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ਜੀਰੀ ਦੇ ਰੇਟਾਂ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ?

(pb)
Posted by
Rajwinder singh (9914890084)
Rajwinder singh
Punjab
Sangrur
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Posted Date (22 Jun 2019 02:52 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 06:21 PM) Translated Date (-)

ਰਾਜਵਿੰਦਰ ਜੀ ਜੀਰੀ ਦੇ ਰੇਟ ਸਰਕਾਰ ਵਲੋਂ ਤਹਿ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਬਾਰ ਹਾਲੇ ਕੋਈ ਨਵੀ update ਨਹੀਂ ਆਈ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

मेरे नरमा के निचे 3 वैग सुपर डाले हुए है। 30 किलो पोटास 10 किलो मैगनिशियम 20 किलो यूरिया डाल रखी है। मेरे सवाल का जवाव जल्दी से देना?

(hn)
Posted by
Rohtash (9812608000)
Rohtash
Haryana
Fatehabad
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Posted Date (22 Jun 2019 02:49 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (24 Jun 2019 06:09 PM) Translated Date (-)

रोहताश जी बताएं कि नरमे में क्या दिक्कत आ रही है ताकि आपको उसके हिसाब से जानकारी दी जा सके धन्यवाद

1121 dhan ki paneeri 25 din ki ho gai hai. paneeri ke pate pile dikh rahe h kya is spray se tik ho jayege kya dose hai is spraye ki?

(hn)
  • 2
Posted by
Tarachand (9992816888)
Tarachand
Haryana
Fatehabad
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Posted Date (22 Jun 2019 02:47 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:04 AM) Translated Date (-)

Tarachand ji yeh ek fungicide hai agar paudhe men fungus ka hamla hai to aap iski spray kar sakte hai iski matar 100-120 gram prtai acre ke hisab se sprya ki jati hai. iske ilava paudh tatv ki kami ke karn bhi peeli hona shuru ho jati hai iske liye aap chelated zinc sulphate@200 gram ko prati acre ke hisab se spray karen.dhanywad

papita ki kheti kaise karen ?

(hn)
Posted by
Dinesh kumar (6397834966)
Dinesh kumar
Uttar Pradesh
Pilibhit
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Posted Date (22 Jun 2019 02:43 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (24 Jun 2019 06:10 PM) Translated Date (-)

पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद

hlo sir ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੀ ਫੀਡ ਕਿਵੇਂ tyar karni chahidi a? please jaldi dasso feed vich ki-ki add karna chahida ?

(pb)
Posted by
Nirbhay singh (9501398182)
Nirbhay singh
Punjab
Faridkot
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Posted Date (22 Jun 2019 02:41 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 02:44 PM) Translated Date (-)

ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ), ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ, ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ), DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ), ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ), ਖਲ਼ 14 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ), ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ), 1 ਕਿਲੋ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਰ ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ.

22 Jun 2019

sir ehe kini k costly hundi a

2300 ਰੁਪਏ 100ਕਿਲੋ ਤੇ ਖਰਚ ਆਉਂਦਾ ਹੈ

Answered Date (22 Jun 2019 08:06 PM) Translated Date (-)

30 rs

Answered Date (22 Jun 2019 08:06 PM) Translated Date (-)

30 rs

Answered Date (23 Jun 2019 09:05 AM) Translated Date (-)

field

hlo sir jhone vich ਖਲ kdo , kive and kini matra vich poni ha please jaldi dasso ji ?

(pb)
Posted by
Nirbhay singh (9501398182)
Nirbhay singh
Punjab
Faridkot
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Posted Date (22 Jun 2019 02:37 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (23 Jun 2019 09:31 AM) Translated Date (-)

ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਬਹੁਤ ਹੀ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ ਇਹ ਅਜਿਹਾ ਆਰਗੈਨਿਕ ਤਰੀਕਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੈ ਝੋਨੇ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਫੋਟ ਕਰਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਇਸਦੇ ਨਤੀਜੇ ਬਹੁਤ ਹੀ ਵਧੀਆ ਹਨ ਇਸ ਵਿਚ ਛੇ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿਚ ਮੁੱਖ ਤੋਰ ਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ,ਪੋਟਾਸ਼ ਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸਲਫਰ ,ਜਿੰਕ ਤੇ ਬਰੋਨ ਵੀ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨI ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਨੂੰ ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਵਰਤਣ ਦੇ ਲਈ ਦੋ ਤਰੀਕੇ ਹਨ ਪਹਿਲਾ ਤਰੀਕਾ ਇਹ ਹੈ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਡਰੰਮ ਦੇ ਵਿਚ ਭਿਓਂ ਲੋ ਤੇ 5 -6 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਇਸਨੂੰ ਹਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਤੇ ਇਸ ਘੋਲ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵਾਰੀ ਵਾਲੇ ਦਿਨ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾ ਦਿਓ ਦੂਸਰਾ ਤਰੀਕਾ ਇਹ ਹੈ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਬਰੀਕ ਕੁੱਟ ਕੇ ਇਸਦਾ ਛਿੱਟਾ ਵਾਹਣ ਵਿਚ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਨੂੰ ਵਰਤਣ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਜਦੋਂ ਝੋਨਾ 15 -20 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਹੋਵੇ ਕਿਓਂਕਿ ਇਸ ਸਮੇ ਜੜ੍ਹਾਂ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੀ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ ਇਕ ਕਿੱਲੇ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਿਰਫ 16 ਕਿੱਲੋ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਰੇਤੇ ਵਾਲੇ ਜਾਂ ਬਰਾਨੀ ਵਾਹਣ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ 20 ਕਿੱਲੋ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹਾ I

papita ki kheti kaise karen ?

(hn)
Posted by
Dinesh kumar (6397834966)
Dinesh kumar
Uttar Pradesh
Pilibhit
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Posted Date (22 Jun 2019 02:35 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (24 Jun 2019 06:09 PM) Translated Date (-)

पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आप इसकी किस्मे जैसे Washington Coorg Honey Pusa Delicious Pusa Dwarf की बिजाई कर सकते है आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद

Kalar wali jagha hai jhona sad janda aa ki wartana chahida aa ?

(pb)
Posted by
Bohar singh (8729041918)
Bohar singh
Punjab
Fazilka
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Posted Date (22 Jun 2019 02:33 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 05:56 PM) Translated Date (-)

kalar vali jameen vich tuc gypsum@1 quintal prati acre de hisab nal pao. dhanwad

Answered Date (11 Jul 2019 05:53 PM) Translated Date (-)

Shilpa ji gypsum PA ke deekh lai par kujh v farak pea hor kujh jawab daso

ਸਰ ਜੀ ਜੀਰੀ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖੱਲ ਪਾਉਣ ਦਾ ਕੀ ਫਾਇਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਕਿੰਨੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਕਿੰਨੇ ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਜੀਰੀ ਉਪਰ ਪਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ

(pb)
Posted by
kulvir cheema (9915202160)
kulvir cheema
Punjab
Ludhiana
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Posted Date (22 Jun 2019 02:28 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 06:00 PM) Translated Date (-)

ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਬਹੁਤ ਹੀ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ ਇਹ ਅਜਿਹਾ ਆਰਗੈਨਿਕ ਤਰੀਕਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪੈਦਾਵਾਰ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੈ ਝੋਨੇ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਫੋਟ ਕਰਾਉਣ ਦੇ ਲਈ ਇਸਦੇ ਨਤੀਜੇ ਬਹੁਤ ਹੀ ਵਧੀਆ ਹਨ ਇਸ ਵਿਚ ਛੇ ਮੁੱਖ ਤੱਤ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿਚ ਮੁੱਖ ਤੋਰ ਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ,ਪੋਟਾਸ਼ ਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸਲਫਰ ,ਜਿੰਕ ਤੇ ਬਰੋਨ ਵੀ ਪਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨI ਸਰੋਂ ਦੀ ਖਲ ਨੂੰ ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਵਰਤਣ ਦੇ ਲਈ ਦੋ ਤਰੀਕੇ ਹਨ ਪਹਿਲਾ ਤਰੀਕਾ ਇਹ ਹੈ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਡਰੰਮ ਦੇ ਵਿਚ ਭਿਓਂ ਲੋ ਤੇ 5 -6 ਦਿਨ ਲਗਾਤਾਰ ਇਸਨੂੰ ਹਲਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਤੇ ਇਸ ਘੋਲ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੀ ਵਾਰੀ ਵਾਲੇ ਦਿਨ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾ ਦਿਓ ਦੂਸਰਾ ਤਰੀਕਾ ਇਹ ਹੈ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਬਰੀਕ ਕੁੱਟ ਕੇ ਇਸਦਾ ਛਿੱਟਾ ਵਾਹਣ ਵਿਚ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਨੂੰ ਵਰਤਣ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਜਦੋਂ ਝੋਨਾ 15 -20 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਹੋਵੇ ਕਿਓਂਕਿ ਇਸ ਸਮੇ ਜੜ੍ਹਾਂ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਵਿਕਾਸ ਹੁੰਦਾ ਹੀ ਇਸਦੀ ਮਾਤਰਾ ਇਕ ਕਿੱਲੇ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸਿਰਫ 16 ਕਿੱਲੋ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਰੇਤੇ ਵਾਲੇ ਜਾਂ ਬਰਾਨੀ ਵਾਹਣ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ 20 ਕਿੱਲੋ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹਾ I

sir asi kheta Ch roodi di khad payi aw 1month pehla, Hun dhan Ch kini urea te DAP payie ?

(pb)
Posted by
brar (9855781492)
brar
Punjab
Muktsar
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Posted Date (22 Jun 2019 02:20 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 02:27 PM) Translated Date (-)

ਝੋਨੇ ਵਿਚ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 18 ਦਿਨ ਬਾਦ ਖਾਦਾਂ ਪਾਉਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਿਸ ਵਿਚ 36 ਕਿੱਲੋ ਯੂਰੀਆ , 27 ਕਿੱਲੋ ਡਾਪ ਅਤੇ 20 ਕਿਲੋ ਪੋਟਾਸ਼ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ DAP ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਹੁਣ DAP ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਏਕੜ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਤੁਸੀ 21% ਜਾ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾ ਸਕਦਾ ਇਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿੱਲੋ ਅਤੇ 33% ਵਾਲੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 15-17 ਕਿੱਲੋ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਇਹ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਖੇਤ ਵਿਚ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੁਬਾਰਾ ਖੇਤ ਵਿਚ 2-3 ਸਾਲ ਤਕ ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ

22 Jun 2019

thank u sir

63 12 Fungicide ਦਾ ਕੋਈ ਫਾਇਦਾ ਹੈ, ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟਾ ਦੇਣ ਦਾ ?

(pb)
Posted by
Gurdeep Mann (9876652694)
Gurdeep Mann
Punjab
Mansa
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Posted Date (22 Jun 2019 02:14 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (23 Jun 2019 09:32 AM) Translated Date (-)

Han ji gurdeep g agar dhaan mein dhabbe pdh rhe hai ja fir fungus aa rhi hai toh iss ka upyog aap kr skte ho.

20 ਲੀਟਰ ਦੁੱਧ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਕਿੰਨੀ ਖੁਰਾਕ ਦੇਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ?

(pb)
Posted by
Sukhraj Singh (9814252144)
Sukhraj Singh
Punjab
Amritsar
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Posted Date (22 Jun 2019 02:13 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 02:36 PM) Translated Date (-)

ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਰੋਜਾਨਾ 35-40 ਕਿਲੋ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚ 5-7 ਕਿਲੋ ਤੂੜੀ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦਿਓ, ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ ਫੀਡ 3 ਕਿਲੋ ਦੁੱਧ ਮਗਰ 1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ ਦੁੱਧ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਉਸ ਨੂੰ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ..

Motiyon Ka business kaise krein ?

(en)
Posted by
budhram (9736231359)
budhram
Himachal Pradesh
Solan
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Posted Date (22 Jun 2019 01:50 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 02:53 PM) Translated Date (-)

Budhram जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

Uttar Pradesh

22 Jun 2019

में moti की करने का विचार बना रहा हु। पर मेरे पास उस से जुड़ी इन्फॉर्मेशन की कमी है।

Answered Date (22 Jun 2019 04:15 PM) Translated Date (-)

maharashtra madhe terning nahi ka?

ਗਾਂ ਨੂੰ ਕਿਹੜੀ ਫੀਡ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ?

(pb)
Posted by
Rachan sandhu (7527882831)
Rachan sandhu
Punjab
Tarn Taran
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Posted Date (22 Jun 2019 01:43 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 02:37 PM) Translated Date (-)

ਸੰਧੂ ਜੀ, ਵੈਸੇ ਤਾਂ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦੀਆ ਫ਼ੀਡਜ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕੰਪਨੀ ਵਾਲੇ ਆਪਣੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦਿੰਦੇ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਵਿਚ ਸਾਰੇ ਜਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਇਹ ਫੀਡ ਥੋੜੀ ਮਹਿੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਫਾਇਦਾ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਹਿੰਗੀ ਫੀਡ ਨਹੀਂ ਵਰਤਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਬਜ਼ਾਰ ਚੋ ਕਿਸੀ ਵੀ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਉਸ ਨਾਲ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਤੋਂ ਦੁੱਧ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ , ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ..

sir ਸਕਰਕੰਦੀ ਦੀਆ ਵੇਲਾ ਕਿਥੋ ਮਿਲਣਗੀਆ ?

