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Posted by Lokendra Singh
Rajasthan
19-03-2019 10:06 AM
Punjab
03-23-2019 03:54 PM
जी आप बीटल बकरियां रख सकते हैं यह बहुत ही लाभदायक व्यापार है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं इनकी खुराक अवस्था भी कम होती है इन्हें आप वृक्षों के पत्ते, हरा चारा, हरे घास के साथ पाल सकते हैं आप बीटल और देसी नसल की बकरियां खरीद सक.... (Read More)
जी आप बीटल बकरियां रख सकते हैं यह बहुत ही लाभदायक व्यापार है शुरूआत करने के लिए आप 10 बकरियों और 2 बकरे के साथ कर सकत हैं इन्हें खुराक कम चाहिए इसलिए इन्हें आसानी से पाल सकते हैं इनकी खुराक अवस्था भी कम होती है इन्हें आप वृक्षों के पत्ते, हरा चारा, हरे घास के साथ पाल सकते हैं आप बीटल और देसी नसल की बकरियां खरीद सकते हैं यह नसल पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, में आम मिल जाती है और एक तंदरूस्त बकरी 12 -15000 के करीब मिल जायेगी एक तंदरूस्त बकरी एक ब्यांत में 160-190 किलो तक दूध दे देती है इनका एक दिन का दूध 2-4 किलो तक का होता है यह साल में 2-5 बच्चे दे देती है भारतीय मंडी में बकरी के दूध और मीट की बहुत ही मांग है जिस कारण हम इसका आसानी से मंडीकरण भी कर सकते हैं और इसके मीट से खुद प्रोडक्ट तैयार करके या त्योहार के दिनों में खुद मंडीकरण करके अधिक मुनाफा ले सकते हैं
Posted by anuj
Bihar
19-03-2019 09:50 AM
Punjab
03-25-2019 04:43 PM
बकरी पालन की ट्रेनिंग आपको अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र से ही लेनी पड़ेगी आप वह पर जाकर ट्रेनिंग के लिए अपना फॉर्म भरे और जब ट्रेनिंग होगी तो आपको कॉल करके बुला लिया जाता है आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र का पता नोट कर सकते है जी कृषि विज्ञानं केंद्र, भोजपुर Village & PO - Dawan, PS & Block - Jagdishpur, जिला- भोजपुर - 802155 (बिहार.... (Read More)
बकरी पालन की ट्रेनिंग आपको अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र से ही लेनी पड़ेगी आप वह पर जाकर ट्रेनिंग के लिए अपना फॉर्म भरे और जब ट्रेनिंग होगी तो आपको कॉल करके बुला लिया जाता है आप अपने नज़दीकी कृषि विज्ञानं केंद्र का पता नोट कर सकते है जी कृषि विज्ञानं केंद्र, भोजपुर Village & PO - Dawan, PS & Block - Jagdishpur, जिला- भोजपुर - 802155 (बिहार) इंडिया फ़ोन: 9334199589
Posted by Navdeep puri
Punjab
19-03-2019 09:47 AM
Punjab
04-15-2019 11:06 AM
नवदीप पुरी जी आप लाल आलू में आप LR किस्म की बिजाई कर सकते हैं
Posted by Gurtej Singh
Punjab
19-03-2019 09:45 AM
Punjab
03-20-2019 05:25 PM
gurtej ji kanak de patteya nu hath laun te jekar haldi vala powder hathan nu lagda hai ta eh peeli kungi da hamla hai isde layi tuc mancozeb@2gm prati litre ja tilt@2ml prati litre pani de hisab nal spray karo. dhanwad
Posted by Ranjan Kumar
Bihar
19-03-2019 09:39 AM
Punjab
03-20-2019 11:58 AM
Motio ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
Posted by Harjinder singh
Punjab
19-03-2019 09:28 AM
