
Posted by Navneet
Punjab
16-03-2019 11:30 PM
ਨਵਨੀਤ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਪੁਛੋ ਕੇ ਤੁਸੀ ਮੱਕੀ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਬਾਰੇ ਕੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Ravinder Poonia
Haryana
16-03-2019 11:20 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by shreyansh
Madhya Pradesh
16-03-2019 11:18 PM
आप अपनी गाय को किसी अच्छी का मिर्नल मिक्सर्च देना शुरू करें और हर तीन महीने के बाद पेट के कीड़ों के लिए गोली देते रहें इससे वो जल्दी हीट में आ जाएगी और आप उसकी खुराक का भी पूरा ध्यान रखें
Posted by shreyansh
Madhya Pradesh
16-03-2019 11:10 PM
एलोवेरा देने से त्वचा की कोमलता बनी रहती है इससे पशुओं में बांझपन की समस्या भी दूर होती है यह मिर्नल से भरपूर होता है जो पशुओं के शरीर की कमी को पूरा करता है यह थनों की समस्या से भी बचाव रखता है यह पशुओं के लिए प्राकृतिक औषधियों के रूप में प्रयोग होता है इसे आप आधा किलो तक पशु को दे सकते है और हफ्ते के बाद फिर दो.... (Read More)
एलोवेरा देने से त्वचा की कोमलता बनी रहती है इससे पशुओं में बांझपन की समस्या भी दूर होती है यह मिर्नल से भरपूर होता है जो पशुओं के शरीर की कमी को पूरा करता है यह थनों की समस्या से भी बचाव रखता है यह पशुओं के लिए प्राकृतिक औषधियों के रूप में प्रयोग होता है इसे आप आधा किलो तक पशु को दे सकते है और हफ्ते के बाद फिर दोबारा दे सकते है

Posted by ravendra chaudhary
Uttar Pradesh
16-03-2019 10:57 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Devendra Singh Rawat
Rajasthan
16-03-2019 10:52 PM
देवेंद्र सिंह रावत जी डॉग का रेट उन की ब्लड लाइन पर निर्भर करता है पिट बुल 8000-50000 और लैबराडोर डॉग 5000-12000 तक मिल जाता है खरीदने के लिए आप Pets Paradise The Complete Pet Shop Nasirabad Road, Ajmer - 305001, Opposite St Pauls School Bank Of Baroda ATM 8290052011, 8290970076 से सम्पर्क करे
Posted by pargat singh
Punjab
16-03-2019 10:41 PM
ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ,ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿਖੇ ਕਰਵਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਜਦੋਂ ਚਾਹੇ ਆਪਣਾ ਫਾਰਮ ਭਰ ਕੇ ਆਓ ੳੇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੋਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਬੁਲਾ ਲਿਆ ਜਾਵੇਗਾ ਕਿਉਕੀ ਕੋਈ ਪੱਕੀ ਤਰੀਕ ਨਹੀ ਹੁੰਦੀ ਜਾਂ ਤੁਸੀ ਨਜਦੀਕੀ KVK ਵਿਚ ਜਾ ਕੇ ਫਾਰਮ ਭਰ ਕੇ ਆਓ ਜਦੋ ਵੀ ਸੂਰਾ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿਗ ਹੋਵੇਗੀ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਫੋਨ.... (Read More)
ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ,ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿਖੇ ਕਰਵਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲਈ ਜਦੋਂ ਚਾਹੇ ਆਪਣਾ ਫਾਰਮ ਭਰ ਕੇ ਆਓ ੳੇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਦੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੋਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਾਲ ਕਰਕੇ ਬੁਲਾ ਲਿਆ ਜਾਵੇਗਾ ਕਿਉਕੀ ਕੋਈ ਪੱਕੀ ਤਰੀਕ ਨਹੀ ਹੁੰਦੀ ਜਾਂ ਤੁਸੀ ਨਜਦੀਕੀ KVK ਵਿਚ ਜਾ ਕੇ ਫਾਰਮ ਭਰ ਕੇ ਆਓ ਜਦੋ ਵੀ ਸੂਰਾ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿਗ ਹੋਵੇਗੀ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਫੋਨ ਕਰਕੇ ਦੱਸ ਦੇਣਗੇ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਤੁਸੀ ਸਰਕਾਰੀ ਸੂਰ ਫਾਰਮ ਨਾਭਾ, ਖਰੜ, ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਤੋਂ ਵੀ ਸੂਰ ਪਾਲਣ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਹ 5 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਜੇਕਰ ਇਸ ਕਿੱਤੇ ਦੇ ਸਬੰਧਿਤ ਸਫਲ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਿਖੇ ਸੂਰ ਪਾਲਕਾ ਦੀ ਹੋਣ ਵਾਲੀ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਿਲ ਹੋ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਜਾਣ ਲਈ ਤੁਸੀ 9915632577 ਸੁਖਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਹ ਸਫਲ ਸੂਰ ਪਾਲਕ ਹਨ ਜੀ ਬਾਕੀ ਮਾਨਸਾ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਦਾ ਪਤਾ ਵੀ ਤੁਸੀ ਨੋਟ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ Krishi Vigyan Kendra, Kheri , Sangrur Address: National Highway 71, Punjab 148001, Phone: 0161 240 1960.