(pb)
Posted by
Kulwinder Singh (9592104545)
Kulwinder Singh
Punjab
Sangrur
Write Answer
Posted Date (22 Jun 2019 01:32 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Aug 2019 10:12 AM) Translated Date (-)

ਇਹ ਬਹੁਤ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਰੇਤਲੀ ਤੋਂ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਪਰ ਇਹ ਵਧੇਰੇ ਉਪਜਾਊ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਹਲਕੀ ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਭਾਰੀ ਚੀਕਣੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਨਾ ਕਰੋ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਸ ਵਿੱਚ ਗੰਢੀਆਂ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਸਹੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 5.8-6.7 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ :- Punjab Sweet Potato-21 ਸ਼ਕਰਕੰਦੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ, ਖੇਤ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਕਰੋ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਭੁਰਭੁਰਾ ਬਣਾਉਣ ਲਈ, ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ 3-4 ਵਾਰ ਵਾਹੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਸੁਹਾਗਾ ਫੇਰੋ ਖੇਤ ਨਦੀਨ-ਮੁਕਤ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਉਚਿੱਤ ਝਾੜ ਲਈ, ਗੰਢੀਆਂ ਨੂੰ ਨਰਸਰੀ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਜਨਵਰੀ ਤੋਂ ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਬੀਜੋ ਅਤੇ ਵੇਲਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਉਚਿੱਤ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਜੁਲਾਈ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 60 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 30 ਸੈ.ਮੀ. ਰੱਖੋ ਗੰਢੀਆਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ 20-25 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਕਰੋ ਇਸਦਾ ਪ੍ਰਜਣਨ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਫਲਾਂ ਜਾਂ ਵੇਲਾਂ ਨੂੰ ਕੱਟ ਕੇ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਵੇਲਾਂ ਕੱਟਣ ਵਾਲੇ ਤਰੀਕੇ ਵਿੱਚ(ਜੋ ਆਮ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ), ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਵੇਲਾਂ ਤੋਂ ਫਲ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਨਰਸਰੀ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਬੀਜ ਦਿੱਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਵੇਲਾਂ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਵੱਟਾਂ ਜਾਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਪੱਧਰੇ ਬੈੱਡਾਂ ਤੇ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਹ ਦੇਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਕਿ ਵੇਲ ਦੇ ਉੱਪਰਲੇ ਭਾਗ ਨੂੰ ਕੱਟ ਕੇ ਵਰਤਣ ਨਾਲ ਵਧੀਆ ਪੈਦਾਵਾਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਨਵੇਂ ਪੌਦੇ ਦੀਆਂ ਘੱਟ ਤੋਂ ਘੱਟ 4 ਟਾਹਣੀਆਂ ਹੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 60 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 30 ਸੈ.ਮੀ. ਰੱਖੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਵਰਤੀਆਂ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਵੇਲਾਂ ਨੂੰ ਡੀ ਡੀ ਟੀ 50% ਦੇ ਘੋਲ ਨਾਲ 8-10 ਮਿੰਟਾਂ ਲਈ ਸੋਧੋ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 25,000 - 30,000 ਕੱਟੀਆਂ ਵੇਲਾਂ ਜਾਂ 280-320 ਕਿਲੋ ਗੰਢੀਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਗੰਢੀਆਂ ਨੂੰ ਪਲਾਸਟਿਕ ਬੈਗ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਵਧੇਰੇ ਮਾਤਰਾ ਵਾਲੇ ਸਲਫਿਊਰਿਕ ਐਸਿਡ ਵਿੱਚ 10-40 ਮਿੰਟ ਲਈ ਡੋਬੋ ਸਿੰਚਿਤ ਸਥਿਤੀਆਂ ਵਿੱਚ ਸ਼ਕਰਕੰਦੀ + ਝੋਨੇ ਦਾ ਫਸਲੀ ਚੱਕਰ ਅਪਨਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਸ਼ਕਰਕੰਦੀ ਦੀ ਫਸਲ ਦਸੰਬਰ-ਜਨਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਝੋਨੇ ਦੀ ਦੂਜੀ ਕਟਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਬੀਜੋ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 100 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਅਮੋਨੀਅਮ ਨਾਈਟ੍ਰੇਟ 125 ਕਿਲੋ, ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 155 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਮਿਊਰੇਟ ਆੱਫ ਪੋਟਾਸ਼ 35 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਪੋਟਾਸ਼ੀਅਮ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਪਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 2 ਭਾਗਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਓ, ਪਹਿਲੀ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਅਤੇ ਦੂਜੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 5 ਹਫਤੇ ਬਾਅਦ ਨਦੀਨਾਂ ਦੇ ਪੁੰਗਰਾਅ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮੈਟਰੀਬਿਊਜ਼ਾਈਨ 70 ਡਬਲਿਊ ਪੀ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਐਲਾਕਲੋਰ 2 ਲੀਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਕੇਵਲ 5-10% ਪੁੰਗਰਾਅ ਅਤੇ ਵੱਟਾਂ ਤੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੋਣ ਤੇ ਪੈਰਾਕੁਐਟ 500-750 ਮਿ.ਲੀ. ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਓ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਪਹਿਲੇ 10 ਦਿਨ 2 ਦਿਨਾਂ ਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਅਤੇ ਫਿਰ 7-10 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਪੁਟਾਈ ਤੋਂ 3 ਹਫਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰਨਾ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿਓ ਪਰ ਪੁਟਾਈ ਤੋਂ 2 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਇੱਕ ਸਿੰਚਾਈ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਫਸਲ 120 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪੁਟਾਈ ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਫਲ ਪੱਕਣ ਅਤੇ ਪੱਤੇ ਪੀਲੇ ਹੋਣ ਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪੁਟਾਈ ਫਲ ਨੂੰ ਪੁੱਟ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪੁੱਟੇ ਗਏ ਤਾਜ਼ਾ ਫਲ ਮੰਡੀਕਰਨ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ

ਬਕਰੀ ਫਾਰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ?

(pb)
Posted by
Jashanbeer singh (9646555666)
Jashanbeer singh
Punjab
Ferozpur
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Posted Date (22 Jun 2019 01:30 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 02:39 PM) Translated Date (-)

ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਬੱਕਰੀਆ ਫਾਰਮ ਬਣਾਉਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ਸੋਚ ਹੈ ਜੀ ਤੁਸੀ ਬੀਟਲ ਨਸਲ ਰੱਖੋ ਇਹ ਦੁੱਧ ਤੇ ਮੀਟ ਦੋਨਾਂ ਲਈ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੈ ਬਾਕੀ ਜਿਵੇ ਤੁਸੀ ਇਸ ਕਿੱਤੇ ਵਿੱਚ ਆਜੋਗੇ ਉਸ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤੁਹਾਡੇ ਲਿਂਕ ਬਣਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਣਗੇ ਬਾਕੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਇਸ ਗੱਲ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੈ ਕਿ ਤੁਹਾਡੇ ਲੋਕਾ ਨਾਲ ਲਿੰਕ ਕਿਵੇ ਦੇ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਦੁੱਧ ਗਾਂ ਦੇ ਰੇਟ ਦੇ ਬਰਾਬਰ ਵਿਕ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਫਾਰਮ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਬੱਚੇ ਵਗੈਰਾ ਵੀ ਸੇਲ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਕੁੱਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਜੇਕਰ ਮੋਟਾ ਜਿਹਾ ਹਿਸਾਬ ਲਗਾਉਣਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਇੱਕ ਬੱਕਰੀ ਤੋਂ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਲੱਗਭੱਗ 20000 ਤੱਕ ਕਮਾਈ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਇਹ ਵੀ ਸਲਾਹ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇੱਕ ਵਾਰ ਆਪਣੇ ਨੇੜੇ ਤੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਜਰੂਰ ਲਵੋ ਤੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾਂ ਦੇ ਫਾਰਮ ਜਰੂਰ ਦੇਖੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਜੋ ਕਿ ਮਹੀਂਨੇ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਸ਼ੁੱਕਰਵਾਰ ਨੂੰ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਕਿਸਾਨ ਹੋਸਟਲ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਇਸ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਜਾਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਜਗਰਾਜ਼ ਸਿੰਘ ਨਾਲ 9023441504 ਤੇ ਗੱਲ ਕਰ ਲਵੋ ਜੀਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਦੇ ਕੰਮ ਤੇ ਲੋਨ ਤੇ 25 % ਸਬਸਿਡੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਆਪਣੇ ਨੇੜੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੇ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਤੇ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਲੋਨ ਮਿਲੇਗਾ ਕੇ ਨਹੀ ਇਹ ਬੈਕ ਮੈਨੇਜ਼ਰ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕੀ ਪਹਿਲੀ ਗੱਲ ਇਹ ਬੈਕ ਦੇਖਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਹਾਡਾ ਅਕਾਉਟ ਵਿੱਚ ਕਿੰਨੇ ਕੁ ਪੈਸਿਆ ਦਾ ਲੈਣ ਦੇਣ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਆਪਣੀ ਜ਼ਮੀਨ ਗਰੰਟੀ ਵਜੋ ਦੇਣ ਲਈ ਹੈ ਕਿ ਨਹੀ ਤੇ ਹੋਰ ਵੀ ਕਈ ਗੱਲਾਂ ਚੈਕ ਕਰਕੇ ਲੋਨ ਲਈ ਸਹਿਮਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰੋ ਕਿ ਲੋਨ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਆਪਣੇ ਲੈਵਲ ਤੇ ਹੀ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਕਿਉਕੀ ਲੋਨ ਦੀ ਕਿਸ਼ਤ ਹਰ ਮਹੀਨੇ ਭਰਨੀ ਪਵੇਗੀ ਪਰ ਬੱਕਰੀਆ ਵਿੱਚੋ ਕਮਾਈ ਹਰ ਮਹੀਨੇ ਨਹੀ ਹੋਣੀ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਕੇ ਦੇਖਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਆਪਣੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਵਿਭਾਗ ਅਫਸਰ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਤੇ ਉਸ ਤੋਂ ਅਪਰੂਵ ਕਰਵਾ ਕੇ ਫਿਰ ਬੈਕ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰਕੇ ਦੇਖੋ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਆਪਣੇ ਏਰੀਆ ਤੇ ਨਾਬਾਰਡ ਡਿਪਾਰਟਮੈਟ ਦੇ ਸੀਜੀਐਮ ਨੂੂੰ ਵੀ ਲੋਨ ਲਈ ਮਿਲੋ.

(1) ਗਾ 8 ਜੁਲਾਈ ਨੂੰ 10 ਮਹੀਨੇ ਪੂਰੇ ਹੋ ਜਾਣਗੇ (2) ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਸੂਣਾ ਹੈ (3) ਖੁਰਾਕ ਕੀ ਦੇਣੀ ਹੈ

(pb)
Posted by
ਸੁਖਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ (8146054633)
ਸੁਖਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
Patiala
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Posted Date (22 Jun 2019 01:29 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 02:41 PM) Translated Date (-)

ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ vitum-h liquid 10ml-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਬਾਕੀ ਉਸ ਨੂੰ Metabolite ਪਾਊਡਰ ਦੀ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਪੂੜੀ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਲੇਵਾ, ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਗਰੋਥ ਵਧਿਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ..

Answered Date (05 Jul 2019 01:40 PM) Translated Date (-)

ਕਿੰਨਾ ਸਮਾਂ ਹੋਰ ਲੱਗਣਾ

Answered Date (05 Jul 2019 01:41 PM) Translated Date (-)

8 ਜੁਲਾਈ ਨੂੰ10 ਮਹੀਨੇ ਪੂਰੇ ਹੋਣੇ ਹਨ

Tetanus in small calves ?

(en)
Posted by
Satpaul singh (9418044465)
Satpaul singh
Himachal Pradesh
Kangra
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Posted Date (22 Jun 2019 01:26 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 07:18 PM) Translated Date (-)

यह छोटे बच्चों को लगाया जाता है यह नवजात बछड़े को बीमारियों से बचाने के लिए लगाया जाता है ..

Answered Date (22 Jun 2019 01:37 PM) Translated Date (-)

