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Posted by Vinod Kumar
Uttar Pradesh
18-03-2019 08:04 PM
Punjab
03-19-2019 04:39 PM
चेपा की रोकथाम के लिए आप imidacloprid@1.5ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by Ravindra Kumar manjhu
Rajasthan
18-03-2019 08:02 PM
Punjab
03-19-2019 04:46 PM
रविंदर जी इसकी बिजाई मार्च से सितम्बर महीने में की जाती है धन्यवाद
Posted by ਗੁਰਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
18-03-2019 07:59 PM
Punjab
03-19-2019 02:43 PM
ਤੁਸੀ Bovimin-b ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ Agrimin-i ਗੋਲੀਆਂ ਦਿਓ ਇਸਦੀ ਰੋਜਾਨਾ ਇਕ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਅੰਦਰ ਤੋਂ ਇਨਫੈਕਸ਼ਨ ਖਤਮ ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ, ਫਿਰ ਅਗਲੀ ਵਾਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਤੁਸੀ pregstay gold ਪਾਊਡਰ 50gm ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ.
Posted by Tarunabh Mishra
Gujarat
18-03-2019 07:57 PM
Punjab
03-18-2019 09:31 PM
मोती की खेत के बारे में पूरी जानकारी के लिए और इसकी ट्रेनिंग के लिए आप Regional Research Centre, Anand ATIC, Anand Agricultural University, Anand , Gujarat Ph. & Fax: +91-2692-263699, -388001 के साथ संम्पर्क कर सकते हैं
Posted by Gurwinder Singh
Punjab
18-03-2019 07:53 PM
Punjab
03-19-2019 05:12 PM
ਇਹ ਫਸਲ ਵਧੀਆ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਚੀਕਣੀ, ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਲਾਲ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਨਾ ਹੋਣ ਦਿਓ, ਕਿਉਂਕਿ ਖੜੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਇਹ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦੇਰ ਬੱਚ ਨਹੀਂ ਪਾਵੇਗੀ ਫਸਲ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ 6-6.5 pH ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਧੀਆ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਉਸ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਅਦਰਕ ਦੀ ਫਸਲ ਨਾ ਉਗਾਓ ਜਿੱਥੇ ਪਿੱਛਲੇ ਵਾਰ ਵੀ ਅਦਰਕ ਦੀ ਫਸਲ ਉਗਾਈ ਗਈ ਹੋਵੇ ਹਰ ਸਾਲ ਇੱਕੋ ਜ਼ਮੀਨ ਤੇ ਹੀ.... (Read More)
ਇਹ ਫਸਲ ਵਧੀਆ ਜਲ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਚੀਕਣੀ, ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਲਾਲ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਖੜਾ ਨਾ ਹੋਣ ਦਿਓ, ਕਿਉਂਕਿ ਖੜੇ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਇਹ ਜ਼ਿਆਦਾ ਦੇਰ ਬੱਚ ਨਹੀਂ ਪਾਵੇਗੀ ਫਸਲ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ 6-6.5 pH ਵਾਲੀ ਮਿੱਟੀ ਵਧੀਆ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਉਸ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਅਦਰਕ ਦੀ ਫਸਲ ਨਾ ਉਗਾਓ ਜਿੱਥੇ ਪਿੱਛਲੇ ਵਾਰ ਵੀ ਅਦਰਕ ਦੀ ਫਸਲ ਉਗਾਈ ਗਈ ਹੋਵੇ ਹਰ ਸਾਲ ਇੱਕੋ ਜ਼ਮੀਨ ਤੇ ਹੀ ਅਦਰਕ ਦੀ ਫਸਲ ਨਾ ਲਗਾਓ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ:- IISR Varada: ਇਹ ਕਿਸਮ ਤਾਜ਼ਾ ਅਤੇ ਸੁੱਕੇ ਅਦਰਕ ਦੇ ਝਾੜ ਲਈ ਵਧੀਆ ਮੰਨੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ 200 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 90 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਮਈ -ਜੂਨ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਾਜ਼ੇ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀ ਰਹਿਤ ਗੰਢੀਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 480-720 ਕਿੱਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਬੀਜ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰੋ ਇਸਦਾ ਬੀਜ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨਜਦੀਕੀ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇੰਦਰ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਿਸਦਾ ਪਤਾ ਹੈ Shamsher Nagar, Sirhind, Punjab 140406 ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ASP
Punjab
18-03-2019 07:52 PM
Punjab
03-19-2019 05:10 PM
ਇਹ ਫੰਗਸ ਦੇ ਨਾਲ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਤੁਸੀ ਮ-45 @400 ਗ੍ਰਾਮ ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ.
