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Posted by संजय खरात
Maharashtra
12-03-2019 12:41 AM
Punjab
03-12-2019 09:58 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by kabindra phulkonwar
Assam
12-03-2019 12:06 AM
Punjab
03-22-2019 02:26 PM
श्री कबिंद्रा जी पूरी जानकारी और ट्रेनिंग के लिए ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture(Indian Council of Agricultural Research) (An ISO 9001:2015 Certified Institute) Kausalyaganga, भुबनेश्वर-751002, ओडिशा, इंडिया टेलीफोन: +91-674-2465421, 2465446, फैक्स: +91-674-2465407 E-mail: director.cifa@icar.gov.in, Website: www.cifa.nic.in से संपर्क करें
Posted by gurjit kaur
Punjab
11-03-2019 11:46 PM
Punjab
03-12-2019 04:44 PM
गुरजीत कौर जी कृपया अपना सवाल विस्तार से बताएं कि आप कौन से पोढ़िन के बारे में जानना चाहते हैं ताकि हम आपको उचित जानकारी प्रदान कर सकें, धन्यवाद
Posted by Rajnish singh
Uttar Pradesh
11-03-2019 11:16 PM
Punjab
03-12-2019 04:01 PM
Posted by Manish Kumar
Bihar
11-03-2019 10:52 PM
Punjab
03-12-2019 10:00 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by ਗੁਰਮਿੰਦਰ
Punjab
11-03-2019 10:17 PM
Punjab
03-12-2019 07:04 AM
Tuci us no nazdeeki venery hospital le ke jao. Doctor ton usde sing krtva ke leyao, jinne v sing kattan yog honege doctor one hi katt deinge, ohna kol special sing kattan vali taar hundi hai, us nal katte jaange.
Posted by Devender thakur
Himachal Pradesh
11-03-2019 10:06 PM
Uttarakhand
03-22-2019 01:39 PM
अगर पराग संचित करके रखा हो तो पराग में थोडा सा पानी मिला हुआ शहद मिलाकर मधुमक्खियों के बक्सों के अंदर दिया जा सकता है या बाहर एक बडी ट्रे में रखकर दे सकते है.. अगर संचित पराग न हो तो चने या सोयबीन या गेहूँ के आटे में शहद को पानी में मिलाकर और इस घोल का आटे के ऊपर छींटा मारकर बक्सों के बाहर एक बडी ट्रे में रखकर दे .... (Read More)
अगर पराग संचित करके रखा हो तो पराग में थोडा सा पानी मिला हुआ शहद मिलाकर मधुमक्खियों के बक्सों के अंदर दिया जा सकता है या बाहर एक बडी ट्रे में रखकर दे सकते है.. अगर संचित पराग न हो तो चने या सोयबीन या गेहूँ के आटे में शहद को पानी में मिलाकर और इस घोल का आटे के ऊपर छींटा मारकर बक्सों के बाहर एक बडी ट्रे में रखकर दे सकते हैं
Posted by SIDHU
Punjab
11-03-2019 10:00 PM
Punjab
03-12-2019 05:54 AM
SOONDI DI ROKTHAM: Soondi di roktham de lyi tuc hari mirch 5 kg , lasan 5 kg, akk de patte 5 kg, sukhchain de patte 5 kg, dhatura 5 kg, arind 5 kg nu 10 leetr gau mootar de vich 4 dina de lyi bhio ke rakho. 4 dina baad ihna pattya nu gau mootar de vich maslo ate 1 din lyi fir iss nu shaawe rakh deo. Iss nu dhakk ke ate shaawe rakhna jruri hunda hai. iss ghol nu kise kpde de nal pun lao ate fir 100 ltr paani de hisaab nal ikk acre de vich iss di spray kro. Iss nal soondi control ho jandi hai.
