
Posted by yadwinder
Punjab
24-03-2019 07:55 PM
hanji pili kungi karan kanak de jhadd te (8-20%)takk asr painda hai.
Posted by Gurwinder Singh Virk
Punjab
24-03-2019 07:54 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Agrimin super powder 100gm ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Minotas bolus ਰੋਜਾਨਾ 1 ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਅਤੇ 21 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਜਲਦੀ ਹੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇਗੀ

Posted by pawan
Punjab
24-03-2019 07:53 PM
बिजाई से पहले बीज को 25-50 पी पी एम जिबरैलिक एसिड और 25 पी पी एम बोरोन में 24 घंटे के लिए भिगायें कीटों से बचाने के आप इसे chlorpyriphos @4ml को प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचार करें

Posted by pawan
Punjab
24-03-2019 07:48 PM
Pawan g karele mein soondi hai to ess mein aap Chloropyriphos 20% 1 liter ko mitti mein mila ke broadcast kr skte ho...

Posted by amritpal singh
Punjab
24-03-2019 07:47 PM
Amritpal ji same same te alag alag sanda te subsidy schemes chaldia hi rehdia han kirpa karke tusi eh daso ke tusi eh daso ke tusi kehra sand (machine) khridna hai ta jo tuhanu puri jankari diti ja sake. Dhanwad.

Posted by raja ram
Uttar Pradesh
24-03-2019 07:46 PM
राजा राम जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें

Posted by virpal singh
Punjab
24-03-2019 07:44 PM
Virpal singh ji ehh Hester Biosciences Limited da product hai ehh tuci Fast-M de name to v pta kr skde ho, ehh homeopathic store ton mill jawegi ji.

Posted by Rajnish kumar
Bihar
24-03-2019 07:40 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें

Posted by amritpal singh
Punjab
24-03-2019 07:40 PM
amritpal singh ji tusi jekar sariya sharta puriya karde ho to hun v eh scheme de form char sakde ho. chon zabta lagan karke pese aje late oonge. par tusi apna form bhar sakde ho.
Posted by Ranjeet singh
Punjab
24-03-2019 07:39 PM
ਰਣਜੀਤ ਜੀ ਤੁਸੀ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦੇ ਤੋਰ ਤੇ Calcimust gold liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Enerboost ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੀ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵਧਿਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ
Posted by Ravi Yadav
Maharashtra
24-03-2019 07:35 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें

Posted by Rajnesh
Haryana
24-03-2019 07:32 PM
आप भैंस को अब सरसों का तेल दे सकते है इसे आप 100 मि.ली. रोजाना दे सकते है यह आप उसके दाने में मिलाकर दे सकते है और आप कुल 5 लीटर तक पिला सकते है इसके साथ बच्चेदानी में चिकनाहट पैदा होती है और दूध में भी फायदा होता है
Posted by ਸੁਖਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
24-03-2019 07:25 PM
ਮਿਰਚ ਦੀ ਖੇਤੀ ਆਮ ਫਸਲਾਂ ਨਾਲੋਂ ਹੱਟ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਖੇਤੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਨਰਸਰੀ ਅਕਤੂਬਰ-ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀਆਂ ਕਈ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ CH 1, CH 3, CH 27, Punjab Sindhuri, Punjab Tej, Punjab Surkh, Pusa Jwala, Arka, Sweta ਆਦਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਕਿਸਮਾ.... (Read More)
ਮਿਰਚ ਦੀ ਖੇਤੀ ਆਮ ਫਸਲਾਂ ਨਾਲੋਂ ਹੱਟ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਖੇਤੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਨਰਸਰੀ ਅਕਤੂਬਰ-ਨਵੰਬਰ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਲਗਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਫਰਵਰੀ-ਮਾਰਚ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਮੁੱਖ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਲਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਲਈ 200 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਲਈ ਵਰਤਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੀਆਂ ਕਈ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ CH 1, CH 3, CH 27, Punjab Sindhuri, Punjab Tej, Punjab Surkh, Pusa Jwala, Arka, Sweta ਆਦਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਕਿਸਮਾਂ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 75-100 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Posted by Ashish Kumar yadav
Uttar Pradesh
24-03-2019 07:15 PM
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है व्यापारिक खेती के लिए कम उपजाऊ भूमि का प्रयोग अरंडी की खेती के लिए किया जाता है पर यह गहरी, अच्छे निकास वाली, उपजाऊ, हल्की तेजाबी रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5 से 8.5 होनी चाहिए इसके लिए आप किस्मे जैसे GCH 7,D.C.... (Read More)
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है व्यापारिक खेती के लिए कम उपजाऊ भूमि का प्रयोग अरंडी की खेती के लिए किया जाता है पर यह गहरी, अच्छे निकास वाली, उपजाऊ, हल्की तेजाबी रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5 से 8.5 होनी चाहिए इसके लिए आप किस्मे जैसे GCH 7,D.C.S 9 (Jyoti),R.H.C 1,G.C.H 5,G.C.H 4 की बिजाई कर सकते है गर्मियों में खेत की तीन से चार बार गहरी जोताई करें इससे नदीनों को खत्म करने और मिट्टी में नमी रखने में मदद मिलेगी डलियों को तोड़ने के लिए जोताई के बाद तवियों से जोताई करें फिर मिट्टी के स्तर अरंडी को पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो अरंडी की खेती के लिए जुलाई के दूसरे सप्ताह से लेकर अगस्त का पहला सप्ताह उपयुक्त होता है को समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा रह सके फासला किस्म और बिजाई के समय पर आधारित होता है सिंचित हालातों में 90सैं.मी.x60 सैं.मी. या 120 सैं.मी.x 60 सैं.मी.फासले का प्रयोग करें जब कि बारानी हालातों में 60 सैं.मी.x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को ज्यादा गहराई में बोने से परहेज़ करें इन्हें 5 सैं.मी. की गहराई में बोयें इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है बीज की मात्रा बिजाई के ढंग पर आधारित होती है यदि बीजों को हल के पीछे डालना है तो ज्यादा बीजों की मात्रा 4.5 से 6 किलोग्राम प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है यदि गड्ढा खोदकर बिजाई की जाए तो 2.5 से 3.3 किलोग्राम प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है बरानी क्षेत्रों के लिए : नाइट्रोजन 16 किलो (यूरिया 35 किलो), फासफोरस 8 किलो (एस एस पी 50 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची यूरिया की आधी मात्रा को बिजाई के 30 दिनों के बाद डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए : नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बीजों को बोने से पहले डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बिजाई के बाद 35वें और 90वें दिन डालें तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए बीज बोने से पहले सल्फर 16 किलो प्रति एकड़ में डालें अरंडी की पूरी फसल को 17-20 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई दें पहली सिंचाई बिजाई के बाद 60-75 दिनों के बाद करें पौधों में फूल निकलने के समय पानी की कमी ना होने दें पकने की अवस्था में सिंचाई बंद कर दें शुरूआती अवस्था में नदीनों की रोकथाम बहुत महत्तवपूर्ण है बिजाई के 20वें और 50वें दिन बाद हाथों से दो बार गोडाई करें बिजाई के दूसरे और तीसरे दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 250 लीटर पानी में मिलाकर डालें यह घास और चौड़े पत्तों वाले नदीनों को रोकने में सहायक होगा किस्म के आधार पर फसल 145-180 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जब एक या दो फल सूखते या पीले होते दिखाई दें, तो अरंडी की गुच्छों में कटाई शुरू करें सभी गुच्छे समान समय पर नहीं पकते इसलिए दो-तीन तुड़ाइयां आवश्यक हैं तुड़ाई के बाद गुच्छों को धूप में चार से पांच दिन सुखाएं अच्छी तरह से सूखने के बाद बीजों को अलग कर लें फलों की जल्दी कटाई ना करें इससे तेल की प्रतिशतता कम हो जाती है इसकी मार्केटिंग आप इसका तेल बना कर कर सकते है, धन्यवाद

