Punjab
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motio ki kheti karna chahte hai project cost ?
(en)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
kehda rog hai isda ilaaz te kyu hoya ?
(en)
Punjab
Khusgwinder singh ji tuahde walo bejji gayi photo upload nahi hoi hai kirpa krke uss nu dubara upload kro tan jo tuhanu sahi jankari diti jaa skee.
muje 1-1 year ke something ki buffalo ki female calf lena h 15-18 letter ke buffalo ke d(atia-madhya pradesh) me kahi aas paas mile to achhe rate me ?
(en)
Rajesh ji yaddi app 1-1 year ki 15-18 liter duudh deni wali bufflow ki calf lena chahte hai ton yeh apko 20-25000 tak mill jayegi .iske liye app apne nazdiki dairy farm per khudd jakar dekhe aur apko bufflow ka duudh v ptaa lggega aur calf ki gorwth ka v ptaa lggega..
sir majj ne chhoti katti de poonch te parr rakh dita nicho thodi jehi poonch vadhi gye koi vdia ilajj dso ?
(en)
Punjab
Ravinder singh ji iss nu tuci turant nazdiki doctor nu bhulla ke ilagg krwana suru kro iss te pattia v krwao ji ..
chamomile ki kheti ke bare mein information chahiye ?
(en)
Maharashtra
कैमोमाइल इसे बबूने का फूल भी कहा जाता है यह एक प्रकार का हर्ब है यह Asteraceae परिवार से संबंध रखता है इस परिवार के सभी पौधों का उपयोग दवाइयां बनाने के उद्देश्य से किया जाता है यह पौधे मुख्य रूप से विश्व के कुछ हिस्सों में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं इस हर्ब में कई गुण पाए जाते हैं यह शरीर में होने वाले आंतरिक और बाहरी दोनों समस्याओं में मदद करता है कैमोमाइल में एंटीसेप्टिक, एंटी एलर्जी, एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल आदि गुण पाए जाते हैं, मिट्टी— कैमोमाइल की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली, भुरभुरी, समतल, ढाल वाली भूमि उचित होती है बलुई दोमट भूमि सबसे उपयुक्त होती है बीज की मात्रा— नर्सरी में इसके बीजों को उगाकर पौधों की रोपाई के द्वारा प्रति हेक्टेयर 750 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है पौध रोपण— अक्तूबर—नवंबर में नर्सरी में इसकी पौध तैयार की जाती है और नवंबर के मध्य में 50x 30 सैं.मी. के अंतराल पर पौधों का रोपण किया जाता है बीजों की सीधी बिजाई भी की जा सकती है लेकिन उसमें बीज अधिक मात्रा में लगते हैं, खादें — 10 से 15 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या 5 टन वर्मी कंपोस्ट पर्याप्त होता है 80 :40: 40 किलो नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई के समय डाल देनी चाहिए 20 किलो नाइट्रोजन दो बराबर मात्रा में डालें सिंचाई — पहली सिंचाई रोपाई के तुरंत बाद और फिर आवश्यकतानुसार 2—3 सिंचाई करनी चाहिए फूलों की तुड़ाई — पहली तुड़ाई रोपाई के 65—70 दिनों के बाद करें और इसके बाद 15 दिन के अंतराल पर करें पांचवी और छठी तुड़ाई इसके बीजों के लिए करनी चाहिए उपज —इसके ताजा फूलों का उत्पादन 5000—7000 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा सूखे फूलों का उत्पादन 1000—1500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, तेल की मात्रा 0.80प्रतिशत, तेल की उपज 7—8 किलोग्राम प्राप्त होती है
tell about Thai guava variety ?
(en)
Punjab
Chetan ji thai apple looks like green apple and the weight of this fruit is 150-220 gram. it is the variety of Thailand. fruits starts after6-7 months. plant height is 10-15 ft. For one acre about 450-500 plants are required. The biggest market for this fruit is in Hydrabad.
strawberry variety for Rajasthan ?
