Experts Q&A Search

Posted by VIPIN KUMAR
Uttar Pradesh
16-03-2019 03:48 PM
Punjab
03-21-2019 10:23 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by shital
Maharashtra
16-03-2019 03:43 PM
Maharashtra
03-18-2019 05:31 PM
Posted by Sumant Itkan
Punjab
16-03-2019 03:38 PM
Maharashtra
03-18-2019 05:33 PM
सुमंत जी कृपया फोटो दुबारा भेजे ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके आपके द्वारा भेजी गयी फोटो अपलोड नहीं हुई है धन्यवाद
Posted by Aniket dhakad
Madhya Pradesh
16-03-2019 03:35 PM
Punjab
03-19-2019 11:56 AM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है रेतली दोमट से दोमट मिट्टी चप्पन कद्दू की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी होती है चप्पन कद्दू की खेती के लिए मिट्टी का पी एच 5.5-6.5 होना चाहिए आप इसके लिए PAG-3 किसम की बिजाई कर सकते है कद्दू की खेती के लिए अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा करने के .... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जा सकता है रेतली दोमट से दोमट मिट्टी चप्पन कद्दू की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी होती है चप्पन कद्दू की खेती के लिए मिट्टी का पी एच 5.5-6.5 होना चाहिए आप इसके लिए PAG-3 किसम की बिजाई कर सकते है कद्दू की खेती के लिए अच्छी तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए 2-3 जोताई करें उसके बाद हैरो से जोताई करें 2 मीटर के फासले पर 15 सैं.मी. गहरी खालियां बनायें बिजाई के लिए मध्य जनवरी से मार्च और अक्तूबर से नवंबर का महीना (संरक्षण में) उपयुक्त होता है प्रत्येक जगह में दो बीज बोयें और 45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 2.5-3.5 सें.मी. की गहराई पर बोना चाहिए चप्पन कद्दू के लिए 2 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें बैड की तैयारी से पहले अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 15 टन प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 40 किलो (यूरिया 90 किलो), फासफोरस 20 किलो (एस एस पी 125 किलो), और पोटाश 15 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 25 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा खेत की तैयारी के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को बिजाई के एक महीने बाद टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें बीज को बोने के बाद तुरंत सिंचाई की आवश्यकता होती है और फिर मौसम के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करें इस फसल को कुल 9-10 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है नदीनों को रोकने के लिए हाथों से गोडाई और निराई करें नदीनों की वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए 2 सप्ताह के पौधों को गोडाई करते रहें बिजाई के 60-80 दिनों के बाद किस्म और मौसम के आधार पर पहली तुड़ाई करें फल बनने के 7 दिनों के बाद तुड़ाई की जाती है तुड़ाई 2-3 दिनों के अंतराल पर की जानी चाहिए 
Posted by manpreet gill
Punjab
16-03-2019 03:34 PM
Punjab
03-18-2019 05:15 PM
Posted by pankaj singh
Rajasthan
16-03-2019 03:28 PM
Punjab
03-18-2019 06:05 PM
खरगोश पालन की शुरूआत आप 1 यूनिट से शुरू कर सकते हैं एक यूनिट में 3 मेल और 10 फीमेल खरगोश होते हैं एक यूनिट आपको लगभग 30000 रूपये तक मिल जायेगा इसलिए आपको 30ग35 का शैड बनाना पड़ेगा बाकी यदि इनकी खुराक की बात करें तो इन्हें एक समय फीड और एक समय पठ्ठे खिलाने होते हैं बीमारियां कुछ खास नहीं लगती इन्हें लगभग 3 महीनों में बेचन.... (Read More)
खरगोश पालन की शुरूआत आप 1 यूनिट से शुरू कर सकते हैं एक यूनिट में 3 मेल और 10 फीमेल खरगोश होते हैं एक यूनिट आपको लगभग 30000 रूपये तक मिल जायेगा इसलिए आपको 30ग35 का शैड बनाना पड़ेगा बाकी यदि इनकी खुराक की बात करें तो इन्हें एक समय फीड और एक समय पठ्ठे खिलाने होते हैं बीमारियां कुछ खास नहीं लगती इन्हें लगभग 3 महीनों में बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं खरगोश मीट के लिए और इनसे वैक्सीन तैयार की जाती हैं इसकी शुरूआत के लिए कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट करती हैं और हर वर्ष 10 प्रतिशत रेट बढ़ाती हैं पंजाब में खरगोश पालन का व्यवसाय अभी बहुत कम है पर धीरे धीरे बढ़ रहा है आप पैराडाइज़ कंपनी से संपर्क कर सकते हैं जिनका संपर्क नंबर है 9466419455 आप खुद जाकर इनका फार्म देखकर आयें .वहां से आपको पूरी जानकारी मिल जाएगी
