
Posted by ਪਵਿੱਤਰ ਸਿੰਘ
Punjab
23-03-2019 11:10 AM
pavitar ji waste decomposer 7 dina vich tyar ho janda hai isnu 200 litre pani vich tyar kita janda hai. ate isdi direct spray kiti jandi hai. isde vich hor kuch nahimilaya janda. 200 litre di matra ik acre de layi kafi hundi hai. dhanywad

Posted by Rahul
Delhi
23-03-2019 11:07 AM
राहुल जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें

Posted by LAKHWINDER SINGH
Punjab
23-03-2019 10:48 AM
tuci ohna nu Outer-F bolus de skde ho , tuci ehh photo dekh skde ho ate ohna de weight de hisab nal goli deo ji.

Posted by shishupal
Rajasthan
23-03-2019 10:45 AM
अगर आपने दूध की पैकिंग करके सेल करना है तो सबसे पहले आप अपनी फार्म रेजिस्ट्रेड करवाए उसके लिए आप सबसे पहले किसी भी ca से मिले आपको शहर में बहुत सारे ca है किसी से भी करवा लीजिये उसके बाद आप आप https://foodlicensing fssai gov in/index aspx को ओपन करे और वहा पर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके fssai के लिए आवेदन देने के लिए पूछे यह आपको पूरी डिटेल में ब.... (Read More)
अगर आपने दूध की पैकिंग करके सेल करना है तो सबसे पहले आप अपनी फार्म रेजिस्ट्रेड करवाए उसके लिए आप सबसे पहले किसी भी ca से मिले आपको शहर में बहुत सारे ca है किसी से भी करवा लीजिये उसके बाद आप आप https://foodlicensing fssai gov in/index aspx को ओपन करे और वहा पर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके fssai के लिए आवेदन देने के लिए पूछे यह आपको पूरी डिटेल में बता देंगे
Posted by Harpinder Singh
Punjab
23-03-2019 10:44 AM
Knak vich tele di roktham lyi Actara(thiamethoxam 25WG) @80 gm prati acre de hisab nal spray kr skde ho.

Posted by Baljinder Singh
Haryana
23-03-2019 10:34 AM
baljinder jii you can sell it in local market or in a nearby store because lots of farmer are practicing organic farming in which they use vermi compost. so you can sell it in local market.

Posted by Aksha Singh
Madhya Pradesh
23-03-2019 10:14 AM
Mr. Aksha Singh जी मोती की खेती के बारे में जानकारी लेने के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें

Posted by Aksha Singh
Madhya Pradesh
23-03-2019 10:13 AM
Aksha Singh g Pearl farming ke bare mein puri jankari ke lia aap Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 se samparak kar sakte ho

Posted by Navin Dubey
Uttar Pradesh
23-03-2019 10:03 AM
पीपर मिंट पुदीने की एक किसम है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए पुदीने की बिजा.... (Read More)
पीपर मिंट पुदीने की एक किसम है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है प्रजनन क्रिया जड़ के भाग या टहनियों द्वारा की जाती है अच्छी पैदावार के लिए 160 किलो भागों को प्रति एकड़ में प्रयोग करें जड़ें पिछले पौधों से दिसंबर और जनवरी के महीने में प्राप्त की जाती है फसल को जड़ गलने से बचाने के लिए बिजाई से पहले बीजे जाने वाले उपचार कप्तान 0.25 प्रतिशत या आगालोल 0.3% या बैनलेट 0.1% से 2-3 मिनट के लिए किया जाना चाहिए बिजाई से पहले पौधे की बारीक जड़ 10-14 सैं.मी. काटें पुदीने की जड़ को आकार और जड़ के हिसाब से बोयें पौधे की बारीक जड़ की रोपाई 40 सैं.मी. के फासले पर और कतार से कतार का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बिजाई के बाद मिट्टी को नमी देने के लिए सिंचाई करें रोपाई के बाद नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें हाथों से लगातार गोडाई करें और पहली कटाई के बाद खेत को नदीन मुक्त करें नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों को नियंत्रित करने के लिए जैविक मल्च के साथ ऑक्सीफलोरफिन 200 ग्राम या पैंडीमैथालीन बूटीनाशक 800 मि.ली को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि नदीन ज्यादा हो तो डालापोन 1.6 किलोग्राम प्रति एकड़ या ग्रामाक्ज़ोन 1 लीटर और डयूरॉन 800 ग्राम या टेरबेसिल 800 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है

