Posted by Harjit singh
Punjab
25-03-2019 05:46 PM
ਜੇਕਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਚੀਜਾਂ ਨੂੰ ਦੇਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਞੱਛੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਆਈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ Ovulenta-kit ਦਿਓ, ਇਸ ਵਿਚ 2 ਨੀਲੀਆਂ ਅਤੇ 1 ਸਫੇਦ ਗੋਲੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਇੰਨਾਂ ਤਿੰਨਾਂ ਨੂੰ ਦਿਓ ਪਹਿਲਾ 2 ਨੀਲੀਆਂ ਇਕਠੀਆ ਕੁੱਟ ਕੇ ਰੋਟੀ ਵਿਚ ਦਿਓ ਫਿਰ 10 ਮਿੰਟ ਬਾਦ ਸਫੇਦ ਗੋਲੀ ਦਿਓ ਜੀ ਅਤੇ 5 ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ .ਜੇਕਰ ਫਿਰ ਵੀ ਹੀਟ ਵਿਚ ਨਾ ਆਵੇ ਤਾਂ ਹਫਤੇ ਬਾਦ ਦੁਬਾਰਾ ਰਪੀਟ ਕਰੋ

Posted by gurjeet Singh
Punjab
25-03-2019 05:43 PM
Gurjeet g ehna plants vich soondi ja termite da attack check kro g.

Posted by manpreet
Punjab
25-03-2019 05:40 PM
ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ Metricef-iu 2 ਦਿਨ ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਂ ਦਿਓ, ਇਹ ਦਵਾਈ ਭਰਵਾਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮੱਝ ਨੂੰ Agrimin super ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿਓ ਇਸਨੂੰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਲਗਭਗ 2 ਕਿਲੋ ਤਕ ਦੇ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ ਵੀ ਦਿਓ , ਇਸਦੀ 600 ਗ੍ਰਾਮ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੇ 2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਦੇਣੇ ਹੈ, ਫਿਰ ਜਦੋ ਮੱਝ ਹੀਟ ਵਿਚ ਆ ਜਾਵੇ ਉਸਦੀ AI ਕਰਵਾ ਦਿਓ, ਮੱਝ ਰਹਿ ਜਾਵੇਗੀ.

Posted by Baljinder Singh
Haryana
25-03-2019 05:32 PM
बलजिंदर जी आप 60 लीटर पानी में coragen@30ml का उपयोग कर सकते हैं, धन्यवाद

Posted by gurjeet Singh
Punjab
25-03-2019 05:31 PM
Gurjeet g knak vich hun hare tele nal dane da nuksaan hovega. esdi roktham lyi Actara thiamethoxam @80 gm per acre da spray kr skde ho.

