Punjab
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sir litchi de plant di air layering kehre mahine krni chyidi hai te kine time tak eh tyaar ho jandi hai ?
(pb)
ਏਅਰ ਲੇਅਰਿੰਗ ਅੱਧ ਜੁਲਾਈ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਚਾਰ ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਜੜਾਂ ਬਣਨੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਜਦੋ ਜੜਾਂ ਪੂਰੀ ਤਰਾਂ ਬਣ ਜਾਣ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਅਲੱਗ ਕਰ ਦਿਉ ਇਸ ਤੋਂ ਤੁਰੰਤ ਬਾਅਦ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਲਗਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਪਾਣੀ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿਓ
Punjab
Thank you
meri chari vich ghobh di sundi a, sari charri sukdi ja rhi a koi growth nhi, me pehla corgen kari c te uss ne sirf hari sundi mari jo leafes ute c. hun mnu daso me kherdi spray kra. mnu ajj sham nu karni a
(pb)
Punjab
Corazen 60 ml use kro
Punjab
karli ohh ta veer g
Punjab
kuj hor dasso
sir paneeri nu urea di spray kr sakde haan ji jan nahi ?
(pb)
Punjab
Gurpartap ji tuc urea di matra 3 killo nu prati knal de hisab nal chitta deo. urea di spray ikale nahi kiti jandi isnu tuc Dr. dalal ghol di spray kar sakde ho.dhanwad
ਸ਼੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਮੈਂ 6 ਕਿੱਲੇ ਹਰੀ ਖਾਦ ਵਾਸਤੇ ਜੰਤਰ ਬੀਜਿਆਂ ਏ ਕੀ ਜਲਦੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਯੂਰੀਆ ਦਾ ਕਿੰਨੀ ਮਾਤਰਾ ਚ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ?
(pb)
Punjab
ਬਿਜਾਈ ਸਮੇ ਫਸਲ ਵਿੱਚ 12 ਕਿਲੋ ਫਾਸਫੋਰਸ ਤੱਤ ( 75 ਕਿਲੋ ਸੁਪਰਫਾਸਫੇਟ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਉਚਿਤ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕੀਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਜੰਤਰ ਦੀ ਫਸਲ ਲਈ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀ ਹੈ
Sat Sri akal sar paneeri aj ਜਿਪਸਮ 13 Marle vich kine pone chahide hn ?
(pb)
Punjab
shamsher ji tuc gypsum di matra 8-9 killo nu 13marleya vich pao. eh mitti da kharapan di matra nu ghtaunda hai.dhanwad
Rajasthan
13
Mandi ke bhav ?
(hn)
Punjab
एलेनाबाद नरमा : ₹6180 सिरसा नरमा भाव : ₹6280 आदमपुर मंडी : ₹6350 फ़तेहाबाद नरमा : ₹6285 हिसार नरमा : ₹6200 जींद नरमा : ₹6300 बरवाला भाव : ₹6335 नरमा का अमूमन भाव 6100 से लेकर 6400 तक चल रहा है उचाना नरमा : ₹6150 उकलाना : ₹6170 नरवाना : ₹6285 पीली-मंदोरी : ₹6190 भटू नरमा का रेट : ₹6310 भुना मंडी नरमा : ₹6305 सरदुलगढ़ (पंजाब) : ₹6360 रामा मंडी (पंजाब) : ₹6355 [10:14 PM, 6/4/2019] +91 85720 85581: Nohar Anaj Mandi Bhav Today ग्वार का ताज़ा रेट : ₹4085 चना भाव : ₹4300 मोठ का रेट : ₹5400 मूंग मंडी भाव : ₹5600 अरंडी भाव : ₹4800-5425 सरसों भाव आज का : ₹3650 कनक (गेहूं) का रेट : ₹1800 – ₹2150 जौ का मंडी रेट : ₹1640 बाजरी : ₹2000 तारमीरा : ₹3920 मेथी : ₹4475 [10:14 PM, 6/4/2019] +91 85720 85581: आदमपुर अनाज मंडी भाव 04-06-2019 नरमा भाव : ₹6350 चना का रेट : ₹4360 सरसों भाव आज का : ₹3741 अरंडी : ₹5100 ग्वार मंडी रेट : ₹4136 जो का भाव : ₹1650 गेहूं का सरकारी रेट : ₹1840 खल भाव : ₹3250 – ₹3300 बिनौला रेट : ₹3500 – ₹3600 Sirsa Anaj Mandi Rates 04-06-2019 नरमा भाव : ₹6280 ग्वार भाव : ₹4104 सरसों भाव today : ₹3674 चना का रेट : ₹4318 जौ भाव : ₹1662 गेहूं : ₹1845 (Private) Fatehabad Mandi Bhav Today जौ भाव : ₹1648 सरसों का रेट : ₹3710 गेहूं भाव : ₹1600 – ₹1835 चना का रेट : ₹4286 ग्वार भाव : ₹4071 अलसी का रेट : ₹2170 भटू अनाज मंडी भाव 04-06-2019 नरमा रेट : ₹6300 सरसों भाव टूड़े : ₹3711 खल का रेट : ₹3300 बिनौला भाव : ₹3600 ग्वार रेट : ₹4051
sir ?
(pb)
Punjab
guranterjosh ji kirpa karke apna swal vistar nal pucho ke isnu kehdi dikkat aa rahi hai ta jo tuhanu isde bare poori jankari diti ja sake.dhanwad
sir g, gaa nu soon vich 2 mahine baaki han.us nu kehri dawai ate khurak kini kini de sakde ha.pasu di sehat ate hawana banaun layi ?
(pb)
Punjab
tuci uss nu Fendikind bolus pett de kiria lai deo, isde nal Cargill di Transition mix feed deni suru kro, tuci rojana 2kg ek time de skde ho baki vitum-h liquid 10ml rojana deo, iss nal vdia growth howegi.
ਗੰਨਾ ਪੀਲਾ ਕਿਸ ਚੀਜ ਦੀ ਘਾਟ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ?
(pb)
Punjab
ਲਖਵਿੰਦਰ ਜੀ ਗੰਨਾ ਕਈ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਪੀਲਾ ਹੋਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਜਾ ਫੰਗਸ ਕਈ ਵਾਰ ਜੜ੍ਹ ਦੀ ਸੁੰਡੀ ਵੀ ਇਸਨੂੰ ਪੀਲਾ ਕਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
ki 1121 te 1718 same e aa ja a vakh vakh ne.1718 de rate da roula paya k ghatt rate ha isda.plzz zankari dao g.kahra best raho.paneri bizani aa kahri biziye. 1121 ja 1718 ?
(pb)
Punjab
1718 ਬੀਜ 1121 ਦੀ ਸੋਧ ਹੈ ਜੀ ਇਸਦਾ ਝਾੜ ਵੀ ਜਿਆਦਾ ਤੇ ਬਿਮਾਰੀ ਵੀ ਘੱਟ ਆਉਂਦੀ 1121 ਮੁਕਾਬਲੇ , ਪਰ ਰੇਟ ਦਾ ਵੱਟਾ ਜਰੂਰ ਹੈ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ 1121 ਤੋਂ 200 ਤੋਂ 300 ਰੁਪੇ ਪਰ ਕੁਇੰਟਲ ਘੱਟ ਵਿਕਿਆ ਸੀ
Punjab
sahi veer g.thade hassab naal kida kita jave.1121 ja 1718
Punjab
1718 bolo ji
Punjab
kina k rate a eda g
ਮਿਰਚਾ ਇਸ ਤਰਾ ਕਿਉਂ ਗਲ ਰਹੀਆ ਹਨ ਕੋਈ ਘਰੇਲੂ ਜਾ ਕੋਈ ਹੋਰ ਇਲਾਜ ਦੱਸੋ ਜੀ ਧੰਨਵਾਦ ?
