
Posted by manjeet singh
Punjab
16-03-2019 07:01 AM
iss nu tuci 250gm chini(khand), 250gm dalda ghee, 200gm nimbu changi trah ubaal ke uss nu thnda krke rojana 5 din deo, iss nal farak paa jawega.

Posted by jitendar ku jitu
Bihar
16-03-2019 06:35 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे

Posted by Arun
Punjab
16-03-2019 06:25 AM
tuci uss nu khurak vdia deo , hara chara 40-45 kg rojana deo, isde nal tuci pet de kiriya lai Flukrid-DS bolus deo ate Enerboost powder 100gm rojana deo , iss nal vdia growth howegi.
Posted by सुबहसिह बिरहरू
Rajasthan
16-03-2019 06:11 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Posted by सुबहसिह बिरहरू
Rajasthan
16-03-2019 06:02 AM
जो वास्तविक केसर होता है इसके लिए तापमान सामान्य से भी कम चाहिए इसलिए यह rajsthan . में नहीं हो सकता अगर आप इसकी पुष्टि करना चाहते हैं तो majeed wari जी से 9419009209 पर कॉल करके जानकारी लें ये जम्मू कश्मीर में पिछले काफी समय से केसर की खेती कर रहे हैं

Posted by Veerpartap Singh
Haryana
16-03-2019 05:42 AM
veerpartap ji kripya aap apna swal vistar se pooche ke aap kaisi details rakhne ke bare men jankari lena chahte hai ta ki aapko is bare men poori jankari di ja sake. dhnaywad

Posted by ANUPAM KUMAR
Uttar Pradesh
16-03-2019 04:56 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Posted by birjpal
Haryana
16-03-2019 04:47 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से संपर्क करें

Posted by Saurabh
Uttar Pradesh
16-03-2019 02:53 AM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है
मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है .... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है
मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है
खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें
पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है
अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी
सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए
कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए
कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है
बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है

Posted by baljinder singh
Punjab
16-03-2019 02:10 AM
ਬਲਜਿੰਦਰ ਜੀ ਕਰਨੈਲ ਦੇ ਮੇਲੇ ਦੀ ਤਾਰੀਕ ਹਾਲੇ ਨਹੀਂ ਦਸੀ ਗਈ ਹੈ ਜਿਵੇ ਹੀ ਇਹ ਤਰੀਕ ਦੱਸੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤਾ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇ ਦਿਤੀ ਜਾਏਗੀ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by pk
Uttar Pradesh
16-03-2019 01:38 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Firoz
Uttar Pradesh
16-03-2019 01:26 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है

Posted by atul nandanwar
Maharashtra
16-03-2019 01:24 AM
श्री अतुल नंदनवार जी मोती फार्मिंग के बारे में अधिक जानकारी के लिए से आप Bamoriya Pearl Farm फोन: 097700 85381 पर संपर्क कर सकते हैं

Posted by ali
Kerala
16-03-2019 12:36 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे

Posted by
--
16-03-2019 12:35 AM
bakri farming ki traning bharat ke har distt me krishi vigyan kendre se milti hai. aap apne zile ke kvk me jakar traning ke liye form bhar sakte hai . jab traning shuru hoti hai to aapko call karke bula liya jata hai ji.

Posted by Rakesh Yadav
Haryana
16-03-2019 12:04 AM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by praveennndrtgbbvg
Madhya Pradesh
15-03-2019 11:58 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे

