Experts Q&A Search

Posted by JITENDRA SINGH
Rajasthan
10-03-2019 11:08 PM
Punjab
03-12-2019 09:13 PM
Jitender Singh ji ashi kisam ki tulsi ke seed ke liye aap Prashant Tiwari 9193601993 se samparak kare.
Posted by JITENDRA SINGH
Rajasthan
10-03-2019 11:05 PM
Punjab
03-12-2019 09:15 PM
Is ke bare me puri jankari ke liye aap Prashant Tiwari 9193601993 se samparak kare.
Posted by kailash sonekar
Maharashtra
10-03-2019 11:02 PM
Maharashtra
03-11-2019 08:41 AM
आप बैंगन के उपर NPK 13:00:45 @7 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें इस से फसल में चमक आ जाएगी
Posted by Roshan Khorgade
Maharashtra
10-03-2019 10:56 PM
Punjab
03-11-2019 03:52 AM
Roshan g gende mein konsa keet aa rha hai kirpa yeh btayein tan jo apko uss ki dwaa btaayi ja ske...
Posted by Nvrj Rai
Punjab
10-03-2019 10:51 PM
Maharashtra
03-11-2019 08:42 AM
jeere di Kheti jyadatar rajsthan vich kiti jandi hai. Punjab vich isdi Kheti University valo sifarish nahi kiti jandi..
Posted by Khushdil Singh
Punjab
10-03-2019 10:09 PM
Punjab
03-12-2019 04:34 PM
खुशदिल जी इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए आप यह प्रसिद्ध किस्में Washington,Honey Dew,Coorg Honey,C O-2,Pusa Delicious,Pusa Dwarf लगा सकते है पपीते की खेती के लिए, अच्छ.... (Read More)
खुशदिल जी इसे मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए आप यह प्रसिद्ध किस्में Washington,Honey Dew,Coorg Honey,C O-2,Pusa Delicious,Pusa Dwarf लगा सकते है पपीते की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए ज़मीन को समतल करना ज़रूरी है आखिरी जोताई के समय, गली हुई रूड़ी की खाद डालें बसंत के मौसम में फरवरी-मार्च में बिजाई की जाती है, मॉनसून के मौसम में, जून जुलाई के महीने में बिजाई की जाती है और पतझड़ के मौसम में अक्तूबर नवंबर के महीने में बिजाई की जाती है पौधे से पौधे में 3x3 मीटर फासले का प्रयोग करें बीजों को 1 सैं.मी. की गहराई पर बोयें प्रजनन विधि का प्रयोग किया जाता है नए पौधों को 25x10 सैं.मी. लंबाई, चौड़ाई वाले पॉलीथीन के बैगों में तैयार किया जाता है इन पॉलीथीन बैगों में पानी के उचित निकास के लिए निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्ध व्यास के 8-10 छेद करें रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत के समान अनुपात से पॉलीथीन बैगों को भरें मुख्य तौर पर पॉलीथीन बैग में जुलाई के दूसरे सप्ताह से सितंबर के तीसरे सप्ताह तक बीजों को बोया जाता है बिजाई से पहले, कप्तान 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें नये निकले पौधों को उखेड़ा रोग से बचाने के लिए कप्तान 0.2 प्रतिशत का मिट्टी में छिड़काव करें नए पौधों की रोपाई अक्तूबर नवंबर महीने में की जाती है रोपाई के समय कोई भी खाद ना डालें उसके बाद फरवरी महीने में N:P:K(19:19:19) 1 किलो दो बार डालें मौसम, फसल की वृद्धि और मिट्टी की किस्म के आधार पर सिंचाई करें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने, हल्का हरा होने और शिखर से पीला होने पर फल की तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं
Posted by om prakash verma
Uttar Pradesh
10-03-2019 09:49 PM
Punjab
03-11-2019 03:37 PM
Motia di kheti bare puri jankari ate is di training len lai tusi Vinod Kumar 9050555757 nal samparak kar sakde ho.
Posted by Bhusan Das
West Bengal
10-03-2019 09:49 PM
Punjab
03-11-2019 05:45 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by sheetal patil
Maharashtra
10-03-2019 09:27 PM
Maharashtra
04-15-2019 10:47 AM
शीतल पाटिल जी आप सीधे गोबर और मूत्र बेचते हैं, आप इससे वर्मीकम्पोस्ट या जीवामृत जैसे कुछ उत्पाद बना सकते हैं आपके उत्पाद को बेचना आसान हो जाएगा धन्यवाद
Posted by sachin
Maharashtra
10-03-2019 09:27 PM
Maharashtra
03-11-2019 08:43 AM
Sachin ji aap konsi machine ki jankari Lena chahte hai kripya btaye ta ki aapko iske bare me poori jankari di ja sake...