Posted by Iqbaljit Singh
Punjab
24-03-2019 07:09 PM
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਵੈਸੇ ਹੀ ਚਾਰੇ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਸਿੱਧੀ ਵੀ ਕਿਸੀ ਬਰਤਨ ਵਿਚ ਖਵਾ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀ ਰੋਜਾਨਾ 1-1.5 ਕਿਲੋ ਇਕ ਟਾਈਮ ਦੀ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

Posted by satinderjit kaur
Punjab
24-03-2019 07:06 PM
satinder kaur ji aloevera di contract farming hundi hai jo kise private company nal kiti jandi hai. isda profit ate kharcha contract de hisab nal hi hunda hai. dhanwad
Posted by Bikram jeet singh
Punjab
24-03-2019 06:55 PM
ਬਿਕਰਮ ਜੀ ਮੌਸਮ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਹਫਤੇ ਵਿਚ ਮੌਸਮ ਸਾਫ ਰਹੇਗਾ ਤੁਸੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Bikram jeet singh
Punjab
24-03-2019 06:50 PM
ਧਾਰ ਪੋਲੀ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀ ਮੱਝ ਨੂੰ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਰਾਬ ਖੰਡ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਚ 4-5 ਨਿਬੂ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ , ਇਸ ਤਰਾ ਤੁਸੀ ਲਗਾਤਾਰ 6 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿਓ ,ਇਸ ਨਾਲ ਧਾਰ ਨਰਮ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ..

Posted by simarjeet singh
Punjab
24-03-2019 06:40 PM
Bakria di deworming lai tuci Outer-F bolus de skde ho , tuci ehh photo dekh skde ho ate ohna de weight de hisab nal goli deo ji.

Posted by Ramesh
Uttar Pradesh
24-03-2019 06:37 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे लाल रेतली मिट्टी से तटीय रेतली और लेटराइट मिट्टी में उगाया जाता है यह अच्छे निकास वाली गहरी रेतली दोमट और हल्की तेजाबी मिट्टी में अच्छे परिणाम देती है भारी चिकनी और अत्याधिक खारी और क्षारीय मिट्टी में काजू की खेती ना करें मिट्टी की पी एच 8.0 से अधिक नहीं होनी चाहिए प्रसिद्ध कि.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों जैसे लाल रेतली मिट्टी से तटीय रेतली और लेटराइट मिट्टी में उगाया जाता है यह अच्छे निकास वाली गहरी रेतली दोमट और हल्की तेजाबी मिट्टी में अच्छे परिणाम देती है भारी चिकनी और अत्याधिक खारी और क्षारीय मिट्टी में काजू की खेती ना करें मिट्टी की पी एच 8.0 से अधिक नहीं होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Selection 1: इसकी औसतन उपज 10 किलो प्रति वृक्ष है इसके फल का औसतन भार लगभग 7.6 ग्राम और गिरियों का औसतन भार लगभग 2.2 ग्राम होता है Selection 2: इसकी औसतन उपज 9 किलो प्रति वृक्ष है इसके फल का औसतन भार लगभग 9.2 ग्राम और गिरियों का औसतन भार लगभग 2.5 ग्राम होता है Ullal 1: इसकी औसतन उपज 16 किलो प्रति वृक्ष एकड़ है इसके फल का औसतन भार लगभग 6.7 ग्राम और गिरियों का औसतन भार लगभग 2.1 ग्राम होता है Ullal 2: इसकी औसतन उपज 9 किलो प्रति वृक्ष है इसके फल का औसतन भार लगभग 6.0 ग्राम और गिरियों का औसतन भार लगभग 1.8 ग्राम होता है Ullal 3: इसकी औसतन उपज 14.7 किलो प्रति वृक्ष है इसके फल का औसतन भार लगभग 7.0 ग्राम और गिरियों का औसतन भार लगभग 2.0 ग्राम होता है काजू की खेती के लिए अच्छी तरह से तैयार और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है खेत की तैयारी मॉनसून का मौसम शुरू होने से पहले करें बिजाई मई महीने में की जाती है अनउपजाऊ मिट्टी में 7.5मीटर x 7.5 मीटर और गहरी उपजाऊ मिट्टी में 10 मीटर x 10 मीटर फासले का प्रयोग करें प्रति एकड़ भूमि में बिजाई के लिए 250 ग्राफ्ट किए पौधों का प्रयोग करें अंकुरण प्रतिशतता बढ़ाने के लिए बिजाई से पहले बीजों को 18-24 घंटे के लिए पानी में भिगोयें अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन 750 ग्राम, फास्फोरस 325 ग्राम और पोटाश 750 ग्राम प्रति एकड़ में डाली जानी चाहिए
इस फसल के लिए तुपका सिंचाई उपयुक्त है काजू की उपज बढ़ाने के लिए प्रत्येक पखवाड़े में 200 लीटर पानी प्रति वृक्ष में डालें नदीनों की बढ़ती संख्या के अनुसार, जून - जुलाई और सितंबर - अक्तूबर महीने में हाथों से या रासायनिक तरीके से गोडाई करें जुलाई के शुरू में और फिर 2 महीने के अंतराल पर पैराकुएट 160 ग्राम प्रति एकड़ में डालें या जून - जुलाई महीने में ग्लाईफोसेट 350 ग्राम प्रति एकड़ में डालें बिजाई के 3 वर्ष बाद तुड़ाई करनी शुरू करें और 10 वर्ष के वृक्ष में पूरी उपज प्राप्त की जा सकती है यह फसल अगले 20 वर्षों तक नियमित उपज देती है फलों की हाथों से तुड़ाई की जाती है और फिर छिल्के से अलग किया जाता है और फिर 2-3 दिनों के लिए धूप में सुखाया जाता है सुखाने के बाद इन्हें स्टोर किया जाता है इसकी औसतन उपज 3 किलो प्रति वृक्ष प्रति वर्ष होती है

