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नमस्कार मै शुभम उज्जैन म.प्र से, मैं अपना डेयरी फार्म डालना चाहता हूं, मुझे इसके लिए लोन कहाँ से मिल सकता है ?
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आप एक बार में इक्ट्ठे पशु ना खरीदें पशुओं को 2—2 महीने के अंतराल पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीद लें और 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आएगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि तीन समय का दूध निकालकर ही पशु को खरीदें भैंसों को खरीदने का सही समय रखड़ी से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है पशुओं के लिए शैड परिवहन वाली सड़क पर ना बनाए और शैड सड़क से कम से कम 100 गज हटवा जरूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर बनाएं शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनाए क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनाई जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़े होने के लिए एक पशु को तकरीबन तीन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनाए पशुओं का दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना बहुत जरूरी है शैड का फर्श पक्का, तिलकने रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोड़ें और पानी और दाना पूरा दें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी क्षमता और जरूरत मुताबिक ही समान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक पशु का बीमा जरूर करवायें ट्रेनिंग में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को कम से कम 8वीं पास होना जरूरी है उम्र की सीमा 18—45 वर्ष होनी चाहिए और कम से कम 5 दुधारू पशु होना जरूरी है ट्रेनिंग के बारे में और जानने के लिए आप अपने जिले के PDDB के दफ्तर में जाकर डेयरी डिवलेपमेंट अफसर को मिलें डेयरी ट्रेनिंग का स्र्टीफिकेट हासिल करके आप आगे डेयरी लोन एप्लाई कर सकते हैं ट्रेनिंग आप अपने जिले के केबीके से प्राप्त कर सकते है वहां से आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी
npk ate micronutrient organically kiven tyar kite ja sakde hn ?
(en)
Punjab
manpreet ji kirpa karke daso ke tuc kehde NPK nu ghr vich tyar karna hai par eh organically nahi hundi kyuki isde vich urea, DAP ate potash di varto kiti jandi hai. micronutrients nu tyar kita ja sakda hai jisde vich waste decomposer de vich 4 tra diyan daalan da poder bna ke ate us vich 4-5 lohe de kill ik tambe di tar rakhi jandi hai . is ghol nu 12 dina layi dhak ke rakhya janda hai ate 12 din bad eh ghol varto layi tyar hunda hai.dhanwad
achar paun lai kehri makki vdhia hai kinnia chhaliya lagn gia 1 tande nu te pakan da sma dso plz te bejai da sma ?
(en)
Punjab
amandeep ji tuc achar de layi J1006 ja african tall kisam di bijai kar sakde ho. eh 60-70 din bad ktayi de layi tyar ho jandi hai. isda daaneya da jhaad 6-7 quintal prati acre de hisab nal hunda hai ate chaare da jhaad 165 quintal prati acre hunda hai.
veer g hariyana university da Mela kado lagda hai khetibadi wala daso plz te kithe lagda ?
(en)
Punjab
gurpinder singh ji hissar university da mela 12-13 march nu ho geya hai ji. eh hissar hi lagda hunda hai ji . baki kal nu pau ludhiana da mela hai tusi othe pohanch sakde ho.
मोती की खेती के बारे में जानकारी ?
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Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Madhya Pradesh
moti ki kheti ke baare me jaankaari chahiye
Sir, Hd 3086. jo happy seedar nal beeji aa usdi balli chhoti hai , jehri vaah ke tayar karke ( vah) k beeji usdi balli vaddi aw. esda ki fark aw g ?
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Maharashtra
lovepreet ji happy seeder nal beeji kanak nu khaadan di matra jyada chaidi hundi hai ate isde nal beeji kanak nu pani v jyada lag jande han isde nal fasl stress de karn baliyan chotiyan ho jandiyan han.hor koi fark nahi hai. dhanwad
Punjab
ਮੈਡਮ ਜੀ ਝਾੜ ਚ ਫਰਕ ਨੀ ਪੈਦਾ ?
ਵੀਰ ਜੀ ਜੀਰੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਦੋਂ ਤੇ ਕਿਵੇਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ?