(pb)
Punjab
ਤਰਸੇਮ ਜੀ ਇਹ ਫੰਗਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਖੱਟੀ ਲੱਸੀ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ 3 ਮਿਲ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ
hum gehun k kheti kis method se kare ?
(hn)
Punjab
गेहूं की फसल को अच्छे अंकुरन के लिए अच्छी तरह से तैयार, पर ठोस बीज बैड की आवश्यकता होती है पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की अच्छे तरीके से ट्रैक्टर की मदद से जोताई की जानी चाहिए खेत को आमतौर पर ट्रैक्टर के साथ तवियां जोड़कर जोता जाता है और उसके बाद दो या तीन बार हल या सुहागे से जोता जाता है खेत की जोताई शाम के समय की जानी चाहिए और रोपाई की गई ज़मीन को पूरी रात खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वह ओस की बूंदों से नमी सोख सके प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरना चाहिए बारानी क्षेत्रों में फसल को दीमक के हमले से बचाव के लिए क्लोरपाइरीफॉस 20 ई सी 700 मि.ली. को 5 लीटर पानी में मिलाकर 100 किलो बीजों का उपचार करें उसके बाद बीजों को छांव में सुखाएं पश्चिमी यू पी में, सिंचित और सामान्य बिजाई स्थितियों में 1 नवंबर से 15 नवंबर तक बिजाई पूरी कर लें और पिछेती बिजाई की स्थितियों में 1 से 25 दिसंबर तक बिजाई पूरी कर लें पूर्वी यू पी के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय 1 नवंबर से 15 नवंबर तक है, जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 से 20 दिसंबर का समय उचित है ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर नवंबर का पहला पखवाड़ा है जबकि पिछेती बिजाई के लिए 1 दिसंबर से 20 दिसंबर का समय उचित है निचले पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, सिंचित और सामान्य बिजाई का उचित समय अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर मध्य नवंबर तक का है जबकि पिछेती बिजाई के लिए नवंबर का दूसरा पखवाड़ा उचित समय है सामान्य बिजाई के लिए कतारों में 20-22-5 सैं.मी. के फासले की सलाह दी जाती है यदि बिजाई देरी से करनी हो तो 15-18 सैं.मी. का फासला होना चाहिए लंबी किस्मों के लिए 6-7 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें जबकि अन्य किस्मों के लिए 5-6 सैं.मी. की गहराई का प्रयोग करें बिजाई की विधि:-बीज ड्रिल,बुरकाव विधि छोटे आकार की किस्मों के लिए 40 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और मोटे किस्म के बीजों के लिए 50 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि पिछेती बिजाई करनी हो तो 60 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से पहले बीज साफ और छांटे हुए होने चाहिए
about ginger farming ?
(en)
Maharashtra
It gives best results, when grown on well drained loamy soils also in sandy or clay loam or red loamy soils. Avoid water stagnation in field as it cannot survive in water logged conditions. Ideal pH range of 6-6.5 is required for good growth of crop. Avoid soil on which previously ginger was taken. Do not cultivate ginger crop on same site year after year.IISR Varada: It gives high yield of fresh as well as dry ginger yield. Ready to harvest in 200 days. It gives an average yield of 90 qtl/acre. IISR MahimaKarthika.Prepare field by ploughing land two - three times. After ploughing do planking operation. For turmeric planting, beds of 15 cm height, 1 m width and of convenient length are prepared. Keep distance of 50 cm between beds.Sowing is done by first week of May- June.keep plant distance of 15-20 cm between the row and 30 cm between two plant. Depth should be near about 3-4 cm.Direct sowing also transplanting method is used for planting.For sowing, select fresh and diseased free rhizomes (mother rhizomes as well as fingers) are used. Seed rate of 480-720 kg is sufficient for sowing one acre land. Before sowing, carry out rhizome treatment with Mancozeb@3 gm/Ltr of water. Dip rhizomes for 30min in solution. It will protect rhizomes from fungal infestation. After treatment, dry rhizomes in shade for 3-4 hours.At time of field preparation, apply well decomposed cow dung@150 qtl/acre in soil. Apply N:P:K@25:10:10 kg/acre in form of Urea@55 kg/acre, SSP@60 kg/acre and MOP@16 kg/acre. Full dose of Potash and Phosphorus are applied at time of rhizome planting. Nitrogen dose is given in two equal splits. First half dose of N is given 75 days after planting and remaining half dose is given three month after planting.Third day after plantation take spray of Atrazine@4-5 gm/ltr on moist soil. To kill weeds that grow after first spray of weedkiller, 12-15 days after plantation take spray of Glyphosate@4-5 ml/Ltr water. After weedicide application, cover field with green manure or paddy straw. Earthing up operation is carried to enhanced root development. 50-60 days after planting take first earthing operation and next after 40 days.It is grown as rainfed crop so provide irrigation depending upon rainfall intensity and rainfall frequency. After planting, crop is mulched with green leaves@50 qtl/acre. Repeat mulching@20 qtl/acre after every fertilizer application. In 8months crop is ready for harvesting. For fresh spice purpose, ginger is harvested from 6th month and if it is to be used for processing, then it is harvested after 8 months. Right time for harvesting of ginger is when leaves gets yellow and dry out completely. Remove rhizomes by dugging and after harvesting clean rhizomes by thoroughly washing in water for 2 to 3 times. Then dry them in shades for 2-3days.For dry ginger purpose, only the outer skin is to be peeled and then dried in the sun for a week. Outer skin is removed with help of special knife or split bamboos with pointed end. Yield of dry ginger is about 16-25% of green ginger.
bhains ka 1 than ruk gya hai doodh nhi a rha h ?
(hn)
Punjab
Bhupinder ji app uske than ki nazdiki doctor ko bulla kr janch krwayen kyuki than rukne ke kayi karan ho skte hai, uski janch se sahi karan ptaa lgega aur uska sahi ilagg ho skta hai.
angur ke pkaav ke liye kya krna pdega ?
(hn)
Punjab
Harpreet ji angur apne aap pakta hai iske uper pakne ke liye spray nahi ki jati.dhnaywad
ਸ਼ਿਮਲਾ ਮਿਰਚ ਬੀਜਣ ਦਾ ਸਮਾ ਕੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ ਜੀ ?
(pb)
Maharashtra
isdi mukh taur te bijai October mahine Vich kiti jandi hai ate fir adh February Vich ropayi kiti jandi hai.
sir हमारी गाय के दूध में खून आ रहा है क्या करें ?
(pb)
उसे आप Dettol 100 मि.ली दो दिन दें इसके साथ आप Mamidium पाउडर 50 ग्राम रोजाना दें और 250ग्राम चीनी और 250 ग्राम डालडा घी अच्छी तरह मिक्स करके 3 दिन दें और मिठा सोडा दो चम्मच रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएगा
sir Dettol kehra Dena a 100 ml
jo dettol antiseptic liquid atta hai wohi use krna hai .
