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सर मैं गेंदे की खेती करना चाहता हूं गेंद 1 किलो बीजों को रेट बतायें, 1 बीघा में कितने बीज डालने चाहिए ?
(hn)
जितेंदर जी गेंदे के 1000 बीज का रेट लगभग 1300 रुपये होता है एक बीघा में लगभग 200 ग्राम बीज की जरुरत पड़ती है
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1ekad me 1.500gram bije lagta He ya aap gandha ki podh bhi laga sakte Ho
ਵਪਾਰਕ ਖੇਤੀ ਲਈ ਇਹ ਬੀਜ ਕਿਵੇਂ ਹਨ ?
(pb)
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ਹਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਇਹ ਸਾਰੇ ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ ਕੰਪਨੀ ਦੇ ਬੀਜ ਹਨ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਝਾੜ ਦਾ ਕੋਈ ਅੰਦਾਜਾ ਨਹੀਂ ਲਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ
ਗਊ ਨੂੰ ਗੱਬਣ ਕਰਵਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਦ ਕੀ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ ਕਿ ਓਹ ਗੱਬਣ ਠਹਿਰ ਜਾਵੇ ?
(pb)
uss nu 200gm saro de tel vich 2 chamch haldi mix krke deo, isde nal bolus concimax jo ki intas company da product hai, ehh 1-1 swere sham deo ji.
ਵੱਟਾਂ ਤੇ ਵੱਤਰ ਦੇ ਬੀਜੇ ਹੋਏ ਟੀਂਡੇ ਕਿੰਨੇ ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਉਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਕੀ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਲਾਈਏ ?
(pb)
ਜੇਕਰ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਸਿੰਚਿਤ ਵੱਟਾਂ ਤੇ ਬੀਜਿਆ ਹੋਵੇ, ਤਾਂ ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਦੂਜੇ ਜਾਂ ਤੀਜੇ ਦਿਨ ਤੇ ਕਰੋ ਮੌਸਮ, ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਅਨੁਸਾਰ, ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ 4-5 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਵਰਖਾ ਰੁੱਤ ਸਮੇਂ ਸਿੰਚਾਈ ਵਰਖਾ ਦੀ ਆਵਰਤੀ ਅਨੁਸਾਰ ਕਰੋ ਇਹ ਫਸਲ ਤੁਪਕਾ ਸਿੰਚਾਈ ਨੂੰ ਵਧੀਆ ਹੁੰਗਾਰਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿੱਚ ਵੀ 28% ਤੱਕ ਸੁਧਾਰ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਇਹ 5-7 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ
sir muktsar kisan mela kado lag reha hai ?
(en)
Punjab
jaspreet ji muktsar kisan mela january vich maghi mauke hi hunda hai. is to ilava hor koi kisan mela muktsar vich nahi lagda hai ji.
ਸਰ ਮੁਸ਼ਕਕਪੂਰ ਦਾ ਬੂਟਾ ਲੈਣਾ ਇਹ kitho miluga ?
(en)
Punjab
Jaspreet Singh ji ਮੁਸ਼ਕਕਪੂਰ ਦਾ ਬੂਟਾ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ Surinder Nagra 9814305864 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Kakdi Ko Mava hua hai , Kakdi Bhi lagi hui hai , Kakdi ko konsa insecticide use karna chahiye ?
(en)
Maharashtra
Rakesh ji kripya aap Iski photo bheje ta ki aapko iske bare poori jankari di ja sake.
मोती की खेती के बारे में बतायें ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
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मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
hllo g, kanak nu poori traa balliyan nikal ayian han te mitti ch nami v hagi aa, ki pani laga skde ha ?
(en)
Maharashtra
harman ji tuc kanak nu Pani laun di poori jankari de layi nal diti photo dekh sakde ho.
मशरूम की खेती की पुरी जानकारी दीजिए ?
(hn)
Maharashtra
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
कछुआ पालन कैसे करें ?