Punjab
03-19-2019 02:03 PM
ਫੈਟ ਘਟਣ ਦੇ ਕਈ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੇ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ ਸਹੀ ਖੁਰਾਕ ਨਾ ਮਿਲਣਾ , ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਨਾ ਹੋਣਾ , ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ ਵਿਚ ਦਿਕੱਤ ਹੋਣਾ , ਇਹਨਾਂ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਘਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਇਸਦਾ ਸੰਬੰਧ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਨਸਲ ਤੇ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਫੈਟ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵਧਿਆ ਹੋਵੇਗਾ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸਦਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਹੀ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਹ.... (Read More)
ਫੈਟ ਘਟਣ ਦੇ ਕਈ ਕਾਰਨ ਹੁੰਦੇ ਹੈ , ਜਿਵੇਂ ਸਹੀ ਖੁਰਾਕ ਨਾ ਮਿਲਣਾ , ਟਾਈਮ ਤੇ ਡੇਵਰਮਿੰਗ ਨਾ ਹੋਣਾ , ਰਹਿਣ ਸਹਿਣ ਵਿਚ ਦਿਕੱਤ ਹੋਣਾ , ਇਹਨਾਂ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਵੀ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਘਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਇਸਦਾ ਸੰਬੰਧ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਨਸਲ ਤੇ ਵੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਹੈ ਤਾਂ ਫੈਟ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵਧਿਆ ਹੋਵੇਗਾ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਵਧਿਆ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸਦਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਹੀ ਦੁੱਧ ਅਤੇ ਫੈਟ ਹੋਵੇਗੀ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਉਸ ਨਸਲ ਦਾ ਹੈ , ਫੈਟ ਵਧਾਾਉਣ ਲਈ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਦੇਸੀ ਕਪਾਹ ਦੇ ਵੜੇਵੇ ਚਾਰੋ ਜੀ ਅਤੇ ਬੀਟੀ ਕਾਟਨ ਦੀ ਵਰਤੋ ਬਿਲਕੁੱਲ ਨਾ ਕਰੋ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਤੁਸੀ ਦਾਣੇ ਨੂੰ ਗਿੱਲਾ ਕਰਕੇ ਉਸ ਵਿੱਚ 10 ਗ੍ਰਾਮ ਲਾਈਵਈਸਟ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੁੱਧ ਚੋਣ ਤੋਂ 10 ਮਿੰਟ ਪਹਿਲਾ ਘੋਲ ਕੇ ਪਾਓ ਇਹ ਲਾਈਵਈਸਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪੰਸਾਰੀ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਤੋਂ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਹ ਜਿਆਦਾ ਟਾਈਮ ਨਹੀ ਪਿਆ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਵੱਧ ਜਾਵੇਗਾ ਜਾਂ ਤੁਸੀ ਕੱਦੂ ਜਾਂ ਲੋਕੀ ਖਵਾਓ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਇਹ ਵੀ ਦੁੱਧ ਵਧਾਉਣ ਲਈ ਠੀਕ ਹੈ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ Fatplus ਜਾਂ Fatmax 50 ਗ੍ਰਾਮ ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ , ਇਸ ਨਾਲ ਫੈਟ ਵਿੱਚ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ Milkout ਪਾਊਡਰ 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦਿਓ
Posted by satvinder singh
Punjab
19-03-2019 09:22 AM
Punjab
03-20-2019 05:26 PM
satvinder ji kirpa karke daso ke amb de boote di umar kini hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.