(en)
Punjab
You can sow varieties like Pusa Early dwarf, Katrain Sweet, Chaubatia Abhichal, Shasta, Redfort, Tioga, Torrey, Selva (mid hills)
Winterdawn, Camarosa, Sweet Sensation, SA are best varieties for states like Rajasthan, Punjab and Haryana
मोती की खेती की जानकारी ?
(en)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
sir g bio fertilizer kammad di bijai time paa sakde aa ?
(en)
Punjab
Babbal ji kirpa karke daso ke tuc kehde biofertilizer di gal kar rahe ho ta jo tuahnu is bare poori jankari diti ja sake.
kechua kahan se Milenge ?
(en)
Punjab
jagseer ji aap kenchue lene ke liye Angrej Singh Bhullar 9417613396 ji se sampark kar sakte hai. dhanywad
Punjab
Angraj singh bhullar kahan se belong karte hai
Sir cow ki bacchi kitne mahine me heat pr aa jati hai or tika kitne time tak bharvana chahiye ?
(en)
Rajasthan
bhajan singh ji cow ki bacchi lagpag 2.5 - 3 year tak heat me aa jati hai . lekin jab bacchi to teeka bharana hai us time uska weight 3 quantal hona chahiya. agar weight 3 quantal hai to jab woh heat me aaye to heat me aane ke 18-36 gante ke beech me aap usko teeka bharva sakte hai.
ਸਰ ਜੀ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਢਾਈ ਸਾਲ ਦੀ ਝੋਟੀ ਉਹ ਬੋਲ ਨਹੀ ਰਹੀ ?
(en)
Punjab
ਗੁਰਭੇਜ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Agrimin super powder 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Minotas bolus ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਜਲਦੀ ਹੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ .
sir 10 bakria da kina munafa Hunda kina kharcha hunda ?
(en)
Punjab
ਹਾਜੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬੱਕਰੀਆ ਫਾਰਮ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਸੋਚ ਹੈ ਜੀ ਤੁਸੀ ਬੀਟਲ ਨਸਲ ਰੱਖੋ ਇਹ ਦੁੱਧ ਤੇ ਮੀਟ ਦੋਨਾਂ ਲਈ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੈ ਬਾਕੀ ਜਿਵੇ ਤੁਸੀ ਇਸ ਕਿੱਤੇ ਵਿੱਚ ਆਜੋਗੇ ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਹਾਡੇ ਲਿਂਕ ਬਣਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਣਗੇ ਬਾਕੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਇਸ ਗੱਲ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੈ ਕਿ ਤੁਹਾਡੇ ਲੋਕਾ ਨਾਲ ਲਿੰਕ ਕਿਵੇ ਦੇ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਦੁੱਧ ਗਾਂ ਦੇ ਰੇਟ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਵਿਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਫਾਰਮ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਬੱਚੇ ਵਗੈਰਾ ਵੀ ਸੇਲ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਕੁੱਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਜੇਕਰ ਮੋਟਾ ਜਿਹਾ ਹਿਸਾਬ ਲਗਾਉਣਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਇੱਕ ਬੱਕਰੀ ਤੋਂ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਲੱਗਭੱਗ 20000 ਤੱਕ ਕਮਾਈ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਇਹ ਵੀ ਸਲਾਹ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇੱਕ ਵਾਰ ਆਪਣੇ ਨੇੜੇ ਤੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਜਰੂਰ ਲਵੋ ਤੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾਂ ਦੇ ਫਾਰਮ ਜਰੂਰ ਦੇਖੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਜੋ ਕਿ ਮਹੀਂਨੇ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਸ਼ੁੱਕਰਵਾਰ ਨੂੰ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਕਿਸਾਨ ਹੋਸਟਲ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਇਸ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਜਾਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਜਗਰਾਜ਼ ਸਿੰਘ ਨਾਲ 9023441504 ਤੇ ਗੱਲ ਕਰ ਲਵੋ ਜੀ
ਸਰ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਢਾਈ ਸਾਲ ਦੀ ਝੋਟੀ ਹੈ ਉਹ ਬੋਲ ਨਹੀ ਰਹੀ ਜੀ ?
(en)
Punjab
ਗੁਰਭੇਜ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Agrimin super powder 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Minotas bolus ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਜਲਦੀ ਹੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ .
ਮੈ ਘਰ ਵਿਚ ਕਰੇਲਾ ਅਤੇ ਕਦੂ ਦੇ ਬੂਟੇ ਲਗਾਏ ਹਨ ਉਹਨਾਂ ਦਾ ਰੰਗ ਪੀਲਾ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈੈ ਵਿਚੋ ਕਈ ਬੂਟੇ ਸੜ ਗਏ ਹਨ ?
(en)
Punjab
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
mere pass ashwgandha hai kaha pe bechna hai ?
(en)
Punjab
Santosh ji Ashwagandha Sale karne ke lia aap 9166117460 pe samparak kare.
Guava leafs nu ki ho reha hai ?
(en)
Punjab
Ranbir ji isde patteya nu dekh ke lag reha hai ke isnu keeda lagya hai jekar patteya uper koi keet dikhai de reha hai ta kirpa karke daso ta jo tuhanu os de hisab nal ilaj dasya ja sake. is to ilava jehde patte rang badl rahe han oh tat di kami de karn hunde han isde layi tuc boote nu 4-5 killo vermicompost pao isde nal boote nu sare tat mil jange. dhanwad
I want to do moti cultivition ?
(en)
Punjab
Miltan Biswas ji Pearl farming is one of the best aquaculture businesses in India. In commercial pearl farming project, the first year investment will be more as you need fixed asset set up. You can assume 3/4 to a 1-acre, the cost of the pearl project would be around 4 lakhs rupees approximately. When it comes to profits in commercial pearl farming project, you can expect 50 to 60% under ideal aquaculture management practices. However, if you put more dedication and hard work into the project even 100% profit possible. There are mainly three types of pearls. • Natural pearls: in this type, the shape of the pearl depends on the original shape of the foreign body. • Artificial pearls: These are artificially made and coated with a synthetic material. • Cultured pearls (freshwater): These are cultured pearls in freshwater such as ponds, rivers etc..you can get the desired shape in this type. • You must have a good source of Oysters to culture in the pond. • You must have some skills of grafting techniques in pearl culture as this is essential for commercial pearl farming project. You can visit nearby pearl farms to learn these tips of freshwater pearl culture. first of all you have to attend 3 days practical training. According to your location you can get training from vinod kumar. he is successful pearl farmer. He is also providing training to new farmers. his contact number is 9050555757.Thank You
sir ji cow six months Gabban hogi ji Lotti jma v nhi hai ji koi ilaz dso ji ?
(en)
Punjab
Gurdhyan singh ji tuci Cow nu Vitum-H liqued 10ml rojana dena suru kro, isde nal tuci Enerboost powder 100gm rojana deo ji, ehna nal lewa v vdia howega atee kamjori v door howegi.
Os nu Liquid Intavita NH 1 litter 10-10ml swere shame deo nall hi liquid Udder tone 15ml 10 bunda din vich 2 war deo ji
मोती की खेती कैसे की जाती है जी और इसके क्या फायदे हैं पूरा वर्णन से बताए जी ?
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Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
ਸਰ ਜੀ ਕਣਕ ਉਤੇ ਸੁਪਰ ਕਨਫੀਡੋਰ 30,5%sc ਦੀ ਤੇਲੇ ਚੇਪੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਇਕ ਏਕੜ ਉਤੇ ਕਿੰਨੀ ਡੋਜ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ?
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Punjab
confidor ਵਿਚ imidacloprid 30.5 ਨਾਮ ਦਾ ਸਾਲ੍ਟ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ ਇਕ ਏਕੜ ਵਿਚ 80-100ml ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
sir ye btaiye strawberry ki fasal balui mitti me ho jayegi ?