बछड़ों के लिए खीस खीस पशु के ब्योने के बाद थन से प्राप्त होने वाला पहला पदार्थ है, जिसमें रोग प्रतिरोधक गुण होते हैं यह नवजात बछड़े को बीमारियों से बचाने के लिए आवश्यक है महत्वपूर्ण बात यह है कि खीस को शरीर बहार का दसवां भाग जल्दी से जल्दी बछड़े को पिला देना चाहिए क्योंकि 24 घंटे के बाद यह शरीर में अवशोषित नहीं हो पाता है शोध से यह पता चला है कि व्योने के छः घंटे के अंदर खीस पिलाने से बछड़ा खीस में मौजूद इम्यूनोग्लोबुलिन ही अवशोषित हो पाते हैं खीस विटामिन इ, ए, प्रोटीन, शर्करा तथा वसा का भी महत्वपूर्ण स्रोत है खीस में खनिज तत्व-कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटेशियम तथा जिंक पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं तथा आयरन, कॉपर कम मात्रा में पाए जाते हैं ऐसा देखा गया है कि जिन बछड़ों को पैदा होने के बाद कम मात्रा में खीस मिली, उनमें मृत्यु दर पर्याप्त मात्रा में खीस पीने वाले बछड़ों की अपेक्षा अधिक थी जिन बछड़ों में ब्योने का समय अधिक लंबा हो जाए या बाद में बछड़े के खड़े, होने में देर हो तो इस अवस्था में खीस को नली द्वारा देना चाहिए खीस को एकत्रित करके, ठंडी अवस्था में रखकर बादमें भी प्रयोग किया जा सकता है खीस को बिना गुणवत्ता में कमी आय, एक साल तक फ्रिज करने रखा जा सकता है एक सप्ताह तक के लिए रेफ्रिजरेटर में भी रखा जा सकता है फ्रोजन खीस को दोबारा प्रयोग  के लिए इसे 49-43 सेल्सियस तक के गर्म पानी रखना चाहिए अधिक तापमान पर खीस को गर्म नहीं करना चाहिए, नहीं तो खीस में मौजूद इम्यूनोग्लोबुलिन की मात्रा में कमी आ सकती है पशु की आयु का खीस की मात्रा पर प्रभाव पड़ता है पशु के खान-पान का भी ध्यान रखना चाहिए, जिसमें कि खीस की मात्रा व गुणवत्ता बेहतर मिले अच्छी गुणवत्ता की खीस दिखने में गाढ़ी व क्रीमी होती है था उसका आपेक्षिक घनत्व 1.05 से अधिक होता है शुष्क कल की अवधि भी खीस में मौजूद इम्यूनोग्लोबुलिन की मात्रा को प्रभावित करती है शुष्क काल 40-60 दिन का होना चाहिए यदि बछड़ा गर्मी में मौसम में पैदा हुआ होता है उसे गर्मी से बचाने के भी उपाय करने चाहिए अधिक गर्मी स बछड़े से इम्यूनोग्लोबुलिन की मात्रा में कमी नहीं आती उसे सुखा रखना चाहिए तथा सर्दी से बचाने के लिए उपाय करने चाहिए बछड़े को 2 क्वार्ट खीस ब्योने के बाद जल्द से जल्द तथा दुबारा 2 क्वार्ट खीस 12 घंटे बाद देना चाहिए यदि  खीस गुणवत्ता के बारे में ठीक से नहीं पता तो पहली बार 3 क्वार्ट तथा बाद में 2 क्वार्ट खीस दें यदि बछड़े का वजन अधिक हो पहले छः घंटे में खीस न दे पाएं हो तो भी पहली बार 3 क्वार्ट खीस देनी चाहिए यदि सही मात्रा में तथा सही समय पर बछड़ों को खीस दी जाए तो बछड़ों में बीमारियों की संभावना तथा मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है लेखन: अंजली अग्रवाल बछड़ों के प्रमुख रोग नाभि सड़ना (नवैल इल) यह बीमारी हाल ही में पैदा हुए बच्चों में होती है इसमें नाभि में मवाद पड़ जाता है रोग के आंरभ में बछड़ा सुस्त हो जाता है, लेटा रहता है, दूध नहीं पीता, तेज बुखार आता है और वह साँस जल्दी-जल्दी लेता है नाभि गीली व चिपचिपी दिखलाई पड़ती है एक दो दिन सुजन बढ़ने पर नाभि गर्म व् सख्त हो जाती है और उसमें बहुत दर्द होता है कभी-कभी घुटनों व् जोड़ों में सुजन आ जाने के कारण बछड़ा लंगड़ाने भी लगता है बचाव व रोकथाम बछड़ा पैदा होने का स्थान साफ-सुथरा रखिये नाल गिरने के बाद नाभि को किसी कीटाणुनाशक दवा के साफ करके प्रतिदिन टिंचर आयोडीन या बीटाडीन आदि उस समय तक लगाते रहना चाहिए जब तक नाभि बिलकुल सुख न जाए उपचार - रोग के लक्षण मालुम पड़ते ही पास के पशु चिकित्सक की तुरंत सलाह लें और आवश्यक इलाज कराएँ सफेद दस्त (व्हाइट स्कोर) यह बछड़े का एक घातक रोग हैं जिसमें 24 घंटें में मृत्यु हो जाती है यह रोग एक माह तक के बच्चों को होता है रोग के आरंभ में बुखार आता है भूख कम लगती है और बदहजमी हो जाती है कुछ मस्य बाद पतले दस्त आने लगते हैं जो गंदे सफेद या पीलापन लिए होते हिं इनमें कभी-कभी खून भी आता है तथा विशेष प्रकार की बदबू होती है कभी-कभी पेट फूल जाता है बचाव व रोकथाम बच्चों को पर्याप्त मात्रा में खीस पिलावें तथा गंदगी से बचावें खींस पिलाने से पहले अयन व् थनों की अच्छी तरह साफ करें खींस की मात्राक्म ज्यादा न हो उसके वजन का 10वाँ हिस्सा एक दिन की खुराक होती है उपचार रोग मालूम होने पर तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह लें दो-तीन दिन तक खींस या दूध की मात्रा आधी कर देनी चाहिए उपचार हेतु नैफ्तिन वोलस का इस्तेमाल अच्छा रहता है निमोनिया यह बीमारी 3 सप्ताह से लेकर चार माह के बच्चों को ज्यादा होती है गंदे-सीलन-युक्त स्थान में यह रोग अधिक फैलता है रोग के आरंभ में बछड़ा सुस्त हो जाता है, खाने में रूचि नहीं रहती साँस तेजी से लेता है, खांसी आती है तथा आँख व नाक से पाने बहता है और बुखार तेज हो जाता है रोग बढ़ने पर नाक से बहने वाला पानी गाढ़ा व चिपचिपा हो जाता है साँस लेने में कठिनाई होती है, खांसी तेज हो जाती है अंत में मृत्यु हो जाती है बचाव व रोकथाम बछड़ों को साफ व हवादार कमरे में जिसमें सीलन न हो और तेज हवा के झोंके न आते हो, रखना चाहिए स्वस्थ बछड़ों को रोगी बछड़ों से अलग रखें उपचार पास के पशु चिकित्सक से सलाह लेकर तुरंत इलाज कराएं मुंह रोग (काफ डिप्थीरिया) यह छोटे बछड़ों का रोग है जिसमें मुंह व तालू में घाव हो जाते हैं   सुस्ती, खाने में अरुचि, मुंह से लार बहना तथा बुखार इस रोग के प्रमुख लक्षण है मुंह खोलने पर जीभ, मसूड़ों, तालू व गले में फफोले दिखलाई पड़ते हैं जो बाद में घाव बन जाते हैं इनकी वजह से बछड़ा खाना चबा नहीं सकता है बचाव व रोकथाम खाने और पानी के बर्तन साफ होना चाहिए रोगी बछड़ों को स्वस्थ बछड़ों से अलग रखें उपचार लक्षण मालुम होते ही तुरंत पास के पशु-चिकित्सक से राय लेकर इलाज कराएं बचाव व रोकथाम बछड़ों को गंदा पानी नहीं पीने देना चाहिए चूँकि रोगी बछड़े के गोबर में अंडे होते हैं अतः स्वस्थ बछड़ों को रोगी बछड़ों के गोबर आदि से दूर रखना चाहिए बछड़ों के गोबर की समय-समय पर जाँच करानी चाहिए नियमित कृमिनाशक दवाइयों का उपयोब करना एक उपयुक्त बचाव है उपचार रोग का संदेह होने पर तुरंत ही पास के पशु चिकित्सक से सलाह लें गाय व भैंस के नवजात बच्चों की मृत्यु दर कम करने हेतु आवश्यक प्रबन्धन किसी भी डेयरी का भविष्य नवजात की देखरेख तथा उसके सुनियोजित प्रबन्धन पर निर्भर करता है, जो कि अच्छी किस्म के पशु खरीदने की बजाए तैयार किए जा सकते हैं नवजात बछड़े के अच्छे स्वस्थ्य तथा बेहतर वृद्धि के लिए एक अच्छे प्रबन्धन की आवश्यकता होती है इस तरह से अच्छी किस्म के उन्नत पशु डेयरी में पुराने तथा कम उत्पादकता वाले पशु की जगह ले सकते हैं साथ ही विक्रय करने पर अच्छा मुनाफा ले सकते हैं अतः बछड़ों  को अच्छे प्रकार के प्रबन्धन कर उनकी मृत्यु दर को कम  कर स्वस्थ बछड़े तैयार किए जा सकते हैं बछड़ा पालन एवं प्रबन्धन में नाल का संक्रमण से बचाव, श्वास अवरोध की जाँच, खींस पिलाना, आवास का पर्याप्त एवं स्वच्छ होना, नियमित एवं सही मात्रा में आहार, कृमिनाशक दवा देना, टीकाकरण एवं बीमारी का सही समय पर पशु चिकित्सक द्वारा इलाज कराना जैसे महत्वपूर्ण पहलु सम्मिलित हैं प्रायः यह देखा जाता है कि नाल से नवजात बछड़े के खून एवं ऊतकों में संक्रमण हो जाता है, जिससे नाल में सुजन उसमें मवाद पड़ जाना, बुखार, बछड़े का शिथिल हो जाना, दूध पीने में अरुचि, जोड़ों में सुजन एवं दर्द जैसे लक्षण प्रकट होने लगते हैं अतः नाल के संक्रमन से बचने के लिए प्रसव साफ जगह पर होना चाहिए तथा नाल को असंक्रमित धागे से शरीर से लगभग 5 सेंटीमीटर पर बांधकर नई ब्लैड से काट लेना चाहिए नाल पर टिंचर आयोडीन या अन्य एंटीसेप्टिक  दवाई तब यक लगाना चाहिए, जबतक कि घाव सुख न जाएं यदि संभव हो सके तो बछड़े को पशुचिकित्सक से टिटनेस का टीका लगवाएं जन्म के बाद यदि बछड़े के ऊपर की झिल्ली प्रसव के समय नहीं फटी है तो उसे तुंरत हटा देना चाहिए बछड़े के जन्म लेते ही उसके मुंह, नाक, आँख तथा कान साफ कर सारे शरीर को किसी साफ एवं सूखे कपड़े से साफ करना चाहिए तत्पश्चात उसे उसकी माँ के सामने रखना चाहिए बछड़े को यदि श्वास लेने में तकलीफ हो, तो उसे उसके वक्ष को क्रम से दबाना व छोड़ना चाहिए ताकि उसे श्वास मिल सके या फिर बछड़े को उसकी टांगों से पकड़कर उल्टा लटकाकर हिलाना चाहिए जिससे श्वास मार्ग में एकत्रित तरल पदार्थ निकल सकें प्रसव के पश्चात योनि स्राव व जेर ग्रसित बिछावन को पशुशाला से अतिशीघ्र हटा कर जला देना चाहिए उसके स्थान पर अन्य मुलायम बिछावन तैयार करना चाहिए, जिसे समय-समय पर बदलते रहना चाहिए बछड़े के जन्म के प्रथम एक-दो घंटे की समयावधि में खीस पिलाना अत्यंत आवश्यक है खीस में रोग-प्रतिरोधक क्षमता होती है, जो बछड़े को बीमारियों से तबतक बचाता है, जब तक कि उसका स्वयं का प्रतिरक्षी तंत्र विकसित नहीं होता है प्रायः बछड़ों में मृत्यु का  के मुख्य  कारण अतिसार/सफेद दस्त होता है, जो कि खीस न पीने वाले बछड़ों में अधिक होता है अतः बचाव के रूप में खीस पिलाना अत्यंत आवश्यक है रोग प्रतिरोधकता क्षमता  बढ़ाने के साथ ही खीस अत्यंत पोषक तथा स्वस्दिष्ट होता  है खीस की लेक्सेटिव प्रकृति के कारण यह कब्ज से बचाता है तथा आहार नाल को प्रथम गोबर “मिकोनियम” से मुक्त कर साफ रखता है खीस उपलब्ध न होने की स्थिति में अन्य पशु के दो किलो दूध को गर्म कर उसमें दो अंडे व 30 मि.