
Posted by hansrajKumawat
Rajasthan
15-03-2019 07:23 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है

Posted by hansrajKumawat
Rajasthan
15-03-2019 07:21 AM
HansrajKumawat g Moti ki kheti bare mein puri jankari ke lia aap Manish Vasudev 9417652857 se samparak kar sakte hai
Posted by ਗੁਰਮਿੰਦਰ
Punjab
15-03-2019 07:19 AM
Gurminder ji Van vibhag ate khetibadi vibhag ch job layi tuhanu isde related hi degree kiti honi chaidi hai jive Bsc agriculture kiti honi chaidi hai

Posted by aman deep
Punjab
15-03-2019 07:15 AM
अमनदीप जी एनपीके 00.52.34 खाद है जिसमें फॉसफोर्स और पोटाश तत्व होते है जो गेहूं की सेहत के लिए स्प्रे की जाती है और फंगीनाशी गेहूं से फंगस के हमले को कंट्रोल करने के लिए प्रयोग होते है इनकी स्प्रे अलग अलग ही करनी पड़ती है क्योंकि इनको मिक्स करके स्प्रे करने से असर कम हो जाता है

Posted by विजय कुमार
Uttar Pradesh
15-03-2019 07:04 AM
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खार.... (Read More)
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो इसकी अच्छी पैदावार के लिए इसे अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है प्रसिद्ध किस्में:- Kashi Amrut,Kashi Anupam की बिजाई कर सकते है टमाटर के बीजों को पहले नर्सरी में बोया जाता है और फिर हन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है मुख्य खेत की तैयार के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 4-5 बार जोताई करें फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा फेरें आखिरी जोताई के समय गाय का गला हुआ गोबर 60 किलो को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें रोपाई के लिए 80-90 सैं.मी. चौड़े बैड तैयार करें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें
पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें
बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें
फसल को फसल को बैक्टीरियल सूखे से बचाने के लिए रोपाई से पहले नए पौधों को स्ट्रैपटोसाइकलिन घोल 100 पी पी एम में मिलाकर 5 मिनट के लिए भिगोयें बिजाई से एक महीना पहले मिट्टी को धूप में खुला छोड़ दें आवश्यक लंबाई और 80-90 सैं.मी. की चौड़ाई वाले बैडों पर टमाटर के बीजों को बोयें बिजाई के बाद बैडों को प्लास्टिक शीट से ढक दें और फूलों को पानी देने वाले डब्बे से रोज़ सुबह बैडों की सिंचाई करें रोगाणुओं के हमले से फसल को बचाने के लिए नर्सरी वाले बैडों को अच्छे नाइलोन के जाल से ढक दें
पनीरी लगाने के 10-15 दिन बाद 19:19:19 के साथ सूक्ष्म तत्वों की 2.5-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें पौधों को तंदरूस्त और मजबूत बनाने के लिए बिजाई के 20 दिन बाद लीहोसिन 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी की स्प्रे करें प्रभावित पौधों को खेत में से उखाड़ दें ताकि पौधों का फासला सही रखा जा सके और निरोग पौधों को रोगाणुओं से भी बचाया जा सके रोगाणुओं से बचाव के लिए मिट्टी में नमी बनाये रखें यदि सूखा दिखे तो पौधों को रोपाई से पहले मैटालैक्सिल 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में 2-3 बार भिगोयें
बिजाई से 25-30 दिन बाद पनीरी वाले पौधे तैयार हो जाते हैं और इनके 3-4 पत्ते निकल आते हैं यदि पौधों की आयु 30 दिन से ज्यादा हो तो इसके उपचार के बाद इसे खेत में लगायें पनीरी उखाड़ने के 24 घंटे पहले बैडों को पानी लगायें ताकि पौधे आसानी से उखाड़े जा सकें
फसल को फसल को बैक्टीरियल सूखे से बचाने के लिए रोपाई से पहले नए पौधों को स्ट्रैपटोसाइकलिन घोल 100 पी पी एम में मिलाकर 5 मिनट के लिए भिगोयें किस्म और विकास के ढंग मुताबिक 60x30 सैं.मी. या 75x60 सैं.मी. या 75x75 सैं.मी. का फासला रखें में छोटे कद वाली किस्म के लिए 75x30 सैं.मी. का फासला रखें और वर्षा वाले मौसम के लिए 120-150x30 सैं.मी. का फासला रखें पनीरी को उखाड़कर खेत में लगा दें एक एकड़ खेत में बिजाई के लिए 100-160 ग्राम बीज नए पौधे तैयार करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं हाइब्रिड किस्मों के लिए 80-100 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 40-60 किलो (90-130 किलो यूरिया), फासफोरस 25 किलो (155 किलो एस एस पी) और पोटाश 25 किलो (42 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नए पौधों की रोपाई के 2-3 सप्ताह पहले फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर रोपाई 30 और 50 दिनों के बाद डालें लगातार गोडाई करें और जड़ों को मिट्टी लगाएं 45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे रोपाई से पहले मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 0.4 किलो को प्रति एकड़ में लगाएं यदि नदीनों की संख्या ज्यादा हो तो नदीनों के अंकुरण के बाद सैंकर 0.2 किलो की प्रति एकड़ में स्प्रे करें नदीनों को रोकने के साथ साथ मिट्टी के तापमान को कम करने के लिए मलचिंग भी प्रभावी तरीका है रोपाई के बाद दो से तीन दिन हल्की सिंचाई करें मिट्टी में नमी के आधार पर सर्दियों में 12 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें फूल निकलने की अवस्था सिंचाई के लिए गंभीर होती हैं इस अवस्था में पानी की कमी से फूलों का गिरना बढ़ता है और फलों और उत्पादकता पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है अत्याधिक सिंचाई ना करें पनीरी लगाने के 70 दिन बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं कटाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फलों को दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाना है या ताजे फलों को मंडी में ही बेचना है आदि पके हरे टमाटर जिनका 1/4 भाग गुलाबी रंग का हो, लंबी दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ज्यादातर सारे फल गुलाबी या लाल रंग में बदल जाते हैं, पर सख्त गुद्दे वाले टमाटरों को नज़दीक की मंडी में बेचा जा सकता है अन्य उत्पाद बनाने और बीज तैयार करने के लिए पूरी तरह पके और नर्म गुद्दे वाले टमाटरों का प्रयोग किया जाता है