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Punjab
विवेक जी स्ट्रॉबेरी को मुख्यत: अच्छे निकाल वाली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है, जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में होते हैं मिट्टी की पी एच 5.7-6.5 होनी चाहिए, जो कि थोड़ी अम्लीय होती है अम्लीय मिट्टी में इसकी खेती ना करें, क्योंकि इसमें इसकी जड़ों का आकार सही नहीं बनता एक ही ज़मीन पर ज्यादा वर्षों तक स्ट्रॉबेरी की खेती नहीं करनी चाहिए निमाटोड से प्रभावित मिट्टी में भी इसकी खेती नहीं करनी चाहिए फंगस की बीमारियों से बचाव के लिए मिट्टी का धूमन करना चाहिए धन्यवाद
ਸਰ ਝੋਟੀ ਨੂੰ ਨਵੇਂ ਦੁੱਧ ਕਰਾਇਆ ਸੀ ਦੋ ਮਹੀਨੇ ਪੰਦਰਾਂ ਦਿਨ ਹੋ ਗਏ ਕਦੇ ਕਦੇ ਜਾਲਾ ਦਿੰਦੀ ਆ ?
(en)
Punjab
ਤੁਸੀ ਝੋਟੀ ਨੂੰ Gestaprojen ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਹ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਗੱਭਣ ਰਹਿਣ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ Calcimust gold liqued 50ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਜੀ
sir kanak nu tele lyi actara di spray krni aa, Dane da vjjn ate motayi vdhaun lyi nal hor kehri spray kriya ji ?
(en)
Punjab
kanak de upper nisaare sme NPK 00:52:34 @500gm ate borom@100gm nu mila ke prati acre te spray kr skde ho. iss nal daane mote ho jande hnn. Tele lyi tuc Actara thiamethoxam @80gm per acre da spray kr skde ho bt ehna nu mix krke spray nhi kr skde g ehna da alag alag spray krn te benefit milega..
Moti ki kheti kaise kare ?
(en)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
moti ki kheti ke liye seep kaha se le ?
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Moti ki kheti kaise kare ?
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
i want rajnigandha bulbs quantity is about 100 kg variety is double pettle where can I get that from and what will b the approximate price?
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Mr Achyut for Rajnigandha bulbs please contact with Santosh 9695537111.
how to seep farming ?
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Thanks for sharing your query with us . we will help you out with it.Pearl farming is one of the best aquaculture businesses in India. In commercial pearl farming project, the first year investment will be more as you need fixed asset set up. You can assume 3/4 to a 1-acre, the cost of the pearl project would be around 4 lakhs rupees approximately. When it comes to profits in commercial pearl farming project, you can expect 50 to 60% under ideal aquaculture management practices. However, if you put more dedication and hard work into the project even 100% profit possible. There are mainly three types of pearls. • Natural pearls: in this type, the shape of the pearl depends on the original shape of the foreign body. • Artificial pearls: These are artificially made and coated with a synthetic material. • Cultured pearls (freshwater): These are cultured pearls in freshwater such as ponds, rivers etc..you can get the desired shape in this type. • You must have a good source of Oysters to culture in the pond. • You must have some skills of grafting techniques in pearl culture as this is essential for commercial pearl farming project. You can visit nearby pearl farms to learn these tips of freshwater pearl culture. first of all you have to attend 3 days practical training. According to your location you can get training from vinod kumar. he is successful pearl farmer. He is also providing training to new farmers. his contact number is 9050555757.Thank You
moti ki kheti ?
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Sir g apne kol buffalo di daughter calf ha g 1sal di a growth bilkul nhi kiti us bare dso ?
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Malwinder ji tuci uss nu pett de kriya lai albendazole salt di goli deo, isde nal tuci Cargil di heifer dry feed deni suru kro ate Calf plan powder 100-100 gm swere sham deo, iss nal vdia growth ho jawegi.
ਸਰ ਝੋਟੀ ਨੂੰ ਨਵੇਂ ਦੁੱਧ ਕਰਾਇਆ ਸੀ ਦੋ ਮਹੀਨੇ ਪੰਦਰਾਂ ਦਿਨ ਹੋ ਗਏ ਕਦੇ ਕਦੇ ਜਾਲਾ ਦਿੰਦੀ ਆ ?
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ਤੁਸੀ ਝੋਟੀ ਨੂੰ Gestaprojen ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਹ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਗੱਭਣ ਰਹਿਣ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ Calcimust gold liqued 50ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਜੀ
sir papite ki kheti ke bare me bataye ?