(hn)
Punjab
अगर आप सजावट के लिए कछुआ रखना चाहते हैं तो एक चीज़ का ध्यान रखे कि वो भारतीय प्रजाति का नहीं होना चाहियें क्योकि भारतीय नसल कछुआ रखना कानूनी अपराध हैं आप अपने नजदीकी वैटनरी के पास जाकर इसकी प्रजाति की जाचं करवा सकते हैं अगर आपको इसकी नसल का पता हैं तो आप इस Aquarium में रखें और इसके लिए Aquarium को इस प्रकार तैयार करें कि कछुआ कुछ समय के लिए पानी से बाहर आ सके और उसको हीट मिल सके हीट के लिए आप Aquarium के ऊपर बल्ब भी लगा सकते हैं अब बात आ जाती हैं उसके खाने की, खाने में आप इसको पत्ता गोभी, टमाटर, खीरा, पालक, धनिया, सोयावीन बडियां और मार्किट में तैयार फीड Tubifex और shrimp-e भी दे सकते हैं यह आपको आपके नजदीकी कैनल से मिल जायेगी अगर आपका कछुआ ठीक से नहीं खा रहा तो पहले आप इसकी आंखो की जांच करें अगर इसकी आंखो की झल्यिो में सोजिश हैं तो आपका कछुआ बीमार हैं बीमारी पता करने के लिए आप इसे पानी में छोडकर भी देख सकते हैं अगर कछुआ तिरशा(एक साइड को झुककर) चल रहा हैं तो फिर भी आपका कछुआ बीमार हैं ऐसे में आप अपने नजदीकी वैटनरी के पास उसकी जांच करवा सकते हैं
ਸਰ ਜੀ ਪਹਿਲੇ ਸੂਏ ਝੋਟੀ ਸੂਈ ਆ 1ਮਹੀਨੇ ਤੋ ਜਿਆਦਾ ਹੋ ਗਿਆ ਦੋਵੇ ਟਾਈਮ 2/2ਲੀਟਰ ਦੁੱਧ ਦੇ ਰਹੀ ਆ ਖੁਰਾਕ ਵੀ ਬਹੁਤ ਪਾ ਰਹੇ ਆ ਪਰ ਦੁਧ ਨਹੀ ਵੱਧ ਰਹੀ ?
(en)
ਤੁਸੀ Anabolite liqued 100ml-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 3 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ, ਇਹ ਤੁਸੀ ਉਸਦੇ ਖਾਣ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦਿਓ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਹ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹਜ਼ਮ ਕਰ ਜਾਵੇ
ਸਰ ਜੀ Anabolite liqued ਵੀ ਦੇ ਦਿੱਤਾ ਕੋਈ ਫਰਕ ਨਹੀ ਦਲੀਆ ਗੁੜ ਵੀ ਦੇ ਕੇ ਦੇਖ ਲਈਆ
ਡਾਕਟਰ ਦੀ ਸਲਾਹ ਨਾਲ ਕੁਝ ਟੀਕੇ ਗੋਲੀਆ ਪਾਉਡਰ ਵੀ ਦਿੱਤੇ ਫਿਰ ਵੀ ਫਰਕ ਨਹੀ
Sir apni ik desi sahiwal cow rat sui c, 8 hour ho ge, vachii nu dudh ni pila rhi..bnde nu cow nede ni lagn dindi, fukare mardi a, ki hll kriye ?
(en)
tuci iss nu siqual injection lgao, ehh injection lgaa ke uss nu kujj time lai ekali shddo ate adhe ghnte badd jddo ohh sannt ho jaye fir usda dudh lenn di koshish kro.
मोती का उत्पादन कैसे करते हैं ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से संपर्क करें
sir 2 no. Pani ch kehda jhona lgauna vdia rahe ga nehr de Pani da koi prbnd ni haiga ?
(en)
Maharashtra
tuc 27p31, Sava 127,eh kisma nu tuc retli jameen ate 2 no pani vich la sakde ho. 27P31 jhone di hybrid kisam hai isda jhaad 27-28 quintal prati acre hunda hai. eh 130-135 din laindi hai pakkan layi. sava 127 da da jhaad 30-32 quintal prati acre hunda layi 110-115 din da sma laindi hai tuc ehna vicho koi v kisam beej sakde hoi.
dud diya dhara apne aap chl pandiya na koi ilaj h ta dsso vitam h dita h es to ilawa ?