Posted by amrendra kumar
Bihar
19-03-2019 09:19 AM
Punjab
03-19-2019 02:04 PM
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक स.... (Read More)
हमारे देश में नदियों, झरने और तालाब में मौजूद हैं इनमें मछली पालन अलावा हमारे बेरोजगार युवा एवं किसान अब मोती पालन कर अच्छा मुनाफा कमा सकते है सीपों की सर्जरी पूरे साल की जा सकती है (अप्रैल जून माह को छोड़कर) खेती शुरू करने के लिए किसान को पहले तालाब, नदी आदि से सीपों को इकट्ठा करना होता है इसके बाद प्रत्येक सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया के उपरान्त इसके भीतर गोल, आधा गोल या डिजायनदार बीड जैसे गणेश, बुद्ध, पुष्प आकृति आदि डाले जाते है फिर सीप को बंद किया जाता है अन्दर से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है जो अन्त में मोती का रूप लेता है लगभग 8-9 माह बाद सीप से मोती निकाल लिया जाता है लागत (दस हजार (10000) सीपों के पालन के लिए :- (क) एक बार निवेश : - 1. तालाब (50 x 50 फीट) - 10000 रुपये, * 2. जाल - 5000 रुपये, 3. टैंक - 2 (सर्जरी के बाद का ट्रीटमेंट) - 4000 रुपये, 4. लैब इक्यूपमेंट, टूल - 3000 टोटल - 22000 रुपये * टैंक, एक्वेरियम, बाल्टी में भी फार्मिंग की जाती है (क) आवर्ती (क्रमशः) निवेश :- 1. सीप - 4 रुपये, 2.न्युक्लिअस (इम्पोर्टेड)** - 5 रुपये 3. दवाइयां - 100 रुपये ** न्युक्लिअस 100% इल्शियम कार्बोनेट से तैयार, सीमेंट और araldite से नहीं (ग) मुनाफा :- 1. सफलता की दर - 50 % (देख-रेख पर निर्भर), 2. तैयार मोती - 10000 (दस हजार) - 1 सीप से दो मोती 3. प्रति मोती ​औसत दर - 250 - 300 रुपये 4. 10000 (मोती) x 250 (रुपये) = 2,50,000 (दो लाख पचास हजार रुपये) सीप के अन्दर बनाने वाले मोती का रंग सीप की प्रजाति और वातावरण पर निर्भर करता है, काली मोती बनाने के सर्जरी के तरीके में कोई अंतर नहीं होता -मोती की खेती उसी प्रकार से की जाती है जैसे मोती प्राकृतिक रूप से तैयार होता है -मोती की खेती करने के लिए इसे छोटे स्‍तर पर भी शुरू किया जा सकता है इसके लिए आपको तालाब बनाना जरूरी नहीं है - छोटे - छोटे टैंक बनाकर, बाल्टी और एक्वेरियम बनाकर भी मोती की खेती शुरू की जा सकती है -9 महीने बाद एक सीप से 2 डिजायनर मोती तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 300 रुपए से 1500 रुपए तक मिल जाती है – बेहतर क्‍वालिटी और डिजाइनर मोती की कीमत इससे कहीं अधिक 10 हजार रुपए तक अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मिल जाती है – 20 महीने बाद गोल मोती तैयार होती है, जिसकी कीमत 500 से 50000 या उससे ज्यादा भी हो सकती है – हैदराबाद, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई आदि बड़े शहरों में मोती के हजारों व्‍यापारी मोतियों का कारोबार करते हैं, जिन्हें मोती बेचा जाता है – इनके अलावा आप अपने मोतियों को डायरेक्‍ट भी इंटरनेट व अन्‍य माध्‍यम से बेच सकते हैं – हमारी कंपनी के माध्‍यम से भी आप अपने मोती बेच सकते हैं छात्र - छात्राएं, किसान और नौकरीपेशा लोग भी इस खेती को कर सकते हैं- – इस खेती को करने के लिए बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती - आप इसकी सर्जरी पार्ट टाइम में भी कर सकते है - हमारी नयी तकनीकी के द्वारा आप आटोमेटिक सिस्टम भी लगा सकते हैं, जिससे ज्यादा देखभाल की जरुरत भी नहीं पड़ती और ज़्यादा जानकारी के लिए आप Vinod Kumar 9050555757 पर कॉल कर सकते है
Posted by Rameshwar sharma
Madhya Pradesh
19-03-2019 09:17 AM
Punjab
04-15-2019 11:05 AM
रामेश्वर जी आप ग्वार की बिजाई कर सकते है इसे कम पानी की जरुरत होती है धन्यवाद
Posted by jay
Gujarat
19-03-2019 09:06 AM
Punjab
03-19-2019 02:18 PM
आप 5 साल की भैंस को पूरी गोली दे सकते है यह गोली 3 महीने में एक बार देनी होती है इसके साथ पेट के कीड़े खत्म हो जाते है यह आप शाम के समय दें जब पशु चारा दाना खा चुका होता है तब आप इस गोली को दे सकते है
Posted by vinay ranjan tiwari
Bihar
19-03-2019 09:06 AM
Punjab
03-23-2019 12:08 PM
विनय रंजन तिवारी जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by mukesh
Uttar Pradesh
19-03-2019 08:55 AM
Punjab
03-23-2019 12:09 PM
मुकेश जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Rajveer Singh
Punjab
19-03-2019 08:53 AM
Punjab
03-20-2019 05:27 PM
ਗੇਂਦੇ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਮੇਂ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਮੀਂਹ ਦੇ ਮੋਸਮ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਜੂਨ ਤੋਂ ਅੱਧ ਜੁਲਾਈ ਵਿੱਚ ਕਰੋਂ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਅੱਧ ਸੰਤਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਵਿੱਚ ਪੂਰੀ ਕਰ ਲਓ
Posted by armaan deep
Punjab
19-03-2019 08:53 AM
Punjab
03-20-2019 05:18 PM
armaanji 12:32:16 DAP ate SSP wala hi kam krdi hai. iss di maatra narme de vich 50kg prati acre hai. iss di v DAP de vangoo bijaayi kr skde ho.