Posted by A nup
Uttar Pradesh
15-03-2019 11:58 PM
यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे पर.... (Read More)
यह मिट्टी की कई किस्मों जैसे अच्छे जल निकास वाली लाल दोमट से चिकनी मिट्टी, काली मिट्टी से लैटेराइट मिट्टी में उगाई जाती है यह चट्टानी मिट्टी और हल्की मिट्टी में भी उगाई जा सकती है मिट्टी की गहराई 20-30 सैं.मी. से ज्यादा नहीं होनी चाहिए यह रेतली दोमट से दरमियानी काली मिट्टी जो अच्छे जल निकास वाली हो, में अच्छे परिणाम देती है पौधे की वृद्धि के लिए मिट्टी pH 6-8 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Satavari (Asparagus racemosus),Satavari (Asparagus sarmentosa Linn.)शतावरी की खेती के लिए, अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए, ज़मीन की अच्छे से जोताई करें, और 15 सैं.मी. की गहराई में गड्ढा खोदें रोपाई तैयार बैडों पर की जाती है पौधों की रोपाई जून-जुलाई के महीने में की जाती है इसके विकास के अनुसार 4.5x 1.2 मीटर फासले का प्रयोग करें और 20 सैं.मी. गहराई में गड्ढा खोदें जब पौधा 45 सैं.मी. का हो जाए, तब खेत में रोपाई की जाती है अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं अधिक पैदावार के लिए, 400-600 ग्राम बीजों का प्रति एकड़ में प्रयोग करें फसल को मिट्टी से होने वाले कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए, बिजाई से पहले बीजों को गाय के मूत्र में 24 घंटे के लिए डाल कर उपचार करें उपचार के बाद बीज नर्सरी बैड में बोये जाते हैं बिजाई से पहले मिट्टी का रासायनिक उपचार किया जाता है अप्रैल के महीने में बीज बोये जाते हैं शतावरी के बीजों को 30-40 सैं.मी. की चौड़ाई वाले और आवश्यक लंबाई वाले बैडों पर बोया जाता है बिजाई के बाद बैडों को नमी के लिए पतले कपड़े से ढक दिया जाता है 8-10 दिनों में पौधों का अंकुरण शुरू हो जाता है 45 सैं.मी. ऊंचाई के होने पर पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं पौधों की रोपाई 60 x 60 सैं.मी. की मेड़ों पर की जाती है खेत की तैयारी के समय, 80 क्विंटल प्रति एकड़ गली हुई रूड़ी की खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 24 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 32 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 52 किलो), और पोटाश 40 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 66 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारियों से पौधे को बचाने के लिए जैविक कीट नाशी जैसे धतूरा, चित्रकमूल और गाय के मूत्र का प्रयोग करें फसल के विकास के समय लगातार गोडाई की आवश्यकता होती है खेत को नदीन मुक्त बनाने के लिए 6-8 हाथ से गोडाई की आवश्यकता होती है पौधों को खेत में रोपण करने के बाद पहली सिंचाई तुरंत कर देनी चाहिए इस फसल को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती इसलिए शुरूआत में 4-6 दिनों के फासले पर सिंचाई कर दें और फिर कुछ समय के बाद सप्ताह के फासले पर सिंचाई करें पुटाई से पहले सिंचाई जरूर करनी चाहिए ताकि गड्ढों मे से जड़ों को आसानी से निकाला जा सके रोपाई के बाद 20-30 महीनों में पौधे की जड़ें परिपक्व हो जाती हैं मिट्टी और जलवायु के आधार पर जड़ें 12-14 महीनों में पक जाती हैं मार्च-मई के महीने में जब बीज पक जाये, तब पुटाई की जाती है पुटाई कसी की सहायता से की जाती है प्रक्रिया और दवाइयां बनाने के लिए अच्छे से पके बीजों की आवश्यकता होती है

Posted by mohankumar Prasad
Maharashtra
15-03-2019 11:56 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
Posted by dharmesh kumar
Uttar Pradesh
15-03-2019 11:48 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Posted by partha tikadar
West Bengal
15-03-2019 11:29 PM
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रे.... (Read More)
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है यह डिपार्टमेंट जहाँ खेतीबाड़ी अफसर बैठता है जैसे जैसे कचिहरी, डी सी दफ्तर बोल देते है उसमें बना होता है, मछली पालन के लिए सेम वाले इलाके में 90% सब्सिडी होती है और बाकि इलाकों में 40% सब्सिडी होती है आप अपने ज़िले के FFDA ( fish farming development agency ) दफ्तर में जाएं जो कि आमतौर पर डी सी दफ्तर या कचिहरी में बना होता है, आप वहां ज़मीन की फर्द, स10th र्टिफिकेट और जहाँ तालाब बनाना है वहां की 2 फोटो लेकर जाएं उसके बाद FFDA के अफ़सर आपको फाइल तैयार करवाएंगे और आपकी ज़मीन देखकर तालाब बनाने का तरीका बताएंगे और फिर आपको 40% सब्सिडी के लिए फाइल तैयार कर लोन अप्लाई के बारे में समझा देंगे

Posted by sajal kumar
Delhi
15-03-2019 11:29 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Charan Singh
Uttar Pradesh
15-03-2019 11:20 PM
चरन जी कृपया पौधे की पूरी फोटो के साथ इसकी दो या तीन और तस्वीरें भेजें ताकि हम इसे बेहतर पहचान सकें और आपको उचित जानकारी प्रदान कर सकें, धन्यवाद
Posted by ਸੰਦੀਪ ਸਿੰਘ ਚਹਿਲ
Punjab
15-03-2019 11:19 PM
Sava 127 di mukh khet vich bijai 20 June to bad kiti jandi hai.

