Posted by Sourav Kumar Sharma
Jharkhand
13-03-2019 11:10 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है

Posted by sahil
Punjab
13-03-2019 11:16 AM
यह फसल रेतली दोमट से चिकनी किसी भी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं देर से बीजने वाली किस्मों के लिए चिकनी दोमट मिट्टी को पहल दी जाती है जल्दी पकने वाली के लिए रेतली दोमट का प्रयोग करें मिट्टी की पी एच 6-7 होनी चाहिए मिट्टी की पी एच बढ़ाने के लिए उसमें चूना डाला जा सकता है प्रसिद्ध किस्में : पूसा सनोबाल 1, पूसा .... (Read More)
यह फसल रेतली दोमट से चिकनी किसी भी तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती हैं देर से बीजने वाली किस्मों के लिए चिकनी दोमट मिट्टी को पहल दी जाती है जल्दी पकने वाली के लिए रेतली दोमट का प्रयोग करें मिट्टी की पी एच 6-7 होनी चाहिए मिट्टी की पी एच बढ़ाने के लिए उसमें चूना डाला जा सकता है प्रसिद्ध किस्में : पूसा सनोबाल 1, पूसा सनोबाल के-1 , पंत शुभ्रा खेत को अच्छी तरह जोतकर नर्म करें अच्छी तरह गली हुई रूड़ी की खाद आखिरी जोताई के समय डालें अगेती किस्मों के लिए जून-जुलाई रोपाई के लिए सबसे अच्छा समय है और पिछेती किस्मों के लिए अगस्त से मध्य सितंबर और अक्तूबर से नवंबर का पहला सप्ताह रोपाई के लिए अच्छा समय है अगेती किस्मों के लिए 45x45 से.मी. और पिछेती किस्मों के लिए 45x30 से.मी. का फासला होना चाहिए बीजों को 1-2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के लिए डिबलिंग विधि और रोपण विधि का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीजों को बोयें और आवश्यकतानुसार खादें और सिंचाई दें बिजाई के 25-30 दिन बाद पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं रोपाई के लिए 3-4 सप्ताह पुराने पौधों का प्रयोग करें अगेते मौसम की किस्मों के लिए 500 ग्राम, जबकि पिछेते और मुख्य मौसम की किस्मों के लिए 250 ग्राम बीज की प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है बिजाई से पहले गर्म पानी (30 मिनट के लिए 50 डिगरी सैल्सियस) या स्ट्रैप्टोसाइक्लिन 0.01 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 2 घंटे के लिए बीजों को इस घोल में भिगोकर रखें उपचार के बाद बीजों को छांव में सुखाएं और फिर उन्हें बैड पर बो दें रबी के मौसम में काली फंगस का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए मरकरी क्लोराइड से बीजों का उपचार करना जरूरी होता है इसके लिए मरकरी क्लोराइड 1 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 30 मिनट के लिए बीजों को इस घोल में भिगोकर रखें और फिर छांव में सुखाएं रेतली मिट्टी में ये फसल उगाने से तना गलन का खतरा रहता है इसके लिए कार्बेनडाज़िम 50 प्रतिशत डब्लयु पी 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें खेत में 40 टन पूरी तरह गली हुई रूड़ी की खाद डालें और साथ ही 50 किलो नाइट्रोजन, 25 किलो फासफोरस और 25 किलो पोटाश (110 किलो यूरिया, 155 किलो सुपरफासफेट और 40 किलो म्यूरेटे ऑफ पोटाश) सारी रूड़ी की खाद, सुपरफासफेट और म्यूरेटे ऑफ पोटाश और आधा यूरिया फसल रोपाई से पहले डालें बाकी बचा यूरिया बीजने के चार सप्ताह बाद डाल देना चाहिए
अच्छी पैदावार लेने के लिए और अधिक फूलों के लिए 5-7 ग्राम घुलनशील खादें (19:19:19) प्रति लि. का प्रयोग करें रोपाई के 40 दिनों के बाद 4-5 ग्राम 12:16:0, नाइट्रोजन और फासफोरस, 2.5-3 ग्राम लघु तत्व और 1 ग्राम बोरोन प्रति लि. का छिड़काव करें फूल की अच्छी गुणवत्ता के लिए 8-10 ग्राम घुलनशील खादें (13:00:45) प्रति लि. पानी में मिलाएं मिट्टी का परीक्षण करवाएं बीजने के 30-35 दिनों के बाद मैगनीश्यिम की कमी को पूरा करने के लिए 5 ग्राम मैगनीश्यिम सलफेट प्रति लि. प्रयोग करें कैल्शियम की कमी को पूरा करने के लिए कैल्शियम नाइट्रेट 5 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर 30-35 दिनों के बाद डालें कभी कभी बेरंग तने देखे जा सकते हैं फूल भी भूरे रंग के हो जाते हैं और पत्ते मुड़ने लग जाते हैं यह बोरोन की कमी के कारण होता है इसके लिए बोरैक्स 250-400 ग्राम प्रति एकड़ में डालें नदीनों को रोकने के लिए फसल को खेत में लगाने के बाद फलुक्लोरालिन(बसालिन) @800 मि.ली. को 150 लि. पानी में मिलाकर छिड़काव करें और 30-40 दिनों के बाद रोपाई करें फसल को खेत में लगाने से 1 दिन पहले पैंडीमैथलीन 1 लि. प्रति एकड़ का छिड़काव करें रोपाई के बाद तुरंत पहली सिंचाई करें मिट्टी, जलवायु, के आधार पर गर्मियों में 7-8 दिनों के अंतराल पर और सर्दियों में 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें पूरा फूल विकसित होने पर सुबह के समय फूलों की कटाई की जा सकती है और कटाई के बाद फूलों को ठंडी जगह पर रखना चाहिए कटाई के बाद फूलों को आकार के अनुसार छांट लें