Posted by surendra
Madhya Pradesh
16-03-2019 03:28 PM
Punjab
03-21-2019 10:20 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by Gaurav kumawat
Rajasthan
16-03-2019 03:28 PM
Punjab
03-19-2019 11:59 AM
गौरव जी आप अभी गेंहू के बाद मूंग की बिजाई कर सकते है इसके बाद आप मक्का की बिजाई कर सकते है मक्का के बाद आप गन्ने की बिजाई कर सकते है इसके इलावा आप सब्जियों की काश्त भी कर सकते है\\ धन्यवाद
Posted by Harpinder singh
Haryana
16-03-2019 03:27 PM
Punjab
03-18-2019 07:00 PM
Moti ki kheti ke bare me puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
Posted by surendra
Madhya Pradesh
16-03-2019 03:25 PM
Punjab
03-21-2019 10:22 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by anmol singh
Punjab
16-03-2019 03:23 PM
Haryana
03-19-2019 12:03 PM
ਬਾਸਮਤੀ 1718, 136-138 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਝਾੜ 18-20 qtl/acre ਦਿੰਦੀ ਹੈ 1728 ਕਿਸਮ IARI ਵਲੋਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਕਿਸਮ ਹੈ. ਇਹ ਵੀ ਬਾਸਮਤੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 135-145 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਝਾੜ 17 .5 qtl/acre ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਦੋਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕਿਸੇ ਦੀ ਵੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by saif
Telangana
16-03-2019 03:22 PM
Madhya Pradesh
05-14-2019 05:08 PM
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में ज.... (Read More)
मोती पालन के फायदे - मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जो आपको अन्य लोगो से अलग करता है .वही लोग इस व्यवसाय को कर सकते है ..जिनकी सोच कुछ अलग करने की हो .. (1) एक एकड़ में पारंपरिक खेती से 50000/- का मुनाफा हो सकता है और मोती पालन से 8-10 लाख (2) एक तालाब में बहुउदेशीय योजनाओ का लाभ लेके 8-10 प्रकार के व्यापर करके आय मे बृद्धि (3) जमीन में जल स्तर को बढ़ाकर सरकार की मदद (4) बचे हुए सामान से हस्तकला उद्योग को बढ़ावा देना (5) यदि महिला वर्ग इस व्यवसाय में आते है तो ज्यादा फायदे है क्योकि मोती के आभूषण के साथ साथ मदर ऑफ़ पर्ल (Shell jewellery) का भी फायदा ले सकते है (6) आसपास के लोगो को रोजगार अधिक जानकारी संपर्क करे ..अमित बमोरिया 9407461361 9770085381 बमोरिया मोती सम्बर्धन केंद्र मध्य प्रदेश https://m.bhaskar.com/news/MP-HOSH-quitting-govt-job-engineer-is-earning-money-from-pearl-cultivation-news-hindi-5533297-PHO.html
Posted by Manoj upadhyay
Uttar Pradesh
16-03-2019 03:22 PM
Punjab
03-21-2019 10:54 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by surendra
Madhya Pradesh
16-03-2019 03:18 PM
Punjab
03-21-2019 10:25 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by Rabindra
Jharkhand
16-03-2019 03:17 PM
Punjab
03-22-2019 03:21 PM
कड़कनाथ के चूजे लेने के लिए आप Anuj Kumar Mehta 9534422915 से सम्पर्क करे
Posted by Santu Biswas
West Bengal
16-03-2019 03:15 PM
Haryana
03-22-2019 03:12 PM
पूरी जानकारी और ट्रेनिंग के बारे में Regional Research Centre, Rahara Fish Farm, P.O. Rahara, कोलकाता-700117, पश्चिम बंगाल, फ़ोन और फैक्स: +91-33-25683023, इ-मेल: raharacifa@gmail.com से संपर्क करें
Posted by GAJANAN
Maharashtra
16-03-2019 03:13 PM
Punjab
03-22-2019 12:18 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
Posted by Gurveer sidhu
Punjab
16-03-2019 03:04 PM
Punjab
03-16-2019 03:15 PM
nisran to bad knak nu pani halka lgao and din de time jdo hawa speed nal chldi hai tn odo pani na lgao. Jhad vich tele nu control krn lyi v spray perfect time te kro ta jo fasal da nuksaan na hove. ess lyi tuc Actara @80gm per acre da spray kr skde ho.