Posted by sarbjeet singh
Punjab
10-03-2019 09:27 PM
Punjab
03-12-2019 04:37 PM
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਕਾਰਗਿੱਲ ਕੰਪਨੀ ਦੀ heifer dry ਫੀਡ ਪਾਓ ਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਪਾਊਡਰ calf plan 3kg ਲਿਆ ਕੇ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਵੇਰੇ ਤੇ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ ਜੀ
Posted by Manider Sangha
Punjab
10-03-2019 09:18 PM
Punjab
03-12-2019 04:40 PM
Manider sangha ji tuci cow nu Flukrid-DS bolus deo, isde nal tuci Bovimin-B powder 50gm rojana deo ate minotas bolus rojana 1 goli deni suru kro ate 21 din tak dinde rho, iss nal heat vich aa jawegi.
Posted by Sukhchain Singh Tiwana
Punjab
10-03-2019 09:18 PM
Punjab
03-10-2019 09:52 PM
ਮਾਰਚ ਵਿਚ ਤੁਸੀ ਚੱਪਣ ਕੱਦੂ, ਹਲਵਾ ਕੱਦੂ, ਘੀਆ ਕੱਦੂ, ਕਰੇਲਾ, ਕਾਲੀ ਤੋਰੀ, ਪੇਠਾ, ਖੀਰਾ, ਟੀਂਡੇ ਅਤੇ ਭਿੰਡੀ ਆਦਿ ਬੀਜ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by bimal mandi
Jharkhand
10-03-2019 09:07 PM
Punjab
03-11-2019 03:38 PM
Motia di kheti bare puri jankari ate is di training len lai tusi Vinod Kumar 9050555757 nal samparak kar sakde ho.
Posted by GurSewak turka
Punjab
10-03-2019 09:02 PM
Punjab
03-12-2019 04:35 PM
Sabi ji kirpa karke apna swal vistar nal pucho ke tuc ki jankari laina chahunde ho land measurement bare ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake. ki tuc karma bare jankari laina chahunde ho.
Posted by Anil kumar
Uttar Pradesh
10-03-2019 08:56 PM
Punjab
03-12-2019 08:06 PM
अनिल जी यदि आप पोल्ट्री फार्म शुरू करना चाहते है सबसे पहले आप इसकी ट्रेनिंग जरूर लें ट्रेनिंग में आपको इनकी किस्मों की पहचान, इनकी देखभाल, खुराक प्रबंध के बारे में सारी जानकारी दी जाएगी क्योंकि पोल्ट्री में हमारी एक छोटी सी गल्ती हमारे बहुत बड़े नुक्सान का कारण बन सकती है इसकी ट्रेनिंग के लिए आप अपने जिले .... (Read More)
अनिल जी यदि आप पोल्ट्री फार्म शुरू करना चाहते है सबसे पहले आप इसकी ट्रेनिंग जरूर लें ट्रेनिंग में आपको इनकी किस्मों की पहचान, इनकी देखभाल, खुराक प्रबंध के बारे में सारी जानकारी दी जाएगी क्योंकि पोल्ट्री में हमारी एक छोटी सी गल्ती हमारे बहुत बड़े नुक्सान का कारण बन सकती है इसकी ट्रेनिंग के लिए आप अपने जिले के केबीके से संपर्क कर सकते है आपको ट्रेनिंग में पूरी जानकारी मिल जाएगी वैसे लगभग एक चूज़े को तैयार करने में 100—110 रूप्ये तक खर्चा आ जाता है उस हिसाब से आप चूज़ों को रख सकते है.
Posted by Jobanjit Singh
Punjab
10-03-2019 08:53 PM
Punjab
03-12-2019 04:42 PM
ਤੁਸੀ Terramycin-LA 30ml ਲੈ ਕੇ 15-15ml ਗਰਦਨ ਦੇ ਦੋਨਾਂ ਪਾਸੇ ਲਗਵਾਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ masticare ਜਾ Flashout ਪਾਊਡਰ ਦਿਓ ਇਸਦਾ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਪੋਚ ਦੇਣ ਹੈ ਅਤੇ ਮੀਠਾ ਸੋਡਾ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ.