Posted by vikash
Uttarakhand
13-03-2019 11:32 AM
हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते हैं, मोती परियोजना .... (Read More)
हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते हैं, मोती परियोजना की लागत लगभग 4 लाख रुपये होगी जब व्यापारिक मोती कृषि परियोजना में लाभ की बात आती है, तो आप आदर्श एक्वाकल्चर प्रबंधन प्रथाओं के तहत 50 से 60% की उम्मीद कर सकते हैं हालाँकि, यदि आप परियोजना में कड़ी मेहनत करते हैं तो भी 100% लाभ संभव है मुख्य रूप से तीन प्रकार के मोती होते हैं • प्राकृतिक मोती: इस प्रकार में, मोती का आकार विदेशी शरीर के मूल आकार पर निर्भर करता है • बनावटी मोती: ये बनावटी रूप से बनाए जाते हैं और एक सिंथेटिक सामग्री के साथ लेपित होते हैं • संवर्धित मोती (मीठे पानी): ये ताजे पानी जैसे तालाबों, नदियों आदि में सुसंस्कृत मोती हैं आप इस प्रकार से वांछित आकार प्राप्त कर सकते हैं • आपके पास तालाब में कस्तूरी का अच्छा स्रोत होना चाहिए • आपके पास मोती संस्कृति में तकनीक के ग्राफ्टिंग के कुछ कौशल होने चाहिए क्योंकि यह व्यापारिक मोती कृषि परियोजना के लिए आवश्यक है आप ताजे पानी मोती उत्पादन के इन सुझावों को जानने के लिए पास के मोती उत्पादन करने वालों के फार्म देख सकते हैं सबसे पहले आपको 3 दिनों के व्यावहारिक ट्रेनिंग में भाग लेना होगा अपने स्थान के अनुसार आप विनोद कुमार से ट्रेनिंग प्राप्त कर सकते हैं वह सफल मोती उत्पादन करने वाले किसान हैं वह नए किसानों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं उनका संपर्क नंबर 9050555757 है धन्यवाद
Posted by NIRANJAN LAXMAN JAMBHALE
Maharashtra
13-03-2019 11:33 AM
यदि गिर गाय 15—16 लीटर वाली है तो इसकी कीमत 40—45000 तक हो सकती है
Posted by komalsingh
Uttar Pradesh
13-03-2019 11:35 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है

Posted by vikash
Uttarakhand
13-03-2019 11:35 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by komalsingh
Uttar Pradesh
13-03-2019 11:38 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है