Posted by Sunil Kumar
Punjab
16-03-2019 03:02 PM
Punjab
03-22-2019 12:19 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Manish Vasudev 9417652857 से सम्पर्क करे
Posted by Gurveer sidhu
Punjab
16-03-2019 03:01 PM
Punjab
03-16-2019 03:14 PM
Syngenta tilt  di vrto tuc kr skde ho. isda result bahut vadia hai.
Posted by Sunil Kumar
Punjab
16-03-2019 03:00 PM
Punjab
03-22-2019 03:13 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Manish Vasudev 9417652857 से सम्पर्क करे
Posted by Ranjan Bhoi
Odisha
16-03-2019 03:00 PM
Maharashtra
03-18-2019 05:36 PM
राजन जी यह कीट के हमले के कारण ऐसे हो रहे है इसके लिए आप quinalphos@4ml को प्रति लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें, धन्यवाद
Posted by Dhanveer singh Benipal
Punjab
16-03-2019 02:58 PM
Punjab
03-16-2019 03:25 PM
uss nu Zackshoot injection 20ml, CRB injection 20ml, injection Vitmain-k 15ml lgwao, isde nal powder TMK 50gm rojana deo.
Posted by vikrant
West Bengal
16-03-2019 02:58 PM
Punjab
04-06-2019 12:27 PM
ट्रेनिंग लेने के लिए सबसे पहले मछली पालन विभाग से संपर्क करें तब आप इस व्यवसाय को शुरू कर सकते हैं
Posted by pawan
Punjab
16-03-2019 02:53 PM
Punjab
03-16-2019 03:41 PM
Pawan g gehu mein tela marne ke liye acephate use nhi kr skte. Gehu mein tele ki roktham ke liye Actara @80 gm per acre ka spray kr skte ho. Tilt fungicide ka spray @200 ml per acre ka spray kr skte ho.Enka spray aap alag alag hi kro.
