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Posted by Devendra Singh Rawat
Rajasthan
14-03-2019 07:46 PM
Punjab
03-16-2019 11:34 AM
Devendra Singh Rawat ji Heavy bone good looking Rottweiler market me 8000 to 12000 tak mil jata hai.
Posted by ਹਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
14-03-2019 07:40 PM
Punjab
03-14-2019 08:01 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਦ Concimax ਗੋਲੀਆਂ ਦੇਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ , ਇਸਦੀ 1-1 ਗੋਲੀ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ ਅਤੇ 14 ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਹ Intas ਕੰਪਨੀ ਦਾ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ, ਇਹ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਗੱਭਣ ਰਹਿਣ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦਿਆਂ ਹੈ ਅਤੇ ਅੰਦਰ ਤੋਂ ਇਨਫੈਕਸ਼ਨ ਵੀ ਖਤਮ ਹੁੰਦਾ ਹੈ.
Posted by Abhishek Pandey
Chattisgarh
14-03-2019 07:36 PM
Maharashtra
03-14-2019 09:45 PM
खुम्ब की खेती अच्छे हवादार कमरे, शैड, बेसमैंट, गैरेज आदि में की जा सकती है पैडी स्ट्रॉ खुम्ब को बाहर शैड वाले स्थान पर उगाया जा सकता है भारत में तीन प्रकार के खुम्ब को उगाया जा सकता है बटन खुम्ब इस किस्म को पूरे विश्व में उगाया जाता है और पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, सफेद बटन खुम्ब में उच्च मात्रा में प्रोटीन .... (Read More)
खुम्ब की खेती अच्छे हवादार कमरे, शैड, बेसमैंट, गैरेज आदि में की जा सकती है पैडी स्ट्रॉ खुम्ब को बाहर शैड वाले स्थान पर उगाया जा सकता है भारत में तीन प्रकार के खुम्ब को उगाया जा सकता है बटन खुम्ब इस किस्म को पूरे विश्व में उगाया जाता है और पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, सफेद बटन खुम्ब में उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है इसका ताजा और डिब्बा बंद उपभोग किया जा सकता है इसकी औषधीय विशेषताएं हैं हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रदेष, तामिलनाडू और कर्नाटक मुख्य खुम्ब उगाने वाले राज्य हैं यू पी में खुम्ब को उगाने के लिए नवंबर से मार्च का महीना उपयुक्त होता है अच्छी वृद्धि के लिए इसे 22-25 डिगरी सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है और खुम्ब निकलते समय इसे 14-18 डिगरी सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है स्ट्रॉ खुम्ब यह पूरे विश्व में उगाई जाने वाली तीसरी सबसे प्रसिद्ध किस्म है इसे कपास के व्यर्थ मिश्रण के साथ पराली की छोटी मात्रा के ऊपर उगाया जाता है यह छोटे आकार की खुम्ब होती हैं जो कि कोण के आकार की होती हैं इसकी टोपी ऊपर से गहरे भूरे रंग की होती है भारत में इसकी तीन प्रजातियां हैं V. diplasia, V. volvacea and V. esculenta इन प्रजातियों के अलावा उत्तर प्रदेश में Volvariella volvacea की खेती की जाती है इसे “चाइनीज़” या “पैडी” खुम्ब के रूप में भी जाना जाता है इन्हें बड़े स्तर पर उष्णकटिबंधीय और उपउष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है इन्हें 35 डिगरी सेल्सियस के तापमान पर उगाया जा सकता है इस किस्म की खुम्ब की खेती के लिए अप्रैल से सितंबर का समय उपयुक्त होता है ओइस्टर खुम्ब या ढींगरी खुम्ब यह सामान्य और खाने योग्य खुम्ब है इसका गुद्दा नर्म, मखमली बनावट और अच्छा स्वाद होता है यह प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी1 से बी 12 का उच्च स्त्रोत है इस किस्म की सभी प्रजातियां और किस्में खाने योग्य हैं सिर्फ P. olearius और P. nidiformis को छोड़कर, ये ज़हरीली होती हैं उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिमी बंगाल और उत्तर पूर्व के पहाड़ी क्षेत्र मुख्य राज्य हैं जो खुम्ब का उत्पादन करते हैं इस खुम्ब को उगाने का उपयुक्त समय अक्तूबर से मार्च तक का है यह 20-30 डिगरी सेल्सियस तापमान के साथ 80-85 प्रतिशत आर्द्रता को सहने योग्य है स्पान (बीज) की तैयारी सबस्ट्रेट की तैयारी सबस्ट्रेट की स्पॉनिंग फसल का प्रबंधन स्पान की तैयारी स्पान / खुम्ब के बीजों की तैयारी ये बाज़ार में उपलब्ध होते हैं इन्हें खेत में भी तैयार या उत्पादन किया जा सकता है ताजे तैयार किए हुए खुम्ब के बीज प्रयोग के लिए सबसे अच्छे होते हैं सबस्ट्रेट की तैयारी खुम्ब की खेती बडी़ मात्रा में खेत के व्यर्थ पदार्थ और अन्य सामग्री जैसे व्यर्थ कागज़, कपास का व्यर्थ पदार्थ, अनाज की पराली आदि पर की जा सकती है धान की पराली और गेहूं की पराली मुख्य तौर पर प्रयोग होने वाली सामग्री हैं जिनका प्रयोग सब्स्ट्रेट की तैयारी के लिए किया जाता है ओइस्टर को पॉलीथीन बैग में उगाया जाता है कार्बेनडाज़ि़म 7 ग्राम के साथ फॉरमालीन 125 मि.