ਸਰ ਮੈਨੇ ਆਪ ਸੇ ਪੁਛਿਆ ਸੀ ਗਾ ਪਿੱਛਾ ਬਹੁਤ ਮਾਰ ਦੀ ਵਾ ਉਸ ਦਾ ਕੋਈ ਇਲਾਜ ਵਾਸਤੇ ਦਵਾਈ ਦੱਸੋ
ਭਾਰ ਪੈਣ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਹ ਦੇਸੀ ਤਰੀਕਾ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ 1 ਕਿਲੋ ਸਤਿਆਨਾਸ਼ੀ ਬੀਜ ਲਓ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਕਮਰਕੱਸ, ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਜੋਂਖਾਰ ਲਓ, ਇਹ ਸਭ ਪੰਸਾਰੀ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਸਾਰਾ ਕੁਜ ਤੁਸੀ ਮਿਲਾ ਲਓ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਪਾਊਡਰ ਬਣਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਰੋਜਾਨਾ ਰਾਤ ਨੂੰ ਇਹ ਮਿਸ਼ਰਣ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਲਓ ਅਤੇ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਸ਼ੱਕਰ ਲਓ ਅਤੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਭਿਗੋ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਓ ਅਤੇ ਅਗਲੇ ਦਿਨ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਦਿਓ, ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤੁਸੀ 4 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ .
पपीते की खेती का उपयुक्त समय कौन सा है ?
(hn)
Punjab
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
sir, dhan (paddy) ki aisi konshi variety hai sir jiska ropan transplanting july me ho jaye, please sir batana, aur sir soil ka management kaise kiya jaye aur transplanting se Pahle kiya lagaye ?
(hn)
Punjab
Yatendra ji aap july men basmati kismo ki bijai kar sakte hai iske liye aap 1121 ki bijai kar sakte hai. bijai se pehle jameen ki aache se jotayi kare.dhanywad
Uttar Pradesh
thank you Sir g
sir 121 paneeri 17 dina di ho gei hai es vich sirf urea hi 3/4 kg pai hai . 10 k mrle ch 30 kg b paeya c. es nu bijan ton pehla sodeya v c dawai nal and fr 7 dina baad kakh d dwai v pai c. hor kuj ni paeya koi tatt haje tak paneeri theek hai es vich hun kehde tat paye jaan ki ki hor paiye ?
(pb)
Punjab
Sukhwinder ji kirpa karke paniri di photo bhejo ta jo tuhanu isde bare vich poori jankari diti ja sake.dhanwad
sir asi miti check karvy c ah jehda 143 num semple a osde vich khara pan Aya ga ji , jmeen de sudar laye ki pa sakde a ?
(pb)
Punjab
Pinder ji jehda sample di tuc photo bheji hai usde vich hi tuhanu eh sifarish kiti gayi hai ke tuc jantar di bijai karo jisde nal mitti da kharapan door ho jayega.dhanwad
NARME DI BIJAI TO BAD KINE DINA BAD PANI LAI JI te urea pai sakde hai ?
(pb)
Maharashtra
Gurlal ji narme nu bijai to 4-6 hafteya bad Pani lao. Chote paudeya Vich Pani khda na rehn deo.
Rajasthan
Urea pehli irrigation te kro
Rajasthan
Angur pakane ke liye ye kya karna padega Apne Aap Par kangi unko Todna Padega
sir broiler farm kholna chahta hu mgr koi company nhi mil rhi h contract farming k liya aap bta skte ho ?
(en)
Punjab
Nikhil Sandhu ji Contract Poultry ke lia aap Salil Sood 9781017711 se samparak kar sak sakte hai agar aap desi me ana chahte hai to aap Sumit Jandar 8275592788 se samparak kar sakte hai. Thankyou.
Sir ji ਮਝ ਦੀ ਧਾਰ ਪੋਲੀ ਕਰਨ ਲਈ ਖੰਡ ਕਿਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਦੇਣੀ ਹੈ ਸੁਕੀ ਖੰਡ ਵਿਚ ਨਿਬੂ ਪਾਈਏ ਜਾਂ ਕੋਈ ਹੋਰ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਕਿਰਪਾ ਕਰ ਕੇ ਦੱਸੋ ਜੀ ਧਾਰ ਕੜੜੀ ਆ ?
(pb)
Punjab
ਉਸ ਨੂੰ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਰਾਵ ਖੰਡ ਦੀ ਚਾਸਣੀ ਬਣਾ ਕੇ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਡਾਲਡਾ ਘਿਓ, 250 ਗ੍ਰਾਮ ਨਿੰਬੂ, 100 ਗ੍ਰਾਮ ਮਿਠਾਸੋਡਾ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਜੋੰ-ਖਾਰ ਪਾ ਕੇ ਉਬਾਲ ਕੇ ਫਿਰ ਠੰਡਾ ਕਰਕੇ ਕੇ ਪੰਜ ਤੋਂ ਸੱਤ ਦਿਨ ਦਿਉ ਜੀ..
ਬਾਰਾ ਮਾਸਾ ਨਿੰਬੂ ਲਾਇਆ ਉਸ ਦਾ ਵਾਧਾ ਨੀ ਹੋ ਰਿਹਾ ਕੀ ਕਰੀਏ ?
(pb)
Maharashtra
Rakesh ji tuc nimbu nu 150 gram urea Pao isde nal boote di growth hona shuru ho jayegi dhanwad
SL 44 ਜਵਾਰ ਦਾ ਬੀਜ ਕਿਥੋ ਮਿਲੇਗਾ ਅਤੇ ਇਸ ਬੀਜ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 5 ਜੂਨ ਤੱਕ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਜੁਆਬ ਜਰੂਰ ਦਿੳ ਜੀ ?
(pb)
Maharashtra
ਪਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਇਹ ਬੀਜ ਤੁਹਾਨੂੰ PAU ਲੁਧਿਆਣਾ ਤੋਂ ਮਿਲੇਗਾ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਅੱਧ ਜੂਨ ਤੋਂ ਅੱਧ ਜੁਲਾਈ ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਗੇਤੇ ਹਰੇ ਚਾਰੇ ਲਈ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮਾਰਚ ਦੇ ਅੱਧ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
मिर्च की खेती मे माईट लगी है क्या करें ?
(hn)
Maharashtra
Cb Singh ji mite ki roktham ke liye aap imidacloprid@1.5ml ko prati liter Pani ke hisab se spray kare.
dupont almix ki km krdi hai g ?
(en)
Punjab
Harman ji isde vich metsulfuron methyl+chlorimuron ethyl nam da salt hunda hai. eh chaude patteya di roktham de layi vartya janda hai.dhanwad
सुगंधित महिन सामजिरा धान का कोई वेराईटी बताऐ जिसका उपज अछा हो ?
(hn)
Punjab
Taraori Basmati: यह सिंचित क्षेत्रों में अगेती बिजाई के लिए उपयुक्त है यह किस्म 145-155 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Haryana Basmati no 1: यह अर्द्ध छोटे कद की किस्म है और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है यह किस्म 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 16 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Basmati 1121, Pusa Basmati 1, CSR 30, Shabnam
गन्ना के रोग बताओ ?
