
Posted by simranjit singh
Punjab
23-03-2019 09:35 PM
Os nu Bolus Fandikind plus 3gm deo nall Powder Buffzon 200gm 50gm rojana deo ji
Posted by Rajendra Kumar
Uttarakhand
23-03-2019 09:30 PM
राजेंदर कुमार जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें

Posted by Raja Sidhu
Punjab
23-03-2019 09:21 PM
ਜਾਮੁਣ ਦੇ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਲਗਭਗ 4 -5 ਸਾਲ ਤਕ ਫਲ ਲੱਗਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੇ ਤਣੇ ਨੂੰ ਥੋੜੇ-ਥੋੜੇ ਟਕ ਲਾਓ ਜਿਸਦੇ ਨਾਲ ਫ਼ਲ ਵੀ ਵੱਧ ਆਉਂਦਾ ਹੈ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by RAJVEER SINGH
Rajasthan
23-03-2019 09:17 PM
राजवीर सिंह जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप मनीष वासुदेव 9417652857 से संपर्क करें

Posted by gurpreet
Punjab
23-03-2019 09:17 PM
ਹਾਂਜੀ ਵੀਰ ਜੀ ਪਸ਼ੂ ਹੀ ਜ਼ਿਅਦਾ ਵਧੀਆ ਰਹਿੰਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਅੱਜ ਕੱਲ ਮੁੱਲ ਦੇ ਦੁੱਧ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਿਲਾਵਟ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਜੋ ਲੋਕ ਦੁੱਧ ਵੇਚਦੇ ਆ ਉਹ ਸਫਾਈ ਦਾ ਵੀ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਨਹੀਂ ਰੱਖਦੇ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ(Quality) ਬਹੁਤ ਮਾੜੀ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਤੁਹਾਡਾ ਆਪਣਾ ਪਸ਼ੂ ਹੋਵੇਗਾ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪਸ਼ੂ ਬਾਰੇ ਸਭ ਗਿਆਨ ਹੋਵੇਗਾ ਤੁਸੀ ਚੰਗੀ ਖੁਰਾਕ ਅਤੇ ਸਾਫ ਸਫਾਈ ਨਾਲ .... (Read More)
ਹਾਂਜੀ ਵੀਰ ਜੀ ਪਸ਼ੂ ਹੀ ਜ਼ਿਅਦਾ ਵਧੀਆ ਰਹਿੰਦਾ ਕਿਉਂਕਿ ਅੱਜ ਕੱਲ ਮੁੱਲ ਦੇ ਦੁੱਧ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਿਲਾਵਟ ਆ ਰਹੀ ਹੈ ਜੋ ਲੋਕ ਦੁੱਧ ਵੇਚਦੇ ਆ ਉਹ ਸਫਾਈ ਦਾ ਵੀ ਪੂਰਾ ਧਿਆਨ ਨਹੀਂ ਰੱਖਦੇ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ(Quality) ਬਹੁਤ ਮਾੜੀ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਤੁਹਾਡਾ ਆਪਣਾ ਪਸ਼ੂ ਹੋਵੇਗਾ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪਸ਼ੂ ਬਾਰੇ ਸਭ ਗਿਆਨ ਹੋਵੇਗਾ ਤੁਸੀ ਚੰਗੀ ਖੁਰਾਕ ਅਤੇ ਸਾਫ ਸਫਾਈ ਨਾਲ ਵਧੀਆ ਦੁੱਧ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by bhaiyagaurav
Uttar Pradesh
23-03-2019 09:12 PM
Bhaiyagaurav जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by Arjun Singh
West Bengal
23-03-2019 09:05 PM
अर्जुन सिंह जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Regional Research Centre, Rahara Rahara Fish Farm, P.O. Rahara, Kolkata-700117, पश्चिम बंगाल फोन: +91-33-25683023 से संपर्क करें

Posted by Harpreet Singh
Punjab
23-03-2019 09:04 PM
harpreet ji pudine diyan kisman jive MAS-1, Hybrid-77,Shivalik, EC-41911, Gomti, Kosi di bijai kar sakde ho. dhanwad

Posted by honey paliwal
Maharashtra
23-03-2019 09:01 PM
हनी पलीवाल जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें

Posted by ਬਲਜੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
23-03-2019 09:01 PM
ਬਲਜੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਚਾਰੇ ਦੇ ਲਈ ਮੱਕੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ J1006 ਅਤੇ African tall ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by satyam kashyap
Bihar
23-03-2019 08:45 PM
सत्यम जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे के आप कोनसी फसल के बीजों की जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको पूरी जानकारी दी जा सके धन्यवाद

Posted by ਸਿਮਰਜੀਤ ਸਿਂਘ
Punjab
23-03-2019 08:45 PM
ਸਿਮਰਜੀਤ ਸਿਂਘ ਜੀ ਮੋਟਰ ਤੇ ਅਜੇ ਸਬਸਿਡੀ ਚਾਲੂ ਨਹੀ ਹੋਈ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਵਧੇਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ 98142 21784 ਨੰਬਰ ਤੇ ਕਾਲ ਕਰ ਲਵੋ ਜੀ