ली., अरंडी का तेल मिलाकर पिलाना चाहिए बछड़े को जन्म से तीन माह की उम्र तक उसके वजनका 10% दूध पिलाना चाहिए बछड़ों में मृत्यु का एक प्रमुख कारण उनका निमोनिया से ग्रसित होना पाया गया है, जो कि पशुशाला के हवादार न होने, फर्श कच्चा होने तथा नियमित सफाई न होने के कारण होता है इन परिस्थितियां में गोबर व मूत्र वहीं पर एकत्रित होने लगता है, और अमोनिया गैस बनने लगती है जो कि पशु के श्वसन तंत्र पर हानिकारक प्रभाव डालती है पशु उनके बछड़े निमोनिया के शिकार हो जाते हैं साथ ही, गोबर-मूत्र द्वारा संक्रमित पशु से विभिन्न कीटाणु, जीवाणु व परजीवी द्वारा बीमारी का स्थानान्तरण अतिशीघ्र  होता है अतः यह आवश्यक है कि पशुशाला का फर्श पक्का हो तथा उसकी नियमित सफाई होती रहे यदि फर्श कच्चा है तो उस पर समय-समय पर रेत डालते रहना चाहिए पशुशाला हवादार होनी चाहिए ताकि हानिकारक गैस निकल सकें तथा स्वच्छ हवा का आगमन हो सकें पशुशाला के बाहर पानी के निकास हेतु समुचित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि पानी जमा न हो तथा मक्खी व मच्छर अंडे न दे सकें बछड़े को कृमिनाशक दवा जन्म के तुरंत पश्चात देनी चाहिए तत्पश्चात तीन माह तक हर 15 दिन के अंतराल पर तथा माह से ऊपर होने पर प्रत्येक तीन माह में कृमिनाशक दवा देनी चाहिए कृमिनाशक दवा देने के पश्चात अरंडी का तेल पिलाना चाहिए बछड़ों को बाह्य परजीवियों जैसे पिप्सू, किलनी, जूं इत्यादि से बचाव करना चाहिए उनका आवास स्थान साफ व स्वच्छ तथा बाह्य परजीवियों से मुक्त  होना चाहिए बाह्य परजीवियों के उपस्थित होने पर आवास स्थानों की दरारों पर तथा कोनों पर आग लगा देनी चाहिए, तदोपरान्त चूने का लेप कर देना चाहिए पशुशाला में हर पखवाड़े में नीम की पत्तियों को जलाकर धुआं करना चाहिए ताकि बाह्य परजीवियों द्वारा छिपे स्थानों पर दिए गए अण्डों को नष्ट किया जा सकें बछड़ों के शरीर पर ब्यूटाक्स, अमिराज इत्यादि दवाओं का स्प्रे करना चाहिए बछड़ों का दिन में एक बार ब्रश से खुरैरा करना चाहिए इससे बाह्य परजीवियों से बचाव होगा, साथ ही शरीर में रक्त का प्रवाह भी बढ़ेगा और उनकी वृद्धि दर में भी सुधार होगा नवजात पशु को बीमारियों से बचाने के लिए उनका निर्धारित समय पर टीकाकरण अवश्य करना चाहिए छः माह की उम्र पूर्ण होने पर खुरपका-मुंहपका, गलघोंटू, लंगड़ी, बुखार इत्यादि बीमारियों रोकथाम हेतु टीकाकरण करवाना चाहिए बछड़ों के रोग ग्रसित होने पर उका उचार पशुचिकित्सक से शीघ्र कराना चाहिए इसके लिए पशुपालकों को रोग के लक्षण की सामान्य जानकारी होना आवश्यक है, यथा दूध पीने में अरूचि, दस्त, बुखार, असामान्य स्राव, परिवर्तित व्यवहार इत्यादि बछड़े के बीमार होने पर उसे अन्य स्वस्थ बछड़ों से अलग रखना चाहिए प्राथमिक उपचार यथासंभव करना चाहिए अतिसार से पीड़ित बछड़े को 2-3 लीटर पानी में 25 ग्राम नमक व 150-200 ग्राम गुड़ घोलकर 3-4 घंटे के अन्तराल पर बार-बार पिलाना लाभदायक होता है साथ ही, चावल का मांड व दही का सेवन भी कराना चाहिए निमोनिया होने पर सरसों के तेल में 5% तारपीन का तेल तथा 1% कपूर मिलाकर साने की मालिश राहत प्रदान करता है साथ ही, एक बाल्टी उबलते पानी में तारपीन के तेल या यूकेलिप्टस के तेल की बूंदें या यूकेलिप्टस पेड़ की पत्तियों को उबालकर उसकी भांप देने से भी राहत मिलती है प्राथमिक उपचार के साथ-साथ पशुचिकित्सक से अतिशीघ्र आवश्यक उपचार भी कराना चाहिए   अतः उपरोक्त वर्णित पहलुओं का ध्यान रखें, पशुपालक नवजात बछड़े की मृत्यु दर को कम कर, स्वस्थ पशुधन प्राप्त कर सकते हैं तथा देश के विकार में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं लेखन: आलोक कुमार यादव एवं ए.के. चक्रवर्ती पशुपालन के चार आधारभूत स्तम्भ ग्रामीण समृद्धि के लिए पशु पालन एक अच्छा साधन है, परन्तु इसके लिए न केवल अच्छी नस्ल के पशु होने आवश्यक है, बल्कि पशुपालन व्यवसाय को सस्ता बनाने तथा आर्थिक हानि से बचाने के लिए संतुलित पशु आहार की जानकारी होनी आवश्यक है क्योंकि जहाँ अच्छी नस्ल का पशुधन ग्रामीण संपन्नता का प्रतीक है, वहीँ संतुलित व सस्ता आहार दुग्ध उत्पादन को सस्ता बनता है अच्छे आहार के आभाव से अच्छी नस्ल का पशु भी अधिक दूध उत्पादन करने में सफल नहीं हो सकता है इसलिए पशुपालक के पशुपालन एवं डेरी उद्योग के संबंध में सभी पहलुओं की जानकारी होना आवश्यक है जैसे- पशु प्रजनन-समय पर उत्तम सांड से प्रजनन व् गर्भाधान प्शुपोषण-संतुलित पोष्टिक राशन आवास प्रबन्धन-उत्तम आवास, स्वच्छ हवादार सुखा बाड़ा स्वास्थ्य रक्षा-बीमारियों का निराकरण, समय पर टीकाकरण परजीवी निष्क्रमण पशु प्रजनन पशुधन को हम दो तरीकों से सुधार सकते हैं एक तरीका कि पशुओं से अधिक उत्पादन क्षमता वाली सन्तान पैदा कराएं और दूसरा अच्छी नस्ल की गाय, भैंस का चुनाव करके अच्छे सांड से मिलवाएं दोनों ही तरीकों में यह बात जरुरी है कि अच्छी गाय, भैस तथा अच्छे सांडों का चुनाव हो नस्ल सुधार मने प्रजनन की निति इस प्रकार अपनाएं कि गाय, भैसों की अधिक दूध देने वाली नस्लों की सांडों से कम दूध देने वाली मादाओं से मिलान हो, जिससे अधिक दुध देने वाली सन्तान पैदा हों कम उत्पादन वाली देशी गायों को होलस्टिन फ्रीजियन व् जर्सी सांडों  से प्रजनन करवा कर अधिक दूध देने वाले पशु पैदा किये जा सकते हैं पशुओं को समय पर उन्नत नस्ल के सांड से यह कृत्रिम गर्भाधान द्वारा प्रजनन करा कर ग्रामीण स्तर ही गाय, भैसों की नस्ल सुधार का दूध उत्पादन में बढ़ोत्तरी लाई जा सकती है गर्भाधान करने से पूर्व कई प्रकार की जानकारी  होनी आवश्यक है इसके लिए हमें यह जानना जरुरी है कि मादा पशु कब, कैसे और कितने समय तक गर्मी  (मदकाल) में आती है एवं कब इसे गाभिन करावें, जिससे आगे का व्याप्त सुनिश्चित हो पशु जाति परिपक्वता उम्र प्रजनन काल मदकाल की अवधि गाय 24-30 माह पूरा वर्ष 12-18 घंटे भैंस 36-42 माह सितम्बर-मार्च 12-36 घंटे बकरी 10-12 माह शरद ऋतु 36-48 घंटे भेड़ 8-12 माह अगस्त से जनवरी 24-48 घंटे मदकाल के लक्षण दिखने के 8-10 घंटे बाद गर्भाधान करवाएं दुधारू पशुओं का चुनाव दुधारू पशु की खाल पतली व चिकनी हो, पशु सिर की ओर पतला व पीछे की ओर चौड़ा दिखाई देना चाहिए ताकि शरीर तिकोने जैसे लगे चारों थन अच्छे व बड़े आकार के हों तथा अयं बड़ा हो दुसरे व तीसरी व्यांत के तुरंत ब्याए हुए पशु हो खरीदें खरीदने से पहले लगातार तीन समय का दूध अपने सामने निकलवाकर उसके वास्तविक दूध उत्पादन को सुनिश्चित कर लें, क्योंकि भैस के ब्योने का विशेष महत्व होता है इसलिए उसे जुलाई से फरवरी के मध्य ही खरीदे जहाँ तक संभव हो, दूसरा दुधारू पशु उस समय खरीदें, जब पहला पशु अपने ब्यांत के अंतिम चरण में हो, जिससे दूध का उत्पादन बना रहें और आमदनी भी होती रहें इससे दूध देने वाले पशुओं के रख-रखाव के लिए पर्याप्त धन राशि होती रहेगी ऐसे पशु जिनकी दूध देने के क्षमता समाप्त हो गई हो, उनके हटा कर उनकी जगह दूध देने वाले पशुओं को रखें 6-7 ब्यांत के बाद पशुओं को बेच देना चाहिए उत्तम पशु प्रबन्धन दुधारू पशु को स्वास्थ्य रखने और उनसे वांछित उत्पादन प्राप्त करने के लिए तथा उनको आराम देने के लिए समुचित व्यवस्था होना अति आवश्यक है पशुशाला (बाड़ा) ऐसा हो, जिसमें अधिक से अधिक स्वच्छता हो व पशु को अधिक सर्दी, गर्मी व वर्षा से बचाया जा सके वृक्षों या छतों की छाया हो रोगरहित पशुशाला के लिए आस-पास का स्थान साफ रखें छोटे आकार की शाला में ज्यादा पशु न रखें पशुशाला सुखी, हवादार व स्वच्छ हो ताजे पानी का समुचित प्रबंध आवश्यक है संभव हो, तो पक्की ईटों की फर्श बनवाएं, फर्श ढलान लिए हो साल में दो बार बाड़े की दीवारों की चुने से पुताई करें जहाँ तक हो सके पशुओं के लिए वर्ष वर हरे चारे की व्यवस्था करें मादा पशुओं का समय पर प्रजनन करवाएं सूखे काल में पशुओं की सुचारू रूप से देखभाल करें पशु पोषण दुधारू पशुओं को अपनी तरह एक प्राणी समझकर, उचित मस्य पर उचित मात्रा में भोजन का प्रंबध करें दुधारू पशु के पुरे दिन राशन को बनाते समय निम्नलिखित तत्वों का समावेश करें दलिया ज्वार, बाजरा, मक्का, गेंहूँ, जौ आदि 50 भाग चुरी मुंग, उड़द, चना आदि 30 भाग खल सरसों, तारामीरा, असली, बिनौला, तिल 20 भाग खनिज मिश्रण   40 ग्राम प्रतिदिन नमक   50 ग्राम प्रतिदिन शारीरिक निर्वाह के लिए 15-20 किग्रा. हरा चारा, 5-६ किग्रा सुखा चारा दें हरा चारा उपलब्ध न होने पर 1.0 किग्रा., दाना मिश्रण रोज जरुर दें मादा के गाभिन काल के अंतिम दो महीनों में 2-3 किग्रा. दाना मिश्रण और 10-15 किग्रा. हरे चारे के साथ थोड़ी मात्रा में सुखा चार भी दें 5 किग्रा दूध उत्पादन करने वाली गाय, भैस को यदि हम अच्छा चारा खिला रहे हैं तो दाना मिश्रण  की आवश्यकता नहीं है हरे चारे की कमी होने पर गाय को 2.5 किग्रा. दूध पर और भैंस को 2 किग्रा दूध पर 1.0 किग्रा दाना मिश्रण रोजाना देना होगा शारीरिक निर्वाह  व उत्पादन की स्थिति में 30-35 ग्राम खनिज मिशर्ण और ३९ ग्राम नमक मिशन व 50 ग्राम नमक रोजाना दें एक-चौथाई सूखे के चारे के साथ-तीन-चौथाई हरा चारा मिलाकर खिलावें हरा चारा पर्याप्त मात्रा में पशुओं को दें इससे उनके राशन में दाने की कमी की जा सकती है उचित फसल चक्र अपनाकर अपने ही खेत में वर्ष भर के लिए हरे चारे का प्रबंध पशुपालन के लिए अधिक लाभकारी है गाय/भैंस के बच्चों को नियमित रूप से सही समय पर, सही मात्रा में दूध पिलाएं बच्चों के जन्म के 1-2 घंटे के अंदर खीस अवश्य ही पिलाएं स्वास्थ्य रक्षा पशुओं को स्वस्थ व् निरोगी रखने के लिए निम्न बातों पर ध्यान देना आवश्यक है पशुओं व बच्चों को बाह्य आंतरिक परजीवियों को समय पर नष्ट करने का प्रबंध करें वर्ष में 3 बार (जून, अक्टूबर व फरवरी) में अंतः कृमिनाशक दवा जैसे-नीलवर्म, एल्बेन्डाजोल  आदि पशु चिकित्सक की सलाह से दें चमड़ी पर रहने वाले वाह्य परजीवी जैसे जूं, चिंचड़ी, किलनी, पिप्सू आदि के लिए ब्युटेक्स -02% घोल शरीर पर छिडकें दाद व खाज, खुजली के लिए सरसों तेल व गंधक 8:1 के अनुपात में शरीर पर लगाएं बच्चों के पेट के कीड़े मारने की दवा हर माह या दो माह बाद दोहराने से पेट में इनका जीवन चक्र पूर्ण रूप से दूर हो जाता है अतः 6 माह की आयु तक दवा तीन बार अवश्य पिलानी चाहिए पशुओं के खान-पान व व्यवहार में कुछ भी अंतर या परिवर्तन आने पर अविलम्ब पशुओं के डॉ. से संपर्क करण गाय/भैंस को बांझपन के लिए गर्भाशय की परीक्षा व इसका इलाज चिकित्सा विशेषज्ञों से करवाएं दुधारू पशुओं को समय पर संक्रामक रोगों जैसे-गलघोटू, लंगड़ा बुखार, चेचक, खुरपका, मुंहपका, एंथ्रेक्स आदि से बचाने के लिए टीका अवश्य लगाएं संतुलित पशु आहार, समुचित प्रंबध आवास व्यवस्था और स्वास्थ्य रक्षा से पशुओं की दूध देने की क्षमता 3-5 लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाई जा सकती है इस प्रकार किसान भाई खेती के विकसित तरीकों के साथ, पशुपालन के बारे में विशेष जानकारी प्राप्त कर अपनी आमदनी में निश्चित बढ़ोत्तरी कर सकते हैं