(en)
Punjab
ਜੀਰੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਰਾਜਸਥਾਨ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਲੋਂ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Meri bhains phli bar byayi h november me uska baccha Mar gya tha tabhi. wo doodh 2 liter deti h bas khana pura khati h mujhe aesa lagta h vo moti charbi ki bhains h, abhi thofe din phle matting Hui h DOODH badhane k upaye btaye plz ?
(en)
Punjab
Ravi kumar ji app bhains ki khurak da puura dyan rkhe , iske sath app usko achi company ki calcium deni suru kren app Calcimust gold 100ml rojana den iske sath app Gog powder 50 gm rojana den, isse duudh mai farak padd jayega , bakii app her 3 mahine ke badd usse pet ke kirro ke liye goli jruur den..
pearl framing me kitna kharcha aata hai ?
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Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Uttar Pradesh
kareeb 2.5 lakh
how to grow ginger in this season in punjab how to find suitable seeds ?
(en)
Punjab
jaswant ji the cultivation of ginger is mostly practiced in Uttar Pradesh.Its cultivation is not recommended by PAU in Punjab.
rs2013 कपास का बीज कहां मिलेगा ?
(en)
Rakesh g yeh rajasthan ki variety hai..yeh beej aapko rajasthan ke kisi bhi dealer se ja fir rajathan ki khetibadi university se mil jayega...
Rajasthan
धन्यवाद सर जी
sir es dwai da kank te ki asr va, esdi doze ki va ?
(en)
Haryana
Orius ik fungicide hai jisde vich Tebuconazole nam da salt maujood hunda hai eh kanak nu fungus valiyan bimariyan jive peeli kungi di roktham de layi spray kiti jandi hai. isdi matra 200ml nu 150 litre pani vich mila ke spray kiti jandi hai. dhanwad
Pardeep ji yeh fungicide hai Jo gehu mein yellow rust or black smut ke liye use hota hai 200 - 300 ml per acre
esde nal jhar da koi fark penda.
es nal jhar da v koi frak pvega.
ਸਰ ਜੀ ਮੈ ਗੁਆਰੀ ਬੀਜੀ ਸੀ ਹਲਕਾ ਜਾ ਮੀਹ ਪੈ ਗਿਆ ਹੁਣ ਉਹ ਕਰੰਡ ਤਾ ਨੀ ਹੁੰਦਾ ਜੀ ?
(en)
Punjab
ਅਮਰਜੀਤ ਜੀ ਇਹ ਦੱਸੋ ਕਿ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਕਿੰਨੇ ਸਮੇ ਬਾਅਦ ਮੀਹ ਪਿਆ ਹੈ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
ਗੁਣਕਾਰੀ ਬੂਟੇ ਘਰ ਲਗਾਉਣ ਲਈ ਕਿਹੜੇ ਕਿਹੜੇ ਹਨ ਜੀ ?
(en)
Punjab
ਕੁਲਦੀਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਘਰ ਵਿਚ ਗੁਣਕਾਰੀ ਪੌਧੇ ਜਿਵੇ ਸਟੀਵੀਆ, ਮੋਰਿੰਗਾ, ਤੁਲਸੀ ਲਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਬਾਰੇ ਹੋਰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਹ ਵੀਡੀਓ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ https://www.youtube.com/watch?v=0YTEM1cxCc4
eh kis di ghat a ?
(en)
ASP g iss de upper npk 00:52:34@800 de nal boron@100gm mila ke prati acre de hisaab nal spray kro. daana v mota ho jawega ate growth set ho jawegi...
Punjab
sukriya sit
Punjab
sir
Punjab
boron di
a Apne 24-D k spray kra hoga ghas marne k liye uski bjha se AAP boron k spray kre.
Punjab
ok thank you g
moti utpadan ke bare me btaye ?
(en)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
moti palan ?
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Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Uttar Pradesh
ok sir g
sir mushoom ki kheti karna chahta hu jiske liye kuchh sujhaav chahiye beej kaha milega iski jankari chahiye ?
(en)
Punjab
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
sir gaa/mjh nu silage kinna dena chahida hai din da ?