Posted by armaan deep
Punjab
19-03-2019 08:51 AM
Punjab
03-19-2019 11:01 AM
Narme di beejayi wala khet tyar krn wele @25 killo potash prati acre da chitta de skde ho.
Posted by dhirendra Pal Singh
Uttar Pradesh
19-03-2019 08:47 AM
Punjab
03-20-2019 05:15 PM
dhirendra Pal ji please ask your question in detail that about which crop plantation you want to know so that we can provide you proper information. Thank you
Posted by ashok kumar
Bihar
19-03-2019 08:38 AM
Maharashtra
03-20-2019 05:14 PM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है ब.... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है एलोवेरा की खेती में आप इसे एक बार लगाकर 3 से 5 वर्ष तक उपज ले सकते हैं आमतौर पर यह अनउपजाऊ भूमि पर होता है लेकिन दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी होती है इसकी बिजाई फरवरी में होती है वैसे आप इसे कभी भी लगा सकते हैं इसका बीज आप किसी किसान से जो एलोवेरा की खेती करता है उनसे ले सकते हैं इसके मंडीकरण के लिए आप बहुत सारी कॉन्ट्रेक्ट कंपनियां हैं जैसे पतंजलि आदि अगर अपना खुद का प्रोसेसिंग प्लांट लगाना चाहते हैं तो वो तभी फायदेमंद है अगर आपने ज्यादा ज़मीन पर लगाया है या फिर और किसान भी प्रोसेसिंग के लिए आप के पास आए आप इसे बेचने के लिए इस नंबर पर कॉन्ट्रेक्ट कर सकते हैं 7905264770 बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है
Posted by GurSewak turka
Punjab
19-03-2019 08:31 AM
Punjab
03-19-2019 11:02 AM
knak de patte upper yellow powder yellow rust krke lgda hai jo fungus disease hai. esdi roktham lyi Tilt @200 ml per acre da spray kr skde ho.
Posted by Vijay
Uttar Pradesh
19-03-2019 08:31 AM
Punjab
03-20-2019 05:09 PM
पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1,Hybrid-77,Shivalik,EC-41911,Gomti,Himalaya किस्म की .... (Read More)
पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- MAS-1,Hybrid-77,Shivalik,EC-41911,Gomti,Himalaya किस्म की बिजाई कर सकते है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है प्रजनन क्रिया जड़ के भाग या टहनियों द्वारा की जाती है अच्छी पैदावार के लिए 160 किलो भागों को प्रति एकड़ में प्रयोग करें जड़ें पिछले पौधों से दिसंबर और जनवरी के महीने में प्राप्त की जाती है फसल को जड़ गलने से बचाने के लिए बिजाई से पहले बीजे जाने वाले उपचार कप्तान 0.25 प्रतिशत या आगालोल 0.3% या बैनलेट 0.1% से 2-3 मिनट के लिए किया जाना चाहिए बिजाई से पहले पौधे की बारीक जड़ 10-14 सैं.मी. काटें पुदीने की जड़ को आकार और जड़ के हिसाब से बोयें पौधे की बारीक जड़ की रोपाई 40 सैं.मी. के फासले पर और कतार से कतार का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बिजाई के बाद मिट्टी को नमी देने के लिए सिंचाई करें रोपाई के बाद नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें हाथों से लगातार गोडाई करें और पहली कटाई के बाद खेत को नदीन मुक्त करें नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों को नियंत्रित करने के लिए जैविक मल्च के साथ ऑक्सीफलोरफिन 200 ग्राम या पैंडीमैथालीन बूटीनाशक 800 मि.ली को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि नदीन ज्यादा हो तो डालापोन 1.6 किलोग्राम प्रति एकड़ या ग्रामाक्ज़ोन 1 लीटर और डयूरॉन 800 ग्राम या टेरबेसिल 800 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है
Posted by Gurkirat Sarao
Punjab
19-03-2019 08:26 AM
Punjab
03-19-2019 11:03 AM
ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਜਦੋਂ 5 ਜਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਤੇਲੇ ਹੋਣ ਤਾਂ ਇਸ ਵਿੱਚ ਐਕਟਾਰਾ @80 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 120 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Saman
Punjab
19-03-2019 08:12 AM
Punjab
03-20-2019 05:12 PM
Saman ji tuc tele de layi imidacloprid@60ml ja thiamethoxam@80 gram nu prati acre de hisab nal spray karo. sundi de layi tuc quinalphos@800ml nu 150litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo ehna dona nu alag alag spray karo.