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इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Pusa Dwarf,Pusa Giant,CO 3,CO 1,Coorg Honey Dew पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं
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इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Pusa Dwarf,Pusa Giant,CO 3,CO 1,Coorg Honey Dew पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें यूरिया 150 ग्राम, फासफोरस 80 ग्राम, पोटाश 100 ग्राम प्रति वृक्ष में प्रति वर्ष डालें खादों को 4 भागों में बांटकर रोपाई के बाद पहले, तीसरे, पांचवे और सातवें महीने में डालें बसंत के मौसम में फरवरी मार्च के महीने में बिजाई करें जबकि मॉनसून के मौसम में बिजाई के लिए जून जुलाई का महीना उपयुक्त होता है और पतझड़ के मौसम में बिजाई अक्तूबर से नवंबर महीने में की जाती है आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है 100-120 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें मिट्टी की किस्म, जलवायु के हालातों आदि के आधार पर सिंचाई करें सर्दियों में 15 दिनों के अंतराल पर और गर्मियों में 7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तने को पानी के संपर्क में ना आने दें और खेत में पानी भी खड़ा ना होने दें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 800 मि.ली. प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें
Sir 15 to 20 March tak mosam kida da rahega ?
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Manjot ji mausam vibhag de anusar 15-20 tak badlwai rahegi ate halka meeh pain di v sambhavna hai. dhanwad
sir suhajna tree de ki fayde hn dss skde ho ?
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Jovenpreet ji Moringa (Sohajna) bohat hi gun kari poda hai is ke gun janan de layi tuc niche dita geya Video link dekh sakde ho : https://www.youtube.com/watch v=Ts563Ykr4VI
ਮਝ ਨੂੰ ਬਿਨਾਂ ਟੀਕਾ ਲਗਾਉਣ ਚੋਣ ਤਰੀਕਾ ਦੱਸੋ ਜੀ ?
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ਤੁਸੀਂ ਇਸਨੂੰ Lactomood ਹੋਮਿਓਪੈਥੀ ਦਵਾਈ ਦੀਆਂ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਚ 3 ਵਾਰ ਦੇਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਾਂ ਤੁਸੀਂ ਉਸਨੂੰ M fast ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੁੱਧ ਚੋਣ ਤੋਂ ਅੱਧਾ ਘੰਟਾ ਪਹਿਲਾਂ ਉਸਦੇ ਨੱਕ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਇਸ ਨਾਲ ਉਹ ਦੁੱਧ ਆਰਾਮ ਨਾਲ ਉਤਾਰ ਦੇਵੇਗੀ ਇਹ ਤੁਸੀਂ ਹੋਮਿਓਪੈਥੀ ਸਟੋਰ ਤੋਂ ਪਤਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦਾ ਰਿਜ਼ਲਟ ਵਧੀਆ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀਂ milkout powder 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ.
sir banana tree hai isnu utto taa fal bahut sohna lgea pr hun jehde niche lg rhe aa oh giri ja re hai koi hall dsso isda ?
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Harjit ji eh fungus de karn hon lag jande han isde layi tuc planofix@4ml nu 15 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo. dhanwad
moti ki kheti kaise kare ?
(en)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
sat shree akal g, jo punjab vich solar system motor te subsidy lg rahia han. kirpa krke us bare daso. kinna kharch aunda te sari detail daso ?
(en)
Punjab
Buta Singh ji Is bare puri jankari lai tusi Amrik Singh 9814221784 nal samparak kar sakde ho.
sir ਸਰੋਂ te tela peya Hoya g koi hall dasso ?
(en)
Punjab
Sarson vich tele di roktham lyi Actara @50 gm per acre da spray kr skde ho g.
moti ke kheti ka training kaha se le ?
(en)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Cultivation of cauliflower ?