Posted by Kevin Patel
Gujarat
16-03-2019 02:50 PM
Punjab
03-22-2019 03:18 PM
पूरी जानकारी और ट्रेनिंग के बारे में जानकारी के लिए Regional Research Centre, Anand ATIC, Anand Agricultural University, आनंद, गुजरात फ़ोन और फैक्स: +91-2692-263699, -388001 इ-मेल: cifagujarat@gmail.com और Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381. से संपर्क करें
Posted by Kevin Patel
Gujarat
16-03-2019 02:49 PM
Punjab
03-22-2019 03:24 PM
हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते हैं, मोती परियोजना .... (Read More)
हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते हैं, मोती परियोजना की लागत लगभग 4 लाख रुपये होगी जब व्यापारिक मोती कृषि परियोजना में लाभ की बात आती है, तो आप आदर्श एक्वाकल्चर प्रबंधन प्रथाओं के तहत 50 से 60% की उम्मीद कर सकते हैं हालाँकि, यदि आप परियोजना में कड़ी मेहनत करते हैं तो भी 100% लाभ संभव है मुख्य रूप से तीन प्रकार के मोती होते हैं • प्राकृतिक मोती: इस प्रकार में, मोती का आकार विदेशी शरीर के मूल आकार पर निर्भर करता है • बनावटी मोती: ये बनावटी रूप से बनाए जाते हैं और एक सिंथेटिक सामग्री के साथ लेपित होते हैं • संवर्धित मोती (मीठे पानी): ये ताजे पानी जैसे तालाबों, नदियों आदि में सुसंस्कृत मोती हैं आप इस प्रकार से वांछित आकार प्राप्त कर सकते हैं • आपके पास तालाब में कस्तूरी का अच्छा स्रोत होना चाहिए • आपके पास मोती संस्कृति में तकनीक के ग्राफ्टिंग के कुछ कौशल होने चाहिए क्योंकि यह व्यापारिक मोती कृषि परियोजना के लिए आवश्यक है आप ताजे पानी मोती उत्पादन के इन सुझावों को जानने के लिए पास के मोती उत्पादन करने वालों के फार्म देख सकते हैं सबसे पहले आपको 3 दिनों के व्यावहारिक ट्रेनिंग में भाग लेना होगा अपने स्थान के अनुसार आप विनोद कुमार से ट्रेनिंग प्राप्त कर सकते हैं वह सफल मोती उत्पादन करने वाले किसान हैं वह नए किसानों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं उनका संपर्क नंबर 9050555757 है धन्यवाद
Posted by vikas patidar
Rajasthan
16-03-2019 02:49 PM
Rajasthan
03-18-2019 06:12 PM
गाय ब्याने के लिए 9 महीने 9 दिन का समय लेती है यदि इसमें से कुछ दिन पहले या बाद में ब्याये तो कोई डर वाली बात नहीं होती है ब्याने से 2—3 दिन पहले गाय खाना कम कर देती है, बेचैन रहती है, बार बार पिशाब करती है, बार बार उठती बैठती है जिससे हम अंदाजा लगा सकते है कि गाय कुछ दिनों तक ब्याय जाएगी
Posted by Deep
Punjab
16-03-2019 02:47 PM
Punjab
03-19-2019 12:05 PM
ਮਨਦੀਪ ਸਿੰਘ ਜੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਤੁਸੀ ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਕਰੋ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਖੁੰਬਾਂ ਤੋਂ ਬਣੇ ਉਤਪਾਦ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਵੀ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਫੀ ਮੁਨਾਫ਼ਾ ਹੋਏਗਾ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ਮਲਕੀਤ ਸਿੰਘ
Rajasthan
16-03-2019 02:45 PM
Punjab
03-16-2019 02:56 PM
fungus di roktham lyi tuc tilt ya opera di vrto kr skde ho. tilt ate opera dose @200ml per acre hai. 
Posted by Sanjay Singh
Uttar Pradesh
16-03-2019 02:39 PM
Maharashtra
03-16-2019 02:53 PM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
Posted by kulwinder singh
Punjab
16-03-2019 02:37 PM
Punjab
03-18-2019 06:13 PM
uss nu tuci khurak vdia deo , hara chara 30-35 kg rojana deo ate her 3 mahine badd deworming jrur krwao , tuci uss nu Enerboost powder 100gm rojana ate Vitum-H liquid 10ml rojana dena suru kro , iss nal lewa vdia howega ate kamjori v door howegi .
Posted by avneesh
Uttar Pradesh
16-03-2019 02:36 PM
Punjab
03-21-2019 10:16 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Sanjay Singh
Uttar Pradesh
16-03-2019 02:36 PM
Maharashtra
03-16-2019 02:53 PM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
Posted by Gurprit singh
Punjab
16-03-2019 02:36 PM
Punjab
03-18-2019 06:14 PM
ਇਹ ਤੁਸੀ ਗਾਂ ਨੂੰ 100 ਮਿਲੀ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਰੋਟੀ ਉਤੇ ਲਗਾ ਕੇ ਜਾਂ ਫਿਰ ਦਾਣੇ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਗਾਂ ਨੂੰ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ .
Posted by dahesh
Maharashtra
16-03-2019 02:34 PM
Punjab
03-22-2019 03:28 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by Mohmmad Emran
Rajasthan
16-03-2019 02:33 PM
Punjab
03-19-2019 05:39 PM
हांजी यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यद.... (Read More)
हांजी यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्म हो तो बच्चे भी बेचे जाते है कुल मिलाकर यदि मोटा सा हिसाब लगाना है तो एक बकरी से लगभग 20000 तक कमाई हो जाती है बाकि यह भी सलाह है कि आप आपने नज़दीक से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें बकरी पालन के काम पर लोन पर 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है और लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें इससे अपने एरिया के नाबार्ड डिपार्टमैंट के सी जी एम को भी लोन के लिए मिलें
Posted by Sachin rajput
Uttar Pradesh
16-03-2019 02:31 PM
Punjab
03-21-2019 10:17 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Dhanveer singh Benipal
Punjab
16-03-2019 02:30 PM
Rajasthan
03-16-2019 02:35 PM
ehna dwaia da result vdia hunda hai ehna da result ek varr vich nahi milda, ehna da holi holi assar hunda hai .
Posted by dipanshu panjabarao bawane
Maharashtra
16-03-2019 02:27 PM
Punjab
03-22-2019 03:29 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by sewak singh
Punjab
16-03-2019 02:20 PM
Punjab
03-19-2019 05:43 PM
ਇਸ ਵਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ ਬੀਰਬਲ ਜੀ ਨਾਲ 7009579091 ਨੰਬਰ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਤੁਸੀ 93175 17763 ਸੰਦੀਪ ਜੀ ਦੇ ਨੰਬਰ ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by शिव रूद्र शर्मा
Maharashtra
16-03-2019 02:18 PM
Maharashtra
03-16-2019 02:39 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती आप इसके बारे में और जानकारी और इसकी मार्केटिंग के बारे में जानकारी लेने के लिए Mr. jai 8882876224 से संपर्क कर सकते हैं
Posted by Satnam Singh
Punjab
16-03-2019 02:15 PM
Punjab
03-19-2019 05:43 PM
ਸਤਨਾਮ ਸਿੰਘ ਜੀ ਇਸ ਬਾਰੇ ਵਿਸਥਾਰ ਵਿਚ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀਂ Puneet Gupta 9780200996 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by mohan
Madhya Pradesh
16-03-2019 02:10 PM
Punjab
03-22-2019 03:31 PM
सीप की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by
--
16-03-2019 02:09 PM
Maharashtra
03-18-2019 05:39 PM
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट.... (Read More)
अच्छे जल निकास वाली गहरी, दोमट मिट्टी जिसमें भूमिगत-जल का स्तर ज़मीन से 1.5-2 मी. के नीचे हो और अच्छी जल धारण क्षमता वाली ज़मीन गन्ने की खेती के लिए लाभदायक है यह फसल काफी अम्लीय और खारेपन को सहन कर सकती है इसलिए इसे मिट्टी जिसका pH 5 से 8.5 हो, में उगाई जा सकती है यदि मिट्टी का pH 5 से कम हो तो इसमें चूना (कली) डालें और यदि मिट्टी का pH 9.5 से ज्यादा हो तो इसमें जिप्सम डालें आप इसकी किस्मे जैसे Co 8014 (Mahalakshami) ,Vasant 1,Co 86032 ,Co 92005 की बिजाई कर सकते है पतझड़ के मौसम में 15 अक्तूबर से २० नवंबर तक बिजाई की जाती है, बसंत के मौसम में बिजाई 15 फरवरी तक और गर्मियों के मौसम में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक बिजाई की जाती है बिजाई के लिए सुधरे ढंग जैसे कि (गहरी खालियां, मेंड़ बनाकर,पंक्तियों में जोड़े बनाकर और गड्ढा खोदकर बिजाई ) प्रयोग किये जाते हैं 1) खालियां और मेंड़ बनाकर सूखी बिजाई: ट्रैक्टर द्वारा मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करें मेड़ और खालियों में 90 सैं.