Posted by bikash thapa
Assam
18-03-2019 07:52 PM
Punjab
03-26-2019 07:20 PM
कड़कनाथ की कीमत 80-100 प्रति birds है
Posted by Madan Mohan Sharma
Rajasthan
18-03-2019 07:48 PM
Punjab
03-18-2019 09:35 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757, Manish Vasudev 9417652857 से सम्पर्क करे
Posted by devendra bihone
Madhya Pradesh
18-03-2019 07:47 PM
Punjab
03-22-2019 03:59 PM
devendra जी ethrel एक प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर है जो फसल की ग्रोथ के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसकी मात्रा 5ml को 10 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें एक Amistar फंगसनाशी है जिसमे Azoxystrobin + Difenoconazole नाम का साल्ट मौजूद होता है इसकी स्प्रे ज्यादातर धान, गेंहू, कपास में की जाती है धन्यवाद
Posted by Rupesh Kumar
Chattisgarh
18-03-2019 07:46 PM
Punjab
03-18-2019 10:05 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, ODISHA, INDIA Phone: 91-674-2465421,2465446 FAX: 91-674-2465407 पर कॉल कर सकते है
Posted by vikram jeet
Haryana
18-03-2019 07:38 PM
Punjab
03-22-2019 04:01 PM
विक्रम जी नींबू का फूल तत्व की कमी और फंगस के कारण गिरता है इसके लिए पौधे को 3—4 किलो वर्मीकपोस्ट और copper oxychloride@3gm प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें।
Posted by Gurprit singh
Punjab
18-03-2019 07:28 PM
Punjab
03-19-2019 02:50 PM
ਤੁਸੀਂ ਗਾਂ ਨੂੰ Liquid Vitum H 1 litter 10ml ਸਵੇਰੇ 10ml ਸ਼ਾਮ ਨੂੰ ਦਿਓ Liquid Bovimen-GL 150ml 7ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਜਖਮ ਤੇ Coolmac tube ਲਾਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈਣ ਲਗ ਜਾਵੇਗਾ.
Posted by bikash thapa
Assam
18-03-2019 07:28 PM
Punjab
03-22-2019 09:08 PM
Aap usse Injection Enrofloxacin or Avil lagwao ji, isse farak padd jayega aur khani aur infection khtam hoga.
Posted by Sona
Jammu & Kashmir
18-03-2019 07:17 PM
Punjab
03-19-2019 04:58 PM
शुबदीप जी, खुम्ब की खेती अच्छे हवादार कमरे, शैड, बेसमैंट, गैरेज आदि में की जा सकती है पैडी स्ट्रॉ खुम्ब को बाहर शैड वाले स्थान पर उगाया जा सकता है भारत में तीन प्रकार के खुम्ब को उगाया जा सकता है बटन खुम्ब इस किस्म को पूरे विश्व में उगाया जाता है और पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, सफेद बटन खुम्ब में उच्च मात्रा मे.... (Read More)
शुबदीप जी, खुम्ब की खेती अच्छे हवादार कमरे, शैड, बेसमैंट, गैरेज आदि में की जा सकती है पैडी स्ट्रॉ खुम्ब को बाहर शैड वाले स्थान पर उगाया जा सकता है भारत में तीन प्रकार के खुम्ब को उगाया जा सकता है बटन खुम्ब इस किस्म को पूरे विश्व में उगाया जाता है और पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, सफेद बटन खुम्ब में उच्च मात्रा में प्रोटीन होता है इसका ताजा और डिब्बा बंद उपभोग किया जा सकता है इसकी औषधीय विशेषताएं हैं हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रदेष, तामिलनाडू और कर्नाटक मुख्य खुम्ब उगाने वाले राज्य हैं यू पी में खुम्ब को उगाने के लिए नवंबर से मार्च का महीना उपयुक्त होता है अच्छी वृद्धि के लिए इसे 22-25 डिगरी सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है और खुम्ब निकलते समय इसे 14-18 डिगरी सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है स्ट्रॉ खुम्ब यह पूरे विश्व में उगाई जाने वाली तीसरी सबसे प्रसिद्ध किस्म है इसे कपास के व्यर्थ मिश्रण के साथ पराली की छोटी मात्रा के ऊपर उगाया जाता है यह छोटे आकार की खुम्ब होती हैं जो कि कोण के आकार की होती हैं इसकी टोपी ऊपर से गहरे भूरे रंग की होती है भारत में इसकी तीन प्रजातियां हैं V. diplasia, V. volvacea and V. esculenta इन प्रजातियों के अलावा उत्तर प्रदेश में Volvariella volvacea की खेती की जाती है इसे “चाइनीज़” या “पैडी” खुम्ब के रूप में भी जाना जाता है इन्हें बड़े स्तर पर