(en)
It can grow well in wide range of soil from sandy loam to clay. For late sown variety, clay loam soils are preferred and for early maturing varieties sandy loam soil is recommended. pH of soil should be in range of 6 to 7. Add lime in case of low pH soil.POPULAR VARIETIES:- Pusa Snowball 1,Pusa Snowball K-1,Pant Shubhra.Bring soil to fine tilth by ploughing land thoroughly. Add well decomposed cow dung and mixed well in soil at time of last ploughing.For early season variety June-July is best transplanting time, For main season variety August to mid-September and October to first week of November is best transplanting for late varieties. Use spacing of 45x45 cm for main season crop whereas for early and late maturing crop use spacing of 45x30 cm.Sow seeds at depth of 1-2 cm. For Sowing dibbling method and transplanting methods can be used. Sow seeds in nursery and apply irrigation, fertilizer dose as per requirement. Seedlings are ready to transplant within 25-30 days after sowing. For transplantation use three to four weeks old seedlings.For early season variety seed rate of 500 gm is required whereas for late and main season variety seed rate of 250 gm per acre is required. Before sowing dip seeds in hot water (50°C for 30 min) or streptocycline@0.01 gm/Ltr for two hours. After treatment dry them in shade and then sow on bed. Blackrot mostly observed in Rabi. As a preventive measure seed treatment with mercury chloride is essential. For that dip seeds in Mercury chloride@1 gm/Ltr solution for 30 min after that dry them in shed. Crop grown in sandy soils are more prone to stem rot. To prevent it do seed treatment with Carbendazim 50%WP@3 gm/kg of seeds.Apply well decomposed cow dung@40 tonnes per acre in soil along with Nitrogen@50 kg, Phophorus@25 kg and Potash@25 kg in form of Urea@110 kg, Single Superphosphate@155 kg and Muriate of Potash@40 kg. Apply whole quantity of cowdung, SSP and MOP and half quantity of Urea before transplanting. Apply remaining quantity of Urea four week after transplanting as top dressing. To get better flower (Curd) set and to obtain good yield, spray Water Soluble Fertilizer (19:19:19)@5-7 gm/Ltr water during the early plant growth. 40 days after transplanting take spray of 12:61:00@4-5 gram + microneutrients@2.5 to 3 gram + Boron@1 gm per Ltr water. To improve curd quality, apply Water Soluble Fertilizer 13:00:45@8-10 gm/Ltr of water at the time of curd development.Do soil testing and if Magnesium deficiency is observed to overcome Mg deficiency apply Magnesium sulphate@5 gm/Ltr, 30-35 days after transplantation and for Calcium deficiency apply Calcium Nitrate@5 gm/Ltr, 30-35 days after transplanting.To check weed control apply Fluchloralin (Basalin)800ml/150-200 Ltr water before transplantation followed by hand weeding 30 to 40 days after transplanting. Apply Pendimethalin@1 Ltr/acre one day before transplanting of seedlings.Immediately after transplanting, give first irrigation. Depending upon soil, climatic condition, apply irrigation at interval of 7-8 days in summer season and 10-15 days during winter season. After developing proper head harvesting can be done. Carry out harvesting in morning or evening time. After harvesting keep product in cool place.Thank you
I wants to know about moti farming, tell me about it ?
(en)
Punjab
Thanks for sharing your query with us . we will help you out with it.Pearl farming is one of the best aquaculture businesses in India. In commercial pearl farming project, the first year investment will be more as you need fixed asset set up. You can assume 3/4 to a 1-acre, the cost of the pearl project would be around 4 lakhs rupees approximately. When it comes to profits in commercial pearl farming project, you can expect 50 to 60% under ideal aquaculture management practices. However, if you put more dedication and hard work into the project even 100% profit possible. There are mainly three types of pearls. • Natural pearls: in this type, the shape of the pearl depends on the original shape of the foreign body. • Artificial pearls: These are artificially made and coated with a synthetic material. • Cultured pearls (freshwater): These are cultured pearls in freshwater such as ponds, rivers etc..you can get the desired shape in this type. • You must have a good source of Oysters to culture in the pond. • You must have some skills of grafting techniques in pearl culture as this is essential for commercial pearl farming project. You can visit nearby pearl farms to learn these tips of freshwater pearl culture. first of all you have to attend 3 days practical training. According to your location you can get training from vinod kumar. he is successful pearl farmer. He is also providing training to new farmers. his contact number is 9050555757.Thank You
गिर गाय की कीमत के बारे में बतायें ?