Posted by simranjit singh
Punjab
16-03-2019 10:21 PM
ਹਾਈਡਰੋਪੋਨਿਕ ਇਕ ਅਜੇਹੀ ਤਕਨੀਕ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਵਿਚ ਬਿਨਾ ਮਿੱਟੀ ਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਸਬਜ਼ੀਆਂ ਅਤੇ ਚਾਰਾ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸਦੇ ਵਿਚ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਤਰਲ ਰੂਪ ਦੇ ਵਿਚ ਤੱਤ ਦਿਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਬਾਰੇ ਵਿਚ ਹੋਰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਸੋਮਵੀਰ ਜੀ 9878733551 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by parminder singh
Punjab
16-03-2019 10:14 PM
ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਉਸਦੀ ਨਸਲ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵੱਧ ਹੋਵੇਗੀ , ਬਾਕੀ ਖੁਰਾਕ , ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ , ਟਾਈਮ ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣਾ , ਇਹਨਾਂ ਸਭ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ , ਤੁਸੀ Anabolite liqued 100ml ਰੋਜ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ , ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 3 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ.... (Read More)
ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਉਸਦੀ ਨਸਲ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵੱਧ ਹੋਵੇਗੀ , ਬਾਕੀ ਖੁਰਾਕ , ਪਸ਼ੂ ਦੇ ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ , ਟਾਈਮ ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਕਰਵਾਉਣਾ , ਇਹਨਾਂ ਸਭ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ , ਤੁਸੀ Anabolite liqued 100ml ਰੋਜ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ , ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 3 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ , ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ , ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ , ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ , ਅਤੇ ਤੁਸੀ Milkout ਪਾਊਡਰ ਦੇ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ , ਇਸਦਾ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਵਿਚ ਵਧਿਆ ਰਿਜਲਟ ਹੈ..

Posted by gulshan kumar
Punjab
16-03-2019 10:12 PM
गुलशन कुमार जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Manish Vasudev 9417652857 से संपर्क करें

Posted by goldy baziger
Haryana
16-03-2019 09:56 PM
सीप की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें

Posted by Pravin Sansare
Maharashtra
16-03-2019 09:54 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 पर कॉल कर सकते है
Posted by kuldeep singh
Uttar Pradesh
16-03-2019 09:47 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Badshaha Shaikh
Maharashtra
16-03-2019 09:35 PM
इसके लिए सबसे पहले आप ट्रेनिंग लेनी जरूरी है आप आपने नज़दीकी केबीके से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें बकरी पालन के काम पर लोन पर 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है और लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के.... (Read More)
इसके लिए सबसे पहले आप ट्रेनिंग लेनी जरूरी है आप आपने नज़दीकी केबीके से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें बकरी पालन के काम पर लोन पर 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है और लोन लेने के लिए सबसे जरूरी है ट्रेनिंग सर्टीफिकेट अपने नज़दीक के कृषि विज्ञान केंद्र से ट्रेनिंग करने के बाद ट्रेनिंग के सर्टीफिकेट पर लोन एप्लाई होता है पर लोन मिलेगा या नहीं यह बैंक मेनेजर पर निर्भर करता है क्योंकि पहली बात यह है कि बैंक देखता है कि आपके अकाउंट में कितने पैसों का लेन देन हो रहा है और आपके पास ज़मीन गारंटी के तौर पर देने के लिए है या नहीं और अन्य भी कई बातें चैक करके लोन के लिए सहमत होता है बाकी कोशिश करें कि लोन के बिना अपने स्तर पर ही काम शुरू करें क्योंकि लोन की किश्त हर महीने भरनी पड़ेगी पर बकरियों से कमाई हर महीने नहीं होने होगी बाकी यदि कोशिश करके देखनी है तो अपने ट्रेनिंग सर्टीफिकेट से आप अपने जिले के पशु पालन विभाग अफसर को मिलें और उस पर प्रवानगी लेकर फिर बैंक से बात करके देखें इससे अपने एरिया के नाबार्ड डिपार्टमैंट के सी जी एम को भी लोन के लिए मिलें

Posted by mahendra
Madhya Pradesh
16-03-2019 09:33 PM
महेंद्र जी कृपया आप बताये के आप कोनसी फसल के मंडी भाव की जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by Saif Gabbur
Karnataka
16-03-2019 09:31 PM
हांजी अगर आपने शेड बनाना है तो पूर्व - पश्चिम की तरफ ही बनाना पड़ेगा नहीं तो गर्मी में समस्या आएगी जी
Posted by Gautam Kumar Singh
Uttar Pradesh
16-03-2019 09:25 PM
कड़कनाथ जो है यह मध्य प्रदेश की झाबुआ जिले का जंगलों में पाई जाने वाली एक प्रजाति का एक मुर्गा है यह मुर्गा आजकल बहुत ज्यादा डिमांड में है क्योंकि इस मुर्गे का मांस काले कलर का होता है हड्डियां पंख और त्वचा भी काले कलर की होती है यह मुर्गा पौष्टिक गुणों से भरपूर होता है इसमें भी वन से लेकर बी12 तक विटामिंस बहु.... (Read More)
कड़कनाथ जो है यह मध्य प्रदेश की झाबुआ जिले का जंगलों में पाई जाने वाली एक प्रजाति का एक मुर्गा है यह मुर्गा आजकल बहुत ज्यादा डिमांड में है क्योंकि इस मुर्गे का मांस काले कलर का होता है हड्डियां पंख और त्वचा भी काले कलर की होती है यह मुर्गा पौष्टिक गुणों से भरपूर होता है इसमें भी वन से लेकर बी12 तक विटामिंस बहुत सारे अमीनो एसिड इस मुर्गे में पाए जाते हैं इस मुर्गे में आयरन और हीमोग्लोबिन अधिक होने के कारण इस के खून का रंग गहरा लाल होता है जिससे काले कलर का प्रतीत होता है आजकल यह कई जगह अवेलेबल है लेकिन प्योर देसी कड़कनाथ की अगर बात करें तो प्योर देसी मतलब जो 5 से 6 महीने में 5 से 6 महीने में 1 किलो का होता है उसे देसी कहा जाता है और जिस की त्वचा हड्डी पंख सारा कुछ काला होता है उसे देसी कड़कनाथ कहा जाता है I इसका 1000 मुर्गा रखने के लिए 2000 sqayer फट की जरुरत पड़ेगी इसका एक चूजा ₹80 डेढ़ सौ तक ₹150 उपलब्ध हैइसकी फार्म शुरू करने के लिए आप Sumit Kumar 8006000291, 7906547529 Sumit Kumar Poultry Farm से संपर्क कर सकते है

Posted by karampreet
Punjab
16-03-2019 09:15 PM
karampreet ji mausam vibhag de anusar punjab vich es hafte badlwai hi rahegi tuc kanak nu pani la sakde ho.

