Punjab
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sir mujhe kapas ki kheti karni hi. iska time kab se kab tak hi. or kisam kon si boye ?
(hn)
देसी कपास के लिए रेतली दोमट से चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है और अमेरिकन कपास की किस्मों के लिए दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है इसे हर तरह की मिट्टी, जिसकी पी एच दर 6-8 होती है, में उगाया जा सकता है इस फसल की खेती के लिए गहरी, नर्म, अच्छे निकास वाली और उपजाऊ मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है कपास की बिजाई के लिए रेतली, खारी या जल जमाव वाली मिट्टी ठीक नहीं होती मिट्टी की गहराई 20-25 सैं.मी. से कम नहीं होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में:-RS 2013,RS 810,RST 9,RS 875,Ganganagar Ageti, की बिजाई कर सकते है फसल की अच्छी पैदावार और अच्छे अंकुरण के लिए ज़मीन को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी होता है रबी की फसल को काटने के बाद तुरंत खेत को पानी लगाना चाहिए इसके बाद खेत की हल से अच्छी तरह जोताई करें और फिर सुहागा फेर दें ज़मीन को तीन वर्षों में एक बार गहराई तक जोतें, इससे सदाबहार नदीनों की रोकथाम में मदद मिलती है और इससे मिट्टी में पैदा होने वाले कीड़ों और बीमारियों को भी रोका जा सकता है बिजाई के लिए अप्रैल से मध्य मई का समय उपयुक्त होता है अमेरिकन कपास के लिए कतार से कतार का फासला 60 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासला 45 सैं.मी. रखें देसी कपास की किस्म के लिए कतार से कतार का फासला 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे का फासल 30 सैं.मी. रखें बीजों के अंकुरन ना होने और नए पौधों के नष्ट होने के कारण कुछ फासले पड़ जाते हैं इन्हें भरने के लिए 2-3 पानी में भिगोये हुए बीजों या अंकुरन के बाद एक सेहतमंद नए पौधे को बोयें बिजाई के दो सप्ताह बाद कमज़ोर, बीमार, प्रभावित नए पौधों को निकालकर सेहतमंद नए पौधे की रोपाई करें बीजों को बोने के लिए 4-5 सैं.मी. की गहराई होनी चाहिए देसी कपास की बिजाई के लिए सीड ड्रिल का प्रयोग करें जब कि हाइब्रिड और बी टी कपास के लिए डिबलिंग ढंग का प्रयोग करें आयताकार रोपाई के मुकाबले वर्गाकार रोपाई ज्यादा लाभदायक होती है बीजों के अंकुरन ना होने और नए पौधों के नष्ट होने के कारण कुछ फासले पड़ जाते हैं इन्हें भरने के लिए 2-3 पानी में भिगोये हुए बीजों या अंकुरन के बाद एक सेहतमंद नए पौधे को बोयें बिजाई के दो सप्ताह बाद कमज़ोर, बीमार, प्रभावित नए पौधों को निकालकर सेहतमंद नए पौधे की रोपाई करें हाइब्रिड और बी टी कपास के लिए 1 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें, जब कि देसी किस्मों के लिए 3-5 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें पौधों में ज्यादा फासला होने के कारण फसल पर नदीनों का गंभीर हमला होता है अच्छी पैदावार के लिए फसल की बिजाई के बाद 50-60 दिनों तक फसल का नदीन रहित होना जरूरी है, नहीं तो फसल की पैदावार में 60-80 प्रतिशत कमी आ सकती है नदीनों की असरदार रोकथाम के लिए हाथों से, मशीनी और रासायनिक ढंगों के सुमेल का उपयोग होना जरूरी है बिजाई के 5-6 सप्ताह बाद या पहली सिंचाई करने से पहले हाथों से गोडाई करें बाकी गोडाई प्रत्येक सिंचाई के बाद करनी चाहिए कपास के खेतों के आस पास गाजर बूटी पैदा ना होने दें, क्योंकि इससे मिली बग के हमले का खतरा ज्यादा रहता है बिजाई के बाद नदीनों के पैदा होने से पहले ही पैंडीमैथालीन 25-33 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी की स्प्रे करें बिजाई के 6-8 सप्ताह बाद जब पौधों का कद 40-45 सैं.मी. हो तो पेराकुएट (ग्रामोक्सोन) 24 प्रतिशत डब्लयू एस सी 500 मि.ली. प्रति एकड़ या ग्लाइफोसेट 1 लीटर को 100 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीन नाशक 2, 4-डी से कपास की फसल काफी संवेदनशील होती है बेशक इस नदीननाश्क की स्प्रे नज़दीक के खेत में की जाए, तो भी इसके कण उड़ कर कपास की फसल को बहुत ज्यादा नुकसान पहंचा सकते हैं नदीन नाशक की स्प्रे सुबह या शाम के समय में ही करनी चाहिए खादें और सिंचाई के साधनों के सही उपयोग और अच्छी तरह से की जोताई से कीड़ों को पैदा होने से पहले ही रोका जा सकता है कीड़ों के कुदरती दुश्मनों की भी रक्षा की जा सकती है पौधे के उचित विकास और ज्यादा टिंडे वाली टहनियों की प्रफुल्लता के लिए, मुख्य टहनी के बढ़ रहे हिस्से को लगभग 5 फुट की ऊंचाई से काट दें देसी कपास की किस्मों क लिए नाइट्रोजन 20 किलो (यूरिया 44 किलो) और फासफोरस 10 किलो (एस एस पी 63 किलो) प्रति एकड़ में डालें हाइब्रिड कपास की किस्मों के लिए खादों की दोहरी मात्रा नाइट्रोजन 40 किलो और फासफोरस 20 किलो प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की जांच के आधार पर पोटाश डालें फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश यदि जरूरत हो तो और नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई से पहले आखिरी जोताई के समय डालें नाइट्रोजन की बाकी बची मात्रा फूल निकलने के समय डालें यदि मिट्टी में जिंक की कमी हो तो जिंक सल्फेट 10 किलो मिट्टी में बीज बोने से पहले डालें कपास की फसल को बारिश की तीव्रता के अनुसार चार से छः सिंचाई की जरूरत होती है पहली सिंचाई बिजाई के चार से छः सप्ताह बाद करें बाकी सिंचाइयां दो या तीन सप्ताह के फासले पर करें छोटे पौधों में पानी खड़ा ना होने दें फूल और टिंडे गिरने से बचाने के लिए, फूल निकलने और फूल लगने के समय फसल को पानी की कमी नहीं रहने देनी चाहिए जब टिंडे 33 प्रतिशत खिल जायें उस समय आखिरी सिंचाई करें और इसके बाद फसल को सिंचाई के द्वारा पानी ना दें जब भी फसल की सिंचाई के लिए खारे पानी का उपयोग किया जाये, तो सिंचाई करने से पहले पानी की जांच प्रमाणित लैबोरेटरी से करवाएं और उनकी सलाह के अनुसार ही पानी में जिप्सम या पाइराइट का उपयोग करें सूखे वाली स्थितियों में खालियां बनाकर और एक क्यारी छोड़कर सिंचाई करें सूक्ष्म सिंचाई सिस्टम अपनाएं (जहां भी संभव हो), इससे सिंचाई वाला पानी बचाने में सहायता होती है
pr 118 jhone da ki result he ji ?
(pb)
PR 118: यह छोटे कद की, सीधी बालियों वाली किस्म है यह किस्म गर्दन तोड़ को सहनेयोग्य है इसके पत्ते गहरे हरे रंग के और सीधे होते हैं यह किस्म 158 दिनों में तैयार हो जाती है इसके दाने दरमियाने आकार के होते हैं जो कि पकाने में बढ़िया होते हैं इसकी औसतन पैदावार 29 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
ਸਰ ਜੀ ਮੈ ਹਰਿਆਣੇ ਤੌ ਮੂਰਹਾ ਨਸਲ ਦੀਆ ਝੋਟਿਆਂ ਲੈ ਕੇ ਆਏ ਸੀ ਅਸੀਂ ਜੋ ਇਕ ਸਾਲ ਵਿਚ ਸੂ ਵੀ ਪਈਆਂ ਇੱਕ ਅਕਤੂਬਰ ਵਿਚ ਸੂਈ ਸੀ ਜਿਸ ਦੇ ਸਰੀਰ ਤੇ ਲੂਈ ਕੰਡੇ ਖੜੇ ਹੋਏ ਰਹਿੰਦੇ ਤੇ ਉਹ ਸੁਕ ਦੀ ਜਾਦੀ ਹੈ ਡਾਕਟਰ ਨੂੰ ਵਿਖਾਇਆ ਪਰ ਕੋਈ ਪਰੌਬਲਮ ਨਹੀ ਪਤਾ ਚਲ ਰਹੀ ?