(en)
iss nu tuci vitum-h dinde rho, isde nal bovimin-gl 7ml rojana deo, iss nal farak paa jawega.
ਸਰ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਕਿਤੇ ਕਿਤੇ ਪੀਲੀ ਕੁੰਗੀ ਆ ਗਈ ਹੈ ਕਿਹੜੀ ਸਪਰੇ ਕਰੀਏ ?
(en)
Punjab
ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਪੀਲੀ ਕੁੰਗੀ ਫੰਗਸ ਕਰਕੇ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਬਹੁਤ ਹੀ ਖਤਰਨਾਕ ਬਿਮਾਰੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਟਿਲਟ @200 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਨੂੰ 120 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
मशरूम की खेती कैसे करे ?
(hn)
Maharashtra
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरुम का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं, इससे हम 1 फसल ही ले सकते है, पराली मशरुम का समय अप्रैल से अगस्त तक है, इससे हम 4 फसले ले सकते है, मिलकी मशरुम का समय अप्रैल से सितंबर तक है, आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली मशरुम लगा सकते है, पराली मशरुम के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है, पराली के पूले: धान की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे के साथ बांध कर तैयार किये जाते है. पूले के सिरे काट कर बराबर कर लिए जाते हैं. पूलो की क्यिारी लगाना : पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए भिगो दें, गिले पूलो को ढलान पर रख कर अधिक पानी को निकलने दे, कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये, इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये, जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले. इसके ऊपर की सतह उलट होती है. इस प्रकार 5-5 पूलो की 4 सेट में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार की जाती है. सबसे ऊपर 2 पूलो को खोलकर रख दिए जाते हैं. मशरुम का फुटाव करना : बिजाई से 7-9 दिनो के बाद का फुटाव होने लगता है. पानी और हवा का संचार : बिजाई के 2 दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका किया जाता है. मशरुम के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है. मशरुम की तुड़ाई : मशरुम का फुटाव के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है. मिलकी मशरुम : मिलकी मशरुम के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे (12×16), सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि चाहिए. तूडी की तैयारी : सूखी तुड़ी को पक्के फर्श पर खिलार कर 16-20 घंटे पा नी से गिला करे, गीली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे. इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें, तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर खिलार कर ठंडा करे. यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है. बिजाई : ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें. एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज डाला जाता है. लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे. केसिंग : बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 के सेट बना दें, केसिंग में रूडी और रेतली मिट्टी (4:1) होती है. 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित की जाती है. मशरुम का फुटाव: केसिंग मिट्टी डालने के लगभग 2 हफतो में मशरुम के छोटे-छोटे कण निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है. मशरुम की तुड़ाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
3 माह की बछड़ी के ग्रोथ के बारे मे जानकारी दे, बछड़ी गिर नस्ल की है ?
(hn)
इसे आप कारगिल या किसी भी अच्छी कंपनी का Calf grower फीड देनी शुरू करें इसके साथ आप Calf plan पाउडर 50 ग्राम रोजाना देना शुरू करें इससे अच्छी ग्रोथ हो जाएगी
Kank nu tele lyi kehdi dwai kiti ja sakdi a ?
(pb)
Punjab
Knak vich tele di roktham lyi Actara(thiamethoxam 25WG) @80gm prati acre de hisab nal spray kr skde ho.
sir mere kol pehle sue jhoti sui nu mheena ho gea ik ta usde than bahut chhote ne and dhar v tight aa, pasma v ghat aa plz koi hall dasso?
(en)
iss nu tuci 250gm chini(khand), 250gm dalda ghee, 200gm nimbu changi trah ubaal ke uss nu thnda krke rojana 5 din deo, iss nal farak paa jawega.
मोती की खेती ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
sir gaye bahut patli hai usnu mota krn waste ki varteya jawe ?
(pb)
Punjab
tuci uss nu khurak vdia deo , hara chara 40-45 kg rojana deo, isde nal tuci pet de kiriya lai Flukrid-DS bolus deo ate Enerboost powder 100gm rojana deo , iss nal vdia growth howegi.
मोती की खेती केसे करे ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
केसर की खेती कैसे करे ?