Posted by Jugraj BrAr
Punjab
23-03-2019 08:43 PM
ਜੁਗਰਾਜ ਜੀ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਬਿਨਾ ਖਾਦ ਅਤੇ ਸਪਰੇ ਦੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁਸੀ ਇਸਦੇ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲੈਣ ਲਈ ਆਪਣੇ ਨਜਦੀਕੀ ਕਿਸਾਨ ਜੋ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਅਤੇ ਓਹਨਾ ਦਾ ਅਨੁਭਵ ਲਓ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਥੋੜੀ ਜਗਾ ਵਿਚ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜੋ ਵੀ ਜੈਵਿਕ ਖਾਦ ਜਾ ਸਪਰੇ ਤੁਸੀ ਕਰਨੀ ਹੋਏਗੀ ਉਸਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੇ ਦਿਤੀ ਜਾਏਗੀ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Shrawan Singh
Uttar Pradesh
23-03-2019 08:38 PM
यह मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है इसे रेतली दोमट से दोमट मिट्टी जिसमें जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो और अच्छे जल निकास वाली हो, में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है खारी मिट्टी में खेती करने से परहेज करें क्योंकि यह स्टीविया के लिए हानिकारक होती है पौधे के विकास के लिए मिट्टी का pH 6-8 होना चाहिए .... (Read More)
यह मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है इसे रेतली दोमट से दोमट मिट्टी जिसमें जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो और अच्छे जल निकास वाली हो, में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है खारी मिट्टी में खेती करने से परहेज करें क्योंकि यह स्टीविया के लिए हानिकारक होती है पौधे के विकास के लिए मिट्टी का pH 6-8 होना चाहिए स्टीविया की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार खेत की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक, खेत की 2-3 बार जोताई करें जोताई के समय मिट्टी में ट्राइकोडरमा अच्छे से मिलायें और आखिरी जोताई के समय रूड़ी की खाद मिट्टी में अच्छे से मिलायें स्टीविया की रोपाई तैयार बैडों पर की जाती है इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च का समय उचित होता है नए पौधों में 18 इंच का फासला और पंक्ति के बीच का फासला 20-24 इंच रखें बिजाई के बाद, 6-7 सप्ताह के नए पौधे खेत में रोपण किए जाते हैं नए पौधों की रोपाई, 30000 बीजों को एक एकड़ खेत में डालें स्टीविया के बीजों को 6-8 सप्ताह तक कंटेनरों के भीतर बोया जाता है बिजाई के बाद बैडों को मिट्टी से ढक दें मिट्टी में नमी रखने के लिए पानी देते रहें झाड़ियों के बढ़िया विकास के लिए रोपाई से पहले पौधे के शिखर को काट दें
पौधों की रोपाई 60 सैं.मी. चौड़े और 15 सैं.मी. ऊंचाई वाले तैयार बैडों पर की जाती है पौधे 6-8 सप्ताह में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं रोपाई से 24 घंटे पहले पौधों को पानी देना चाहिए ताकि उन्हें आसानी से बैडों में से निकाला जा सके खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद 200 क्विंटल, गाय का गोबर या मूत्र और गंडोया खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 11 किलो (यूरिया 24 किलो), फासफोरस 45 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 282 किलो), पोटाश 45 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 75 किलो) प्रति एकड़ में डालें सिंगल सुपर फासफेट की पूरी मात्रा शुरूआती खुराक के तौर पर डालें नाइट्रोजन और पोटाश की मात्रा प्रति महीना 10 खुराकें दी जाती है
अधिक सूखे पत्तों कीपैदावार के लिए बोरोन और मैगनीज़ की स्प्रे करें खेत में से नदीनों को निकालने के लिए मुख्यत: हाथों से गोडाई करें रोपाई के एक महीना बाद पहली गोडाई की जाती है और फिर हर दो सप्ताह में लगातार गोडाई की जाती है नदीनों को बाहर निकालने के लिए गोडाई करें क्योंकि फसल तैयार किये बैडों पर विकास करते है और यह मजदूरों के लिए भी आसान होता है सिंचाई मुख्य रूप से फुव्वारा और ड्रिप सिंचाई द्वारा की जाती है पौधे को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती इसलिए नियमित अंतराल पर हल्की सिंचाई करें गर्मियों में, 8 दिनों के फासले पर सिंचाई करें खेत में पानी ना खड़ा होने दें यह फसल के लिए नुकसानदायक है बिजाई के बाद 3 महीने में पौधा पैदावार देना शुरू कर देता है कटाई 90 दिनों के फासले पर लगातार की जाती है इस बात का ध्यान रखें कि कटाई करते समय 5-8 सैं.मी. तने को दोबारा पनपने के लिए जमीनी स्तर पर छोड़ देना चाहिए एक वर्ष में लगभग चार बार कटाई की जाती है दोबारा प्रक्रिया के लिए, पत्तों का प्रयोग किया जाता है

