो बीजों का प्रयोग करें ई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है सफेद मूसली की बिजाई 1.2 मीटर चौड़े और आवश्यकता अनुसार लम्बे बैडों पर करें नए पौधे तैयार करने वाले बैड अच्छी तरह से तैयार करें इसकी बिजाई छिड़काव के द्वारा की जाती है बिजाई के बाद बैडों को हल्की मिट्टी से ढक दें बढ़िया विकास के लिए मलचिंग भी की जा सकती है बीज 5-6 दिनों में अंकुरण होना शुरू होना कर देते है और पौधे बिजाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई से 24 घंटे पहले बैडों को पानी दें, ताकि नए पौधों को आसानी के साथ उखाड़ा जा सके खेत की तैयारी समय, रूड़ी की खाद 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ गोबर डालें और मिट्टी में मिलाये जैविक खादें जैसे कि रूड़ी की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ डालर मिट्टी में मिलाये सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो, मिउरेट ऑफ़ पोटाश 50 किलो और हड्डियों का चूरा 100 किलो प्रति एकड़ डालें 3 महीने तक कसी की सहायता के साथ गोड़ाई करें और मेंड़ के साथ मिट्टी लगाएं अंकुरण के बाद 2-3 बार करें अगर पौधे के विकास में कोई कमी दिखाई दें, तो तुरंत आवश्यक स्प्रे करें बढ़िया विकास के लिए 20-22 दिनों के फासले पर सिंचाई करें बारिश की ऋतु में, सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर बारिश ना होने पर सिंचाई सही फासले पर करें सिंचाई जलवायु और मिट्टी पर भी निर्भर करती है इस फसल के पौधे बिजाई से लगभग 90 दिन के बाद फल देना शुरू कर देती है इसकी कटाई सितम्बर-अक्तूबर महीने में की जाती है कटाई पत्ते पीले पड़ने और सूखने पर की जाती है
ਇਹ ਵੱਛੀ ਕਿਸ ਨਸਲ ਦੀ ਏ ਜੀ ?
(en)
ਇਹ ਸਾਹੀਵਾਲ ਨਸਲ ਹੀ ਹੈ.