खीरा में घास बहुत जमी है, कोई दवा बताइये ?

(hn)
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pawan (8448145629)
pawan
Uttar Pradesh
Hardoi
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Posted Date (22 Jun 2019 01:23 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 02:22 PM) Translated Date (-)

नदीनों को हाथ से गोडाई करके या रासायनों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है ग्लाइफोसेट 1.6 लीटर को प्रति 150 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें ग्लाइफोसेट की स्प्रे सिर्फ नदीनों पर ही करें, मुख्य फसल पर ना करें

Answered Date (22 Jun 2019 01:44 PM) Translated Date (-)

खीरा के लिए मोनोक्रोटोफास या डेमीक्रोंन का छिडकाव करना चाहिए. मैलान फ्लाई की रोकथाम के लिए जहरीली वेट 50 ग्राम मैलाथियान इसके साथ में 200 ग्राम शीरा तथा 2 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करके नष्ट किया जा सकता है.

सर खीरा का उत्पादन कैसे बढ़ाएं टॉनिक डालें कि नहीं ?

(hn)
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pawan (8448145629)
pawan
Uttar Pradesh
Hardoi
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Posted Date (22 Jun 2019 01:19 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 02:24 PM) Translated Date (-)

खीरे के ऊपर आप NPK 191919 एक किल्लो को 150 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद

Answered Date (22 Jun 2019 01:51 PM) Translated Date (-)

खीरा की उत्पत्ति मूलतः भारत से ही हुई है और लता वाली सब्जियों में इसका महत्वपूर्ण स्थान है इसके फलों का उपयोग मुख्य रूप से सलाद के लिए किया जाता है इसके फलों के 100 ग्राम खाने योग्य भाग में 96.3 प्रतिशत जल, 2.7 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट, 0.4 प्रतिशत प्रोटीन, 0.1 प्रतिशत वसा और 0.4 प्रतिशत खनिज पदार्थ पाया जाता है इसके अलावा इसमें विटामिन बी की प्रचुर मात्राएँ पाई जाती हैं इसके फलों का स्वभाव ठंडा है और कब्ज दूर करने में सहायक हैं खीरे के रस का उपयोग करके कई तरह के सौन्दर्य प्रसाधन बनाये जा रहे हैं देश के सभी क्षेत्रों में इसकी खेती प्राथमिकता के आधार पर की जाती है इस लेख में खीरा की उन्नत खेती कैसे करें का विस्तृत उल्लेख है खीरा की जैविक उन्नत खेती की पूरी तकनीक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें-  उपयुक्त जलवायु इसकी खेती के लिए सर्वाधिक तापमान 40 डिग्री सेल्शियस और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्शियस होना चाहिए अच्छी बढ़वार तथा फल-फूल के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्शियस तापमान अच्छा होता है अधिक वर्षा, आर्द्रता और बदली होने से कीटों व रोगों के प्रसार में वृद्धि होती है अधिक तापमान और प्रकाश की अवस्था में नर फूल अधिक निकलते हैं, जबकि इसके विपरीत मौसम होने पर मादा फूलों की संख्या अधिक होती है भूमि का चयन खीरा की खेती के लिए बलुई दोमट या दोमट भूमि जिसमें जल निकास का उचित प्रबंधन हो, सर्वोत्तम पायी गयी है भूमि में कार्बन की मात्रा अधिक तथा पी एच मान 6.5 से 7 होना चाहिए खीरा मुख्य रूप से गर्म जलवायु की फसल है, इस पर पाले का प्रभाव अधिक होता है उन्नत किस्में विदेशी किस्में- जापानी लौंग ग्रीन, चयन, स्ट्रेट- 8 और पोइनसेट आदि प्रमुख है उन्नत किस्में- स्वर्ण अगेती, स्वर्ण पूर्णिमा, पूसा उदय, पूना खीरा, पंजाब सलेक्शन, पूसा संयोग, पूसा बरखा, खीरा 90, कल्यानपुर हरा खीरा, कल्यानपुर मध्यम और खीरा 75, पीसीयूएच- 1, स्वर्ण पूर्णा और स्वर्ण शीतल आदि प्रमुख है संकर किस्में- पंत संकर खीरा- 1, प्रिया, हाइब्रिड- 1 और हाइब्रिड- 2 आदि प्रमुख है किस्मों की अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें-  खेत की तैयारी खीरा की फसल की तैयारी के लिए पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करनी चाहिए उसके बाद 2 से 3 जुताई हैरो या कल्टीवेटर से कर के मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए, उसके बाद पाटा लगा देना चाहिए ताकि खेत समतल हो जाये आखिरी जुताई से पहले 15 से 20 टन गोबर की गली सड़ी खाद या कम्पोस्ट मिटटी में भली भाती मिला देनी चाहिए खाद और उर्वरक खीरा की खेती के लिए 15 से 20 टन गोबर की गली सड़ी खाद या कम्पोस्ट के साथ-साथ 80 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर देना चाहिए फास्फोरस तथा पोटाश की पूरी और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुआई के समय मेड़ पर देना चाहिए शेष नाइट्रोजन की मात्रा दो बराबर भागों में बाँटकर बुआई के 20 और 40 दिनों बाद गुड़ाई के साथ देकर मिट्टी चढ़ा देना चाहिए बुआई का समय मुख्य फसल के रूप में मैदानी क्षेत्रों में बुआई फरवरी से जून के प्रथम सप्ताह में करते हैं दक्षिण भारत में इसकी बुआई जून से लेकर अक्टूबर तक करते हैं, जबकि उत्तर भारत के पर्वतीय भागों में इसकी बुआई अप्रैल से मई में की जाती है गर्मी की फसल को जल्दी लेने के लिए पालीथीन या प्रो-ट्रे की थैलियों में जनवरी में पौध तैयार कर फरवरी में रोपण करते है बीज की मात्रा एक हेक्टेयर क्षेत्र की बुआई के लिए 2 से 3.25 किलोग्राम शुद्ध बीज की आवश्यकता पड़ती है बीज की बुआई करने से पहले फफूंदनाशक दवा जैसे कैप्टान या थिरम (2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से अच्छी तरह शोधित करना चाहिए बुआई की विधि अच्छी तरह से तैयार खेत में 1.5 मीटर की दूरी पर मेड़ बना लें मेड़ों पर 60 से 90 सेंटीमीटर की दूरी पर बीज बोने के लिए गढ्ढे बना लेना चाहिए और 1 सेंटीमीटर की गहराई पर प्रत्येक गड्डे में 2 बीजों की बुआई करते हैं सिंचाई प्रबंधन बुआई के समय खेत में नमी पर्याप्त मात्रा में रहनी चाहिए अन्यथा बीजों का जमाव एवं वृद्धि अच्छी प्रकार से नही होती है बरसात वाली फसल के लिए सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है औसतन गर्मी की फसल को 5 दिन और सर्दी की फसल को 10 से 15 दिनों पर पानी देना चाहिए तने की वृद्धि, फूल आने के समय और फल की बढ़वार के समय पानी की कमी नहीं होनी चाहिए निराई-गुड़ाई वर्षाकालीन फसल में खरपतवार की समस्या अधिक होती है अंकुरण से लेकर प्रथम 20 से 25 दिनों तक खरपतवार फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं इससे फसल की वृद्धि पर प्रतिकूल असर पड़ता है और पौधे की बढ़वार रूक जाती है इसलिए खेत में समय-समय पर खरपतवार निकालते रहना चाहिए खरपतवार निकालने के बाद खेत की गुड़ाई करके जड़ों के पास मिट्टी चढ़ाना चाहिए, जिससे पौधों का विकास तेजी से होता है कीट नियंत्रण एफिड- यह अत्यंत छोटे-छोटे व हरे रंग के कीट होते है जो पौधो के कोमल भागों का रस चूसते है इन कीटो की संख्या में तीव्र गति से वृद्धि होती है, पत्तियां पीली पड़ जाती है और फसल के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ये कीट विषाणु रोग फैलाने में सहायक होते है नियंत्रण- इनके रोकथाम हेतु फ्लोनिकामाइड 50 प्रतिषत डब्लू जी 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए फल मक्खी- अधपके या पके फल इस कीट के कारण सड़ जाते है जिससे खीरा फसल को भारी हानी पहुचती है नियंत्रण- इसके नियंत्रण हेतु कारटाफ एस पी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए पत्ती खाने वाली सुंडी- यह कीट पत्तियों को खाकर क्षति पहुचाते है जिससे खीरा फसल को भारी क्षति पहुचती है नियंत्रण- इसके नियंत्रण हेतु क्लोरोपाइरीफास का छिड़काव करना चाहिए लालड़ी- पीली भूरी रंग की मूंग द्वारा पत्तियों को क्षति पहुचाया जाता है पत्तियों छलनी जैसी हो जाती है इसके लार्वा पौधो के जमीन के समीप से काटते है नियंत्रण- रोकथाम हेतु थायोक्लोरोपिड 1.5 मिलीलीटर प्रति पानी की दर से छिड़काव करें रोग नियंत्रण आर्द्र विगलन- यह रोग फफूंदी जनित होता है इस रोग के कारण बीज का अंकुरण नही होता है थोड़े बड़े पौधे रोगग्रस्त होने पर जमीन पर लेट जाते है नियंत्रण- रोकथाम हेतु बीज को मैन्कोजेब नामक फफूंदनाशक से उपचारित करना चाहिए मृदुरामिल आसिता- यह रोग भी फफूंदी जनित रोग है रोग के लक्षण सर्वप्रथम पत्तियों के उपरी सतह पर हल्के पीले रंग के कोणीय धब्बो के रूप में दिखाई पड़ते है इन धब्बो के नीचे पत्ती की निचली सतह पर फफूंदी रूई के समान बैगनी रंग की दिखाई पड़ती है रोगी पौधे बौने रह जाते है फल का आकार छोटा रह जाता है नियंत्रण 1. खीरा वर्गीय सब्जियों को प्रतिवर्ष एक ही खेत में ना उगाए 2. फसल समाप्त होने पर अवषेष को जला दें 3. मैन्कोजेब दवा 625 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें फल विगलन- इस रोग के कारण पहले फूल सड़ जाते है कुछ समय उपरान्त फूलो पर फफूंदी का रूई जैसा जाल दिखाई देने लगता है, बाद में यह रोग फलो पर फैल जाता है और उन्हे सड़ा देता है रोगी भागो पर फफूंद की बढ़वार रूई जैसी बैगनी काले रंग की दिखाई पड़ती है अधिक नमी तथा उच्च तापमान होने पर रोग का प्रकोप अधिक होता है नियंत्रण 1. जल निकास का उचित प्रबंध करें 2. लताओ को चढ़ाने हेतु बांस या सीमेंट के खम्भो और रस्सी के माध्यम से सहारा दें चूर्णी फफूंदी- इस रोग का आक्रमण 15 से 23 दिन पुराने पत्तियों पर अधिक होता है इस रोग का प्रसार एक से दूसरे स्थान पर वायु द्वारा होता है पुरानी पत्तियों की निचली सतह पर सफेद धब्बे उभर जाते है इन पत्तियों की सामान्य वृद्धि रूक जाती है तथा पत्तियां पीली पड़ जाती है पत्तियां हरिमाहीन हो जाती है और पौधा मर जाता है नियंत्रण- रोकथाम हेतु जैसे ही रोग के लक्षण दिखाई दे सल्फेक्स 2 किलोग्राम, कैराथेन 600 मिलीलीटर को 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें खीरा फसल में कीट एवं रोग नियंत्रण की विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें- 

jhona lgn toh baad pani ch kehri dwayi suttni chahidi hai ?

(pb)
Posted by
manpreet mann (7814592394)
manpreet mann
Punjab
Mansa
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Posted Date (22 Jun 2019 01:18 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 01:42 PM) Translated Date (-)

ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ●● ਨਦੀਨ ਉੱਗਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ (ਲੁਆਈ ਤੋਂ 2-3 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ) - ਬੂਟਾਕਲੋਰ 1200 ਮਿਲੀ ਲਿਟਰ ਜਾਂ ਪਰੈਟੀਲਾਕਲੋਰ 50 ਈ ਸੀ ( ਰਿਫਿਟ) 600 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 18 ਈ ਸੀ 800 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 30 ਈ ਸੀ 500 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਅਨੀਲੋਫਾਸ 50 ਈ ਸੀ 300 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਜਾਂ ਸਟੌਂਪ 30 ਈ ਸੀ 1000 ਤੋਂ 1200 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ( ਹਲਕੀ ਜਾਂ ਭਾਰੀ ਜਮੀਨ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ਼) ਜਾਂ ਪਰੈਟੀਲਾਕਲੋਰ 37 ਈ ਡਬਲਯੂ ( ਰਿਫਿਟ ਪਲੱਸ) ਜਾਂ ਸਾਥੀ 10 ਡਬਲਯੂ ਪੀ ( ਪਾਈਰੈਜੋਸਲਫਿਊਰਾਨ ਇਥਾਈਲ) 60 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਟੌਪਸਟਾਰ 80 ਡਬਲਯੂ ਪੀ 45 ਗ੍ਰਾਮ ਵਿੱਚੋਂ ਕਿਸੇ ਇੱਕ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਨੂੰ 60 ਕਿਲੋ ਰੇਤੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ਼ ਖੜ੍ਹੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਛੱਟਾ ਦੇ ਦਿਉ ●● ਜਿੰਨਾ ਖੇਤਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਕਰਨ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 10-12 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ 40 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਗਰੈਨਿਟ 240 SC (ਪਿਨਾਕਸੁਲਮ) ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ ਜਿਸ ਨਾਲ ਸਵਾਂਕ, ਝੋਨੇ ਦੇ ਮੋਥੇ ਅਤੇ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਹੋਵੇਗੀ •• ਜੇਕਰ ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਵਿਚ ਸਵਾਂਕ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਦੇ ਮੋਥੇ ਉੱਗ ਪੈਂਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਲੁਆਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ 100 ਮਿਲੀ ਲਿਟਰ ਨੌਮਨੀ ਗੋਲਡ/ ਵਾਸ਼ ਆਊਟ/ਮਾਚੋ/ ਤਾਰਕ 10 ਐਸ ਸੀ (ਬਿਸਪਾਇਰੀਬੈਕ) ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ •• ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲੈਪਟੋਕਲੋਆ (ਚੀਨੀ) ਘਾਹ ਜਾਂ ਕਣਕੀ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 400 ਮਿਲੀ ਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ 6•7 ਈਸੀ ( ਫਿਨੋਕਸਾਪਰੌਪ) ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਝੋਨੇ ਦੀ ਲੁਆਈ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅੰਦਰ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ ** ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਚੌੜੇ ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨ ਘਰਿੱਲਾ, ਸਣੀ ਆਦਿ ਅਤੇ ਝੋਨੇ ਦੇ ਮੋਥੇ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 30 ਗਰਾਮ ਐਲਗਰਿਪ 20 ਡਬਲਯੂ ਜੀ ( ਮੈਟਸਲਫੂਰਾਨ) ਜਾਂ 16 ਗਰਾਮ ਸੈਗਮੈਂਟ 50 ਡੀ ਐਫ ( ਅਜਿਮਸਲਫੂਰਾਨ) ਜਾਂ 8 ਗਰਾਮ ਐਲਮਿਕਸ 20 ਡਬਲਯੂ ਪੀ (ਮੈਟਸਲਫੂਰਾਨ+ਕਲੋਰੀਮਿਯੂਰਾਨ) ਜਾਂ 50 ਗਰਾਮ ਸਨਰਾਈਜ 15 WDG (ਇਥੋਕਸੀਸਲਫੂਰਾਨ) ਨੂੰ ਲੁਆਈ ਤੋਂ 20 ਦਿਨ ਬਾਅਦ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰ ਦਿਉ

Answered Date (22 Jun 2019 01:54 PM) Translated Date (-)

खेत में पानी भरकर प्रेटीलाक्लोर 50 प्रतिशत रसायन घोल को पानी में छिड़काव करे इसमें विशेष ध्यान इस बात का देना है, कि दवा रोपाई के चार दिन के अंदर लग जाये दवा खेत में पानी भरकर लगायी जाये, वहीं पानी तीन दिन तक खेत में भरा रहे अर्थात दवा छिड़काव से पूर्व पानी अत्यधिक भर ले दवा छिड़काव के बाद तीन दिन खेत में नही डोलना है, न ही नया पानी लगाना है उनका कहना है, कि प्रेटीलाक्लोर नामक रसायन खेत में भरे पानी के ऊपर एक पतली झिल्ली बना लेती है, उसकी वजह से खेत में काई जम जाती है जिसके प्रभाव से खेत में अनावश्यक पैदा होने वाली घास अर्थात खरपतवार नही जमती है एक एकड़ में 500 मिली. दवा को एक टंकी पानी मे मिलाकर या एक बाल्टी पानी में भरकर छिड़कें चार दिन के बाद नियति रूप से खेत में पानी लगाये, दस दिन के बाद अन्य खुराक दे तरीके से खेती करने पर धान की अधिक पैदावार होगी जिससे अधिक लाभ मिलेगा  

how to grow mango tree in house ?