Posted by Mangat
Punjab
19-03-2019 08:01 AM
Punjab
03-19-2019 02:24 PM
Mangat ji tuci iss nu Gestaprojen powder 30gm rojana deo, isde nal tuci Calcimust gold liquid 100ml rojana ate Lactin bolus 1-1 swere sham deo, iss nal farak paa jawega.
Posted by Sandeep Joshi
Haryana
19-03-2019 07:45 AM
Punjab
03-23-2019 12:10 PM
संदीप जोशी जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Gurpreet
Punjab
19-03-2019 07:15 AM
Maharashtra
03-20-2019 05:04 PM
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ +ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * * ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂ.... (Read More)
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ +ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * * ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ ਇਕ ਫ਼ਸਲ ਹੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਗਸਤ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 4 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਤਕ ਹੈ ਤੁਸੀ ਹੁਣ ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿਚ ਪਰਾਲੀ ਜਾ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦੇ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪਰਾਲੀ,ਬੀਜ,ਬਾਂਸ, ਸੇਬਾ ਆਦਿ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ *ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲੇ*-- ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਦੇ 1-1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਪੂਲੇ ਦੋਨੋ ਸਿਰਿਆ ਤੋਂ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪੂਲੇ ਦੇ ਸਿਰੇ ਕਟ ਕ ਇਕ ਬਰਾਬਰ ਕਰ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਕਿਆਰੀ ਲਗਾਉਣਾ*---ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਸਾਫ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 16-20 ਘੰਟੇ ਲਈ ਡਬੋ ਦਇਓ ਗਿਲੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਢਲਾਨ ਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਵਾਧੂ ਪਾਣੀ ਨਿਕਲਣ ਦਇਓ ਕਮਰੇ ਚ ਇੱਟਾਂ ਤੇ ਬਾਂਸ ਦਾ ਇਕ ਢਕਵਾ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਬਣਾਓ ਇਸ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਤੇ 5 ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਇਕ ਤਹਿ ਲਗਾਓ ਜਿਸ ਉਪਰ ਲਗਭਗ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾਓ ਇਸ ਤੋਂ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਤਹਿ ਉਲਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ 5-5 ਪੂਲਿਆ ਦੀਆ 4 ਤਹਿਆ ਵਿਚ 300 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾ ਕ ਇਕ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਉਪਰ 2 ਪੂਲੇ ਖੋਲ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*---ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 7-9 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਲਗ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ *ਪਾਣੀ ਤੇ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ*-- ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਹਰ ਰੋਜ ਪਾਣੀ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਉਪਰੰਤ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ 6-8 ਘੰਟੇ ਪ੍ਰਤੀ ਦਿਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ * ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਖੁੰਬਾਂ ਫੁੱਟਣ ਉਪਰੰਤ 1-2 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ **ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ** ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਈ ਤੂੜੀ ,ਬੀਜ ,ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ(12×16),ਸੇਬਾ,ਕੇਸਿੰਗ, ਮਿਟੀ ਆਦਿ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ *ਤੂੜੀ ਦੀ ਤਿਆਰੀ*--ਸੁਕੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ 16-20 ਘੰਟੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਗਿਲਾ ਕਰੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਬੋਰੀ ਵਿਚ ਭਰ ਕੇ ਸੇਬੇ ਨਾਲ਼ ਬੰਨ ਦਇਓ ਇਸ ਬੋਰੀ ਨੂੰ ਉਬਲਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 45-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਰੱਖੋ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਕੱਢ ਕੇ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ ਠੰਡਾ ਕਰ ਲਓ ਇਹ ਤੂੜੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ *ਬਿਜਾਈ*--- ਠੰਡੀ ਤੂੜੀ ਵਿਚ ਬੀਜ ਰਲਾ ਕੇ ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਭਰ ਦਇਓ 1 ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਅਤੇ 70-80 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਲਿਫਾਫੇ ਦੇ ਮੂੰਹ ਨੂੰ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਰੱਖ ਦਇਓ *ਕੇਸਿੰਗ*--ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਲਿਫਾਫੇ ਖੋਲ ਕੇ ਕੇਸਿੰਗ ਦੀ 1-1.5 ਦੀ ਤਹਿ ਲਗਾ ਦਇਓ ਕੇਸਿੰਗ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਤੇ ਰੇਤਲੀ ਮਿਟੀ(4:1) ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕ 24 ਘੰਟਿਆ ਲਈ 4% ਫਾਰਮਲੇਨ ਦੇ ਘੋਲ਼ ਨਾਲ ਜੀਵਣੁ ਰਹਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ *ਖੁੰਬਾਂ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*-- ਕੇਸਿੰਗ ਮਿਟੀ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਲਗਭਗ 2 ਹਫਤਿਆਂ ਵਿਚ ਖੁੰਬਾਂ ਦੇ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਕਿਣਕੇ ਨਿਕਲਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੋ ਕ 4-5 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਲਗਭਗ 35 -40 ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by rajendra
Uttar Pradesh
19-03-2019 07:08 AM
Maharashtra
03-20-2019 05:03 PM
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई कर.... (Read More)
पपीता को मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है अच्छे निकास वाली पहाड़ी मिट्टी पपीते की खेती के लिए उपयुक्त होती है रेतली और भारी मिट्टी में इसकी खेती ना करें पपीते की खेती के लिए मिट्टी की पी एच 6.5-7.0 होनी चाहिए पपीते की खेती के लिए नदीन रहित भूमि का प्रयोग करें मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें आखिरी जोताई के समय अच्छी तरह से गली हुई रूड़ी की खाद या गाय का गला हुआ गोबर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाकर डालें सिफारिश किए गए फासलों पर 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदें गड्ढों को मिट्टी और रूड़ी की खाद या गाय के गले हुए गोबर से भरें प्रयोग की गई किस्म के आधार पर प्रत्येक गड्ढे पर 2-4 नए पौधों की रोपाई करें रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें हवा से बचाव के लिए खूंटा लगाएं एक एकड़ में 104 ग्राम बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें कम बारिश वाले क्षेत्रों में जून - जुलाई के महीने में बिजाई की जानी चाहिए और तराई और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों में सितंबर महीने में बिजाई की जानी चाहिए और क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध हो वहां पर फरवरी - मार्च के महीने में बिजाई की जानी चाहिए आमतौर पर 1.8 मीटर x 1.8 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है उच्च घनता की रोपाई के लिए 1.5 मीटर x 1.5 मीटर फासले का प्रयोग किया जाता है नर्सरी में बीज को 10 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बीजो की खेत में सीधे बिजाई या मुख्य खेत में नए पौधों की रोपाई की जाती है बीजों को 150 गेज़ की मोटाई वाले, 25 x 10 सैं.