(en)
Maharashtra
गन्ना के रोग:- रतुआ रोग : यह फंगस रोग है जिस कारण गन्ने का तीसरा और चौथा पत्ता पीला हो कर सूख जाता है इस रोग से गन्ने का अंदरूनी गुद्दा लाल हो जाता है काटे हुए गन्ने में खट्टी और शराब जैसी बदबू आती है इसकी रोकथाम के लिए रोग रहित फसल से बीज लें और रोग को सहने योग्य किस्म बोयें धान और हरी खाद वाली फसलों का फसली चक्र अपनाना चाहिए खेत में पानी ना रूकने दें प्रभावित बूटों को उखाड़ कर खेत से बाहर फेंके कार्बेनडाज़िम घोल की 0.1 प्रतिशत मात्रा को मिट्टी के ऊपर प्रयोग करने से बीमारी रोकी जा सकती है मुरझाना : जड़ बेधक, नेमाटोडस, शुष्क और ज्यादा पानी खड़ने के हालातों में यह बीमारी ज्यादा आती है इससे पत्ते पीले पड़ कर सूख जाते हैं पौधों में किश्ती के आकार के गड्ढे पड़ जाते हैं और फसल सिकुड़ जाती है इससे फसल का उगना और पैदावार दोनों ही कम हो जाती है इसकी रोकथाम के लिए गुलियों को कार्बेनडाज़िम 0.2 प्रतिशत+बोरिक एसिड 0.2 प्रतिशत के घोल में 10 मिनट तक उपचार करें इसके इलावा प्याज लहसुन और धनिये की फसल भी इस बीमारी को कम करने में मदद करती है चोटी गलन : यह बीमारी हवा से पैदा होती है जो मॉनसून में होती है बीमारी वाले गन्ने के पत्ते सिकुड़ जाते हैं तने के नजदीक वाले पत्ते लाल हो जाते हैं नए पत्ते छोटे और तिरछे हो जाते हैं इस बीमारी की प्रतिरोधक किस्मों का प्रयोग करें यदि इसका हमला दिखे तो कार्बेनडाज़िम 4 ग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम या मैनकोज़ेब 3 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
ਨਿੰਬੂ ਨੂੰ ਫਲ ਨਹੀ ਆ ਰਿਹਾ ਮੈ 2 ਵਿਗੇ ਵਿਚ ਬਾਗ ਲਗਾਇਆ ਹੈ ?
(pb)
Maharashtra
ਰਣਜੀਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਉਮਰ ਦੱਸੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
Punjab
2 saal . 3 month ho gaye jj lagayea nu
Punjab
2 ਸਾਲ 2 ਮਹੀਨੇ ਹੋ ਗਏ ਜੀ ਬੂਟੇ ਲਗਾਇਆ ਨੂੰ ! ਪਰ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਨਿੰਬੂ ਨਹੀ ਲਗ ਰਹੇ
गन्ना में लगने वाले रोग की जानकारी ?
(en)
Punjab
रतुआ रोग : यह फंगस रोग है जिस कारण गन्ने का तीसरा और चौथा पत्ता पीला हो कर सूख जाता है इस रोग से गन्ने का अंदरूनी गुद्दा लाल हो जाता है काटे हुए गन्ने में खट्टी और शराब जैसी बदबू आती है इसकी रोकथाम के लिए रोग रहित फसल से बीज लें और रोग को सहने योग्य किस्म बोयें धान और हरी खाद वाली फसलों का फसली चक्र अपनाना चाहिए खेत में पानी ना रूकने दें प्रभावित बूटों को उखाड़ कर खेत से बाहर फेंके कार्बेनडाज़िम घोल की 0.1 प्रतिशत मात्रा को मिट्टी के ऊपर प्रयोग करने से बीमारी रोकी जा सकती है मुरझाना : जड़ बेधक, नेमाटोडस, शुष्क और ज्यादा पानी खड़ने के हालातों में यह बीमारी ज्यादा आती है इससे पत्ते पीले पड़ कर सूख जाते हैं पौधों में किश्ती के आकार के गड्ढे पड़ जाते हैं और फसल सिकुड़ जाती है इससे फसल का उगना और पैदावार दोनों ही कम हो जाती है इसकी रोकथाम के लिए गुलियों को कार्बेनडाज़िम 0.2 प्रतिशत+बोरिक एसिड 0.2 प्रतिशत के घोल में 10 मिनट तक उपचार करें इसके इलावा प्याज लहसुन और धनिये की फसल भी इस बीमारी को कम करने में मदद करती है चोटी गलन : यह बीमारी हवा से पैदा होती है जो मॉनसून में होती है बीमारी वाले गन्ने के पत्ते सिकुड़ जाते हैं तने के नजदीक वाले पत्ते लाल हो जाते हैं नए पत्ते छोटे और तिरछे हो जाते हैं इस बीमारी की प्रतिरोधक किस्मों का प्रयोग करें यदि इसका हमला दिखे तो कार्बेनडाज़िम 4 ग्राम या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 3 ग्राम या मैनकोज़ेब 3 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें
..?
(hn)
Punjab
Kuldeep ji apke duara bheji gyi audio upload nahi hui hai kripa aap audio dubara upload kren tan jo apko sahi jankari di ja ske.
goats de soon da time period ki hai ?
(pb)
Punjab
goats de soon da time 155 days da hunda hai ji.
तम्बाकू की खेती के प्रति जानकारी लेने चाहता हु। कृपया मदद करे। आपका धन्यवाद ?
(hn)
Punjab
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है बारानी फसल होने के कारण, यह जलोढ़ मिट्टी, दोमट मिट्टी और काली चिकनी मिट्टी में सबसे अच्छी बढ़ती है सिगार और चिरूट तंबाकू की खेती सलेटी से लाल मिट्टी से लेकर हल्की बजरीयुक्त से रेतली दोमट मिट्टी में की जाती है चबाने वाला तंबाकू हर किस्म की मिट्टी में उगाया जा सकता है जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती ना करें सिगार की अच्छी गुणवत्ता के लिए मिट्टी में रेत मिलायें नाइट्रोजन, पोटाशियम, कैलशियम और मैगनीशियम की उच्च मात्रा युक्त मिट्टी ही चुनें प्रसिद्ध किस्में :- Flue-Cured Virginia (FCV), Bidi, Hookah and Chewing, Cigar filler, Cigar Wrapper,Cheroot, Burley मिट्टी की किस्म के आधार पर खेत की मोल्ड बोर्ड और सिंगल हल से 6-10 बार जोताई करें डलियों को तोड़ने और मिट्टी को समतल करने के लिएहैरो से जोताई करें नदीनों को निकाल दें और खेत को नदीन मुक्त रखें मिट्टी की किस्म के आधार पर, अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर या रूड़ी की खाद मिट्टी में अच्छी तरह से मिलायें यह बिजाई के क्षेत्र और किस्म पर निर्भर करता है विभिन्न किस्मों के लिए नर्सरी की बिजाई और रोपाई का समय अलग अलग होता है, चाहे ये समान जगह पर हो नर्सरी में बिजाई के लिए अप्रैल से मई का महीना उपयुक्त होता है और रोपाई अक्तूबर महीने में की जा सकती है फासला क्षेत्र और किस्म के साथ अलग होता है FCV तंबाकू के लिए 70x50 सैं.मी. या 100x60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीड़ी तंबाकू के लिए 90x60 सैं.मी., 100x75 सैं.मी. या 75x50 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बरली, नाटू और लंका तंबाकू के लिए 90x45 सैं.मी. या 90x90 सैं.मी. या 60x60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें सिगार और चिरूट के लिए 70x50 सैं.