(hn)
Punjab
जो वास्तविक केसर होता है इसके लिए तापमान सामान्य से भी कम चाहिए इसलिए यह rajsthan . में नहीं हो सकता अगर आप इसकी पुष्टि करना चाहते हैं तो majeed wari जी से 9419009209 पर कॉल करके जानकारी लें ये जम्मू कश्मीर में पिछले काफी समय से केसर की खेती कर रहे हैं
Sir Koi app hai jisme farmer farm ki details rakh sakta ha ?
(en)
Punjab
veerpartap ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap kaisi details rakhne ke bare men jankari lena chahte hai ta ki aapko is bare men poori jankari di ja sake. dhnaywad
सर श्रीनिधि ओर वनराजा के चिक्स कहां से मिलेंगे हमें बतायें ?
(hn)
Uttar Pradesh
CPDO Chandigarh or Mumbai
मोती की खेती की ट्रेनिंग कहां से ले सकते हैं ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
नमस्ते, मै मोती की खेती करना चाहता हूं कृप्या पूरी जानकारी दें ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से संपर्क करें
सर मैं एलोवेरा की फसल करना चाहता हूं पूरी जानकारी दें कहां से मिलेगी ?
(hn)
Punjab
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है
ਕਰਨਾਲ ਦਾ ਮੇਲਾ ਕਿਸ ਤਰੀਕ ਦਾ ਹੈ ?
(pb)
Punjab
ਬਲਜਿੰਦਰ ਜੀ ਕਰਨੈਲ ਦੇ ਮੇਲੇ ਦੀ ਤਾਰੀਕ ਹਾਲੇ ਨਹੀਂ ਦਸੀ ਗਈ ਹੈ ਜਿਵੇ ਹੀ ਇਹ ਤਰੀਕ ਦੱਸੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇ ਦਿਤੀ ਜਾਏਗੀ, ਧੰਨਵਾਦ
मोती की खेती के लिए कम से कम कितना निवेश चाहिए ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से संपर्क करें
मोती की खेती करने के लिए कितनी लागत लगती है ?
(hn)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
how much capital required for pearl farming if we dont have any kind of availabilities for that ?
(en)
Punjab
Mr. Atul nandanwar for more information about Pearl Farming you can contact with Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381.
मोती की खेती कैसे होगी ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
Bharat main bakri farming ki training kaha kaha hoti hai kripya jaankari de ?
(en)
Punjab
bakri farming ki traning bharat ke har distt me krishi vigyan kendre se milti hai. aap apne zile ke kvk me jakar traning ke liye form bhar sakte hai . jab traning shuru hoti hai to aapko call karke bula liya jata hai ji.
मोती की खेती की पूरी जानकारी ?
(hn)
Punjab
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
मोती की खेती की पूरी जानकारी दें ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
Madhya Pradesh
tq
शतावरी की खेती कैसे करें ?
(hn)
Punjab
यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे परिणाम देती है पौधे की वृद्धि के लिए मिट्टी pH 6-8 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Satavari (Asparagus racemosus),Satavari (Asparagus sarmentosa Linn.)शतावरी की खेती के लिए, अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए, ज़मीन की अच्छे से जोताई करें, और 15 सैं.मी. की गहराई में गड्ढा खोदें रोपाई तैयार बैडों पर की जाती है पौधों की रोपाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है इसके विकास के अनुसार 4.5x 1.2 मीटर फासले का प्रयोग करें और 20 सैं.मी. गहराई में गड्ढा खोदें जब पौधा 45 सैं.मी. का हो जाए, तब खेत में रोपाई की जाती है अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं बिजाई से पहले मिट्टी का रासायनिक उपचार किया जाता है अप्रैल के महीने में बीज बोये जाते हैं शतावरी के बीजों को 30-40 सैं.