Experts Q&A Search

Posted by जय प्रकाश विश्वकर्मा
Uttar Pradesh
17-03-2019 03:24 PM
Maharashtra
03-18-2019 09:41 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है इसका बीज लेने के लिए आप Mr. jai 8882876224 जी से संपर्क कर सकते है
Posted by guri sidhu gurbachan singh
Punjab
17-03-2019 03:17 PM
Punjab
03-20-2019 12:29 PM
eh tat di kami de karn peele paine shuru ho jande han isde layi tuc NPk 19:19:19@7 gram nu prati litre pani vich mila ke spray karo is to ilava tuc m-45@4gram nu prati litre pani vich mila ke spray karo. dhanwad
Posted by Harmesh Patel
Uttar Pradesh
17-03-2019 03:15 PM
Maharashtra
03-20-2019 12:27 PM
तुलसी का वानस्पातिक नाम ओसिमम सैंकशम है यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Dru.... (Read More)
तुलसी का वानस्पातिक नाम ओसिमम सैंकशम है यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Drudriha Tulsi,Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum),Babi Tulsi,Tukashmiya Tulsi ज़मीन की तैयारी:- तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें रोपण के तीन महीने के बाद पौधा पैदावार देनी शुरू कर देता है इसकी तुड़ाई पूरी तरह से फूल निकलने के समय की जाती है पौधे को 15 सैं.मी. जमीन से ऊपर रखकर शाखाओं को काटें ताकि इनका दोबारा प्रयोग किया जा सकें भविष्य में प्रयोग करने के लिए इसके ताज़े पत्तों को धूप में सूखाया जाता है तुड़ाई के बाद, पत्तों को सूखाया जाता है फिर तेल की प्राप्ति के लिए इसका अर्क निकाला जाता है इसको परिवहन के लिए हवादार बैग में पैक किया जाता है पत्तों को सूखे स्थान पर स्टोर किया जाता है इसकी जड़ों से कई तरह के उत्पाद जैसे तुलसी अदरक, तुलसी पाउडर, तुलसी चाय और तुलसी कैप्सूल आदि तैयार किये जाते है मोती की खेती की जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Sandeep kunar verma
Uttar Pradesh
17-03-2019 03:13 PM
Punjab
03-18-2019 09:16 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Vinod Kumar 9050555757 सम्पर्क करे
Posted by Gurveer sidhu
Punjab
17-03-2019 02:59 PM
Punjab
03-18-2019 04:08 PM
Gurveer sidhu ji tuci turant iss nu nazdiki doctor to check krwao kyuki issdi janch krke he isda vdia ilagg ho skda hai.
Posted by rishi divedi
Punjab
17-03-2019 02:43 PM
Punjab
03-18-2019 09:21 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Manish Vasudev 9417652857 सम्पर्क करे
Posted by Lakhwinder
Punjab
17-03-2019 02:42 PM
Punjab
04-04-2019 04:05 PM
ਲਖਵਿੰਦਰ ਜੀ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਰੋਟਾਵੇਟਰ ਤੇ ਸਬਸਿਡੀ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ Kuldeep Singh 9872028219, 9815387219 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by SAMEER
Delhi
17-03-2019 02:42 PM
Punjab
03-18-2019 09:50 PM
Motio ki kheti ke bare me puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
Posted by jogendra Singh
Rajasthan
17-03-2019 02:35 PM
Punjab
03-22-2019 04:57 PM
जोगेंद्र जी आप कृषि परवेक्षक से कृषि से संबंधित कोई भी जानकारी ले सकते है धन्यवाद
Posted by surjeet
Rajasthan
17-03-2019 02:31 PM
Punjab
03-22-2019 04:59 PM
सुरजीत जी एक मरले में 272.251 sq फ़ीट होते है धन्यवाद
Posted by balkrushna
Maharashtra
17-03-2019 02:25 PM
Punjab
03-18-2019 09:25 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 सम्पर्क करे
Posted by Kamlakar kadam
Maharashtra
17-03-2019 02:24 PM
Punjab
03-18-2019 09:33 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 पर कॉल कर सकते है
Posted by suyash vishwkarma
Madhya Pradesh
17-03-2019 02:23 PM
Punjab
03-18-2019 06:34 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी और इसकी ट्रेनिंग के लिए Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 के साथ संम्पर्क कर सकते हैं
Posted by sharda prasad maurya
Uttar Pradesh
17-03-2019 02:19 PM
Punjab
03-18-2019 09:30 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 पर कॉल कर सकते है