मी. का फासला होना चाहिए गन्ने की गुलियों को मिट्टी में दबाएं और उसके बाद हल्की सिंचाई करें 2) पंक्तियों के जोड़े बनाकर बिजाई: खालियां बनाने वाले यंत्र के प्रयोग से खेत में 150 सैं.मी. के फासले पर खालियां बनाएं और उनमें 30:30-90-30:30 सैं.मी. के फासले पर गन्ने की रोपाई करें इस तरीके से मेड़ वाली बिजाई से अधिक पैदावार मिलती है 3) गड्ढा खोदकर बिजाई: गड्ढे खोदने वाली मशीन से 60 सैं.मी. व्यास के 30 सैं.मी. गहरे गड्ढे खोदें जिनमें 60 सैं.मी. का फासला हो इससे गन्ना 2-3 बार उगाया जा सकता है और मेड़ वाली बिजाई से 25-50 % अधिक पैदावार आती है B) एक आंख वाले गन्नों की बिजाई: रोपाई के लिए सेहतमंद गुलियां चुनें और 75-90 सैं.मी. के अंतर पर खालियों में बिजाई करें गुलियां एक आंख वाली होनी चाहिए यदि गन्ने के ऊपरी भाग में छोटी डलियां चुनी गई हों तो बिजाई 6 -9 सैं.मी. के अंतर पर करें फसल के अच्छे उगने के लिए आंखों को ऊपर की ओर रखें और हल्की सिंचाई करें पतझड़ के मौसम में 14500-16500 तीन आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें और बसंत के मौसम में 16500-25000 तीन आंख वाले बीज और 21600-25000 दो आंख वाले बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें गन्ने में नदीनों के कारण 12-72 % पैदावार का नुकसान होता है शुरूआती 60-120 दिनों तक नदीनों की रोकथाम बहुत जरूरी है इसलिए रोपाई के बाद 3-4 महीने बाद फसल की नदीनों की रोकथाम करें नीचे लिखे तरीकों से नदीनों को रोका जा सकता है 1) हाथों से गोडाई करके: गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली फसल है इसलिए नदीनों को गोडाई करके रोका जा सकता है इसके इलावा प्रत्येक सिंचाई के बाद 3-4 गोडाई जरूरी है 2) काश्तकारी ढंग: इस प्रक्रिया में खेती के तरीके, अंतरफसली और मलचिंग तरीके शामिल हैं बहुफसली के कारण नदीनों का हमला ज्यादा होता है इसकी रोकथाम के लिए चारे वाली फसलें और हरी खाद वाली फसलों के आधार वाला फसली चक्र गन्ने में नदीनों की रोकथाम करता है गन्ना एक व्यापक जगह लेने वाली भी फसल है जिससे नदीनों के हमले का खतरा भी ज्यादा होता है यदि गन्ने को कम समय वाली फसलों के साथ अंतरफसली किया जाए तो इससे नदीनों को कम किया जा सकता है और ज्यादा लाभ भी मिल सकता है गन्ने के अंकुरन के बाद गन्ने की कतारों में 10-12 सैं.मी. मोटी तह बिछा दी जाती है यह सूर्य की रोशनी को सोखता है जिससे नदीन कम होते हैं यह मिट्टी में नमी को भी बचाता है 3) रासायनिक तरीके: नदीनों की रोकथाम के लिए, सिमाज़ीन या एट्राज़ीन 600-800 ग्राम या मैट्रीब्यूज़िन 800 ग्राम या ड्यूरॉन 1-1.2 किलोग्राम प्रति एकड़ में बिजाई के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए इसके इलावा चौड़े पत्ते वाले नदीनों की रोकथाम के लिए 2, 4-डी@ 300-400 ग्राम का प्रयोग प्रति एकड़ के हिसाब से करें नाइट्रोजन 