मी. के पॉलीथीन बैग में बोयें पानी के उचित निकास के लिए पॉलीथीन बैग के निचले हिस्से में 1 मि.मी. अर्द्धव्यास का छेद करें उसके बाद पॉलीथीन बैग में समान अनुपात में रूड़ी की खाद, मिट्टी और रेत डालें बिजाई से पहले बीजों का उपचार करें रोपाई के लिए 6-7 सप्ताह के पौधों का प्रयोग करें पौधे की प्रौढ़ अवस्था के दौरान नदीनों की रोकथाम जरूरी होती है नदीनों की तीव्रता के आधार पर, नियमित और हल्की गोडाई करें फ्लूक्लोरालिन या बूटाक्लोर 0.8 किलो प्रति एकड़ में डालें नदीनों की रोकथाम के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है पौधों की रोपाई के कुछ दिनों बाद प्लास्टिक शीट या धान की पराली या गन्ने के बचे कुचे को मलच के रूप में डालें मुख्यत: फल के पूरा आकार लेने और हरे से हल्का पीला रंग होने पर तुड़ाई की जाती है पहली तुड़ाई रोपाई के 14-15 महीनों के बाद की जा सकती है 4-5 तुड़ाइयां प्रति मौसम की जा सकती हैं तुड़ाई एक एक फल को हाथों से तोड़कर की जाती है फलों को सुबह के समय तोड़ें धन्यवाद
Posted by haribaboo
Uttar Pradesh
19-03-2019 07:07 AM
Punjab
03-20-2019 02:40 PM
to get proper information about pearl farming you can contact to ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, Odisha, India Tel: +91-674-2465421, 2465446.
Posted by rajendra
Uttar Pradesh
19-03-2019 06:54 AM
Punjab
03-23-2019 12:11 PM
राजेंदर जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Kabal Singh
Punjab
19-03-2019 06:53 AM
Punjab
03-20-2019 04:59 PM
kabal ji eh peeli kungi diyan nishaniyan han ehna patteya nu hath laun te jekar haldi varga powder hath nu lagda hau ta eh peeli kungi hai. isde layi tuc kanak de uper tilt@200ml nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo.
Posted by pravin kumar gupta
Madhya Pradesh
19-03-2019 06:45 AM
Punjab
03-23-2019 12:12 PM
प्रवीन कुमार गुप्ता जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by shailender singh
Uttar Pradesh
19-03-2019 06:37 AM
Punjab
03-23-2019 05:22 PM
अगर आपने गन्ने को दुसरे साल कि लिए रखना है तो आप उसे पानी लगा कर 1 लीटर clorpyriphos को रेत में मिला कर छोडकाव करें धन्यवाद
Posted by Rajeev kumar
Uttar Pradesh
19-03-2019 06:20 AM
Punjab
03-23-2019 12:13 PM
राजीव कुमार जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Barum Singh Chandel
Uttar Pradesh
19-03-2019 06:07 AM
Punjab
03-23-2019 12:14 PM
बारूम सिंह चंडेल जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Barum Singh Chandel
Uttar Pradesh
19-03-2019 06:06 AM
Punjab
03-23-2019 12:15 PM
बारूम सिंह चंडेल जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by satyendra
Uttar Pradesh
19-03-2019 05:25 AM
Punjab
03-23-2019 12:16 PM
सत्येंदर जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by ਨਵਪਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
19-03-2019 04:58 AM
Punjab
03-27-2019 11:00 AM
ਮੋਰਿੰਗਾਂ ਜਾ ਸੁਹਾਜਣਾ ਦੇ ਪੌਦੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਖਵਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਤੇ ਕਿਸਮ ਕੋਈ ਵੀ ਹੋਵੇ ਕੋਈ ਚੱਕਰ ਵਾਲੀ ਗੱਲ ਨਹੀ ਪੰਜਾਬ ਤੋਂ ਬਾਹਰਲੇ ਰਾਜਾਂ ਵਿੱਚ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ, ਪਰ ਆਪਣੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਆਮ ਇੱਕ ਹੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਆਮ ਹੀ ਖਾਲੀ ਜਗ੍ਹਾ ਵਿੱਚ ਉੱਗੀ ਹੋਈ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਫਿਰ ਜੋ ਨਰਸਰੀਆਂ ਵਿੱਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਉਹ ਖਰੀਦ ਲਵੋ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਤ.... (Read More)