(en)
Punjab
pashu nu silage 5-6 kilo tak rojj de skde ho, hara chara 30-35 kilo rojj deo , bakki bachia nu 1/2 kilo tak rojj de skde ho, ehh bache nu 6 month honn ton badd dena suru kro.
sir hf gaa jdo di sui hai udo de mote mote nale krdi hai svere sham pthhe kha te pani pee ke, do var teeka bhraya c nahi rahi bad ch dwai bhra ke duje din teeka bhraya 10 teeke lgatar bhraye sir oh fer use trh nale de rahi hai is bare puri jankari deo ?
(en)
Punjab
ਤੁਸੀ Bovimin-b ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Agrimin-i ਗੋਲੀਆਂ ਦਿਓ ਇਸਦੀ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਅੰਦਰ ਤੋਂ ਇਨਫੈਕਸ਼ਨ ਖਤਮ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਤੁਸੀ ਇਹ ਪਾਊਡਰ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ.
mushroom ki kheti ki jankari de ?
(en)
Punjab
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
कम पैसों और सीमित जगह में करने योग्य खेती क्या होगी ?
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सुधीर जी आप मशरुम की खेती कर सकते है इसमें समय ज्यादा और देखभाल ज्यादा करनी पड़ती है आप इसकी खेती करके फायदा ले सकते है धन्यवाद
sir majh 3.5 month di gabin par dudh ni laundi 30-40 mint laga dindi a Na hi laat Mardi a lactomood nal v koi fark ni peya koi hal daso jis nal jaldi dudh la lave ?
(en)
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tuci Cow nu Milkout powder 2-2 chamch swere sham, Anabolite liquid 100ml rojana ate Lactin bolus 1-1 goli swere sham deo, iss nal farak pann lgg jawega.
ਵੀਰ ਜੀ ਇਹ ਕੇਹੜੀ ਨਸਲ ਅਤੇ ਕਿੰਨੀ ਪਿਉਰ ਹੈ ਜੀ ਇਸ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਦੇ ਮੇਮਣੇ ਫਾਰਮ ਤੋ ਕਿੰਨੇ ਦੇ ਮਿਲਨਗੇ ਰੇਟ ਦਸੋ ?
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ਪਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਇਹ ਦੇਸੀ ਨਸਲ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਮੀਟ ਵਾਲੀ ਨਸਲ ਹੈ ਬਾਕੀ ਇਸਦੇ ਮੇਮਣੇ ਦਾ ਰੇਟ ਉਸਦੇ ਸਰੀਰ ਦੀ ਗਰੋਥ , ਉਸਦੇ ਭਾਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੋਵੇਗਾ.
सर मुझे कूचामन का बकरा चाहिये 2 दांत वाला उसका रेट भी बताना और कहां पर मिलेगा जी मैं हरियाणा से हूं ?
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Sher Singh ji Haryana me asha bakra lene ke lia aap Sandeep 9317517763, 9991606387 (SR Commercial Goat Farm) se samparak kare.
गाय के शरीर के अंगों के नाम ?
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गाय के शरीर के अंगो के नाम जानने के लिए आप फोटो देख सकते है जिसमें गर्दन,गला, घुटना, लेवा, थन, खुर, पिछला घुटना, जांघ, पूंछ, रीढ़ की हड्डी,आदि के बारे में जानकारी दी गई है
KANAK TE TELE AND SUNDI DE LAI QUINALPHOS +ACTARA SPRAYS KAR SKDE HA JI ?
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Knak vich tele di roktham lyi Actara(thiamethoxam 25WG) @40 gm prati acre de hisab nal spray kr skde ho. Soondi di roktham lyi tuc Quinalphos @800 ml per acre da spray kr skde ho..
ਸਰ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਹੁਣ ਬਰੀਕ ਮੱਖੀ ਬਹੁਤ ਤੰਗ ਕਰਦੀ ਹੈ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਕਿਵੇਂ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ?
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ਮੱਖੀਆਂ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਤੁਸੀ 1ml Butox ਨੂੰ 1 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਚਮੜੀ ਤੇ ਲਾਓ ਜੀ, ਇਸ ਨਾਲ ਮੱਖੀਆਂ ਤੋਂ ਆਰਾਮ ਮਿਲੇਗਾ..
आप अपने इस ऐप में जो भी फसल की जानकारी देते हैं उसमें कृप्या उस फसल के उस व्यक्ति के नजदीकी बाजार की जानकारी भी दें ?