Posted by maan
Punjab
23-03-2019 08:37 PM
इसकी खेती मिट्टी की व्यापक किस्मों में की जा सकती है यह अच्छे निकास वाली दोमट से रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है नमक और जल जमाव वाली मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती प्रसिद्ध किस्में: ML 818 : यह खरीफ की ऋतु में उगाई जाने वाली किस्म है पौधे का कद दरमियाना होता है यह किस्म 80 दिनों में .... (Read More)
इसकी खेती मिट्टी की व्यापक किस्मों में की जा सकती है यह अच्छे निकास वाली दोमट से रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है नमक और जल जमाव वाली मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं होती प्रसिद्ध किस्में: ML 818 : यह खरीफ की ऋतु में उगाई जाने वाली किस्म है पौधे का कद दरमियाना होता है यह किस्म 80 दिनों में पक जाती है प्रत्येक फली में 10-11 दाने होते हैं यह किस्म पीला चितकबरा रोग और पत्तों के धब्बा रोग की प्रतिरोधक है इसकी औसतन पैदावार 4.9 क्विंटल प्रति एकड़ है SML 668: यह किस्म गर्मी की ऋतु में लगाई जाती है इसके बूटे छोटे होते हैं और यह 60 दिनों में पक जाती है इसकी फलियां लंबी और हर फली में 10-11 दाने होते हैं यह जुएं और मूंग के चितकबरे रोग को सहनेयोग्य है इसकी औसतन पैदावार 4.5 क्विंटल प्रति एकड़ है SML 832: यह गर्मी ऋतु में बीजने वाली किस्म है इसका बूटा दरमियाने कद का होता है यह किस्म 60 दिनों में पक जाती है इसकी प्रत्येक फली में 10 दाने होते हैं इसके दाने दरमियाने और चमकीले हरे रंग के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 4.6 क्विंटल प्रति एकड़ है TMB 37: यह किस्म पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी द्वारा जारी की गयी है यह किस्म गर्मी और वसंत की ऋतु में लगाई जाती है यह 60 दिनों में पक जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक दो या तीन बार जोताई करें और प्रत्येक जोताई के बाद सुहागा फेरें खरीफ की बिजाई के लिए जुलाई का पहला पखवाड़ा उपयुक्त होता है और गर्मियों में बिजाई के लिए मार्च से अप्रैल का महीना उपयुक्त होता है खरीफ की बिजाई के लिए कतारों में 30 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 10 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें रबी की बिजाई के लिए कतारों में 22.5 सैं.मी. और पौधे से पौधे में 7 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को 4-6 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के लिए बिजाई वाली मशीन, पोरा या केरा ढंग का प्रयोग किया जाता है खरीफ के मौसम के लिए 8-9 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें, जबकि गर्मियों के मौसम के लिए 12-15 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन 5 किलो (12 किलो यूरिया), फासफोरस 16 किलो (100 किलो सिंगल सुपर फासफेट) की मात्रा बिजाई के समय प्रति एकड़ में डालनी चाहिए खेत को नदीन मुक्त रखें, एक या दो गोडाई करें पहली गोडाई बिजाई के चार सप्ताह बाद करें और दूसरी गोडाई पहली गोडाई के दो सप्ताह बाद करें रासायनिक तरीके से नदीनों को ख्त्म करने के लिए फलूक्लोरालिन 600 मि.ली. प्रति एकड़ और ट्राइफलूरालिन 800 मि.ली बिजाई के समय या पहले प्रति एकड़ में डालें बिजाई के बाद दो दिनों में पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 100 से 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ में स्प्रे करें मूंग को मुख्यत: खरीफ की फसल के तौर पर उगाया जाता है यदि जरूरत पड़े तो जलवायु के हालातों के आधार पर सिंचाई करें गर्मियों के मौसम की फसल के लिए मिट्टी की किस्म और जलवायु के अनुसार तीन से पांच सिंचाई करें अच्छी उपज के लिए बिजाई के 55 दिनों के बाद सिंचाई बंद कर दें 85 प्रतिशत फलियों के पक जाने पर कटाई की जाती है फलियों को ज्यादा पकने नहीं देना चाहिए इससे वे झड़ जाती हैं जिससे पैदावार का नुकसान होता है कटाई दरांती से करें कटाई के बाद थ्रैशिंग करें थ्रैशिंग के बाद बीजों का साफ करें और धूप में सूखाएं

Posted by Jugraj BrAr
Punjab
23-03-2019 08:31 PM
ਜੁਗਰਾਜ ਜੀ ਤੁਸੀ ਪਾਲਕ ਦੀ ਕਿਸਮ ਜਿਵੇ Punjab Green, Punjab Selection ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਧਨੀਏ ਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ Local, Punjab Sugandh ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਮੇਥੀ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤੁਸੀ ਕਿਸਮਾਂ ML 150 ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by ATMA singh
Punjab
23-03-2019 08:28 PM
ਅਵਤਾਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਮੱਝਾਂ ਦੇ ਵਾਲ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸੇਵਟੀ ਨਾਲ ਸਾਫ ਕਰਨੇ ਪੈਣਗੇ ਕਿਉਕਿ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਕੋਈ ਟਿਊਬ ਲਗਾਉਂਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤਾਂ ਉਸ ਨਾਲ ਇਨਫੈਕਸ਼ਨ ਹੋਣ ਦਾ ਖਤਰਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ, ਤੁਸੀ ਇਹਨਾਂ ਦੇ ਵਾਲ ਸੇਵਟੀ ਨਾਲ ਹੋਲੀ ਹੋਲੀ ਕੱਟ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by anuragchhalotre
Madhya Pradesh
23-03-2019 08:27 PM
अमरुद केपेड़ को चार से पांच साल तक फल लगना शुरू हो जाता है, इसमें आपको कुछ डालने की जरुरत नहीं है आप बस इसमें 4 किलो वर्मी कम्पोस्ट डाल दे, धन्यवाद

Posted by Davinder singh
Haryana
23-03-2019 08:23 PM
उसे आप Liquid Dozliv 500ml 50ml-50ml सुबह शाम दें इसके साथ आप Bolus Aptikuq 2 गोलियां रोजाना दें और 5 दिन तक दें

Posted by Lawlesh singh
Bihar
23-03-2019 08:17 PM
Lawlesh singh जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें

Posted by lokender singh ranawat
Rajasthan
23-03-2019 08:16 PM
सुअर की सबसे अच्छी मार्कीट दिल्ली और आसाम में धीमापुर में इसकी बहुत अच्छी मार्कीट है इसमें अच्छा रेट मिल जाता है

Posted by lokender singh ranawat
Rajasthan
23-03-2019 08:12 PM
लोकेन्दर सिंह रानावत जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप मनीष वासुदेव 9417652857 से संपर्क करें

Posted by ਹੈਪੀ ਡੰਡੋਆ
Punjab
23-03-2019 07:59 PM
ਜੇਕਰ ਫਲ ਡਿਗ ਰਿਹਾ ਹੈ ਤਾਂ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਉੱਪਰ planofix 4 ਮਿਲੀਲੀਟਰ ਨੂੰ 15 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਉੱਪਰ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਇਹ ਸਪਰੇ ਫਲ ਝੜਨ ਤੋਂ ਰੋਕਦੀ ਹੈ I

Posted by khushwinder singh
Punjab
23-03-2019 07:57 PM
khuswinder ji jekar allua de pate peele paine shuru ho gaye han ta isnu pani nahi laya ja sakda isde uper tuc M-45@400gm nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo. dhanwad

Posted by Arnab
Punjab
23-03-2019 07:55 PM
Arnab जी कृपया हमें विस्तार से बताएं कि आपकी फसल कौन से कीट का हमला हैं ताकि हम आपको उस हिसाब से जानकारी प्रदान कर सकें धन्यवाद

Posted by jagroop singh
Punjab
23-03-2019 07:51 PM
ਪਹਿਲਾਂ ਉਸ ਦੀ ਬੱਚੇਦਾਨੀ ਵਿਚ Utrawin-OZ ਦੀ ਦਵਾਈ 60ml 3 ਦਿਨ ਭਰਾਉ ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ Bolus Flukired DS 6gm ਦਿਉ Powder Agrimen super 1kg 50gm ਰੋਜਾਨਾ Bolus Minotas 7x3 ਡੱਬੀਆ 1 ਗੋਲੀ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਉ, ਫਿਰ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆਉਣ ਤੇ ਟੀਕਾ ਭਰਵਾਂ ਕੇ ਉਸ ਨੂੰ Powder Prag Stay gold 600gm 2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਦਿਉ.