Posted by SWAGAT CHAVAN
Maharashtra
13-03-2019 11:38 AM
स्वागत चवण जी चूजे लेने के लिए आप Jogesh hire 9075749975,9049218008, ICAR - Directorate of Poultry Research, राजेंद्रनगर, हैदराबाद 500 030, तेलंगाना, इंडिया, फोन: +91-40-24015651, 24017000 (सोमवार से शनिवार, except 2nd Saturdays of each month & National Holidays) से सम्पर्क कर सकते है

Posted by Babbal
Punjab
13-03-2019 11:45 AM
Dear Sir kmaad di fasal vich beejayi de time Reagent(Fipronil 0.3G) @10kg prati acre nu 20 kg mitti vich mila ke pa skde ho.Carbofuran di beejayi de time sifarish nhi kiti jndi hai g.
Posted by ਗੁਰਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
13-03-2019 11:52 AM

Posted by anish magotra
Jammu & Kashmir
13-03-2019 12:00 PM
अनीश मगोत्रा जी हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते है.... (Read More)
अनीश मगोत्रा जी हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते हैं, मोती परियोजना की लागत लगभग 4 लाख रुपये होगी जब व्यापारिक मोती कृषि परियोजना में लाभ की बात आती है, तो आप आदर्श एक्वाकल्चर प्रबंधन प्रथाओं के तहत 50 से 60% की उम्मीद कर सकते हैं हालाँकि, यदि आप परियोजना में कड़ी मेहनत करते हैं तो भी 100% लाभ संभव है मुख्य रूप से तीन प्रकार के मोती होते हैं • प्राकृतिक मोती: इस प्रकार में, मोती का आकार विदेशी शरीर के मूल आकार पर निर्भर करता है • बनावटी मोती: ये बनावटी रूप से बनाए जाते हैं और एक सिंथेटिक सामग्री के साथ लेपित होते हैं • संवर्धित मोती (मीठे पानी): ये ताजे पानी जैसे तालाबों, नदियों आदि में सुसंस्कृत मोती हैं आप इस प्रकार से वांछित आकार प्राप्त कर सकते हैं • आपके पास तालाब में कस्तूरी का अच्छा स्रोत होना चाहिए • आपके पास मोती संस्कृति में तकनीक के ग्राफ्टिंग के कुछ कौशल होने चाहिए क्योंकि यह व्यापारिक मोती कृषि परियोजना के लिए आवश्यक है आप ताजे पानी मोती उत्पादन के इन सुझावों को जानने के लिए पास के मोती उत्पादन करने वालों के फार्म देख सकते हैं सबसे पहले आपको 3 दिनों के व्यावहारिक ट्रेनिंग में भाग लेना होगा अपने स्थान के अनुसार आप विनोद कुमार से ट्रेनिंग प्राप्त कर सकते हैं वह सफल मोती उत्पादन करने वाले किसान हैं वह नए किसानों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं उनका संपर्क नंबर 9050555757 है धन्यवाद
Posted by ਗੁਰਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
13-03-2019 12:02 PM
gurjeet singh ji ehh powder pashua vich mineral di kami puuri krda hai, iss nal sarir da vdia vikas hunda hai pashu di growth vdia hundi hai iss nu tuci 50gm rojana de hisab nal de skde ho ..
Posted by Mr. Shakya
Uttar Pradesh
13-03-2019 12:03 PM
Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कार.... (Read More)
Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है
Posted by Pardeep singh maan
Punjab
13-03-2019 10:30 AM
ਫੈਟ ਘਟਣ ਦੇ ਕਈ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੇ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ ਸਹੀ ਖੁਰਾਕ ਨਾ ਮਿਲਣਾ , ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਨਾ ਹੋਣਾ, ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ ਵਿਚ ਦਿਕੱਤ ਹੋਣਾ, ਇਹਨਾਂ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਘਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਇਸਦਾ ਸੰਬੰਧ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਨਸਲ ਤੇ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਫੈਟ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵਧਿਆ ਹੋਵੇਗਾ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸਦਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਹੀ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਹੋ.... (Read More)
ਫੈਟ ਘਟਣ ਦੇ ਕਈ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੇ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ ਸਹੀ ਖੁਰਾਕ ਨਾ ਮਿਲਣਾ , ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਨਾ ਹੋਣਾ, ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ ਵਿਚ ਦਿਕੱਤ ਹੋਣਾ, ਇਹਨਾਂ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਘਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਇਸਦਾ ਸੰਬੰਧ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਨਸਲ ਤੇ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਫੈਟ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵਧਿਆ ਹੋਵੇਗਾ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸਦਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਹੀ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਹੋਵੇਗੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਸ ਨਸਲ ਦਾ ਹੈ, ਫੈਟ ਵਧਾਾਉਣ ਲਈ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਦੇਸੀ ਕਪਾਹ ਦੇ ਵੜੇਵੇ ਚਾਰੋ ਜੀ ਅਤੇ ਬੀਟੀ ਕਾਟਨ ਦੀ ਵਰਤੋ ਬਿਲਕੁੱਲ ਨਾ ਕਰੋ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਤੁਸੀ ਦਾਣੇ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਕਰਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਲਾਈਵਈਸਟ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੁੱਧ ਚੋਣ ਤੋਂ 10 ਮਿੰਟ ਪਹਿਲਾ ਘੋਲ ਕੇ ਪਾਓ ਇਹ ਲਾਈਵਈਸਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਜਿਆਦਾ ਟਾਈਮ ਨਹੀ ਪਿਆ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਤੁਸੀ ਕੱਦੂ ਜਾਂ ਲੋਕੀ ਖਵਾਓ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਇਹ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਠੀਕ ਹੈ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ Fatplus ਜਾਂ Fatmax 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ , ਇਸ ਨਾਲ ਫੈਟ ਵਿੱਚ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ
Posted by ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
13-03-2019 10:25 AM
harpal singh ji tusi sahiwal cow lain layi Sukhvinder Dhamherhi ji nal 9781800637 number te v sampark kar sakde ho.