Posted by गौरव शर्मा
Punjab
17-03-2019 02:19 PM
Punjab
03-22-2019 08:07 PM
उसे आप Liquid Lactomood 15ml 10-10 बूंदे दिन में तीन बार दें इसके साथ Tablet Lactomax 200 10—10 गोलियां सुबह शाम दें और Milkout पाउडर 1—1 चम्मच सुबह शाम दें इससे फर्क पड़ जाएगा
Posted by gurpreet singh
Punjab
17-03-2019 02:16 PM
Maharashtra
03-20-2019 12:18 PM
gurpreet ji kanak nu pani laun de layi poori jankari nal diti photo to lai sakde ho
Posted by Avinash Singh
Uttar Pradesh
17-03-2019 02:12 PM
Punjab
03-18-2019 09:37 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Posted by ketan
Maharashtra
17-03-2019 02:03 PM
Punjab
03-18-2019 12:08 PM
हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते हैं, मोती परियोजना .... (Read More)
हमारे साथ अपना सवाल शेयर करने के लिए धन्यवाद हम आपकी इसमें मदद करेंगे मोती उत्पादन भारत के सबसे अच्छे जलीय कृषि व्यवसायों में से एक है व्यापारिक मोती उत्पादन परियोजना में, पहले वर्ष में निवेश अधिक होगा क्योंकि आपको इसमें स्थाई एसेट सेट अप की आवश्यकता होती हे आप 3/4 से 1 एकड़ की जगह ले सकते हैं, मोती परियोजना की लागत लगभग 4 लाख रुपये होगी जब व्यापारिक मोती कृषि परियोजना में लाभ की बात आती है, तो आप आदर्श एक्वाकल्चर प्रबंधन प्रथाओं के तहत 50 से 60% की उम्मीद कर सकते हैं हालाँकि, यदि आप परियोजना में कड़ी मेहनत करते हैं तो भी 100% लाभ संभव है मुख्य रूप से तीन प्रकार के मोती होते हैं • प्राकृतिक मोती: इस प्रकार में, मोती का आकार विदेशी शरीर के मूल आकार पर निर्भर करता है • बनावटी मोती: ये बनावटी रूप से बनाए जाते हैं और एक सिंथेटिक सामग्री के साथ लेपित होते हैं • संवर्धित मोती (मीठे पानी): ये ताजे पानी जैसे तालाबों, नदियों आदि में सुसंस्कृत मोती हैं आप इस प्रकार से वांछित आकार प्राप्त कर सकते हैं • आपके पास तालाब में कस्तूरी का अच्छा स्रोत होना चाहिए • आपके पास मोती संस्कृति में तकनीक के ग्राफ्टिंग के कुछ कौशल होने चाहिए क्योंकि यह व्यापारिक मोती कृषि परियोजना के लिए आवश्यक है आप ताजे पानी मोती उत्पादन के इन सुझावों को जानने के लिए पास के मोती उत्पादन करने वालों के फार्म देख सकते हैं सबसे पहले आपको 3 दिनों के व्यावहारिक ट्रेनिंग में भाग लेना होगा अपने स्थान के अनुसार आप विनोद कुमार से ट्रेनिंग प्राप्त कर सकते हैं वह सफल मोती उत्पादन करने वाले किसान हैं वह नए किसानों को ट्रेनिंग भी दे रहे हैं उनका संपर्क नंबर 9050555757 है धन्यवाद
Posted by Subhash Mandal
Chattisgarh
17-03-2019 02:00 PM
Punjab
03-18-2019 09:40 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 सम्पर्क करे
Posted by Gopal patel
Madhya Pradesh
17-03-2019 01:52 PM
Punjab
03-18-2019 09:53 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 सम्पर्क करे
Posted by krishan beniwal
Haryana
17-03-2019 01:52 PM
Punjab
03-18-2019 09:57 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Posted by Shiv Nandan
Uttar Pradesh
17-03-2019 01:49 PM
Punjab
03-18-2019 09:58 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Posted by Virender
Haryana
17-03-2019 01:48 PM
Punjab
03-18-2019 09:59 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Posted by मनोज पाण्डेय
Uttar Pradesh
17-03-2019 01:40 PM
Punjab
03-18-2019 09:59 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Posted by mohit
Uttar Pradesh
17-03-2019 01:38 PM
Punjab
03-18-2019 10:00 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Posted by arun zambare
Maharashtra
17-03-2019 01:33 PM
Punjab
03-18-2019 10:02 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
Posted by Manish Tiwari
Uttar Pradesh
17-03-2019 01:32 PM
Punjab
03-18-2019 10:00 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 से सम्पर्क करे
Posted by Bishal kalita
Assam
17-03-2019 01:32 PM
Punjab
03-29-2019 10:59 AM
To buy Emu Chicks, you can contact on this number - SFS EMU FARM 9706727345 (Isfaqul Hussain).
