• पशु को जहां तक संभव हो हरा चारा देना चाहिए।
• पशुओं को जहां तक हो सके नाल से दवा नहीं देनी चाहिए।
• दूध मुट्ठी से निकालना चाहिए।
• पशुओं को आयोडीन युक्त नमक अवश्य खिलाना चाहिए।
• थनैला रोग होने पर तुरंत नज़दीके के डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।
• पशुओं को हर तीन महीने बाद पेट के कीड़ों की दवा अवश्य देनी चाहिए।
• नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान का प्रयोग करना चाहिए।
• संभव हो तो पशुओं के दूध का रिकार्ड रखना चाहिए।
• कैल्शियम में विटामिन की छोटी शीशी मिलाकर नहीं रखनी चाहिए।
• प्रत्येक महीने पशुओं को खनिज मिश्रण अवश्य खिलाना चाहिए।
• पशुओं को ऑक्सीटोसिन का टीका नहीं लगाना चाहिए।
• पशु 24-36 घंटे तक गर्मी में रहता है। अत गर्मी में आने के 12 घंटे बाद बीज रखवाना चाहिए।
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