(en)
Tuci uss da bhukar check krwao, uss ne pett de kiria lai flukarid-ds bolus deo ate anabolite liquid 100ml rojana deo, ferritas 1-1 goli swere sham deo ate 10 din tak dinde rho..
श्रीमान मुझे कलम लगाने की ट्रेनिंग लेनी है कहा से मिलेगी कृपया बताए ?
(hn)
Punjab
अनिल जी कृपया आप बताएं कि आप कौन सी फसल की कलम लगाने की ट्रेनिंग लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
ਸਰ ਜਰਸੀ ਨਸਲ ਦੀਆ ਗਾਵਾਂ ਲੈਣੀਆ ਜੀ ਕਿਸ ਇਲਾਕੇ ਚੋ ਮਿਲਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਕਿੰਨੇ ਰੇਟ ਵਿਚ ਮਿਲ ਜੂ ਗਾਂ ?
(pb)
Punjab
ਲਾਡੀ ਜੀ ਜਰਸੀ ਨਸਲ ਦੀਆ ਵਧੀਆਂ ਗਾਵਾਂ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਨਾਲ Sukhwinder Singh 9814057587, 9855621810 Cheena Dairy Farm, Ludhiana, Punjab ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
सर कपास की बिजाई किए हुए पांच दिन हो गया है ओर कही पर बीज सूखे में पडा हैं और कही पर ठीक पडा है कया पानी लगा सकते हैं ?
(hn)
Punjab
कपास की फसल को बारिश की तीव्रता के अनुसार चार से छः सिंचाई की जरूरत होती है पहली सिंचाई बिजाई के चार से छः सप्ताह बाद करें बाकी सिंचाइयां दो या तीन सप्ताह के फासले पर करें छोटे पौधों में पानी खड़ा ना होने दें फूल और टिंडे से बचाने के लिए, फूल निकलने और फूल लगने के समय फसल को पानी की कमी नहीं रहने देनी चाहिए जब टिंडे 33 प्रतिशत खिल जायें उस समय आखिरी सिंचाई करें और इसके बाद फसल को सिंचाई के द्वारा पानी ना दें, जब भी फसल की सिंचाई के लिए खारे पानी का उपयोग किया जाये, तो सिंचाई करने से पहले पानी की जांच प्रमाणित लैबोरेटरी से करवाएं और उनकी सलाह के अनुसार ही पानी में जिप्सम या पाइराइट का उपयोग करें सूखे वाली स्थितियों में खालियां बनाकर और एक क्यारी छोड़कर सिंचाई करें सूक्ष्म सिंचाई सिस्टम अपनाएं (जहां भी संभव हो), इससे सिंचाई वाला पानी बचाने में सहायता होती है
corn beejni aa y kehda beej thik rahu ga te time ghat lawe vaad vich jeeri v launi aa dasso g ?
(pb)
Punjab
Sukhdeep ji jekar chare layi beejni hai ta tuc J1006 ja african tall di bijai kar sakde ho jekar pkavi beejni hai ta tuc PMH1, PMH2 kisam di bijai kar sakde ho.dhanwad
gulab ki achi growth ki dwao btaye ?
(hn)
Maharashtra
बैड की तैयारी के समय 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में डालें तीन महीने के फासले पर 10 किलो रूड़ी की खाद और 8 किलो नाइट्रोजन, 8 किलो फासफोरस और 16 किलो पोटाश प्रति पौधे में डालें छंटाई के बाद ही सारी खादों को डालें ज्यादा पैदावार लेने के लिए छंटाई से एक महीने बाद, जी ए 3@ 200 पी पी एम(2 ग्राम प्रति लीटर) की स्प्रे करें पौधे की तनाव सहन शक्ति को बढ़ाने के लिए घुलनशील जड़ उत्तेजक(रैली गोल्ड/रिजोम) 100 ग्राम+ टिपोल 60 मि.ली. को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में शाम के समय सिंचाई करें
ਪਸੂਆਂ ਦੇ ਚਿੱਚੜਾ ਤੋਂ ਇਲਾਜ ਦੱਸੋ ?
(pb)
ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਥੱਲੇ ਚੂਨੇ ਦੀ ਕਲੀ ਦਾ ਹਲਕਾ ਹਲਕਾ ਛਿੜਕਾ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ msd ਕੰਪਨੀ Ticktac ਦੀ ਦਵਾਈ 2 ਮਿਲੀ ਨੂੰ ਇਕ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਕੇ ਪਸ਼ੂ ਤੇ ਮਾਲਿਸ਼ ਕਰੋ , ਜਾਂ ਤੁਸੀ Virabc ਕੰਪਨੀ ਦੀ Virtaz ਦਵਾਈ 2 ਮਿਲੀ ਨੂੰ 1 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਆਸ ਪਾਸ ਵੀ ਕਰੋ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਵਿਚ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਕਿਉਕਿ ਚਿੱਚੜ ਕੰਧਾਂ ਜਾਂ ਫ਼ਰਸ਼ ਦੀਆ ਤਰੇੜਾਂ ਵਿਚ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਅਤੇ ਦੁਬਾਰਾ ਦੁਬਾਰਾ ਆਉਂਦੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹੈ
what do you mean by suberization in potato tubers?
(en)
Punjab
Suberization (accumulation of polyphenolic and polyaliphatic barriers on cell walls) is a vital process required to control potato tuber desiccation, development of defects, and to block infection of harvest damaged tubers and tubers cut for seed.
mentha ki kheti kaise hoti hai ?