Posted by ਸੁੱਖਜਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
17-03-2019 01:25 PM
Punjab
03-17-2019 08:18 PM
Posted by ashok thakker(बिज उत्पादक समिति सदस्य)
Madhya Pradesh
17-03-2019 01:17 PM
Punjab
03-20-2019 12:17 PM
अशोक जी यह वास्तव में ही एक कीट है जिसे Leaf insect के नाम से जाना जाता है
Posted by ashok thakker(बिज उत्पादक समिति सदस्य)
Madhya Pradesh
17-03-2019 01:12 PM
Punjab
03-18-2019 04:12 PM
अशोक जी जब गाय का भार 300 किलो तक हो जाए तब आप गाय को हीट में आने पर टीका भरवा सकते है यह पशु को गाभिन करवाने के लिए सही समय होता है और यदि एक नस्ल की गाय को दूसरी नस्ल का सीमन भरवाते है तो आने वाले बच्चे में 50 प्रतिशत गुण अपनी मां के और 50 प्रतिशत गुण अपने पिता के होते है फिर आप उस बच्चे को फिर उसे नस्ल का सीमन भरवाकर ए.... (Read More)
अशोक जी जब गाय का भार 300 किलो तक हो जाए तब आप गाय को हीट में आने पर टीका भरवा सकते है यह पशु को गाभिन करवाने के लिए सही समय होता है और यदि एक नस्ल की गाय को दूसरी नस्ल का सीमन भरवाते है तो आने वाले बच्चे में 50 प्रतिशत गुण अपनी मां के और 50 प्रतिशत गुण अपने पिता के होते है फिर आप उस बच्चे को फिर उसे नस्ल का सीमन भरवाकर एक अच्छी नस्ल तैयार कर सकते है इस प्रकार आप नस्ल में सुधार कर सकते है
Posted by parmeshwar
Rajasthan
17-03-2019 01:11 PM
Punjab
03-20-2019 12:11 PM
परमेश्वर जी आप कृपया आप बताये कि आपने कोनसी जड़ी बूटी की बिजाई करना चाहते है ता की आपको उसके बारे में जानकारी दी जा सके आपके इलाके में आंवला, बेल, हीना, ईसबगोल, सोए, सनाय की खेती की जा सकती है
Posted by Ajay kumar
Punjab
17-03-2019 12:57 PM
Punjab
03-23-2019 12:31 PM
अजय कुमार जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप मनीष वासुदेव 9417652857 से संपर्क करें
Posted by soumya
Odisha
17-03-2019 12:55 PM
Punjab
03-20-2019 12:13 PM
Soumya ji October to March is optimum period for growing of oyster mushroom. It survives well in moderate temperature range of 20-30oC with 80-85% relative humidity. Spawn/Mushroom seeds preparation These are available in markets. One can prepared or produce it on farm. Freshly prepared grain spawn is best for use. Substrate preparation Mushroom can be cultivated on a wide range of cellulosic farm waste or other materials like waste paper, cotton waste, cereals straws. Paddy straw or wheat straw is most commonly used material for substrate preparation. Oyster growing in Polythene bag Add Carbendazim@7 gm along with Formaline@125 ml in 100 Ltr water and prepare a mixture. Add 20 kg of wheat straw in above prepared mixture and keep it for 18 hours. After 18 hours, remove wheat straw and pla.... (Read More)
Soumya ji October to March is optimum period for growing of oyster mushroom. It survives well in moderate temperature range of 20-30oC with 80-85% relative humidity. Spawn/Mushroom seeds preparation These are available in markets. One can prepared or produce it on farm. Freshly prepared grain spawn is best for use. Substrate preparation Mushroom can be cultivated on a wide range of cellulosic farm waste or other materials like waste