Posted by shishupal
Rajasthan
23-03-2019 10:02 AM
थनेला रोग (Mastitis) दुधारू पशुओं को लगने वाला एक रोग है थनैला रोग से प्रभावित पशुओं को रोग के प्रारंभ में थन गर्म हो जाता हैं तथा उसमें दर्द एवं सूजन हो जाती है शारीरिक तापमान भी बढ़ जाता हैं लक्षण प्रकट होते ही दूध की गुणवत्ता प्रभावित होती है दूध में छटका, खून एवं पीभ (पस) की अधिकता हो जाती हैं पशु खाना-पीना छोड़ द.... (Read More)
थनेला रोग (Mastitis) दुधारू पशुओं को लगने वाला एक रोग है थनैला रोग से प्रभावित पशुओं को रोग के प्रारंभ में थन गर्म हो जाता हैं तथा उसमें दर्द एवं सूजन हो जाती है शारीरिक तापमान भी बढ़ जाता हैं लक्षण प्रकट होते ही दूध की गुणवत्ता प्रभावित होती है दूध में छटका, खून एवं पीभ (पस) की अधिकता हो जाती हैं पशु खाना-पीना छोड़ देता है एवं अरूचि से ग्रसित हो जाता हैं थनैला रोग का कारण : इस रोग का प्रमुख कारण जीवाणु है रोग के लक्षण : सबसे पहले रोगाणु थन में प्रवेश करते हैं इसके बाद संक्रमण उत्पन्न करते हैं तथा बाद में सूजन पैदा करते है . * दूध उत्पादन में गिरावट थनैला रोग होने के कारण पशु का दूध उत्पादन कम हो जाता है ऐसा देखा गया हे कि थनैला से पीडि़त पशु का दूध उत्पादन 5 से 25 प्रतिशत तक कम हो जाता है * कमजोर दूध का स्तर : थनैला से ग्रसित पशु के दूध में दैहिक सेल की संख्या बढ़ जाती है, नमक बढ़ जाता है यह दूध मानव उपयोग के लिये अनुपयुक्त होता है थनैला रोग की रोकथाम : 1. थनैला रोग की रोकथाम जरूरी है क्योंकि यह एक संक्रामक रोग है तथा एक पशु से दूसरे पशु में संचारित होता है 2. आसपास के वातावरण की साफ-सफाई जरूरी है तथा जानवरों का आवास हवादार होना चाहिये 3. फर्श सूखा एवं साफ होना चाहिये 4. थनों की सफाई नियमित रूप से करना चाहिये 5. एक पशु का दूध निकालने के बाद ग्वाले को अपने हाथ अच्छी तरह से धोना चाहिये 6. थनों का समय-समय पर परीक्षण करते रहना चाहिये उनमें कोई गठान एवं दूध में थक्के हो तो थनैला रोग के लक्षण होते हंै तुरंत पशु चिकित्सक की सलाह लेना चाहिए
Posted by ਸਰਦਾਰ ਜੀ
Punjab
23-03-2019 09:58 AM
ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਪੀਲੀ ਕੁੰਗੀ ਫੰਗਸ ਕਰਕੇ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਬਹੁਤ ਹੀ ਖਤਰਨਾਕ ਬਿਮਾਰੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਦਾਣੇ ਵਿੱਚ ਦੋਧਾ ਭਰਨ ਸਮੇਂ ਹਮਲਾ ਕਰ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਟਿਲਟ @200 ਮਿਲੀਲਿਟਰ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by राजेश कुमार मीना
Rajasthan
23-03-2019 09:34 AM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है
मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है .... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है
मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है
खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें
पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है
अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी
सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए
कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए
कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है
बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है इसका बीज लेने के लिए आप राशिद खान 9039693757 जी से संपर्क कर सकते है धन्यवाद
Posted by Tirath Singh
Punjab
23-03-2019 09:31 AM
ਮਿਰਚ ਦੀ ਨਰਸਰੀ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਉੱਚਿਤ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੋਂ ਅੱਧ-ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਨਰਸਰੀ ਨੂੰ 50% ਛਾਂ ਵਾਲੇ ਜਾਲ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਅਤੇ ਪਾਸਿਆਂ ਤੇ ਕੀਟ-ਪਤੰਗੇ ਰੋਕਣ ਵਾਲਾ 40/50 ਮੈੱਸ਼ ਨਾਈਲੋਨ ਦਾ ਜਾਲ ਲਗਾਓ ਪਨੀਰੀ ਵਾਲੇ ਪੌਦੇ 30-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ (ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ) ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਕਤਾਰਾਂ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 75 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 45 ਸੈ.ਮੀ. ਰੱਖੋ ਪਨੀਰੀ 1-2 ਸੈ.ਮੀ.... (Read More)
ਮਿਰਚ ਦੀ ਨਰਸਰੀ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਉੱਚਿਤ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਦੇ ਅਖੀਰ ਤੋਂ ਅੱਧ-ਨਵੰਬਰ ਤੱਕ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਨਰਸਰੀ ਨੂੰ 50% ਛਾਂ ਵਾਲੇ ਜਾਲ ਨਾਲ ਢੱਕ ਦਿਓ ਅਤੇ ਪਾਸਿਆਂ ਤੇ ਕੀਟ-ਪਤੰਗੇ ਰੋਕਣ ਵਾਲਾ 40/50 ਮੈੱਸ਼ ਨਾਈਲੋਨ ਦਾ ਜਾਲ ਲਗਾਓ ਪਨੀਰੀ ਵਾਲੇ ਪੌਦੇ 30-40 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ (ਆਮ ਤੌਰ ਤੇ ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ) ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਕਤਾਰਾਂ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 75 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦਾ ਫਾਸਲਾ 45 ਸੈ.ਮੀ. ਰੱਖੋ ਪਨੀਰੀ 1-2 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾਈ ਵਿੱਚ ਬੀਜੋ ਮਿਰਚ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ
Posted by Rajveer Singh
Punjab
23-03-2019 09:30 AM
Dear sir Boron ekk jroori tatt hai anx eh fertilizer vich aounda hai.Esnu NPK vich mix krke spray kr skde ho.esdi dose @100 gm per acre da spray kr skde ho.ess nal dane mitthe hunde han and quality v bndi hai..