Posted by satgur singh
Punjab
16-03-2019 09:09 PM
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रे.... (Read More)
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है यह डिपार्टमेंट जहाँ खेतीबाड़ी अफसर बैठता है जैसे जैसे कचिहरी, डी सी दफ्तर बोल देते है उसमें बना होता है, मछली पालन के लिए सेम वाले इलाके में 90% सब्सिडी होती है और बाकि इलाकों में 40% सब्सिडी होती है आप अपने ज़िले के FFDA ( fish farming development agency ) दफ्तर में जाएं जो कि आमतौर पर डी सी दफ्तर या कचिहरी में बना होता है, आप वहां ज़मीन की फर्द, स10th र्टिफिकेट और जहाँ तालाब बनाना है वहां की 2 फोटो लेकर जाएं उसके बाद FFDA के अफ़सर आपको फाइल तैयार करवाएंगे और आपकी ज़मीन देखकर तालाब बनाने का तरीका बताएंगे और फिर आपको 40% सब्सिडी के लिए फाइल तैयार कर लोन अप्लाई के बारे में समझा देंगे
Posted by ਮਲਕੀਤ ਸਿੰਘ
Rajasthan
16-03-2019 09:08 PM
Stevia ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਸ਼ੁਗਰ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਦੇ ਪਤਿਆਂ ਤੋਂ ਜ਼ੀਰੋ ਕੈਲੋਰੀਜ਼ ਸਵੀਟਨੈੱਸ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਇਹ ਸ਼ੂਗਰ ਤੋਂ ਜਾਇਦਾ ਮਿੱਠੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਇਸਦੀਆਂ 2 ਕਿਸਮਾਂ ਲਗਾਈਆ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ mds 14 ਅਤੇ mds13 ਇਸਦੇ ਲਈ ਤਾਪਮਾਨ 30℃ ਤੋਂ 32℃ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ 1. ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਝੋਨੇ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਜ਼ਮੀਨ ਹੇਠਲੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਪੱਧਰ ਹੇਠਾਂ ਜਾਣਾ ਵੱਡੀ ਚਿੰਤਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਦੇ .... (Read More)
Stevia ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਸ਼ੁਗਰ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਦੇ ਪਤਿਆਂ ਤੋਂ ਜ਼ੀਰੋ ਕੈਲੋਰੀਜ਼ ਸਵੀਟਨੈੱਸ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਇਹ ਸ਼ੂਗਰ ਤੋਂ ਜਾਇਦਾ ਮਿੱਠੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਇਸਦੀਆਂ 2 ਕਿਸਮਾਂ ਲਗਾਈਆ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ mds 14 ਅਤੇ mds13 ਇਸਦੇ ਲਈ ਤਾਪਮਾਨ 30℃ ਤੋਂ 32℃ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ 1. ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਝੋਨੇ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਜ਼ਮੀਨ ਹੇਠਲੇ ਪਾਣੀ ਦਾ ਪੱਧਰ ਹੇਠਾਂ ਜਾਣਾ ਵੱਡੀ ਚਿੰਤਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਪੌਣ-ਪਾਣੀ ਮੁਤਾਬਕ ਰੇਤਲੀ ਤੇ ਕੰਢੀ ਖੇਤਰ ਦੀ ਧਰਤੀ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਲਈ ਵਧੇਰੇ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੈ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਤੇ ਇੱਕ ਵਾਰੀ ਪੌਦੇ ਲਾਉਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 5 ਸਾਲ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਕਟਾਈ ਹੀ ਕਰਨੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ 2. ਪਹਿਲੀ ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਕਟਾਈ ਤਿੰਨ ਮਹੀਨਿਆਂ ਬਾਅਦ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਆਮਦਨ ਜਲਦੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਜ਼ਮੀਨ ਵਿੱਚ 30 ਤੋਂ 40 ਹਜ਼ਾਰ ਪੌਦੇ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਤੱਥ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ’ਤੇ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕ ਜਾਂ ਨਦੀਨਨਾਸ਼ਕ ਦਵਾਈਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ 3. ਯੂਰੀਆ ਜਾਂ ਡੀਏਪੀ ਖਾਦ ਦੀ ਥਾਂ ਸਿਰਫ਼ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਦੀ ਹੀ ਵਰਤੋਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਕੁਦਰਤੀ ਖੇਤੀ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਵੀ ਕਹੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਸਟੀਵੀਆ ਦੇ ਪੌਦੇ ਵਿੱਚ ਮਿਠਾਸ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਪਸ਼ੂ ਵੀ ਮੂੰਹ ਨਹੀਂ ਲਾਉਂਦੇ 4.ਇਹ ਫ਼ਸਲ ਘੱਟੋ ਘੱਟ ਇੱਕ ਕਨਾਲ ਰਕਬੇ ਵਿੱਚ ਵੀ ਲਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਰ ਜੇਕਰ 5 ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਲਾਈ ਜਾਵੇ, ਤਾਂ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਕੁੱਲ ਲਾਗਤ ਦਾ 40 ਫੀਸਦੀ ਸਬਸਿਡੀ ਵੀ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਪ੍ਰਫੁੱਲਤ ਕਰਨ ਲਈ ਸਰਕਾਰ ਲਾ ਰਹੀ ਜ਼ੋਰ:ਇਸ ਲਈ ਕੰਢੀ ਖੇਤਰ ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਸਟੀਵੀਆ ਲਾਉਣ ਲਈ ਪ੍ਰੇਰਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੱਸਿਆ ਕਿ ਪੰਜਾਬ ’ਚ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਨੂੰ ਪ੍ਰਫੁੱਲਤ ਕਰਨ ਲਈ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਵਧੀਕ ਮੁੱਖ ਸਕੱਤਰ (ਵਿਕਾਸ) ਸੁਰੇਸ਼ ਕੁਮਾਰ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਹੇਠ ਕਮੇਟੀ ਦਾ ਗਠਨ ਕੀਤਾ ਹੈ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਕਮਿਸ਼ਨਰ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਡਾ. ਬਲਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਸਿੱਧੂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਹੈ ਕਿ ਸਟੀਵੀਆ ਦੀ ਫਸਲ ਝੋਨੇ ਤੇ ਕਣਕ ਦਾ ਬਦਲ ਬਣ ਸਕਦੀ ਹੈ ਦੂਜਾ ਇਸ ਫ਼ਸਲ ਤੋਂ ਕਣਕ ਤੇ ਝੋਨੇ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਕਮਾਈ ਵੀ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਬਾਰੇ ਹੋਰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੰਬਰ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ :-Rajpal Singh Gandhi :-9814060700