ਮੋਰਿੰਗਾਂ ਜਾ ਸੁਹਾਜਣਾ ਦੇ ਪੌਦੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਹਰ ਰੋਜ਼ ਖਵਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਤੇ ਕਿਸਮ ਕੋਈ ਵੀ ਹੋਵੇ ਕੋਈ ਚੱਕਰ ਵਾਲੀ ਗੱਲ ਨਹੀ ਪੰਜਾਬ ਤੋਂ ਬਾਹਰਲੇ ਰਾਜਾਂ ਵਿੱਚ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ, ਪਰ ਆਪਣੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਆਮ ਇੱਕ ਹੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਆਮ ਹੀ ਖਾਲੀ ਜਗ੍ਹਾ ਵਿੱਚ ਉੱਗੀ ਹੋਈ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜਾਂ ਫਿਰ ਜੋ ਨਰਸਰੀਆਂ ਵਿੱਚ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਉਹ ਖਰੀਦ ਲਵੋ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀਂ ਬਠਿੰਡਾ ਤੋਂ ਇਹ ਲੈਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਬਠਿੰਡਾ ਵਿੱਚ ਜੋਗਾਨੰਦ ਰੋਡ ਤੇ ਥਰਮਲ ਕਲੋਨੀ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਜੰਗਲਾਤ ਵਿਭਾਗ ਦੀ ਸਰਕਾਰੀ ਨਰਸਰੀ ਹੈ ਉੱਥੋਂ ਜਿੰਨੇ ਬੂਟੇ ਚਾਹੇ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਜਾਂ ਫਿਰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ ਨਰਸਰੀ ਤੋਂ ਵੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Abdul
Rajasthan
19-03-2019 03:55 AM
Punjab
03-29-2019 12:21 PM
अब्दुल जी गिर नस्ल की गाय लेने के लिए आप Ameer Khan Pathan 9414745465 से सम्पर्क कर सकते है
Posted by sayeed ahmad
Uttar Pradesh
19-03-2019 02:22 AM
Punjab
03-20-2019 04:57 PM
सईद जी आप बताये के आप पहले कोनसी खेती करते है और आपके पास जमीन कितनी है ताकी आपको पूरी जानकारी दी जा सके के आप कोनसी नयी खेती कर सकते है धन्यवाद
Posted by md Halim Khan
Gujarat
19-03-2019 02:01 AM
Punjab
03-23-2019 12:17 PM
md Halim Khan जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by anurag rai
Uttar Pradesh
19-03-2019 01:54 AM
Punjab
03-20-2019 11:25 AM
Motio ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
Posted by Alok Kumar
Uttar Pradesh
19-03-2019 01:46 AM
Punjab
03-23-2019 12:19 PM
अलोक कुमार जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by SNEHA
Maharashtra
19-03-2019 01:38 AM
Punjab
03-20-2019 04:55 PM
गमले में टमाटर की खेती करने के लिए आप बड़े साइज के गमले ले उनमे में आप मिट्टी भरे और थोड़ी गोबर की खाद रला ले इसके बाद आप टमाटर के पौध इसे रोपण कर दे और हल्का पानी छिड़के धन्यवाद
Posted by Gulzar
Uttar Pradesh
19-03-2019 01:16 AM
Punjab
03-23-2019 12:20 PM
श्री गुलजार जी मोती की खेती के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Ravendra Sharma
Uttar Pradesh
19-03-2019 01:07 AM
Punjab
03-20-2019 11:23 AM
Motio ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
Posted by Vikash Kumar Awasthi
Madhya Pradesh
19-03-2019 12:57 AM
Punjab
04-01-2019 12:24 PM
डेयरी लोन के लिए डेयरी की ट्रेनिंग की होनी चाहिए बाकि डेयरी लोन का पूरा तरीका समझने के लिए यह वीडियो देखें, यदि आपको सी वीडियो और ऑडियो में कोई चीज़ समझ नहीं लगी तो आप अपना सवाल दोबारा पोस्ट कर दीजिये, कोशिश करेंगे कि आपको सही रास्ते डाला जाये https://www.youtube.com/watch?v=DUxbbAh5yxU
Posted by Pankaj Singh
Uttar Pradesh
19-03-2019 12:40 AM
Punjab
03-23-2019 12:21 PM
Pankaj Singh Motio ki kheti bare puri jankari ke lia aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.