Posted by Gurmit Singh
Punjab
23-03-2019 09:29 AM
Gurmit singh g eh fungus da attack hai. Jekar tilt di spray kar ditti hai tn ess nal comtrol ho javegi. Hun ess vich koi spray na kro g..
Posted by Gurdeep Saharan
Haryana
23-03-2019 09:26 AM
पिछेता झुलस रोग : इस बीमारी का हमला पत्तों के शिखरों और नीचे के भाग पर देखा जा सकता है प्रभावित पत्तों पर बेढंगे आकार के धब्बे दिखते हैं और धब्बों के आस पास सफेद पाउडर बन जाता है इसकी रोकथाम के लिए बीमारी मुक्त बीज की बिजाई करें इसकी रोकथाम के लिए आप खट्टी लस्सी की स्प्रे करें लेकिन स्प्रे 15 दिन पुराणी होनी .... (Read More)
पिछेता झुलस रोग : इस बीमारी का हमला पत्तों के शिखरों और नीचे के भाग पर देखा जा सकता है प्रभावित पत्तों पर बेढंगे आकार के धब्बे दिखते हैं और धब्बों के आस पास सफेद पाउडर बन जाता है इसकी रोकथाम के लिए बीमारी मुक्त बीज की बिजाई करें इसकी रोकथाम के लिए आप खट्टी लस्सी की स्प्रे करें लेकिन स्प्रे 15 दिन पुराणी होनी चाहिए इसकी मात्रा 3 लीटर को 150 लीटर पानी में मिला कर प्रति एकर के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by ਅਮਨਪੀਤ ਸ਼ਿੰਘ
Punjab
23-03-2019 09:02 AM
amanpreet ji kirpa karke daso ke tuc kehdi kisam layi hai ta jo tuahnu is bare poori jankari diti ja sake. dhanwad
Posted by om kumar
Punjab
23-03-2019 08:46 AM
ਵਧੀਆ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਤਰੀਕੇ ਅਨੁਸਾਰ ਬਣਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ * ਇਸ ਲਈ ਇਹੋ ਜਿਹੀ ਥਾਂ ਲਵੋ ਜਿਥੇ ਧੁੱਪ ਨਾ ਆਵੇ ਅਤੇ ਹਵਾਦਾਰ ਹੋਵੇ * ਇਸ ਥਾਂ ਉੱਪਰ ਇੱਟਾਂ ਜਾਂ ਪੱਥਰ ਦੇ ਟੁਕੜੇ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ 2-3 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾਓ * ਇਸ ਉਪਰ 6-8 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ, ਅੱਧੀ ਗੋਬਰ ਜਾਂ ਕੰਪੋਸਟ ਖਾਦ ਅਤੇ ਅੱਧੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾ ਦਿਓ * ਮਿੱਟੀ ਉੱਤੇ ਥੋੜ੍ਹਾ ਜਿਹਾ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕ ਕੇ ਗਿੱਲਾ ਕਰੋ, ਮ.... (Read More)
ਵਧੀਆ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਹੇਠ ਲਿਖੇ ਤਰੀਕੇ ਅਨੁਸਾਰ ਬਣਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ * ਇਸ ਲਈ ਇਹੋ ਜਿਹੀ ਥਾਂ ਲਵੋ ਜਿਥੇ ਧੁੱਪ ਨਾ ਆਵੇ ਅਤੇ ਹਵਾਦਾਰ ਹੋਵੇ * ਇਸ ਥਾਂ ਉੱਪਰ ਇੱਟਾਂ ਜਾਂ ਪੱਥਰ ਦੇ ਟੁਕੜੇ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ 2-3 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾਓ * ਇਸ ਉਪਰ 6-8 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ, ਅੱਧੀ ਗੋਬਰ ਜਾਂ ਕੰਪੋਸਟ ਖਾਦ ਅਤੇ ਅੱਧੀ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾ ਦਿਓ * ਮਿੱਟੀ ਉੱਤੇ ਥੋੜ੍ਹਾ ਜਿਹਾ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕ ਕੇ ਗਿੱਲਾ ਕਰੋ, ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ 25 ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਤੋਂ ਵੱਧ ਨਮੀ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ * ਇਸ ਉੱਪਰ ਗੰਡੋਏ (40 ਗੰਡੋਏ ਪ੍ਰਤੀ ਵਰਗ ਫੀਟ ਥਾਂ) ਮਿੱਝਹ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਓ * ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵੇਸਟ ਜਿਵੇਂ- ਕਿ ਬਚੀ-ਖੁਚੀ ਸਬਜ਼ੀਆਂ, ਫਲ, ਕੱਚਾ ਗੋਬਰ, ਗੋਬਰ ਦੀ ਸਲਰੀ ਦੀ 8-10 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ ਪਾਓ * ਦੂਜੀ ਪਰਤ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਉੱਪਰ ਸੁੱਕੇ ਪੱਤੇ ਜਾਂ ਪਆਲ ਨਾਲ ਢਕ ਦਿਓ ਹਰ ਪਰਤ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕੋ ਤਾਂ ਕਿ ਨਮੀ ਬਣੀ ਰਹੇ * ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਦੇ ਬੈੱਡ ਨੂੰ 3-4 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਗੋਬਰ ਦੀ ਪਰਤ ਨਾਲ ਢਕ ਦਿਓ ਅਤੇ ਇਸ ਉੱਪਰ ਬੋਰਾ ਜਾਂ ਤਰਪਾਲ ਰੱਖੋ ਤਾਂ ਕਿ ਥੱਲੇ ਹਨੇਰਾ ਰਹੇ ਰੋਸ਼ਨੀ ਵਿੱਚ ਗੰਡੋਏ ਘੱਟ ਵਧਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਖਾਦ ਬਣਨ ਵਿੱਚ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਬੋਰਾ ਅਤੇ ਤਰਪਾਲ ਮੀਂਹ ਦੇ ਨੁਕਸਾਨ ਤੋਂ ਵੀ ਬਚਾਉਂਦੇ ਹਨ * ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਦੇ ਬੈੱਡ ਉੱਪਰ ਹਰ ਦੂਸਰੇ ਦਿਨ ਥੋੜ੍ਹਾ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕਾਉਂਦੇ ਰਹੋ ਤਾਂ ਜੋ ਨਮੀ ਬਣੀ ਰਹੇ * ਰਸੋਈ, ਫਸਲਾਂ ਜਾਂ ਡੇਅਰੀ ਦੇ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਦੀ ਪਰਤ ਨੂੰ ਰੈਕ ਨਾਲ ਪਲਟਦੇ ਰਹੋ ਅਤੇ ਲੋੜ ਹੋਣ ’ਤੇ ਥੋੜ੍ਹਾ ਥੋੜ੍ਹਾ ਕਰਕੇ ਹੋਰ ਵੇਸਟ ਵੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ, ਇਸ ਉੱਪਰ ਕੱਚਾ ਗੋਬਰ ਵੀ ਪਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਪਰ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਇਹ ਪਰਤ ਪਹਿਲਾਂ ਜਿੰਨੀ ਹੀ ਮੋਟੀ ਰਹੇ * ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਦੀ ਖਾਦ ਮੌਸਮ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 45-60 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਉੱਪਰ ਵਾਲੀ ਪਰਤ ਨੂੰ ਹਟਾ ਕੇ ਗੰਡੋਏ ਛਲਣੀ ਨਾਲ ਵੱਖਰੇ ਕਰ ਲਵੋ ਅਤੇ ਨਿਚਲੀ ਛੱਡ ਦਿਓ ਇਸ ਉਪਰ ਦੁਬਾਰਾ ਰਸੋਈ ਜਾਂ ਐਗਰੋ ਵੇਸਟ ਦੀ 6 ਇੰਚ ਮੋਟੀ ਪਰਤ ਵਿਛਾ ਕੇ ਦੁਬਾਰਾ ਖਾਦ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ * 45 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਛਿੜਕਣਾ ਬੰਦ ਕਰਨ ਨਾਲ ਵੀ ਗੰਡੋਏ ਹੇਠਲੀ ਪਰਤ ਵਿਚ ਚਲੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਛਲਣੀ ਨਾਲ ਅਲੱਗ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਘੱਟ ਸਮਾਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਤਿਆਰ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਕਾਲੇ ਭੂਰੇ ਰੰਗ ਦੀ ਗੰਧ ਰਹਿਤ ਅਤੇ ਚਾਹ ਪੱਤੀ ਵਰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਛਾਂ ਹੇਠਾਂ ਹਵਾ ਵਿੱਚ ਸੁਕਾ ਕੇ ਲੋੜ ਮੁਤਾਬਕ ਥੈਲੇ ਜਾਂ ਬੋਰੀਆਂ ਵਿਚ ਪਾ ਕੇ ਰੱਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਇੱਕ ਟਨ ਵਰਮੀ ਕੰਪੋਸਟ ਵਿੱਚ 1.0-1.5 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਨਾਈਟਰੋਜਨ, 5-10 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪੋਟਾਸ਼ ਅਤੇ 3.5-5.0 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਫਾਸਫੋਰਸ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਸ ਵਿੱਚ ਕਈ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਇੰਜਾਈਮਸ ਅਤੇ ਸੂਖਮ ਤੱਤ ਕਾਪਰ, ਆਇਰਨ, ਜ਼ਿੰਕ, ਸਲਫਰ, ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਅਤੇ ਮੈਗਨੀਸ਼ੀਅਮ ਆਦਿ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੇ ਉਪਰ ਕਿੰਨਾ ਖਰਚਾ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਅੰਗਰੇਜ ਸਿੰਘ ਭੁੱਲਰ 9417613396 ਜੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Gurii sidhu
Punjab
23-03-2019 08:30 AM
guri sidhu ji eh jyada khaadan paun de nal machan lag geya hai . isd eboote nu 1-3 saal tak 240-720 gram urea payi jandi hai jo ke tuhade hisab nal dugni payi gayi hai is layi boota suk reha hai.age to khaadan sahi matra vich pao ta jo bootey anu hona vale nuksaan to bchaya ja sake. dhanwad