ली. को 100 लीटर पानी में मिलाकर डालें और एक मिश्रण तैयार करें ऊपर दिए गए मिश्रण में 20 किलो गेहूं की पराली डालें और इसे 18 घंटे के लिए रख दें 18 घंटों के बाद गेहूं की पराली को हटा दें और इसे एक सतह पर रखें और इसमें से अतिरिक्त पानी को निकाल दें गेहूं की पराली में 2 प्रतिशत बीज डालें और इस मिश्रण को 15x12 इंच के पॉलीथीन बैग में भरें पॉलीथीन बैग 2 मि.मी. अर्द्ध व्यास से छिद्रित हो हवा परिसंचरण के लिए पूरी सतह पर लगभग 4 सैं.मी. के छेद हों उसके बाद बैग को 80-85 प्रतिशत आर्द्रता वाले कमरे में शैल्फ पर रखें कमरे का तापमान 24-26 डिगरी सेल्सियस होना चाहिए बैगों को सुरक्षित जगह पर रखें और पानी के छिड़काव द्वारा इनमें नमी बनाए रखें पराली पर सफेद रंग की सूती माइसीलियम विकसित हो जाती है गेहूं की पराली अपना रंग बदलकर भूरे रंग की हो जाती है और आवाज करती है और सिकुड़ जाती है इस अवस्था में पॉलीथीन को काट कर निकाल दें पॉलीथीन में पराली सिकुड़ जाती है और बेलनाकार हो जाती है इन बेलनाकार पराली के आकार को शैल्फ पर लगाएं और इनमें पानी के छिड़काव द्वारा नमी बनाए रखें स्पॉनिंग के 18-20 दिन बाद पहली खुम्ब दिखनी शुरू हो जाती है एक सप्ताह के अंतराल पर दो से तीन खुम्ब दिखनी शुरू हो जायेंगी जब खुम्ब की टोपी मुड़ना शुरू हो जाये तो खुम्ब की तुड़ाई कर लें तुड़ाई के लिए तीखे चाकू का प्रयोग करें और इसे उंगलियों से मरोड़ कर भी तोड़ा जा सकता है इसे ताजा भी खाया जा सकता है या धूप में या मशीनी ड्रायर से सुखाकर इसका प्रयोग किया जा सकता है 45-60 दिनों के अंदर अंदर एक टन सूखी पराली से 500 किलो से ज्यादा ताजी खुम्ब प्राप्त की जा सकती है
Posted by syed javed ali
Maharashtra
14-03-2019 07:31 PM
Punjab
03-15-2019 07:13 PM
आप इस लीवर टोनिक को 15ml/100 birds के हिसाब से दे सकते है इसे पानी में मिलाकर दे सकते है पानी आप उनके पीने के हिसाब से डाल सकते है
Posted by Satinder Bains
Punjab
14-03-2019 07:22 PM
Maharashtra
03-15-2019 08:38 AM
ਸਤਿੰਦਰ ਜੀ ਚੂਨਾ ਕਲੀ ਨੂੰ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਹ ਆਮ ਹੀ ਮਾਰਕਿਟ ਵਿਚ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਨੂੰ ਬੋਰਡੋ ਪੇਸਟ ਬਣਾਉਣ ਵਿੱਚ ਇਸਤੇਮਾਲ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ
Posted by devendra bihone
Madhya Pradesh
14-03-2019 06:49 PM
Punjab
03-15-2019 06:03 AM
यह ज्यादा नमी के कारण पीले हो रहे है इसके लिए आप इसमें पानी सूखा कर saaf@500gm को 150 लीटर पानी के साथ मिलाकर स्प्रे करें
Posted by Prakash Singh
Uttar Pradesh
14-03-2019 06:30 PM
Maharashtra
03-18-2019 01:12 PM
प्रकाश जी गुलाब फूलों में सबसे मह्त्वपूर्ण फूल है गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए प्.... (Read More)
प्रकाश जी गुलाब फूलों में सबसे मह्त्वपूर्ण फूल है गुलाब की खेती के लिए जैविक तत्वों से भरपूर और अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी अनुकूल होती है बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए यह जल जमाव को सहनयोग्य नहीं है, इसलिए उचित जल निकास का प्रबंध होना चाहिए और अनावश्यक पानी को निकाल देना चाहिए प्रसिद्ध किस्में :- इसमें तीन मुख्य समूह हैं,1) प्रजातियां 2) पुराने बाग़ 3) आधुनिक या नए गुलाब Species roses: इसे जंगली गुलाब के नाम से भी जाना जाता है इस तरह के फूलों की पांच पंखुड़ियां और रंग चमकीला होता है ये सर्दियों में ज्यादा समय तक रहती हैं जैसे कि: Rosa rugose: इनका मूल स्थान जापान है यह किस्म प्रकृति रूप में कठोर होती हैं इसके फूल बेहद सुगंधित होते हैं, पत्ते झुर्रीदार चमड़े की तरह होते