Posted by Jasdev Singh Sra
Punjab
24-03-2019 06:15 PM
Jasdev singh g tuhade fon di screen de khabbe hath ton jo option nikalde hnn othe ja ke refer friend de option te select kr ke othe tuhanu code mil jawega...

Posted by Gurjant singh
Punjab
24-03-2019 06:05 PM
tusi eh audio suno ji.
Posted by Amandeep singh
Punjab
24-03-2019 05:54 PM
Amandeep g jekar tuc knak vich fertilizer ja nutrients di dose poori and proper time te payi hai tn daane da size apne aap hi changa hovega. Jekar spray krni hai NPK 13.O.45 ja 00.52.34 di spray 10-15% nisare te kr skde ho.Bt jekar hun daane di formation start ho gyi hai tn hun spray krn da benefit nhi milega.
Posted by Amarjeet
Punjab
24-03-2019 05:54 PM
Amarjit singh g kirpa kr ke apna swaal vistaar nal pucho tan jo tuhanu iss di poori jankari ditti ja ske..

Posted by Surinder Singh
Punjab
24-03-2019 05:45 PM
ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਵੱਢਣ ਤੋਂ 25 ਦਿਨ ਪਹਿਲਾਂ ਪਾਣੀ ਲਗਾਉਣ ਬੰਦ ਕਰ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਹੁਣ ਪਾਣੀ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਖੇਤ ਵਿਚ ਨਮੀ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ਼ ਪਾਣੀ ਲਗਾਓ

Posted by avnishkumar
Uttar Pradesh
24-03-2019 05:43 PM
आप उसे कारगिल कंपनी की DRY COW फीड दे सकते है या फिर ओर किसी कंपनी की दे सकते है जो आपके नज़दीक में उपलब्ध हो इसे 2 किलो रोजाना दे सकते है इसके साथ आप विटामिन—एच 10 मि.ली. रोजाना दें.

Posted by davinder
Punjab
24-03-2019 05:39 PM
davinder ji bargari gud to bhupinder singh ji da contact number 9463400098 hai ji.