Posted by kulvir singh
Punjab
13-03-2019 10:00 AM
ਕੁਲਵੀਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਇਸਨੂੰ ਖਾਦਾਂ ਕਿਹੜੀਆਂ ਪਾਈਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਅਤੇ ਇਸਦਾ ਆਕਾਰ ਪਾਣੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਲਗਾਉਣ ਕਰਕੇ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਸਨੂੰ ਪਾਣੀ ਸਹੀ ਸਮੇ ਅਤੇ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਲਾਓ

Posted by Kuldeep Jawandha
Punjab
13-03-2019 08:22 AM
ਕੁਲਦੀਪ ਜੀ ਇਹ ਫੰਗਸ ਨਾਲ ਹੀ ਸੁਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ M-45 @4 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ

Posted by jaswinder singh
Punjab
13-03-2019 08:17 AM
jaswinder ji makki di kisam J1006 kisam 60-70 dina tak ktayi de layi tyar ho jandi hai.

Posted by khushwinder singh
Punjab
13-03-2019 07:18 AM
Khuswinder ji eh fungus de karn ho rahe han isde layi tuc M-45@4gm prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by Gurjant singh
Punjab
13-03-2019 10:20 AM
Gurjant singh ji Mellifera Bees hi lag rahi hai to dabeya de vich payi jandi hai ji.
Posted by ਡਾਕਟਰ ਮੇਜਰ ਸਿੰਘ ਧਾਲੀਵਾਲ
Punjab
13-03-2019 10:07 AM
ਮੇਜਰ ਜੀ ਕਣਕ ਵਿਚ ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ ਥਾਇਆਮੈਥੋਕਸਮ@80 ਗ੍ਰਾਮ ਜਾਂ ਇਮੀਡਾਕਲੋਪ੍ਰਿਡ@40-60 ਮਿ.ਲੀ. ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿਚ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ

Posted by kulvir singh
Punjab
13-03-2019 09:44 AM
ਕੁਲਵੀਰ ਜੀ ਇਹ ਕੋਈ ਬਿਮਾਰੀ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਇਹ ਸਿਰਫ ਜਦੋ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਲਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਾ ਇਹ ਏਦਾਂ ਦੇ ਹੋਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਸਹੀ ਸਮੇ ਅਤੇ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਲਾਓ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Jaspreet singh
Punjab
13-03-2019 09:44 AM
ਜਸਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦੇ ਵਿਚ ਤੁਸੀ ਕਿਸਮਾਂ SML 668,SML 832 ,TMB 37 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਲਗਭਗ 60 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by virpal singh
Punjab
13-03-2019 09:44 AM
virpal singh ji tusi Os nu powder Buffzon 200gm 50gm rojana deo powder Mamidum 50gm rojana 5 din tak deo ji.
Posted by GURLAL SINGH GILL
Punjab
13-03-2019 09:18 AM
Gurlal ji tuc isde uper quinalphos@800ml nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo. isde nal sundi di roktham ho jayegi.
Posted by Amandeep singh Dhaliwal 97804 10102
Punjab
13-03-2019 09:13 AM
Amandeep ji fal fungus de karn digna shuru ho janda hai. isde layi tuc planofix@4ml nu 15 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo. dhanwad
Posted by Navjot singh
Punjab
13-03-2019 09:01 AM
ਨਵਜੋਤ ਜੀ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ DKC 9108 ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30-32 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਪੱਕਣ ਦੇ ਲਈ 115 -122 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by pinder sidhu
Punjab
13-03-2019 06:52 AM
ਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕੱਦੂ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ ਪੰਜਾਬ ਬਹਾਰ, ਪੰਜਾਬ ਬਰਕਤ, ਪੰਜਾਬ ਲੌਂਗ, ਪੰਜਾਬ ਕੋਮਲ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by ਰਮਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
13-03-2019 06:53 AM
Ramandeep ji tuc chare vali makki nu march mahine vich beej sakde ho is to ilava pkavi makki nu beejan da sma february-march mahine da hunda hai. dhanwad

Posted by parmjit singh
Punjab
13-03-2019 07:13 AM
Parmjit ji Choohya(ਚੂਹੇ) di roktham de lyi tuc 1 kg anaaz da aata ja daane lao. uss vich 20 gm banaspati Oil + 20 gm Boora Khand + 25 gm Zinc phosphide milao...ihna 4 cheeza nu changi trah mila k tyaar krn ton baad jithe jithe choohe hnn othe rakh deo. Banaspati tel khushboodar hona chaida hai tan jo choohe uss di khushboo wal jyaada aun.
Posted by Gurmeet Sidhu
Punjab
13-03-2019 07:14 AM
Kadaknath murgi year vich 120 to 150 egg dindi hai ji.

Posted by ਰਾਜਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
13-03-2019 07:24 AM
ਉਸ ਨੂੰ Injection Gard plus 4.5gm, Injection Megludyne 20ml, Injection Isoflud 5ml ਲਗਵਾਓ ਅਤੇ ਨਾਲ ਹੀ powder Mamidum 50gm ਰੋਜਾਨਾ 5 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ ਜੀ.

Posted by ਰਾਜਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
13-03-2019 07:27 AM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਇੰਜੈਕਸ਼ਨ Amoxirum Fort 4.5gm, ਇੰਜੈਕਸ਼ਨ Megludyne 20ml, ਇੰਜੈਕਸ਼ਨ Isoflud 5ml ਲਗਾਓ ਤੇ ਨਾਲ Bolus Sarrakind plus ਦੀਆ 2 ਗੋਲੀਆ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦਿਓ
Posted by Harpinder Singh
Punjab
13-03-2019 07:28 AM
Harpinder ji kanak bijai to lagbhag 85 k din bad nisran lag jandi hai. dhanwad

Posted by kuldeep kumar
Punjab
13-03-2019 08:23 AM
ਹਾਜੀ ਤੁਸੀ ਇਸ ਲਿੰਕ ਤੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰਕੇ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੀ ਵੈਬਸਾਈਟ ਤੋਂ ਵੀ ਫਾਰਮ ਡਾੳੇੂਨਲੋਡ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ http://www.gadvasu.in/download_center