Posted by ramavat darshan
Gujarat
16-03-2019 09:06 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Regional Research Centre, Anand ATIC, Anand Agricultural University, Anand , Gujarat, Ph. & Fax: +91-2692-263699, -388001 से संपर्क करें
Posted by ramesh kumar verma
Uttar Pradesh
16-03-2019 09:06 PM
वर्ष में दो बार इसके बीजों को बोया जाता है बिजाई के लिए उपयुक्त समय मध्यम फरवरी से मार्च का महीना है और दूसरी बार बिजाई के लिए मध्य मई से जुलाई का समय उपयुक्त है
Posted by Nitesh Singh
Uttar Pradesh
16-03-2019 09:04 PM
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेन.... (Read More)
यदि आप मछली पालन का काम शुरू करना चाहते हैं तो ट्रेनिंग बहुत जरूरी है यह ट्रेनिंग FFDA(fish farmer development aggency) हर जिले में बनी है जहां हमारा खेतीबाड़ी विभाग है वहां इसके अफसर बैठते हैं वहां जाकर एप्लीकेशन भरवायें वहां आपको 5 दिन की ट्रेनिंग दी जायेगी यह मुफ्त है कोई पैसा नहीं लगता इसका आपको र्स्टीफिकेट दिया जाता है ट्रेनिंग के लिए दसवीं पास होना ज़रूरी है यह डिपार्टमेंट जहाँ खेतीबाड़ी अफसर बैठता है जैसे जैसे कचिहरी, डी सी दफ्तर बोल देते है उसमें बना होता है, मछली पालन के लिए सेम वाले इलाके में 90% सब्सिडी होती है और बाकि इलाकों में 40% सब्सिडी होती है आप अपने ज़िले के FFDA ( fish farming development agency ) दफ्तर में जाएं जो कि आमतौर पर डी सी दफ्तर या कचिहरी में बना होता है, आप वहां ज़मीन की फर्द, स10th र्टिफिकेट और जहाँ तालाब बनाना है वहां की 2 फोटो लेकर जाएं उसके बाद FFDA के अफ़सर आपको फाइल तैयार करवाएंगे और आपकी ज़मीन देखकर तालाब बनाने का तरीका बताएंगे और फिर आपको 40% सब्सिडी के लिए फाइल तैयार कर लोन अप्लाई के बारे में समझा देंगे