मी. या 60x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें हुका के लिए 90x90 सैं.मी. या 60x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नए पौधों का मुख्य खेत में रोपण किया जाता है रोपाई मेंड़ों पर या समतल बैडों पर की जाती है तंबाकू के बीज छोटे और अंडे के आकार के होने के कारण ये खेत में सीधा बोने के लिए उपयुक्त नहीं होते इसलिए इन्हें पहले नर्सरी में बोया जाता है और बाद में मुख्य खेत में रोपण कर दिया जाता है नर्सरी के लिए रेतली या रेतली दोमट मिट्टी चुनें भारी काली मिट्टी ना लें क्योंकि ये मिट्टियां हल्के निकास वाली होती हैं जिससे नर्सरी में उखेड़ा रोग की बीमारी आ जाती है गहरे धूप और भारी बारिश के दौरान नर्सरी को नुकसान से बचायें मल्च और कवर का प्रयोग करें आवश्यकता के अनुसार नाइट्रोजन का बुरकाव करें जब पौधे 6-8 सप्ताह के हो जायें तब वे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं पौधों के नर्सरी में से निकालने से एक सप्ताह पहले सिंचाई देना बंद कर दें तंबाकू की सभी किस्मों के लिए प्रति एकड़ में 1.2 से 2 किलो बीजों की मात्रा उपयुक्त होती है तंबाकू उगाने वाले विभिन्नि क्षेत्रों में खादों की मात्रा भी विभिन्न होती है खेत की तैयारी के समय 10 टन रूड़ी की खाद या अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर या फिल्टर प्रैस केक प्रति एकड़ में डालें फासफोरस 40 किलो (एस एस पी 250 किलो) शुरूआती खुराक के तौर पर डालें नाइट्रोजन 40 किलो (यूरिया 90 किलो) का बुरकाव प्रति एकड़ में करें नर्सरी में, नदीनों की जांच के लिए हाथों से गोडाई करें मुख्य खेत में, रोपाई के बाद शुरूआती 60 दिनों तक खेत को नदीन मुक्त रखें मुख्य खेत में, कतारों में फासला ज्यादा होने के कारण इसमें अंतरफसली संभव है पर रखा जाता है, इनमें अंतर कतारों में खेती संभव है हाथों से 1-2 गोडाई करें इससे नदीनों पर पर्याप्त नियंत्रण होता है तंबाकू की फसल अंकुरन की बाद की नदीनाशकों के प्रति संवेदनशील होती है इसलिए मुख्य खेत में पौधों की रोपाई से पहले नदीनाशक जैसे प्रोनामाइड, फलूक्लोरालिन, इसोप्रोपालिन, इसोक्साबेन डालें काली मिट्टी में तंबाकू सामान्य सिंचित नहीं होता, लेकिन कई हालातों में 40 दिन के पौधों को एक सिंचाई देने की सिफारिश की गई है जब इसकी खेती हल्की मिट्टी में की जाए तो छ: सिंचाइयों की आवश्यकता होती है सिंचाई के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले पानी का प्रयोग करें, इसमें क्लोराइड की मात्रा 50 पी एम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए क्योंकि इससे पत्ते झुलस जाते हैं और पत्तों की गुणवत्ता पर भी इसका असर पड़ेगा जब सामान्य हरे रंग के पत्ते पीले हरे से हल्के पीले में बदल जायें तब वे कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं कटाई का समय क्षेत्र और किस्म के आधार पर अलग अलग होता है आंध्र प्रदेश में flue-cured Virginia की कटाई का उपयुक्त समय दिसंबर-मार्च जबकि कर्नाटका में कटाई के लिए जुलाई-सितंबर का महीना उपयुक्त समय होता है बीड़ी तंबाकू की कटाई जनवरी फरवरी में की जाती है सिगार और चेरूट तंबाकू की कटाई का सही समय रोपाई के 90-100 दिनों के बाद पत्तों के नाज़ुक और पीले रंग के हो जाने पर होता है जबकि चबाने वाले तंबाकू की कटाई रोपाई के 110-120 दिनों के बाद की जाती है हुका तंबाकू का सही समय मई जून का महीना होता है कटाई के लिए दो ढंगों का प्रयोग किया जाता है प्राइमिंग और तना काटकर प्राइमिंग : सामान्य तौर पर ऊपरी पत्तों की बजाय निचले पत्ते जल्दी परिपक्व होते हैं पत्तों के पकने पर कटाई करें और कुछ पत्तों को निकाल लें सिगरेट और रैपर तंबाकू के लिए प्राइमिंग ढंग का प्रयोग किया जाता है तना काटकर : सिगार, चेरूट, चबाने वाले, बीड़ी और हुका के लिए तना काटकर ढंग का प्रयोग किया जाता है इस विधि में ज़मीनी स्तर से पौधे का भाग दरांती की सहायता से काटा जाता है और उसे सूखने के लिए पूरी रात खेत में छोड़ दिया जाता है ज्यादा संख्या में पत्तों के परिपक्व होने पर कटाई करें औसतन, flue cured Virginia और नाटू तंबाकू की उपज 312 किलो और 395 किलो प्रति एकड़ प्राप्त होती है बीड़ी तंबाकू की 145-187 किलो प्रति एकड़ उपज प्राप्त होती है सिगार, चेरूट और चबाने वाले तंबाकू की औसतन उपज 520-666 किलो प्रति एकड़ में प्राप्त होती है
Uttar Pradesh
आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
jhone di lwai di date kini aa ji daseo ?
(pb)
Punjab
Manpreet ji jhone di lvayi di tareek 13 june to hai.dhanwad
सर जी मैने कल आलूबुखारा के बारे जानकारी मांगी थी प्लीज जवाब दे ?
(hn)
Punjab
आपके सभी सवालो का जवाब दिया जा चुका है आप अपने सवालों के जवाब एप में मेरे सवाल का क्लिक करके देख सकते हैं या फिर मेरी प्रोफाईल के नीचे अपने सवालों के जवाब देख कते हैं यदि आपकी कोई ओर समस्या है तो आप हैल्प लाईन नंबर : 97799-77641 पर संपर्क कर सकते हैं
bater market in bathinda ?
(pb)
Punjab
Satpal Singh Randhawa ji tusi bathinda vich pata karo ke kehde hotel vich bater da meat milda hai. fr os hotel vich tusi oh vechan di gal kar sakde ho ji. ehdi direct hi market karni pavegi ji.
Veer ji phone no dedo apna
ਸਾਡਾ ਆੜੂਆ ਦਾ ਬੂਟਾ ਹੈ ਬਹੁਤ ਫਲ ਲਗਦਾ ਸੀ ਪਰ ਇਸ ਵਾਰ ਫਲ ਬਹੁਤ ਲੱਗਿਆ ਤੇ ਜਦ ਆੜੂ ਪੱਕਣੇ ਸੁਰੂ ਹੋਏ ਤਾ ਹੋਲੀ ਹੋਲੀ ਸੁਕਣਾ ਸੁਰੂ ਹੋ ਗਿਆ ਤੇ ਇਸ ਅਸੀ ਕਲੋਰੋ ਵੀ ਫਰਵਰੀ ਵਿਚ ਪਾਈ ਸੀ
(pb)
Punjab
ਹਰਜੀਤ ਜੀ ਜੜਾਂ ਵਿਚ ਸਿਉਂਕ ਚੈੱਕ ਕਰੋ ਜੇਕਰ ਮੌਜੂਦ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ chlorpyriphos @4 ਮਿਲ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਜੜਾਂ ਵਿਚ ਪਾਓ ਧੰਨਵਾਦ
Punjab
ਨਹੀ ਵੀਰ ਸਿਉਂਕ ਨਹੀ ਹੈ ਮੈ ਚੈਕ ਕੀਤੀ ਹੈ
sir ji jhone di date ki ayi aa ji ?
(pb)
Punjab
Simrandeep ji jhone di bijai di tareek 13 june to hai ji.dhanwad
यूपी में किसान समृद्धि योजना के कागज कब जमा करें जो पहले से वंचित रह गए हैं ?