Posted by Gurmeet Singh
Punjab
23-03-2019 08:23 AM
ਸ੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਬਾਸਮਤੀ ਅਤੇ ਪਰਮਲ ਝੋਨੇ ਦੇ ਲਛਣ ਅਲਗ ਅਲਗ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਚਰਿੱਤਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਹੀ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵੱਲੋਂ ਕੀਟਨਾਸ਼ਕਾਂ ਦੀਆਂ ਸ਼ਿਫਾਰਸਾਂ ਕੀਤੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ

Posted by Shivam Mittal
Punjab
23-03-2019 08:22 AM
sivam ji floriculture is a wide subject please tell us in detail aout which flower cultivation you want to know so that we can provide you proper solution. thank you

Posted by Ambaliyasana fahad
Gujarat
23-03-2019 08:15 AM
app bhains ke bhukar ki janch krwayen, yaddi bhukar hai to app nazdiki doctor se janch krwayen, yaddi nahi tan to app usse Flukarid-DS bolus pett ke kirro ke liye aur Aptifast bolus 1-1 goli subah sham deni suru kren aur app Anabolite liquid 100-100ml subah sham, Gog powder ki rojana 1 pudi den isse dudh mai farak padd jayega.

Posted by Gurdeep Singh
Punjab
23-03-2019 08:13 AM
432 ਸ਼੍ਰੀ ਰਾਮ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਇਕ ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕੇ 130-135 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਝਾੜ ਲਗਭਗ 28-30 ਕੁਇੰਟਲ਼ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਇਸਦਾ 5-6 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿਚ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਇਹ ਦਰਮਿਆਨੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿਚ ਉਗਾਉਣ ਯੋਗ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਹਮਲੇ ਵਿਚ ਘੱਟ ਅਉਂਦੀ ਹੈ