Posted by Hardeep Sohi
Punjab
24-03-2019 05:37 PM
ਇਹ ਗਰਮ ਮੌਸਮ ਦੀ ਫਸਲ ਹੈ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹੀ-ਬੂਟੀਆਂ ਵਾਲੀ ਸਲਾਨਾ ਵੇਲ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਕਈ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਰੇਤਲੀ ਦੋਮਟ ਤੋਂ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਚੱਪਣ ਕੱਦੂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਉਪਯੋਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਚੱਪਣ ਕੱਦੂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 5.5-6.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ:- Punjab Chappan Kadoo-1: ਇਹ ਕਿਸਮ 1982 ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ ਇਹ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਬਿਜਾਈ .... (Read More)
ਇਹ ਗਰਮ ਮੌਸਮ ਦੀ ਫਸਲ ਹੈ ਅਤੇ ਜੜ੍ਹੀ-ਬੂਟੀਆਂ ਵਾਲੀ ਸਲਾਨਾ ਵੇਲ ਹੈ ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਕਈ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਰੇਤਲੀ ਦੋਮਟ ਤੋਂ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਚੱਪਣ ਕੱਦੂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਉਪਯੋਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਚੱਪਣ ਕੱਦੂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 5.5-6.5 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕਿਸਮਾਂ:- Punjab Chappan Kadoo-1: ਇਹ ਕਿਸਮ 1982 ਵਿੱਚ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸੀ ਇਹ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 60 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਬਾਅਦ ਤੁੜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਕਿਸਮ ਦੇ ਪੱਤੇ ਸੰਘਣੇ ਅਤੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਫਲ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਡਿਸਕ ਅਕਾਰ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੱਤਿਆਂ ਦੇ ਥੱਲੇ ਧੱਬਿਆਂ ਦੀ ਪ੍ਰਤੀਰੋਧਕ ਅਤੇ ਵਿਸ਼ਾਣੂ ਰੋਗ, ਲਾਲ ਭੂੰਡੀ ਅਤੇ ਪੱਤਿਆਂ ਤੇ ਸਫੈਦ ਧੱਬਿਆਂ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਫਲਾਂ ਦੀ ਔਸਤਨ ਪੈਦਾਵਾਰ 95 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਚੱਪਣ ਕੱਦੂ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਵਧੀਆ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਭੁਰਭੁਰਾ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਲਈ 2-3 ਵਹਾਈਆ ਕਰੋ ਇਸਤੋਂ ਬਾਅਦ ਹੈਰੋ ਨਾਲ ਵਹਾਈ ਕਰੋ 2 ਮੀਟਰ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ 15 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘੀਆਂ ਖਾਲੀਆਂ ਬਣਾਓ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਮੱਧ ਜਨਵਰੀ ਤੋਂ ਮਾਰਚ ਅਤੇ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਦਾ ਮਹੀਨਾ ਸਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਹਰ ਜਗ੍ਹਾ ਵਿੱਚ ਦੋ ਬੀਜ ਬੀਜੋ ਅਤੇ 45 ਸੈ.ਮੀ. ਫਾਸਲੇ ‘ਤੇ ਬੀਜੋ ਬੀਜ ਨੂੰ 2.5-3.5 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਟੋਆ ਪੁੱਟ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਬੈੱਡ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਨਾਲ ਗਲੀ ਹੋਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 15 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 40 ਕਿਲੋ ( ਯੂਰੀਆ 90 ਕਿਲੋ), ਫਾਸਫੋਰਸ 20 ਕਿਲੋ ( ਐਸ ਐਸ ਪੀ 125 ਕਿਲੋ), ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 15 ਕਿਲੋ ( ਮਿਊਰੇਟ ਆਫ ਪੋਟਾਸ਼) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਅੱਧੀ ਮਾਤਰਾ ਅਤੇ ਫਾਸਫੋਰਸ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ ਦੀ ਪੂਰੀ ਮਾਤਰਾ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਮੇ ਪਾਓ ਬਾਕੀ ਬਚੀ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਨੂੰ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਇੱਕ ਮਹੀਨਾ ਬਾਅਦ ਫਸਲ ਉੱਪਰ ਪਾਓ ਜਾਂ ਟਾੱਪ ਡ੍ਰੈਸਿੰਗ ਕਰੋ ਬੀਜ ਨੂੰ ਬੀਜਣ ਦੇ ਬਾਅਦ ਤੁਰੰਤ ਸਿੰਚਾਈ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਫਿਰ ਮੌਸਮ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ 6-7 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਤੇ ਲਗਾਤਾਰ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਇਸ ਫਸਲ ਨੂੰ ਕੁੱਲ 9-10 ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਦੇ ਲਈ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਨਦੀਨਾਂ ਦੇ ਵਾਧੇ ਨੂੰ ਰੋਕਣ ਲਈ 2 ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਪੌਦਿਆਂ ਦੀ ਗੋਡੀ ਕਰਦੇ ਰਹੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 60-80 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਬਾਅਦ ਕਿਸਮ ਅਤੇ ਮੌਸਮ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਕਰੋ ਫਲ ਬਣਨ ਦੇ 7 ਦਿਨਾਂ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤੁੜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੁੜਾਈ 2-3 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਫਾਸਲੇ ਤੇ ਕੀਤੀ ਜਾਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ

Posted by Kumar Jyoti
Bihar
24-03-2019 05:31 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें

Posted by Raja Sidhu
Punjab
24-03-2019 05:30 PM
ਉਸ ਦੀ ਚਮੜੀ ਤੇ ਤਾਰੇਮੀਰਾ ਦਾ ਤੇਲ ਦੀ ਮਾਲਿਸ਼ ਕਰੋ ਤੇ Liquid Butox 2ml ਇਕ ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪਸ਼ੂ ਤੇ ਛਿੜਕਾਅ ਕਰੋ

Posted by JP SHARMA
Jammu & Kashmir
24-03-2019 05:28 PM
JP sharma ji you can get the information and training about KVK jammu.Address :- R.S.Pura, Jammu, Karan Bagh, Jammu and Kashmir 180010
Phone: 072980 04582
Posted by dinesh Barmaiya
Madhya Pradesh
24-03-2019 05:16 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें

Posted by Shri Ram Prajapat
Rajasthan
24-03-2019 05:15 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें

Posted by kulwant
Punjab
24-03-2019 05:11 PM
mohali vich dairy di traning lain layi tusi eh address te contact karo. eh tohanu next traning di date das denge te fees bare v puri jankaro de denge.Dairy Dev. Officer ,Dairy Training & Extension Centre, Vill. Chatamli,PO Kalewal,DIstt. Ropar, Sh. Kuldip Singh
98557-32565,0160-2660300
Posted by dinesh Barmaiya
Madhya Pradesh
24-03-2019 05:10 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें

Posted by ਨਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
24-03-2019 04:47 PM
ਨਰਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਜੀ ਤੁਸੀ ਮੱਝ ਦਾ ਬੁਖਾਰ ਚੈੱਕ ਕਰਵਾਓ ਜੀ , ਜੇਕਰ ਬੁਖਾਰ ਹੈ ਤਾਂ ਨਜ਼ਦੀਕੀ ਡਾਕਟਰ ਤੋਂ ਚੈੱਕ ਕਰਵਾਓ ਜੀ , ਜੇਕਰ ਨਹੀਂ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ Livoferrol liquid 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ Enerdyna 100ml ਰੋਜਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ

Posted by Navi Dhaliwal
Punjab
24-03-2019 04:41 PM
Navi Dhaliwal ji eh tohade te nirbhar hai, tusi jekar chote bacheya to shuru karoge te income 3 year baad oni shuru hovegi jekar vaddiya goat to shuru karde ho ta income 2 year tak oni shuru ho javegi. baki kosis karo ke bakriya kise goat farm to hi layi jan aam tour te jo ajri v sale kar dinde hai ohna to na kharidiya jan kyuki bahar charan waliya bakriya farm de vich nai rehndiya .