उष्णकटिबंधीय और उपउष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगाया जाता है इन्हें 35 डिगरी सेल्सियस के तापमान पर उगाया जा सकता है इस किस्म की खुम्ब की खेती के लिए अप्रैल से सितंबर का समय उपयुक्त होता है ओइस्टर खुम्ब या ढींगरी खुम्ब यह सामान्य और खाने योग्य खुम्ब है इसका गुद्दा नर्म, मखमली बनावट और अच्छा स्वाद होता है यह प्रोटीन, फाइबर और विटामिन बी1 से बी 12 का उच्च स्त्रोत है इस किस्म की सभी प्रजातियां और किस्में खाने योग्य हैं सिर्फ P. olearius और P. nidiformis को छोड़कर, ये ज़हरीली होती हैं उड़ीसा, महाराष्ट्र, आंध्रा प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिमी बंगाल और उत्तर पूर्व के पहाड़ी क्षेत्र मुख्य राज्य हैं जो खुम्ब का उत्पादन करते हैं इस खुम्ब को उगाने का उपयुक्त समय अक्तूबर से मार्च तक का है यह 20-30 डिगरी सेल्सियस तापमान के साथ 80-85 प्रतिशत आर्द्रता को सहने योग्य है स्पान (बीज) की तैयारी सबस्ट्रेट की तैयारी सबस्ट्रेट की स्पॉनिंग फसल का प्रबंधन स्पान की तैयारी स्पान / खुम्ब के बीजों की तैयारी ये बाज़ार में उपलब्ध होते हैं इन्हें खेत में भी तैयार या उत्पादन किया जा सकता है ताजे तैयार किए हुए खुम्ब के बीज प्रयोग के लिए सबसे अच्छे होते हैं सबस्ट्रेट की तैयारी खुम्ब की खेती बडी़ मात्रा में खेत के व्यर्थ पदार्थ और अन्य सामग्री जैसे व्यर्थ कागज़, कपास का व्यर्थ पदार्थ, अनाज की पराली आदि पर की जा सकती है धान की पराली और गेहूं की पराली मुख्य तौर पर प्रयोग होने वाली सामग्री हैं जिनका प्रयोग सब्स्ट्रेट की तैयारी के लिए किया जाता है ओइस्टर को पॉलीथीन बैग में उगाया जाता है कार्बेनडाज़ि़म 7 ग्राम के साथ फॉरमालीन 125 मि.ली. को 100 लीटर पानी में मिलाकर डालें और एक मिश्रण तैयार करें ऊपर दिए गए मिश्रण में 20 किलो गेहूं की पराली डालें और इसे 18 घंटे के लिए रख दें 18 घंटों के बाद गेहूं की पराली को हटा दें और इसे एक सतह पर रखें और इसमें से अतिरिक्त पानी को निकाल दें गेहूं की पराली में 2 प्रतिशत बीज डालें और इस मिश्रण को 15x12 इंच के पॉलीथीन बैग में भरें पॉलीथीन बैग 2 मि.मी. अर्द्ध व्यास से छिद्रित हो हवा परिसंचरण के लिए पूरी सतह पर लगभग 4 सैं.मी. के छेद हों उसके बाद बैग को 80-85 प्रतिशत आर्द्रता वाले कमरे में शैल्फ पर रखें कमरे का तापमान 24-26 डिगरी सेल्सियस होना चाहिए बैगों को सुरक्षित जगह पर रखें और पानी के छिड़काव द्वारा इनमें नमी बनाए रखें पराली पर सफेद रंग की सूती माइसीलियम विकसित हो जाती है गेहूं की पराली अपना रंग बदलकर भूरे रंग की हो जाती है और आवाज करती है और सिकुड़ जाती है इस अवस्था में पॉलीथीन को काट कर निकाल दें पॉलीथीन में पराली सिकुड़ जाती है और बेलनाकार हो जाती है इन बेलनाकार पराली के आकार को शैल्फ पर लगाएं और इनमें पानी के छिड़काव द्वारा नमी बनाए रखें स्पॉनिंग के 18-20 दिन बाद पहली खुम्ब दिखनी शुरू हो जाती है एक सप्ताह के अंतराल पर दो से तीन खुम्ब दिखनी शुरू हो जायेंगी जब खुम्ब की टोपी मुड़ना शुरू हो जाये तो खुम्ब की तुड़ाई कर लें तुड़ाई के लिए तीखे चाकू का प्रयोग करें और इसे उंगलियों से मरोड़ कर भी तोड़ा जा सकता है इसे ताजा भी खाया जा सकता है या धूप में या मशीनी ड्रायर से सुखाकर इसका प्रयोग किया जा सकता है 45-60 दिनों के अंदर अंदर एक टन सूखी पराली से 500 किलो से ज्यादा ताजी खुम्ब प्राप्त की जा सकती है
Posted by Mr. Shakya
Uttar Pradesh
18-03-2019 07:11 PM
Punjab
03-22-2019 04:46 PM
अवदेश जी करेले के साथ आप गेंदे की खेती कर सकते है लेकिन आप इसके सिर्फ boundry पर लगा सकते है करेले के साथ अंतर खेती में अगर आप कोई और सब्जी लगाना चाहते है तो वो सिर्फ Boundry पे लगा सकते है क्योंकि इसकी बेल को बढ़ने के लिए ज्यादा जगह चाहिए होती है
Posted by shubham
Maharashtra
18-03-2019 07:09 PM
Punjab
03-18-2019 10:14 PM
Posted by Dalvir Dhaliwal
Punjab
18-03-2019 07:05 PM
Punjab
03-19-2019 04:57 PM