62 किलो, फासफोरस 32 किलो और पोटाश 42 किलो प्रति एकड़ में डालें बिजाई से पहले नाइट्रोजन की 1/3 मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा डालें बाकी बची नाइट्रोजन की दो मात्रा को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें नाइट्रोजन की पहली मात्रा को बीज वाली आंख के अंकुरण के समय और दूसरी मात्रा को बीज अंकुरण के 45 दिन बाद डालें 3 वर्षों के बाद गन्ने की गुलियों में 40-50 क्विंटल गाय का गोबर प्रति एकड़ में डालें पतझड़ के मौसम में 90-100 दिनों में नाइट्रोजन को टॉप ड्रेसिंग के तौर पर डालें और बसंत के मौसम में 150-160 दिन बाद डालनी चाहिए सिंचाई की संख्या मिट्टी की किस्म और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है गर्मी के महीने में गर्म हवाओं और सूखे में वृद्धि होने के कारण फसल को पानी की जरूरत पड़ती है पहली सिंचाई फसल के 20-25 % अंकुरित होने पर करें मानसून में गन्ने को पानी और बारिश के आधार पर लगाएं कम वर्षा में सिंचाई 10 दिनों के अंतराल पर करें इसके बाद सिंचाई के अंतराल को बढ़ाकर 20-25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें जमीन में नमी संभालने के लिए गन्ने की पंक्तियों में मलचिंग का प्रयोग करें अप्रैल जून के महीने में पानी की कमी ना होने दें इससे पैदावार कम होगी इसके इलावा बारिश के दिनों में पानी ना खड़ा होने दें जोताई का समय, वृद्धि का समय और अधिक विकास का समय सिंचाई के लिए बहुत नाज़ुक होता है मिट्टी को मेंड़ पर चढ़ाना: कसी की मदद से खालियों में और पौधे के किनारों पर मिट्टी चढ़ाई जाती है यह मिट्टी में अच्छी तरह से तैयार की गई खाद को अच्छी तरह से मिश्रित होने में मदद करती है पौधे को सहारा देने और उसे गिरने से बचाने में भी मदद करती है ज्यादा पैदावार और चीनी प्राप्त करने के लिए गन्ने की सही समय पर कटाई जरूरी है समय से पहले या बाद में कटाई करने से पैदावार पर प्रभाव पड़ता है किसान शूगर रीफरैक्टोमीटर का प्रयोग करके कटाई का समय पता लगा सकते हैं गन्ने की कटाई द्राती की सहायता से की जाती है गन्ना धरती से ऊपर थोड़ा हिस्सा छोड़कर काटा जाता है क्योंकि गन्ने में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है कटाई के बाद गन्ना फैक्टरी में लेकर जाना जरूरी होता है
Posted by rushikesh
Maharashtra
16-03-2019 02:09 PM
Punjab
03-22-2019 03:33 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
Posted by शिव रूद्र शर्मा
Maharashtra
16-03-2019 02:08 PM
Punjab
03-22-2019 02:52 PM
शिव रूद्र शर्मा जी मशरुम की ट्रेनिंग आप अपने नजदीकी कृषि विज्ञानं केंद्र से ले सकते है जिसका पता है Panjari, Wardha, Nagpur, Maharashtra 441108
Posted by Lokendra Panwar
Madhya Pradesh
16-03-2019 02:07 PM
Punjab
03-22-2019 05:58 PM
बकरी पालन की ट्रेनिंग आपको अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र से ही मिलेगी जी आपका नज़दीकी kvk का पता आप नोट कर सकते हो आप यहाँ पर जाकर ट्रेनिंग के लिए फॉर्म भर के सबमिट करे Krishi Vigyan Kendra K.G.N.M.T, Kasturbagram Khandwa Road, Dist. Indore - 452020, Madhya Pradesh
Posted by sanjay bhausagar
Bihar
16-03-2019 02:07 PM
Punjab
03-22-2019 03:36 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से संपर्क करें