Posted by Daljeet singh
Punjab
11-03-2019 09:41 PM
Punjab
03-12-2019 04:44 PM
Daljeet ji bhindi di sidhi bijai kiti jandi hai isnu tray vich nahi ugaya janda. dhanwad
Posted by Mansingh Jatav
Madhya Pradesh
11-03-2019 09:25 PM
Punjab
03-12-2019 11:17 AM
देसी मुर्गी में 45 दिन के बाद चूजों को 1 दिन में कम से कम 30 ग्राम दाना देना चाहिए
Posted by ramuu
Punjab
11-03-2019 09:23 PM
Punjab
03-12-2019 09:02 PM
Posted by Babbal
Punjab
11-03-2019 09:18 PM
Punjab
03-12-2019 10:18 AM
Mychorhiza ekk bio fertilizer hai jo root formation and nutrient availability lyi bhut vdia kmm krda hai. Sugarcane di fasal vich esnu germination to baad vich hi paoun nal benefit milega.
Posted by Amritpal Singh
Punjab
11-03-2019 09:04 PM
Punjab
03-12-2019 04:53 PM
Posted by gurpinder singh
Punjab
11-03-2019 08:47 PM
Punjab
03-12-2019 10:39 AM
Gurpinder Singh ji Narme da beej tusi PAU Ludhiana to khreed sakde ho. (kisam = F-2228, Packing = 3.5 KG, Rate = 210/rs)
Posted by ਸੰਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
11-03-2019 08:29 PM
Punjab
03-12-2019 10:34 AM
Sandeep Singh ji punjab vich training len lai tusi Manish Vasudev 9417652857 nal samparak kar sakde ho.
Posted by gurmeet singh
Punjab
11-03-2019 08:26 PM
Punjab
03-12-2019 05:03 PM
hnji tusi punjab vich chandan de plant lga sakde ho. jeyada tazarba pushan layi tusi satnam singh 097798 46777 number te gal kar sakde ho ehna ne lgaye hoe hun.
Posted by Nagesh sharma
Madhya Pradesh
11-03-2019 08:19 PM
Punjab
03-12-2019 08:47 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Ravinder Kumar
Punjab
11-03-2019 08:13 PM
Punjab
03-12-2019 11:13 AM
digital soil testing matter da lagpag 75000-80000 rupees rak milega te eh kharidan layi tusi 9958733844 number te harsh ji nal contact kar sakde ho.
Posted by Rinku
Uttar Pradesh
11-03-2019 08:06 PM
Punjab
03-11-2019 08:22 PM
SML-668 moong variety 61 days mein harvesting ke liye tyar ho jati hai.
Posted by Yashpal sharma
Haryana
11-03-2019 07:50 PM
Punjab
03-12-2019 05:07 PM
इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट से चिकनी दोमट में की जा सकती है यह गहरी, बढ़िया निकास वाली, उपजाऊ मिट्टी, जो 2 मीटर गहराई तक कठोर ना हो, में बढ़िया पैदावार देती है इसके लिए मिट्टी का pH 8.7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में: Patharnakh,Punjab Nakh,Punjab Gold,Punjab Nectar इसकी बिजाई जनवरी महीने में पूरी हो जाती है बिजाई के लिए एक साल पुर.... (Read More)
इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे की रेतली दोमट से चिकनी दोमट में की जा सकती है यह गहरी, बढ़िया निकास वाली, उपजाऊ मिट्टी, जो 2 मीटर गहराई तक कठोर ना हो, में बढ़िया पैदावार देती है इसके लिए मिट्टी का pH 8.7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में: Patharnakh,Punjab Nakh,Punjab Gold,Punjab Nectar इसकी बिजाई जनवरी महीने में पूरी हो जाती है बिजाई के लिए एक साल पुराने पौधों का प्रयोग किया जाता है पौधों के बीच 8x4 मीटर का फासला रखें बिजाई से पहले खेत को अच्छी तरह से साफ करें और फसल की बचा-खुचा हटा दें फिर ज़मीन को अच्छी तरह से समतल करें और पानी के निकास के लिए हल्की ढलान दें 1x1x1 मीटर आकार के गड्डे खोदे और बिजाई से एक महीना पहले नवंबर में ऊपर वाली मिट्टी और रूड़ी की खाद से भर कर छोड़ दें आखिर में गड्डे को मिट्टी, 10-15 किलो रूड़ी की खाद, 500 किलो सिंगल सुपर फासफेट और क्लोरपाइरीफोस 50 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी में डालें बिजाई के लिए वर्गाकार या आयताकार विधि अपनाये पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान विधि का प्रयोग किया जाता है नाशपाती के नए पौधे तैयार करने के लिए कैंथ वृक्ष प्रयोग की जाती है सितम्बर के अंत से अक्तूबर के पहले हफ्ते तक कैंथ वृक्ष के पके हुए बीज इकट्ठे करें बीजों को निकाल कर दिसंबर में 30 दिनों तक लकड़ी के बक्सों में रखें, जिस में रेत की भीगी हुई परत मौजूद हो जनवरी महीने में बीजों को नरसरी में बीज दें 10 दिनों तक बीज अंकुरण हो जाते है पनीरी वाले पौधे अगले साल के जनवरी महीने तक कलम लगाने के लिए तैयार हो जाते हैं बीजों को लकड़ी के बक्सों में नमी वाली रेत की पर अंकुरण के लिए रख दें यह 10 -12 दिनों में अंकुरण हो जाते हैं फिर पौधों को 10 सै.मी. के फैसले पर मुख्य खेत में लगाएं हर पंक्ति के बाद 60 सै.मी. का फासला रखें नए पौधे दिसंबर-जनवरी में कलम लगाने के लिए तैयार होते है नाशपाती के भागों की टी-बडिंग या टंग ग्राफ्टिंग करके कैंथ वृक्ष के निचले भागों को प्रयोग किया जाता है ग्राफ्टिंग दिसंबर-जनवरी महीने में की जाती है और टी-बडिंग मई-जून महीने में की जाती है फल ना लगने के समय खरीफ ऋतु में उड़द, मूंग, तोरियों जैसे फसलें और रब्बी में गेंहू, मटर, चने आदि फसलें अंतर-फसली के रूप में अपनाई जा सकती है पौधे की शाखाओं के मज़बूत ढांचे को ज्यादा पैदावार और बढ़िया गुणवत्ता के फल देने वाला बनाने के लिए कंटाई- छंटाई की जाती है कांट-छांट: निष्क्रिय वाले मौसम में पौधे की शाखा को ज्यादा फैलने से रोकने के लिए बीमारी-ग्रस्त, नष्ट हो चुकी, टूटी हुई और कमज़ोर शाखा के 1/4 हिस्से को हटा दें जब फसल 1-3 साल की हो, तो 10-20 रूड़ी की खाद, 100-300 ग्राम यूरिया, 200-600 ग्राम सिंगल फासफेट, 150-450 ग्राम मिउरेट ऑफ़ पोटाश प्रति वृक्ष को डालें 4-6 साल की फसल के लिए 25-35 रूड़ी की खाद, 400-600 ग्राम यूरिया, 800-1200 ग्राम सिंगल फासफेट, 600-900 ग्राम मिउरेट ऑफ़ पोटाश प्रति वृक्ष को डालें 7-9 साल की फसल के लिए40-60 रूड़ी की खाद,700-900 ग्राम यूरिया,1400-1800 ग्राम सिंगल फासफेट, 1050-1350 ग्राम मिउरेट ऑफ़ पोटाश प्रति वृक्ष को डालें 10 साल या इससे ज्यादा की फसल के लिए 60 रूड़ी की खाद, 1000 ग्राम यूरिया, 2000 ग्राम सिंगल फासफेट, 1500 ग्राम मिउरेट ऑफ़ पोटाश प्रति वृक्ष को डालें रूड़ी की खाद, सिंगल सुपर फासफेट और मिउरेट ऑफ़ पोटाश की पूरी मात्रा दिसंबर के महीने में डालें यूरिया की आधी मात्रा फूल निकलने से पहले फरवरी के शुरू में और बाकी की आधी मात्रा फल निकालनेके बाद अप्रैल के महीने में डालें जोताई के बाद, नदीनों के अंकुरण से पहले डिउरॉन 1.6 किलो प्रति एकड़ की स्प्रे करें अंकुरण के बाद, जब नदीन 15 -20 सै.