(en)
Punjab
पुदीना मैंथा के नाम से जानी जाने वाली एक क्रियाशील जड़ी बूटी है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Shivalik: यह चीन की खेती से चुनी गई किस्म है यह किस्म उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और उत्तरांचल में अच्छी वृद्धि करती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 65-70% होती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह किस्म फंगस रोगों से जल्दी प्रभावित होती है EC-41911: यह किस्म रूसी जर्मप्लाज्म से ली गई है यह किस्म पानी की रोधक और आकार में सीधी होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70%पायी जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 72 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है इस किस्म से तैयार तेल का प्रयोग विभिन्न व्यंजनों में स्वाद के लिए किया जाता है Gomti: यह किस्म रंग में हल्के लाल रंग की होती है इसकी पैदावार बाकी किस्मों की पैदावार से कम होती है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Kosi: यह किस्म 90 दिनों में पक जाती है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों के धब्बे रोग की प्रतिरोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 75-80 प्रतिशत होती है और तेल की पैदावार 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ होती है Saksham: यह किस्म सी वी हिमालय की तरफ से टिशू कल्चर द्वारा तैयार की गई है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80% होती है और तेल की पैदावार 90-100 किलोग्राम प्राप्त होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है, धन्यवाद
West Bengal
The cultivation of menthe is done by the farmers of district Badaun, Rampur, Moradabad, Bareilly, Pilibhit, Barabanki, Faizabad, Ambedkar nagar, Lucknow etc. at large scale. In last few years, Mentha has become the main crop of Jayad in this district. The oil of menthe is used for fragrance and manufacturing of medicine. Land and Preparation of Land For cultivation of mentha, soil having sufficient biological content, good water drainage, pH ranging between 6.0-7.5, sandy loam and alluvial loam soil is suitable. Plough well and level the land. After planting of mentha, give light irrigation so that it is planted well. Recommended Variety Mentha spykata M.S.S-1(indigenous pudina) Kosa(best for timely and late sowing)(Japanese pudina) Himalaya Gomti(M.A.H-9) M.S.S-1 H.Y-77 Mentha prepata kukrail Time of sowing of roots in the nursery Suitable time for timely sowing of mentha is 15th January to 15th February. In case of late sowing, oil content is reduced and results in low yield. For late sowing, prepare the plants in nursery and plant it between March to first week of April in the field. For late cultivation, select kosi variety of mentha. Treatment of Suckers / Sowing Method Suitable time for timely sowing of mentha is 15th January to 15th February. In case of late sowing, oil content is reduced and results in low yield. For late sowing, prepare the plants in nursery and plant it between March to first week of April in the field. For late cultivation, select kosi variety of mentha. Treatment of Suckers Before transplantation the ground level should be prepared after making 2 grams of carbendazim water per solution and after dipping for 5 minutes Sowing Method Keep the distance between row to row 30-40 cm in planting of Japanese mentha, 45-60 cm in deshi pudina and plant to plant 15 cm in Japanese pudina. The root should be sown 15 cm deep in ridges. Irrigate lightly immediately after sowing. For sowing/planting, 4-5 quintal roots of 8-10 cm piece are sufficient. Quantity of Fertilizers Generally, use of fertilizers on the basis of soil analysis report is beneficial. In normal condition, 120-150 kg nitrogen, 50-60 kg phosphorous, 40 kg potash and 20 kg per hectare sulphur should be used for good yield of mentha. Total quantity of phosphorous, potash and sulphur and 30-35 kg nitrogen should be used in ridges before sowing. Remaining quantity of nitrogen is to be used at 45 days, 70-80 days and 20 days after first harvesting. Irrigation and Weed Control Irrigation of mentha depends on type of soil, temperature and intensity of wind. Do first irrigation immediately after sowing/planting. Continue irrigation at an interval of 20-25 days. Irrigation is essential after every harvesting. For chemical weed control, spray at the earliest, 3.3 liter pendi methylene 30 EC dissolved in 700-800 liter water after sowing/planting. Crop Protection Insect Termite Termite harms the root as result germination is adversely affected. Afterwards, the plants die. In case of insect menace in standing crop, use 2.5 liter per hectare chlorpyrifos with irrigation water. Caterpillar This insect is found on the lower surface of the leaf and eats it due to which oil content is reduced. Spray 500 liter diclorvas or 750 ml fenvalrate per hectare dissolved in 600-700 liter water to protect the crop from this insect. Collect the eggs laid in clusters and caterpillars Leaf folder Insect This larva of this insect folds the leaves and eats them. To prevent it, spray monocrotofos 36 EC, 1.0 liter per hectare dissolved in 600-700 liter water. Leaf folder Insect This larva of this insect folds the leaves and eats them. To prevent it, spray monocrotofos 36 EC, 1.0 liter per hectare dissolved in 600-700 liter water. Disease Root Rot The infested root turns black and pink colored spot is seen on the roots. Treat the suckers with 0.1% carbendazim before sowing/planting. In addition to this, disease free suckers. Leaf Blight In the infested crop, dark brown colored spot is seen on the leaves. The leaves turn yellow and start shedding. To control this disease, spray 2 kg fungicide mancojeb 75% dissolved in 600-800 liter water. Harvesting The crop of mentha is often harvested twice. Flowering starts after 100-120 days of first harvesting. The plants should be cut t -5 cm height from the ground surface. Second harvesting should be done after 70-80 days of first harvesting. After harvesting, leave the plants in sun shine for 2-3 hours and extract the oil by distillation method at the earliest after drying it lightly in the shade. Yield Approximately 250-300 quintal vegetation and 125-150 kg oil per hectare is obtained in two harvesting.
ਬਾਸਮਤੀ 1121ਨੂੰ ਸੋਧ ਕੇ ਜੋ ਬੀਜ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਹੈ ਉਸ ਦਾ ਨਾਮ ਅਤੇ ਰੇਟ ਕੀ ਹੈ ਅਸਲੀ ਬੀਜ ਦੀ ਕੀ ਪਹਿਚਾਣ ਹੈ ਕਿਥੋਂ ਮਿਲੁ ?
(en)
Punjab
1121 ਨੂੰ ਸੋਧ ਕੇ 1718 ਕਿਸਮ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਬਾਸਮਤੀ 1718, 136-138 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਝਾੜ 18-20 qtl/acre ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਜੂਨ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਲਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਮੁਖ ਖੇਤ ਵਿਚ ਜੁਲਾਈ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਲੱਗਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਬੀਜ ਤੁਸੀ Punjab seed store, girderbaha 01637 230382, 01637 230982 ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ
ਆਪਣੇ ਖੇਤ 3 ਬੂਟੇ ਅਮਰੁਦਾ ਦੇ ਹਨ ਹਰ ਵਾਰ ਕਾਣੇ ਜਣੀ ਸੁੰਡ ਪੈ ਜਾਦੇ ਹਨ ਏਹੋ ਹਾਲ 2 ਜਾਮਣ ਦੇ ਬੂਟਿਆ ਦਾ ਹੈ ਕੋਈ ਸੁਝਾਅ ਦੱਸੋ ?
(pb)
Punjab
ਫਲ ਦੀ ਮੱਖੀ: ਇਹ ਅਮਰੂਦ ਦੇ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਲੱਗਣ ਵਾਲਾ ਖਤਰਨਾਕ ਕੀੜਾ ਹੈ ਮਾਦਾ ਮੱਖੀ ਨਵੇਂ ਲੱਗਣ ਵਾਲੇ ਫਲਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰਲੇ ਪਾਸੇ ਅੰਡੇ ਦੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਇਹ ਕੀੜੇ ਇਸ ਦਾ ਗੁੱਦਾ ਖਾਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਫ਼ਲ ਗਲ ਕੇ ਡਿੱਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਫ਼ਲ ਉਤੇ ਮੱਖੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਰਿਹਾ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਬਰਸਾਤੀ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਬੂਟਿਆਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਤੁੜਾਈ ਵਿਚ ਦੇਰੀ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਪੀੜਤ ਟਾਹਣੀਆਂ ਅਤੇ ਫ਼ਲਾਂ ਨੂੰ ਤੋੜ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿਚੋਂ ਬਾਹਰ ਸੁੱਟ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਫ਼ਲਾਂ ਦੇ ਪੱਕਣ ਵੇਲੇ 80 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਫੈਨਵਾਲਰੇਟ ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਕੇ ਹਫ਼ਤੇ ਦੇ ਵਕਫ਼ੇ ਬਾਅਦ ਬੂਟਿਆਂ ਉਤੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਫੈਨਵਾਲਰੇਟ ਦੇ ਛਿੜਕਾਅ ਤੋਂ ਤੀਸਰੇ ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਫ਼ਲਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ ਕਰ ਲੈਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ
ਸਤਿ ਸ੍ਰੀ ਆਕਾਲ ਜੀ, ਨਰਮੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਨਰਮਾ ਖਿੜਣ ਤੱਕ ਸਾਰੀ ਰੇਹ ਸਪਰੇਅ ਤੇ ਸਿੰਜਾਈ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਵਿਸਥਾਰ ਵਿੱਚ ਦਿਉ ਜੀ ?
(pb)
Punjab
Cotton fertilizer: Narme de vich SSP@75kg ja DAP@27 kg prati acre de hisab nal paa skde ho. ihna de vicho kise v ikk di varto kr skde ho. ihna di varto krn nal jo narme de vich patte jamni rang de hunde hnn ohh nahi hunde..ihna di varto tuc shuru de vich v kr skde ho ja fir baad de vich narma uggran te v kr skde ho. Jo potash di varto krni hundi hai ohh mitti de vich iss di ghaat de anusaar kro. jekar iss di ghaat hai tan 20kg prati acre de hisaab nal paa skde ho. sulphur di iss de vich lod nahi hundi hai. iss di varto krn ton parhej kro.Narme vich 110 kg urea paindi hai jiss vicho 25 kg beejayi de time pa skde ho and baki rehndi 3-4 dose vich paounde rho g...
1718 basmati bare dso ?
(pb)
Haryana
ਬਾਸਮਤੀ 1718, 136-138 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਝਾੜ 18-20 qtl/acre ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਜੂਨ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਲਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਮੁਖ ਖੇਤ ਵਿਚ ਜੁਲਾਈ ਮਹੀਨੇ ਵਿਚ ਲੱਗਦੀ ਹੈ
main organic 1121 lgani hai , isnu main sahi rate te kithe vech skda haan ?