Posted by Arvind pal
Uttar Pradesh
25-03-2019 05:29 PM
अकरकरा की खेती :- भूमि तथा जलवायु अच्छे जल निकासवाली सभी प्रकार की भूमि तथा उष्ण जलवायु इस पौधे के लिए उत्तम होती है पोषक तत्व तथा नमी धारण की अधिक क्षमता वाली भूमि में यह पौधा अच्छा फलता है बादल छाने से या थोड़ी छायावाली जगह पर पौधे की वृद्धि अच्छी होती है
भूमि की तैयारी यह प्रमुखः जड़ की खेती है इसलिए खेत.... (Read More)
अकरकरा की खेती :- भूमि तथा जलवायु अच्छे जल निकासवाली सभी प्रकार की भूमि तथा उष्ण जलवायु इस पौधे के लिए उत्तम होती है पोषक तत्व तथा नमी धारण की अधिक क्षमता वाली भूमि में यह पौधा अच्छा फलता है बादल छाने से या थोड़ी छायावाली जगह पर पौधे की वृद्धि अच्छी होती है
भूमि की तैयारी यह प्रमुखः जड़ की खेती है इसलिए खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए फिर मिटटी को भुरभुरी बना लेना चाहिए इसमें प्रति एकड़ 6॰7 टन कंपोष्ट खाद मिलानी चाहिए इसके बाद पाटा लगाकर खेत को समतल कर लेना चाहिए
पौधशाला पौधे तैयार करने के लिए बीजों को पौधशाला में बोया जाता है पौधशाला हेतु जून माह में 3 ग 1 मी आकार की क्यारियां तैयार करनी चाहिए प्रति एकड़ 800 ग्राम बीज बोने के लिए पर्याप्त होते हैं उन्हें 8॰10 सेमी॰ की दूरी पर कतारबद्ध 1॰2 सेमी॰ गहरे में बोना चाहिए बीज ज्यादा नीचे नहीं बोने चाहिए क्योंकि अधिक गहराई में बीज का अंकुरण नहीं होता बीज में एझोबक्टर जीवाणु लगाने से अंकुरण जल्दी होता है तथा पौधे को ब़ने में सहायता मिलती है प्रति किलोबीज हेतु 20 ग्राम जीवाणु का प्रयोग करना चाहिए क्यारियों की फुहारे क्षरा हल्की सिंचारई प्रतिदिन करते रहना चाहिए 8॰10 दिनों में अंकुरण हो जाता है पौधे की जल्दी ब़वार के लिए 20॰22 दिन बाद 2 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव करना चाहिए 45॰50 दिन में पौधे रोपाई योग्य हो जाते हैं सभी पौधे एक साथ रोपारड योग्य नहीं होते केवल बड़े पौधों को ही जो 12॰15 से॰मी॰ ऊंचाई के तथा 6॰8 पत्तियों वाले होते हैं रोपाई योग्य समझना चाहिए अतः उनकी ही रोपाई करनी चाहिए
दूसरी विधि बीजों को 3 गुणा ज्यादा गोबर की बारीक या छानी हुई खाद में जीवाणु लगाकर उस मिश्रण को बरमे द्वारा रोपाई करने से पौधों के रख रखाव में सहायता मिलती है तथा कटाई भी आसान होती है खेत में खरपतवार निकालने में भी आसानी रहती है बुवाई के समय पौधे से पौधे की दूरी 10॰15 सेमी॰ और कतार से कतार की दूरी 30 सेमी॰ रखनी चाहिए
रोपाई एवं देखभाल अगस्त माह में अच्छी तरह तैयार खेत में कतार से कतार की दूरी 45 सेमी॰ तथा पौधे से पौधे की दूरी 15 सेमी॰ रखकर रोपाई करनी चाहिए और रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करनी चाहिए रोपाई के 30॰35 दिन बाद प्रति एकड़ 15 किलो नत्रजन की मात्रा 25 किलो स्फुरद तथा 10 किलो पोटाष देना चाहिए तथा अतिरिक्त नत्रजन की मात्रा 15 किलो प्रथम मात्रा के 30 दिन बाद देनी चाहिए रासायनिक बाद की जगह पर प्रति एकड़ 40 किलो नीम की खली की खाद की प्रथम मात्रा रोपाई के पूर्व तथा 20 किलो अतिरिक्त मात्रा 20॰25 दिन बाद देने से पौधे स्वस्थ तथा अच्छे बढ़ते हैं जब पौधे छोटे होते हैं यानी रोपाई के 10॰12 दिन बाद निराई करके खरपतवार निकाल देना चाहिए अकरकरा के पौधों को छाया मिलने से इनके ऊंचा बढ़ने में मदद मिलती है अतः इसे ज्वार मक्का बाजरा सूर्यमुखी अरहर इत्यादि की फसलों की कतार के बीच बोना चाहिए
कटाई पौधे अंकुरण के 150॰160 दिन बाद जब फूल सूखने लगें तब सूखे फूलों को तोड़कर छाया में सुखाना चाहिए 3॰4 बाद की कटाई में फूल पूर्णतः निकाले जा सकते हैं फरवरी माह के बाद पौधों को उखाड़कर जड़ों को साफ करके काटकर छाया में सुखाना चाहिए जड़ें 8॰10 से॰मी॰ लंबाई की और 2॰3 से॰मी॰ मोटाई की हो जाती हैं बीज के हिसाब से सूखे हुए फूल अलग कर लेने चाहिए
पौध संरक्षण पौधे के तनों शाखाओं तथा पतितयों पर ग्रंथि एवं रोएं होने के कारण किसी कीट का प्रकोप नहीं होता केवल रूके हुए पानी या ज्यादा दिन बारिश के होते रहनेसे पत्तियों पर सफेद दाग तथा जड़ों में सड़न दिखाई देती है इसकी रोकथाम हेतु डाइथेन जेड॰78 का तथा 10॰12 दिन के बाद बेनलेट का छिड़काव करना चाहिए
उत्पादन अकरकरा की खेती से प्रति एकड़ 150॰250 किलो फूल 250॰400 किलो पंचांग तथा 80॰100 किलो जडें प्राप्त होती हैं
औषधीय उपयोग रू आयुर्वेद में अकरकरा को वातनाशक पित्तनाशक तथा शोथ नष्ट करने में श्रेष्ठ माना गया है इसका पंचांग सर्दी खांसी जुकाम वायु विकार से होने वाले सिरदर्द तथा अनिद्रा अपस्मार मिरगी दांत दर्द सूजन जोड़ों का दर्द मज्जा तंतु विकार लकवा सफेद दाग मुंह का सूखना और जुबान का जड़त्व आना इत्यादि विकारों पर उपयुक्त माना गया है अकरकरा को स्तंभनकारी तथा रतिकिरया में देर तक आनंददायी माना गया है इसकी जड़ दांतों पर मलने से दातों का दर्द दूर होता है हकलाना या जुबान लड़खड़ाती हो तो फूलों का उपयोग लाभप्रद कहा गया है इसकी पत्तियों का रस श्वेत कुष्ठ पर लाभदायी है सर्दी से सिरदर्द होता हो तो इसे मुंह में दांतों के नीचे दबा रखने से शीघ्र लाभ होता है इसमें उत्तेजक गुण काफी मात्रा में होने से आयुर्वेद ने इसे कामोत्तेजक औषधीयों में प्रधान माना है