Posted by ramavat darshan
Gujarat
16-03-2019 09:04 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Regional Research Centre, Anand ATIC, Anand Agricultural University, Anand , Gujarat, Ph. & Fax: +91-2692-263699, -388001 से संपर्क करें

Posted by sukhdev thakur
Madhya Pradesh
16-03-2019 09:04 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 पर कॉल कर सकते है
Posted by Shivam awasthi
Uttar Pradesh
16-03-2019 09:03 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by tarun singh
Uttar Pradesh
16-03-2019 08:53 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Srimay prasanjit
Odisha
16-03-2019 08:49 PM
हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते हैं, मोती परियोजना .... (Read More)
हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते हैं, मोती परियोजना की लागत लगभग 4 लाख रुपये होगी जब व्यापारिक मोती कृषि परियोजना में लाभ की बात आती है, तो आप आदर्श एक्वाकल्चर प्रबंधन प्रथाओं के तहत 50 से 60% की उम्मीद कर सकते हैं हालाँकि, यदि आप परियोजना में कड़ी मेहनत करते हैं तो भी 100% लाभ संभव है मुख्य रूप से तीन प्रकार के मोती होते हैं • प्राकृतिक मोती: इस प्रकार में, मोती का आकार विदेशी शरीर के मूल आकार पर निर्भर करता है • बनावटी मोती: ये बनावटी रूप से बनाए जाते हैं और एक सिंथेटिक सामग्री के साथ लेपित होते हैं • संवर्धित मोती (मीठे पानी): ये ताजे पानी जैसे तालाबों, नदियों आदि में सुसंस्कृत मोती हैं आप इस प्रकार से वांछित आकार प्राप्त कर सकते हैं • आपके पास तालाब में कस्तूरी का अच्छा स्रोत होना चाहिए • आपके पास मोती संस्कृति में तकनीक के ग्राफ्टिंग के कुछ कौशल होने चाहिए क्योंकि यह व्यापारिक मोती कृषि परियोजना के लिए आवश्यक है आप ताजे पानी मोती उत्पादन के इन सुझावों को जानने के लिए पास के मोती उत्पादन करने वालों के फार्म देख सकते हैं सबसे पहले आपको 3 दिनों के व्यावहारिक ट्रेनिंग में भाग लेना होगा अपने स्थान के अनुसार आप विनोद कुमार से ट्रेनिंग प्राप्त कर सकते हैं वह सफल मोती उत्पादन करने वाले किसान हैं वह नए किसानों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं उनका संपर्क नंबर 9050555757 है धन्यवाद

Posted by amanjot singh
Punjab
16-03-2019 08:36 PM
amanjot ji kanak dign nal ik ta daaneya vich fungus lag jandi hai dooja daaneya da sahi akar nahi banda. dhanwad