Posted by Gurprit singh
Punjab
23-03-2019 07:49 PM
ਖੁੰਬ ਦਾ ਬੀਜ ਤੁਸੀ ਆਪਣੇ ਨੇੜੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਤੋਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by Deepak
Punjab
23-03-2019 07:45 PM
deepak ji cheeku nu 4-5 saal tak fal lagna shuru hunda hai. isnu tuc vermi compost pao jisde nal isnu sare tat mil jange ate isde nave leaf v banne shuru ho jande han. dhanwad

Posted by harman
Punjab
23-03-2019 07:22 PM
mungi da new seed TMB 37 hai. isda ostn jhaad 4.9q/acre hai.

Posted by Manpreet Singh
Punjab
23-03-2019 07:22 PM
ਜਿਆਨ ਲੈਣ ਦੇ ਲਈ ਇਸ ਨੰਬਰ ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰੋ Navroop Singh Gill 9649038200

Posted by Rakesh
Chattisgarh
23-03-2019 07:18 PM
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है व्यापारिक खेती के लिए कम उपजाऊ भूमि का प्रयोग अरंडी की खेती के लिए किया जाता है पर यह गहरी, अच्छे निकास वाली, उपजाऊ, हल्की तेजाबी रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5 से 8.5 होनी चाहिए इसके लिए आप किस्मे जैसे GCH 7,D.C.... (Read More)
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है व्यापारिक खेती के लिए कम उपजाऊ भूमि का प्रयोग अरंडी की खेती के लिए किया जाता है पर यह गहरी, अच्छे निकास वाली, उपजाऊ, हल्की तेजाबी रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5 से 8.5 होनी चाहिए इसके लिए आप किस्मे जैसे GCH 7,D.C.S 9 (Jyoti),R.H.C 1,G.C.H 5,G.C.H 4 की बिजाई कर सकते है गर्मियों में खेत की तीन से चार बार गहरी जोताई करें इससे नदीनों को खत्म करने और मिट्टी में नमी रखने में मदद मिलेगी डलियों को तोड़ने के लिए जोताई के बाद तवियों से जोताई करें फिर मिट्टी के स्तर अरंडी को पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो अरंडी की खेती के लिए जुलाई के दूसरे सप्ताह से लेकर अगस्त का पहला सप्ताह उपयुक्त होता है को समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा रह सके फासला किस्म और बिजाई के समय पर आधारित होता है सिंचित हालातों में 90सैं.मी.x60 सैं.मी. या 120 सैं.मी.x 60 सैं.मी.फासले का प्रयोग करें जब कि बारानी हालातों में 60 सैं.मी.x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को ज्यादा गहराई में बोने से परहेज़ करें इन्हें 5 सैं.मी. की गहराई में बोयें इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है बीज की मात्रा बिजाई के ढंग पर आधारित होती है यदि बीजों को हल के पीछे डालना है तो ज्यादा बीजों की मात्रा 4.5 से 6 किलोग्राम प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है यदि गड्ढा खोदकर बिजाई की जाए तो 2.5 से 3.3 किलोग्राम प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है बरानी क्षेत्रों के लिए : नाइट्रोजन 16 किलो (यूरिया 35 किलो), फासफोरस 8 किलो (एस एस पी 50 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची यूरिया की आधी मात्रा को बिजाई के 30 दिनों के बाद डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए : नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बीजों को बोने से पहले डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बिजाई के बाद 35वें और 90वें दिन डालें तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए बीज बोने से पहले सल्फर 16 किलो प्रति एकड़ में डालें अरंडी की पूरी फसल को 17-20 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई दें पहली सिंचाई बिजाई के बाद 60-75 दिनों के बाद करें पौधों में फूल निकलने के समय पानी की कमी ना होने दें पकने की अवस्था में सिंचाई बंद कर दें शुरूआती अवस्था में नदीनों की रोकथाम बहुत महत्तवपूर्ण है बिजाई के 20वें और 50वें दिन बाद हाथों से दो बार गोडाई करें बिजाई के दूसरे और तीसरे दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 250 लीटर पानी में मिलाकर डालें यह घास और चौड़े पत्तों वाले नदीनों को रोकने में सहायक होगा किस्म के आधार पर फसल 145-180 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जब एक या दो फल सूखते या पीले होते दिखाई दें, तो अरंडी की गुच्छों में कटाई शुरू करें सभी गुच्छे समान समय पर नहीं पकते इसलिए दो-तीन तुड़ाइयां आवश्यक हैं तुड़ाई के बाद गुच्छों को धूप में चार से पांच दिन सुखाएं अच्छी तरह से सूखने के बाद बीजों को अलग कर लें फलों की जल्दी कटाई ना करें इससे तेल की प्रतिशतता कम हो जाती है, धन्यवाद

Posted by gopy
Punjab
23-03-2019 06:56 PM
gopi ji kirpa karke apna swal vistar nal pucho ke tuc kehdi kheti de bre jankari laina chahunde ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake. dhanwad
Posted by ਬੇਅੰਤ ਸਿੰਘ
Punjab
23-03-2019 06:47 PM
isde lai tuci Liquid Tic-Tac 2ml per 1 litter pani vich mix karka lao ji, baki saff safai da dyan rkho ji .