Posted by jaswinder singh
Punjab
15-03-2019 06:59 AM
Jaswinder g J-1006 maize variety fodder lyi use hundi hai.esda 1 acre vich 30 kg beej painda hai...

Posted by jaswinder singh
Punjab
15-03-2019 06:56 AM
vase tan Milking machine cow lai jyada vdia hundi hai majja lai isda jyada fyada nhi hunda hai jekar majj da dudh jyada tan isdi varto kiti jndi hai , bakkii majjha iss nu lgwaun time suru suru vich tang krdia hai fir holi holi addat pendi hai , cow nu eh assnai nal lgaii jndi hai, baki iss nal thana nu koi smasiya nahi hundi , bakki Vansun Milking company di v machine vadiya hundi hai ji. tuci ehh v khridd skde ho .
Posted by Amarjit Singh
Punjab
15-03-2019 05:43 AM
Amarjit ji every fruit and vegetable need different amount of nutrient and fertilizer .please tell us about which fruit or vegetable nutrient you want to know so that we can provide you proper information.
Posted by malkit singh
Punjab
15-03-2019 05:12 AM
Malkit Singh ji Papite de plant len lai tusi Harvaas Nursery Harmanpreet Singh 9815119150 nal samparak kar sakde ho.
Posted by sanjay bhausagar
Bihar
15-03-2019 05:04 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सी.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है

Posted by paresh devale
Maharashtra
15-03-2019 05:02 AM
Paresh ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap kya jankari lena chahte hai ta ki aapko iske bare men poori jankari di ja sake. dhanywad