ਦਲਵੀਰ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਦੱਸੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਕੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾ ਜੋ ਤੁਹਨੂੰ ਇਸ ਬਾਰੇ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ, ਧੰਨਵਾਦ.
Posted by haridev
Madhya Pradesh
18-03-2019 07:04 PM
Maharashtra
03-19-2019 04:58 PM
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरु.... (Read More)
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरुम का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं, इससे हम 1 फसल ही ले सकते है, पराली मशरुम का समय अप्रैल से अगस्त तक है, इससे हम 4 फसले ले सकते है, मिलकी मशरुम का समय अप्रैल से सितंबर तक है, आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली मशरुम लगा सकते है, पराली मशरुम के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है, पराली के पूले: धान की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे के साथ बांध कर तैयार किये जाते है. पूले के सिरे काट कर बराबर कर लिए जाते हैं. पूलो की क्यिारी लगाना : पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए भिगो दें, गिले पूलो को ढलान पर रख कर अधिक पानी को निकलने दे, कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये, इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये, जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले. इसके ऊपर की सतह उलट होती है. इस प्रकार 5-5 पूलो की 4 सेट में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार की जाती है. सबसे ऊपर 2 पूलो को खोलकर रख दिए जाते हैं. मशरुम का फुटाव करना : बिजाई से 7-9 दिनो के बाद का फुटाव होने लगता है. पानी और हवा का संचार : बिजाई के 2 दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका किया जाता है. मशरुम के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है. मशरुम की तुड़ाई : मशरुम का फुटाव के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है. मिलकी मशरुम : मिलकी मशरुम के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे (12×16), सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि चाहिए. तूडी की तैयारी : सूखी तुड़ी को पक्के फर्श पर खिलार कर 16-20 घंटे पा नी से गिला करे, गीली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे. इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें, तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर खिलार कर ठंडा करे. यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है. बिजाई : ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें. एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज डाला जाता है. लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे. केसिंग : बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 के सेट बना दें, केसिंग में रूडी और रेतली मिट्टी (4:1) होती है. 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित की जाती है. मशरुम का फुटाव: केसिंग मिट्टी डालने के लगभग 2 हफतो में मशरुम के छोटे-छोटे कण निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है. मशरुम की तुड़ाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by राजनाथ सिंह चौहान
Uttar Pradesh
18-03-2019 06:50 PM
Punjab
03-19-2019 05:06 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है रेतली दोमट से दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है प्रसिद्ध किस्में:- Pusa Summer Prolific Round, Pusa Manjri लौकी की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक जोताई के बाद सुहागा फेरें इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च, जून से जुलाई और नवंबर से दिसंब.