हैं ये घनी और मोटी झाड़ियों में उगते हैं रासायनिक स्प्रे का उपयोग ना करें, क्योंकि इस पर स्प्रे करने से सारे पत्ते झड़ जाते हैं Banksiae: इसे लेडी बैंक केनाम से भी जाना जाता है और इसका मूल स्थान चीन है फूल छोटे, सुगंधित और जामुनी रंग के होते हैं फूल छोटे गुच्छों में लगते है मिट्टी को नरम करने के लिए जोताई और गोड़ाई करें बिजाई से 4-6 सप्ताह पहले खेती के लिए बैड तैयार करें बैड बनाने कि लिए 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फासफेट डालें बैडों को एक समान बनाने के लिए उनको समतल करें और बैडों के ऊपर बोयें होये गुलाब गड्डों में बोयें हुए गुलाबों से ज्यादा मुनाफे वाले होते है उत्तरी भारत में बिजाई का सही समय मध्य अक्तूबर है रोपाई के बाद पौधे को छांव में रखें और अगर बहुत ज्यादा धुप हो, तो पौधे पर पानी का छिड़काव करें दोपहर के अंत वाले समय बोया गया गुलाब बढ़िया उगता है बैड पर 30 सैं.मी. व्यास और 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोद कर 75 सैं.मी. के फासले पर पौधों की बिजाई करें दो पौधों के बीच में फासला गुलाब की किस्म पर निर्भर करता है बीजों को 2-3 सैं.मी. गहराई में बोयें इसकी बिजाई सीधी या पनीरी लगा कर की जाती है गुलाब की फसल का का प्रजनन काटी गई जड़ों और बडिंग द्वारा किया जाता है उत्तरी भारत में दिसंबर-फरवरी महीने का समय टी-बडिंग के लिए उचित होता है पौधे की कांट-छांट दूसरे और उसके बाद के वर्षों में की जाती है उत्तरी भारत में गुलाब की झाड़ियों की कांट-छांट अक्तूबर के दूसरे या तीसरे हफ्ते में की जाती है जो शाखाएं झाड़ियों को घना बनाएं, उन्हें निकाल दें लटके हुए गुलाबों को छंटाई की जरूरत नहीं होती छंटाई के बाद, अच्छे से गले हुए 7-8 किलो गाय के गोबर को प्रति पौधे को डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें ग्रीन हाउस में, गुलाबों को पंक्तियों में बोया जाता है और पौधों का घनत्व 7-14 पौधे प्रति वर्ग मीटर होनी चाहिए बैड की तैयारी के समय 2 टन रूड़ी की खाद और 2 किलो सुपर फास्फेट को मिट्टी में डालें तीन महीने के फासले पर 10 किलो रूड़ी की खाद और 8 किलो नाइट्रोजन, 8 किलो फासफोरस और 16 किलो पोटाश प्रति पौधे में डालें छंटाई के बाद ही सारी खादों को डालें ज्यादा पैदावार लेने के लिए छंटाई से एक महीने बाद, जी ए 3@ 200 पी पी एम(2 ग्राम प्रति लीटर) की स्प्रे करें पौधे की तनाव सहन शक्ति को बढ़ाने के लिए घुलनशील जड़ उत्तेजक(रैली गोल्ड/रिजोम) 100 ग्राम+ टिपोल 60 मि.ली. को 100 लीटर पानी में डालकर प्रति एकड़ में शाम के समय सिंचाई करें मोनोकोट नदीनों की रोकथाम के लिए ग्लाइफोसेट 300 ग्राम और डिकोट नदीनों को रोकने के लिए ऑक्सीफ्लूरॉन 200 ग्राम को अंकुरन से पहले प्रति एकड़ में स्प्रे करें पौधों को खेत में लगाएं ताकि बढ़िया ढंग से विकास कर सके सिंचाई मिट्टी की किस्म और जलवायु के अनुसार करें आधुनिक सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप सिंचाई गुलाब की खेती के लिए लाभदायक होती है फव्वारा सिंचाई से परहेज करें क्योंकि इससे पत्तों को लगने वाली बीमारियां बढ़ती हैं गुलाब की फसल से दूसरे वर्ष से बढ़िया किफायती पैदावार लिया जा सकता है गुलाब की तुड़ाई फूलों का रंग पूरी तरह से विकसित पर और पहली एक और दो पंखुड़ियां खुलनी(पर पूरी तरह नहीं) पर तेज़ छुरी की सहायता से की जाती है निर्धारित लंबाई होने पर हाथ वाली छुरी के साथ काटा जाता है विदेशी बाज़ार के मांग के अनुसार बड़े फूलों के लिए तने की लंबाई 60-90 सैं.मी. और छोटे फूलों के लिए 40-50 सैं.मी. होती है फ़ॉलोन को सुबह जल्दी या दोपहर के अंत वाले समय में तोडना चाहिए धन्यवाद
Posted by शुभम
Uttar Pradesh
14-03-2019 06:23 PM
Punjab
03-15-2019 06:05 AM
शुभम जी आपके पिछले सवाल के अनुसार आपको नदीननाशक की स्प्रे सिफारिश की गयी थी जो के सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों को नियंत्रित करने के लिए जैविक मल्च के साथ ऑक्सीफलोरफिन 200 ग्राम या पैंडीमैथालीन बूटीनाशक 800 मि.ली को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि नदीन ज्यादा हो तो डालापोन 1.6 किलोग्राम प्रति ए.... (Read More)