Posted by Sandeep Datta Kotkar
Maharashtra
15-03-2019 04:45 AM
खरगोश पालन की शुरूआत आप 1 यूनिट से शुरू कर सकते हैं एक यूनिट में 3 मेल और 10 फीमेल खरगोश होते हैं एक यूनिट आपको लगभग 30000 रूपये तक मिल जायेगा इसलिए आपको 30ग35 का शैड बनाना पड़ेगा बाकी यदि इनकी खुराक की बात करें तो इन्हें एक समय फीड और एक समय पठ्ठे खिलाने होते हैं बीमारियां कुछ खास नहीं लगती इन्हें लगभग 3 महीनों में बेचन.... (Read More)
खरगोश पालन की शुरूआत आप 1 यूनिट से शुरू कर सकते हैं एक यूनिट में 3 मेल और 10 फीमेल खरगोश होते हैं एक यूनिट आपको लगभग 30000 रूपये तक मिल जायेगा इसलिए आपको 30ग35 का शैड बनाना पड़ेगा बाकी यदि इनकी खुराक की बात करें तो इन्हें एक समय फीड और एक समय पठ्ठे खिलाने होते हैं बीमारियां कुछ खास नहीं लगती इन्हें लगभग 3 महीनों में बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं खरगोश मीट के लिए और इनसे वैक्सीन तैयार की जाती हैं इसकी शुरूआत के लिए कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट करती हैं और हर वर्ष 10 प्रतिशत रेट बढ़ाती हैं पंजाब में खरगोश पालन का व्यवसाय अभी बहुत कम है पर धीरे धीरे बढ़ रहा है आप पैराडाइज़ कंपनी से संपर्क कर सकते हैं जिनका संपर्क नंबर है 9466419455 आप खुद जाकर इनका फार्म देखकर आयें .वहां से आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी

Posted by pranesh pralhadrao deshmukh
Maharashtra
15-03-2019 04:07 AM
Pranesh g kirpa apna swaal vistaar se puche tan jo apko iss ki jankari di ja ske ...

Posted by pawan Pandey
Uttar Pradesh
15-03-2019 03:48 AM
Pawan Pandey जी मोती उत्पादन के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से संपर्क करें

Posted by Sachin soren
Jharkhand
15-03-2019 03:30 AM
ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगवाने और इस के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप के वी के SARAIKELA-KHARSAWAN अन्यथा Department Of Agricultural Engineering And Department Of Horticulture पता: Birsa Agriculture University Campus, Kanke Patratu रोड, Kanke, रांची, झारखण्ड 834006 फ़ोन: 0651 245 0832 से संपर्क करें
Posted by Hammad nawab
Uttar Pradesh
15-03-2019 02:43 AM
Hammad जी चूज़े लेने के लिए आप सुमित कुमार 8006000291,7906547529, मछली सीड के लिए Moh. Anis 9451411371,6394520950 से संपर्क कर सकते हैँ

Posted by vijay kumar
Bihar
15-03-2019 12:30 AM