Posted by harbhajan
Punjab
25-03-2019 05:29 PM
Harbhajan singh ji Jekar tusi solar motar lagvoni hai ta tusi mere nal 9814221784 samparak karo. Solar Pump te tuhanu Subsidy vi mil javegi. Dhanwad.

Posted by Gurjant singh
Punjab
25-03-2019 05:27 PM
Gurjant singh ji tohade question di samaj nai lagi tusi ki kehna chohnde ho ji. thoda detail nal pucho ji.

Posted by Ranjit Sohal
Punjab
25-03-2019 05:26 PM
Ranjit singh ji isde kai karan hunde hai jiwe pashu di bachedani vich infection hona, Bachedani da pura vikas na honaa, bachedani da kamjor hona, pashu vich mineral di kami, pashu nu sahi khurak na hona, pashu di sahi deworming na hona, ehna kayi karna krke pashu varr varr repeat honn jnda hai jiss krke uss nu varr varr AI krwauni pendi hai.

Posted by mahesh
Uttar Pradesh
25-03-2019 05:15 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें

Posted by vicky yadav
Uttar Pradesh
25-03-2019 05:01 PM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है, मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है .... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है, मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है
खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें
पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है
अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी
सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए
कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए
कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है
बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है

Posted by charnjit
Punjab
25-03-2019 04:44 PM
Charnjit g photo de hisab nal knak vich fungus da attack hai jiss nal patte sukk rhe han. esdi roktham lyi Tilt @200 ml per acre da spray kr skde ho..

Posted by Mandeep Singh bhathal
Punjab
25-03-2019 04:40 PM
ਮਨਦੀਪ ਜੀ Livoferrol ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦਾ ਹਾਜਮਾ ਠੀਕ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਲੀਵਰ ਵਧਿਆ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਸਾਰਾ ਖਾਣਾ ਪੀਣਾ ਹਜ਼ਮ ਕਰਦਾ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ , Sharkoferol ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਕਮਜ਼ੋਰੀ ਦੂਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ , ਪਸ਼ੂ ਵਿਚ ਤਾਕਤ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਨਾਲ ਖੂਨ ਦੀ ਕਮੀ ਵੀ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦੀ ਅਤੇ ਵਧਿਆ ਗਰੋਥ ਹੁੰਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ..
Posted by onkar Singh lehal
Punjab
25-03-2019 04:38 PM
Onkar Singh ji Gurh di jekar tusi vadia tarike nal paking kar ke market vich sale karde ho ta tusi vadia munafa le sakde ho. Is bare visthar vich jankari lai tusi mere nal 9814019470 samparak kar sakde ho.
Posted by Aman
Punjab
25-03-2019 04:31 PM
Aman g jekar tuc 22.5 cm spacing wali machine nal 45-50 kg seed per acre paya hai tn knak da yield variety de according tuhanu proper milega meand 23-25 quiental per acre yield aw skda hai.