मी. की चौड़ाई वाले और आवश्यक लंबाई वाले बैडों पर बोया जाता है बिजाई के बाद बैडों को नमी के लिए पतले कपड़े से ढक दिया जाता है 8-10 दिनों में पौधों का अंकुरण शुरू हो जाता है 45 सैं.मी. ऊंचाई के होने पर पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं पौधों की रोपाई 60 x 60 सैं.मी. की मेड़ों पर की जाती है खेत की तैयारी के समय, 80 क्विंटल प्रति एकड़ गली हुई रूड़ी की खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 32 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 52 किलो), और पोटाश 40 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 66 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से पौधे को बचाने के लिए जैविक कीट नाशी जैसे धतूरा, चित्रकमूल और गाय के मूत्र का प्रयोग करें फसल के विकास के समय लगातार गोडाई की आवश्यकता होती है खेत को नदीन मुक्त बनाने के लिए 6-8 हाथ से गोडाई की आवश्यकता होती है पौधों को खेत में रोपण करने के बाद पहली सिंचाई तुरंत कर देनी चाहिए इस फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती इसलिए शुरूआत में 4-6 दिनों के फासले पर सिंचाई कर दें और फिर कुछ समय के बाद सप्ताह के फासले पर सिंचाई करें पुटाई से पहले सिंचाई जरूर करनी चाहिए ताकि गड्ढों मे से जड़ों को आसानी से निकाला जा सके रोपाई के बाद 20-30 महीनों में पौधे की जड़ें परिपक्व हो जाती हैं मिट्टी और जलवायु के आधार पर जड़ें 12-14 महीनों में पक जाती हैं मार्च-मई के महीने में जब बीज पक जाये, तब पुटाई की जाती है पुटाई कसी की सहायता से की जाती है प्रक्रिया और दवाइयां बनाने के लिए अच्छे से पके बीजों की आवश्यकता होती है
मोती की खेती ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
मै उत्तरप्रदेश के एक गांव में मोती की खेती करना चाहता हूं कृप्या बतायें ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
insulin ka podha kahan milega ?
(en)
Punjab
insulin ke paudhe lene ke liye aap surinder nagra 9814305864 ji se sampark kar sakte hai.
मैं मछली पालन करना चाहता हूं ?
(hn)
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है यह डिपार्टमेंट जहाँ खेतीबाड़ी अफसर बैठता है जैसे जैसे कचिहरी, डी सी दफ्तर बोल देते है उसमें बना होता है, मछली पालन के लिए सेम वाले इलाके में 90% सब्सिडी होती है और बाकि इलाकों में 40% सब्सिडी होती है आप अपने ज़िले के FFDA ( fish farming development agency ) दफ्तर में जाएं जो कि आमतौर पर डी सी दफ्तर या कचिहरी में बना होता है, आप वहां ज़मीन की फर्द, स10th र्टिफिकेट और जहाँ तालाब बनाना है वहां की 2 फोटो लेकर जाएं उसके बाद FFDA के अफ़सर आपको फाइल तैयार करवाएंगे और आपकी ज़मीन देखकर तालाब बनाने का तरीका बताएंगे और फिर आपको 40% सब्सिडी के लिए फाइल तैयार कर लोन अप्लाई के बारे में समझा देंगे
मोती की खेती ?
(en)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
What is the name of this plant ?
(en)
Punjab
Charan ji please send its two or three more pictures with full images of plant so that we can better identify it and provide you proper information.thank you
Punjab
a Ashwagandha
sava 127 lgaun da sahi time ki a g ?
(pb)
Maharashtra
Sava 127 di mukh khet vich bijai 20 June to bad kiti jandi hai.
मोती की खेती की पूरी जानकारी ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
artemisia की खेती कैसे और कब करें ?