Posted by bikramjeet singh
Punjab
10-03-2019 08:40 PM
Punjab
03-12-2019 04:23 PM
tuci jhoti nu Flukrid-Ds bolus deo, is nal pett de kirre khtam honge, isde nal tuci Agrimin super powder 100gm rojana deo ate Minotas bolus rojana 1 goli deni suru kro ate 21 din tak dinde rho, iss nal heat vich jawegi.
Posted by sonu singh
Uttar Pradesh
10-03-2019 08:37 PM
Punjab
03-11-2019 05:44 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by ਦੂਲਾ ਸਿੰਘ
Punjab
10-03-2019 08:37 PM
Punjab
03-12-2019 04:36 PM
ਐਵਕਾਡੋ ਦੀ ਖੇਤੀ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਲੋਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਧੰਨਵਾਦ.
Posted by Gurdeep Bawa
Punjab
10-03-2019 08:28 PM
Punjab
03-12-2019 04:21 PM
ਹਾਜੀ ਇਹ ਗੱਬਣ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਵੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Jitendra Singh Rajpoot
Uttar Pradesh
10-03-2019 08:28 PM
Punjab
03-10-2019 09:51 PM
Chane mein fungus ka attack hai toh ess ke liye aap M-45 @500 gm per acre ka spray kro jiss se shi ho jayega.
Posted by gurbhej singh
Punjab
10-03-2019 08:18 PM
Punjab
03-10-2019 09:33 PM
ਨਹੀਂ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇ ਨਾ ਕਰੋ ਹਮੇਸ਼ਾ ਉਲੀਨਾਸ਼ਕ ਅਤੇ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਦੀ ਅਲੱਗ ਅਲੱਗ ਹੀ ਸਪਰੇ ਕਰੋ
Posted by chhina saab
Punjab
10-03-2019 08:14 PM
Punjab
03-12-2019 09:20 PM
Eh HF breed hai ji eh vadia khurak ate vdia dekhbhal de nal 25-30 liter takk milk de sakdi hai ji
Posted by satwant singh
Punjab
10-03-2019 08:13 PM
Punjab
03-13-2019 11:00 AM
Satwant Singh ji Bathinda vich kheti sanda te subsidy bare puri jankari lai tusi 9417081179 te samparak kar sakde ho ji ehna valo tuhanu pure visthar vich jankari diti javegi.
Posted by ISHVARCHAND YADAV
Uttar Pradesh
10-03-2019 08:04 PM
Punjab
03-10-2019 09:46 PM
Bhindi ki bijai k liye ek acre k liye 15 -18kg 15 February ,8-10kg march or 4-6kg june july mai beej ki jrurt padhti hai. Iski bijai k liye beej ko pehle 24 ghnte k liye pani mai bhiyon kr rkhe. iski bijai February-march mai vatt pe or june july mai plane jmeen pe kii jati hai. Iski bijai sme line mai 45cm or plants mai 15cm ki doori rkhi jati hai.
Posted by jatin Kumar
Punjab
10-03-2019 08:00 PM
Punjab
03-12-2019 08:52 PM
Jatin kumar ji tuci ghode nu kali mirch 10gm rojana deo isde nal tuci Sarrakind plus bolus 1-1 swere sham deni suru kro, iss nal farak paa jawega.
Posted by manpreet
Punjab
10-03-2019 07:49 PM
Punjab
03-12-2019 04:39 PM
Manpreet ji pyaj de uper tuc 13:00:45@2 killo nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo isde nal pyaj mote hone shuru ho jande han. dhanwad
Posted by GurSewak turka
Punjab
10-03-2019 07:49 PM
Punjab
03-12-2019 04:45 PM
tuci uss nu Concimax bolus 1-1 goli swere sham deni suru kro, iss nal anndar ton infection khtam hunda hai ate pashu de gaban rehnn vich help mildi hai, ehh tuci 14 din tak deo, jekar ohh gaban hoii tan rehh jawegi jekar naa hoii tan dubara puuri heet vich aa jawegi.
Posted by ishwar singh
Punjab
10-03-2019 07:42 PM
Punjab
03-12-2019 04:49 PM
ਈਸ਼ਵਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕੱਟੇ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Albendazole ਸਾਲਟ ਦੀ ਗੋਲੀ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਕਿਸੀ ਵੀ ਵਧਿਆ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਫੀਡ ਦੇਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Enerboost ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ.
Posted by Neeraj singh Neeraj singh
Uttar Pradesh
10-03-2019 07:40 PM
Punjab
03-12-2019 05:01 PM
Neeraj singh ji aap aise kare jo murgi mari hai uko ulta karke faad ke uske andar ki video ya photo send kare. use dekh kar hikuch btaya ja sakta hai ji.