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है रेतली दोमट से दोमट मिट्टी में उगाने पर यह अच्छे परिणाम देती है प्रसिद्ध किस्में:- Pusa Summer Prolific Round, Pusa Manjri लौकी की खेती के लिए, ज़मीन को अच्छी तरह से तैयार करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक जोताई के बाद सुहागा फेरें इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च, जून से जुलाई और नवंबर से दिसंबर का समय उपयुक्त होता है कतारों में 2.0-2.5 - और पौधों में 45-60 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीज को 1-2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें एक एकड़ में बिजाई के लिए 2 किलो बीज पर्याप्त होते हैं मिट्टी से पैदा होने वाली फंगस से बचाने के लिए बाविस्टिन 0.2 प्रतिशत 3 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद 20-25 टन प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 28 किलो (यूरिया 60 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 14 किलो (यूरिया 30 किलो) की पहली मात्रा को बिजाई के समय प्रति एकड़ में डालें और नाइट्रोजन 14 किलो (यूरिया 30 किलो) को पहली तुड़ाई के समय प्रति एकड़ में डालें इस फसल को तुरंत सिंचाई की आवश्यकता होती है बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई करें गर्मियों में फसल को 6—7 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है और बारिश के मौसम में आवश्यकतानुसार पानी लगाएं इस फसल को कुल 9 सिंचाइयों की जरूरत होती है नदीनों की रोकथाम के लिए, पौधे की वृद्धि के शुरूआती समय में 2-3 गोडाई करें गोडाई खाद डालने के समय करें बरसात के मौसम में नदीनों की रोकथाम के लिए मिट्टी चढ़ाना भी प्रभावी तरीका है किस्म और मौसम के आधार पर, फसल 60-70 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है मार्किट की आवश्यकतानुसार, मध्यम और नर्म फलों की तुड़ाई करें बीज उत्पादन के लिए ज्यादातर पके फलों को स्टोर किया जाता है तीखे चाकू की मदद से फलों को बेलों से काटें मांग ज्यादा होने पर फल की तुड़ाई प्रत्येक 3-4 दिन में करनी चाहिए लौकी की अन्य किस्मों से 800 मीटर का फासला रखें खेत में से बीमार पौधों को निकाल दें बीज उत्पादन के लिए, फल की तुड़ाई पूरी तरह पकने पर करें सही बीज लेने के लिए खेत की तीन बार जांच आवश्यक है तुड़ाई के बाद, फलों के सूखाएं और फिर बीज निकाल लें
Posted by राजीव कुमार
Uttar Pradesh
18-03-2019 06:43 PM
Maharashtra
03-22-2019 04:08 PM
पॉलीहाउस या ग्रीनहाउस एक हाउस या संरचना है जो कांच या पॉलीइथाइलीन जैसी पारदर्शी सामग्री से बना होता है जहाँ पौधे नियंत्रित जलवायु परिस्थितियों में उगाए और विकसित किए जाते हैं संरचना का आकार आवश्यकता के अनुसार छोटे आकार से बड़े आकार का हो सकता है इसके साथ साथ एक ग्रीनहाउस एक कांच का घर होता है जिसके अंदर.... (Read More)
पॉलीहाउस या ग्रीनहाउस एक हाउस या संरचना है जो कांच या पॉलीइथाइलीन जैसी पारदर्शी सामग्री से बना होता है जहाँ पौधे नियंत्रित जलवायु परिस्थितियों में उगाए और विकसित किए जाते हैं संरचना का आकार आवश्यकता के अनुसार छोटे आकार से बड़े आकार का हो सकता है इसके साथ साथ एक ग्रीनहाउस एक कांच का घर होता है जिसके अंदरूनी हिस्से धूप के संपर्क में आने के बाद गर्म हो जाते हैं इसलिए जब बाहर ठंडा होता है, तो अंदर का तापमान पौधों के लिए अनुकूल और गर्म रहता है पर्यावरण नियंत्रण प्रणाली के आधार पर, पॉलीहाउस दो प्रकार के होते हैं: प्राकृतिक रूप से हवादार पॉलीहाउस - इस तरह के पॉलीहाउस या ग्रीनहाउस में फसलों को खराब मौसम की स्थिति और प्राकृतिक कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए पर्याप्त वेंटिलेशन और फॉग्ज सिस्टम को छोड़कर कोई भी पर्यावरण नियंत्रण प्रणाली नहीं है पर्यावरण नियंत्रित पॉलीहाउस - इनका निर्माण मुख्य रूप से फसलों की बढ़ती अवधि का विस्तार करने या प्रकाश, तापमान, आर्द्रता आदि को नियंत्रित करके फसलों की उपज बढ़ाने के लिए किया जाता है, धन्यवाद
Posted by Harsh Singh Chouhan
Chattisgarh
18-03-2019 06:39 PM
Punjab
03-18-2019 10:10 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, ODISHA, INDIA Phone: 91-674-2465421,2465446 FAX: 91-674-2465407 पर कॉल कर सकते है
Posted by Dhananjay Yadav
Madhya Pradesh