इसके लिए लोन लेने के लिए आपके पास इसकी ट्रेनिंग होनी जरूरी है मुर्गी पालन शुरू करने से पहले कुछ बेसिक बातों का ध्यान ज़रूर रखें जैसे आप ट्रेनिंग लेकर जरूर शुरू करें जिससे आपको फीड वगैरह का पता चलेगा और क्योंकि पोल्ट्री में बायोसिक्योरिटी रखनी बहुत जरूरी है यदि एक बार बीमारी फार्म पर आ गई तो बहुत कम समय मे.... (Read More)
इसके लिए लोन लेने के लिए आपके पास इसकी ट्रेनिंग होनी जरूरी है मुर्गी पालन शुरू करने से पहले कुछ बेसिक बातों का ध्यान ज़रूर रखें जैसे आप ट्रेनिंग लेकर जरूर शुरू करें जिससे आपको फीड वगैरह का पता चलेगा और क्योंकि पोल्ट्री में बायोसिक्योरिटी रखनी बहुत जरूरी है यदि एक बार बीमारी फार्म पर आ गई तो बहुत कम समय में पूरे फार्म तक पहुंचती है इसलिए सभी बातें ध्यान में रखकर ही यह काम शुरू करें और यह भी सलाह है कि इस काम को बड़े स्तर पर एकदम से ना शुरू करें एक बार थोड़ी मुर्गियों से शुरू करें बाकी आपको बता दें कि व्यापारिक स्तर पर 5 एकड़ में आप 50000 मुर्गियां रख सकते हैं और इससे आपको कुल 5—7 लाख रूपये तक का खर्चा आ जाएगा यदि नस्ल की बात की जाए तो लेयर में अंडों के लिए BV 300 नस्ल सबसे बढ़िया रहेगी यह नस्ल 18 सप्ताह की उम्र में अंडे देना शुरू कर देती है और 19 सप्ताह से 80वें सप्ताह तक लगभग 370 अंडे देती है प्रति मुर्गी के लिए 1.5—2.0 फुट जगह की जरूरत पड़ती है पहले दिन से लेकर अंडे देने तक एक मुर्गी पर लगभग 250—300 रूपए खर्चा आ जाता है और ब्रॉयलर नस्लों में से वैनकोब 400 नस्ल बड़े स्तर पर सबसे बढ़िया मानी जाती है यह 35 दिनों तक लगभग 3 किलो फीड खाकर तकरीबन 1900—2000 ग्राम की हो जाती है और बाकी ज्यादा गर्मी और ठंड को काफी हद तक सहन करने की क्षमता रखती है बाकी आपके रख रखाव और बीमारियों पर टीकाकरण का खर्चा अलग है यह कुछ प्राथमिक जानकारी थी अंतत आप पहले किसी सफल पोल्ट्री फार्मर से जरूर मिलें आपको अन्य बातों एवं बारीकियों का पता लगेगा लोन लेने के लिए आपके पहले अपने नज़दीकी kvk से ट्रेनिंग लेनी होगी उस ट्रेनिंग के सर्टिफिकेट पर आप लोन के लिए अप्लाई कर सकते हो वहां आपको इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो जाएगी
Posted by Narinder
Punjab
14-03-2019 11:16 PM
नरिंदर जी एलपीयू द्वारा मशरुम की कोई ट्रेनिंग नहीं दी जाती है सरकार द्वारा अनुमोदित ट्रेनिंग के लिए आप DMR से संपर्क कर सकते हैं सोलन और ट्रेनिंग अनुसूची इसके साथ आत्ताच की गई है
Posted by Sohan Inder Singh
Punjab
14-03-2019 11:10 PM
सोहन इन्दर जी net house में लिए ज्यादातर सब्जियां और फूल उगाए जाते हैं इसकी तारबंदी के लिए आप नजदीकी KVK पते पर संपर्क कर सकते हैं: पोस्ट बॉक्स नंबर -22, रौनी, पंजाब 147001 फोन: 094642 10460

