
Posted by manpreet singh
Punjab
11-01-2019 08:20 AM
अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है सोयाबीन की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 अनूकूल होता है जल जमाव, खारी और क्षारीय मिट्टी सोयाबीन की खेती के लिए अनुकूल नहीं होती कम तापमान भी इस फसल को गंभीर रूप से प्रभावित करता है प्रसिद्ध किस्में और पैदावार: SL 525: यह किस्म 144 .... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है सोयाबीन की अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 अनूकूल होता है जल जमाव, खारी और क्षारीय मिट्टी सोयाबीन की खेती के लिए अनुकूल नहीं होती कम तापमान भी इस फसल को गंभीर रूप से प्रभावित करता है प्रसिद्ध किस्में और पैदावार: SL 525: यह किस्म 144 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके बीज समान और मोटे होते हैं यह पीले चितकबरे रोग के प्रतिरोधी है और यह तना गलन और जड़ गलन को भी सहनेयोग्य हैं इसकी औसतन पैदावार 6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है SL 744: यह किस्म 139 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसके बीज हल्के पीले रंग के होते हैं यह पीले चितकबरे रोग के प्रतिरोधी है इसकी औसतन पैदावार 7.3 क्विंटल प्रति एकड़ होती है SL 958: यह किस्म 142 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 7.3 क्विंटल प्रति एकड़ होती है खेत की तैयारी के समय, दो-तीन बार सुहागे से जोताई करें सोयाबीन की बिजाई के लिए जून के पहले पखवाड़े से जुलाई के शुरू का समय उचित होता है बिजाई के समय पंक्ति से पंक्ति में 45 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 4-7 सैं.मी. का फासला रखें बीज को 2.5-5 सैं.मी. की गहराई में बोयें बीजों को सीड ड्रिल की सहायता से बोयें एक एकड़ खेत में 25-30 किलोग्राम बीजों का प्रयोग करें बीजों को मिट्टी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए थीरम या कप्तान 3 ग्राम से प्रति किलो बीजों का उपचार करें बिजाई के समय गली हुई रूड़ी की खाद और गाय का गला हुआ गोबर 4 टन और नाइट्रोजन 12.5 किलो (यूरिया 28 किलो) और फासफोरस 32 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 200 किलो) प्रति एकड़ में डालें अच्छे विकास और अच्छी पैदावार के लिए यूरिया 3 किलो को 150 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई के बाद 60 वें और 75 वें दिन स्प्रे करें खेत को नदीन मुक्त करने के लिए, दो बार गोडाई की आवश्यकता होती है, पहली गोडाई बिजाई के 20 दिन बाद और दूसरी गोडाई बिजाई के 40 दिन बाद करें रासायनिक तरीके से नदीनों को रोकने के लिए, बिजाई के बाद, दो दिनो में, पैंडीमैथालीन 800 मि.ली. को 100-200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें फसल को कुल तीन से चार सिंचाइयों की आवश्यकता होती है फली बनने के समय सिंचाई आवश्यक है इस समय पानी की कमी पैदावार को काफी प्रभावित करती है बारिश की स्थिति के आधार पर सिंचाई का उपयोग करें अच्छी वर्षा की स्थिति में सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं होती जब फलियां सूख जाएं और पत्तों का रंग बदल कर पीला हो जाए और पत्ते गिर जाएं, तब फसल कटाई के लिए तैयार होती है कटाई हाथों से या दराती से करें कटाई के बाद, पौधों में से बीजों को निकाल लें सुखाने के बाद, बीजों को अच्छी तरह साफ करें छोटे आकार के बीजों, प्रभावित बीजों और डंठलों को निकाल दें।
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