Posted by gurpinder singh
Punjab
25-03-2019 04:16 PM
gurpinder ji khatti lassi di matra 2-3 litre nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo. eh ik tra de fungicide da kam karda hai. dhanwad

Posted by Nirvair Singh
Punjab
25-03-2019 04:14 PM
ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ Pregstay gold ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਗੱਭਣ ਰਹਿਣ ਵਿਚ ਮਦਦ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਇਸਦੇ ਨਾਲ Enerboost ਪਾਊਡਰ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ, ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਕਮਜ਼ੋਰੀ ਦੂਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ

Posted by hardeep Singh
Punjab
25-03-2019 03:57 PM
ਝੋਨੇ ਦੀਆਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕਿਸਮਾਂ:-PR-126:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਘਟ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ 123 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PR:-127 ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 137 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ PR121 ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 140 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ PR 124 ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍.... (Read More)
ਝੋਨੇ ਦੀਆਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕਿਸਮਾਂ:-PR-126:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਘਟ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ 123 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PR:-127 ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 137 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ PR121 ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 140 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ PR 124 ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 135 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਭੂਰੇ ਧੱਬੇ ਦਾ ਹਮਲਾ ਜਿਆਦਾ ਆਉਂਦਾ ਹੈ PR 122 ਇਹ ਕਿਸਮ 147 ਦਿਨ ਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਝਾੜ 31.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PR 123 ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 29 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 143 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ PR-114 ਇਹ ਕਿਸਮ ਨਿਰਯਾਤ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀਂ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 27.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ

Posted by simran Pannu
Punjab
25-03-2019 03:49 PM
Simran Pannu ਜੀ ਮੋਤੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਤੁਸੀਂ Manish Vasudev 9417652857 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Manish Litani
Haryana
25-03-2019 03:45 PM
Manish ji yeh karnal burnt nam ki bimari hai jis se Bali men daana nahi banta iske liye aap tilt@200ml ko 150 litre Pani ke hisab se spray karen.dhanywad

Posted by ਮਨਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
25-03-2019 03:44 PM
ਮਨਪ੍ਰੀਤ ਜੀ ਬੂਟੇ ਨੂੰ ਦੇਖ ਕੇ ਨਹੀਂ ਅਨੁਮਾਨ ਲਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਕੇ ਇਹ ਕਿਹੜੀ ਕਿਸਮ ਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫ਼ਲ ਆਉਣ ਤੇ ਹੀ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲਦੀ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ

Posted by Gurvinder Singh
Punjab
25-03-2019 03:18 PM
ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਝੋਨੇ ਦੇ ਕੀੜੇ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਬਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਐੱਪ ਵਿਚ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਸੈਕਸ਼ਨ ਵਿਚ ਜਾ ਕੇ ਅਨਾਜ ਵਾਲਿਆਂ ਫ਼ਸਲਾਂ ਵਿਚ ਝੋਨੇ ਦੀ ਫ਼ਸਲ ਤੇ ਕ੍ਲਿਕ ਕਰੋ, ਫ਼ਸਲ ਦੀ ਪੂਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੁਓਥੇ ਮਿਲ ਜਾਏਗੀ ਕੀੜੇ ਅਤੇ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਲਈ ਪੌਦੇ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਵਿਚ ਜਾਓ ਅਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਾਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲ ਜਾਏਗੀ, ਧੰਨਵਾਦ

Posted by khushwinder singh
Punjab
25-03-2019 03:16 PM
ਖੁਸ਼ਵਿੰਦਰ ਜੀ ਕਰੇਲੇ ਨੂੰ ਤਾਰਾਂ ਉਪਰ ਲਗਾਓਗੇ ਤਾ ਇਸਦਾ ਫ਼ਲ ਵਧੀਆ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਜਮੀਨ ਤੇ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ ਤਾ ਇਸਨੂੰ ਗਾਲਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਤਾਰਾਂ ਦੇ ਉਪਰ ਹੀ ਲਗਾਓ, ਧੰਨਵਾਦ
Posted by gurlal
Punjab
25-03-2019 03:06 PM
Gurlal g knak di harvesting to 25 din pehla pani lgouna band kr dena chaida hai g.ess lyi tuc apne khet di condition de hisab nal pani lgao.