Posted by Parwinder singh
Punjab
14-03-2019 10:59 PM
बकरी फार्म के लिए ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें इसके इलावा प्रगतिशील बकरी फार्मर एसोसिएशन की मीटिंग जो कि महीने के पहले शुक्रवार को गुरु अंगद देव वैटनरी यूनिवर्सिटी लुधियाना के किसान हॉस्टल में होती है वहां जाकर बकरी पालकों से मिलें इस मीटिंग में जाने के लिए प्रगतिशील बकरी फा.... (Read More)
बकरी फार्म के लिए ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें इसके इलावा प्रगतिशील बकरी फार्मर एसोसिएशन की मीटिंग जो कि महीने के पहले शुक्रवार को गुरु अंगद देव वैटनरी यूनिवर्सिटी लुधियाना के किसान हॉस्टल में होती है वहां जाकर बकरी पालकों से मिलें इस मीटिंग में जाने के लिए प्रगतिशील बकरी फार्मर एसोसिएशन के प्रधान जगराज सिंह से पर बात करें बकरी पालन के काम पर लोन पर 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है और लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें इससे अपने एरिया के नाबार्ड डिपार्टमैंट के सी जी एम को भी लोन के लिए मिलें
Posted by VIKRAM KHERA
Punjab
14-03-2019 10:55 PM
ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਲਈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਜਰੂਰ ਲਵੋ ਤੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾਂ ਦੇ ਫਾਰਮ ਜਰੂਰ ਦੇਖੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਜੋ ਕਿ ਮਹੀਂਨੇ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਸ਼ੁੱਕਰਵਾਰ ਨੂੰ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਕਿਸਾਨ ਹੋਸਟਲ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਇਸ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਜਾਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕ.... (Read More)
ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮ ਲਈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਜਰੂਰ ਲਵੋ ਤੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾਂ ਦੇ ਫਾਰਮ ਜਰੂਰ ਦੇਖੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਜੋ ਕਿ ਮਹੀਂਨੇ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਸ਼ੁੱਕਰਵਾਰ ਨੂੰ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਕਿਸਾਨ ਹੋਸਟਲ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਇਸ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਜਾਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਜਗਰਾਜ਼ ਸਿੰਘ ਨਾਲ 9023441504 ਤੇ ਗੱਲ ਕਰ ਲਵੋ ਜੀਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਦੇ ਕੰਮ ਤੇ ਲੋਨ ਤੇ 25 % ਸਬਸਿਡੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਲੋਨ ਲੈਣ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਆਪਣੇ ਨੇੜੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੇ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਤੇ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਲੋਨ ਮਿਲੇਗਾ ਕੇ ਨਹੀ ਇਹ ਬੈਕ ਮੈਨੇਜ਼ਰ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕੀ ਪਹਿਲੀ ਗੱਲ ਇਹ ਬੈਕ ਦੇਖਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਹਾਡਾ ਅਕਾਉਟ ਵਿੱਚ ਕਿੰਨੇ ਕੁ ਪੈਸਿਆ ਦਾ ਲੈਣ ਦੇਣ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਆਪਣੀ ਜ਼ਮੀਨ ਗਰੰਟੀ ਵਜੋ ਦੇਣ ਲਈ ਹੈ ਕਿ ਨਹੀ ਤੇ ਹੋਰ ਵੀ ਕਈ ਗੱਲਾਂ ਚੈਕ ਕਰਕੇ ਲੋਨ ਲਈ ਸਹਿਮਤ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰੋ ਕਿ ਲੋਨ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਆਪਣੇ ਲੈਵਲ ਤੇ ਹੀ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਕਿਉਕੀ ਲੋਨ ਦੀ ਕਿਸ਼ਤ ਹਰ ਮਹੀਨੇ ਭਰਨੀ ਪਵੇਗੀ ਪਰ ਬੱਕਰੀਆ ਵਿੱਚੋ ਕਮਾਈ ਹਰ ਮਹੀਨੇ ਨਹੀ ਹੋਣੀ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰਕੇ ਦੇਖਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਆਪਣੇ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਪਸ਼ੂ ਪਾਲਣ ਵਿਭਾਗ ਅਫਸਰ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਤੇ ਉਸ ਤੋਂ ਅਪਰੂਵ ਕਰਵਾ ਕੇ ਫਿਰ ਬੈਕ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰਕੇ ਦੇਖੋ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਆਪਣੇ ਏਰੀਆ ਤੇ ਨਾਬਾਰਡ ਡਿਪਾਰਟਮੈਟ ਦੇ ਸੀਜੀਐਮ ਨੂੂੰ ਵੀ ਲੋਨ ਲਈ ਮਿਲੋ.
Posted by Anil kumar
Rajasthan
14-03-2019 10:49 PM
सर्दियों में 30 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तुपका सिंचाई करें इससे 40 प्रतिशत पानी बचता है शुरूआती अवस्था में पहले दो वर्षों के दौरान, वृक्ष से 50 सैं.मी. के फासले पर 2 ड्रिपर लगाएं और उसके बाद 5 वर्षों तक वृक्ष से 1 मीटर के फासले पर 4 ड्रिपर लगाएं खाद के लिए आप साथ .... (Read More)
सर्दियों में 30 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें और गर्मियों में 12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें तुपका सिंचाई करें इससे 40 प्रतिशत पानी बचता है शुरूआती अवस्था में पहले दो वर्षों के दौरान, वृक्ष से 50 सैं.मी. के फासले पर 2 ड्रिपर लगाएं और उसके बाद 5 वर्षों तक वृक्ष से 1 मीटर के फासले पर 4 ड्रिपर लगाएं खाद के लिए आप साथ में दी गयी फोटो चेक करें