(en)
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Bunty Dsouza (9004174536)
Bunty Dsouza
Maharashtra
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Posted Date (22 Jun 2019 01:13 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:05 AM) Translated Date (-)

Dug pits of 1x1x1m size at distance of 9x9m one month earlier before planting. Expose them to sun. Fill with mixture of soil, 30 to 40 kg of FYM or Compost and 1 kg single super phosphate.Planting is done in month of August-September also in February - March. Do planting in cool hours of evening. Protect crop from high wind.

Answered Date (22 Jun 2019 02:03 PM) Translated Date (-)

आम के पेड़ों को एक बीज से शुरू करना और उनकी देखभाल करना अन्य सब पेड़ों से आसान है फल का आकार और स्वाद आपके द्वारा चुनी हुई किस्म पर निर्भर करता है, तो सुनिश्चित करें कि आप एक ऐसी किस्म का चयन करें जिसे आपने चखा है और जो आप उगाना चाहते हैं आप आम के पेड़ को छोटा रखने के लिए एक गमले में उगा सकते हैं, या आप उसे एक बड़े पेड़ के लिए जमीन में भी लगा सकते हैं - आप उसे चाहे जैसे भी उगाएं, आप इस रसीले और मोहक फल का हर साल आनंद ले सकेंगे! 1 एक मूल आम का पेड़ ढूंढिए: यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके क्षेत्र में बीज अच्छी तरह से उग पाएगा कि नहीं, इस का सबसे अच्छा तरीका है कि आप आस पास कहीं आम का एक मूल पेड़ ढूंढें एक पेड़ जो समीप हो और अच्छे फल का उत्पादन करता हो, वह आपको एक ऐसा बीज देगा जो आपके जलवायु के लिए उपयुक्त किस्म का होगा यदि आप एक गर्म जलवायु में रहते हैं जहां हल्की सर्दियां होती हैं, तो आपको शायद अपने क्षेत्र में एक स्वस्थ आम का पेड़ मिल सकता है यदि आपको कहीं भी एक आम का पेड़ न मिले, तो आप बीज मंगा सकते हैं या उन्हें एक दुकान से खरीद सकते हैं सुनिश्चित करें कि आप एक ऐसी किस्म का चयन करें जो आपके घर के पास अच्छी तरह से उग सके आप एक दुकान से खरीदे गए आम के बीज को उगाने की भी कोशिश कर सकते हैं हालांकि, यह सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है कि वह बीज आपके जलवायु में जीवित रह पाएगा कि नहीं, खासकर अगर वह आम दुकान में किसी और राज्य या देश से आया है फिर भी, यह एक कोशिश करने के लायक है!  2 बीज की जाँच कर के देखें कि वह विकासक्षम है कि नहीं: अंदर बीज के भूसी को प्राप्त करने के लिए आम के गूदे को काट कर हटाएं ध्यान से बीज को प्रकट करने के लिए भूसी को काट कर हटाएं एक स्वस्थ आम का बीज तन और ताजा दिखेगा कभी कभी यदि वे ठंडे तापमान के संपर्क में आएं तो बीज सूख कर भूरे हो जाते हैं, और अगर ऐसा होता है, तो बीज प्रयोग करने योग्य नहीं हैं [१] बीज से जितना संभव हो सके उतना नज़दीक रख कर दोनों तरफ से काटें: अपने हाथ की हथेली में आम को रख कर, ध्यान से गूदे को एक तरफ से के, और फिर दूसरी तरफ़ से लगभग 2cm/1 इंच काटें फिर क्यूब्स को प्रदर्शित करते हुए, स्वादिष्ट आम के गूदे को ऊपर की ओर पलटें इसे सीधे छिलके से खाएं, या एक चम्मच के साथ निकाल कर सीधे एक कटोरी में डालें आपको बीज को पकड़ते वक्त दस्ताने पहनने चाहिए आम के बीज ऐसे रस का उत्पादन करते हैं जिससे त्वचा में जलन पैदा हो सकती है 3 बीज तैयार करने के लिए एक विधि चुनें: जैसा आगे उल्लेख दिया हो, आप वैसे या तो सुखाने की विधि का, या भिगोने वाली विधि का उपयोग कर सकते हैं  3 अच्छी तरह से पानी दें, और फिर मिट्टी के अनुसार, उसे हर दिन, या हर दूसरे दिन पानी दें: लगभग 4 से 6 सप्ताह के बाद, आपके पास 100mm और 200mm के बीच ऊंचाई वाला एक आम का पेड़/अंकुर होगा आपने पहले जिस किस्म के आम का उपयोग किया हो यह उस पर निर्भर करेगा कि, वह एक गहरा बैंगनी, लगभग काला, या एक उज्ज्वल आकर्षक हरे रंग का होगा 4 अंकुर को उतने आकार का उगने दें जबतक वह एक अच्छे, स्वस्थ जड़ प्रणाली की स्थापना न कर दे: फिर यह बगीचे में उगाने के लिए तैयार है बीज को भिगोना यदि वरीय हो, तो आप सुखाने के स्थान पर इस विधि का उपयोग कर सकते हैं  1 बीज को खरोंचें:  खरोंचने के लिए बीज को बाहर से थोड़ा सा रगड़ें, ताकि बीज आसानी से अंकुरित हो सके ध्यान से आम के बीज पर एक छोटा सा चीरा दें या रेगमाल या इस्पात ऊन के साथ बीज को बाहर से तब तक रगड़ें जब तक बीज की बाहरी त्वचा न टूट जाए  2 बीज को भिगोएं: बीज को पानी के एक छोटे मर्तबान में रखें, और फिर मर्तबान को एक अलमारी या एक शेल्फ जैसे गर्म स्थान पर रखें 24 घंटे के लिए बीज को भिगाएं  3 मर्तबान से बीज निकाल दें और उसे कागज के नम तौलिओं के अंदर लपेटें: लिपटे बीज को एक तरफ़ से कटे हुए कोने वाले प्लास्टिक बैग के अंदर रखें तौलिओं को नम रखें और बीज के अंकुरित होने की प्रतीक्षा करें - इसमें आम तौर पर 1 से 2 सप्ताह लगते हैं सुनिश्चित करें कि बीज की उगने में मदद करने के लिए आप उसे एक गर्म, नम जगह पर रखें [२]  4 अंकुर के लिए एक गमला तैयार करें: अपने अंकुर के विकास की शुरुआत एक गमले में करें एक ऐसा गमला चुनें जो बीज को नियन्त्रित रख सके और उसे मिट्टी और खाद के मिश्रण के साथ भरें आप बीज को सीधे जमीन में उगा सकते हैं, लेकिन उसे पहले एक बर्तन में उगाने से आप उसके विकास के अतिसंवेदनशील प्रारंभिक चरण के दौरान तापमान के अनावरण को नियंत्रित कर सकते हैं [३]  5 सूर्य अंकुर को कड़ा बनाता है: गमले को बाहर आंशिक धूप में रखें; यह अंकुर को सूरज के अनुकूल होने में मदद करता है, या पूर्ण सूर्य में अपनी अंतिम जगह में प्रत्यारोपित होने से पहले, उसे कड़ा बनाता है

teetar dey bachey kitho mil sakdey Han ?

(en)
Posted by
bhupinderjeet singh (8727951741)
bhupinderjeet singh
Punjab
Ferozpur
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Posted Date (22 Jun 2019 01:10 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (18 Jul 2019 04:49 PM) Translated Date (-)

Bhupinder ji isde lai tuhanu phone krke information de diti gyi hai dhanwad ji.

Answered Date (22 Jun 2019 02:06 PM) Translated Date (-)

जंगली तीतर या बन तीतर[2] (वन, बन यानि जंगल) (Swamp Francolin) (Francolinus gularis) फ़ीज़ैन्ट कुल का एक पक्षी है इसका मूल निवास गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों की घाटियों में है– पश्चिमी नेपाल की तराई से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश तक पहले यह बांग्लादेश के चटगाँवइलाके तथा सुन्दरबन में प्रचुर मात्रा में पाया जाता था, लेकिन हाल में यह नहीं देखा गया है और अब यह अनुमान लगाया गया है कि इन इलाकों से इनका उन्मूलन हो गया है भारत में यह सभी तराई के सुरक्षित क्षेत्रों में पाया गया है जो यह बतलाता है कि यह पूर्व अनुमानित आंकड़ों से अधिक संख्या में विद्यमान है नेपाल में, जहाँ इसका आवास क्षेत्र २,४०० वर्ग कि॰मी॰ का है और निवास ३३० वर्ग कि. मी. का है, इसकी अनुमानित संख्या ५०० पक्षियों से भी कम की आंकी गयी है  सिक्किम तथा मेघालय में इसके मिलने के हाल के प्रमाण मौजूद नहीं हैं [1]

ਸਤਿ ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ... ਮੈਂ ਘਰ ਅੰਬ ਦੇ ਬੂਟੇ ਕਈ ਵਾਰ ਲਗਾਏ ਨੇ ਜੀ.. ਪਰ ਉਹ ਥੋੜਾ ਟਾਇਮ ਚਲ ਕੇ ਸੁੱਕ ਜਾਂਦੇ ਨੇ ਜੀ... ਇੱਕ ਅਨਾਰ ਪੱਕ ਕੇ ਪਾਟ ਜਾਂਦੇ ਨੇ ਜੀ... ਕੋਈ ਉਪਾਅ ਦਸੋ ਜੀ..

(pb)
Posted by
ਰਮਿੰਦਰ ਸਿੰਘ (8054412748)
ਰਮਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
Bathinda
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Posted Date (22 Jun 2019 01:04 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:07 AM) Translated Date (-)

ਰਮਿੰਦਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਤੁਸੀ ਬੂਟੇ ਬੀਜ ਤੋਂ ਉਗਾਉਂਦੇ ਹੋ ਜਾ ਬੂਟੇ ਨਰਸਰੀ ਤੋਂ ਲੈਕੇ ਆਉਂਦੇ ਹੋ ਜਿਹੜੇ ਅਨਾਰ ਹਨ ਉਹ ਤਾਪਮਾਨ ਵਧਣ ਦੇ ਕਾਰਨ ਪਾਟਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਸਹੀ ਸਮੇ ਅਤੇ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਪਾਣੀ ਪਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Answered Date (25 Jun 2019 11:23 AM) Translated Date (-)

ਨਰਸਰੀ ਤੋਂ ਲਿਆ ਕੇ ਲਾਏ ਨੇ ਜੀ... ਕੰਧਾਰ ਕਿਸਮ ਦਾ ਅਨਾਰ ਆ ਤੇ ਅੰਬ ਅਮਰਾਪਲੀ ਆ ਜੀ

Answered Date (26 Jun 2019 09:24 AM) Translated Date (-)

ਨਾਲੇ ਅਨਾਰ ਤੇ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਪਾਟ ਜਾਂਦੇ ਨੇ ਜੀ

ਸਰ ਜੀ ਰੀਜੈਟ ਤੇ ਪਦਾਨ ਚ ਕੀ ਫਰਕ ਹੈ ?

(en)
Posted by
Anupjit Singh (9815239997)
Anupjit Singh
Punjab
Ludhiana
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Posted Date (22 Jun 2019 01:04 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:09 AM) Translated Date (-)

ਅਨੁਪਜੀਤ ਜੀ ਇਹਨਾਂ ਦੋਨਾਂ ਵਿਚ ਸਾਲ੍ਟ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਹਨ ਪਰ ਦੋਨੋ ਹੀ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਹਨ ਅਤੇ ਦੋਨਾਂ ਦਾ ਕੰਮ ਵੀ ਇਕ ਹੀ ਹੈ

sir asi jhona de fasal de jgah te makki de fasal laiya ta us bare jaankari deo, 1kila da kina beej pawea, beej da raat ke hovaga , kehri quality da beej hova, kina time de kheeti howegi, jhaad kina hovaga, fir market vich eh ke raat vich bikk jawega ?

(pb)
Posted by
baljit singh (9464446776)
baljit singh
Punjab
Fazilka
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Posted Date (22 Jun 2019 01:02 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:16 AM) Translated Date (-)

Baljit ji jekar tuc makki di bijai karna chahunde ho ta tuc PMH1,PMH2 kisam di bijai kar sakde ho.isde layi 8-10 killo beej di lod paindi hai isda jhaad 18-21 quintal prati acr de hisab nal milega. isde rate di jankari tuhanu market vich hi milegi kyuki isda rate sarkar valo teh kita janda hai.dhanwad

Sir ma koi apna kum suru krna chonda ee... Minu dso sir kehra kum mere lye vdia hoyega and profit vala hoyega ?

(pb)
Posted by
chohan (7837105563)
chohan
Punjab
Gurdaspur
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Posted Date (22 Jun 2019 01:00 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (24 Jun 2019 03:50 PM) Translated Date (-)

chohan ji tusi eh daso ke tohanu kehde kamm da khud tazarba hai tusi kehda kamm jande ho baki ya fir tohada interest kehde work vich hai ya kinna ko kharcha karna chohnde ho. eh sari jankari deyo ji. fir os hissab nal hi kamm di chon kiti ja sakdi hai ji.

sir me artificial insemination ki training sarkari veterinary college se Lena chahta hu, kaha see loo ?

(hn)
Posted by
Arjun (9005188721)
Arjun
Uttar Pradesh
Faizabad
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Posted Date (22 Jun 2019 12:57 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (18 Jul 2019 05:33 PM) Translated Date (19 Jul 2021 02:20 PM)

Arjun ji artificial insemination ki training ke lia aap Artificial Breeding Research Centre, National Dairy Research Institute Karnal, Haryana, India, Fax No. : 0184-2250042 se samparak kar sakte hai. Thankyou.

ਮੱਝ ਦੇ ਥਨ ਫੱਟ ਰਹੇ ਹਨ ਜੱਖਮ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ ਜੀ ?

(en)
  • 1
Posted by
Harwinder Singh (8872202139)
Harwinder Singh
Punjab
S.A.S. Nagar
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Posted Date (22 Jun 2019 12:57 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 01:17 PM) Translated Date (-)

ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ Vitum-H 500ml ਲਓ ਅਤੇ 10-10ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Bovimen-GL 150ml ਲਓ ਅਤੇ 7 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਜਖਮਾਂ ਤੇ Coolmac ਟਿਊਬ ਲਗਾਓ..