paper, cotton waste, cereals straws. Paddy straw or wheat straw is most commonly used material for substrate preparation. Oyster growing in Polythene bag Add Carbendazim@7 gm along with Formaline@125 ml in 100 Ltr water and prepare a mixture. Add 20 kg of wheat straw in above prepared mixture and keep it for 18 hours. After 18 hours, remove wheat straw and place it on firm or netted surface and remove extra water from it. Add 2% spawn in wheat straw and fill this mixture in polythene bag of 15 x 12 inch. Spawned straw is filled about 2/3rd of the capacity of the bag and then tied mouth of polythene bag. Polythene bag is perforated with 2 mm diam. holes, about 4 cm apart, all over the surface for air circulation purpose. Then place bags in shelves in the growing room having Relative Humidity of 80-85% and room temperature of 24-26°C. Keep these bags in safe places and maintain moisture by sprinkling water on it. White cottony mycelium is developed on straw. Wheat straw changes its color to brown and become sound and compact. At this stage cut and remove polythene covering. In polythene, straw become compacted and become cylinder shape. Arrange these cylinder shape straws on shelves and maintained moisture by spreading water on it. 18-20 days after spawning, first mushroom is appeared. With interval of week, two to three flushes will appears. Carry out harvesting of oyster mushroom, when cap of mushroom starts to fold. For harvesting use sharp knife and it can be harvested by twisting off it with fingers. It is consumed freshly or can be dried in sun or with mechanical dryer. Within 45-60 days period, from one ton of dry wheat straw more than 500 kg of fresh mushroom can be obtained.
Posted by PUKHRAJ MEENA
Rajasthan
17-03-2019 12:49 PM
Punjab
03-18-2019 10:04 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757, Manish Vasudev 9417652857 से सम्पर्क करे
Posted by VIKASH CHANDRA
Chattisgarh
17-03-2019 12:42 PM
Punjab
03-17-2019 08:20 PM
Posted by balkar
Punjab
17-03-2019 12:42 PM
Punjab
03-20-2019 12:14 PM
Balkar ji tuc bhindi , tmatar , bengan di bijai kar sakde ho.
Posted by Gurpal singh
Punjab
17-03-2019 12:41 PM
Punjab
04-06-2019 12:25 PM
Erets agero pvt ltd da punjab vich koe v dealer nahi ji . eh aje punjab vich shuru kar rahe hun ji. aje joe farmer nai jina nal ehna da koe contract hoeya hove ji.
Posted by ram saraiya
Madhya Pradesh
17-03-2019 12:39 PM
Maharashtra
03-20-2019 12:19 PM
सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्ट.... (Read More)