Posted by Kaushlesh Tiwari
Uttar Pradesh
25-03-2019 03:04 PM
कौशलेश जी अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में होते हैं करेले की खेती के लिए उपयुक्त है मिट्टी की पी एच 6.5-7.5 करेले की खेती के लिए सबसे अच्छी रहती है करेले की Pusa Do Mousami: यह गर्मियों के साथ साथ खरीफ के मौसम के लिए उपयुक्त किस्म है इसके फल मध्यम, लंबे और हरे रंग के होते हैं यह किस्म ब.... (Read More)
कौशलेश जी अच्छे जल निकास वाली रेतली दोमट मिट्टी, जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में होते हैं करेले की खेती के लिए उपयुक्त है मिट्टी की पी एच 6.5-7.5 करेले की खेती के लिए सबसे अच्छी रहती है करेले की Pusa Do Mousami: यह गर्मियों के साथ साथ खरीफ के मौसम के लिए उपयुक्त किस्म है इसके फल मध्यम, लंबे और हरे रंग के होते हैं यह किस्म बिजाई के 55 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है Pusa Vishesh: इसके फल हरे, पतले और मध्यम आकार के होते हैं इसकी औसतन पैदावार 48-52 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Arka Harit: इसके फल चमकदार हरे रंग के होते हैं यह किस्म बिजाई के 120 दिनों के बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसके फल कम बीज वाले होते हैं और कम कड़वे होते हैं इसकी औसतन पैदावार 52 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Harit: इसके फल गहरे हरे रंग के होते हैं यह किस्म बिजाई के 50 दिनों के बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Kashi Urvashi: इस किस्म के फल सीधे और हरे रंग के होते हैं यह किस्म बिजाई के 60 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 120 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Priya: इसके फल लगभग 40 सैं.मी. लंबे होते हैं यह किस्म बिजाई के 60 दिनों के बाद पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है Kalyanpur Baramansi: इस किस्म के फल हल्के हरे रंग के 30-50 सैं.मी. लंबे होते हैं यह किस्म बारिश के मौसम में खेती के लिए उपयुक्त होती है Faijabadi: यह स्थानीय किस्म है इसके फल लंबे, मध्यम आकार के और गहरे हरे रंग के होते हैं Pant Karela 1: इसके फल मोटे होते हैं यह 55 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है इसकी औसतन पैदावार 60 क्विंटल प्रति एकड़ होती है Pusa Hybrid 2: इसके फल मध्यम लंबे, मोटे और चमकदार हरे होते हैं, लगा सकते हैं करेले की खेती के लिए अच्छे तरह से तैयार ज़मीन की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक 2-3 जोताई करें गर्मियों के मौसम में, बिजाई के लिए फरवरी से मार्च और खरीफ के मौसम के लिए, जून से जुलाई का महीना उपयुक्त होता है पहाड़ी क्षेत्रों में, मार्च से अप्रैल में बिजाई पूरी कर लें कतार से कतार में 2.0-2.5 मीटर और पौधे से पौधे में 40-50 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बैड के दोनों ओर बीज को बोयें प्रत्येक गड्ढे में दो से तीन बीज बोयें 3-5 सैं.मी. की गहराई पर बीज बोयें बिजाई के लिए डिबलिंग विधि का प्रयोग करें एक एकड़ में बिजाई के लिए 2-2.4 किलो बीज का प्रयोग करें Kalyanpur Baramansi के लिए 1.2-1.6 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें करेले की फसल को अच्छी तरह से गले हुए गाय का गोबर 8-10 टन, नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 24 किलो (एस एस पी 150 किलो) और पोटाश 24 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें गाय का गोबर, पोटाश और फासफोरस की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा बीज की बिजाई के दो से तीन सप्ताह पहले डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो बराबर भागों में बांटे पहला भाग बिजाई के 25-30 दिन बाद डालें और दूसरा भाग बिजाई के 40-50 दिन के बाद डालें बारिश के मौसम में, फसल को सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है यदि जरूरत पड़े तो बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई करें मिट्टी में जल जमाव की स्थिति ना होने दें पानी के निकास का उचित प्रबंध करें गर्मियों के मौसम में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें मई जून के महीने में 4-5 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें नदीनों की रोकथाम के लिए हाथों से गोडाई करें 2-3 गोडाई पौधे की शुरूआती वृद्धि के समय करनी चाहिए खादों की मात्रा डालने के समय मिट्टी में गोडाई की प्रक्रिया करें और मुख्यत बारिश के मौसम में मिट्टी चढ़ाएं मौसम और फसल की किस्म के आधार पर फसल 55-60 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है 2-3 दिनों के अंतराल पर फलों की तुड़ाई करें