Posted by dinesh maniramji
Gujarat
24-03-2019 04:34 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारीऔर इस की ट्रेनिंग के लिए आप Regional Research Centre, Anand ATIC, Anand Agricultural University, Anand , Gujarat Ph. & Fax: +91-2692-263699, -388001 Email: cifagujarat@gmail.com से संपर्क करें

Posted by Gurii sidhu
Punjab
24-03-2019 04:34 PM
kaali jeeri bare poori jankari ate isde beej lain layi tuc Sukhwinder Singh:- 8048075622 ji nal sampark kar sakde ho.

Posted by dinesh maniramji
Gujarat
24-03-2019 04:32 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें

Posted by Arsh Mann
Punjab
24-03-2019 04:30 PM
arsh mann ji eh fungus de karn ho reha isde suke hoye bheg nu kat ke isde uper copper oxychloride@3gm nu prati litre pani de hisab nal spray karo. dhanwad

Posted by pankaj
Punjab
24-03-2019 04:25 PM
ਤੁਸੀ Tictac ਦਵਾਈ ਨਾਲ ਮਾਲਿਸ਼ ਕਰੋ, ਇਸ ਦਵਾਈ ਨੂੰ 2 ਮਿਲੀ ਲੈ ਕੇ 1 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਘੋਲ ਕੇ ਕਿਸੀ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਲਗਾਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਬਾਕੀ ਆਸ ਪਾਸ ਵੀ ਇਸਦੀ ਸਪਰੇ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਚਾਰੇ, ਫੀਡ ਤੇ ਨਹੀਂ ਕਰਨੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸਫਾਈ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਜੀ

Posted by neel saga
Gujarat
24-03-2019 04:20 PM
इस पौधे को मिट्टी की कई किस्मों जैसे रेतली तटवर्ती से मैदानों की दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है यह पौधा जल जमाव हालातों मे खड़ा नहीं रह सकता जब इसे अच्छे जल निकास वाली दोमट से रेतली दोमट और 8.5 पी एच वाली ज़मीन में उगाया जाये तो यह अच्छे परिणाम देती है एलोवेरा उगने के लिए उपयुक्त किस्में IC111271, IC111269, IC111280, IC111273, IC111279 and IC111.... (Read More)
इस पौधे को मिट्टी की कई किस्मों जैसे रेतली तटवर्ती से मैदानों की दोमट मिट्टी में उगाया जा सकता है यह पौधा जल जमाव हालातों मे खड़ा नहीं रह सकता जब इसे अच्छे जल निकास वाली दोमट से रेतली दोमट और 8.5 पी एच वाली ज़मीन में उगाया जाये तो यह अच्छे परिणाम देती है एलोवेरा उगने के लिए उपयुक्त किस्में IC111271, IC111269, IC111280, IC111273, IC111279 and IC111267, IC111267, IC1112666, IC111280, IC111280, IC111272 और IC111277, AL-1 हैं घीकवार की जड़ें 20-30 सैं.मी. तक ही जाती हैं इसके लिए खेत को जोत कर नर्म करें आखिरी जोताई के बाद 6 टन प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें मेंड़ और खालियां बना कर 45-60 सैं.मी. के फासले पर बिजाई करें और अगर जरूरत पड़े तो सिंचाई करें गांठों को 40 या 30 सैं.मी. के फासले पर लगाएं गांठों के विकास के लिए इसकी बिजाई जुलाई-अगस्त महीने में करनी चाहिए सिंचाई वाले क्षेत्रों में इसकी बिजाई सर्दियों के महीने में भी की जाती है आमतौर पर फासला 45 सैं.मी.x40 सैं.मी. या 60 सैं.मी.x30 सैं.मी. रखा जाता है ये गांठें चार से पांच महीने पुरानी और 15 सैं.मी. की गहराई पर गड्ढों में लगानी चाहिए पौधे के प्रयोग किए जाने वाले भाग जब इसका निचला भाग पीला हो जाता है तो इसके पत्तों को काटकर एलोवीरा का जूस प्राप्त कर लिया जाता है इसका पानी या रस गर्मी के कारण वाष्पीकरण हो जाता है और फलस्वरूप् इसका रंग हल्के से गहरा भूरा हो जाता है बिजाई के लिए आम तौर पर एक एकड़ के लिए 22000 गांठों की जरूरत होती है बिजाई के लिए सेहतमंद गांठों का ही प्रयोग करें बिजाई के लिए 3-4 महीने पुरानी गांठो का प्रयोग करें, जिसके चार से पांच पत्ते हों ज़मीन की तैयारी के समय 60-80 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें नाइट्रोजन 20 किलो (44 किलो यूरिया), फासफोरस 20 किलो (125 किलो एस.एस. पी.) और पोटाश 20 किलो (34 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें खेत को साफ सुथरा और नदीन रहित रखें उचित अंतराल पर गोडाई करें एक वर्ष में मुख्यत: दो बार गोडाई करें गर्मियों और शुष्क हालातों में 2 सप्ताह के अंतराल पर सिंचाई करें बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती और सर्दियों के मौसम में पौधा ज्यादा पानी नहीं लेता इसलिए कम सिंचाई करनी चाहिए पौधे के गांठे बनने के बाद तुरंत पहली सिंचाई करें खेत में ज्यादा पानी ना लगाएं इससे फसल को नुकसान होता है याद रखें कि फसल को दोबारा पानी लगाने से पहले, खेत को सूखने दें सिंचाई खेत में अच्छी तरह दे देनी चाहिए ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाये घीकवार की फसल पकने के लिए 18-24 महीनों का समय लेती है इस फसल को साल में 4 बार लिया जा सकता है और 3-4 बार पौधों के पत्तों को काटें कटाई सुबह और शाम के समय करें यह फसल दोबारा उग पड़ती है इस लिए इसे 5 वर्षों तक लिया जा सकता है नए उखाड़े पौधे को दूसरी जगह लिजाने से पहले थोड़ा सूखने दें आमतौर पर पौधा 24-72 घंटों में सूख जाता है पर इसे शुष्क और ठंडा रखने से गलने और फफूंदी के विकास को रोका जा सकता है इसे सुखाने के लिए पक्का फर्श प्रयोग किया जा सकता है