18-03-2019 06:31 PM
Rajasthan
03-18-2019 07:08 PM
यह एचएफ नस्ल की गाय है और गाय का गाभिन रहने का समय 9 महीने 9 दिन का होता है और गाय को पहली बार गाभिन तब करवायें जब उसका भार 270—300 किलो ​का हो जाता है
Posted by falgun malakar
West Bengal
18-03-2019 06:31 PM
Punjab
03-19-2019 03:52 PM
इसकी खेती कई प्रकार की मिट्टी, जैसे कि रेतली-दोमट से चिकनी-दोमट या गहरी चिकनी-दोमट या तेज़ाबी मिट्टी में की जाती है, जिनका जल निकास अच्छा हो यह फसल नमकीन और क्षारीय मिट्टी में विकास नहीं करती है यह जल-जमाव वाली मिट्टी को भी सहनयोग्य है फसल के उचित विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7.5 होना चाहिए
Posted by ਨੀਟੂ ਗਰੇਵਾਲ
Punjab
18-03-2019 06:23 PM
Punjab
03-19-2019 06:07 PM
ਗਰੇਵਾਲ ਜੀ ਇਸ ਬਾਰੇ ਵਿਸਥਾਰ ਵਿਚ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀਂ Inder Singh 9463062898 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ.
Posted by Gurdhyan Singh
Haryana
18-03-2019 06:10 PM
Punjab
03-19-2019 02:53 PM
aap cow ko Calcimust gold liquid 100ml rojana aur Pregstay gold powder 50 gm rojana dena suru kren, iske sath aap Enerboost powder 50gm rojana dein, isse farak paddne lgg jayega.
Posted by Govind Patel
Maharashtra
18-03-2019 06:09 PM
Punjab
03-18-2019 10:12 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप से Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 संपर्क करें
Posted by Gurnam Singh Bhatti
Punjab
18-03-2019 06:09 PM
Punjab
05-16-2019 10:15 AM
Mandi rate ta daily update hunde hun ji jo v nave rate kender sarkar valo subah 11 waje to bad update hunde han oh apne aap app te show hunde hun . Jekar update nahi hoye ta tuhanu purane rate rate te distt dikhayi nahi denge ji.
Posted by om kumar
Punjab
18-03-2019 06:09 PM
Punjab
03-18-2019 06:13 PM
ओम कुमार जी कृप्या आप यह बताएं कि आप किस चीज़ की कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करना चाहते है ताकि आपको पूरी जानकारी दी जा सके।
Posted by Gurdhyan Singh
Haryana
18-03-2019 06:06 PM
Punjab
03-19-2019 02:53 PM
app cow ko Calcimust gold liquid 100ml rojana aur Pregstay gold powder 50 gm rojana dena suru kren, iske sath app Enerboost powder 50gm rojana dein, isse farak paddne lgg jayega.
Posted by कृष्ण कुमार
Bihar
18-03-2019 06:03 PM
Punjab
03-18-2019 10:15 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by parmvir dhillon
Punjab
18-03-2019 05:55 PM
Punjab
03-18-2019 07:52 PM
tilt fungus di roktham lyi vrti jndi hai. eh kanak vich zyadatr kungi di roktham lyi vrti jndi hai. isdi matra 200ml prti acre hai.
Posted by रविराज भोसले
Maharashtra
18-03-2019 05:40 PM
Punjab
03-19-2019 02:21 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 पर कॉल कर सकते है
Posted by kalu
Madhya Pradesh
18-03-2019 05:31 PM
Punjab
03-19-2019 02:23 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
Posted by Jafar iqbal
Haryana
18-03-2019 05:30 PM
Punjab
03-19-2019 02:24 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by ਪਰਮਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
18-03-2019 05:21 PM
Punjab
03-19-2019 03:46 PM
ਪਰਮਜੀਤ ਜੀ ਇਹ ਫੰਗਸ ਹੀ ਹੈ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਦੱਸੋ ਕਿ ਤੁਸੀ ਟਿਲਟ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਕੀਨੀ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਸਪਰੇ ਕੀਤੀ ਸੀ ਕਿਉਕਿ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਫੰਗਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by Nissan singh
Punjab
18-03-2019 05:03 PM
Punjab
03-19-2019 02:54 PM
Nishan ji tuci cow nu nazdiki doctor ton check krwao ji kyuki usde mouth di janch krke usda sahi ilagg ho skda hai.