शुभम जी आपके पिछले सवाल के अनुसार आपको नदीननाशक की स्प्रे सिफारिश की गयी थी जो के सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों को नियंत्रित करने के लिए जैविक मल्च के साथ ऑक्सीफलोरफिन 200 ग्राम या पैंडीमैथालीन बूटीनाशक 800 मि.ली को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि नदीन ज्यादा हो तो डालापोन 1.6 किलोग्राम प्रति एकड़ या ग्रामाक्ज़ोन 1 लीटर और डयूरॉन 800 ग्राम या टेरबेसिल 800 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें
Posted by jaswinder singh
Punjab
14-03-2019 06:23 PM
Punjab
03-14-2019 06:26 PM
ਵੈਸੇ ਤਾਂ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦੀਆ ਫ਼ੀਡਜ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕੰਪਨੀ ਵਾਲੇ ਆਪਣੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦਿੰਦੇ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਵਿਚ ਸਾਰੇ ਜਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਇਹ ਫੀਡ ਥੋੜੀ ਮਹਿੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਫਾਇਦਾ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿਆਦ.... (Read More)
ਵੈਸੇ ਤਾਂ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦੀਆ ਫ਼ੀਡਜ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕੰਪਨੀ ਵਾਲੇ ਆਪਣੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦਿੰਦੇ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਵਿਚ ਸਾਰੇ ਜਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਇਹ ਫੀਡ ਥੋੜੀ ਮਹਿੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਫਾਇਦਾ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਹਿੰਗੀ ਫੀਡ ਨਹੀਂ ਵਰਤਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਬਜ਼ਾਰ ਚੋ ਕਿਸੀ ਵੀ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਉਸ ਨਾਲ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਤੋਂ ਦੁੱਧ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ , ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ..
Posted by D
Rajasthan
14-03-2019 06:16 PM
Punjab
03-18-2019 12:39 PM
Posted by jaswinder singh
Punjab
14-03-2019 06:15 PM
Punjab
03-14-2019 06:26 PM
ਵੈਸੇ ਤਾਂ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦੀਆ ਫ਼ੀਡਜ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕੰਪਨੀ ਵਾਲੇ ਆਪਣੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦਿੰਦੇ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਵਿਚ ਸਾਰੇ ਜਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਇਹ ਫੀਡ ਥੋੜੀ ਮਹਿੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਫਾਇਦਾ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿਆਦ.... (Read More)
ਵੈਸੇ ਤਾਂ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦੀਆ ਫ਼ੀਡਜ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਕੰਪਨੀ ਵਾਲੇ ਆਪਣੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦਿੰਦੇ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਵਿਚ ਸਾਰੇ ਜਰੂਰੀ ਤੱਤ ਹੁੰਦੇ ਹੈ ਇਹ ਫੀਡ ਥੋੜੀ ਮਹਿੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਪਰ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਫਾਇਦਾ ਬਹੁਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਹਿੰਗੀ ਫੀਡ ਨਹੀਂ ਵਰਤਣਾ ਚਾਉਂਦੇ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਬਜ਼ਾਰ ਚੋ ਕਿਸੀ ਵੀ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਫੀਡ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਉਸ ਨਾਲ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਤੋਂ ਦੁੱਧ ਲਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ , ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ) , ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ ,ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ) , DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ) , ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ) , ਖਲ਼ 15 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ) , ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ) ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ..