मी. के हो, तो नदीनों की रोकथम के लिए ग्लाइफोसेट 1.2 लीटर प्रति एकड़ और पैराकुएट 1.2 को 200 लीटर पानी में मिला के प्रति एकड़ में स्प्रे करें नाशपाती की खेती के लिए पूरेसाल में 75–100 सै.मी. वितरित बारिश की जरूरत होती है रोपाई के बाद इसको नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है गर्मियों में 5-7 दिनों के फासले पर जबकि सर्दियों में 15 दिनों के फासले पर सिंचाई करें जनवरी महीने में सिंचाई ना करें फल देने वाले पौधों को गर्मियों में खुला पानी दें इससे फल की गुणवत्ता और आकार में विकास होता है नज़दीकी मंडियों में फल पूरी तरह से पकने के बाद और दूरी वाले स्थानों पर ले जाने के लिए हरे फल तोड़े जाते है तुड़ाई देरी से होने से फलों को ज्यादा समय के लिए स्टोर नहीं किया जा सकता है और इसका रंग और स्वाद भी खराब हो जाता है नाशपाती की कठोर किस्म पकने के लिए लगभग 145 दिनों की जरूरत होती है, जबकि सामान्य नरम किस्म के लिए 135-140 दिनों की जरूरत होती है
Posted by sitaram
Maharashtra
11-03-2019 07:46 PM
Punjab
03-14-2019 09:04 PM
सीताराम जी बटेर चूजे लेने के लिए आप Jogesh hire 9075749975,9049218008 से सम्पर्क कर सकते है
Posted by dheerendra singh
Uttar Pradesh
11-03-2019 07:21 PM
Punjab
03-12-2019 06:16 PM
Co 98014: यह अगेती बिजाई वाली किस्म Sugarcane Breeding Institute, Regional Centre, Karnal द्वारा Co 8316 x Co 8213 के क्रॉस से तैयार की गई है यह किस्म लंबी और मध्यम पतले गन्नों वाली होती है गन्नों का रंग हरा पीला होता है इसमें फाइबर की मात्रा 14 प्रतिशत होती है इसका गुड़ भूरे रंग का होता है यह किस्म काफी हद तक रतुआ रोग के प्रतिरोधक है यह किस्म सामान्य वातावरण,.... (Read More)
Co 98014: यह अगेती बिजाई वाली किस्म Sugarcane Breeding Institute, Regional Centre, Karnal द्वारा Co 8316 x Co 8213 के क्रॉस से तैयार की गई है यह किस्म लंबी और मध्यम पतले गन्नों वाली होती है गन्नों का रंग हरा पीला होता है इसमें फाइबर की मात्रा 14 प्रतिशत होती है इसका गुड़ भूरे रंग का होता है यह किस्म काफी हद तक रतुआ रोग के प्रतिरोधक है यह किस्म सामान्य वातावरण, कम उपजाऊ मिट्टी और जल जमाव वाली स्थितियों में उगाने के लिए उपयुक्त है यह किस्म Coj 64 किस्म से 22 प्रतिशत अधिक उपज देती है
Posted by Sanjeev Thakur
Himachal Pradesh
11-03-2019 07:07 PM
Punjab
03-12-2019 06:18 PM
संजीव की कोकोपीट एक माध्यम है जिसमे सब्जियों के बीज उगाये जाते है हांजी आप लौकी और खीरा की नर्सरी त्यार करने के लिए ट्रे में इसका इस्तेमाल कर सकते है धन्यवाद
Posted by Gurdhyan Singh
Haryana
11-03-2019 07:07 PM
Punjab
03-11-2019 08:26 PM
knak da Government rate @1840 rupees per quiental hai g.