Posted by ravi Sidhu
Haryana
13-03-2019 08:27 AM
ravi Sidhu ji bathinda KVK ka address aap note kar sakte hai KVK Bathinda
Associate Director ( Training)
Krishi Vigyan Kendra,
Punjab Agricultural University,
Bathinda
Phone
0164-2215619

Posted by pradeep
Haryana
13-03-2019 08:54 AM
प्रदीप जी घीया की बेल गमले में लगाने के लिए आप बड़े गमले का इस्तेमाल करें लेकिन इसमें एक समस्या आती है जब बेल बढ़ना शुरू करती है और फल लगना शुरू होता है तो इसे किसी सहारे की जरुरत पड़ती है, बेल के बिना पौधे जैसे भिंडी टमाटर यह सब बड़े गमले में लगा सकते है बेल वाले पौधे में यही समस्या आती है कि इसे सहारे की जरुरत होत.... (Read More)
प्रदीप जी घीया की बेल गमले में लगाने के लिए आप बड़े गमले का इस्तेमाल करें लेकिन इसमें एक समस्या आती है जब बेल बढ़ना शुरू करती है और फल लगना शुरू होता है तो इसे किसी सहारे की जरुरत पड़ती है, बेल के बिना पौधे जैसे भिंडी टमाटर यह सब बड़े गमले में लगा सकते है बेल वाले पौधे में यही समस्या आती है कि इसे सहारे की जरुरत होती है धन्यवाद

Posted by Mukesh Patel
Gujarat
13-03-2019 04:43 AM
मुकेश पटेल जी कृपया अपने सवाल विस्तार से पूछें कि आप फंगस के उपचार या कुछ कीट के उपचार के बारे में जानना चाहते हैं ताकि हम आपको उचित जानकारी प्रदान कर सकें, धन्यवाद

Posted by jayendrasinh
Gujarat
13-03-2019 12:42 AM
हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते हैं, मोती परियोजना .... (Read More)
हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते हैं, मोती परियोजना की लागत लगभग 4 लाख रुपये होगी जब व्यापारिक मोती कृषि परियोजना में लाभ की बात आती है, तो आप आदर्श एक्वाकल्चर प्रबंधन प्रथाओं के तहत 50 से 60% की उम्मीद कर सकते हैं हालाँकि, यदि आप परियोजना में कड़ी मेहनत करते हैं तो भी 100% लाभ संभव है मुख्य रूप से तीन प्रकार के मोती होते हैं • प्राकृतिक मोती: इस प्रकार में, मोती का आकार विदेशी शरीर के मूल आकार पर निर्भर करता है • बनावटी मोती: ये बनावटी रूप से बनाए जाते हैं और एक सिंथेटिक सामग्री के साथ लेपित होते हैं • संवर्धित मोती (मीठे पानी): ये ताजे पानी जैसे तालाबों, नदियों आदि में सुसंस्कृत मोती हैं आप इस प्रकार से वांछित आकार प्राप्त कर सकते हैं • आपके पास तालाब में कस्तूरी का अच्छा स्रोत होना चाहिए • आपके पास मोती संस्कृति में तकनीक के ग्राफ्टिंग के कुछ कौशल होने चाहिए क्योंकि यह व्यापारिक मोती कृषि परियोजना के लिए आवश्यक है आप ताजे पानी मोती उत्पादन के इन सुझावों को जानने के लिए पास के मोती उत्पादन करने वालों के फार्म देख सकते हैं सबसे पहले आपको 3 दिनों के व्यावहारिक ट्रेनिंग में भाग लेना होगा अपने स्थान के अनुसार आप विनोद कुमार से ट्रेनिंग प्राप्त कर सकते हैं वह सफल मोती उत्पादन करने वाले किसान हैं वह नए किसानों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं उनका संपर्क नंबर 9050555757 है धन्यवाद

Posted by chauhan pruthvirajsinh
Gujarat
13-03-2019 12:06 AM
Mentha ke beejayi ka time Mid January se last January tkk ka hota hai.bt irrigation water ki deficiency wale khet mein April mein paneeri se v lgaya ja skta hai.eski beejayi ke liye @2 quiental suckers per acre mein lgayi jati hai.eski varieties Kosi, Punjab Spierment,Russian mint lga skte ho g..
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