(en)
Punjab
यदि गिर गाय 15—16 लीटर वाली है तो इसकी कीमत 40—45000 तक हो सकती है
मैं मोती की खेती की जानकारी चाहता हूं और कम से कम कितने चालू कर सकता हूं और क्या अपने घर में भी कर सकते हैं ?
(en)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
sir ji, mai moti ki kheti or seep ki jankari chahta hu, ye kaha se milti h, isme kin kin chizo ki jarurt hoti h or iska prashikshan kaha se mil skta h
(en)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
मैंने मोतियों की खेती की जानकारी पूछी थी ?
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
सतलुज मुर्गी कहां मिलती है महाराष्ट्र में ?
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स्वागत चवण जी चूजे लेने के लिए आप Jogesh hire 9075749975,9049218008, ICAR - Directorate of Poultry Research, Rajendranagar, Hyderabad 500 030, Telangana, India, Ph : +91-40-24015651, 24017000 (Monday to Saturday, except 2nd Saturdays of each month & National Holidays)से सम्पर्क कर सकते है
sir g kamad di bijai time carbofuron pouna theek rhe ga ?
(en)
Punjab
Dear Sir kmaad di fasal vich beejayi de time Reagent(Fipronil 0.3G) @10kg prati acre nu 20 kg mitti vich mila ke pa skde ho.Carbofuran di beejayi de time sifarish nhi kiti jndi hai g.
sir g kamad di bijai time urea paa sakde aa ?
(en)
Punjab
Babbal g kamaad di fasal vich fertilizer da use mitti test krwa ke soil test report de according hi kro bt jekar mitti test nhi krvai tn tuc beejayi wale kmaad vich @130 kg urea prati acre 2 kistan vich pao.Pehli dose ganne di germination to baad pehla pani lga ke pao and second dose May/June vich pao..
sir khatti lassi de vich nim de ptte paa ke rkhe hon 2-3 mahine usdi sprey kanak upr kriye taa ki result milega ?
(en)
Punjab
Khatti lassi knak nu healthy karn lyi use kiti jndi hai and neem de patte tele nu marde han.Bt eh patte boil krke 7-10 din vich spray kr skde ho.2-3 month store kiti patte spray trail lga ke result de according hi kro g..
shell farming ?
(en)
Punjab
anish magotra ji Pearl farming is one of the best aquaculture businesses in India. In commercial pearl farming project, the first year investment will be more as you need fixed asset set up. You can assume 3/4 to a 1-acre, the cost of the pearl project would be around 4 lakhs rupees approximately. When it comes to profits in commercial pearl farming project, you can expect 50 to 60% under ideal aquaculture management practices. However, if you put more dedication and hard work into the project even 100% profit possible. There are mainly three types of pearls. • Natural pearls: in this type, the shape of the pearl depends on the original shape of the foreign body. • Artificial pearls: These are artificially made and coated with a synthetic material. • Cultured pearls (freshwater): These are cultured pearls in freshwater such as ponds, rivers etc..you can get the desired shape in this type. • You must have a good source of Oysters to culture in the pond. • You must have some skills of grafting techniques in pearl culture as this is essential for commercial pearl farming project. You can visit nearby pearl farms to learn these tips of freshwater pearl culture. first of all you have to attend 3 days practical training. According to your location you can get training from vinod kumar. he is successful pearl farmer. He is also providing training to new farmers. his contact number is 9050555757.Thank You
West Bengal
yes
ah pushua lyi ki km krda hai ji ?
(en)
Punjab
gurjeet singh ji ehh powder pashua vich mineral di kami puuri krda hai, iss nal sarir da vdia vikas hunda hai pashu di growth vdia hundi hai iss nu tuci 50gm rojana de hisab nal de skde ho ..
नमस्कार जी, हम पूसा नारंगी, पूसा बसंती गेंदा की जानकारी चाहते है, इसकी नर्सरी किस माह में तैयार की जा सकती और इसकी पैदावार कितनी है, कृपया मार्गदर्शन करें ?