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Punjab
रोहित जी आपका फीडबैक देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद हमारी पूरी कोशिश रहती है के जो भी फसल की जानकारी दी जाये उसकी मार्केटिंग के बारे में भी पूरी जानकारी दी जाये और आगे भी इस बात का ध्यान रखेंगे
Moti palan ?
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हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
moti ki kheti kaise ki jati hai ?
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Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
sheep farm ke baare mein jankari ?
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Punjab
भारत में कई प्रकार के sheep breeds पाए जाते है, जो व्यवसायिक तौर पर भारत में Sheep farming के लिए उचित है निचे दिए गए sheep breeds India में पाए जाते हैं : Bannur Bellary Cheviot Deccani Hassan Merino Ramboullet South डाउन Sheep farming में लागत बहुत ही कम है, अगर आपके पास कम पैसे है तो आप कम भेड़ो से अर्थात 2 female और 1 male के साथ भी इसकी farming की सुरुआत कर सकते है भारत में एक भेड़ की अच्छी नस्ल का मूल्य Rs 4,000 से 5,000 होता है अगर आप Sheep Farming करने की सोच रखे है या करने जा रहे है, तो सबसे पहले farm का location तय करे और farm ऐसा जगह पर बनाए जहा हमेशा स्वच्छ पानी उपलब्ध हो और farm का चारागाह साफ और हरा भरा हो इन सभी बातो के साथ ये भी ध्यान दे की भेड के साल में एक बार खाल उतारी जाती है, इस खाल को बाजार तक ले जाने के लिए transport की सुविधा होनी चाहिए खाल के अलावा भेड से रोजाना दूध और meat का भी उत्पादन होता है, जिसे बाजार में बेचा जा सकता है
ਰੇਤਲੀ ਮਿੱਟੀ ਲਈ ਗੰਨੇ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਕਿਸਮ ਕਿਹੜੀ ਹੈ ?
(en)
Punjab
ਹਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਗੰਨੇ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ CoPb92 Co118 CoJ85 CoJ64 ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Punjab
ਧੰਨਵਾਦ ਜੀ ਅਸੀ 238 ਪਿਛਲੇ 3 ਕ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਉੱਗਾ ਰਹੇ ਹਾਂ 238 ਕਿਸਮ ਕਿਵੇਂ ਅ ਜੀ
how to farming kirajari ?
(en)
Maharashtra
Sanjay kumar ji production of kirajari is practiced indoor to know more about it you can check this video :- https://www.youtube.com/watch?v=PCrNp2db4RI
poultary farming ke bare me jankari chahiye ?
(en)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Moti ki sale kaha kaha hoti hai or kya rate milta hai ?
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Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
sir october k ganne me genhu katne k baad dap daalne se kya fayda hoga april mahine me dalna h ya koi aur brand bataye jisse ganna mota upaj achhi ho ?
(en)
Punjab
Azim khan ji aap btayie ke aapne pehle ganne ko kitni DAP daali hai aur ganne ko NPK 19:19:19@1 killo ko 150 litre pani men mila kar prati acre ke hisab se spray karen. is se ganne ko sare tatv mil jate hai aur ganne ki paidavar achi hoti hai.dhanywad
Uttar Pradesh
60kg एकड़ डीएपी डाली थी
Ibl 80 kaha milegi ?
(en)
Punjab
Dayamay kr Singh ji Chicks lene ke lia aap Anuj Kumar Mehta 9534422915 ja fir ICAR - Directorate of Poultry Research, Rajendranagar, Hyderabad 500 030, Telangana, India, Ph : +91-40-24015651, 24017000 (Monday to Saturday, except 2nd Saturdays of each month & National Holidays) se samparak kare.
where is the variety of flowers found?
(en)
uttar Pradesh hills.
ਸਰ ਮੈਂ ਵਣ ਵਿਭਾਗ ਨਾਲ ਜਾਂ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਵਿਭਾਗ ਨਾਲ ਰੀਲੇਟਡ ਜੌਬ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ ਇਸ ਬਾਰੇ ਕੋਈ ਚਾਨਣਾ ਪਾਓ ?