Posted by Amrinder
Punjab
23-03-2019 06:44 PM
ਐਲੋਵੀਰਾ ਦੀ ਵਰਤੋ ਆਯੂਰਵੈਦਿਕ ਦਵਾਈਆਂ ਵਿੱਚ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅੱਜਕਲ ਕਈ ਨੇਸ਼ਨਲ ਅਤੇ ਇੰਟਰ ਨੇਸ਼ਨਲ ਕੰਪਨਿਆ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋ ਚਿਕਤਸਾ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸੁੰਦਰਤਾ ਉਤਪਾਦ ਜਿਵੇਂ ਫੇਸਵਾਸ ਕਰੀਮ ,ਸ਼ੇੰਪੂ , ਦੰਤ ਪੇਸਟ ਹੋਰ ਕਈ ਸਾਰੇ ਪ੍ਰੋਡਕਟਸ ਵਿੱਚ ਇਸਦਾ ਇਤੇਮਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਵੇਸੇ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਅਨੁਪਜਾਊ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱ.... (Read More)
ਐਲੋਵੀਰਾ ਦੀ ਵਰਤੋ ਆਯੂਰਵੈਦਿਕ ਦਵਾਈਆਂ ਵਿੱਚ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅੱਜਕਲ ਕਈ ਨੇਸ਼ਨਲ ਅਤੇ ਇੰਟਰ ਨੇਸ਼ਨਲ ਕੰਪਨਿਆ ਇਸਦੀ ਵਰਤੋ ਚਿਕਤਸਾ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਸੁੰਦਰਤਾ ਉਤਪਾਦ ਜਿਵੇਂ ਫੇਸਵਾਸ ਕਰੀਮ ,ਸ਼ੇੰਪੂ , ਦੰਤ ਪੇਸਟ ਹੋਰ ਕਈ ਸਾਰੇ ਪ੍ਰੋਡਕਟਸ ਵਿੱਚ ਇਸਦਾ ਇਤੇਮਾਲ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਵੇਸੇ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਵੀ ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਅਨੁਪਜਾਊ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਉਗ ਜਾਂਦੇ ਹੈ ਬਸ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇੱਕ ਗੱਲ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਹੈ ਕੀ ਪੋਦਾ ਜਿਆਦਾ ਪਾਣੀ ਵਾਲੀ (ਸੇਮ) ਅਤੇ ਪਾਲਾ ਪੈਣ ਵਾਲੀ ਜਗ੍ਹਾ ਉੱਤੇ ਨਹੀ ਲਗਾਉਣਾ ਹੈ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਤੇ ਰੇਤਲੇ ਵਾਹਨ ਵਿਚ ਲਾਉਣ ਲਈ ਇਹ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਫ਼ਸਲ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਦੀ 2 ਵਾਰ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਵਾਹ ਕੇ ਉਸ ਵਿਚ ਪ੍ਰਤੀ ਹੇਕਟਰ 10 ਤੋਂ 20 ਟਨ ਦੇ ਵਿੱਚ ਪੁਰਾਣੀ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ ਨਾਲ ਵਿੱਚ 120 ਕਿੱਲੋਗ੍ਰਾਮ ਯੂਰੀਆ + 150 ਕਿੱਲੋਗ੍ਰਾਮ ਫਾਸਫੋਰਸ + 30 ਕਿੱਲੋਗ੍ਰਾਮ ਪੋਟਾਸ਼ ਇਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸਮਾਨ ਰੂਪ ਨਾਲ ਬਖੇਰ ਦੇਵੋ ਫਿਰ ਇੱਕ ਵਾਰ ਹੱਲਕੀ ਵਹਾਈ ਤੇ ਕਰਾਹੇ ਨਾਲ ਵਾਹਨ ਨੂੰ ਪੱਧਰਾ ਕਰ ਲਾਓ ਫਿਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ 50×50 ਸੇਮੀ . ਦੀ ਦੁਰੀ ਉੱਤੇ ਵੱਟਾਂ ਬਣਾ ਲਾਓ ਪੌਦੇ ਦੀ ਰੋਪਾਈ ਅਤੇ ਸਾਂਭ ਸੰਭਾਲ ਪੌਦੇ ਦੀ ਰੋਪਾਈ ਕਿਸੇ ਵੀ ਸਮੇ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਰ ਚੰਗੀ ਉਪਜ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਜੂਨ-ਜੁਲਾਈ ਜਾਂ ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ ਦੇ ਵਿੱਚ ਕਰ ਸੱਕਦੇ ਹੋਂ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੀ ਰੋਪਾਈ ਵੱਟਾਂ ਉੱਤੇ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਹ ਪੌਦੇ ਕਿਸੇ ਪੁਰਾਣੇ ਐਲੋਵੇਰਾ ਫਾਰਮ ਜਾ ਨਰਸਰੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ ਅਸਲ ਵਿਚ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੇ ਇਕ ਵੱਡੇ ਪੌਦੇ ਦੇ ਨਾਲ ਛੋਟੇ ਛੋਟੇ 3-2 ਪਤੀਆਂ ਵਾਲੇ ਅਲੋਵੇਰਾ ਦੇ ਪੌਦੇ ਉੱਗ ਆਉਂਦੇ ਹਨ ਇਹੀ ਪੌਦੇ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਪਨੀਰੀ ਤੋਰ ਤੇ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਇਸ ਵਿਧੀ ਨੂੰ ਰੂਟ ਸ਼ੱਕਰ(ROOT SUCKER) ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਚੰਗੀ ਉਪਜ ਲਈ ਕਿਸਮਾਂ ਸਿਮ – ਸਿਤਲ, L 1 , 2 , 5 ਅਤੇ 49 ਲਗਾਓ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਜੈਲ੍ਹ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਜਿਅਾਦਾ ਪਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋ ਇਲਾਵਾ ਨੈਸ਼ਨਲ ਬੋਟਨੀਕਲ ਅਤੇ ਪਲਾਂਟ ਜੈਨੇਟਿਕ ਰਿਸੋਰਸ, ਆਈ.ਸੀ.ਏ.