(en)
Maharashtra
आर्टीमीसिया एक सुगंधित जड़ी बूटी है जो कि दुनिया के ठंडे शीताष्ण और उपउष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक रूप में पायी जाती है इसे पौधे का मूल स्थान चीन है भारत में कश्मीर की घाटियों और देश के अन्य भागों में भी इसकी खेती शुरू हो चुकी है इसकी खेती मिट्टी की विभिन्न किस्मों जैसे जल जमाव से रहित रेतली दोमट से दोमट मिट्टी में की जाती है अच्छे जल निकास वाली जैविक सामग्री से भरपूर दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए उत्तम रहती है मिट्टी की पी एच 4.5 से 8.5 होनी चाहिए प्रजनन — इसका प्रजनन मुख्यत बीजों के द्वारा किया जाता है अच्छी गुणवत्ता वाले बीज हमेशा भरे हुए और एक आकार वाले होते हैं इसके बीजों को औसतन 4 महीने के समय तक स्टोर करके रखा जा सकता है यदि नमी की मात्रा 13 प्रतिशत से कम हो छोटे आकार के बीजों को मुख्य खेत में सीधे बोने के कारण वे अच्छा परिणाम नहीं देते इसलिए सबसे पहले नर्सरी बैडों पर नए पौधे तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है नए पौधों की नर्सरी में तैयारी — उचित आकार के नर्सरी बैड तैयार करें और प्रत्येक बैड पर 10 किलो गाय का गला हुआ गोबर डालें उसके बाद 250—500 ग्राम बीजों को मिट्टी में मिलाकर नर्सरी बैडों पर एक समान डालें और बैडों को मिट्टी या रेत की पतली परत से ढक देंं बैडों को स्प्रिंक्लर की सहायता से पानी देते रहें बीज 5—8 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं जाते बीज जल्दी अंकुरित हो जाते हैं और उनकी अंकुरन प्रतिशतता भी ज्यादा होती है नए पौधे 6—8 सप्ताह में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं खेत की तैयारी — नए पौधों की रोपाई से पहले मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2—3 बार जोताई करें बिजाई का समय — पहली फसल पिछेती बारिश के मौसम और दूसरी गर्मियों के दौरान बोयी जाती है बीजों को नर्सरी में सितंबर से अक्तूबर महीने में बोया जाता है और गर्मियों की फसल के लिए बीजों को नवंबर से दिसंबर महीने में बोया जाता है रोपाई — रोपाई से पहले बैडों को सिंचित किया जाता है 6—8 सप्ताह के, सेहतमंद और एक समान आकार वाले बीजों को कतारों में 30—60 सैं.मी. और पौधों में 45—60 सै.मी. फासले में रोपित किया जाता है रोपाई के बाद हल्की सिंचाई की जाती है खादें — अच्छी उपज के लिए मिट्टी की स्थिति के आधार पर 60—80 किलो नाइट्रोजन, 40—60 किलो फासफोरस और 60 किलो पोटाश डालें फासफोरस ओर पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा को खेत की तैयारी के समय डालें बाकी की नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद 30वें और 60वें दिन बाद डालें यह फसल बोरोन ओर आयकरन की कमी के अधिक संवेदनशील होती है इसलिए इसके लिए शुरूआती खुराक के तौर पर बोरेक्स 8 किलो प्रति हेक्टेयर पर डालें सिंचाई — फसल को अच्छे से स्थापित करने के लिए खेत को रोपाई के बाद लगातार सिंचित करते रहना चाहिए स्थापित होने के बाद कटाई तक केवल 3—4 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए मलच का प्रयोग करें खरपतवार नियंत्रण— फसल को 2—3 गोडाई की आवश्यकता होती है रोपाई के बाद 20 दिनों तक गोडाई की जानी चाहिए कटाई — फसल रोपाई के बाद 4.5—5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है फूलों के पूरी तरह खिलने पर कटाई की जाती है ज़मीनी स्तर से 15—30 सैं.मी. की ऊंचाई तक सिक्कल की सहायता से पौधों की कटाई की जाती है फसल की कटाई सूखे मौसम में करें बारिश के समय, सुबह के समय कटाई ना करें
sir sadi motar da Pani 2 no hai es ch kehda jhona launa, better rahega taki mai chnga munafa le ska ?
(en)
Haryana
gurjeet ji tuc do number pani de vich sava 127 ate sava 200 kisam la sakd eho is to ilava tuc Br105 kisam di v bijai akr sakde ho. dhanwad
मेरे पास एक नींबू का पेड़ है पर 6 साल पुराना उस पर फूल तो आता है लेकिन झड़ जाता है अबकी बार मैंने बाजार से इस पर एक दवाई छिड़की है उस पर फूल तो काफी आया हुआ है लेकिन झड़ रहा है और फल नहीं आता कृपया उपाय बताएं धन्यवाद ?