Posted by kuldeep kumar
Punjab
11-03-2019 06:57 PM
Punjab
03-12-2019 12:30 PM
ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੀ ਮਿਤੀ ਅਜੇ ਜਾਰੀ ਨਹੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣਾ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਾਲਾ ਫਾਰਮ ਗੁਰੁ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ ਭਰ ਆਉ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਹੁਣ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਹੋਵੇਗੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਨਾਭਾ, ਗੁਰਦਾਰਪੁਰ ਤੇ ਖਰੜ ਵਿੱਚੋ ਵੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਹ ਸਰਕਾ.... (Read More)
ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੀ ਮਿਤੀ ਅਜੇ ਜਾਰੀ ਨਹੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣਾ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਾਲਾ ਫਾਰਮ ਗੁਰੁ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ ਭਰ ਆਉ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਹੁਣ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਹੋਵੇਗੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਨਾਭਾ, ਗੁਰਦਾਰਪੁਰ ਤੇ ਖਰੜ ਵਿੱਚੋ ਵੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਹ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਹਨ ਜਿੱਥੇ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਬਾਕੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਹ ਫਾਰਮ ਭੇਜ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਫਾਰਮ ਨੂੰ ਭਰ ਕੇ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਪਤੇ ਤੇ ਕੋਰੀਅਰ ਭੇਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਫਿਰ ਆਪ ਜਾ ਕੇ ਫੜਾ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by kuldeep kumar
Punjab
11-03-2019 06:46 PM
Punjab
03-12-2019 12:49 PM
ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੀ ਮਿਤੀ ਅਜੇ ਜਾਰੀ ਨਹੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣਾ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਾਲਾ ਫਾਰਮ ਗੁਰੁ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ ਭਰ ਆਉ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਹੁਣ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਹੋਵੇਗੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਨਾਭਾ, ਗੁਰਦਾਰਪੁਰ ਤੇ ਖਰੜ ਵਿੱਚੋ ਵੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਹ ਸਰਕਾ.... (Read More)
ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੀ ਮਿਤੀ ਅਜੇ ਜਾਰੀ ਨਹੀ ਕੀਤੀ ਗਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣਾ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਵਾਲਾ ਫਾਰਮ ਗੁਰੁ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ ਭਰ ਆਉ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਹੁਣ ਅਗਲੀ ਟ੍ਰੈਨਿੰਗ ਹੋਵੇਗੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਫਿਰ ਤੁਸੀ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਨਾਭਾ, ਗੁਰਦਾਰਪੁਰ ਤੇ ਖਰੜ ਵਿੱਚੋ ਵੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਹ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਹਨ ਜਿੱਥੇ 5 ਦਿਨ ਦੀ ਮੁਫਤ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੱਤੀ ਜਾਵੇਗੀ ਬਾਕੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਹ ਫਾਰਮ ਭੇਜ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਫਾਰਮ ਨੂੰ ਭਰ ਕੇ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੇ ਪਤੇ ਤੇ ਕੋਰੀਅਰ ਭੇਜ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਫਿਰ ਆਪ ਜਾ ਕੇ ਫੜਾ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Amandeep singh
Punjab
11-03-2019 06:42 PM
Punjab
03-11-2019 06:45 PM
अमनदीप सिंह जी पीएयू किसान मेला 15-16/3/19 को है
Posted by satnam lehri
Punjab
11-03-2019 06:37 PM
Punjab
03-11-2019 06:51 PM
Satnam ji Solar motar bare puri jankari lai tusi Amrik Singh 9814221784 ji nal samparak kar sakde ho ehna valo tuhanu visthar vich jankari diti javegi.