(hn)
Punjab
स्टेप बाई स्टेप जाने कैसे लें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ 1.प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ लेने के लिए आपको ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करना पड़ेगा 2.किसानों को इसका लाभ पाने के लिए सबसे पहले कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा, प्रशासन उसका वेरीफिकेशन करेगा रेवेन्यू रिकॉर्ड, बैंक अकाउंट नंबर, मोबाइल नंबर और आधार नंबर देना होगा कोई कन्फ्यूजन है तो अपने लेखपाल से संपर्क कर सकते हैं लेखपाल ही यह वेरीफाई करता है कि आप किसान हैं 3.अगर लेखपाल और कृषि अधिकारी किसी असली किसान को इसका लाभ देने में आनाकानी कर रहे हैं तो सोमवार से शुक्रवार तक पीएम-किसान हेल्प डेस्क (PM-KISAN Help Desk) के ई-मेल Email (pmkisan-ict@gov.in) पर संपर्क कर सकते हैं वहां से भी न बात बने तो इस सेल के फोन नंबर 011-23381092 (Direct HelpLine) पर फोन करें 4.आॉनलाइन आवेदन करते समय किसान को अपना आधार कार्ड नंबर, मतदाता पहचान पत्र और बैंक से संबंधित यानी कि बैंक खाता संख्या पास होना जरूरी है 5.इसके अलावा अगर किसान एससी/एसटी वर्ग से है तो उसके लिए उसे सर्टिफिकेट देना होगा 6.इसके बाद आपको अपनी जानकारी देने होगी जैसे कि पिता का नाम, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, खेती की जानकारी जैसे- खेत का आकार, कितनी जमीन है आदि 7.प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का ऑफलाइन आवेदन करने के लिए किसानों को ग्राम पंचायत या फिर पास के सीएससी सेंटर जाना होगा वहां पर जाने के बाग आपको फार्म दिए जाएंगे, जिन्हें आपको भरना होगा
ਕੋਈ ਹੱਲ ਦੱਸੋ ਜੀ
(pb)
Punjab
ਜਸਮੇਲ ਸਿੰਘ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣੇ ਸਵਾਲ ਦੇ ਨਾਲ ਫੋਟੋ ਵੀ ਅੱਪਲੋਡ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
ਫੋਟੋ ਅੱਪਲੋਡ ਹੋ ਨੀ ਰਹੀ
Punjab
jdoo tuci camera nal photo click krde ho fir jddo app vich attach krnn di koshish krde ho uthe oh black show hundi hai , isde lyi tuci jddo apna swal type krde ho uss to badd niche photo upload kro di option vich jaa ke new photo click kro , iss trah tuahdi photo app vich upload ho jawegi, jekar fir v upload nhi hundi fir tuci sade helpline no . 97799 77641 te sampark kr skde ho...
100 desi murgi se kitana egg milega ?
(hn)
Uttar Pradesh
Gopal waman dighore ji 1 murgi 72 week me 80-100 egg deti hai ji. is hissab se aap aap 100 murgi ke egg ki ginti nikal sakte ho.
7903647427
arand ki unat kism kaha milega or iska beej kaha milega ?
(hn)
Punjab
Type 27,Type 56,Pusa 1,Pant 430,HPU 6,T 65,LBG 22,LBG 402,LBG 20 ki bijai kar sakte hai. yeh aapko local market men mil jayegi.dhanywad
tree kitho milange park में लगाने के लिए ?
(pb)
Punjab
Balwinder singh ji Bute len lai tusi Balwinder Singh Lakhewali 98142-39041 nal samparak kar sakde ho. Thankyou.
makki di koi koi ktar pili pai rahi hai koi hall dasso hare tidde di roktham vaste koi hall dasso ?
(pb)
Punjab
gagan chahl ji kirpa karke makki di photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake ke isde patte peele kyu ho rahe han is to ilava tuc tidde di roktham de layi imidacloprid@1.5ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
..?
(en)
Punjab
Gursahib ji kirpa krke apna swal vistar nal pusho ji tan jo tuhanu sahi jankari diti ja ske..
ganje ki kheti kaise ki jati hai ?
(hn)
Punjab
अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें राजस्थान के लिए अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें
Punjab
अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें राजस्थान के लिए अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें
Punjab
अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें राजस्थान के लिए अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें
Punjab
अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें राजस्थान के लिए अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें
Punjab
अच्छी उपज और वृद्धि के लिए इसे उपजाऊ, अच्छे निकास वाली काली मिट्टी और हल्की दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी की पी एच 7 के लगभग होनी चाहिए Chetak: यह अधिक उपज वाली किस्म है इसके पौधे का औसतन कद 80-90 सैं.मी. होता है इसके फूल सफेद रंग के और फल बड़े और गोल आकार में होते हैं यह अधिक उपजाऊ मिट्टी में अच्छी पैदावार देती है इसमें मोर्फिन की मात्रा 12.5 प्रतिशत होती है यह मोर्फिन की औसतन पैदावार 2 किलोग्राम प्रति एकड़ देती है मिट्टी की किस्म के आधार पर मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की दो-तीन बार जोताई करें मिट्टी को अच्छे से समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा हो सके खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ, गाय का गोबर 4 टन प्रति एकड़ में डालें राजस्थान के लिए अफीम की बिजाई के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त होता है इसके बीज छोटे होते हैं इसलिए बीजों को बारीक रेत में अच्छे से मिलाया जाता है और फिर बिजाई के लिए प्रयोग किया जाता है 3 मीटर चौड़े और 5 मीटर लंबे बैड तैयार किए जाते हैं बैड पर 30 सैं.मी. के फासले पर कतार बनाई जाती है, फिर बीजों को कतारों में बोया जाता है पौधे से पौधे का फासला 30 सैं.मी. रखें बिजाई के लिए बुरकाव या कतार में बिजाई का ढंग प्रयोग किया जाता है बीज की मात्रा ज्यादा डालने से गोडाई करने में परेशानी आती है, जिससे फसल का विकास अच्छा नहीं होता, इसलिए बुरकाव विधि से ज्यादा कतारों में बिजाई करने को ज्यादा महत्तव दिया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 2 किलो बीज की मात्रा बहुत होती है बिजाई से पहले मैनकोजेब 4 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें नाइट्रोजन 36 किलो (यूरिया 80 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 4 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 10 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा को दो भागों में बांटे, पहली मात्रा बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें और दूसरी मात्रा फूल बनने से पहले डालें अफीम की पूरी फसल को 8-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें फिर मिट्टी की किस्म, सिंचित क्षेत्र के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जलवायु हालातों और आवश्यकता के आधार पर सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर, सिंचित खेत में 10-12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें चीरा लगाने से 8-10 दिन पहले सिंचाई बंद कर दें नदीनों की तीव्रता के आधार पर दो से तीन गोडाई करें नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए लसोप्रोटियूरॉन 500 ग्राम को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद तीसरे दिन डालें नदीननाशक क्रिया के 30 दिन बाद पहली गोडाई करें
I am living in pathankot and want to plant lemon tree. I want lemon plants which produce lemon in the month of May and june,October and November. Kindly tell me from where I will get plants ?
(en)
Punjab
Rajinder Singh to get Lemon Plant you can Contact with me 8003892293, 9530002191. Thank you.
abhi strawberry ki kheti kaise kare ?