(pb)
harwinder g organic 1121 vechan de lyi tuhanu apne nede de kvk de nal sampark kr skte ho ohh tuhanu agge market ds denge ki tuhanu iss da shi rate kithe milega.
paneeri bar sem wale khet me bijni chahiye ya wheat wale khet me Per acre kit ne kg bijni chahiye ?
(en)
Punjab
Paneeri kisi v khet mein beej skte ho g bt paneeri ki beejayi se pehle khet ko leveller se level krke 2-3 vaah ke tyar kro or nadeen bahr nikal dene chaiye. Paddy ki paneeri ke liye 8 kg seed per acre ke liye chaiye.
mere pass 2 acre Jameen hai is me main konsi kheti kar Sakta hoon jisse mujhe 10-12 lace amandi ho sake. Moradabad Uttar Pradesh se hoon ?
(hn)
kirpa kr ke yeh btaayein ki khet ki mitti kaisi hai aur khet mein pani ki suwidha kaisi hai. pani ek number hai ja 2 number hai.
150 ਬੀਜ 151 ja ਜੀਰੀ ਕਿਸਮ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ਝੋਨਾ ?
(pb)
Punjab
Kamal g beej da poora nam dso tan jo tuhanu iss di jankari ditti ja ske. Eh kisma PAU de walon sifarish kisma nahi han.
sir g ਘਾਹ nu khatam karan wali davai kehdi aa ?
(pb)
Punjab
Jaskarn g ghaa kehdi fasal de vich hai kirpa kr ke ihh dso. Eh khali khet de vich hai ja kise fasal de nal uggya hai.
Punjab
khali jagga te Wattan ote
sir jantar 60 rs kilo mileya khet da 8 kg penda as a hari khaad koi fayda hai ?
(pb)
Punjab
ਹਰੀ ਖਾਦ ਦਾ ਮਤਲਬ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਖੇਤ ਦੇ ਵਿਚ ਹਰੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਨੂੰ ਵਾਹ ਦੇਣਾ ਇਸ ਦੇ ਵਿਚ ਜੰਤਰ ਮੂੰਗੀ ਗਵਾਰਾ ਸਣ ਵਰਗੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹਨਾਂ ਫਸਲਾਂ ਨੂੰ ਪੱਕਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਖੇਤ ਦੇ ਵਿਚ ਵਾਹ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ Iਇਹਨਾਂ ਦੇ ਵਿਚ NITROGEN ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਦੋ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਖੇਤ ਦੇ ਵਿਚ ਵਾਹਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਇਸ ਨਾਲ ਖੇਤ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਵੱਧ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਜੋ ਫ਼ਸਲ ਉਗਾਉਂਦੇ ਹੋ ਉਸ ਦਾ ਝਾੜ ਵਧੀਆ ਮਿਲਦਾ ਹੈ I ਕਣਕ ਦੀ ਵਾਢੀ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਅਤੇ ਸਾਉਣੀ ਰੁੱਤ ਦੀ ਫਸਲ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਕਾਫੀ ਸਮੇਂ ਲਈ ਖਾਲੀ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਹਰੀ ਖਾਦ ਦੀ ਫਸਲ ਬੀਜ ਕੇ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿਚ ਜੈਵਿਕ ਮਾਦਾ ਵਧਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਹਰੀ ਖਾਦ ਨਾਲ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਜੈਵਿਕ ਮਾਦਾ ਮਿਲਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਹੋਰ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਵੀ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਹਰੀ ਖਾਦ ਆਪਣੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ ਵਿਚਲੀਆਂ ਗੰਢਾਂ ਵਿਚਲੇ ਬੈਕਟੀਰੀਆ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਹਵਾ ਵਿਚੋਂ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਲੈ ਕੇ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿਚ ਜਮ੍ਹਾਂ ਕਰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਸੀਂ ਹਰੀ ਖਾਦ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿਚ ਸਣ, ਢੈਂਚਾ ਅਤੇ ਰਵਾਂਹ ਫਸਲਾਂ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹਾਂ 40-45 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਣ ਤਕਰੀਬਨ 6-8 ਟਨ ਹਰਾ ਮਾਦਾ\ੲੇਕੜ ਪੈਦਾ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿਚ ਤਕਰੀਬਨ 1.2-1.6 ਟਨ ਸੁੱਕਾ ਮਾਦਾ\ੲੇਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਹਰੀ ਖਾਦ ਨਾਲ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ, ਫਾਸਫੋਰਸ, ਪੋਟਾਸ਼ ਅਤੇ ਲਘੂ ਤੱਤ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਲੋਹਾ, ਮੈਂਗਨੀਜ਼, ਜ਼ਿੰਕ ਅਤੇ ਤਾਂਬਾ ਆਦਿ ਪਾੲੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ • ਹਰੀ ਖਾਦ ਦੀ ਫਸਲ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿਚ ਵਾਹੁਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਗਲਣ ਪਿੱਛੋਂ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿਚ ਮੱਲੜ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ • ਹਰੀ ਖਾਦ ਨਾਲ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਵਿਚ ਚੋਖਾ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਜ਼ਮੀਨ ਦੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ, ਫਾਸਫੋਰਸ, ਪੋਟਾਸ਼ ਅਤੇ ਹੋਰ ਖੁਰਾਕੀ ਤੱਤਾਂ ਵਿਚ ਵਾਧਾ ਕਰਦੀ ਹੈ
Sir ਚੋਕਰ (ਦਾਣਾ) ਕੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ g ਤੇ ਏਹ ਕਿਸ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ?
(pb)
Punjab
ਚੋਕਰ ਜਿਵੇਂ ਚਨੇ ਦੀ ਚੋਕਰ, ਚਾਵਲ ਦੀ ਚੋਕਰ ਕੋਈ ਵੀ ਵਰਤ ਸਕਦੇ ਹੋ ਵੈਸੇ ਤਾਂ ਚਾਵਲ ਦਾ ਜੋ ਛਿਲਕਾ ਬੱਚਦਾ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਚੋਕਰ ਬੋਲਦੇ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ..
Punjab
ਸਰ ਜੀ is Bichਕੇਡੀ ਚੀਜ ਜਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਕੀ ਇਹ ਕਣਕ ਨਾਲੋਂ ਜਿਆਦਾ ਲਬਦਾਇਕ ਹੁੰਦੀ ਹੈ
मेरे पौधे के पतियों को कीड़े खा जाते है क्या उपाय करूँ ?
(en)
Punjab
Charn ji please kripya aap keet ki photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Uttar Pradesh
Keet najar nahi aata
sir 2 knal wich African tall Makka kine kg pauna chahida ?
(pb)
Punjab
Bikramjit ji tuc 7.5 killo beej 2 knal de hisab nal beej sakde ho.dhanwad
Punjab
Dhanwad ji
ਸੂਰਜਮੁਖੀ ਨੂੰ ਫੁੱਲ ਨਿਕਲਣ ਵਾਲੀ ਸਟੇਜ ਤੇ ਸਲਫ਼ਰ ਦੀ ਸਪਰੇ ਹੋ ਸਕਦੀ ਆ ਜਾ ਨਹੀਂ ਜੀ ਤੇ ਸਲਫ਼ਰ ਕੋਈ ਵੀ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਕੋਈ ਅਲੱਗ ਫੋਮ ਚ ਆਉਂਦਾ ?
(pb)
Maharashtra
Dalvir singh g uss sme npk di spray kro, npk 191919@1kg di prati acre de hisaab nal tuc spray kro. Eh us sme wdia kam krdi hai.
ਸ਼ਰ ਢਿਝੰਣ ਦਾ ਬੀਜ ਪਰ ਏਕੜ ਕਿੰਨਾ ਪਾਈਏ ਜੀ ?