Posted by ਰਸ਼ਪਿੰਦਰ ਭੁੱਲਰ
Punjab
18-03-2019 04:55 PM
Punjab
03-18-2019 07:12 PM
उसे आप Agrimin super powder 50gm रोजाना दें इससे पूरी तरह हीट में आएगी और मिनरल की कमी भी पूरी होगी बाकि उसका भार जरूर जांच करें क्येंकि पशु को पहली बार टीका तभी भरवाना चाहिए जब भार 270—300 किलो तक हो जाए।
Posted by Shivraj sisodiya
Madhya Pradesh
18-03-2019 04:51 PM
Punjab
03-19-2019 02:26 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by sukhpreet
Punjab
18-03-2019 04:48 PM
Punjab
03-19-2019 03:44 PM
सुखप्रीत जी इन्सुलिन पौधे लेने के लिए सुरिंदर नागरा 9814305864 से संपर्क करें, धन्यवाद
Posted by Gurdip Singh Grewal
Punjab
18-03-2019 04:42 PM
Punjab
03-19-2019 03:43 PM
गुरदीप जी अगर आप चारे के लिए मक्का उगाना चाहते हैं, तो आप J1006 या african tall जैसे विभिन्न प्रकार उगा सकते हैं यदि आप अनाज को MH1, PMH2, DKC 9108 से बढ़ा सकते हैं
Posted by vikash sharma
Rajasthan
18-03-2019 04:35 PM
Punjab
03-22-2019 04:50 PM
विकास शर्मा जी आप गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट.... (Read More)
विकास शर्मा जी आप गेंदे की खेती करना चाहते है से मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है पर यह अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी अच्छे निकास वाली होनी चाहिए क्योंकि यह फसल जल जमाव वाली मिट्टी में स्थिर नहीं रह सकती मिट्टी की pH 6.5 से 7.5 होनी चाहिए तेजाबी और खारी मिट्टी इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है फ्रैंच गेंदे की किस्म हल्की मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म उच्च जैविक खाद वाली मिट्टी में अच्छी वृद्धि करती है प्रसिद्ध किस्में :- African Marigold: इस किस्म की फसल 90 सैं.मी. तक लम्बी होती है इसके फूल बड़े आकार के और लैमन, पीले, सुनहरे, संतरी और गहरे पीले रंग के होते हैं यह लम्बे समय की किस्म है इसकी अन्य किस्में जैसे Giant Double African Orange, Crown of Gold, Giant Double African Yellow, Chrysanthemum Charm, Golden Age, Cracker Jack आदि हैं French Marigold: यह छोटे कद की जल्दी पकने वाली किस्में हैं इसके फूल छोटे आकार के और पीले, संतरी, सुनहरे पीले, लाल जंग और महोगनी रंग के होते हैं इसकी अन्य किस्में जैसे Rusty Red, Butter Scotch, Red Borcade, Star of India, Lemon drop आदि हैं Pusa Basanti Gainda: यह लम्बे समय की किस्म है इसका पौधा 58.80 सैं.मी. लम्बा और गहरे हरे रंग के पत्ते होते हैं इसके फूल सल्फर पीले, दोहरे और कारनेशन किस्म के होते हैं Pusa Narangi Gainda: फूल निकलने के लिए 125-136 दिनों की आवश्यकता होती है इसका पौधा लम्बा और कद में 73.30 सैं.मी. का होता है और पत्ते गहरे हरे रंग के होते हैं इसके फूल संतरी रंग के और कारनेशन किस्म के होते हैं फूल घने और दोहरी परत वाले होते हैं इसके ताजे फूलों की पैदावार 140 क्विंटल प्रति एकड़ होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए आखिरी जोताई के समय 250 क्विंटल रूड़ी की खाद और अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर मिट्टी में मिलायें गेंदे की बिजाई एक वर्ष में कभी भी की जा सकती है बारिश के मौसम में इसकी बिजाई मध्य जून से मध्य जुलाई में करें सर्दियों में इसकी बिजाई मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर में पूरी कर लें नर्सरी बैड 3x1 मीटर आकार के तैयार करें गाय का गला हुआ गोबर मिलायें बैडों में नमी बनाए रखने के लिए पानी दें सूखे फूलों का चूरा करें और उनका कतार या बैड पर छिड़काव करें जब पौधों का कद 10-15 सैं.