Posted by harpreet singh
Punjab
14-03-2019 10:41 PM
ਉਸ ਨੂੰ ਕਾਲੀਆ ਮਿਰਚਾਂ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਲਿਆ ਕੇ 20 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀ ਵਾਲਾ ਪੇਠਾ 1 ਕਿਲੋ ਰੋਜਾਨਾ ਖਿਲਾਓ, 5 ਦਿਨ ਦੇਣ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਜੇਕਰ ਫਰਕ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦਾ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਇਸਨੂੰ carpaid injection 10ml ਲਗਵਾਓ, ਇਹ carries company ਦਾ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੈ ਜਾਂ ਤੁਸੀਂ cotalife injection ਲਗਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ,ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਇੱਕ ਲਗਵਾਓ.

Posted by avijot
Punjab
14-03-2019 10:23 PM
Avijot ਜੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸਦੇ ਰੇਟ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੋਕਲ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿਚੋਂ ਹੀ ਮਿਲੇਗੀ

Posted by कुंवर साहब
Uttar Pradesh
14-03-2019 10:11 PM
कुंवर साहब जी यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिय.... (Read More)
कुंवर साहब जी यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है यह डिपार्टमेंट जहाँ खेतीबाड़ी अफसर बैठता है जैसे जैसे कचिहरी, डी सी दफ्तर बोल देते है उसमें बना होता है, मछली पालन के लिए सेम वाले इलाके में 90% सब्सिडी होती है और बाकि इलाकों में 40% सब्सिडी होती है आप अपने ज़िले के FFDA ( fish farming development agency ) दफ्तर में जाएं जो कि आमतौर पर डी सी दफ्तर या कचिहरी में बना होता है, आप वहां ज़मीन की फर्द, स10th र्टिफिकेट और जहाँ तालाब बनाना है वहां की 2 फोटो लेकर जाएं उसके बाद FFDA के अफ़सर आपको फाइल तैयार करवाएंगे और आपकी ज़मीन देखकर तालाब बनाने का तरीका बताएंगे और फिर आपको 40% सब्सिडी के लिए फाइल तैयार कर लोन अप्लाई के बारे में समझा देंगे
Posted by Mandeep Kumar
Uttar Pradesh
14-03-2019 10:11 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by azim khan
Uttar Pradesh
14-03-2019 09:53 PM
आप गन्ने में बिजाई के समय डीएपी डाल सकते है जब आप गन्ने की बिजई करें और गन्ने पर मिट्टी डालें तब आप हल्का हल्का क्यारियों में डीएपी डाल सकते है
Posted by Gurveer sidhu
Punjab
14-03-2019 09:44 PM
ਤੁਸੀ Anabolite liqued 100ml-100ml ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 3 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ.
Posted by chandan singh
Rajasthan
14-03-2019 09:43 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Hardev Singh Khiala
Punjab
14-03-2019 09:38 PM
ਹਰਦੇਵ ਜੀ ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਮੌਸਮ ਸਾਫ ਰਹੇਗਾ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Gurinderjeet Singh
Punjab
14-03-2019 09:28 PM
Gurinderjeet ji kanak de nisare de same tuc NPK 13;00:45@1 killo ate boron@100gm nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo.is to ilava tuc tilt@200ml nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo. dhanwad