Answered Date (22 Jun 2019 02:08 PM) Translated Date (-)

थनैला रोग की रोकथाम :  1. थनैला रोग की रोकथाम जरूरी है क्योंकि यह एक संक्रामक रोग है तथा एक पशु से दूसरे पशु में संचारित होता है 2. आसपास के वातावरण की साफ-सफाई जरूरी है तथा जानवरों का आवास हवादार होना चाहिये 3. फर्श सूखा एवं साफ होना चाहिये 4. थनों की सफाई नियमित रूप से करना चाहिये 5. एक पशु का दूध निकालने के बाद ग्वाले को अपने हाथ अच्छी तरह से धोना चाहिये 6. थनों का समय-समय पर परीक्षण करते रहना चाहिये उनमें कोई गठान एवं दूध में थक्के हो तो तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह लेना चाहिये 7. दूध का परीक्षण करवाएं यदि उसमें थक्के जैसे तथा जैल जैसी संरचना दिखाई दे तो इसका परीक्षण पशु प्रयोगशालाओं एवं पशु चिकित्सा महाविद्यालय में किया जाता है 8. पशु को उच्च गुणवक्ता वाला विटामिन और मिनरल युक्त आहार दें

bhai ji anar de patte eida kyu ho rhe ne ?

(en)
  • 1
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lucky sharma (9569814065)
lucky sharma
Punjab
Barnala
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Posted Date (22 Jun 2019 12:53 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:21 AM) Translated Date (-)

lucky sharma ji jehde isde patte khaade ja rhe han oh kise keet de karn ho reha hai isde layi tuc isde uper malathion@2.5ml nu prtai lite rpani de hisab nal sprya karo.dhanwad

1609 ਦਾ ਬੀਜ ਕਿਵੇਂ ਆ ਝਾੜ ਲਈ ?

(pb)
Posted by
bunty (8729008115)
bunty
Punjab
Ludhiana
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Posted Date (22 Jun 2019 12:49 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:22 AM) Translated Date (-)

1609 PUSA di kism hai. isda jhad 18 qtl prti acre rehnda hai ate ehe 120-122 dina ch tyar ho jandi hai.

hlo sir ghre ji sipkliyaa waliaa ho giaa koi spray dso ji ?

(pb)
Posted by
kuldeep singh (9855943174)
kuldeep singh
Punjab
Sangrur
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Posted Date (22 Jun 2019 12:42 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:56 AM) Translated Date (-)

tusi chipkalia nu bhajon lai desi tareeke vart ke dekho jive ke 5-6 mor de khamb dewar te lga deo jis te chipkaliya oondiya hon. jekar mor de khamb nai milde ta hor kise panshi de khamb lga devo but mor de better hun. dusra tareeka es hai . fineal diya goliya rakho jis jagah te chiplakliya jyada ondia hun. ya fir peyaj nu katt ke devar te lga deo is nal v farak pavega.

Answered Date (22 Jun 2019 02:13 PM) Translated Date (-)

1. कॉफी पाउडर और तंबाकू  कॉफी में तंबाकू पाउडर मिलाकर गेंद के आकार गोले बनाएं अब गोलों को वहां पर रख दें जहां से छिपकली निकलती हो या छिपती हो इन गोलों को रखने से छिपकलियां घर से दूर भाग जाती हैं 2. नेफथलीन बॉल्स  नेफथलीन बॉल्स को घर में रखने से छिपकलिया नहीं आती इन गोलियों का इस्तेमाल ज्यादतर लोग वाथरूम से आने वाली स्मैल को दूर करने में इस्तेमाल करते हैं मगर बहुत कम लोगों को पता होगा की इनको रखने से छिलकलियां मर जाती हैं   3. मोर पंख  दीवार पर, फूलदान या जहां पर भी छिपकलियां रहती है वहां पर मोर पंख रख दें कुछ ही दिनों में छिपकलियां घर को खाली कर देंगी 4. काली मिर्च कीटनाशक स्प्रे कीटनाशक स्प्रे बनाने के लिए पानी और काली मिर्च मिलाएं इसको रसोई के रैक ,स्टोव के नीचे, ट्यूब लाइट कोनों और फ्रिज में स्प्रे करें छिपकली काली मिर्च और स्प्रे की स्मैल से ही घर से दूर भाग जाएगी 5. टबैस्को सॉस एक स्प्रे वाली बोतल में टबैस्को सॉस के 2 चम्मच और पानी मिलाएं इनको अच्छी तरह से हिला लें अब इसको घर को कोनों में छिड़क दें   6. प्याज  प्याज में सल्फर जैसी खराब गंध होती है प्याज को छिपकलियों के आने जाने वाले स्थान पर रख दें कुछ ही दिनों में छिपकली दिखाई नहीं देगी 7. अंडे के छिलके अंडे के छिलके रखने से भी छिपकलियां घर में नहीं आती मगर ध्यान रहें की हर 3-4 दिन के बाद इन छिलकों को बदलते रहें     8. लहसुन  एक बोतल में प्याज का रस और लहसुन का रस मिलाकर अच्छे से हिलाएं जहां पर छिपकलियां ज्यादा आती है वहां पर स्प्रे कर दें कुछ दिनों तक एेसा करने से छिपकलियां खुद व खुद घर से दूर चली जाएंगी   9. बर्फ वाला ठंडा पानी  बर्फीले पानी को छिपकली पर स्‍प्रे कर दें इससे उसको ठंडा लगेगा और वह भाग जाएगी ऐसा हफ्तभर लगातार करें, ताकि वह घर ही छोड़ दें पानी डालने के बाद छिपकली गिर जाएं तो उसे डस्‍टबीन में भरकर बाहर फेंक दें  

सर हमारी फसल 1 महीने की हो गई है कपास लगाया हुआ है, उसमे में बताएं क्या-क्या खाद दे, कितनी मात्रा में के प्रति एकड़ ड्रिप लाइन से ?

(hn)
Posted by
अरविंद (9753533419)
अरविंद
Madhya Pradesh
Khargone
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Posted Date (22 Jun 2019 12:40 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (28 Nov 2019 11:52 AM) Translated Date (-)

खादें और सिंचाई के साधनों के सही उपयोग और अच्छी तरह से की जोताई से कीड़ों को पैदा होने से पहले ही रोका जा सकता है कीड़ों के कुदरती दुश्मनों की भी रक्षा की जा सकती है पौधे के उचित विकास और ज्यादा टिंडे वाली टहनियों की प्रफुल्लता के लिए, मुख्य टहनी के बढ़ रहे हिस्से को लगभग 5 फुट की ऊंचाई से काट दें आखिरी बार हल से जोतते समय बारानी क्षेत्रों में 2-4 टन रूड़ी और सिंचित क्षेत्रों में 4-8 टन रूड़ी का प्रति एकड़ के हिसाब से डालें यह मिट्टी की नमी को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी कपास की विभिन्न-विभिन्न किस्मों के लिए खादों की मात्रा, 75 किलो यूरिया और 75 किलो सिंगल सुपर फासफेट प्रति एकड़ के हिसाब से डालें हाइब्रिड किसमों के लिए, 150 किलो यूरिया और 150 किलो सिंगल सुपर फासफेट या म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से डालें देसी किस्मों के लिए यूरिया 45 किलोग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें

कंटीला की खेती मध्य-प्रदेश के खरगोन जिले में हो सकती है क्या, इसके बीज कहां मिलेंगे ?

(hn)
Posted by
अरविंद (9753533419)
अरविंद
Madhya Pradesh
Khargone
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Posted Date (22 Jun 2019 12:37 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:34 AM) Translated Date (-)

कंटोला की खेती छत्तिश्गढ़, ओर्रिसा, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड में की जाती है धन्यवाद

गाय का खुर नीचे से घिस गया है कया डीजल तेल उसमें डाल सकते हैं गाय को आराम मिलेगा ?

(hn)
Posted by
sumit Kumar (9430947918)
sumit Kumar
Bihar
Jehanabad
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Posted Date (22 Jun 2019 12:18 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 09:19 PM) Translated Date (-)

हांजी सुमीत जी आप उसमें डीजल तेल डाल सकते है इससे कीड़े नहीं पड़ते इसके साथ आप Bovimin-gl 7ml रोजाना देनी शुरू करें

ਕੱਲੇ ਬਾਜਰੇ ਦਾ ਆਚਾਰ ਕਿਨੇ ਟਾਇਮ ਦਾ ਪੈ ਸਕਦਾ ਹੈ?

(pb)
Posted by
ਬਲਜੀਤ ਸਿੰਘ (9478805566)
ਬਲਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
Sangrur
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Posted Date (22 Jun 2019 12:08 PM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:38 AM) Translated Date (-)

baljit ji jado isda sitta gobh te hunda hai os same isda achar pai janda hai.dhanwad

हमारी गाय के पेशाब के साथ वोहत ही ज्यादा खून आ रहा है कृपया इसका इलाज़ बताऐं और बीमारी का नाम बताएं ‌?

(hn)
Posted by
Puran Singh (9816017016)
Puran Singh
Himachal Pradesh
Kullu
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Posted Date (22 Jun 2019 11:58 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 09:17 PM) Translated Date (-)

इसे आप तुरंत नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें इसकी जांच से सही इलाज हो सकता है

बल्लिया जिले में बांस की खेती के बारे में जानकारी कहाँ से मिल सकती है, उनका सम्पर्क नंबर भी बताएं ?

(hn)
Posted by
Omprakash singh (7985571256)
Omprakash singh
Uttar Pradesh
Ballia
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Posted Date (22 Jun 2019 11:58 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:44 AM) Translated Date (-)

अच्छी जल निकासी वाले सभी प्रकार के मिट्टी मे उगे जाते हैं वजनदार मिट्टी मे यह नही होते हैं एक साल के कल्म को नही काटा जाता है फूल के समय नही काटा जाता है यह लम्बा कलगीगार,घना टफ होता है,कल्म (Culms) उजले हरा चिकनी,15-30मी. लम्बा तथा मोटा-15-18 सेमी. होता है प्रकन्द तथा जड दोनों जमीन के नीचे रहते है कारेओपसिस गोल तथा 9-8मिमी. लम्बा होता है मिट्टी कि अच्छी तरह जुताई कर लेनी चाहिए(30सेमी) बीज को छिडकाव कर बुआई की जाती है अंकुरन के 6 महीने बाद इसको अलग की जाती है,तथा 2 साल बाद प्रतिरोपण किया जाता है मिट्टी पलटना 4-9 मी. दूरी पर बीजांकुर को प्रतिरोपण किया जाता है 2 साल तक बीजांकुर के व्हारों तरफ 30 सेमी. गोलाई तथा 8-10 सेमी. गहराई कर मिट्टी कार्य किया जाता है पहली साल 3 बार तथा दूसरी साल 2 बार खरपतवार नाश करना चाहिए पौधारोपण क्षेत्रों मे थिनिंग तथा साफ करना चाहिए 3-4 किलो FYM मिला कर खड्डा तैयार की जाती है

ਖੇਤੀ ਦੇ ਨਾਲ ਕੋਈ ਸਹਾਇਕ ਧੰਦੇ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੳ। ਜਿਹਦੇ ਨਾਲ ਹੋਰ ਫਾਇਦਾ ਹੋ ਸਕੇ।

(pb)
Posted by
Dalbir Billing (9781266981)
Dalbir Billing
Punjab
Sangrur
Write Answer
Posted Date (22 Jun 2019 11:27 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (24 Jun 2019 03:58 PM) Translated Date (-)

ਖੇਤੀ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਤੁਸੀਂ ਕਈ ਸਹਾਇਕ ਧੰਦੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਹਨ , ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਡੇਅਰੀ, ਪਸ਼ੂ-ਪਾਲਣ, ਮੁਰਗੀ-ਪਾਲਣ, ਮੱਖੀ-ਪਾਲਣ, ਬਣਾ ਕੇ ਮੱਛੀ-ਪਾਲਣ, ਅਗੇਤੀ ਸਬਜ਼ੀ ਉਗਾਉਣਾ ਆਦਿ ਇਸ ਤਰਾਂ ਕਹਿਣਾ ਬਹੁਤ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੈ ਕਿ ਕਿਹੜਾ ਕਿੱਤਾ ਜਿਆਦਾ ਫਾਇਦਾ ਦੇਵੇਗਾ ਕਿਉਕੀ ਇਹ ਤੁਹਾਡੀ ਮਿਹਨਤ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸ ਲੈਵਲ ਤੇ ਕਰਦੇ ਹੋੰ ਤੁਸੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਆਪਣੇ ਬਜ਼ਟ, ਤਜ਼ਰਬੇ ਤੇ ਜਗਾਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਹਾਇਕ ਕਿੱਤੇ ਨੁੰ ਚੁਣੋ ਜਿਸ ਬਾਰੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਖੁਦ ਵੀ ਥੋੜੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਹੋਵੇ ਫਿਰ ਉਸ ਕਿਤੇ ਨੂੰ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਸਫਲ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਖੁਦ ਜਾ ਕੇ ਮਿਲੋ ਫਿਰ ਪੱਕਾ ਮਨ ਬਣਾਕੇ ਉਸ ਕੰਮ ਨੂੰ ਛੋਟੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਤੇ ਅਸੀ ਪੂਰੀ ਮੱਦਦ ਕਰਾਂਗੇ ਜੀ ਬਾਕੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਿਹੜੇ ਕੱਤੇ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਹੈ ਉਹ ਵੀ ਦੱਸੋ ਜੀ

mircha di pniree mar rahee hai ?

(pb)
Posted by
kamal (9781651088)
kamal
Punjab
Fatehgarh Sahib
Write Answer
Posted Date (22 Jun 2019 11:26 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 05:36 PM) Translated Date (-)

kamal ji isde vich dikkat ki aa rahi hai daso patte peele ho rahe han ja koi keede da hamla hai ta jo tuahnu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

koi app dsoo jidhe nal jameen nu naap laya jaya kare sahi tarikee nal nd app bilkull sahi naap dsdi hove te purii details dsse ?