(hn)
Maharashtra
स्ट्रॉबेरी की खेती पॉलीहाउस के अंदर या खुले खेत में कर सकते हैं चीकनी, बालुई और अच्छे निकास वाली ज़मीन स्ट्रॉबेरी के लिए अच्छी होती है तेजाबी में पी एच 5.0 से 6.5 होनी चाहिए मिट्टी की नाज़ुकता तीस से चालीस सैं.मी. होनी चाहिए स्ट्रॉबेरी की सही वृद्धि के लिए दिन में तापमान 20-25 डिगरी और रात के समय 7-12 डिगरी होना चाहिए इसलिए इसकी पनीरी लगाने का काम मध्य अक्तूबर से मध्य नवंबर तक कर देना चाहिए इन महीनों और इसके बाद पंजाब में लगभग यही तापमान होता है स्ट्रॉबेरी की खेती मलचिंग विधि द्वारा की जाती है सबसे पहले खेत को तैयार किया जाता है इसके बाद ही ट्रैक्टर की सहायता से मलचिंग मशीन को खेत में उतारा जाता है चार फुट क्यारी तैयार की जाती है इसमें ड्रिप लाइन फिट की जाती है इसके बाद मशीन की सहायता से क्यारियों पर प्लास्टिक शीट बिछाई जाती है मलचिंग के लिए हल्का और लचकीला पदार्थ लें ताकि स्ट्रॉबेरी के पौधे की रफ्तार पर असर ना पड़े जिसे बाद में दोनों ओर से मिट्टी में दबा दिया जाता है अब इस शीट में छेद करके उसमें स्ट्रॉबेरी की पनीरी लगायी जाती है पनीरी लगाने के समय जड़ को पूरी तरह मिट्टी में व्यवस्थित कर दें जड़ बाहर रहने से पौधे के सूखने का खतरा होता है पौधे को ज्यादा तापमान और ठंड से बचाने के लिए इसके ऊपर छांव करनी चाहिए जो आप लो टन्नल विधि से कर सके हैं मौसम का बहुत ख्याल रखना पड़ता है थोड़ी सी लापरवाही से सारी फसल खराब हो सकती है पहले साल अपने खेत में स्ट्रॉबेरी की खेती करने का कुल खर्चा ढाई से तीन लाख रूप्ये प्रति एकड़ के हिसाब से आ जाता है क्योंकि किसान को पहले साल ड्रिप सिस्टम और फव्वारों आदि पर खर्च करना पड़ता है पर अगले वर्षों में किसानों का यह खर्चा बच जाता है इसके लिए एक एकड़ में 40 बैड बनते हैं और एक बैड पर 1000 स्ट्रॉबेरी के पौधे लगते हैं इस तरह एक एकड़ में चालीस हजार पौधे लगाए जाते हैं एक पौधा 3 से 4 रूप्ये तक मिल जाता है और इसकी उपज 50 से 60 क्विंटल तक निकल आता है 25-30क्विंटल गोबर की खाद एक एकड़ में डालें यह खाद एक साल में डालनी होती है फिर 20 : 40 : 40 NPK KG / हेक्टेयर डालनी है अच्छी फसल के लिए यूरिया दो फीसदी जिंक सल्फेट, आधा प्रतिशत कैलशियम सल्फेट और बोरिक एसिड 0.2 फीसदी अच्छी फसल के लिए ठीक है सिंचाई जल्दी जल्दी पर हल्की करनी चाहिए ज्यादा पानी ठीक नहीं है पत्ते गीले ना करें तुपका सिंचाई से पानी कम लग सकता है यदि तुपका सिंचाई नहीं कर रहे तो क्यारियों में पानी खाली में ही लगाएं नदीन हाथ से हटाएं या कीड़े मकौड़े और अन्य बीमारियों की तरफ ध्यान रखना जरूरी है यदि कोई पौधा ज्यादा खराब है उसे हटा दें जब फल का रंग 70 प्रतिशत लाल हो जाये तो तोड़ लेना चाहिए यदि मार्किट दूरी पर है तो थोड़ा सख्त ही तोड़ना चाहिए तुड़ाई अलग अलग दिनों में करनी चाहिए स्ट्रॅाबेरी की पैकिंग प्लास्टिक की प्लेटों में करनी चाहिए इसे हवादार जगह पर रखना चाहिए जहां तापमान पांच डिगरी हो एक दिन के बाद स्ट्रॉबेरी की पैकिंग का तापमान ज़ीरो डिग्री होना चाहिए मार्किट में स्ट्रॉबेरी औसतन 200 रूपये प्रति तक बिकती है इस तरह पांच लाख प्रति एकड़ से इसकी आमदन शुरू होकर आगे अपनी मेहनत से किसान आमदन में भरपूर वृद्धि कर सकता है स्ट्रॉबेरी के पौधे सितंबर से अक्तूबर तक लगाए जाते हैं और 3 महीने के बाद यह फल देना शुरू कर देते हैं इसकी फसल अप्रैल तक चलती है इसकी मार्केटिंग में किसी भी तरह की मुश्किल नहीं है, यह ऐलनाबाद, सिरसा, हनुमानगढ़, गंगानगर के इलावा बठिंडा, मोगा, जलंधर. लुधियाना में इसकी मार्केटिंग कर सकते है, यदि ज़्यादा मात्रा में स्ट्रॉबेरी है तो दिल्ली इसकी मुख्य मार्किट है
sir maj aa taara degdi rahndi aa do var dwai bhrwa ti ?
(pb)
Punjab
ਤੁਸੀ 250ਗ੍ਰਾਮ ਜੋੰ-ਖਾਰ, 250ਗ੍ਰਾਮ ਕਲਮੀਸ਼ੋਰਾ, 250ਗ੍ਰਾਮ ਮਿਠਾਸੋਡਾ ਤੇ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਫੜਕੜੀ ਲਉ ਤੇ ਖਿਲ ਕਰੋ ਫਿਰ ਸਾਰਾ ਸਾਮਾਨ ਰਗੜ ਕੇ ਪੋਡਰ ਬਣਾਉ ਤੇ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ 50gm ਰੋਜਾਨਾ ਖਾਲੀ ਪੇਟ ਦਿਉ ਜੀ ਇਸ ਨਾਲ ਜਲਦੀ ਠੀਕ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Macmin dry ਪਾਊਡਰ 25-25 ਗ੍ਰਾਮ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਇਹ ਤੁਸੀ 20 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ .
Rajasthan
No
Punjab
9888771006
Poultry farming ਸਫਲ ਕਿਸਾਨ ਵੀਰਾ ਦਾ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ Whats app group ਹੈਗਾ ਤਾ ਮੈਨੂੰ Group ਵਿੱਚ add ਕਰਾ ਦਿਓੁ ਮੈਨੂੰ ਜੀ ਜਾ Whats app group ਦਾ Link send kar deo ਜੀ ਧੰਨਵਾਦ ਜੀ ?
(pb)
Punjab
ਗੁਰਪਾਲ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਨੰਬਰ ਨੂੰ ਵੱਟਪ ਅੱਪ ਗਰੁੱਪ ਵਿੱਚ ਐਡ ਕਰਨ ਲਈ ਰਿਕਵੈਸਟ ਭੇਜ ਦਿੱਤੀ ਗਈ ਹੈ ਜੀ ਜਲਦ ਹੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਐਡ ਕਰ ਲਿਆ ਜਾਵੇਗਾ ਜੀ
Punjab
Whats app group da link send kar de g
Punjab
Mainu aje tak add ni kita g whats app poultry group vich g
sir, me broiler farming krna chahta hu is k liye merko aachi si company ka naam or no. btaye ?
(en)
Punjab
Nikhil Sandhu ji Contract Poultry ke lia aap Salil Sood 9781017711 se samparak kar sak sakte hai agar aap desi me ana chahte hai to aap Sumit Jandar 8275592788 se samparak kar sakte hai. Thankyou.
plz send details of stevia farming ?