सफ़ेद मूसली की खेती के लिए 15-35°C तापमान की जरुरत होती है इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि दोमट से रेतली और बढ़िया निकास वाली में की जा सकती है यह पहाड़ी ढलानों वाली या गीली मिट्टी को भी सहर सकती है यह जैविक तत्वों से भरपूर लाल मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है जल-जमाव वाली स्थिति में इसकी खेती ना करें इस लिए मिट्टी का pH 6.5-8.5 होना चाहिए आप इसकी किस्मे जैसे RC-2, RC-16, RC-36, RC-20, RC-23, RC-37 and CT-1,MDB-13 and MDB-14 की बिजाई कर सकते है सफेद मूसली के लिए अच्छी तरह से तैयार बैडों की जरूरत होती है बिजाई से पहले ज़मीन की तैयारी के लिए एक बार 2-3 गहरी जोताई करें ज़मीन की तैयारी आम-तौर पर अप्रैल-मई के महीने में की जाती है सफेद मूसली की बिजाई के लिए उचित समय जून से अगस्त तक का होता है पौधे के विकास के अनुसार पौधों के बीच 10x12 इंच का फासला रखें इसकी बिजाई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है इसकी बिजाइसके प्रजनन के लिए आम-तौर पर गांठों या बीजों का प्रयोग करें इसके उचित विकास के लिए 450 किलो बीजों का प्रयोग करें ई नए पौधे मुख्य खेत में रोपाई करके की जाती है सफेद मूसली की बिजाई 1.2 मीटर चौड़े और आवश्यकता अनुसार लम्बे बैडों पर करें नए पौधे तैयार करने वाले बैड अच्छी तरह से तैयार करें इसकी बिजाई छिड़काव के द्वारा की जाती है बिजाई के बाद बैडों को हल्की मिट्टी से ढक दें बढ़िया विकास के लिए मलचिंग भी की जा सकती है बीज 5-6 दिनों में अंकुरण होना शुरू होना कर देते है और पौधे बिजाई के लिए तैयार हो जाते है रोपाई से 24 घंटे पहले बैडों को पानी दें, ताकि नए पौधों को आसानी के साथ उखाड़ा जा सके खेत की तैयारी समय, रूड़ी की खाद 80-100 क्विंटल प्रति एकड़ गोबर डालें और मिट्टी में मिलाये जैविक खादें जैसे कि रूड़ी की खाद 8-10 टन प्रति एकड़ डालर मिट्टी में मिलाये सिंगल सुपर फासफेट 100 किलो, मिउरेट ऑफ़ पोटाश 50 किलो और हड्डियों का चूरा 100 किलो प्रति एकड़ डालें 3 महीने तक कसी की सहायता के साथ गोड़ाई करें और मेंड़ के साथ मिट्टी लगाएं अंकुरण के बाद 2-3 बार करें अगर पौधे के विकास में कोई कमी दिखाई दें, तो तुरंत आवश्यक स्प्रे करें बढ़िया विकास के लिए 20-22 दिनों के फासले पर सिंचाई करें बारिश की ऋतु में, सिंचाई की जरूरत नहीं होती, पर बारिश ना होने पर सिंचाई सही फासले पर करें सिंचाई जलवायु और मिट्टी पर भी निर्भर करती है इस फसल के पौधे बिजाई से लगभग 90 दिन के बाद फल देना शुरू कर देती है इसकी कटाई सितम्बर-अक्तूबर महीने में की जाती है कटाई पत्ते पीले पड़ने और सूखने पर की जाती है
Posted by सागर मोघा
Uttar Pradesh
17-03-2019 12:35 PM
Punjab
03-18-2019 04:15 PM
यदि आपकी कटड़ी बार बार रिपीट हो रही है तो आप उसकी बच्चेदानी में Lixin-iu दवाई दो दिन लगातार भरवायें और उसे Bovimin-B पाउडर 50 ग्राम रोज़ाना देना शुरू करें और Agrimin-i की गोलियां रोजाना एक गोली दें और 21 दिन तक दें, फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवाकर इन गोलियों को 15 दिन तक देते रहें इस तरह से गाभिन ठहर जाएगी यदि आपका कोई ओ.... (Read More)
यदि आपकी कटड़ी बार बार रिपीट हो रही है तो आप उसकी बच्चेदानी में Lixin-iu दवाई दो दिन लगातार भरवायें और उसे Bovimin-B पाउडर 50 ग्राम रोज़ाना देना शुरू करें और Agrimin-i की गोलियां रोजाना एक गोली दें और 21 दिन तक दें, फिर अगली बार हीट में आने पर उसे टीका भरवाकर इन गोलियों को 15 दिन तक देते रहें इस तरह से गाभिन ठहर जाएगी यदि आपका कोई ओर सवाल है तो आप दोबारा सवाल पूछ सकते है
Posted by pintu
Bihar
17-03-2019 12:33 PM
Punjab
03-18-2019 10:07 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, ODISHA, INDIA Phone: 91-674-2465421,2465446 FAX: 91-674-2465407 पर कॉल कर सकते है
Posted by Gurprit singh
Punjab
17-03-2019 12:29 PM
Punjab
03-19-2019 03:51 PM
ਗੁਰਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਹਾਡੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦਿਤੇ ਗਏ ਹੈ ਤੁਸੀ ਐਪ ਵਿਚ ਆਪਣੇ ਸਾਰੇ ਸਵਾਲ ਦੇ ਜਵਾਬ ਦੇਖ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by prince kumar
Bihar
17-03-2019 12:27 PM
Maharashtra
03-20-2019 12:24 PM
मक्की की फसल लगाने के लिए उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली, मैरा और लाल मिट्टी जिसमें नाइट्रोजन की उचित मात्रा हो, जरूरी है मक्की रेतली से लेकर भारी हर तरह की ज़मीनों में उगाई जा सकती हैं समतल ज़मीनें मक्की के लिए बहुत अनुकूल हैं, पर कईं पहाड़ी इलाकों में भी यह फसल उगाई जाती है अधिक पैदावार लेने के लिए मिट्टी में जैवि.... (Read More)
मक्की की फसल लगाने के लिए उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली, मैरा और लाल मिट्टी जिसमें नाइट्रोजन की उचित मात्रा हो, जरूरी है मक्की रेतली से लेकर भारी हर तरह की ज़मीनों में उगाई जा सकती हैं समतल ज़मीनें मक्की के लिए बहुत अनुकूल हैं, पर कईं पहाड़ी इलाकों में भी यह फसल उगाई जाती है अधिक पैदावार लेने के लिए मिट्टी में जैविक तत्वों की अधिक मात्रा पी एच 5.5-7.5 और अधिक पानी रोककर रखने में सक्षम होनी चाहिए बहुत ज्यादा भारी ज़मीनें भी इस फसल के लिए अच्छी नहीं मानी जाती प्रसिद्ध किस्में :-PEEHM 5,पाइनीयर 39 वी 92 और 30 आर 77, प्रो एंगरो 4640, मोनसैंटो हाईए सेल और डबल, श्री राम जैनेटिक कैमीकल लिमिटेड बायो 9690 और राजकुमार, कंचन सीड, पोलो, हाइब्रिड कॉर्न और कै एच 121, माहीको एम पी एम 3838, जुआरी सी 1415, गंगा कावेरी जी के 3017, जी के 3057, सिनजैंटा इंडिया लिमिटेड एन के 6240 फसल के लिए प्रयोग किया जाने वाला खेत नदीनों और पिछली फसल से मुक्त होना चाहिए मिट्टी को नर्म करने के लिए 6 से 7 बार जोताई करें खेत में 4-6 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद और 10 पैकेट एज़ोसपीरीलम के डालें खेत में 45-50 सैं.मी. के फासले पर खाल और मेंड़ बनाएं खरीफ की ऋतु में यह फसल मई के आखिर से जून में मानसून आने पर बोयी जाती है बसंत ऋतु की फसल अंत फरवरी से अंत मार्च तक बोयी जाती है बेबी कॉर्न दिसंबर-जनवरी को छोड़कर बाकी सारा साल बोयी जा सकती है रबी और खरीफ की ऋतु स्वीट कॉर्न के लिए सब से अच्छी होती है बीजों को 3-4 सैं.मी. गहराई में बीजें स्वीट कॉर्न की बिजाई 2.5 सैं.मी. गहराई में करें बिजाई हाथों से गड्ढा खोदकर या आधुनिक तरीके से ट्रैक्टर और सीड डरिल की सहायता से मेंड़ बनाकर की जा सकती है खरीफ की मक्की के लिए:- 8-10 किलो प्रति एकड़ मिट्टी की जांच के मुताबिक ही खाद डालें) सुपर फासफेट 75-150 किलो, यूरिया 75-110 किलो और पोटाश 15-20 किलो (यदि मिट्टी में कमी दिखे) प्रति एकड़ डालें एस. एस. पी और एम. ओ. पी की पूरी मात्रा और यूरिया का तीसरा हिस्सा बिजाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन पौधों के घुटनों तक होने और गुच्छे बनने से पहले डालें मक्की की फसल में जिंक और मैग्नीश्यिम की कमी आम देखने को मिलती है और इस कमी को पूरा करने के लिए जिंक सलफेट 8 किलो प्रति एकड़ बुनियादी खुराक के तौर पर डालें जिंक और मैग्नीशियम के साथ साथ लोहे की कमी भी देखने को मिलती है जिससे सारा पौधा पीला पड़ जाता है इस कमी को पूरा करने के लिए 25 किलो प्रति एकड़ सूक्ष्म तत्वों को 25 किलो रेत में मिलाकर बिजाई के बाद डालें खरीफ ऋतु की मक्की में नदीन