Posted by sarjeet Singh
Haryana
14-03-2019 06:13 PM
Punjab
03-15-2019 01:49 PM
सुअर मीट के लिए पाले जाते है, मादा सुअर एक साल में दे से ढाई बार बच्चे देती है, पहले ब्यांत में 6—7 बच्चे देती है और दूसरे ब्यांत में 10—14 बच्चे देती है यदि आप सुअर मीट के लिए तैयार कर रहे हैं तो एक सुअर 7—8 महीनों में लगभग 1 क्विंटल का हो जाता है और उससे 100 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बिमक जाता है और गाभिन सुअरी 150—200 रू.... (Read More)
सुअर मीट के लिए पाले जाते है, मादा सुअर एक साल में दे से ढाई बार बच्चे देती है, पहले ब्यांत में 6—7 बच्चे देती है और दूसरे ब्यांत में 10—14 बच्चे देती है यदि आप सुअर मीट के लिए तैयार कर रहे हैं तो एक सुअर 7—8 महीनों में लगभग 1 क्विंटल का हो जाता है और उससे 100 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बिमक जाता है और गाभिन सुअरी 150—200 रूपये प्रति किलो के हिसाब से बेची जाती है सुअरों की मार्किटिंग की भी कोई दिक्कत नहीं हैक्योंकि व्यापारी खुद फार्म से आकर सुअर ले जाते हैं उसके बाद फीड सही खिलाकर उन्हें आगे बेच देना बाकी लोन के लिए ट्रेनिंग स्र्टीफिकेट तो जरूरी है ही पर सिर्फ स्र्टीफिकेट ही नहीं और भी कागज़ों की जरूरत पड़ेगी क्योंकि यह सारा कुछ बैंकों पर निर्भर करता है कि बैंक को लोन पास करने के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए यह अलग अलग बैंकों के अनुसार कम ज्यादा हो सकता है क्योंकि कोई बैंक कैसे वैरीफिकेशन करता है कोई कैसे पांच सुअरी गाभिन 10—11 महीनों के बाद पहली इनकम आती है और लगभग एक सुअरी 3500 रूपये महीने की इनकम आती है इसे हिसाब से आप अंदाजा लगा सकते हैं सब्सिडी— ट्रेनिंग करने के बाद सुअर पालन पर 2 लाख की सब्सिडी होती है कुल प्रोजेक्ट 8 लाख का होता है उसमें 2 लाख सब्सिडी होती है यदि आपने अपने स्तर पर करना है तो आप 2—2.50 लाख में एक बार छोटे स्तर से शुरू कर सकते है .
Posted by Ravinder kumar meena
Rajasthan
14-03-2019 06:13 PM
Punjab
03-14-2019 06:58 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by laxmi narayan
Rajasthan
14-03-2019 06:12 PM
Punjab
03-14-2019 09:38 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by D
Rajasthan
14-03-2019 06:09 PM
Punjab
03-14-2019 06:52 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Gurpreet
Punjab
14-03-2019 06:09 PM
Punjab
03-14-2019 06:49 PM
ਬਰਸੀਮ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਜਿਆਦਾ ਖੜਾ ਹੋਣ ਨਾਲ ਗਾਲਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਉਲੀਨਾਸ਼ਕ M-45 @400 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by ajit garai
West Bengal
14-03-2019 05:55 PM
Punjab
03-14-2019 06:57 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Puneet
Himachal Pradesh
14-03-2019 05:48 PM
Punjab
03-14-2019 09:51 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by deep kang
Punjab
14-03-2019 05:40 PM
Punjab
03-15-2019 05:50 AM
दीप जी जो यूनिर्वसिटी की परमल किस्में है उनकी उपज 30 क्विंटल तक हो जाती है की उपज ज्यादा होती है लगभग 32 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से ,इससे ज्यादा उपज वाली किस्म आप पूसा 44 की बिजाई कर सकते है यह थोड़ा लंबा समय लेती है पर उपज अच्छी होती है इसके इलावा आप सवा 200,134 जैसी किस्मों की बिजाई भी कर सकते है
Posted by ashu
Maharashtra
14-03-2019 05:33 PM
Punjab
03-14-2019 05:53 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Gurwinder singh
Punjab
14-03-2019 05:23 PM
Punjab
03-15-2019 08:41 AM
गुरविंदर जी यह फंगू स्का हमला है, इसे नियंत्रित करने के लिए copper oxychloride@3 ग्राम प्रति लीट और M-45@4gm को प्रति लीटर से स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by inderpal
Punjab
14-03-2019 05:14 PM
Punjab
03-14-2019 05:21 PM
inderpal ji PAU da kisan mela 15-16 march matlab kal ate parso hai. dhanwad
Posted by paramjit Singh
--
14-03-2019 04:52 PM
Punjab
03-14-2019 05:18 PM
Paramjit Singh ji punjab vich training len lai tusi Manish Vasudev 9417652857 nal samparak kar sakde ho.
Posted by Lakhwinder sidhu
Punjab
14-03-2019 04:41 PM
Punjab
03-14-2019 10:31 PM
lakhwinder ji amrit nam da fungicide hai jo fasl nu ulli de hamle to bchaunda hai.jumpnam di dwayi insecticide hai jo tele di roktham de layi varti jandi hai. jekar fasl vich ulli ate keet da hamla hai tahi tuc ehna di spray karo. is to ilava tuc NPK 19:19:19@7 gram nu prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by davinder singh
Punjab
14-03-2019 04:35 PM
Punjab
03-14-2019 05:33 PM
ਤੁਸੀ ਝੋਟੀ ਨੂੰ Gestaprojen ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਹ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਗੱਭਣ ਰਹਿਣ ਵਿਚ ਮਦਦ ਕਰਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ Calcimust gold liqued 50ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਜੀ ਬਾਕੀ ਇਹ ਰਹਿ ਸਕਦੀ ਹੈ ਕਈ ਵਾਰ ਪਸ਼ੂ ਵੈਸੇ ਹੀ ਜਾਲੇ ਕਰਨ ਲਗ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਇਹ ਦਵਾਈਆਂ ਦਿਓ ਜੀ
Posted by Mozibul Hussain Ahmed
Assam
14-03-2019 04:25 PM
Punjab
05-17-2019 03:53 PM
Avishaan Sheep lene ke lia aap Amar Farm 8008184786, 8374967292 se samparak kar sakte hai. Thankyou.