ਆਰ. ਦੁਆਰਾ ਰਿਲੀਜ਼ ਕੀਤੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ IC111271, IC111269, IC111280 ਆਦਿ ਹਨ ਵੱਟਾਂ ਉੱਤੇ 50 & 50 ਸੇਮੀ ਦੀ ਦੂਰੀ ਉੱਤੇ ਬੂਟੀਆਂ ਨੂੰ ਲਗਾਓ ਬੂਟੇ ਤੋਂ ਬੂਟੇ ਦੀ ਦੂਰੀ 50 ਸੇਮੀ ਰੱਖਣ ਉੱਤੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ 15000 ਬੂਟੀਆਂ ਦੀ ਲੋੜ ਰੋਪਾਈ ਲਈ ਹੋਵੇਗੀ ਸਿਚਾਈ ਸਾਲ ਭਰ ਵਿੱਚ ਇਸਨੂੰ ਸਿਰਫ 4 ਜਾਂ 5 ਵਾਰ ਸਿਚਾਈ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਸਿਚਾਈ ਲਈ ਡਰੀਪ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਚੰਗੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਇਸਤੋਂ ਇਸਦੀ ਉਪਜ ਵਿੱਚ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਗਰਮੀ ਦੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ 25 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਵਿੱਚ ਸਿਚਾਈ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕੀੜੇ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀਆ ਵੇਸੇ ਤਾਂ ਇਸ ਫਸਲ ਉੱਤੇ ਕੋਈ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਕੀਟ ਅਤੇ ਰੋਗਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਨਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਰ ਕੀਤੇ-ਕੀਤੇ ਤਾਣੇ ਦੇ ਸੜਨ ਅਤੇ ਪੱਤੀਆਂ ਉੱਤੇ ਦਾਗ ਵਾਲੀ ਬੀਮਾਰਿਆ ਦਾ ਅਸਰ ਵੇਖਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜੋ ਇੱਕ ਉੱਲੀ ਰੋਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਉਸਦੇ ਉਪਚਾਰ ਲਈ ਮੇਂੰਕੋਜੇਬ 3 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਲਿਟਰ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਛਿਡਕਾਵ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦੀ ਕਟਾਈ ਇਹ ਫਸਲ ਇੱਕ ਸਾਲ ਬਾਅਦ ਕੱਟਣ ਲਾਇਕ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਕਟਾਈ ਦੇ ਦੋਰਾਨ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੇਠਲੀ ਠੋਸ 3 ਜਾਂ 4 ਪੱਤਾਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਕਰੋ ਉਸਦੇ ਬਾਅਦ ਲੱਗਭੱਗ ਇੱਕ ਮਹੀਨੇ ਦੇ ਬਾਅਦ ਉਸ ਨਾਲ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਪੱਤੀਆਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਕਦੇ ਵੀ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਨਵੀਂ ਨਾਜਕ ਪੱਤੀਆਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਨਾ ਕਰੋ ਕਟੇ ਹੋਏ ਪਤੀਆਂ ਵਿੱਚ ਫਿਰ ਨਾਲ ਨਵੀਂ ਪੱਤੀਆ ਬਣਨੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪ੍ਰਤੀ ਹੇਕਟਰ 50 ਤੋਂ 60 ਟਨ ਤਾਜੀ ਪੱਤੀਆ ਪ੍ਰਤੀ ਸਾਲ ਮਿਲ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਦੂਜੇ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 15 ਤੋਂ 20 ਫ਼ੀਸਦੀ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀਆਂ ਪੱਤੀਆਂ ਦੀ ਅਨੁਮਾਨਿਤ ਕੀਮਤ 3 ਤੋਂ 6 ਰੂਪਏ ਕਿੱਲੋ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇੱਕ ਤੰਦੁਰੁਸਤ ਪੌਦੇ ਤੋਂ ਇਕ ਸਾਲ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 3-4 ਕਿੱਲੋ ਪੱਤੀਆ ਲਈਆਂ ਜਾ ਸਕਦੀਆਂ ਹਨ ਇਸ ਤਰਾਂ ਇਕ ਸਾਲ ਵਿਚ ਇਕ ਏਕੜ ਵਿਚੋਂ 1.5 ਤੋਂ 3 ਲੱਖ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਐਲੋਵੇਰਾ ਦਾ ਵਰਤੋ ਤੰਦੁਰੁਸਤ ਪੱਤੀਆਂ ਦੀ ਕਟਾਈ ਦੇ ਬਾਅਦ ਸਾਫ਼ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਧੋ ਕੇ ਪੱਤੀਆਂ ਦੇ ਹੇਠਲੇ ਹਿੱਸੇ ਵਿੱਚ ਬਲੇਡ ਜਾਂ ਚਾਕੂ ਨਾਲ ਕਟ ਲਗਾ ਕੇ ਥੋੜ੍ਹੇ ਸਮਾਂ ਲਈ ਛੱਡ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਪਿੱਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਗਾਡਾ ਚਿਪਚਿਪਾ ਰਸ ( ਜੇਲ੍ਹ ) ਨਿਕਲਦਾ ਹੈ ਉਸਨੂੰ ਇੱਕ ਟੈਂਕ ਵਿੱਚ ਇੱਕਠਾ ਕਰਕੇ ਇਸ ਰਸ ਨੂੰ ਸੁਖਾ ਲਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਸੁੱਕੇ ਹੋਏ ਰਸ ਨੂੰ ਵੱਖ ਵੱਖ ਢੰਗ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਵੱਖ ਵੱਖ ਨਾਮਾਂ ਨਾਲ ਜਾਣਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਕੀ ਸਕੋਤਰਾ , ਕੇਪ.. ਜਦੋ ਫਸਲ ਪੂਰੀ ਤਰਾਂ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਵੇ ਅਤੇ ਉਸਦੀ ਕਟਾਈ ਕਰ ਲਈ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਸਬਜੀ ਮੰਡੀ ਵਿੱਚ ਸਿੱਧੇ ਤੌਰ ਤੇ ਵੇਚ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਖੁਦ ਮੰਡੀ ਵਿੱਚ ਵੇਚਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਅੰਦਾਜਨ 5 ਤੋਂ 10 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿੱਲੋ ਤੱਕ ਮੁੱਲ ਮਿਲ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਕਿਸੇ ਕੰਪਨੀ ਨਾਲ ਕੋਨਟ੍ਰੈਕਟ ਕਰਦੇ ਹੋ ਤਾਂ ਇਸਦਾ ਰੇਟ ਉਸ ਕੰਪਨੀ ਦੀ ਲੋੜ ਅਤੇ ਸ਼ਰਤਾਂ ਦੇ ਮੁਤਾਬਿਕ ਉਸ ਕੰਪਨੀ ਦੁਆਰਾ ਹੀ ਤੈਅ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਮੁੱਲ ਤੁਹਾਡੀ ਉਹਨਾਂ ਨਾਲ ਡੀਲਿੰਗ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ jekar tuc alovera da farm visit krna chaunde ho tan iss no. te sampark kr skde ho. HIMMAT SINGH 9914444442 GIDDARBAHA, PUNJAB.