(pb)
Punjab
ਹਰੀ ਖਾਦ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਜੰਤਰ(ਢੈਂਚਾ) ਦਾ ਬੀਜ 8-10 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪੈਦਾ ਹੈ ਜੀ
ਸ਼ਿਰ 121 ਝੋਨਾਂ ਨੂੰ ਕਿਨੇ ਦਿਨੀਂ ਖਾਦ ਪਾ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਨਾਲ ਹੋਰ ਕੀ ਪਾਈਏ ਜੀ
sir aah chari vdh ni rahi khad v payi hai kida vdhugi dsso ?
(hn)
Punjab
baldev ji chari di growth de layi tuc hoshi@400ml nu 150 litre pani vich mila keprati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
कुत्ते के शरीर मे अकडन है खाना कम खाता हैं और अकड़कर चलता है सुस्त रहता है ?
(hn)
इसके लिए आप उसके खून की जांच करवायें जिससे उसकी बिमारी का सही कारण पता लग सके आप नज़दीकी डॉक्टर से संपर्क करें
sir jantar (dhinjan) kine time baad khet vich bahan jog ho janda ?
(pb)
Maharashtra
ਹਰੀ ਖਾਦ ਲਈ ਬੀਜ਼ੀ ਫਸਲ ਨੂੰ 40-60 ਦਿਨ ਦੀ ਹੋਣ ਤੇ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਦੱਬ ਦਿਉ
Aloevera ki kheti kaise Kare or Isko kahaa sell kare ?
(hn)
Maharashtra
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है
sir g moti ki kheti ke bare me Puri jankari de ?
(hn)
सूंदर जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप अचल सिंह 9711858258 से संपर्क करे
soyabean ki fasal ?
(hn)
Punjab
सोयाबीन की किसम जैसे Mescavi :- यह किस्म सी सी एस, हिसार की तरफ से तैयार की गई है और यह उपजाऊ क्षेत्रों में उगाई जाती है Wardan :- यह किस्म आई जी एफ आर आई, झांसी की तरफ से तैयार की गई है और यह उपजाऊ क्षेत्रों में उगाई जाती है BL 22 :- यह किस्म पी ए यू, लुधियाणा की तरफ से बनाई गई है और यह शुष्क और पहाड़ी क्षेत्रों में उगाई जाती है HFB 600 :- यह किसम सी सी एस, हिसार की तरफ से तैयार की गई है और यह उपजाऊ क्षेत्रों में उगाई जाती है BL 180 :- यह किस्म पी ए यू, लुधियाणा की तरफ से बनाई गई है और यह उपजाऊ क्षेत्रों में उगाई जाती है बीज नदीन रहित होने चाहिए बीजने से पहले बीजों को पानी में भिगो देना चाहिए और जो बीज पानी के ऊपर तैरने लग जाये उन्हें निकाल दें बीज की मात्रा 8-10 किलो प्रति एकड़ होनी चाहिए अच्छी गुणवत्ता के चारे के लिए बरसीम के बीजों के साथ सरसों के 750 ग्राम बीज में मिलायें
ਸਰ ਜੀ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜਣ ਤੋ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਕਿੰਨੀ ਦੇਰ ਖੜਾ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ?
(pb)
Punjab
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਪਨੀਰੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਲਗਾਤਾਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਕੇ ਕਿਆਰੀਆਂ ਨੂੰ ਗਿਲਾ ਰਖੋ ਜੀ
kapas me achi paidavar ke liye kya Kare ?
(hn)
Punjab
नरमे में कुल 130 किलो यूरिया डाली जाती है इसके इलावा इसमें DAP@27 किलो , या SSP@ 75 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से डाल सकते है I डीएपी और एसएसपी में से किसी भी एक का प्रयोग कर सकते है I यूरिया को 3 बराबर हिस्सो में बांट कर डालना है I पहली यूरिया पहले पानी के साथ 50 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से डाल सकते है उस समय आप जिंक भी साथ मिलाकर छिड़काव कर सकते है यदि डीएपी का प्रयोग बिजाई के समय या बिजाई से पहले खेत तैयार समय नहीं करते है तो जब पानी के बाद NARMA 1 —1.5 फीट का हो जाए तो उस समय ड्रिल मशीन के साथ नरमे के सियाडो में डाल सकते है I
Ananas ki kheti kis Prakar Kare Uske bare mein kuch batayega kaunsa breed Lagaye kya lagaya hai ?
(hn)
Maharashtra
अनानास को फलों की रानी कहा जाता है इसे भारी चिकनी मिट्टी को छोड़कर सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है लेकिन यह रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है 45-60 सैं.मी. की गहराई वाली मिट्टी की परत के नीचे पत्थर वाली ज़मीन पर इसकी खेती ना करें मिट्टी की पी एच 5-6 होनी चाहिए जब इसे भारी मिट्टी में उगाया जाता है तब फल का आकार बड़ा होता है लेकिन हल्की मिट्टी में उगाने पर फल का स्वाद उत्तम होता है प्रसिद्ध किस्में :- Kew,Giant Kew,Queen,Mauritious,Jaldhup and Lakhat,Lakhat खेत की जोताई करके खेत को समतल करें ज़मीन की प्रकृति के आधार पर आवश्यक लंबाई के साथ 90 सैं.मी. चौड़ी और 15-30 सैं.मी. गहरी खालियां तैयार करें अनानास की खेती के लिए उपयुक्त समय खरीफ का मौसम या मॉनसून के शुरू होने पर है अनानास की रोपाई का समय स्थान के अनुसार विभिन्न होता है फूल निकलने से 12-15 महीने पहले रोपाई की जानी चाहिए जो कि विभिन्न क्षेत्रों में दिसंबर से मार्च तक विभिन्न होता है उपउष्णकटिबंधीय और अर्द्ध शुष्क क्षेत्रों में पौधे से पौधे में 22.5 सैं.मी.x कतार से कतार में 60 सैं.मी. x खालियों से खालियों में 75 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें जबकि गर्म और नमी वाले हालातों मं 25x60x90 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बारानी और पहाड़ी क्षेत्रों में रोपाई के लिए कम फासले का प्रयोग करें पौधे की महीन जड़ को 10-15 सैं.मी. गहरे खड्ढे में बोयें मुख्य खेत में पौधे की महीन जड़ की रोपाई की जाती हैं भूमि और बारिश के पैटर्न के अनुसार रोपाई के विभिन्न ढंगों जैसे समतल बैड, खालियों, कोंटूर और मुख्य खेत में जड़ की रोपाई के लिए गड्ढों का प्रयोग आदि प्रयोग किए जाते हैं ढलानों में मिट्टी के अपरदन की जांच के लिए कोंटूर ढंग रोपाई के लिए प्रयोग किए जाते हैं जब 22.5x60x75 सैं.मी. फासले का प्रयोग किया जाता है तो लगभग 25360 पौधे प्रति एकड़ में लगाए जाते हैं जबकि 21320 पौधों के लिए 22.5x60x90 सैं.मी. के फासले का प्रयोग किया जाता है बारानी और पहाड़ी क्षेत्रों में कम घनता के साथ 17400 पौधे प्रति एकड़ में लगाए जाते हैं रोपाई से पहले जड़ के भाग को डाइथोन एम 45 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में डुबोयें यह पौधे में कली के गलने को रोकेगा या मैनकोजेब3 ग्राम या कार्बेनडाज़िम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में जड़ के भाग को डुबोयें नदीनों की प्रभावी जांच के लिए मलचिंग उत्तम तरीका है विभिन्न रिसर्चों के मुताबिक काली पॉलीथीन + लकड़ी का बुरादा, सफेद पॉलीथीन और धान की पराली से ज्यादा पौधे की अच्छी वृद्धि करता है नदीनों की रासायनिक रोकथाम के लिए ड्यूरॉन 1.2 किलो या ब्रोमासिल+ ड्यूरॉन 0.8 किलो का मिश्रण नदीनों के अंकुरण से पहले नदीन नाशक के तौर पर डालें नदीननाशक की दूसरी मात्रा पहली मात्रा के पांच महीने बाद डालें दूसरी मात्रा डालने के समय नदीननाशक की मात्रा कम कर दें नाइट्रोजन और पोटाश 12 ग्राम को प्रति पौधे में डालें यदि आवश्यकता हो तो फासफोरस 4 ग्राम प्रति पौधे में डालें नाइट्रोजन को 6 भागों में बांटकर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा रोपाई के दो महीने बाद डालें उसके बाद नाइट्रोजन को दो महीने के अंतराल पर डालें फासफोरस की पूरी मात्रा और पोटाश की आधी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची पोटाश को रोपाई के 6 महीने बाद डालें बारानी हालातों में मिट्टी में पर्याप्त नमी मौजूद होने पर खादों की मात्रा डालें यदि अनानास में फूल सही समय पर ना निकलें तो NAA@ 100-200 पी पी एम को पौधे के मध्य में अच्छे और एकसमान फूलों के लिए डालें अच्छे फूल निकलने के लिए इथ्रेल @25ppm के साथ यूरिया 20 ग्राम और सोडियम कार्बोनेट 0.4 ग्राम को प्रति पौधे में डालें इस मिश्रण को पौधे पर 35-40 पत्तियां निकलने पर और साफ धूप के दिनों में डालें बारानी फसल होने के कारण अनानास को आमतौर पर सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती यदि जरूरत पड़े तो सूखे मौसम में 4-6 सिंचाई 20-25 दिनों के अंतराल पर करें अनानास के पौधों में फूल निकलने के लिए रोपाई के बाद 10-12 महीने लगते हैं फूल निकलने के बाद फल रोपाई के बाद 15-18 महीनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं डिब्बों में पैक करने के लिए फलों को आधार पर से हल्का सा रंग बदलने पर तुड़ाई करें जबकि टेबल पर रखने के लिए फलों के सुनहरे पीले रंग में विकसित होने पर तुड़ाई करें तुड़ाई के बाद फलों को क्रेट्स में रखें और छांव में छोड़ दें तुड़ाई के बाद फसल को तीन से चार वर्ष तक मोढ़ी फसल के तौर पर लिया जा सकता है फलों को 10-13 डिगरी सेल्सियस पर 20 दिनों के लिए स्टोर किया जा सकता है अनानास को 8 डिगरी सेल्सियस के नीचे कभी स्टोर ना करें इससे परिणामस्वरूप गुद्दा भूरे रंग का हो जाता है धन्यवाद
ਸਰ 65 ਝੋਨੇ ਦੇ ਝਾੜ ਦਸੋ ਏਕੜ ਚੋ ਜੀ ਜਲਦੀ ?