Posted by Sandeep Singh
Haryana
11-03-2019 06:35 PM
Punjab
03-12-2019 10:40 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Amarjeet Singh
Uttar Pradesh
11-03-2019 06:27 PM
Punjab
03-12-2019 10:41 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Gurdhyan Singh
Haryana
11-03-2019 06:26 PM
Punjab
03-12-2019 04:02 PM
ਗੁਰਧਿਆਨ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਵਲੋਂ ਭੇਜੀ ਗਈ ਫੋਟੋ ਅੱਪਲੋਡ ਨਹੀਂ ਹੋਈ ਹੈ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਫੋਟੋ ਦੁਬਾਰਾ ਅੱਪਲੋਡ ਕਰੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸ ਵਾਰੇ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
Posted by pravin Hatgir
Maharashtra
11-03-2019 06:23 PM
Punjab
03-11-2019 06:35 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by kuldeep singh
Punjab
11-03-2019 06:20 PM
Haryana
03-12-2019 12:35 PM
Kuldeep ji Br105 kisam da jhaad lagbhag 72-75 man nikal janda hai.. dhanwad
Posted by Amit Kumar Pandey
Madhya Pradesh
11-03-2019 06:16 PM
Punjab
03-13-2019 03:52 PM
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेन.... (Read More)
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है यह डिपार्टमेंट जहाँ खेतीबाड़ी अफसर बैठता है जैसे जैसे कचिहरी, डी सी दफ्तर बोल देते है उसमें बना होता है, मछली पालन के लिए सेम वाले इलाके में 90% सब्सिडी होती है और बाकि इलाकों में 40% सब्सिडी होती है आप अपने ज़िले के FFDA ( fish farming development agency ) दफ्तर में जाएं जो कि आमतौर पर डी सी दफ्तर या कचिहरी में बना होता है, आप वहां ज़मीन की फर्द, स10th र्टिफिकेट और जहाँ तालाब बनाना है वहां की 2 फोटो लेकर जाएं उसके बाद FFDA के अफ़सर आपको फाइल तैयार करवाएंगे और आपकी ज़मीन देखकर तालाब बनाने का तरीका बताएंगे और फिर आपको 40% सब्सिडी के लिए फाइल तैयार कर लोन अप्लाई के बारे में समझा देंगे
Posted by khushwinder singh
Punjab
11-03-2019 06:09 PM
Punjab
03-11-2019 06:59 PM
khushwinder g kirpa kr ke photo dubaara upload kro. tuhade dwaara bheji gyi photo sahi nahi hai.
Posted by sukhmander Singh
Punjab
11-03-2019 05:56 PM
Punjab
03-11-2019 06:00 PM
isda ostan jhaad 4.5q/acre hai ate eh 60 dina vich pakk k tyar ho jndi hai
Posted by AKIF AKHTER
Bihar
11-03-2019 05:55 PM
Punjab
03-11-2019 06:34 PM
FFDA मछली पालन के लिए ट्रेनिंग उपलब्ध करवाती है हर कृषि विभाग में FFDA का विशेष विभाग होता है जो निशुल्क 5 दिन ट्रेनिंग उपलब्ध करवाता है कृप्या आप अपने जिले के FFDA में जाकर मछली पालन की ट्रेनिंग के लिए देख सकते हैं और ट्रेनिंग का फॉर्म भर सकते हैं जब भी कोई ट्रेनिंग होगी आपको कॉल करके बुला लिया जाएगा यह 5 दिन की नि.... (Read More)
FFDA मछली पालन के लिए ट्रेनिंग उपलब्ध करवाती है हर कृषि विभाग में FFDA का विशेष विभाग होता है जो निशुल्क 5 दिन ट्रेनिंग उपलब्ध करवाता है कृप्या आप अपने जिले के FFDA में जाकर मछली पालन की ट्रेनिंग के लिए देख सकते हैं और ट्रेनिंग का फॉर्म भर सकते हैं जब भी कोई ट्रेनिंग होगी आपको कॉल करके बुला लिया जाएगा यह 5 दिन की निशुल्क ट्रेनिंग होती है यदि आप ट्रेनिंग के बाद मछली पालन शुरू करना चाहते हैं तो आप इससे ज्यादा कमा सकते हैं
Posted by sanchit sharma
Punjab
11-03-2019 05:47 PM
Punjab
03-11-2019 08:30 PM
In onion spray NPK 19.19.19 @1 kg per acre in 100 liter of water its overcome the nutrient deficiency..