(en)
Punjab
यशपाल जी आपने इसके ऊपर कौन सी दवाई का छिड़काव किया है कृपया आप इसके बारे में पूरी जानकारी दे निम्बू को तात की कमी के कारण फूल झा दजाते है इसके लिए आप पौधे को 1 -2 किलो वर्मी कम्पोस्ट डालें इससे पौधे में सभी तत्व की कमी पूरी हो जाएगी
safed musli cultivation ?
(en)
Punjab
Safed Musli is cultivated in most states of the country, the prominent amongst them being Madhya Pradesh, Maharashtra, Punjab, Andhra Pradesh etc. Based on agro climatic suitability, Safed Musli can be cultivated in Eastern, Western, Central and Southern Plateau and Hill regions, East and West Coast Plains and Hill regions and Gujarat Plains and Hill regions comprising the states of Bihar, Orissa, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, Rajasthan, Maharashtra, Andhra Pradesh, Karnataka, Kerala, Tamilnadu and Gujarat.Safed Musli can be grown in hot and subtropical climate. Normally the agroclimatic conditions suitable for potato, onion and garlic are also suitable for safed musli crop. Well drained soils with rich mineral content is ideal for this crop. Hard and acidic soils are to be avoided.Popular varieties :- RC-2, RC-16, RC-36, RC-20, RC-23, RC-37 and CT-1,MDB-13 and MDB-14,Jawahar Safed Musli 405 and Rajvijay Safed Musli 414.For Safed musli, it required well prepared nursery beds. For land preparation firstly single deep cultivation is done before sowing and then 2-3 tillering are done. Land is mainly prepared in the month of April – May.Optimum time for sowing of Safed musali is from June to August month. Depending upon plant growth habit, use spacing of 10 inches x 12 inches. Transplanting of seedling in main field.Usually propagation is done through tubers or seeds. For suitable growth, use seed rate of 450kg per acre. To protect crop from insect, pest and diseases, treatment of fungicide and growth promoter are done. Treatment with Humicil@5ml in 1 litre of water or Dithane M-45 @5gm per litre is done to protect crop from soil borne diseases. After chemical treatment, use seeds for sowing.Sow Safed musli seeds on raised beds of 1.2m width and of convenient length. Nursery bed should be well prepared on which seedlings are raised. Seeds are sown by broadcast method. After sowing cover bed with light soil. Mulching is done for the better growth. Seeds start germinating in about 5-6 days. Seedlings are ready for transplantation in about 5-6 days. Water seedling beds 24hours before transplanting so that seedlings can be easily uprooted and be turgid at transplanting time.At the time of land preparation, apply well rotten cow dung@80-100q/acre and mix well in the soil. Apply organic manure i.e. FYM @8-10ton/acre and mixed well with soil. Apply fertilizer dose of Single super phosphate (SSP) @100kg/acre, muriate of Potash @50kg/acre and Bone meal @100kg/acre.Before sowing of seeds apply green manure @60kg/acre. If soil is of clayey nature then apply Mycemeel @1.5 t/acre.Do frequent weeding, hoeing and earthing up and keep field weed free till 3 months. One post-emergence weeding is done and two weeding are done to keep the field weed free. If any deficiency is seen in growth of plant then immediate required spray should be given.For good growth and better development apply irrigation at the interval of 20-22 days. In rainy season, irrigation is not required but in the absence of rains irrigation is required at proper intervals. Depending upon climate and soil irrigations may vary.Plant starts yielding in about 90 days after planting. Harvesting is done in the month of September or October. Harvesting is done when leaves start yellowing and then gets dried. Harvesting of tuber is done when they changes its color from light to deep black. On maturity the tubers give maximum quantity. Mainly tuber harvesting is done in the month of March or April.After harvesting, drying of tubers is done. The white tubers are taken and then they are air dried for around 4-7 days. Then peeling is done and then they are packed in air tight bags for transportation and for less spoilage. From dried material several products like Safed musli powder and Safed musli tonics are made after processing.
sir, papite ka baag lga hua hai usme ptte upr se peele pd rhe hai kripya iska hal btaye ?
(en)
Punjab
jabir ji yeh fungus ke karn aise ho rahe hai iske liye aap copper oxychloride@3gm ko prati litre pani ke hisab se spray karen.dhanywad
ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਦਾ ਥੈਲਾ ਕਿੰਨੇ ਦਾ ਹੈ ?