(en)
Maharashtra
ਸੁਖਦੀਪ ਜੀ 65 ਝੋਨਾ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਲੋਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਇਸਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਡੀਲਰ ਕੋਲੋਂ ਹੀ ਮਿਲੇਗੀ ਜਿਸ ਕੋਲੋਂ ਤੁਸੀ ਇਹ ਬੀਜ ਲਿਆ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
बटेर पालन करने के लिए पूरी जानकारी दें ?
(hn)
Punjab
बटेर पालन एक लाभदायक व्यवसाय है कई स्थानों, विशेष कर बड़े शहरों के नज़दीक कई किसानों ने बटेर पालन का व्यवसाय शुरू किया है यह मुर्गी पालन से मिलता जुलता काम ही है बटेर पालन से जुड़ी कुछ आम जानकारी आपसे शेयर कर रहे हैं 1.यह बहुत छोटा पक्षी होने के कारण इस काम को शुरू करने के लिए कम जगह की जरूरत होती है उदाहरण के तौर पर 5-6 पक्षियों के लिए 1 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता होती है 2.खुराक की खप्त भी कम होती है, सिर्फ 20-25 ग्राम प्रति पक्षी रोज़ाना 3.बटेर के अंडे और मांस में अमीनो अम्ल, विटामिन, चर्बी और धातु आदि पदार्थ उपलब्ध रहते हैं 4.बटेर पालन में, 5 सप्ताह का पक्षी मीट के लिए तैयार हो जाता है और 6-7 सप्ताह में अंडे देना शुरू कर देता है 5.मुर्गियों की बजाय बटेरों में छूत की बीमारियां कम होती हैं बीमारियों की रोकथाम के लिए मुर्गी पालन की तरह इनमें किसी प्रकार का टीका लगाने की जरूरत नहीं है 6.बटेर हर वर्ष तीन से चार पीढ़ियों को जन्म दे सकने की क्षमता रखती है 7.इसका मीट मुर्गे से काफी अधिक स्वाद और पोष्टिक होता है हेचरी में 35 से 40 दिनों में बटेरें खाने योग्य हो जाती हैं एक अंडा पांच रूपये में बिकता है जापानी बटेर और इसे पालने की सिखलाई चंडीगढ़ के केंद्रीय मुर्गी पालन संस्था (Central Poultry Development Organization (Northern Region) की तरफ से करवायी जाती है अन्य जानकारी के लिए वैबसाइट http://cpdonrchd.gov.in पर जाकर इसकी सिखलाई और ट्रेनिंग के बारे में पता कर सकते हैं
7903647427
Sir BR105 paddy kive a ji jankari deo ?
(en)
Iss kisam da nam BR 105 hai. ihh private kisam hai. iss kisam da jhad 30 qtl prati acre hai ate ihh kisam 145-150 dina de vich pakk jandi hai. ihh 2 number paani de vich v ugaayi ja skdi hai. iss da beej 120 rs. kilo brar seeds jo ki PAU ludhiana de gate number 1 de agge hai otho lai skde ho.
मेरी भैंस 6 महीने की गाभिन्न है और अचानक उसके एक थन से दूध जो निकलना बंद हो गया निकलता भी है 2या ४ छाछ गाढ़ा कृपया इलाज बता दें ?
(hn)
Punjab
आप उसके थन की जांच नज़दीकी डॉक्टर से करवायें क्योंकि थन की जांच करके उसके बंद होने का कारण पता लग सकता है और उसका सही इलाज हो सकता है
sir ji 2 kanal Chari aw ji us vich sundi lai konsi dawai pauni chahidi hai ji te kini doze please dso ji ?
(en)
Punjab
gurdhyan ji sundi di roktham de layi tuc quinalphos@200ml nu 100 litre pani vich mila ke s[ray karo.dhanwad
sir ji answer dso ji please ?
(en)
Punjab
ਹਾਂਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਦੁਆਰਾ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਜੀ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਅੱਗੇ ਤੋਂ 24 ਘੰਟਿਆਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਤੁਹਾਡੇ ਸਵਾਲ ਦਾ ਜਵਾਬ ਤੁਹਾਨੂੰ ਨਹੀ ਮਿਲਦਾ ਤਾ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਪਾਲਾਈਨ ਨੰਬਰ 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ
Sir g aa ki problem h ?
(en)
Punjab
gurpreet ji eh fungus de karn hunde han isde layi saaf@400 gm nu 150 litre pani vich mila ke prtai acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Uttar Pradesh
jarh vich lal kira aa
Moti ki keti kese kare ?
(hn)
दिव्येश पटेल जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप अचल सिंह 9711858258 से संपर्क करे
Rajasthan
ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र अब बन गया है भारत का पहला निशुल्कः मोती प्रशिक्षण केंद्र जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नम्बर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए # जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) # जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर ) 9711858258 सवाईमाधोपुर, ग्राम(लहसोड़ा ), राजस्थान
Kapas me achi padavar ke liye kya Kare ?