Posted by jashan
Punjab
23-03-2019 08:11 AM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਉਸ ਲਈ ਟ੍ਰੇਨਿਗ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਨਸਲ ਸਭ ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਪਸ਼ੂ ਖਰੀਦਣ ਵੇਲੇ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰੋ ਕਿ ਤਿੰਨ ਡੰਗ ਦੀ ਚੁਆਈ ਕਰਕੇ ਹੀ ਪਸ਼ੂ ਖਰੀਦੋ ਮੱਝਾਂ ਦਾ ਇੱਕ ਦਿਨ ਦਾ ਦੁੱਧ 12 ਲੀਟਰ ਅਤੇ ਗਾਵਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ 16-17 ਲੀਟਰ ਤੋਂ ਘੱਟ ਨਾ ਹੋਵੇ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਦੋਨਾਂ ਤੋਂ ਹੀ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਬਜਟ ਦੇ .... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਉਸ ਲਈ ਟ੍ਰੇਨਿਗ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਨਸਲ ਸਭ ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਪਸ਼ੂ ਖਰੀਦਣ ਵੇਲੇ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰੋ ਕਿ ਤਿੰਨ ਡੰਗ ਦੀ ਚੁਆਈ ਕਰਕੇ ਹੀ ਪਸ਼ੂ ਖਰੀਦੋ ਮੱਝਾਂ ਦਾ ਇੱਕ ਦਿਨ ਦਾ ਦੁੱਧ 12 ਲੀਟਰ ਅਤੇ ਗਾਵਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ 16-17 ਲੀਟਰ ਤੋਂ ਘੱਟ ਨਾ ਹੋਵੇ ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਦੋਨਾਂ ਤੋਂ ਹੀ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਬਜਟ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦੋਨੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਲਿਆ ਕੇ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਲਵੇਰੀਆਂ ਨੂੰ ਖਰੀਦਣ ਦਾ ਸਹੀ ਸਮਾਂ ਰੱਖੜੀਆਂ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਵਿਸਾਖੀ ਤੱਕ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਇਸ ਸਮੇਂ ਮੌਸਮ ਸੁਖਾਵਾਂ ਹੋਣ ਕਾਰਨ ਹਰਾ ਚਾਰਾ ਵੀ ਖੁੱਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਲਵੇਰੀਆਂ ਲਈ ਸ਼ੈਡ ਆਵਾਜਾਈ ਵਾਲੀ ਸੜਕ ਤੇ ਨਾ ਬਣਾਓ ਅਤੇ ਸ਼ੈਂਡ ਸੜਕ ਤੋਂ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ 100 ਗਜ ਹਟਵਾ ਜਰੂਰ ਹੋਵੇ ਸ਼ੈਡ ਨੂੰ ਧੁੱਪ ਅਤੇ ਹਵਾ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖ ਕੇ ਬਣਾਓ ਸ਼ੈਡ ਹਮੇਸ਼ਾ ਖੇਤ ਜਾਂ ਆਲੇ ਦੁਆਲੇ ਨਾਲੋ 2 ਫੁੱਟ ਉੱਚਾ ਬਣਾਓ ਕਿਉਕਿ ਨੀਵੀ ਥਾਂ ਤੇ ਪਾਣੀ ਖੜ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਗੰਦਗੀ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦਾ ਮਲ-ਮੂਤਰ ਦਾ ਨਿਕਾਸ ਵੀ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਬਣਾਈ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਖੁਰਲੀ ਢਾਈ-ਤਿੰਨ ਫੁੱਟ ਚੌੜੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਖੁਰਲੀ ਤੇ ਖੜਨ ਲਈ ਇੱਕ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਤਕਰੀਬਨ ਚਾਰ ਫੁੱਟ ਜਗਾਂ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਮਤਲਬ 10 ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ 40 ਫੁੱਟ ਲੰਬੀ ਖੁਰਲੀ ਬਣੇਗੀ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮ ਨਾਲ ਸਬੰਧਿਤ ਸਮਾਨ ਰੱਖਣ ਲਈ ਸਟੋਰ ਬਣਾਓ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੀ ਵੰਡ/ਦਾਣਾ ਸਟੋਰ ਕਰਨ ਲਈ ਕਮਰਾ ਸਿਲਾਬ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੋਣਾ ਬਹੁਤ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਸ਼ੈਡ ਦਾ ਫਰਸ਼ ਪੱਕਾ, ਤਿਲਕਣ ਰਹਿਤ ਤੇ ਜਲਦੀ ਸਾਫ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਹੋਵੇ ਸ਼ੈਡ ਵਿੱਚ ਜਿੰਨਾ ਹੋ ਸਕੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਖੁੱਲਾ ਛੱਡੋ ਤੇ ਪਾਣੀ ਤੇ ਦਾਣਾ ਪੂਰਾ ਦਿਓ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਖੁੱਲਾ ਛੱਡਣ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂਆਂ ਵਿੱਚ ਅਫਾਰੇ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆਂ ਘੱਟ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਆਪਣੀ ਲੋੜ ਤੇ ਸਮਰੱਥਾਂ ਮੁਤਾਬਿਕ ਹੀ ਸਮਾਨ ਖਰੀਦੋ ਅਤੇ ਆਰਥਿਕ ਨੁਕਸਾਨ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ ਹਰੇਕ ਲਵੇਰੀ ਦਾ ਬੀਮਾ ਜਰੂਰ ਕਰਵਾਓ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਬਾਰੇ ਹੋਰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ PDDB ਦੇ ਦਫਤਰ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ ਡੇਅਰੀ ਡਵਿਲਪਮੈਟ ਅਫਸਰ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਡੇਅਰੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦਾ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ ਹਾਸਲ ਕਰਕੇ ਹੀ ਤੁਸੀ ਅੱਗੇ ਡੇਅਰੀ ਲੋਨ ਅਪਲਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ
Posted by kaptan Singh
Rajasthan
23-03-2019 08:07 AM
कप्तान जी यह फंगस के कारण होते है इसके लिए आप म-45 @400 ग्राम को 150 लीटर पानी में मिला कर स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by Anish Panwar
Haryana
23-03-2019 08:06 AM
अनीश पंवार जी पैकिंग के बारे पूरी जानकारी के लिए आप डॉ.रमनदीप 9814019470 या फिर धर्मबीर 9812646563, 9896054925 से सम्पर्क करे धन्यवाद
Posted by kawaljit singh
Punjab
23-03-2019 07:54 AM
ਕੰਵਲਜੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ N:P:K 19:19:19 ਦੀ ਸਪਰੇਅ 1kg ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲਈ ਵਰਤੋ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਕਮੀ ਹੈ, ਉੱਥੇ ਯੂਰੀਆ+ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਵਰਤੋਂ 2.5 ਕਿਲੋ ਨੂੰ 100 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਕਰੋ
Posted by Gursewak singh Brar
Punjab
23-03-2019 07:54 AM
ਇਸ ਚੂਚੇ ਦੀ ਅੱਖ ਬੰਦ ਹੋ ਗਈ ਹੈ ਤੇ ਨਾਲ ਖ਼ਬ ਵੀ ਥੱਲੇ ਨੂੰ ਹੋ ਗਏ ਹਨ ਇਸ ਨੂੰ ਕੀ ਬਿਮਾਰੀ ਹੈ ਤੇ ਇਸ ਦਾ ਕੀ ਇਲਾਜ ਹੈ ?
ਇਸਦੀ ਅੱਖ ਵਿਚ ਤੁਸੀ Genta-D ਦਵਾਈ ਦੀਆ ਬੂੰਦਾਂ ਪਾਉਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਡਾਕਟਰ ਤੋਂ ਚੈੱਕ ਕਰਵਾਓ ਜਿਸ ਨਾਲ ਇਸਦੀ ਬਿਮਾਰੀ ਦਾ ਸਹੀ ਕਾਰਨ ਪਤਾ ਲਗ ਸਕੇ
Posted by baljit singh
Punjab
23-03-2019 07:35 AM
duhd da rate FAT ate SNF te depend hunda a.
alag alag dairy da fat te snf da rate hunda hai . jekar example dekhn hove ta formula dekho :
Fat * fat rate
Snf * snf rate
fr dona de result nu jmaa kro.
Agge example dsi gyi a:
Fat 4.0 *200 =800
Snf 8.0 *=170=1360
800+1360=2160
Rate per kg 21.60 rs.
jekar samaj nayi aayi ta tusi 97806 30418 number te jaskarn singh ji nal gal karo ji.
Posted by Gurdip Singh Grewal
Punjab
23-03-2019 07:30 AM
gurdip ji firstly spray a fungicide copper oxychloride@3gm per litre and then apply 3-4 kg vermi compost to plant it will provide all the nutrients and plant will be healthier.