Posted by Uttreshwar rajure
Maharashtra
10-03-2019 07:29 PM
Punjab
03-11-2019 03:39 PM
Motia di kheti bare puri jankari ate is di training len lai tusi Vinod Kumar 9050555757 nal samparak kar sakde ho.
Posted by satnam singh
Punjab
10-03-2019 07:24 PM
Punjab
03-12-2019 07:52 PM
satnam ji tuci cow nu DCR injection 5gm lgwao ate 5 din tak lgwande rho, isde nal tuci Safade de pattia di dhuuni deni suru kro ate uss nu Livoferrol liqued 50ml rojana deo, iss nal farak paan lgg jawega.
Posted by vikrant
Haryana
10-03-2019 07:17 PM
Punjab
03-11-2019 05:47 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Gurdeep Saharan
Haryana
10-03-2019 07:16 PM
Punjab
03-12-2019 04:42 PM
गुरदीप जी आप वेस्ट डीकंपोजर को National Centre of Organic Farming Department of Agriculture and Cooperation से मंगवा सकते है जिनका पता है :- National Centre of Organic Farming, Sector 19, Hapur Road, कमला नेहरू नगर, ग़ज़ियाबाद- 201002 (UP). 0120-2764906, 2764212 इसके इलावा आप इसे ऑनलाइन भी मंगवा सकते है https://www.amazon.in/WASTE-DECOMPOSER-ORIGINAL-PACKING-Bottle/dp/B07MK7M7GJ?
Posted by jassy mansahia
Punjab
10-03-2019 07:04 PM
Punjab
03-10-2019 07:57 PM
ਐਕਟਾਰਾ ਸਿੰਜੇਂਟਾ ਕੰਪਨੀ ਦਾ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਥਾਇਆਮਿਥੋਕਸਮ ਨਾਮ ਦਾ ਕੈਮੀਕਲ ਹੈ ਜੋ ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਹਰੇ ਅਤੇ ਕਾਲੇ ਤੇਲੇ ਨੂੰ ਮਾਰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਕਣਕ ਵਿੱਚ @80 ਗ੍ਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Sumant Itkan
Punjab
10-03-2019 06:58 PM
Punjab
03-11-2019 03:54 AM
sumant g advanta company ke seeds a ge hote hai...yeh hybrid bhindi hai aap iss ki buyaayi kr skte ho..
Posted by shaminder kaur
Punjab
10-03-2019 06:54 PM
Punjab
03-11-2019 06:30 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by संजय खरात
Maharashtra
10-03-2019 06:45 PM
Punjab
03-11-2019 05:48 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Rajendra
Madhya Pradesh
10-03-2019 06:37 PM
Punjab
03-11-2019 06:31 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by Manoj Kumar Saini
Uttar Pradesh
10-03-2019 06:25 PM
Punjab
03-12-2019 10:24 AM
Dhan lgane ka sahi time June mein transplanting kr skte ho. April mein sifarish nahi ki jati hai...
Posted by ajay kathait
Uttarakhand
10-03-2019 05:56 PM
Punjab
03-11-2019 04:59 AM
Ajay g banjar bhoomi mein sabse pehle pani ki suvidha ka intzaam krna pdega. iss ke baad soil test krwa ke uss ke ander jo bhi nutrients ki kami hogi uss hisaab se khaad ka upyog kro aur ho skr toh apko mitti bhi daalni parh skti hai.
Posted by Narinder singh
Punjab
10-03-2019 05:22 PM
Maharashtra
03-11-2019 10:07 AM
Posted by gurdeep singh
Punjab
10-03-2019 05:21 PM
Punjab
03-14-2019 04:50 PM
Gurdeep Singh ji is bare puri jankari lai tusi Apne jile Officer nal 9417081179 te samparak kar ke puri jankari le sakde ho. Thanwad
Posted by yograj
Himachal Pradesh
10-03-2019 05:17 PM
Punjab
03-11-2019 05:39 PM
Yograj ji Chicks lene ke lia aap Central Poultry Development Organization (Northern Region) Ministry of Agriculture & Farmers Welfare, Government of India, Industrial Area, Phase-I, Chandigarh – 160 002,Tel.No: 0172-2655391 ja fir aap Sumit Kumar 8006000291,7906547529 se samparak kar sakte hai.