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Punjab
Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है
sir, cow sui nu 2 month to uper time ho gyea haa, dud di fat bhut ghat aundi va, 2.5 ,2.9 de vichle he aundi va, esdi fat kive vad sakdi va, ehnu ik month ho gyea va, roj 100gm agrimin chilated calcium de reha va pr koi result nhi milyea, na dudh vadhea na fat ?
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Punjab
ਫੈਟ ਘਟਣ ਦੇ ਕਈ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੇ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ ਸਹੀ ਖੁਰਾਕ ਨਾ ਮਿਲਣਾ , ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਨਾ ਹੋਣਾ , ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ ਵਿਚ ਦਿਕੱਤ ਹੋਣਾ , ਇਹਨਾਂ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਘਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਇਸਦਾ ਸੰਬੰਧ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਨਸਲ ਤੇ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਫੈਟ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵਧਿਆ ਹੋਵੇਗਾ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸਦਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਹੀ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਹੋਵੇਗੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਸ ਨਸਲ ਦਾ ਹੈ , ਫੈਟ ਵਧਾਾਉਣ ਲਈ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਦੇਸੀ ਕਪਾਹ ਦੇ ਵੜੇਵੇ ਚਾਰੋ ਜੀ ਅਤੇ ਬੀਟੀ ਕਾਟਨ ਦੀ ਵਰਤੋ ਬਿਲਕੁੱਲ ਨਾ ਕਰੋ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਤੁਸੀ ਦਾਣੇ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਕਰਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਲਾਈਵਈਸਟ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੁੱਧ ਚੋਣ ਤੋਂ 10 ਮਿੰਟ ਪਹਿਲਾ ਘੋਲ ਕੇ ਪਾਓ ਇਹ ਲਾਈਵਈਸਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਜਿਆਦਾ ਟਾਈਮ ਨਹੀ ਪਿਆ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਤੁਸੀ ਕੱਦੂ ਜਾਂ ਲੋਕੀ ਖਵਾਓ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਇਹ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਠੀਕ ਹੈ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ Fatplus ਜਾਂ Fatmax 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ , ਇਸ ਨਾਲ ਫੈਟ ਵਿੱਚ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ , ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ
Apa ji sahiwal cow leni a ji pure kitho mil sakdi a ji phela gulam ashfan dqla phone number dita c o contant ni ho reha ji kise hor kol hove sahiwal farm dso koi ?
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Punjab
harpal singh ji tusi sahiwal cow lain layi Sukhvinder Dhamherhi ji nal 9781800637 number te v sampark kar sakde ho.
ਸਰ ਜੀ ਦੇਸੀ ਕੱਦੂ ਛੋਟੇ ਹੀ ਪੱਕੇ ਜੇ ਅਤੇ ਟੇਢੇ ਵਿਗੇ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ ਸਹੀ ਆਕਾਰ ਨਹੀ ਬਣ ਰਿਹਾ ਕੋਈ ਇਲਾਜ ਦੱਸੋ ?
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Punjab
ਕੁਲਵੀਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਖਾਦਾਂ ਕਿਹੜੀਆਂ ਪਾਈਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਆਕਾਰ ਪਾਣੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਲਗਾਉਣ ਕਰਕੇ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਸਨੂੰ ਪਾਣੀ ਸਹੀ ਸਮੇ ਅਤੇ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਲਾਓ
ਪਿਆਜ ਦੀ ਉਪਰੋਂ ਨੋਕ ਸੁੱਕ ਰਹੀ ਹੈ ਕੋਈ ਹੱਲ ਦੱਸੋ ਧੰਨਵਾਦ ਜੀ ?
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ਕੁਲਦੀਪ ਜੀ ਇਹ ਫੰਗਸ ਨਾਲ ਹੀ ਸੁਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ M-45 @4 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ
sir 1006 makki kinne dina vich achar paun lyi tyar ho jandi hai ?
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Haryana
jaswinder ji makki di kisam J1006 kisam 60-70 dina tak ktayi de layi tyar ho jandi hai.
kehda rog hai, kive roktham ?
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Khuswinder ji eh fungus de karn ho rahe han isde layi tuc M-45@4gm prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
sir main 3 baar m45 saprey kar chuka