
Posted by nits
Uttarakhand
11-12-2018 08:08 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे चिकनी से रेतली, जलोढ़ मिट्टी और अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी में उगाया जाता है यदि इसे रेतली दोमट मिट्टी जो जैविक तत्वों से भरपूर हो, में उगाया जाये तो अच्छे परिणाम देती है इसे हल्की मिट्टी में भी उगाया जा सकता है घटिया जल निकास वाली और अधिक जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती क.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे चिकनी से रेतली, जलोढ़ मिट्टी और अच्छे जल निकास वाली दोमट मिट्टी में उगाया जाता है यदि इसे रेतली दोमट मिट्टी जो जैविक तत्वों से भरपूर हो, में उगाया जाये तो अच्छे परिणाम देती है इसे हल्की मिट्टी में भी उगाया जा सकता है घटिया जल निकास वाली और अधिक जल जमाव वाली मिट्टी में इसकी खेती करने से परहेज़ करें इस फसल की वृद्धि के लिए पी एच 5.0 - 8.5 होनी चाहिए OD-19 (Sugandhi), Pragathi, Nima, Cauvery, Krishna, NLG 84, OD 410 उपयुक्त किस्में उगाई जाती हैं मार्च-अप्रैल के महीने में नर्सरी बैड तैयार करें फासला नए पौधों की वृद्धि के अनुसार 60.X 60 सैं.मी. रखें और ढाल बनाने के लिए फासला 90X60 सैं.मी. रखें 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें खेत में रोपाई के लिए दो महीने पुराने पौधों का प्रयोग किए जाते हैं बीज 1.6-2 किलोग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को कांगियारी से बचाने के लिए बिजाई से पहले बीजों को सीरेसन 0.2 % या एमीसान 1 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें रासायनिक उपचार के बाद बिजाई के लिए बीजों का प्रयोग करें लैमन घास के बीजों को आवश्यक लंबाई और 1 -1.5 मीटर की चौड़ाई वाले तैयार बैडों पर बोयें बीजने के बाद बैडों को कट घास सामग्री से ढक दें फिर इसे मिट्टी की पतली परत के साथ ढक दें नए पौधे रोपाई के लिए 2 महीने में तैयार हो जाते हैं, जब पौधा 12-15 सैं.मी. ऊंचाई पर पहुंच जाता है रोपाई से पहले खेत अच्छी तरह से तैयार होना चाहिए रोपाई 15x19 सैं.मी. के फासले पर की जानी चाहिए नए पौधों को मिट्टी में ज्यादा गहरा ना बोयें इससे बारिश के दिनों में जड़ गलन का खतरा बढ़ जाता है उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो), पोटाश्यिम 14 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 23 किलो) प्रति एकड़ में डालें अन्य हालातों में नाइट्रोजन 40 किलो प्रति एकड़ में डालें यह एरोमैटिक प्लांट रिसर्च स्टेशन, ओडाकली (केरला) द्वारा जारी की गई है खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए हाथों से गोडाई करें मिट्टी के तापमान को कम करने और नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक अच्छा तरीका है जैविक मलच 1200 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें एक वर्ष में 2-3 निराई आवश्य करें जैविक रोकथाम के लिए अल्ट्रा वाइल्ट रेडीएशन या फ्लेम विडिंग का भी प्रयोग किया जा सकता है गर्मियों के मौसम में फरवरी से जून के महीने तक 5-7 अंतराल पर सिंचाइयां करें जब वर्षा नियमित रूप से नहीं होती तो पहले महीने में 3 दिनों के अंतराल पर सिंचाई दें और फिर 7-10 दिनों के अंतराल पर दें गर्मियों के मौसम के दौरान 4-6 सिंचाइयां देनी आवश्यक होती हैं रोपाई के 4-6 महीने बाद पौधा उपज देना शुरू कर देता है कटाई 60-70 दिनों के अंतराल पर करें कटाई के लिए दराती का प्रयोग करें कटाई मई के शुरू में और जनवरी के आखिर में करें कटाई के लिए दराती की सहायता से ज़मीन की सतह से 10-15 सैं.मी. घास की कटाई करें
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