Posted by savdas
Gujarat
10-03-2019 05:15 PM
Maharashtra
03-11-2019 06:00 PM
इसे मिट्टी की विभिन्न श्रेणियों में अच्छे से उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी जिसमें जैविक तत्व अच्छी मात्रा में हो, में उगाया जाये तो अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5.5-7 होनी चाहिए रंग के आधार पर इसकी तीन किस्में हैं: 1) लाल छिल्के वाले फल के साथ सफेद गुद्दा 2) लाल छिल्के वाले फल के सा.... (Read More)
इसे मिट्टी की विभिन्न श्रेणियों में अच्छे से उगाया जा सकता है पर यह अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी जिसमें जैविक तत्व अच्छी मात्रा में हो, में उगाया जाये तो अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5.5-7 होनी चाहिए रंग के आधार पर इसकी तीन किस्में हैं: 1) लाल छिल्के वाले फल के साथ सफेद गुद्दा 2) लाल छिल्के वाले फल के साथ लाल गुद्दा 3) पीले छिल्के वाले फल के साथ सफेद गुद्दा ड्रैगन फल की खेती के लिए मिट्टी भुरभुरी और अच्छी तरह से जोती गई हो खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर या अच्छी मात्रा में जैविक पदार्थ डालें एक बार खेती के बाद, यह उसी खेत में 15-20 वर्षों तक रहती है इसलिए अच्छे से खेत तैयार करें यह बेल की तरह उगती है इसलिए इसे सहारे के लिए गोल आकार के फ्रेम की जरूरत होती है खंभो का प्रयोग करें क्योंकि वो मजबूत और ज्यादा देर तक चलते हैं मैटल के फ्रेम प्रयोग ना करें क्योंकि वे गर्म होकर पौधे को भी नुकसान पहुंचाते हैं बिजाई का समय इसकी खेती पूरे वर्ष में की जा सकती है फासला रोपाई बड़े फासले की बजाय छोटे फासले पर करें छोटे फासले पर की गई बिजाई उच्च उपज देती है कतार से कतार में 3 मीटर और पौधे से पौधे में 2 मीटर का फासला रखें सहारे के लिए 2 मीटर लंबे खंभो का प्रयोग करें बीज की गहराई बेल की कटिंग को एक इंच की गहराई में बोयें बिजाई का ढंग बीजों को सीधे बो कर या बेल की कटिंग की रोपाई खेत में की जाती है बीज की मात्रा एक एकड़ खेत में 1700 ड्रैगन पौधे उगाये जा सकते हैं 10-15 किलो जैविक खाद प्रति पौधे में डालें प्रत्येक वर्ष जैविक खाद की मात्रा 2 किलो बढ़ा दें जैविक खाद के साथ ही अच्छी वृद्धि और उपज के लिए इसे अकार्बनिक पदार्थों की आवश्यकता होती है वानस्पति अवस्था में यूरिया 70 ग्राम, एस एस पी 90 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 ग्राम प्रति पौधे में डालें फूल निकलने से पहले, फलों के विकसित होने के समय और फलों की कटाई के बाद यूरिया 50 ग्राम, एस एस पी 50 ग्राम और म्यूरेट ऑफ पोटाश 100 ग्राम प्रति पौधे में डालें प्रत्येक वर्ष इस मात्रा को 220 ग्राम से बढ़ा दें और 1.5 किलो प्रति पौधे में डालें क्योंकि यह कैकटस के परिवार से संबंधित है इसलिए इसे कम पानी की आवश्यकता होती है यह पानी की कमी वाले क्षेत्रों में आसानी से रह सकती है सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई का प्रयोग किया जाता है पानी को ज्यादा ना लगाएं क्योंकि इससे नदीनों की संख्या बढ़ जाती है क्षेत्र से क्षेत्र में जल की आवश्यकता भिन्न होती है यह मिट्टी, जलवायु, और पौधे के स्वास्थ्य पर आधारित होती है प्रति दिन प्रति पौधे को 1-2 लीटर पानी की आवश्यकता होती है ड्रैगन फल मई-जून के महीने में फूल निकालना शुरू करते हैं और फल अगस्त-दिसंबर के महीने में लगते हैं कटाई का सही समय तब होता है जब फल अपना रंग बदल कर हल्के हरे से लाल रंग का हो जाये रंग बदलने के 3-4 दिन बाद कटाई करें निर्यात के लिए रंग बदलने के एक दिन बाद कटाई करें कटाई हाथों से या दरांती से और तीखे चाकू से भी की जा सकती है इसकी औसतन उपज 5-6 टन प्रति एकड़ ली जा सकती है