Posted by umashankar
Chattisgarh
14-03-2019 03:59 PM
Punjab
03-21-2019 12:06 PM
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की.... (Read More)
अदरक भारत की एक अहम मसाले वाली फसल है यह फसल अच्छे जल निकास वाली चिकनी, रेतली और लाल हर तरह की मिट्टी में उगाई जा सकती है खेत में पानी ना खड़ा होने दें क्योंकि खड़े पानी में यह ज्यादा देर बच नहीं पाएगी फसल की वृद्धि के लिए 6-6.5 पी एच वाली मिट्टी अच्छी मानी जाती है उस खेत में अदरक की फसल ना उगाएं जहां पिछली बार अदरक की फसल उगाई गई हो हर साल एक ही ज़मीन पर अदरक की फसल ना लगाएं प्रसिद्ध किस्में :-Himgiri, IISR Varanda, IISR Mahima,Suprabha, Suruchi, IISR Rejatha खेत को दो तीन बार जोतें और सुहागे से समतल करें अदरक की बिजाई के लिए आवश्यक लंबाई के 15 सैं.मी. ऊंचे और 1 मीटर चौड़े बैड तैयार करें दो बैडों के बीच 50 सैं.मी. का फासला रखें नदीनों कीटों और बीमारियों की जांच के लिए बैड की मिट्टी को धूप लगवायें इसके लिए बैड को पॉलीथीन शीट से 20-30 दिनों के लिए ढकें रोपाई के समय नीम केक 25 ग्राम को प्रति गड्ढे में डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए राइज़ोम की बिजाई मई के पहले सप्ताह में पूरी कर लें राइज़ोम को कतारों में बोयें और कतार में 40-45 सैं.मी. और दो पौधों में 30 सैं.मी. फासला रखें राइज़ोम की रोपाई के बाद खेत में 50 क्विंटल हरे पत्तों की मलचिंग प्रति एकड़ में करें दूसरी मलचिंग 20 क्विंटल हरे पत्तों के साथ 40 दिनों के बाद करें बीज की गहराई 3-4 सैं.मी. के करीब होनी चाहिए अदरक की बिजाई सीधे ढंग से और पनीरी लगाकर की जा सकती है बिजाई के लिए ताजे और बीमारी रहित गांठों का प्रयोग करें बिजाई के लिए 5-6.5 क्विंटल प्रति एकड़ बीज का प्रयोग करें बिजाई से पहले गांठों को मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर पानी से उपचार करें गांठों को 30 मिनट के लिए घोल में भिगो दें इससे गांठों को फफूंदी से बचाया जा सकता है उपचार के बाद गांठों को 3-4 घंटें के लिए छांव में सुखाएं खेत की तैयारी के समय 60 क्विंटल रूड़ी की खाद प्रति एकड़ मिट्टी में डालें नाइट्रोजन 24 किलो (52 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो सिंगल सुपर फासफेट) और पोटाश 20 किलो (35 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें रूड़ी की खाद या गाय का गोबर 60 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें नाइट्रोजन की दूसरी मात्रा 20 किलो (45 किलो यूरिया) बिजाई के 45 दिनों के बाद, जबकि बिजाई के 120 दिनों के बाद नाइट्रोजन की तीसरी मात्रा 16 किलो (यूरिया 35 किलो) डालें रोपाई के बाद पहली सिंचाई करें इसे बारानी फसल के तौर पर उगाया जाता है इसलिए बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई करें बारिश की अनुपस्थिति में, बाकी की सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें अदरक की पूरी फसल को कुल 16-18 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बिजाई के 3 दिन बाद एट्राज़िन 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की नमी वाली मिट्टी पर स्प्रे करें उन नदीनों को खत्म करने के लिए जो पहली नदीन नाशक स्प्रे के बाद पैदा होते हैं, बिजाई के 12-15 दिनों के बाद गलाइफोसेट 4-5 ग्राम प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें नदीन नाशक की स्प्रे करने के बाद खेत को हरी खाद से या धान की पराली से ढक दें जड़ों के विकास के लिए जड़ों में मिट्टी लगाएं बिजाई के 50-60 दिनों के बाद पहली बार जड़ों में मिट्टी लगाएं और उसके 40 दिन बाद दोबारा मिट्टी लगाएं
Posted by arunkumar
Haryana
14-03-2019 03:57 PM
Punjab
03-20-2019 09:15 PM
सीप की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से सम्पर्क करें
Posted by vinay
Punjab
14-03-2019 03:55 PM
Punjab