Posted by Rakesh Yadav
Haryana
15-03-2019 11:18 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Posted by Ravi Kumar
Madhya Pradesh
15-03-2019 10:56 PM
आर्टीमीसिया एक सुगंधित जड़ी बूटी है जो कि दुनिया के ठंडे शीताष्ण और उपउष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक रूप में पायी जाती है इसे पौधे का मूल स्थान चीन है
भारत में कश्मीर की घाटियों और देश के अन्य भागों में भी इसकी खेती शुरू हो चुकी है
इसकी खेती मिट्टी की विभिन्न किस्मों जैसे जल जमाव से रहित रेतली दोमट स.... (Read More)
आर्टीमीसिया एक सुगंधित जड़ी बूटी है जो कि दुनिया के ठंडे शीताष्ण और उपउष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक रूप में पायी जाती है इसे पौधे का मूल स्थान चीन है
भारत में कश्मीर की घाटियों और देश के अन्य भागों में भी इसकी खेती शुरू हो चुकी है
इसकी खेती मिट्टी की विभिन्न किस्मों जैसे जल जमाव से रहित रेतली दोमट से दोमट मिट्टी में की जाती है अच्छे जल निकास वाली जैविक सामग्री से भरपूर दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए उत्तम रहती है मिट्टी की पी एच 4.5 से 8.5 होनी चाहिए
प्रजनन — इसका प्रजनन मुख्यत बीजों के द्वारा किया जाता है अच्छी गुणवत्ता वाले बीज हमेशा भरे हुए और एक आकार वाले होते हैं इसके बीजों को औसतन 4 महीने के समय तक स्टोर करके रखा जा सकता है यदि नमी की मात्रा 13 प्रतिशत से कम हो
छोटे आकार के बीजों को मुख्य खेत में सीधे बोने के कारण वे अच्छा परिणाम नहीं देते इसलिए सबसे पहले नर्सरी बैडों पर नए पौधे तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें मुख्य खेत में रोपित किया जाता है
नए पौधों की नर्सरी में तैयारी — उचित आकार के नर्सरी बैड तैयार करें और प्रत्येक बैड पर 10 किलो गाय का गला हुआ गोबर डालें उसके बाद 250—500 ग्राम बीजों को मिट्टी में मिलाकर नर्सरी बैडों पर एक समान डालें और बैडों को मिट्टी या रेत की पतली परत से ढक देंं बैडों को स्प्रिंक्लर की सहायता से पानी देते रहें बीज 5—8 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं जाते बीज जल्दी अंकुरित हो जाते हैं और उनकी अंकुरन प्रतिशतता भी ज्यादा होती है नए पौधे 6—8 सप्ताह में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं खेत की तैयारी — नए पौधों की रोपाई से पहले मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की 2—3 बार जोताई करें
बिजाई का समय — पहली फसल पिछेती बारिश के मौसम और दूसरी गर्मियों के दौरान बोयी जाती है बीजों को नर्सरी में सितंबर से अक्तूबर महीने में बोया जाता है और गर्मियों की फसल के लिए बीजों को नवंबर से दिसंबर महीने में बोया जाता है
रोपाई — रोपाई से पहले बैडों को सिंचित किया जाता है 6—8 सप्ताह के, सेहतमंद और एक समान आकार वाले बीजों को कतारों में 30—60 सैं.मी. और पौधों में 45—60 सै.मी. फासले में रोपित किया जाता है रोपाई के बाद हल्की सिंचाई की जाती है
खादें — अच्छी उपज के लिए मिट्टी की स्थिति के आधार पर 60—80 किलो नाइट्रोजन, 40—60 किलो फासफोरस और 60 किलो पोटाश डालें फासफोरस ओर पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की दो तिहाई मात्रा को खेत की तैयारी के समय डालें बाकी की नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा को दो भागों में बांटकर रोपाई के बाद 30वें और 60वें दिन बाद डालें यह फसल बोरोन ओर आयकरन की कमी के अधिक संवेदनशील होती है इसलिए इसके लिए शुरूआती खुराक के तौर पर बोरेक्स 8 किलो प्रति हेक्टेयर पर डालें सिंचाई — फसल को अच्छे से स्थापित करने के लिए खेत को रोपाई के बाद लगातार सिंचित करते रहना चाहिए स्थापित होने के बाद कटाई तक केवल 3—4 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए मलच का प्रयोग करें
खरपतवार नियंत्रण— फसल को 2—3 गोडाई की आवश्यकता होती है रोपाई के बाद 20 दिनों तक गोडाई की जानी चाहिए
कटाई — फसल रोपाई के बाद 4.5—5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है फूलों के पूरी तरह खिलने पर कटाई की जाती है ज़मीनी स्तर से 15—30 सैं.मी. की ऊंचाई तक सिक्कल की सहायता से पौधों की कटाई की जाती है फसल की कटाई सूखे मौसम में करें बारिश के समय, सुबह के समय कटाई ना करें