(en)
Punjab
खादें और सिंचाई के साधनों के सही उपयोग और साफ सुथरी खेती से कीड़ों को पैदा होने से पहले ही रोका जा सकता है कीड़ों के कुदरती दुश्मनों की भी रक्षा की जा सकती है पौधे के उचित विकास और ज्यादा टिंडे वाली टहनियों की प्रफुल्लता के लिए, मुख्य टहनी के बढ़ रहे हिस्से को लगभग 5 फुट की ऊंचाई से काट दें आखिरी बार हल से जोतते समय बारानी क्षेत्रों में 5-10 टन रूड़ी और सिंचित क्षेत्रों में 10-20 टन रूड़ी का प्रति एकड़ के हिसाब से डालें यह मिट्टी की नमी को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी कपास की विभिन्न-विभिन्न किस्मों के लिए खादों की मात्रा, 65 किलो यूरिया और 27 किलो डी.ए.पी. या 75 किलो सिंगल सुपर फासफेट प्रति एकड़ के हिसाब से डालें हाइब्रिड किसमों के लिए, 130 किलो यूरिया और 27 किलो डी.ए.पी. या 75 किलो सिंगल सुपर फासफेट प्रति एकड़ के हिसाब से डालें यदि 27 किलो डी.ए.पी. के स्थान पर सिंगल सुपर फासफेट का उपयोग किया जाता है तो यूरिया की मात्रा 10 किलो कम कर दें आखिरी बार हल से जोतते समय फासफोरस की पूरी मात्रा खेत में डालें पौधे के अनआवश्यक हिस्से काटते समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और बाकी बची नाइट्रोजन पहले फूल निकलने के समय डालें कम उपजाऊ मिट्टी के लिए नाइट्रोजन की आधी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए 50 किलो यूरिया 8 किलो सल्फर पाउडर से मिलाकर खड़ी फसल की पंक्तियों में डालें
ਮੁੱਛਲ ਝੋਨਾ 1401 ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਓ ਜੀ ?
(pb)
Punjab
ਪੂਸਾ 1401 ਨੂੰ ਪੂਸਾ ਬਾਸਮਤੀ -6 ਨਾਮ ਨਾਲ ਵੀ ਜਾਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੂਸਾ 1401 ਦਰਮਿਆਨੀ ਕੱਦ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਪੱਕਣ ਲਈ ਲਗਭਗ 150 -155 ਦਿਨਾਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ ਲਗਭਗ 17-18q/acre ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਚੰਗੀ ਮਿੱਟੀ ਵਾਲੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਲਗਾਓ
soyabean ka accha beej dungarpur rajsthan ke liye ?
(hn)
Punjab
JS 93-05: यह किस्म तना गलन, फली और कली के झुलस रोग की प्रतिरोधक किस्म है इसके बीज हरे पीले रंग के होते हैं JS 95-60: यह किस्म 82-88 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है यह तना गलन और विभन्न प्रकार के कीटों की प्रतिरोधक किस्म है JS 335: यह जल्दी पकने वाली किस्म है जो कि बैक्टीरियल झुलस रोग के प्रतिरोधी और तने की मक्खी, कली के झुलस रोग के प्रतिरोधी किस्म है इसकी औसतन पैदावार 10-12 क्विंटल प्रति एकड़ होती है
sir jwab ni milya mere swala da ?
(pb)
Punjab
ਹਾਂਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਦੁਆਰਾ ਪੁੱਛੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਦਿੱਤਾ ਜਾ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ ਜੀ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਅੱਗੇ ਤੋਂ 24 ਘੰਟਿਆਂ ਦੇ ਵਿੱਚ ਤੁਹਾਡੇ ਸਵਾਲ ਦਾ ਜਵਾਬ ਤੁਹਾਨੂੰ ਨਹੀ ਮਿਲਦਾ ਤਾ ਤੁਸੀ ਸਾਡੇ ਹੈਲਪਪਾਲਾਈਨ ਨੰਬਰ 97799-77641 ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ
ਪਿਪਰਾਮੈਂਟ ਦੇ ਪੱਤੇ ਕਿਨਾਰੇ ਤੋਂ ਸੁੱਕ ਰਹੇ ਹਨ ਜੀ ਕੋਈ ਇਲਾਜ ਦੱਸੋ ?
(en)
Maharashtra
ਜਾਦਿਸ਼ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਇਸਨੂੰ ਕਿਹੜੀ ਖਾਦ ਪਾਈ ਹੈ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
ਕਾਲੇ ਝੋਨੇ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇ ਇਸਦੀ ਬਜਾਈ ਕਦੋਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਕਿੰਨੀ ਕੁ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੈ ?
(pb)
Punjab
ਕਾਲੇ ਝੋਨੇ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ Natish Gupta 9897663885 ਜੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
kutii apni hi skin nu es tra katdi rahndi jowe koi kharish vgera hori hove esda koi hlll dso ?
(pb)
iss nu tuci ipraz di goli deo ate hafte vich 1 goli deni hai ate 3 hafte deo , isde nal iss nu Hyteck injection 1ml/33kg bharr de hisab nal chamdi vich lgwao , bakki iss nu Cleaner pet-M shampuu nal nhaaoo, nhann ton 5 mint pehla shampu di changi trah jgahh krke lgga ke rakho fir nhaoo..
ਸਤਿ ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ ਜੀ ਸਾਰੇ ਵੀਰਾਂ ਨੂੰ PR -113 ਕਿੱਦਾ ਦੀ ਕਿਸਮ ਆ। ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਕਿੰਨਾ ਕੁ ਝਾੜ ਦਿੰਦੀ ਹੈ। ਮੰਡੀਕਰਨ ਕਿਸ ਤਰਾਂ ਦਾ ਹੈ ਇਸਦਾ ?
(en)
Haryana
PR 113: ਇਹ ਇੱਕ ਛੋਟੇ ਕੱਦ ਦੀ, ਸਿੱਧੀ ਮੁੰਜਰ (ਸਿੱਟਿਆਂ) ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਪੱਤੇ ਬਿਲਕੁਲ ਸਿੱਧੇ ਅਤੇ ਗੂੜ੍ਹੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ 142 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਦਾਣੇ ਮੋਟੇ ਅਤੇ ਭਾਰੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਪੀਲੀਏ (ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਪੀਲੇਪਣ) ਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 28 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਇਸਦਾ ਰੇਟ ਸਰਕਾਰ ਵਲੋਂ ਹੀ ਤਹਿ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
ਬਹੁਤ ਬਹੁਤ ਤੁਹਾਡਾ ਧੰਨਵਾਦ ਵੀਰ ਜੀ ।
moti k kheti krna chahta hu.training kaha milegi ?
(hn)
Rajasthan
ग्लिटराटी पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग केंद्र अब बन गया है भारत का पहला निशुल्कः मोती प्रशिक्षण केंद्र जून और जुलाई महीने में 3 दिन का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने के लिए नीचे दिए गए नंबर पर आज ही संपर्क करें और Rs 250/ से अपना रजिस्ट्रेशन करवाए # जून - 22,23,24 (प्रशिक्षण की तारीख ) # जुलाई - 20,21,22 (प्रशिक्षण की तारीख ) अचल सिंह (फाउंडर ) 9711858258 सवाईमाधोपुर, ग्राम(लहसोड़ा ), राजस्थान
ਚਰੀ ਬਿਜਣੀ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਾਂ ਕਿਹੜੀ ਬਿਜੀਏ ਜੋ ਹਰੀ ਅਤੇ ਕੱਦ ਲੰਬੇ ਵਾਲੀ ਹੋਵੇ ?
(pb)
Punjab
ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਚਰੀ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇਂ SL44: ਇਹ ਮਿੱਠੀ, ਰਸੀਲੀ, ਪਤਲੇ ਤਣੇ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਪੂਰੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ ਵਿੱਚ ਸੇਂਜੂ ਹਲਾਤਾਂ ਵਿੱਚ ਠੀਕ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 240 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Sudax: ਇਹ ਜਵਾਰ ਦੀ ਦੋਗਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸਦੇ ਪੌਦੇ ਲੰਬੇ ਅਤੇ ਪੱਤੇ ਮੋਟੇ ਅਤੇ ਚੌੜੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਤਣਾ ਮਿੱਠਾ ਅਤੇ ਰਸੀਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਸਹੀ ਸਮੇਂ ਬੀਜੀ ਫਸਲ 3 ਵਾਰ ਕੱਟੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਲਾਲ ਧੱਬਾ ਰੋਗ ਦੀ ਰੋਧਕ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 480 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Sat shri akaal ji, Paddy di Podh Bejan ton pehla kheri Khaad payea ji khet vich ?