03-14-2019 04:33 PM
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰ ਜੇਕਰ ਜਗਾ ਦੀ ਘਾਟ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਸੀਮਿੰਟ ਦੇ ਟੈਕ ਬਣਾ ਕੇ ਵੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਾਰਕਿਟ ਜਾਂ ਮੱਛੀ ਘਰ ਤੋਂ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾ.... (Read More)
ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਇਕ ਲਾਭਦਾਇਕ ਕਿੱਤਾ ਹੈ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਉਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇ ਅਸਲ ਰੂਪ ਵਿਚ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਤਲਾਬ ਵਿਚ ਜਾ ਫਿਰ 100 ਵਰਗ ਫੁੱਟ ਦਾ ਤਲਾਬ ਬਣਾ ਕੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰ ਜੇਕਰ ਜਗਾ ਦੀ ਘਾਟ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਸੀਮਿੰਟ ਦੇ ਟੈਕ ਬਣਾ ਕੇ ਵੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਤਲਾਬ ਬਣਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਾਰਕਿਟ ਜਾਂ ਮੱਛੀ ਘਰ ਤੋਂ ਸਿਪੀ ਨੂੰ ਖਰੀਦਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਅਦਾਤਾਰ ਯੂਪੀ ਸਾਈਡ ਤੋ ਸਿੱਪੀਆਂ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀਆ ਹਨ ਸ਼ੁ੍ਰੁਆਤ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਲੱਗਭੱਗ 20-40 ਹਜ਼ਾਰ ਤੱਕ ਦਾ ਖਰਚਾ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕੁਆਲਿਟੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਇਕ ਸਿਪੀ ਕਰੀਬ 8 ਤੋਂ 12 ਰੁਪਏ ਦੇ ਵਿਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬੰਦ ਸੀਪੀਆਈ ਵਿਚ ਖਿੱਚ ਲਾ ਕੇ ਉਹਨਾਂ ਵਿੱਚ ਮੋਤੀਆਂ ਦਾ ਬੀਜ ਪਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਇਹਨਾਂ ਸਿਪੀਆ ਨੂੰ ਬੰਦ ਕਰ ਕੇ ਜਾਲੀ ਦੇ ਸਹਾਰੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਫਿਰ ਕੁੱਜ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਮੋਤੀ ਬਣਨ ਵਿਚ 18 ਮਹੀਨਿਆਂ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ ਉਹਨਾਂ ਲਈ ਖਾਸ ਤੌਰ ਤੇ ਸਾਂਚੇ ਬਣਾਏ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਗਨਪਤੀ,ਬੁੱਧ,ਹੋਲੀ ਕਰਾਸ ਸਾਈਨ ਵਰਗੇ ਡਿਜ਼ਾਈਨਰ ਮੋਤੀ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਬਜਾਰ ਵਿਚ ਇਹ ਮੋਤੀ 300 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਨਗ ਦੇ ਰੇਟ ਤੇ ਵਿਕਦੇ ਹਨ ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਤੁਸੀ ਟਰੇਨਿਗ ਵੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇੰਡਿਅਨ ਕਾਉਂਸਿਲ ਫ਼ਾਰ ਐਗਰੀਕਲਚਰ ਰਿਸਰਚ(ICAR) ਦੀ CIAF ਵਿਗ (ਸੇਂਟਰਲ ਇੰਸਟੀਟਿਊਟ ਆਫ ਫਰੈਸ਼ ਵਾਟਰ ਏਕਵਾਕਲਚਰ) ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਫਰੀ ਟਰੇਨਿਗ ਦਿੰਦੀ ਹੈ CIAF ਤੋਂ ਟਰੇਨਿਗ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਨੰਬਰਾ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ 0674 2465421, 2465446 ਮੋਤੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲੁਈ ਸਰਕਾਰ ਵਲੋਂ ਕਰਜਾ ਵੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਬਾਕੀ ਵਿਨੋਟ ਕੁਮਾਰ ਜਮਲਾਪੁਰ ਹਰਿਆਣੇ ਵਿਖੇ ਇਸਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ 2 ਦਿਨ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ 5000 ਰੁਪਏ ਵਿੱਚ ਕਰਵਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜਦੌ ਤੁਸੀ ਇੱਕ ਵਾਰ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਲਿਆ ਫਿਰ ਇਸ ਨੂੰ ਵੇਚਣ ਬਾਰੇ ਬਹੁਤ ਲਿੰਕ ਬਣ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤੁਸੀ ਇਸਨੂੰ ਦਿੱਲੀ,ਦੇਹਰਾੂਨ, ਮੁੰਬਈ ਵਿਖੇ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋਂ
Posted by moinuddin Khan
Uttar Pradesh
14-03-2019 03:53 PM
Punjab
03-14-2019 04:34 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Gurwinder Singh
Punjab
14-03-2019 03:40 PM
Punjab
03-14-2019 04:54 PM
iss di spray bijaayi krn ton 2 din pehla ja bijaayi krn ton 2 din de ander ander hi spray kr skde ho..