Posted by yashpal
Delhi
15-03-2019 10:33 PM
यशपाल जी आपने इसके ऊपर कौन सी दवाई का छिड़काव किया है कृपया आप इसके बारे में पूरी जानकारी दे निम्बू को तात की कमी के कारण फूल झा दजाते है इसके लिए आप पौधे को 1 -2 किलो वर्मी कम्पोस्ट डालें इससे पौधे में सभी तत्व की कमी पूरी हो जाएगी
Posted by ਗੁਰਮੁਖ ਸਿੰਘ
Punjab
15-03-2019 10:18 PM
ਗੁਰਮੁਖ ਜੀ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਦਾ ਥੈਲਾ ਉਸ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਤੁਸੀਂ ਦੱਸੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਕਿਸ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਕਿ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਸਕੇ

Posted by vikram
Madhya Pradesh
15-03-2019 10:17 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे

Posted by ਗੁਰਦਰ ਸਿੰਘ
Maharashtra
15-03-2019 10:17 PM
ਗੁਰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਇਕ ਕਿੱਲੇ ਦੇ ਵਿਚ ਜਾ ਤਾ polyhouse ਲਾ ਕੇ ਬੇਮੌਸਮੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਵਿਚ ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ\ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by vikram
Madhya Pradesh
15-03-2019 10:15 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
Posted by RUBAN SINGH
Punjab
15-03-2019 10:12 PM
ਦੇਸੀ ਮੁਰਗੀਆਂ ਦੇ ਬੱਚੇ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ GADVASU Ludhiana, Punjab 7889239583 (Mon - Fri 10am-5pm) ਨਾਲ ਜਾ ਫਿਰ Hardeep Singh 9781589637 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by amrit sandhu
Punjab
15-03-2019 10:09 PM
KVK patiala nal tuc 094642 10460 is number te sampark kar sakde ho. dhanwad
Posted by Mahendra
Uttar Pradesh
15-03-2019 09:59 PM
पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1,Hybrid-77,Shivalik,EC-41911,Gomti,Himalaya किस्म क.... (Read More)
पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1,Hybrid-77,Shivalik,EC-41911,Gomti,Himalaya किस्म की बिजाई कर सकते है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है प्रजनन क्रिया जड़ के भाग या टहनियों द्वारा की जाती है अच्छी पैदावार के लिए 160 किलो भागों को प्रति एकड़ में प्रयोग करें जड़ें पिछले पौधों से दिसंबर और जनवरी के महीने में प्राप्त की जाती है फसल को जड़ गलने से बचाने के लिए बिजाई से पहले बीजे जाने वाले उपचार कप्तान 0.25 प्रतिशत या आगालोल 0.3% या बैनलेट 0.1% से 2-3 मिनट के लिए किया जाना चाहिए बिजाई से पहले पौधे की बारीक जड़ 10-14 सैं.मी. काटें पुदीने की जड़ को आकार और जड़ के हिसाब से बोयें पौधे की बारीक जड़ की रोपाई 40 सैं.मी. के फासले पर और कतार से कतार का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बिजाई के बाद मिट्टी को नमी देने के लिए सिंचाई करें रोपाई के बाद नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें हाथों से लगातार गोडाई करें और पहली कटाई के बाद खेत को नदीन मुक्त करें नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों को नियंत्रित करने के लिए जैविक मल्च के साथ ऑक्सीफलोरफिन 200 ग्राम या पैंडीमैथालीन बूटीनाशक 800 मि.ली को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि नदीन ज्यादा हो तो डालापोन 1.6 किलोग्राम प्रति एकड़ या ग्रामाक्ज़ोन 1 लीटर और डयूरॉन 800 ग्राम या टेरबेसिल 800 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है

Posted by Prabh Saini
Punjab
15-03-2019 09:53 PM
ਸੈਣੀ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਇਹ ਦੱਸੋ ਤੁਸੀਂ ਕਿਹੜੇ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਖਾਦ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਕਿ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਸਕੇ
Posted by Gurminder Singh
Punjab
15-03-2019 09:52 PM
ਗੁਰਮਿੰਦਰ ਜੀ ਮਿਰਚ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ ਜਿਵੇ Ch-27,Punjab sandoori, Punjab tej ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Sai Ram Communications
Punjab
15-03-2019 09:46 PM
Sai Ram Communications ji iski traning guru angad dev veterinary university ludhiana me milegi. aap waha par jakar tranining ke liye form bhar ke aaye uske baad jab woh traning di date jari karege to aapko call karke bta diya jayega ji.