Posted by sourav kumar
Bihar
24-03-2019 04:14 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by HaRman Gill
Punjab
24-03-2019 04:13 PM
ਮੱਖੀਆਂ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਤੁਸੀ 1ml Butox ਨੂੰ 1 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਚਮੜੀ ਤੇ ਲਾਓ ਜੀ, ਇਸ ਨਾਲ ਮੱਖੀਆਂ ਤੋਂ ਆਰਾਮ ਮਿਲੇਗਾ. ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਜਖਮ ਵਾਲੀ ਜਗ੍ਹਾ ਤੇ ਪਹਿਲਾ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਲਗਾਓ ਜੀ ਫਿਰ ਇਸ ਦਵਾਈ ਨੂੰ ਲਗਾਓ ਜੀ
Posted by daljit singh gill
Punjab
24-03-2019 04:10 PM
ਗੁਰਜੀਤ ਜੀ ਬਾਸਮਤੀ 1718, 136-138 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਝਾੜ 18-20qtl/acre ਦਿੰਦੀ ਹੈ Pusa Basmati 1121: ਇਸਦਾ ਪੌਦਾ ਲੰਬਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 137 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਕੇ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪੱਕਣ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਧੀਆਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 13.7 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ
Posted by sukhwinder
Punjab
24-03-2019 04:07 PM
sukhwinder ji kirpa karke daso ke tuc kehdi variety di bijai kiti hai ate mitti kis tra di hai ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake. dhanwad

Posted by Arsh Mann
Punjab
24-03-2019 03:55 PM
Arsh mann ji gulmohar de paudhe nu april-june tak lgaya janda hai,isde bar ehor jankari layi tuc eh video dekh sakde ho https://www.youtube.com/watch?v=n7YD3bz52Ew
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