Posted by prashant
Gujarat
14-03-2019 03:36 PM
Punjab
03-14-2019 03:44 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by krishna
Bihar
14-03-2019 03:36 PM
Punjab
03-20-2019 09:20 PM
इसके लिए सबसे पहले आप ट्रेनिंग लेनी जरूरी है आप आपने नज़दीकी केबीके से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें बकरी पालन के काम पर लोन पर 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है और लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग क.... (Read More)
इसके लिए सबसे पहले आप ट्रेनिंग लेनी जरूरी है आप आपने नज़दीकी केबीके से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें बकरी पालन के काम पर लोन पर 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है और लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें इससे अपने एरिया के नाबार्ड डिपार्टमैंट के सी जी एम को भी लोन के लिए मिलें
Posted by ਅਮਨ ਝੱਜ
Punjab
14-03-2019 03:35 PM
Punjab
03-14-2019 04:50 PM
kanak de vich peeli kungi di roktham de layi tilt@200ml nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo. dhanwad
Posted by prashant
Gujarat
14-03-2019 03:35 PM
Punjab
03-14-2019 04:35 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by jivan
Bihar
14-03-2019 03:33 PM
Punjab
03-14-2019 03:44 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Pankaj Pandey
Uttar Pradesh
14-03-2019 03:30 PM
Punjab
03-14-2019 03:48 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by yogesh
Maharashtra
14-03-2019 03:25 PM
Punjab
03-22-2019 03:27 PM
योगेश जी काली हल्दी की बिजाई भी आम हल्दी की तरह ही होती है इसकी पैदावार काम होती है दूसरी हल्दी के मुकाबले लेकिन इसे दवाईआं बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसका पाउडर लगभग 1500 रुपये किल्लो के हिसाब से बिकता है\ धन्यवाद
Posted by Ravi Kant
Uttar Pradesh
14-03-2019 03:08 PM
Punjab
03-14-2019 03:24 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Mansingh Jatav
Madhya Pradesh
14-03-2019 03:07 PM
Punjab
03-14-2019 05:23 PM
मानसिंघ जी खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते.... (Read More)
मानसिंघ जी खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by NARENDER sharma
Rajasthan
14-03-2019 03:02 PM
Punjab
03-14-2019 03:33 PM
नरेंदर जी insulin के पौधे के बारे में जानकारी के लिए सुरिंदर नागरा से 9814305864 संपर्क करें, धन्यवाद
Posted by deepak
Uttar Pradesh
14-03-2019 02:59 PM
Punjab
03-14-2019 03:23 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Rajesh Singh Chauhan
Uttar Pradesh
14-03-2019 02:56 PM
Punjab
03-14-2019 03:24 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Rajesh Singh Chauhan
Uttar Pradesh
14-03-2019 02:53 PM
Punjab
03-14-2019 03:25 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और जेयादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by ajay
Haryana
14-03-2019 02:27 PM
Maharashtra
03-14-2019 09:40 PM
अजय जी आप गेंहू के बाद आप मूंगी की बिजाई कर सकते है
Posted by jagdish
Gujarat
14-03-2019 02:26 PM
Punjab
03-14-2019 10:14 PM
जगदीश जी कृपया अपना सवाल विस्तार से पूछें ताकि आपको इसके बारे में उचित जानकारी दी जाये, धन्यवाद
Posted by Vivek Ghadse
Maharashtra
14-03-2019 02:25 PM
Punjab
03-14-2019 03:27 PM
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेन.... (Read More)
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है यह डिपार्टमेंट जहाँ खेतीबाड़ी अफसर बैठता है जैसे जैसे कचिहरी, डी सी दफ्तर बोल देते है उसमें बना होता है, मछली पालन के लिए सेम वाले इलाके में 90% सब्सिडी होती है और बाकि इलाकों में 40% सब्सिडी होती है आप अपने ज़िले के FFDA ( fish farming development agency ) दफ्तर में जाएं जो कि आमतौर पर डी सी दफ्तर या कचिहरी में बना होता है, आप वहां ज़मीन की फर्द, स10th र्टिफिकेट और जहाँ तालाब बनाना है वहां की 2 फोटो लेकर जाएं उसके बाद FFDA के अफ़सर आपको फाइल तैयार करवाएंगे और आपकी ज़मीन देखकर तालाब बनाने का तरीका बताएंगे और फिर आपको 40% सब्सिडी के लिए फाइल तैयार कर लोन अप्लाई के बारे में समझा देंगे
Posted by shaminder kaur
Punjab
14-03-2019 02:17 PM
Punjab
03-14-2019 10:00 PM
Shaminder Kaur ji chia seeds ke bare me jankari or is ka seed lene ke lia aap Anil Saini 9555233266 se sampark krein.