(pb)
Posted by
jagroop goraya (8000002951)
jagroop goraya
Punjab
Gurdaspur
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Posted Date (22 Jun 2019 11:18 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 12:30 PM) Translated Date (-)

jagroop goraya ji app ta bohat sariya ondiya hun par bilkul sahi naap nai dasdiyaji. baki jekar tusi try karke dekhna hai ta ik vaar JAREEB name di android app download karke dekho ji.

सर हमारी गाय के पिछले पैर का खुर नीचे से घीस गया है जिसके कारण हमारी गाय को पिछले पैर से खड़ा होने में दिक्कत हो रही है गाय हमारी 9 महीने की गाभीन है इसलिए उसको अभी गिरा कर खुर नहीं बनवा सकते हैं कोई ऐसी दबा बताऐ जिसके लगाने से गाय को आराम मिल सके?

(hn)
Posted by
sumit Kumar (9430947918)
sumit Kumar
Bihar
Jehanabad
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Posted Date (22 Jun 2019 11:03 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 09:24 PM) Translated Date (-)

सुमित जी यदि उसे खड़ी होने में समस्या हो रही है तो उसे Bovimin-gl 7ml रोजाना दें और Mifex 450ml (IV slow) बोतल लगवायें और उस बोतल में Tonofas इंजेक्शन 20ml मिलायें और उसे injection Trineurosol 5ml, Nurokind 15ml (IM) लगवायें यह दोंनो इंजेक्शन 3—4 दिन लगवायें इससे फर्क पड़ जाएगा

Answered Date (22 Jun 2019 11:12 AM) Translated Date (-)

loroxen cream ya himex cream lagaye

jhone vich zinc kis lai hundi he ate kini matra kini vaar poni chahidi he ?

(en)
Posted by
ਸਰਬਜੀਤ ਸਿੰਘ (9814772340)
ਸਰਬਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
Fatehgarh Sahib
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Posted Date (22 Jun 2019 10:55 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 05:11 PM) Translated Date (-)

ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਜ਼ਿੰਕ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਪਹਿਲੀ ਯੂਰੀਆ ਨਾਲ ਜ਼ਿੰਕ ਮਿਲਾ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਦਿਓ ਇਹ ਜ਼ਿੰਕ 21% ਵਾਲੀ ਜਾਂ 33% ਵਾਲੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ 21% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 25 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 33% ਵਾਲੀ ਜ਼ਿੰਕ ਦੀ ਮਾਤਰਾ 16-17 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ

Ye konsi nasal hai ?

(hn)
  • 2
Posted by
abdulgaffar (9970812564)
abdulgaffar
Maharashtra
Aurangabad
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Posted Date (22 Jun 2019 10:51 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (23 Jun 2019 12:50 PM) Translated Date (19 Jul 2021 02:20 PM)

yeh Sirohi cross breed hai..

23 Jun 2019

Thanks

ਸਰ ਜੀ ‌‌ਜੀਰੀ ਵਿਚ ਸਿਉਂਕ ਤੋਂ danitol ਦੀ ਕਿੰਨੀ ਮਾਤਰਾ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ?

(pb)
Posted by
Happy singh (9780841055)
Happy singh
Punjab
Fatehgarh Sahib
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Posted Date (22 Jun 2019 10:50 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 05:54 PM) Translated Date (-)

ਹੈਪ੍ਪੀ ਜੀ ਤੁਸੀ ਸਿਉਂਕ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ chlorpyriphos @1 ਲੀਟਰ ਨੂੰ 60 ਕਿੱਲੋ ਮਿੱਟੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਛਿੱਟਾ ਦਿਓ Danitol ਚੇਪੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਵਾਸਤੇ ਵਧੀਆ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

moti ki kheti kese v kin se hoti hai ?

(hn)
Posted by
Sudesh Sidhar (9460942009)
Sudesh Sidhar
Rajasthan
Sri Ganganagar
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Posted Date (22 Jun 2019 10:49 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 02:52 PM) Translated Date (-)

Sudesh Sidhar जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

veer g apa ne na pig farme pona a mansa vich kive raho plzzz help me?

(pb)
Posted by
Kuldeep.singh (9658966000)
Kuldeep.singh
Punjab
Mansa
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Posted Date (22 Jun 2019 10:47 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:48 AM) Translated Date (-)

Kuldeep singh ji vadiya rahuga ji. par tusi puri training le ke hi shuru kareyo te baki chhote level to shuru kareyo. farm bnon to pehla hor farmer de farm jarur dekh leyo ji.

25 Jun 2019

thanks g

Moti utpadan kheti Kaise ki Jati Hai purn Roop se jankari ?

(hn)
Posted by
POOJA PANCHAL (8290806982)
POOJA PANCHAL
Rajasthan
Dungarpur
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Posted Date (22 Jun 2019 10:47 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 02:52 PM) Translated Date (-)

POOJA PANCHAL जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

22 Jun 2019

thanks sir g

22 Jun 2019

thanks

ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ ਡੀਲ਼ੇ ਦਾ ਹੱਲ ਦੱਸੋ ਜੀ ?

(en)
Posted by
Jaswinder’s (9855064759)
Jaswinder’s
Punjab
Gurdaspur
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Posted Date (22 Jun 2019 10:38 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 04:57 PM) Translated Date (-)

ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਬੀਜਣ ਤੋਂ 2 ਤੋਂ 3 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ 1200 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਬੂਟਾਕਲੋਰ 50 ਈ ਸੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਜਾਂ 1200 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਥਾਇਓੁਬੈਨਕਾਰਬ 50 ਈ ਸੀ ਜਾਂ 1000 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਪੈਂਡੀਮੈਥਾਲਿਨ 30 ਈ ਸੀ ਜਾਂ 600 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਪਰੈਟੀਲਾਕਲੋਰ 50 ਈ ਸੀ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬੂਟੀ-ਨਾਸ਼ਕਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕਿਸੇ ਵੀ ਬੂਟੀਨਾਸ਼ਕ ਨੂੰ 60 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਮਿੱਟੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ 4-5 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਖੜ੍ਹੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਫੈਲਾਅ ਦਿਓ ਚੌੜੇ ਪੱਤੇ ਵਾਲੇ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਮੈਟਸਲਫਰੋਨ 20 ਡਬਲਿਊ ਪੀ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਬੀਜਣ ਤੋਂ 20-25 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਵਿਚੋਂ ਖੜ੍ਹੇ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਕੱਢ ਦਿਓ ਅਤੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨ ਤੋਂ ਇੱਕ ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਨੂੰ ਫਿਰ ਪਾਣੀ ਦਿਓ

ਜੀਰੀ ਦੇ ਵਿਚ ਇਕ ਕੀਲੇ ਵਿਚ ਕਿੰਨਾ ਯੂਰਿਆ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ?

(pb)
Posted by
bunty (8729008115)
bunty
Punjab
Ludhiana
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Posted Date (22 Jun 2019 10:32 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 10:37 AM) Translated Date (-)

ਝੋਨੇ ਵਿੱਚ @110 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ ਜੀ

Answered Date (22 Jun 2019 05:13 PM) Translated Date (-)

ਵੀਰ ਮੋਟੀ ਯੂਰੀਆ ਤੇ ਬਰੀਕ ਯੂਰੀਆ ਵਿਚ ਕੀ ਫਰਕ ਆ

sir pichle sal mitti chuki c 2 ekar ch te hun 6 thaile sartaj gypsum pa te, khet pani ght peenda koi hll ?

(pb)
Posted by
kashmir singh (6239788425)
kashmir singh
Punjab
Sangrur
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Posted Date (22 Jun 2019 10:31 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 04:48 PM) Translated Date (-)

kashmir ji jekar pani mitti vich nahi jeerda ta tuc sulphur@3 killo nu prtai kille de hisab nal chitta de sakde ho.dhanwad

motiyon ki kheti kaise kare ?

(en)
Posted by
VIMAL KUMAR (9756910703)
VIMAL KUMAR
Uttar Pradesh
Pilibhit
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Posted Date (22 Jun 2019 10:28 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 10:36 AM) Translated Date (-)

VIMAL KUMAR जी मोती की खेती एक बहुत ही अच्छा व्यवसाय है इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए सबसे जरुरी है इसकी ट्रेनिंग, क्योकि इसमें बहुत सी ऐसी बारीकियें होती है जो हमें प्रेक्टिकल ट्रेनिंग में ही सीखने को मिलती है अगर आप इसकी ट्रेनिंग लेना चाहते है तो आप ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र यहाँ जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्य कर्म आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्य कर्म में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर )- 9711858258. धन्यवाद

sir 1401 mushal basmati bare jan kari do ?

(pb)
Posted by
Gurveer sidhu (7508447003)
Gurveer sidhu
Punjab
Fatehgarh Sahib
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Posted Date (22 Jun 2019 10:26 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 04:56 PM) Translated Date (-)

ਪੂਸਾ 1401 ਨੂੰ ਪੂਸਾ ਬਾਸਮਤੀ -6 ਨਾਮ ਨਾਲ ਵੀ ਜਾਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੂਸਾ 1401 ਦਰਮਿਆਨੀ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਪੱਕਣ ਲਈ ਲਗਭਗ 150 -155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ ਲਗਭਗ 17-18q/acre ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਚੰਗੀ ਮਿੱਟੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਲਗਾਓ

Maj suee nu ik Sal ho gya, bani nhi ?

(pb)
Posted by
sukhbir brar (9417829399)
sukhbir brar
Punjab
Faridkot
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Posted Date (22 Jun 2019 10:18 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 01:22 PM) Translated Date (-)

Sukhbir ji tuci majhh nu Flukarid-ds Bolus pett de kiria lai deo, isde nal tuci Agrimin super powder 100gm rojana deo ate total 2 kg tak deo, isde nal tuci Minotas bolus rojana 1 goli deo ate 21 din tak deo, iss nal heat vich aa jawegi.

tiki ki kheti ?

(hn)
Posted by
j.p (9664105001)
j.p
Rajasthan
Hanumangarh
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Posted Date (22 Jun 2019 10:15 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 04:49 PM) Translated Date (-)

Kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap konsi fasal ki bijai kar sakte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake .dhanwyad

Answered Date (22 Jun 2019 04:49 PM) Translated Date (-)

Kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap konsi fasal ki bijai kar sakte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake .dhanwyad

d a p ਦੀ ਵਰਤੋ ਝੋਨੇ ਲਈ ਸਹੀ ਹੈ ਜਾ ਪਟਾਸ ਸਹੀ ਹੈ ?

(pb)
Posted by
Tejbir singh (9501295595)
Tejbir singh
Punjab
Gurdaspur
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Posted Date (22 Jun 2019 10:11 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 04:53 PM) Translated Date (-)

ਤੇਜਬੀਰ ਜੀ ਪੋਟਾਸ਼ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਤੱਤ ਦੋਨੋ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਦੋਨਾਂ ਦੇ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਕੰਮ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜੇਕਰ ਪਿਛਲੀ ਫ਼ਸਲ ਵਿਚ ਤੁਸੀ DAP ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ DAP ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਹੈ ਪੋਟਾਸ਼ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਆਖਰੀ ਵਹਾਈ ਸਮੇ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹੋ

Answered Date (22 Jun 2019 07:55 PM) Translated Date (-)

zinc patas di varto kinvi khaad naĺ karni sahi hai

ਸਰ ਜੀ ਝੋਨੇ ਉਪਰ ਮੋਨੋ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਆ ਇਸ ਦੇ ਕੀ ਫਾਇਦੇ ਆ ?

(pb)
Posted by
Bikram jeet singh (9592479434)
Bikram jeet singh
Punjab
Gurdaspur
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Posted Date (22 Jun 2019 10:01 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 05:33 PM) Translated Date (-)

ਬਿਕਰਮਜੀਤ ਜੀ ਇਹ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਹੈ ਜੇਕਰ ਪੱਤਾ ਲਪੇਟ ਜਾ ਗੋਭ ਦੀ ਸੁੰਡੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਤਾ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

ਖੀਰੇ ਕੌੜੇ ਲਗਦੇ ਪਏ ਆ ਜੀ ਕੋਈ ਹਲ ਹੈ ਤਾ ਦਸਿਉ ਜੀ ?

(en)
Posted by
ਹਰਨੇਕ ਸਿੰਘ (8699356005)
ਹਰਨੇਕ ਸਿੰਘ
Punjab
Kapurthala
Write Answer
Posted Date (22 Jun 2019 09:59 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (25 Jun 2019 11:41 AM) Translated Date (-)

ਹਰਨੇਕ ਜੀ ਇਹ ਤੱਤ ਦੀ ਕਮੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਨਾਇਟ੍ਰੇਟ ਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰੋ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਖੀਰੇਆਂ ਦਾ ਕੌੜਾਪਨ ਠੀਕ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

ਸਤ ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਸਰ । ਮੇਰੇ ਖੇਤ ਚ ਇੱਕ ਆਂਵਲੇ ਦਾ ਬੂਟਾ ਹੈ ਪਰ ਉਸਨੂੰ ਫਲ ਨਹੀਂ ਲਗਦਾ। ਪਹਿਲਾ ਪਹਿਲ ਇੱਕ ਦੋ ਸਾਲ ਫ਼ਲ ਲੱਗਾ ਪਰ ਹੁਣ ਨਹੀਂ ਲਗਦਾ । ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਕੋਈ ਹੱਲ ਦੱਸੋ।

(en)
Posted by
Gurvinder singh (8360013366)
Gurvinder singh
Punjab
Tarn Taran
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Posted Date (22 Jun 2019 09:59 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 04:54 PM) Translated Date (-)

ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਸਦੀ ਉਮਰ ਦੱਸੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ

22 Jun 2019

ਇਸ ਆਂਵਲੇ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ੳਮਰ 5 ਕਿ ਸਾਲ ਹੈ।

sir urea di pehli kisht kado poni a ?

(pb)
Posted by
shamsher singh (8872140666)
shamsher singh
Punjab
Gurdaspur
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Posted Date (22 Jun 2019 09:52 AM) Assigned Date (-)
Answered Date (22 Jun 2019 04:59 PM) Translated Date (-)

shamsher ji tuc urea di pehli kist 18 din bad pa sakde ho.dhanwad

Answered Date (22 Jun 2019 02:08 PM) Translated Date (-)

within 7 days