(en)
Punjab
ਗੁਰਮਿੰਦਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਤੁਹਾਡੀ ਯੋਗਤਾ ਕੀ ਹੈ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ, ਧੰਨਵਾਦ
Punjab
10, +2 +diploma in Veterinary pharmacy from vedeya peeth deemd university (Rajasthaan)
मक्खन घास कहां मिलेगी ?
(en)
Punjab
मक्खन घास का सीड लेने के लिए आप Rk singh 9888413150 से सम्पर्क कर सकते है
Madhya Pradesh
Thank you
Apa katta rehdi te jodea hai. usde agle pair apas vich vajhde han te Blood niklada hai. ki isda koi hal ho skda hai k katta vechna pavuga ?
(en)
Punjab
Parmjeet ji iss nu tuci Injection Monocef 1gm, cromostate 5ml, nerokind 5ml ate Vitum-H 5ml lgwane suru kro, iss nal jakham v thik honge ate kamjori v door howegi.
श्रीमान जी कपास की खेती के बारे में जानकारी चाहिए इसकी बुवाई का सही समय और अच्छी किस्म के बारे में बताएं ?
(en)
Punjab
Kapas ki beejayi ka time 1 April se 15 May tkk ka hota hai.eske liye aap LD-949,LDK-124,LD-1019 varieties ki beejayi kr skte ho..
i want to pearl farming ?
(en)
Punjab
Pearl farming is one of the best aquaculture businesses in India. In commercial pearl farming project, the first year investment will be more as you need fixed asset set up. You can assume 3/4 to a 1-acre, the cost of the pearl project would be around 4 lakhs rupees approximately. When it comes to profits in commercial pearl farming project, you can expect 50 to 60% under ideal aquaculture management practices. However, if you put more dedication and hard work into the project even 100% profit possible. There are mainly three types of pearls. • Natural pearls: in this type, the shape of the pearl depends on the original shape of the foreign body. • Artificial pearls: These are artificially made and coated with a synthetic material. • Cultured pearls (freshwater): These are cultured pearls in freshwater such as ponds, rivers etc..you can get the desired shape in this type. • You must have a good source of Oysters to culture in the pond. • You must have some skills of grafting techniques in pearl culture as this is essential for commercial pearl farming project. You can visit nearby pearl farms to learn these tips of freshwater pearl culture. first of all you have to attend 3 days practical training. According to your location you can get training from vinod kumar. he is successful pearl farmer. He is also providing training to new farmers. his contact number is 9050555757.Thank You
hamari jameen ussar hai kaise hari khad lagaye ?
(en)
Punjab
S panwar ji aap sabse pehle apne khet ki mitti ki janch kraye jis se aapko yeh samj me aa jayega ke aapke khet men konse tatv ki kami hai jis se aapko is baat ka andaja ho jayega ke aapko konsi khaad daalni hai jis se aapke khet ki mitti fasl ugane ke layk ho jayegi. dhanywad
Sir meri bakri 3 month di ha , usnu Saah len vich problem ho rahi aa , ki kra ji ?
(en)
Os nu Injection Intacef-tejo 562mg, Injection Betnisol 1ml, Injection Deriphyllin 1ml lwao ji
sir mujhe dairy business ke baare me puri jankari chahiye ?
(en)
Punjab
Robin Singh ji ager aap pehli baar dairy shuru karne ja rahe hai to sabh se pehle is ki training jrur le, Training se aap ko dairy ke bare me kafi khuj pata chal jaega. training ke lia aap Dr. Anil 9660669992 se samparak kare.
Rajasthan
सर यह ट्रेनिंग कहाँ से मिलेगी
Rajasthan
सर जी मैं मुर्गी पालन भी करना चाहता हूँ, मुझे मुर्गी पालन के बारे में जानकारी दी जाये
Rajasthan
गुरु जी मुर्गी पालन की ट्रेनिंग के लिए कोई कांटेक्ट नंबर है कृपया दें
Rajasthan
सर मुझे मशरुम की ट्रेनिंग चाहिए, मैं क्या करूँ कोई जवाब दें
ਸਰ ਮੱਝ 4.5 ਮਹੀਨੇ ਦੀ ਗੱਭਣ ਹੈ ਚਾਰ ਲੀਟਰ ਦੁੱਧ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਦੁੱਧ ਨੂੰ ਜਦੋ ਪੁਣਦੇ ਹਾਂ ਤਾਂ ਛੋਟੀਆਂ-ਛੋਟੀਆਂ ਖੂਨ ਦੀਆਂ ਗੰਢਾ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਸਾਰੇ ਥਣਾਂ ਵਿੱਚ ਦੁੱਧ ਇਕਸਾਰ ਹੈ ਕੋਈ ਸੋਜਾ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੈ ?