बड़ी समस्या होते हैं, जो कि खुराकी तत्व लेने में फसल से मुकाबला करते हैं और 35 प्रतिशत तक पैदावार कम कर देते हैं इसलिए अधिक पैदावार लेने के लिए नदीनों का हल करना जरूरी है मक्की की कम से कम दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई से 20-25 दिन बाद और दूसरी गोडाई 40-45 दिनों के बाद, पर ज्यादा होने की सूरत में एट्राज़िन 500 ग्राम प्रति 200 लीटर पानी से स्प्रे करें गोडाई करने के बाद मिट्टी के ऊपर खाद की पतली परत बिछा दें और जड़ों में मिट्टी लगाएं बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई करें मिट्टी की किस्म के आधार पर तीसरे या चौथे दिन दोबारा पानी लगाएं यदि बारिश पड़ जाये तो सिंचाई ना करें छोटी फसल में पानी ना खड़ने दें और अच्छे जल निकास का प्रबंध करें फसल को बीजने से 20-30 दिन तक कम पानी दें और बाद में सप्ताह में एक बार सिंचाई करें जब पौधे घुटने के कद के हो जायें तो फूल निकलने के समय और दाने बनने के समय सिंचाई महत्तवपूर्ण होती है यदि इस समय पानी की कमी हो तो पैदावार बहुत कम हो जाती है यदि पानी की कमी हो तो एक मेंड़ छोड़कर पानी दें इससे पानी भी बचता है छल्लियों के बाहरले पर्दे हरे से सफेद रंग के होने पर फसल की कटाई करें तने के सूखने और दानों में पानी की मात्रा 17-20 प्रतिशत होने की सूरत में कटाई करना इसके लिए अनुकूल समय है प्रयोग की जाने वाली जगह और यंत्र साफ, सूखे और रोगाणुओं से मुक्त होने चाहिए
Posted by Rajiv M. Sangole
Maharashtra
17-03-2019 12:24 PM
Punjab
03-23-2019 12:33 PM
श्री राजीव एम संगोले जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by hitesh
Gujarat
17-03-2019 12:23 PM
Maharashtra
03-20-2019 12:25 PM
ड्रैगन फल की कलमें लगाई जाती है एक एकड़ में तकरीबन इसकी 1600 कलमें लगाई जाती है और इन कलमों को पहले गमले में तैयार किया जाता है और फिर अप्रैल से सितंबर तक कभी भी खेत में लगा सकते हैं और एक कलम लगभग 70 रूपये की आती है अधिक जानकारी के लिए आप नीचे दिए नंबर पर बात कर सकते हैं विजय कुमार -7065414241.धन्यवाद
Posted by jay
Gujarat
17-03-2019 12:19 PM
Punjab
03-18-2019 04:43 PM
इसके लिए आप देसी तरीका प्रयोग कर सकते है, इसके लिए यदि कोड़तुमे मिल जाये तो 2 कोड़तुमे एक दिन छोड़कर खिलाएं या फिर कोड़तुमे का चूर्ण मिल जाये तो बहुत बढ़िया है, इसके साथ बढ़िया कंपनी का लिवर टोनिक ज़रूर पिलाएं जैसे liv52 बढ़िया रहता है, इससे भूख भी लगती है और पशु का स्वस्थ्य भी सही रहता है यदि इसे ज्यादा समस्या आ रही है तो .... (Read More)
इसके लिए आप देसी तरीका प्रयोग कर सकते है, इसके लिए यदि कोड़तुमे मिल जाये तो 2 कोड़तुमे एक दिन छोड़कर खिलाएं या फिर कोड़तुमे का चूर्ण मिल जाये तो बहुत बढ़िया है, इसके साथ बढ़िया कंपनी का लिवर टोनिक ज़रूर पिलाएं जैसे liv52 बढ़िया रहता है, इससे भूख भी लगती है और पशु का स्वस्थ्य भी सही रहता है यदि इसे ज्यादा समस्या आ रही है तो आप इसे नज़दीकी डॉक्टर से जांच भी करवायें जिससे इसकी बिमारी का सही कारण पता लग जाए
Posted by bonga murmu
Jharkhand
17-03-2019 12:11 PM
Punjab
03-19-2019 02:49 PM
जो वास्तविक केसर होता है इसके लिए तापमान सामान्य से भी कम चाहिए इसलिए यह jharkhand में नहीं हो सकता अगर आप इसकी पुष्टि करना चाहते हैं तो majeed wari जी से 9419009209 पर कॉल करके जानकारी लें ये जम्मू कश्मीर में पिछले काफी समय से केसर की खेती कर रहे हैं