Posted by sachin
Uttar Pradesh
16-03-2019 08:34 PM
सचिन जी आप चूहों की रोकथाम के लिए नीचे दिए गए तरीके अपना सकते है:-
पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान कर.... (Read More)
सचिन जी आप चूहों की रोकथाम के लिए नीचे दिए गए तरीके अपना सकते है:-
पिंजरो का प्रयोग करना - चूहो को पडने के अलग अलग पिजंरो का प्रयोग किया जाता है इन पिजंरो का प्रयोग करने से पहले पिजंरे को अच्छी तरह धोकर प्रयोग करे ताकि किसी भी प्रकार की गंध ना आये साफ पिंजरो को खेत में चूहो के आने जाने वाले रास्ते और नुक्सान करने वाली जगह पर रखे बडी संखिया में चूहो को पकडने के लिए पिंजरे में 10-15 ग्राम अनाज को तेल लगाकर दो से तीन दिनो तक मुंह खोलकर रखे चुहो को मगर लगाने के बाद पिंजरे के अंदर कागज के टूकडो पर 10-15 ग्राम दाने और नालीदार दाखले पर चुटकी भर दाने रखकर मुंह को बंद कर दे ऐसा करके तीन दिन तक चूहे और पकडे हुए चूहो को पानी में डूबो कर मारे पिंजरो का दौबारा प्रयोग करने के लिए कम से कम 20 दिनो का फासला रखें कीडेमार जहरो के प्रयोग से रोकथाम - चूहो की कीडेमार और जहर के प्रयोग से रोकथाम करने के लिए जहरीला चोगा प्रयोग करने में ध्यान और सही तरीका प्रयोग करने की जरूरत है चुहो को इस जहरीले चोगे को खाना प्रयोग किये दानो का मियारपन , स्वाद, और तेल की गंध पर निर्भर करता है जहरीला चोगा बनाना जिंक फॉसफाइड का प्रयोग - एक किलो बाजरा गेहूं ज्वार का दलिया या इनका मिश्रण लेकर इसमे 20 ग्राम तेल हो सके तो मुंगफली का तेल और 25 ग्राम जिंकफॉसफाइड डाल कर अच्छी तरह मिलाये इस प्रकार तैया किये जहरीले चोगे को कागज की पुडीया बनाकर खेत में गेज वाली जगह पर रखे बरोमोडाइओलोन का प्रयोग - 20 ग्राम बरोमोडाइओलोन 0 005 फीसदी पाऊडर, 20 ग्राम बूरा खंड, और 20 ग्राम तेल को एक किलो किसी भी अनाज के दलिये में मिलाये और पूरे खेत में 40 जगह पर रख दें रैकुमिन का प्रयोग- 50 ग्राम रैकुमिन 0 0375 फीसदी पाऊडर , 20 ग्राम मुंगफली या सूरजमुखी का तेल और 20 ग्राम बूरा खंड को किसी भी अनाज के दलीये में मिलाये यह भी चूहो को मारने में बहुत फायदेमंद है
Posted by tarun singh
Uttar Pradesh
16-03-2019 08:30 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें

Posted by Md Taufique Shakir
Bihar
16-03-2019 08:26 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी और इसकी ट्रेनिंग के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क कर सकते है
Posted by tarun singh
Uttar Pradesh
16-03-2019 08:25 PM
तरुण जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे के कोनसी खेती की जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद
Posted by sandeep singh
Uttar Pradesh
16-03-2019 08:15 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by Imran Manik khan
Maharashtra
16-03-2019 08:11 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे

Posted by sandeep
Haryana
16-03-2019 08:11 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्ट भी इंटरनेट व अन्य माध्यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Rakesh jaat
Rajasthan
16-03-2019 08:02 PM
राकेश जी अमरुद के पेड़ लेने के लिए आप Pawan Kumar 9878726420 से सम्पर्क कर सकते है इन से आप को इसकी किस्मो के बारे में जानकारी मिल जाएगी
Posted by sompal
Haryana
16-03-2019 07:58 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से बताएं कि आप डेयरी फार्मिंग के बारे में क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में सही जानकारी दी जा सके

Posted by jaspreet kaur
Punjab
16-03-2019 07:55 PM
Jaspreet ji sade app vich pashua de saban vich ate fasla de saband vich mahir juude hoye hai, filhal app vich insana de bimaria wala ajje koi mahir nahi hai , isde ilagg lai tuci nazdiki doctor nal sampark kro ate jekar tuci fasla ya pashua de saband vich koi jankari leni hai tan tuci uss saband vich swal post kr skde ho
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