Posted by amit sirohi
Uttar Pradesh
11-03-2019 05:38 PM
Punjab
03-22-2019 02:56 PM
मुर्गी पालन शुरू करने से पहले कुछ बेसिक बातों का ध्यान ज़रूर रखें जैसे आप ट्रेनिंग लेकर जरूर शुरू करें जिससे आपको फीड वगैरह का पता चलेगा और क्योंकि पोल्ट्री में बायोसिक्योरिटी रखनी बहुत जरूरी है यदि एक बार बीमारी फार्म पर आ गई तो बहुत कम समय में पूरे फार्म तक पहुंचती है इसलिए सभी बातें ध्यान में रखकर ही यह .... (Read More)
मुर्गी पालन शुरू करने से पहले कुछ बेसिक बातों का ध्यान ज़रूर रखें जैसे आप ट्रेनिंग लेकर जरूर शुरू करें जिससे आपको फीड वगैरह का पता चलेगा और क्योंकि पोल्ट्री में बायोसिक्योरिटी रखनी बहुत जरूरी है यदि एक बार बीमारी फार्म पर आ गई तो बहुत कम समय में पूरे फार्म तक पहुंचती है इसलिए सभी बातें ध्यान में रखकर ही यह काम शुरू करें और यह भी सलाह है कि इस काम को बड़े स्तर पर एकदम से ना शुरू करें एक बार थोड़ी मुर्गियों से शुरू करें बाकी आपको बता दें कि व्यापारिक स्तर पर 5 एकड़ में आप 50000 मुर्गियां रख सकते हैं और इससे आपको कुल 5—7 लाख रूपये तक का खर्चा आ जाएगा यदि नस्ल की बात की जाए तो लेयर में अंडों के लिए BV 300 नस्ल सबसे बढ़िया रहेगी यह नस्ल 18 सप्ताह की उम्र में अंडे देना शुरू कर देती है और 19 सप्ताह से 80वें सप्ताह तक लगभग 370 अंडे देती है प्रति मुर्गी के लिए 1.5—2.0 फुट जगह की जरूरत पड़ती है पहले दिन से लेकर अंडे देने तक एक मुर्गी पर लगभग 250—300 रूपए खर्चा आ जाता है और ब्रॉयलर नस्लों में से वैनकोब 400 नस्ल बड़े स्तर पर सबसे बढ़िया मानी जाती है यह 35 दिनों तक लगभग 3 किलो फीड खाकर तकरीबन 1900—2000 ग्राम की हो जाती है और बाकी ज्यादा गर्मी और ठंड को काफी हद तक सहन करने की क्षमता रखती है बाकी आपके रख रखाव और बीमारियों पर टीकाकरण का खर्चा अलग है यह कुछ प्राथमिक जानकारी थी अंतत आप पहले किसी सफल पोल्ट्री फार्मर से जरूर मिलें आपको अन्य बातों एवं बारीकियों का पता लगेगा लोन लेने के लिए आपके पहले अपने नज़दीकी KVK से ट्रेनिंग लेनी होगी उस ट्रेनिंग के सर्टिफिकेट पर आप लोन के लिए अप्लाई कर सकते हो वहां आपको इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो जाएगी
Posted by inamul
Bihar
11-03-2019 05:37 PM
Punjab
03-11-2019 06:43 PM
Inamul जी चूज़े और इनके बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए आप 04024018687 Poultry Chicks Hydrabad से संपर्क कर सकते है
Posted by HARPINDER SINGH
Punjab
11-03-2019 05:35 PM
Punjab
03-12-2019 09:27 PM
ਹਰਪਿੰਦਰ ਜੀ ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਕੱਲ੍ਹ ਹਲਕੀ ਬੱਦਲਵਾਈ ਰਹੇਗੀ ਪਰਸੋ ਮੀਹ ਪੈਣ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਲਾਹ ਦਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕੇ ਕਣਕ ਨੂੰ ਹਾਲੇ ਪਾਣੀ ਨਾ ਲਾਓ
Posted by Kameshwar sahu
Chattisgarh
11-03-2019 05:34 PM
Punjab
03-22-2019 03:20 PM
सुअर पालन में जाती का कोई बंधन नहीं है यह कोई भी कर सकता है इसमें तो काम करने वाले की सोच के ऊपर ही निर्भर करता है के वह क्या सोचता है जी
Posted by jagjeet singh
Punjab
11-03-2019 05:30 PM
Punjab
03-11-2019 05:34 PM
pau kisan mela 15-16 march 2019 da hai.