(pb)
Maharashtra
ਗੁਰਮੁਖ ਜੀ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਦਾ ਥੈਲਾ ਉਸ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਤੁਸੀਂ ਦੱਸੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਕਿਸ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਕਿ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
Punjab
50kg
Punjab
50kgਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਦਾ bag
मोतियों की खेती मध्य प्रदेश में कहां होती है ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਇੱਕ ਕਿੱਲਾ ਜਮੀਨ ਹੈ, ਮੈਂ ਉਸ ਤੇ ਕਿਹੜਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਾ ਜਿਸ ਤੋਂ ਮੈ ਘੱਟ ਲਾਗਤ ਨਾਲ ਵੱਧ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਲੈ ਸਕਾ ?
(pb)
Punjab
ਗੁਰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਕ ਕਿੱਲੇ ਦੇ ਵਿਚ ਜਾ ਤਾ polyhouse ਲਾ ਕੇ ਬੇਮੌਸਮੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਵਿਚ ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ\ ਧੰਨਵਾਦ
मोती की खेती क्या मध्यप्रदेश में की जा सकती है ?
(hn)
Punjab
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
ਧੂਰੀ ਨੇੜੇ ਦੇਸੀ ਮੁਰਗੀ ਦੇ ਬੱਚੇ ਕਿਸ ਤੋ ਮਿਲੇ ਸਕਦੇ ਹਨ ਜੀ ?
(en)
Punjab
ਦੇਸੀ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦੇ ਬੱਚੇ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ GADVASU Ludhiana, Punjab 7889239583 (Mon - Fri 10am-5pm) ਨਾਲ ਜਾ ਫਿਰ Hardeep Singh 9781589637 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
patiala kvk da contact no. deo ?
(pb)
Punjab
KVK patiala nal tuc 094642 10460 is number te sampark kar sakde ho. dhanwad
मैंथा की अच्छी खेती कैसे करें ?
(hn)
पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1,Hybrid-77,Shivalik,EC-41911,Gomti,Himalaya किस्म की बिजाई कर सकते है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है प्रजनन क्रिया जड़ के भाग या टहनियों द्वारा की जाती है अच्छी पैदावार के लिए 160 किलो भागों को प्रति एकड़ में प्रयोग करें जड़ें पिछले पौधों से दिसंबर और जनवरी के महीने में प्राप्त की जाती है फसल को जड़ गलने से बचाने के लिए बिजाई से पहले बीजे जाने वाले उपचार कप्तान 0.25 प्रतिशत या आगालोल 0.3% या बैनलेट 0.1% से 2-3 मिनट के लिए किया जाना चाहिए बिजाई से पहले पौधे की बारीक जड़ 10-14 सैं.मी. काटें पुदीने की जड़ को आकार और जड़ के हिसाब से बोयें पौधे की बारीक जड़ की रोपाई 40 सैं.मी. के फासले पर और कतार से कतार का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बिजाई के बाद मिट्टी को नमी देने के लिए सिंचाई करें रोपाई के बाद नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें हाथों से लगातार गोडाई करें और पहली कटाई के बाद खेत को नदीन मुक्त करें नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों को नियंत्रित करने के लिए जैविक मल्च के साथ ऑक्सीफलोरफिन 200 ग्राम या पैंडीमैथालीन बूटीनाशक 800 मि.ली को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि नदीन ज्यादा हो तो डालापोन 1.6 किलोग्राम प्रति एकड़ या ग्रामाक्ज़ोन 1 लीटर और डयूरॉन 800 ग्राम या टेरबेसिल 800 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है
ਬੂਟਿਆਂ ਨੂੰ ਕਿਹੜੀ ਖਾਦ ਪੌਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਇਸ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ ?
(pb)
ਸੈਣੀ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦੱਸੋ ਤੁਸੀਂ ਕਿਹੜੇ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਖਾਦ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਕਿ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
ਸਰ ਹੋਈ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲੋਂ ਪੁੱਛ ਰਹਿਆ ਹਾਂ ਜੀ ਕਿਹੜੀ ਖਾਦ ਪਈ ਜਾਵੇ