Posted by vikram jeet
Haryana
14-03-2019 09:22 PM
vikram ji usko app Cargil ki hiefer dry feed deni suru kren, iske sath app Calf plan powder 50-50gm rojana powder subah sham dena suru kren, isse uski achi growth ho jayegi.
Posted by पंडित सत्येंद्र हिंदुस्तानी
Uttar Pradesh
14-03-2019 09:21 PM
अच्छी नस्ल की गाय को खरीदने के लिए आप नवरूप सिंह जी से संपर्क कर सकते हैं, उनका मोबाइल नंबर 9649038200 है इनसे आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी
Posted by Prakash kumar singh
Bihar
14-03-2019 09:15 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by vikas rana
Uttar Pradesh
14-03-2019 09:13 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by ਜੱਸ
Punjab
14-03-2019 09:10 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਛੋਟੇ ਪੱਧਰ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਥੋੜੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ 6 ਪਸ਼ੂ ਰੱਖਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਉਸ ਵਿੱਚੋ 3 ਮੱਝਾਂ ਅਤੇ 3 ਗਾਵਾਂ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਮੱਝਾਂ ਤੁਸੀ ਮੁਰਾਹ ਨਸਲ ਦੀਆ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਗਾਵਾਂ ਤੁਸੀ ਐਚ ਐਫ ਨਸਲ ਜਿਸਦਾ ਦੁੱਧ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਇਸ ਨੂੰ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਲਗਦੀਆਂ ਹੈ ਜਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਹੀਵਾਲ ਨਸਲ ਜੋ ਦੇਸੀ ਨਸਲ ਹੈ ਉਸ ਨ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਛੋਟੇ ਪੱਧਰ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਥੋੜੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ 6 ਪਸ਼ੂ ਰੱਖਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਉਸ ਵਿੱਚੋ 3 ਮੱਝਾਂ ਅਤੇ 3 ਗਾਵਾਂ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਮੱਝਾਂ ਤੁਸੀ ਮੁਰਾਹ ਨਸਲ ਦੀਆ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਗਾਵਾਂ ਤੁਸੀ ਐਚ ਐਫ ਨਸਲ ਜਿਸਦਾ ਦੁੱਧ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਇਸ ਨੂੰ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਲਗਦੀਆਂ ਹੈ ਜਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਹੀਵਾਲ ਨਸਲ ਜੋ ਦੇਸੀ ਨਸਲ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਵੀ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਇਸਦਾ ਦੁੱਧ ਵਧਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਫੈਟ ਵੀ ਵਧਿਆ ਆਉਂਦੀ ਹੈ , ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਸਹੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਇਹ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਕਮਾ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਦੁੱਧ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਬਣੀਆਂ ਚੀਜਾਂ ਜਿਵੇਂ ਦਹੀ, ਲੱਸੀ , ਘਿਓ , ਪਨੀਰੀ ਆਦਿ ਵੀ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਕਮਾ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Jagtar Singh Tiwana
Punjab
14-03-2019 09:05 PM
Nahi g makhan ghaa garmia de vich nahi ho skda hai. ihh october mahine de vich kaamjaab hai.
Posted by Jagtar Singh Tiwana
Punjab
14-03-2019 09:00 PM
ਜਗਤਾਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕੇ ਕਿੰਨੂੰ ਦੀ ਉਮਰ ਕਿੰਨੀ ਹੈ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ashok thakker(बिज उत्पादक समिति सदस्य)
Madhya Pradesh
14-03-2019 08:52 PM
संतुलित खुराक 100 किलो बनाने के लिए आवश्यक सामग्री चाहिए जैसे 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्क.... (Read More)
संतुलित खुराक 100 किलो बनाने के लिए आवश्यक सामग्री चाहिए जैसे 25 किलो अनाज (ज्वार, बाजरी (सर्दियां), गेहूं, जौं (गर्मियां)इनमें से कोई एक), दाल चूरी 20 किलो (मूंग चूरी, मांह चूरी, मोठ चूरी (केवल सर्दियों के लिए), मसूर चूरी, अरहर (इनमें से एक), डी ओ सी 25 किलो (धान का चूरा), फाइबर छिल्का 15 किलो (गेहूं, चौकर, चना छिल्का, मटर छिल्का, इनमें से एक), खल 15 किला (सरसों, बिनौला या सोया (इनमें से कोई एक), मीठा सोडा 250 ग्राम, 1 किलो नमक, गुड़ 1 किला, 1 किलो हल्दी (सर्दियां में) इन्हें मिला लें यह फीड पशु के लिए बहुत लाभदायक होती है दोष वाले पशु को आप 2 किलो दूध मगर 1 किलो फीड दे सकते है, बाकि आप हरा चारा 30—35 किलो रोजाना दें और उसमें 4—5 किलो तूड़ी मिक्स करके दें आप हर तीन महीने के बाद उसे पेट के कीड़ों के लिए गोली जरूर दें

Posted by rajeev kumar
Uttar Pradesh
14-03-2019 08:43 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by Shiv Nandan
Uttar Pradesh
14-03-2019 08:38 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है

Posted by rajiv
Madhya Pradesh
14-03-2019 08:21 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by jagpal sidhu028@gmail.com
Punjab
14-03-2019 08:12 PM
ਜਸਪਾਲ ਜੀ ਹਿਸਾਰ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਮੇਲਾ 12-13 ਮਾਰਚ ਨੂੰ ਸੀ

Posted by pavitar singh
Punjab
14-03-2019 08:10 PM
ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਐਕਟਾਰਾ @80 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by manjot grewal
Punjab
14-03-2019 08:04 PM
Manjot ji jekar tuci 3-4 month di gaban bakri lende ho tan 12-15000 tak v mill skdi hai, baki ehh vechan wale ate khridan wale te depend hunda hai ki oh goat di condition de hisab nal kinaa rate dinda hai ..

Posted by Lovepreet Singh
Punjab
14-03-2019 07:53 PM
अब आप ब्याने के बाद अच्छी खुराक दें जिससे यह ब्याने के बाद अच्छा दूध दे ब्याने के बाद 3 किलो दलिया ,250 ग्राम गुड अच्छी तरह गर्म करके फिर उसे ठंडा करके उसमें 100 ग्राम सरसों का तेल मिलाकर 5—7 दिन दें इससे दूध में फर्क पड़ जाएगा इसके साथ आप Anabolite liqued 100-100ml सुबह शाम और calcimust bolus 1-1 सुबह शाम दें इससे दूध अच्छा हो जाएगा

Posted by daljinder singh
Punjab
14-03-2019 07:50 PM
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