Posted by NAFISH
Delhi
15-03-2019 09:44 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे

Posted by aseer Ahmad
Uttar Pradesh
15-03-2019 09:42 PM
कड़कनाथ जो है यह मध्य प्रदेश की झाबुआ जिले का जंगलों में पाई जाने वाली एक प्रजाति का एक मुर्गा है यह मुर्गा आजकल बहुत ज्यादा डिमांड में है क्योंकि इस मुर्गे का मांस काले कलर का होता है हड्डियां पंख और त्वचा भी काले कलर की होती है यह मुर्गा पौष्टिक गुणों से भरपूर होता है इसमें भी वन से लेकर बी12 तक विटामिंस बहु.... (Read More)
कड़कनाथ जो है यह मध्य प्रदेश की झाबुआ जिले का जंगलों में पाई जाने वाली एक प्रजाति का एक मुर्गा है यह मुर्गा आजकल बहुत ज्यादा डिमांड में है क्योंकि इस मुर्गे का मांस काले कलर का होता है हड्डियां पंख और त्वचा भी काले कलर की होती है यह मुर्गा पौष्टिक गुणों से भरपूर होता है इसमें भी वन से लेकर बी12 तक विटामिंस बहुत सारे अमीनो एसिड इस मुर्गे में पाए जाते हैं इस मुर्गे में आयरन और हीमोग्लोबिन अधिक होने के कारण इस के खून का रंग गहरा लाल होता है जिससे काले कलर का प्रतीत होता है आजकल यह कई जगह अवेलेबल है लेकिन प्योर देसी कड़कनाथ की अगर बात करें तो प्योर देसी मतलब जो 5 से 6 महीने में 5 से 6 महीने में 1 किलो का होता है उसे देसी कहा जाता है और जिस की त्वचा हड्डी पंख सारा कुछ काला होता है उसे देसी कड़कनाथ कहा जाता है I इसका 1000 मुर्गा रखने के लिए 2000 sqayer फट की जरुरत पड़ेगी इसका एक चूजा ₹80 डेढ़ सौ तक ₹150 उपलब्ध हैइसकी फार्म शुरू करने के लिए आप Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm से संपर्क कर सकते है
Posted by Subham MISHRA
Uttar Pradesh
15-03-2019 09:39 PM
shubham ji aap btaye ke aapka interest konsi fasl ki kheti karne me hai ta ki aapko iske bare me poori jankari di ja sake.

Posted by pranesh pralhadrao deshmukh
Maharashtra
15-03-2019 09:39 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे

Posted by hehe
Maharashtra
15-03-2019 09:39 PM
मधुमक्खी पालन ट्रेनिंग प्रोग्राम के वी के द्वारा आयोजित किया जाता है आम तौर पर मधुमक्खी पालन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम अप्रैल या अक्टूबर महीने में किया जाता है, आप नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र पते पर अधिक जानकारी के लिए कोसबद हिल, ताल- दहानू, ठाणे, महाराष्ट्र 401703, फोन: 02528 241 439 संपर्क करें

Posted by shiv
Delhi
15-03-2019 09:38 PM
इसके लिए आप मुर्गी को नज़दीकी डॉक्टर से जांच करवायें क्योंकि उसके पेट की जांच और शरीर की जांच करके उसका सही इलाज हो सकता है

Posted by Mathura Devi
Punjab
15-03-2019 09:38 PM
Mathura Devi ji eh fake scheme hai ji es tarah ki koe yojna hai . jekar tusi es bare puri news read karni hai ta apni kheti app de vich news dekho othe puri news diti hoe hai ji.

Posted by Pradeep choudhary
Rajasthan
15-03-2019 09:36 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है इसके बारे में और जानकारी लेने के लिए आप Mr. jai :8882876224जी से संपर्क कर सकते है यह आपको इसकी मार्केटिंग के बारे में भी जानकारी दे देंगे.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है इसके बारे में और जानकारी लेने के लिए आप Mr. jai :8882876224जी से संपर्क कर सकते है यह आपको इसकी मार्केटिंग के बारे में भी जानकारी दे देंगे
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