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Os nu powder FMC 50GM rojana 5 din tak deo nall hi 100gm dalda, 250gm chini te 100gm nimbu pa ke rojana 3 din tak deo ji
Fatness reduce layi, medicine Bathinda me kis Tarah mil sakdi hai ?
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Punjab
Vipin Garg ji Is lai tusi surinder Nagra 9814305864 ji nal samparak kar sakde ho.
मोती की खेती कैसे की जाती है ?
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Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है.
Himachal Pradesh
ट्रेनिंग कहां पर होगी
Dhan ki Navi variety Pusa University Delhi ?
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Punjab
Kewal singh ji is saal PUSA ki tarf se koi nayi variety realse nahi hui hai. agar aane vale dino men koi variety release hoti hai to aapko iske bare men jankari de di jayegi. dhanywad
sir g mycorhizal bio fertilizer nu kamad di bijai time paa sakde aa ?
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Punjab
Babbal ji tuc ganne di bijai de same isnu khet vich pa sakde ho isdi matra 5-8 killo nu roodi di khaad vich mila ke tuc prati acre vich chitta dita janda hai. dhanwad
ਸਰ ਕਣਕ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੇਣਾ ਹੈ ਮੌਸਮ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ ?
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Punjab
Harpinder ਜੀ ਅੱਜ ਤੁਹਾਡੇ ਇਲਾਕੇ ਵਿਚ ਮੀਹ ਪੈਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੈ ਕੱਲ੍ਹ ਹਲਕੀ ਬੱਦਲਵਾਈ ਰਹੇਗੀ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਲਾਹ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕੇ ਤੁਸੀ ਕਣਕ ਨੂੰ ਹਾਲੇ ਪਾਣੀ ਨਾ ਲਾਓ ਧੰਨਵਾਦ
ਲੁਧਿਆਣੇ ਮੇਲੇ ਤੋ ਚਾਰੇ ਲਈ ਮੱਕੀ ਲੈ ਕੇ ਆਉਣੀ ਹੈ। ਬਾਅਦ ਚ ਉਥੇ ਜੀਰੀ ਲਗਾਵਾਗੇ। ਕਿਹੜੀ ਕਿਸਮ ਵਧੀਆ ਰਹੂ ਜੀ ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਲਈ। ਕੱਦ ਵੀ ਵਧੀਆ ਕਰੇ, 3591 ਅਤੇ 3033 ਚੋ ਕਿਹੜੀ ਵਧੀਆ ਜੀ। ਜੇ ਹੋਰ ਕੋਈ ਕਿਸਮ ਇਸ ਤੋ ਵੀ ਵਧੀਆ ਤਾ ਜਰੂਰ ਦੱਸੋ ?
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Punjab
ਜਸਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਲਗਭਗ 70 ਦਿਨ ਵਿਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮੱਕੀ ਵਿਚ ਚਾਰੇ ਦੇ ਲਈ ਕਿਸਮਾਂ ਜੋ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਲੋਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਹੈ J1006 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤੁਸੀ African tall ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
3591 &3033 ਦੋਨੇ ਕਿਸਮਾਂ ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ ਹਨ ਜੀ ਤੇ ਵਧੀਆ ਕਿਸਮਾ ਹਨ ਇੱਕ J -1006 ਕਿਸਮ ਵੀ ਹੈ ਜੋ ਪੀਏਯੂ ਵੱਲੋ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਹ ਵੀ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੇ ਇਹ ਪੀਏਯੂ ਦੇ ਸੇਲ ਕੇਂਦਰ ਤੋ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ
Punjab
thnks g
SSA ji, ਇਸ ਵਾਰ ਕਣਕ 3086 ਦੀ ਬੱਲੀ ਨਵੇਂ ਬੀਜ ਦੇ ਮੁਕਬਲਤਨ ਛੋਟੀ ਆ । ਕੀ ਹਰਿਆਣਾ ਵਰਾਇਟੀ ਦੀ ਬੱਲੀ ਛੋਟੀ ਹੁੰਦੀ ਐ । ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਇਹ ਕਣਕ ਮੇਰੇ 55 ਮਣ ਹੋਈ ਸੀ ਜਾ ਕਿਸੇ ਚੀਜ ਦੀ ਘਾਟ ਆ 7 ਨਵੰਬਰ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਆ ਜੀ ?