Posted by Narayan Barman
Assam
23-03-2019 07:13 AM
यदि आप डेयरी फार्मिंग शुरू करना चाहते है तो आप से कुछ बातें शेयर कर रहे हैं आप एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निका.... (Read More)
यदि आप डेयरी फार्मिंग शुरू करना चाहते है तो आप से कुछ बातें शेयर कर रहे हैं आप एक बार में इक्ट्ठी गाय ना खरीदें गायों को 2-2 महीनों के फासले पर खरीदें या फिर 3 पहले खरीदें ओर 3 महीने बाद फिर खरीद लें इससे दूध की कमी नहीं आयेगी पशु की नसल सबसे ज्यादा जरूरी है पशु खरीदने के समय कोशिश करें कि दिन में तीन बार दूध निकालकर ही पशु खरीदें भैंसो का एक दिन का दूध 12 लीटर और गायों को दूध 16-17 लीटर से कम ना हो गाभिनों को खरीदने का सही समय रखड़ियों से लेकर वैशाखी तक का होता है क्योंकि इस समय मौसम अच्छा होने के कारण हरा चारा भी खुला होता है गाभिनों के लिए शैड आवाजाई वाली सड़क पर ना बनायें और शैड सड़क से कम से कम 100 गज दूर हो शैड को धूप और हवा का ध्यान रखकर ही बनायें शैड हमेशा खेत या आस पास से 2 फुट ऊंचा बनायें क्योंकि निचले स्थान पर पानी खड़ा हो जाता है जिस कारण गंदगी पैदा हो जाती है और बाकी पशुओं का मल मूत्र का निकास भी आसानी से हो जाता है पशुओं के लिए बनायी जाने वाली खुरली ढाई तीन फुट चौड़ी होनी चाहिए खुरली पर खड़ने के लिए एक पशु को तकरीबन चार फुट जगह चाहिए मतलब 10 पशुओं के लिए 40 फुट लंबी खुरली बनेगी डेयरी फार्म से संबंधित सामान रखने के लिए स्टोर बनायें पशुओं का वितरण/दाना स्टोर करने के लिए कमरा सैलाब से रहित होना चाहिए शैड का फर्श पक्क, फिसलन रहित और जल्दी साफ होने वाला हो शैड में जितना हो सके पशुओं को खुला छोंड़े और पानी और दाना पूरा डालें पशु को खुला छोड़ने से पशुओं में अफारे की समस्या कम आती है बाकी अपनी आवश्यकता और क्षमता के मुताबिक ही सामान खरीदें और आर्थिक नुकसान से बचने के लिए प्रत्येक गाभिन का बीमा जरूर करवायें
Posted by sarveash kumar
Uttar Pradesh
23-03-2019 06:54 AM
सर्वेश जी कृपया विस्तार से बताये के इसे क्या दिक्कत आ रही है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by ਹਰਪਾਲ ਸਿੰਘ
Punjab
23-03-2019 06:49 AM
harpal singh ji tuci 9 month di katti nu Cargill di hiefer Dry feed deni suru kro, isde nal tuci Puberaid powder 40 gm rojana deo ji iss nal vdia growth howegi, zule up liquid pashu nu energy denn vich help krda hai.
Posted by ਰਾਜ ਸਿੰਘ
Punjab
23-03-2019 06:36 AM
ਤੁਸੀ ਮੱਝ ਨੂੰ Calcimust gold liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ Gestaprojen ਪਾਊਡਰ 30 ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਜੀ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈਣ ਲਗ ਜਾਵੇਗਾ.

Posted by hemant
Odisha
23-03-2019 06:26 AM
यदि आप ज्यादा दूध के लिए रखना चाहते है तो आप एचएफ नस्ल की गाय रख सकते है इसका दूध सबसे ज्यादा होता है और इसे बीमारियां भी सबसे ज्यादा लगती है इसके इलावा आप साहीवाल , जरसी, गिर गाय भी रख सकते है इनका दूध भी अच्छा होता है और बीमारियां कम लगती है
Posted by sukhjinder singh
Punjab
23-03-2019 06:18 AM
sukhjinder ji kirpa karke patteya di photo dubara bhejo kyuki jehdi tuc photo bheji hai usde vich pattey ad euper pani hai jisde karke pta ni chal reha hai patteya nu ki dikkat aa rahi hai kirpa karke patte di nede ate clear photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake. dhanwad

Posted by manoj
Uttar Pradesh
23-03-2019 05:51 AM
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरु.... (Read More)
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरुम का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं, इससे हम 1 फसल ही ले सकते है, पराली मशरुम का समय अप्रैल से अगस्त तक है, इससे हम 4 फसले ले सकते है, मिलकी मशरुम का समय अप्रैल से सितंबर तक है, आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली मशरुम लगा सकते है, पराली मशरुम के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है, पराली के पूले: धान की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे के साथ बांध कर तैयार किये जाते है. पूले के सिरे काट कर बराबर कर लिए जाते हैं. पूलो की क्यिारी लगाना : पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए भिगो दें, गिले पूलो को ढलान पर रख कर अधिक पानी को निकलने दे, कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये, इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये, जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले. इसके ऊपर की सतह उलट होती है. इस प्रकार 5-5 पूलो की 4 सेट में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार की जाती है. सबसे ऊपर 2 पूलो को खोलकर रख दिए जाते हैं. मशरुम का फुटाव करना : बिजाई से 7-9 दिनो के बाद का फुटाव होने लगता है. पानी और हवा का संचार : बिजाई के 2 दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका किया जाता है. मशरुम के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है. मशरुम की तुड़ाई : मशरुम का फुटाव के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है. मिलकी मशरुम : मिलकी मशरुम के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे (12×16), सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि चाहिए. तूडी की तैयारी : सूखी तुड़ी को पक्के फर्श पर खिलार कर 16-20 घंटे पा नी से गिला करे, गीली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे. इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें, तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर खिलार कर ठंडा करे. यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है. बिजाई : ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें. एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज डाला जाता है. लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे. केसिंग : बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 के सेट बना दें, केसिंग में रूडी और रेतली मिट्टी (4:1) होती है. 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित की जाती है. मशरुम का फुटाव: केसिंग मिट्टी डालने के लगभग 2 हफतो में मशरुम के छोटे-छोटे कण निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है. मशरुम की तुड़ाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है

Posted by Dineshkumar Padhiyar
Gujarat
23-03-2019 04:34 AM
दिनेश जी आप अपने खेत का पानी का टेस्ट कराये और उसके बाद रिपोर्ट के हिसाब से आपको इसके बारे में जानकारी दी जा सके क्योंकि आपके खेत का पानी कितना खरा है यह टेस्ट करने के बाद ही पता लगेगा, धन्यवाद

Posted by RANJEET
Bihar
23-03-2019 04:18 AM
रनजीत जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें

Posted by Shantanu Aman
Bihar
23-03-2019 03:44 AM
investment if run Ten thousands of layer ,it requires 50-60 lakh rupees except land