मी. हो जाये, तब वे रोपाई के लिए तैयार होते हैं फैंच किस्म को 35x35 सैं.मी. और अफ्रीकी किस्म को 45x45 सैं.मी. के फासले पर रोपाई करें नर्सरी बैड पर बीजों का छिड़काव करें बिजाई के लिए पनीरी ढंग का प्रयोग किया जाता है एक एकड़ खेत के लिए 600 से 800 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है जब फसल 30-45 दिन की हो जाए, तब पौधे के सिरे से उसे काट दें इससे पौधे को झाड़ीदार और घना होने में मदद मिलती है, इससे फूलों की गुणवत्ता और अच्छा आकार भी प्राप्त होता है बिजाई से पहले बीजों को एजोसपीरियम 200 ग्राम को 50 मि.ली. धान के चूरे में मिलाकर उपचार करें शुरूआती खुराक के तौर पर अच्छी वृद्धि के लिए नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो), पोटाश 32 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 53 किलो) प्रति एकड़ में डालें मिट्टी की किस्म के अनुसार खाद की खुराक बदल दें सही खुराक देने के लिए मिट्टी की जांच करवायें और उसके आधार पर खुराक दें नदीनों की संख्या के आधार पर गोडाई करें खेत में रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई करें कली बनने से लेकर कटाई तक की अवस्था सिंचाई के लिए बहुत महत्तवपूर्ण होती है अप्रैल से जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर लगातार सिंचाई करना आवश्यक होता है किस्म के आधार पर गेंदा 2 से 2.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं फ्रैंच गेंदे की किस्म 1.5 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जबकि अफ्रीकी गेंदे की किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है जब गेंदे का पूरा आकार विकसित हो जाये तब उसे तोड़ लें कटाई सुबह के समय और शाम के समय करें फूलों की तुड़ाई से पहले खेत को सिंचित करना चाहिए इससे फूलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहती है इसे आप अपनी नजदीकी फूल ामंडी में बेच कर इसे अपनी आय का साधन बना सकते है
Posted by sanjay
Haryana
18-03-2019 04:32 PM
Punjab
03-19-2019 03:39 PM
संजय जी इसकी जड़ों में दीमक चेक करें अगर दीमक मौजूद है तो chlorpyriphos @4ml को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें
Posted by Lakhwinder Singh Lukhwinder
Punjab
18-03-2019 04:29 PM
Punjab
03-19-2019 03:36 PM
ਲਖਵਿੰਦਰ ਜੀ ਇਹ ਥੈਲੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੋਕਲ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿਚ ਮਿਲ ਜਾਣਗੇ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by manpreet
Punjab
18-03-2019 04:23 PM
Punjab
03-19-2019 03:31 PM
Manpreet ji tuc Dr madhu gill 7087408708 Punjab agro organic farming Chandigarh nal sampark kar sakde ho.
Posted by parvinder singh
Punjab
18-03-2019 04:22 PM
Punjab
03-19-2019 02:55 PM
ਪਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਕਿਰਪਾ ਕਰਕੇ ਆਪਣਾ ਸਵਾਲ ਵਿਸਤਾਰ ਨਾਲ ਦਸੋ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕਿਸ ਵਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ.
Posted by mahender tarar
Rajasthan
18-03-2019 04:20 PM
Maharashtra
03-19-2019 03:35 PM
महेंद्र जी यह तत्व और फंगस के कारण गिरना शुरू हो जाते है इसके लिए आप पौधे को3-5 किल्लो वर्मी कम्पोस्ट डालें और पौधे के ऊपर copper oxyChloride @3 ग्राम को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें धन्यवाद
Posted by ਰਸ਼ਪਿੰਦਰ ਭੁੱਲਰ
Punjab
18-03-2019 04:18 PM
Punjab
03-22-2019 04:51 PM
ਰਸ਼ਪਿੰਦਰ ਜੀ ਇਹ ਉਗ ਜਾਏਗੀ ਤੁਸੀ ਇਸਦੀ 2-4 ਦਿਨ ਤਕ wait ਕਰੋ
Posted by navjot nandgarhia
Punjab
18-03-2019 04:16 PM
Punjab
03-20-2019 10:29 AM
navjot nandgarhia ji tusi eh audio suno.