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Punjab
ਗੁਰਬਕਸ਼ ਜੀ ਇਹ ਦਿੱਲੀ ਦੀ ਵਰਾਇਟੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਪ੍ਰਾਇਵੇਟ ਫਰਮ ਤੋਂ ਬੀਜ ਲਿਆ ਹੈ ਤਾ ਉਸਦੇ ਨਾਲ ਬੀਜ ਦੀ ਕੁਆਲਟੀ ਘੱਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾ ਹੀ ਬੱਲੀਆਂ ਏਦਾਂ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਧੰਨਵਾਦ
ਸਰ ਜੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦਾ ਕਿਸਾਨ ਮੇਲਾ ਕਿੰਨੀ ਤਰੀਕ ਦਾ ਹੈ ਇਸ ਞਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਉ ?
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Punjab
ਲੁਧਿਆਣਾ ਕਿਸਾਨ ਮੇਲਾ 15-16 ਮਾਰਚ ਨੂੰ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਜੀ ਬਾਕੀ ਹੋਰ ਮੇਲਿਆ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਹ ਲਿਂਕ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ https://www.youtube.com/watch?v=4KRAepAgb1U&t=64s
ਸਰ ਬਨਸਾ ਮੈਡੀਕਲ plant bare dso ?
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Punjab
jashan ji tuhade swal nu vistar nal janan layi sadi team valo tuhanu call kiti gayi hai par tuhade phone te incoming suvidha na hon karke contact nahi ho paya kirpa karke apna swal vistar nal dubara pucho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
sir citrus de plant vich die back te phytophthora de ki symptoms hunde ne ?
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Punjab
ਰਵੀ ਜੀ ਡਾਈ ਬੈਕ ਵਿਚ ਤਣੇ, ਸਿਖਰ ਅਤੇ ਟਾਹਣੀਆਂ ਦਾ ਸੁੱਕਣਾ ਅਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਫਲ ਦਾ ਗਲਣਾ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਮੁੱਖ ਲੱਛਣ ਹਨ phytophthora ਵਿਚ ਜੜ ਅਤੇ ਤਣੇ ਦੇ ਉਪਰ ਸ਼ਹਿਦ ਵਰਗੀਆਂ ਬੂੰਦਾਂ ਬਣਨੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਧੰਨਵਾਦ
sir moti ki kheti krne ke liye margdarshan kre ?
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Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
how can I grow pearls and also describe about expensive fish farming ?
(en)
Punjab
Pearl farming is one of the best aquaculture businesses in India. In commercial pearl farming project, the first year investment will be more as you need fixed asset set up. You can assume 3/4 to a 1-acre, the cost of the pearl project would be around 4 lakhs rupees approximately. When it comes to profits in commercial pearl farming project, you can expect 50 to 60% under ideal aquaculture management practices. However, if you put more dedication and hard work into the project even 100% profit possible. There are mainly three types of pearls. • Natural pearls: in this type, the shape of the pearl depends on the original shape of the foreign body. • Artificial pearls: These are artificially made and coated with a synthetic material. • Cultured pearls (freshwater): These are cultured pearls in freshwater such as ponds, rivers etc..you can get the desired shape in this type. • You must have a good source of Oysters to culture in the pond. • You must have some skills of grafting techniques in pearl culture as this is essential for commercial pearl farming project. You can visit nearby pearl farms to learn these tips of freshwater pearl culture. first of all you have to attend 3 days practical training. According to your location you can get training from vinod kumar. he is successful pearl farmer. He is also providing training to new farmers. his contact number is 9050555757.Thank You