Posted by Devendra Patel
Madhya Pradesh
22-03-2019 11:27 PM
देवेंदर जी कृपया बताएं कि aawagamaman किसे कहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Bhavik Kanakhara
Gujarat
22-03-2019 11:15 PM
Mr. Bhavik Kanakhara to get Information regarding Pearl Farming you can contact to Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 and Manish Vasudev 9417652857
Posted by Gauri Shankar awasthi
Madhya Pradesh
22-03-2019 11:13 PM
यह एक आयूर्वेदिक औषधी है जिसे प्राचीन काल से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उपयोग किया जा रहा है गोटू कोला को हिन्दी में ब्राह्मी के नाम से जाना जाता है
इस पौधे का वानस्पतिक नाम सेंटेला एशियाटिका है यह पौधा विशेष रूप से समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय दलदल क्षेत्रों में पाया जाता है इस पौधे के तने पतले हो.... (Read More)
यह एक आयूर्वेदिक औषधी है जिसे प्राचीन काल से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के लिए उपयोग किया जा रहा है गोटू कोला को हिन्दी में ब्राह्मी के नाम से जाना जाता है
इस पौधे का वानस्पतिक नाम सेंटेला एशियाटिका है यह पौधा विशेष रूप से समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय दलदल क्षेत्रों में पाया जाता है इस पौधे के तने पतले होते हैं पत्तियां गोलाकार होती हैं जिनमें नसों का जाल दिखाई देता है इसकी पत्तियां चिकनी और चमकदार होती हैं इनकी पत्तियां पतले डंठलों में होती हैं जिनका रंग हरा होता है इस पौधे के फूल सफेद या गुलाबी रंग के होते हैं, जो कि मिट्टी के पास झुंड के रूप में होते हैं
मिट्टी — इसका पौधा अत्याधिक नमी, उपजाऊ, रेतली दोमट और चिकनी मिट्टी में अच्छे से बढ़ता है
खेत की तैयारी — खेत की एक बार जोताई करें और दो बार हल से जोताई करें खेत की तैयारी के समय 20 टन रूड़ी की खाद प्रति हेक्टेयर में मिट्टी में मिलाएं नाइट्रोजन 100 किलो, फास्फोरस 50 किलो, पोटाश 50 किलो प्रति हेक्टेयर में 4 भागों में डालें
प्रजनन — इसका प्रजनन जड़ के भागों या बीजों के द्वारा किया जाता है
नर्सरी की तैयारी — इसका पौधा छांव में अच्छे से बढ़ता है एक तने की कटिंग की बिजाई की जा सकती है
एक हेक्टेयर भूमि के लिए 300 किलो जड़ के भाग की आवश्यकता होती है बिजाई से पहले उपचार की कोई आवश्यकता नहीं होती
बिजाई का समय — इसकी बिजाई के लिए फरवरी मार्च का समय उपयुक्त होता है सिंचाई के साथ 45x45 सैं.मी. का फासला रखें यह एक सिंचित फसल है
अंतरफसली — इस फसल का आम और अन्य वृक्षों के साथ अंतर फसली किया जा सकता है
खरपतवार नियंत्रण — इस फसल को लगातार निराई गोडाई की आवश्यकता होता है मॉनसून के मौसम में, बैडों में जल जमाव को रोकना आवश्यक है
सिंचाई — सूखे महीनों में सिंचाई की आवश्यकता होती है और बारिश के मौसम में जल निकास की आवश्यकता होती है
कीट और बीमारी नियंत्रण — इस फसल में कोई बीमारी या कीट नहीं लगता
कटाई — यह फसल बिजाई के बाद 90 दिनों में पक जाती है इसकी कटाई हाथों से की जाती है
Posted by sandeep singh brar
Punjab
22-03-2019 11:00 PM
ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲਗਾਉਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਖਿਲਾਰ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕਰ ਲਓ ਅਤੇ ਫਿਰ ਬੀਜ ਖਿਲਾਰ ਕੇ ਹਲਕਾ ਕੰਗਾ ਮਾਰ ਕੇ ਪਾਣੀ ਲਗਾਓ ਜੀ
Posted by Amandeep singh Dhaliwal 97804 10102
Punjab
22-03-2019 10:42 PM
amandeep ji makki di kisam J1006 di bijai kar sakde ho eh 60-65 dina vich katan de layi tyar ho jandi hai. dhanwad
Posted by हेमन्त कुमार सिंह
Uttar Pradesh
22-03-2019 10:28 PM
पीपरमिंट पुदीने की ही किसम है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए पुदीने की बिजा.... (Read More)
पीपरमिंट पुदीने की ही किसम है पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें पौधे के जड़ वाले भाग को मुख्य खेत में बोया जाता है प्रजनन क्रिया जड़ के भाग या टहनियों द्वारा की जाती है अच्छी पैदावार के लिए 160 किलो भागों को प्रति एकड़ में प्रयोग करें जड़ें पिछले पौधों से दिसंबर और जनवरी के महीने में प्राप्त की जाती है फसल को जड़ गलने से बचाने के लिए बिजाई से पहले बीजे जाने वाले उपचार कप्तान 0.25 प्रतिशत या आगालोल 0.3% या बैनलेट 0.1% से 2-3 मिनट के लिए किया जाना चाहिए खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें हाथों से लगातार गोडाई करें और पहली कटाई के बाद खेत को नदीन मुक्त करें नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों को नियंत्रित करने के लिए जैविक मल्च के साथ ऑक्सीफलोरफिन 200 ग्राम या पैंडीमैथालीन बूटीनाशक 800 मि.ली को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि नदीन ज्यादा हो तो डालापोन 1.6 किलोग्राम प्रति एकड़ या ग्रामाक्ज़ोन 1 लीटर और डयूरॉन 800 ग्राम या टेरबेसिल 800 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए पौधे 100-120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं जब निचले पत्ते पीले रंग के होने शुरू हो जायें, तब कटाई करें कटाई दराती से और बूटियों को मिट्टी की सतह के 2-3 सैं.मी. ऊपर से निकालें अगली कटाई पहली कटाई के बाद 80 दिनों के अंतराल पर करें ताजी पत्तियों को उत्पाद बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है

Posted by manpreet singh
Punjab
22-03-2019 10:18 PM
ਮਨਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਇਹ ਫੰਗਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਮ-45 @4gram ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by azim khan
Uttar Pradesh
22-03-2019 10:14 PM
अज़ीम खान जी कृपया आप बताये कि आपने गेंहू की फोटो कहा से ली है आपके आस पास कि खेत में ये है या कही और से ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by JITENDRA KUMAR
Jharkhand
22-03-2019 09:48 PM
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरु.... (Read More)
मशरुम की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन मशरुम , डीगरी, शटाकी मशरुम , पराली मशरुम , और मिलकी मशरुम. इनमे से कुछ मशरुम सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर मशरुम को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन मशरुम का समय सितंबर से मार्च तक होता है, इससे हम 2 फसले ले सकते है, शटाकी मशरुम का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं, इससे हम 1 फसल ही ले सकते है, पराली मशरुम का समय अप्रैल से अगस्त तक है, इससे हम 4 फसले ले सकते है, मिलकी मशरुम का समय अप्रैल से सितंबर तक है, आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली मशरुम लगा सकते है, पराली मशरुम के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है, पराली के पूले: धान की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे के साथ बांध कर तैयार किये जाते है. पूले के सिरे काट कर बराबर कर लिए जाते हैं. पूलो की क्यिारी लगाना : पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए भिगो दें, गिले पूलो को ढलान पर रख कर अधिक पानी को निकलने दे, कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये, इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये, जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले. इसके ऊपर की सतह उलट होती है. इस प्रकार 5-5 पूलो की 4 सेट में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार की जाती है. सबसे ऊपर 2 पूलो को खोलकर रख दिए जाते हैं. मशरुम का फुटाव करना : बिजाई से 7-9 दिनो के बाद का फुटाव होने लगता है. पानी और हवा का संचार : बिजाई के 2 दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका किया जाता है. मशरुम के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है. मशरुम की तुड़ाई : मशरुम का फुटाव के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है. मिलकी मशरुम : मिलकी मशरुम के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे (12×16), सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि चाहिए. तूडी की तैयारी : सूखी तुड़ी को पक्के फर्श पर खिलार कर 16-20 घंटे पा नी से गिला करे, गीली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे. इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें, तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर खिलार कर ठंडा करे. यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है. बिजाई : ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें. एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज डाला जाता है. लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे. केसिंग : बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 के सेट बना दें, केसिंग में रूडी और रेतली मिट्टी (4:1) होती है. 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित की जाती है. मशरुम का फुटाव: केसिंग मिट्टी डालने के लगभग 2 हफतो में मशरुम के छोटे-छोटे कण निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है. मशरुम की तुड़ाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
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