Posted by ashwani kumar maurya
Uttar Pradesh
23-03-2019 06:38 PM
लीची के पौधे को सही फल 4 साल के बाद आना शुरू होगा इसे आप तीन से चार किल्लो वर्मी कम्पोस्ट डालें, धन्यवाद

Posted by swinder singh
Punjab
23-03-2019 06:35 PM
Swinder ji eh kisam de bare poori jankari layi research chal rahi hai jive hi isde bare poori jankari mildi hai tuahnu is bare poori jankari diti jayegi.dhanwad

Posted by chamkaur Dhaliwal
Punjab
23-03-2019 06:30 PM
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕੁੱਜ ਖੁੰਬਾ ਸਰਦੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਅਤੇ ਕੁੱਜ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਲਗਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਇਕ ਖੁੰਬ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਲਗ ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *.... (Read More)
ਖੁੰਬਾ ਦੀਆ ਕਿਸਮਾਂ ਕਈ ਤਰਾਂ ਦੀਆ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਬਟਨ ਖੁੰਬ, ਢੀਂਗਰੀ, ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ, ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਅਤੇ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ ਕੁੱਜ ਖੁੰਬਾ ਸਰਦੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਅਤੇ ਕੁੱਜ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿਚ ਲਗਾਈਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਹਰ ਇਕ ਖੁੰਬ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਲਗ ਅਲਗ ਹੈ ਜਿਵੇ *ਬਟਨ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਸਤੰਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 2 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਢੀਂਗਰੀ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਤਕ ਹੈ ਇਸ ਸਮੇ ਵਿੱਚ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 3 ਫ਼ਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * * ਸ਼ਟਾਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਅੱਧ ਫਰਵਰੀ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ ਇਕ ਫ਼ਸਲ ਹੀ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * *ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਅਗਸਤ ਤਕ ਹੈ ਆਪਾ ਇਸ ਤੋਂ 4 ਫਸਲਾਂ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਾਂ * ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਤਕ ਹੈ ਤੁਸੀ ਹੁਣ ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਿਚ ਪਰਾਲੀ ਜਾ ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪਰਾਲੀ ਖੁੰਬ ਦੇ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਪਰਾਲੀ,ਬੀਜ,ਬਾਂਸ, ਸੇਬਾ ਆਦਿ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ *ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲੇ*-- ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਾਲੀ ਦੇ 1-1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਪੂਲੇ ਦੋਨੋ ਸਿਰਿਆ ਤੋਂ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਤਿਆਰ ਕੀਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਪੂਲੇ ਦੇ ਸਿਰੇ ਕਟ ਕ ਇਕ ਬਰਾਬਰ ਕਰ ਲਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਕਿਆਰੀ ਲਗਾਉਣਾ*---ਪਰਾਲੀ ਦੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਸਾਫ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 16-20 ਘੰਟੇ ਲਈ ਡਬੋ ਦਇਓ ਗਿਲੇ ਪੂਲਿਆ ਨੂੰ ਢਲਾਨ ਤੇ ਰੱਖ ਕੇ ਵਾਧੂ ਪਾਣੀ ਨਿਕਲਣ ਦਇਓ ਕਮਰੇ ਚ ਇੱਟਾਂ ਤੇ ਬਾਂਸ ਦਾ ਇਕ ਢਕਵਾ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਬਣਾਓ ਇਸ ਪਲੇਟਫਾਰਮ ਤੇ 5 ਪੂਲਿਆ ਦੀ ਇਕ ਤਹਿ ਲਗਾਓ ਜਿਸ ਉਪਰ ਲਗਭਗ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾਓ ਇਸ ਤੋਂ ਉਪਰ ਵਾਲੀ ਤਹਿ ਉਲਟ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ 5-5 ਪੂਲਿਆ ਦੀਆ 4 ਤਹਿਆ ਵਿਚ 300 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪਾ ਕ ਇਕ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਉਪਰ 2 ਪੂਲੇ ਖੋਲ ਕੇ ਰੱਖ ਦਿਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*---ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 7-9 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਲਗ ਪੈਂਦੀਆਂ ਹਨ *ਪਾਣੀ ਤੇ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ*-- ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2 ਦਿਨ ਬਾਅਦ ਹਰ ਰੋਜ ਪਾਣੀ ਦਾ ਛਿੜਕਾਅ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਖੁੰਬਾਂ ਫੁਟਣ ਉਪਰੰਤ ਹਵਾ ਦਾ ਸੰਚਾਰ 6-8 ਘੰਟੇ ਪ੍ਰਤੀ ਦਿਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ * ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਖੁੰਬਾਂ ਫੁੱਟਣ ਉਪਰੰਤ 1-2 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ **ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ** ਮਿਲਕੀ ਖੁੰਬ ਲਈ ਤੂੜੀ ,ਬੀਜ ,ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ(12×16),ਸੇਬਾ,ਕੇਸਿੰਗ, ਮਿਟੀ ਆਦਿ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ *ਤੂੜੀ ਦੀ ਤਿਆਰੀ*--ਸੁਕੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ 16-20 ਘੰਟੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਗਿਲਾ ਕਰੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਬੋਰੀ ਵਿਚ ਭਰ ਕੇ ਸੇਬੇ ਨਾਲ਼ ਬੰਨ ਦਇਓ ਇਸ ਬੋਰੀ ਨੂੰ ਉਬਲਦੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ 45-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਰੱਖੋ ਤੂੜੀ ਨੂੰ ਕੱਢ ਕੇ ਪੱਕੇ ਫ਼ਰਸ਼ ਤੇ ਵਿਛਾ ਕੇ ਠੰਡਾ ਕਰ ਲਓ ਇਹ ਤੂੜੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ *ਬਿਜਾਈ*--- ਠੰਡੀ ਤੂੜੀ ਵਿਚ ਬੀਜ ਰਲਾ ਕੇ ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਭਰ ਦਇਓ 1 ਮੋਮੀ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿਚ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਗਿਲੀ ਤੂੜੀ ਅਤੇ 70-80 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਲਿਫਾਫੇ ਦੇ ਮੂੰਹ ਨੂੰ ਸੇਬੇ ਨਾਲ ਬੰਨ ਕੇ ਕਮਰੇ ਵਿਚ ਰੱਖ ਦਇਓ *ਕੇਸਿੰਗ*--ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਲਿਫਾਫੇ ਖੋਲ ਕੇ ਕੇਸਿੰਗ ਦੀ 1-1.5 ਦੀ ਤਹਿ ਲਗਾ ਦਇਓ ਕੇਸਿੰਗ ਵਿਚ ਰੂੜੀ ਤੇ ਰੇਤਲੀ ਮਿਟੀ(4:1) ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜੋ ਕ 24 ਘੰਟਿਆ ਲਈ 4% ਫਾਰਮਲੇਨ ਦੇ ਘੋਲ਼ ਨਾਲ ਜੀਵਣੁ ਰਹਿਤ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ *ਖੁੰਬਾਂ ਦਾ ਫੁੱਟਣਾ*-- ਕੇਸਿੰਗ ਮਿਟੀ ਪਾਉਣ ਤੋਂ ਲਗਭਗ 2 ਹਫਤਿਆਂ ਵਿਚ ਖੁੰਬਾਂ ਦੇ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਕਿਣਕੇ ਨਿਕਲਣੇ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੋ ਕ 4-5 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਤੋੜਨ ਯੋਗ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ *ਖੁੰਬਾਂ ਦੀ ਤੁੜਾਈ*-- ਲਗਭਗ 35 -40 ਦਿਨਾਂ ਤਕ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by sudhanshu verma
Uttar Pradesh
23-03-2019 06:25 PM
हाथों से लगातार गोडाई करें और पहली कटाई के बाद खेत को नदीन मुक्त करें नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें

Posted by Rishipal
Haryana
23-03-2019 06:21 PM
मोरिंगा की खेती के लिए मिटटी की pH 6.5-8 होनी चाहिए इसका प्रति एकड़ 210 ग्राम एकर के हिसाब से बीज की जरुरत होती है इसकी किस्मे PKM1, PKm2 की बिजाई कर सकते है पौधों को 1.2x1.2 मीटर के फैसले पर बीजा जाता है इसके बारे में और जानकारी के लिए आप यह वीडियो देख सकते है धन्यवाद
https://www.youtube.com/watch?v=LVAu26wqPxM
Posted by agyapal singh gill
Punjab
23-03-2019 06:12 PM
ਜਰਮਨ ਸ਼ੈਫਰਡ ਕੁੱਤਾ ਲੈਣ ਲਈ ਤੁਸੀ 9464920807 ਨੰਬਰ ਤੇ ਲੱਖਾਂ ਜੀ ਨਾਲ ਗੱਲ ਕਰੋ ਇਹ ਬਠਿੰਡਾ ਤੋਂ ਹਨ
Posted by manjeet singh
Punjab
23-03-2019 06:08 PM
manjeet ji kanak da season april mahine tak chalda hai.dhanwad

Posted by Chetan
Rajasthan
23-03-2019 06:01 PM
चेतन जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए मनीष वासुदेव जी से 9417652857 पर संपर्क करें
Posted by ਬੇਅੰਤ ਸਿੰਘ
Punjab
23-03-2019 05:56 PM
ਸ੍ਰੀਮਾਨ ਜੀ ਖੱਟੀ ਲਸੀ ਅਤੇ ਪਾਥੀਆਂ ਦੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਅਲਗ ਅਲਗ ਹੀ ਕਰੋ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਸਪਰੇਅ ਅਲਗ ਅਲਗ ਕਰਨ ਨਾਲ ਜਿਆਦਾ ਅਸਰ ਮਿਲਦਾ ਹੈ ਇਕੱਠਾ ਸਪਰੇਅ ਕਰਨ ਨਾਲ ਇਹਨਾਂ ਦਾ ਅਸਰ ਘੱਟ ਜਾਂਦਾ ਹੈ

Posted by Chetan
Rajasthan
23-03-2019 05:56 PM
Chetan g pearl farming ke bare mein puri jankari ke lia aap Manish Vasudev 9417652857 se samparak kare.
Posted by agyapal singh gill
Punjab
23-03-2019 05:56 PM
Agyapal ji Poultry di Contract farming lai tusi Salil Sood 9781017711 nal samparak kar sakde ho.
Posted by ਰਾਜ ਸਿੰਘ
Punjab
23-03-2019 05:55 PM
tuci uss nu Mifex botal 450ml IV lgwao , iss nu slow lgana hai , baki uss nu Injection Xnil 1gm, Injection Megludyne 20ml, Isoflude 5ml, Nerokind injection 15ml lgwao , ehh sare (IM) 3 din lgwao ji , iss nal farak paa jawega ..
Posted by agyapal singh gill
Punjab
23-03-2019 05:55 PM

Posted by SAURABH Nilkanthrao Polade
Maharashtra
23-03-2019 05:51 PM
Exotics birds farming ke bare me puri jankari ke liye aap YASH FARMS: WHATS APP : 0091-98409-67894 se samparak kare.
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