Posted by bhag
Punjab
11-03-2019 05:23 PM
Punjab
03-12-2019 07:55 PM
Bhag ji tuci vashe nu Betnesol injection 1ml, Monocef injection 1gm lgwao, isde nal farak pann lgg jawega, baki tuci boric acid di varto krde rho, ehna nal jldi thik ho jawega.
Posted by khushwinder singh
Punjab
11-03-2019 05:21 PM
Punjab
03-11-2019 06:02 PM
Khushwinder singh g tuhade dobara bheji gyi photo upload nhi hoyi hai.kirpa krke photo dobara bhejo ta jo tuhanu poori jankari ditti ja ske g..Dhanwaad
Posted by Devendra patel
Chattisgarh
11-03-2019 05:20 PM
Punjab
03-13-2019 12:02 PM
Machli ko 5 % of body weight ke hissab se daana dena chahiye.
Posted by sanat jain
Madhya Pradesh
11-03-2019 05:16 PM
Punjab
03-12-2019 09:36 PM
सनत जी सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए .... (Read More)
सनत जी सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्टी का pH 6.5-8.5 होना चाहिए आप इसकी किस्मे जैसे RC-2, RC-16, RC-36, RC-20, RC-23, RC-37 and CT-1,MDB-13 and MDB-14 की बिजाई कर सकते है सफेद मूसली के लिए अच्छी तरह से तैयार बैडों की जरूरत होती है बिजाई से पहले ज़मीन की तैयारी के लिए एक बार 2-3 गहरी जोताई करें ज़मीन की तैयारी आम-तौर पर अप्रैल-मई के महीने में की जाती है सफेद मूसली की बिजाई के लिए उचित समय जून से अगस्त तक का होता है पौधे के विकास के अनुसार पौधों के बीच 10x12 इंच का फासला रखें इसकी बिजाई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है इसकी बिजाइसके प्रजनन के लिए आम-तौर पर गांठों या बीजों का प्रयोग करें इसके उचित विकास के लिए 450 किलो बीजों का प्रयोग करें ई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है सफेद मूसली की बिजाई 1.2 मीटर चौड़े और आवश्यकता अनुसार लम्बे बैडों पर करें नए पौधे तैयार करने वाले बैड अच्छी तरह से तैयार करें इसकी बिजाई छिड़काव के द्वारा की जाती है बिजाई के बाद बैडों को हल्की मिट्टी से ढक दें बढ़िया विकास के लिए मलचिंग भी की जा सकती है बीज 5-6 दिनों में अंकुरण होना शुरू होना कर देते है और पौधे बिजाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई से 24 घंटे पहले बैडों को पानी दें, ताकि नए पौधों को आसानी के साथ उखाड़ा जा सके खेत की तैयारी समय, रूड़ी की खाद 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ गोबर डालें और मिट्टी में मिलाये जैविक खादें जैसे कि रूड़ी की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ डालर मिट्टी में मिलाये सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो, मिउरेट ऑफ़ पोटाश 50 किलो और हड्डियों का चूरा 100 किलो प्रति एकड़ डालें 3 महीने तक कसी की सहायता के साथ गोड़ाई करें और मेंड़ के साथ मिट्टी लगाएं अंकुरण के बाद 2-3 बार करें अगर पौधे के विकास में कोई कमी दिखाई दें, तो तुरंत आवश्यक स्प्रे करें बढ़िया विकास के लिए 20-22 दिनों के फासले पर सिंचाई करें बारिश की ऋतु में, सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर बारिश ना होने पर सिंचाई सही फासले पर करें सिंचाई जलवायु और मिट्टी पर भी निर्भर करती है इस फसल के पौधे बिजाई से लगभग 90 दिन के बाद फल देना शुरू कर देती है इसकी कटाई सितम्बर-अक्तूबर महीने में की जाती है कटाई पत्ते पीले पड़ने और सूखने पर की जाती है
Posted by LAKHWINDER SINGH
Punjab
11-03-2019 05:12 PM
Punjab
03-12-2019 09:19 PM
ਇਹ ਸਾਹੀਵਾਲ ਨਸਲ ਹੀ ਹੈ.