(en)
Punjab
Stevia is a shrub which is used as sugar substitute. This is also called as “sweet leaf, sugar leaf and honey leaf “. The leaves of Stevia plant is source of zero calorie sweetener and the sweetness of this plant more than sugar. The cultivation of Stevia plant is also introduced in India . MDS -14 and MDS-13 are two varieties of Stevia. Stevia plant crop requires about 150 cm rainfall annually and prefers an average temperature of 30°C to 32 °C for its best growth. High temperatures above 45°C and nightly temperatures below 5°C will damage the crop. Stevia plant grows best in well drained, rich, red and sandy loam soils. This plant prefers acidic to neutral soils with fine tilth. Soil pH range should be about 6.0 to 7.5 for its best growth and yield. In case of poor soils, applying good organic matter and micro nutrients would fetch good yield of Stevia. To break down the clods and make weed free soil, the land should be harrowed and then ploughed. 2 to 3 ploughings with tractor or local/country plough would make the soil fine tilth. Make sure the land is not susceptible to flooding and pudding. The raised beds should have 12 to 15 cm in height & 50 to 60 cm in width. Row-to-Row distance should be 40 to 45 cm and Plant-to-Plant distance should be about 30 cm. This calculation gives Stevia plant density as 20,000 to 25,000 plants per 1 acre. Planting Season in Stevia Plant Farming is Feb-to- March of the year. Plant density in Stevia cultivation is about 20,000 – 25,000 plants per acre. Stevia crop responds good to fertilizers and manures with lower nitrogen content. It is good idea to have organic manures due to slow release of nitrogen. Adding Farm Yard Manure (FMY), Vermi compost, cow dung/urine will be beneficial for better crop yield. The fertilizer dose of NPK of 28:113:113 kg/hectare is recommended for high yield of Stevia crop.Irrigation can be carried out by traditional methods or drip/micro sprinklers. However, using drip irrigation system or micro sprinkler system is best for irrigating Stevia crop. Frequent light irrigation should be carried out in hot summer months. In winter or rainy season, this crop may not need frequent watering. Avoid excessive moisture level in the soil is not favourable for its growth. Usually there are hardly or no pests and diseases found in Stevia crop. If any pest or disease noticed, spraying neem oil by diluting water is the best organic method. Removal of weeds should be done manually. Inter cultural operations in Stevia crop are easy for labour, since the crop is grown on raised beds. Avoid the flowering of the plant. However, regular weeding @ 8 weeks interval should be carried out.There are no pests and diseases found in Stevia crop, If anything noticed, spraying neem oil with diluted water would work just fine. Stevia plants become ready for first harvesting when they attain 40 to 60 cm in height (or) 4 to 5 months after planting. Thereafter, harvesting can be carried out every 3 months for 3 years. The Stevia plants should be cut just before flowering starts as the sweetener in its leaf would be maximum at this time and also can get good quantity at this point in time. Harvesting can be done by plucking in a small quantities or the whole plant leaving 15 cm from the base.An average yield of 2500 to 2700 kg’s of dried Stevia leaves per acre can be obtained with crop management practices and good variety. As part of post harvesting, Stevia plant branches should be dried in shade for 2 days. Dried Stevia leaves should be separated, threshined into powder and stored in containers. For more information Please call to Rashid Khan 9039693757. Thank you
sir paneeri nu zinc 21% wali chite rahi pa sakde a k spray nal kini dose pauni ?
(pb)
Punjab
Gurpreet ji 21% vali zinc di matra ik acre vich 25 killo payi jandi hai jo ke 2-3 saal de layi kaafi hundi hai. dhanwad
jhone di paneeri peeli ho rhi hai us pr dubara chhidkaw kriye ja khad paiye ?
(pb)
Punjab
Jekar paniri uper to peeli pai rahi hai ta isde vich lohe di kami hai. isdi roktham de layi ferrous sulphate 1% @1 killo nu prati aikad de hisab nal spray karen.jekar chelated ferrous sulphate di spray karni hai ta isdi matra 200 gram prati aikad hundi hai. jekar hale tak urea nahi payi ta 3 killo prati knal de hisab nal pao.kayi var paniri nitrogen di kami de karn vi paniri peeli honi shuru ho jandi hai.
grmi me mirch ke beej kaise dale ya mirch ki plant kaise taiyar kre i want full details ?
(hn)
Punjab
मिर्च की खेती पूरे वर्ष की जाती है खरीफ की फसल के लिए मई-जून और गर्मियों की फसल के लिए फरवरी - मार्च का समय मिर्च की रोपाई के लिए उपयुक्त होता है खरीफ के मौसम में 60-75 सैं.मी. x 45 सैं.मी. और सिंचित क्षेत्रों में 60 x 60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीजों को 3-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें और फिर मिट्टी से ढक दें इसकी मुख्य खेत में रोपाई की जाती है 1 मीटर चौड़े और आवश्यकतानुसार लंबे बैड बनाएं कीटाणु रहित कोकोपिट 300 किलो, 5 किलो नीम केक को मिलाए और 1-1किलो एज़ोसपीरिलियम और फासफोबैक्टीरिया भी डालें उपचार किए हुए बीज ट्रे में एक बीज प्रति सैल बोयें बीज को कोकोपिट से ढक दें और ट्रे एक- दूसरे के साथ रखें बीज अंकुरन तक इन्हें पॉलीथीन से ढक दें नर्सरी में बीज बीजने के बाद बैडों को 400 मैश नाइलोन जाल या पतले सफेद कपड़े से ढक दें यह नए पौधों को कीड़े-मकौड़े और बीमारियों के हमले से बचाता है 6 दिनों के बाद, ट्रे में लगे नए पौधों को एक एक करके जाल की छांव के नीचे बैडों में लगाएं बीज अंकुरन तक पानी देने वाले बर्तन की मदद से पानी दें बिजाई के 18 दिन बाद 19:19:19 की 0.5 % (5 ग्राम प्रति लीटर ) की स्प्रे करें किस्मों के लिए 200 ग्राम बीज और हाइब्रिड के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें
ganne me futaav ke liye kya dale ?
(hn)
Punjab
खादों की सही आवश्यकता जानने के लिए प्रत्येक तीन वर्ष के बाद मिट्टी की जांच जरूरी है बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 8 टन या वर्मीकंपोस्ट + रालीगोल्ड 8-10 किलो या पी एस बी 5-10 किलो प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 60-90 किलो (यूरिया 135-200 किलो) और फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो) प्रति एकड़ में डालें फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दूसरी और चौथी सिंचाई के समय डालें सर्दियों के मौसम में तापमान कम होने के कारण फसल तत्व ज्यादा लेती है जिस कारण मौधा पीला पड़ जाता है इसकी रोकथाम के लिए N:P:K 19:19:19 की स्प्रे 100 ग्राम 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ के लिए प्रयोग करें जिन इलाकों में पानी की कमी है वहां यूरिया+पोटाश का प्रयोग 2.5 किलोग्राम को 100 लीटर पानी में मिलाकर करें
ਸਰ ਹਲਦੀ ਲਾਉਣ ਦਾ ਸਮਾ ਕਦੋ ਤਕ ਹੈ ?
(en)
Punjab
ਵੱਧ ਝਾੜ ਲੈਣ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਅਪ੍ਰੈਲ ਦੇ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਕਰੋ ਇਸ ਨੂੰ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਨਾਲ ਵੀ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਦੜਵਾੜੇ ਤੱਕ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਾ ਦਿਓ ਪਨੀਰੀ ਲਈ 35-45 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਓ
ਸਰ ਮਿੱਟੀ ਟੈਸਟ ਕਰਵਾਈ ਸੀ ਜਮੀਨ ਵਿੱਚ ਜਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 2.6 ਆਈ ਹੈ ਹੁਣ ਝੋਨੇ ਦੀ ਫਸ਼ਲ ਵਿਚ ਜਿੰਕ ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ ਜਾ ਨਹੀ ?
(en)
Punjab
ਗਗਨਦੀਪ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਰਿਪੋਰਟ ਦੀ ਫੋਟੋ ਭੇਜੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