(en)
Punjab
12-15 ਟਨ ਗਲੀ-ਸੜੀ ਰੂੜੀ ਜਾਂ ਕੰਪੋਸਟ ਇੱਕ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਰਲਾਉ ਹੁਣ ਖੇਤ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਦਿਉ, ਤਾਂ ਕਿ ਨਦੀਨ ਉੱਗ ਪੈਣ ਉੱਗੇ ਹੋਏ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਮਾਰਨ ਲਈ ਇੱਕ ਹਫ਼ਤੇ ਬਾਅਦ ਖੇਤ ਨੂੰ ਦੋ ਵਾਰ ਵਾਹੋ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜਣ ਸਮੇਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਭਰੋ ਅਤੇ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕੱਦੂ ਕਰੋ ਕੱਦੂ ਦੀ ਆਖਰੀ ਵਾਹੀ ਸਮੇਂ 26 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਅਤੇ 60 ਕਿਲੋ ਸੁਪਰਫ਼ਾਸਫ਼ੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਖਿਲਾਰ ਦਿਉ ਸਿਹਤਮੰਦ ਪਨੀਰੀ ਲਈ 40 ਕਿਲੋ ਜ਼ਿੰਕ ਸਲਫ਼ੇਟ ਹੈਪਟਾਹਾਈਡ੍ਰੇਟ ਜਾਂ 25.5 ਕਿਲੋ ਜਿੰਕ ਸਲਫ਼ੇਟ ਮੋਨੋਹਾਈਡ੍ਰੇਟ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪਾਉ ਫਿਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ 10 ਅਤੇ 2 ਮੀਟਰ ਆਕਾਰ ਦੇ ਕਿਆਰੇ ਬਣਾਉ, ਜੋ ਕਿ ਲੋੜ ਅਨੁਸਾਰ ਵਧਾਏ-ਘਟਾਏ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਸੋਧੇ ਹੋਏ ਭਿੱਜੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਗਿੱਲੀਆਂ ਬੋਰੀਆਂ ਉਪਰ 7-8 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਮੋਟੀ ਤਹਿ ਵਿੱਚ ਖਲਾਰ ਦਿਉ ਅਤੇ ਉਪਰੋਂ ਗਿੱਲੀਆਂ ਬੋਰੀਆਂ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਉ ਢੱਕੇ ਹੋਏ ਬੀਜ ਉਪਰ ਸਮੇਂ-ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕ ਕੇ ਬੀਜ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਰੱਖੋ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ 24 ਤੋਂ 36 ਘੰਟੇ ਦੇ ਅੰਦਰ ਬੀਜ ਪੁੰਗਰ ਪਵੇਗਾ ਹਰੇਕ ਕਿਆਰੇ (10 ਅਤੇ 2 ਮੀਟਰ) ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਕਿਲੋ ਸੋਧਿਆ ਤੇ ਪੁੰਗਰਿਆ ਬੀਜ ਛੱਟੇ ਨਾਲ ਬੀਜੋ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਬਾਰ-ਬਾਰ ਪਾਣੀ ਲਾ ਕੇ ਗਿੱਲੀ ਰੱਖੋ ਪੰਛੀਆਂ ਤੋਂ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬਚਾਉਣ ਲਈ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਗਲੀ-ਸੜੀ ਰੂੜੀ ਦੀ ਪਤਲੀ ਤਹਿ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜਣ ਤੋਂ ਇੱਕ ਦਮ ਬਾਅਦ ਖਿਲਾਰ ਦਿਉ ਪਨੀਰੀ ਬੀਜਣ ਤੋਂ 15 ਦਿਨ ਬਾਅਦ 26 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੋਰ ਪਾਉ ਪਨੀਰੀ 24-30 ਦਿਨਾਂ ਤੱਕ ਲਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ ਜੇਕਰ 45 ਦਿਨ ਜਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਧ ਉਮਰ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਾਉਣੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ 26 ਕਿਲੋ ਯੂਰੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਚਾਰ ਹਫ਼ਤੇ ਬਾਅਦ ਹੋਰ ਪਾਉ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ 8 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀਆਂ 8 ਕਿਆਰੀਆਂ (ਸਾਢੇ 6 ਮਰਲੇ) ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਇੱਕ ਏਕੜ ਲਈ ਕਾਫ਼ੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਪਨੀਰੀ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਕੀੜੇ ਜਾਂ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਹਮਲਾ ਦਿਸੇ ਤਾਂ ਸਿਫ਼ਾਰਸ਼ ਕੀਤੇ ਢੰਗ ਵਰਤੋ ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਲਗਾਤਾਰ ਪਾਣੀ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ ਜਦ ਪਨੀਰੀ 20-25 ਸੈਂਟੀਮੀਟਰ ਉੱਚੀ ਜਾਂ 6-7 ਪੱਤਿਆਂ ਵਾਲੀ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਸਮਝੋ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ ਜੇਕਰ ਪਨੀਰੀ ਦੇ ਨਵੇਂ ਪੱਤੇ ਪੀਲੇ ਪੈ ਜਾਣ ਤਾਂ ਫ਼ੈਰਸ ਸਲਫ਼ੇਟ ਦੇ ਤਿੰਨ ਛਿੜਕਾਅ ਹਫ਼ਤੇ-ਹਫ਼ਤੇ ਦੇ ਫ਼ਰਕ ਤੇ ਕਰੋ
sir 30 kilo jiri seed kini jaga vich vijeya jave pili Usha hai ?
(pb)
Maharashtra
30 to 32 killo jhone de beej di pneeri de beej lai tuhanu 12 marle thaa di lod pavegi. Dhanwad
ਦੋਗਲੀ ਗਾਂ ਨੂੰ ਮੋਕ ਲਗੀ ਹੈ ਜੀ ਤੇ ਸਮੈਲ ਵੀ ਬਹੁਤ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਕੋਈ ਦੇਸੀ ਦਵਾਈ ਬਾਰੇ ਦੱਸੋ ਜੀ ?
(pb)
Rajasthan
ਤੁਸੀ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਮਹਿੰਦੀ, 50 ਗ੍ਰਾਮ ਹਲਦੀ ਅਤੇ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ 3-4 ਲਗਾਤਾਰ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ.
Punjab
Ohna nu Liquid Vitakaid LIV 50ml swere 50ml shame nu deo nall hi Bolus Flygill MFL 2-2 golia swere shame 5 din deo mok theek hon te Ohna nu Bolus Flukired DS 6gm deo ji te Vitakaid LIV 20 din tak deo ji.
ਰੇਤਲੇ ਜਮੀਨ 1ਕਿੱਲਾ ਜੀ ਨਰਮੇ ਦੀ ਕਿਹੜਾ ਬੀਜ ਬੀਜੀ ਗਏ ਜੀ ਨਰਮੇ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਜ਼ਮੀਨ ਚ ਕੀ ਪਾਈਏ ਜੀ ਹੇਠਾਂ ਦੱਸੋ ਜੀ ਜਲਦੀ ?
(pb)
Maharashtra
Narme de vich SSP@75kg ja DAP@27 kg prati acre de hisab nal paa skde ho. ihna de vicho kise v ikk di varto kr skde ho. ihna di varto krn nal jo narme de vich patte jamni rang de hunde hnn ohh nahi hunde..ihna di varto tuc shuru de vich v kr skde ho ja fir baad de vich narma uggran te v kr skde ho. Jo potash di varto krni hundi hai ohh mitti de vich iss di ghaat de anusaar kro. jekar iss di ghaat hai tan 20kg prati acre de hisaab nal paa skde ho. sulphur di iss de vich lod nahi hundi hai. iss di varto krn ton parhej kro.
ki ena velaa nu eh koi bimari lagi a dseo ?
(pb)
Punjab
gurtej ji eh fungus de karn ho reha hai isde lai tuc M-45 ja carbendazim@4gm nu prati litre pani de hisab nal spray kero.dhanwad
sir tarbuj da fal gll reha hai agla fal machi janda hai te pichhla pkkea peya ?
(pb)
Punjab
lakhwinder ji eh fungus nal machda hai isde layi tuc M-45 ja carbendazim@4 gm nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
fungus means
mere aam ke patte side side se sukh rahe hai or tahniyan bhi ,isse theek hone ke upay btayein ?
(en)
Punjab
shashank ji yeh tatv ki kami ke karn hota hai iske liye aap paudhe ko 4-5 killo vermi compost daale. is se paudhe ko sare tatv mil jayege aur paudha healthy ho jayega.dhanywad
bhot bhot shukriyan ji