Posted by khushwinder singh
Punjab
25-03-2019 02:54 PM
khushwinder ji ghiya tori diyan vela nu jekar uper chdaunde ho ta isnu fal vadia lagda hai jekar neeche dharti te rehndi hai fal jyada galda hai jekar meeh aa jaye fer isda fal adha reh janda hai. dhanwad

Posted by praveen
Uttar Pradesh
25-03-2019 02:54 PM
प्रवीन जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें
Posted by sukhwinder
Punjab
25-03-2019 02:45 PM
isdi roktham de layi tilt@200ml nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo.

Posted by जितेन्द्र
Bihar
25-03-2019 02:21 PM
जीतेन्द्र जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछे के आप क्या जानकारी लेना चाहते है ता की आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by ਵਿਰਕ
Punjab
25-03-2019 02:20 PM
hnji goat farming jekar karna hai ta eh nal sareya tareekeya nal fieda ho janda hai. jado apne link ban jan ta os time bache age sale ho jande hun. beetal breed di marketing vadiya hai. bakreed de same goat sale ho jandiya hun. tusi beetal da milk v sale kjar sakde ho. ehde milk da rate cow de milk de brabar ml janda hai. tusi jado shuru karoge te holi holi breed, meat te milk tino kamm laye ja sakde hun fir hi fieda hai. jekar vaddiya goat na shuru karoge ta 2 year baad sare kamma vicho income oni shuru ho jandi hai.

Posted by Kamlash Banskar
Madhya Pradesh
25-03-2019 02:16 PM
स्टीविया को हनी प्लांट के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह स्वाद में मीठा होता है यह एक प्राकृतिक स्वीटनर होता है जो कि शूगर के मरीजों को उनके शरीर में इंसुलन की मात्रा को संतुलित रखता है यह मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है इसे रेतली दोमट से दोमट मिट्टी जिसमें जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो और अ.... (Read More)
स्टीविया को हनी प्लांट के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह स्वाद में मीठा होता है यह एक प्राकृतिक स्वीटनर होता है जो कि शूगर के मरीजों को उनके शरीर में इंसुलन की मात्रा को संतुलित रखता है यह मिट्टी की व्यापक किस्मों में उगाया जा सकता है इसे रेतली दोमट से दोमट मिट्टी जिसमें जैविक तत्वों की उच्च मात्रा हो और अच्छे जल निकास वाली हो, में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है खारी मिट्टी में खेती करने से परहेज करें क्योंकि यह स्टीविया के लिए हानिकारक होती है पौधे के विकास के लिए मिट्टी का pH 6-8 होना चाहिए MDS -14 और MDS-13स्टीविया की किस्में हैं स्टीविया की खेती के लिए, अच्छी तरह से तैयार खेत की आवश्यकता होती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक, खेत की 2-3 बार जोताई करें जोताई के समय मिट्टी में ट्राइकोडरमा अच्छे से मिलायें और आखिरी जोताई के समय रूड़ी की खाद मिट्टी में अच्छे से मिलायें स्टीविया की रोपाई तैयार बैडों पर की जाती है इसकी बिजाई के लिए फरवरी से मार्च का समय उचित होता है नए पौधों में 18 इंच का फासला और पंक्ति के बीच का फासला 20-24 इंच रखें स्टीविया के बीजों को 6-8 सप्ताह तक कंटेनरों के भीतर बोया जाता है बिजाई के बाद बैडों को मिट्टी से ढक दें मिट्टी में नमी रखने के लिए पानी देते रहें झाड़ियों के बढ़िया विकास के लिए रोपाई से पहले पौधे के शिखर को काट दें
पौधों की रोपाई 60 सैं.मी. चौड़े और 15 सैं.मी. ऊंचाई वाले तैयार बैडों पर की जाती है पौधे 6-8 सप्ताह में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं रोपाई से 24 घंटे पहले पौधों को पानी देना चाहिए ताकि उन्हें आसानी से बैडों में से निकाला जा सके खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद 200 क्विंटल, गाय का गोबर या मूत्र और गंडोया खाद को मिट्टी में अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 11 किलो (यूरिया 24 किलो), फासफोरस 45 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 282 किलो), पोटाश 45 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 75 किलो) प्रति एकड़ में डालें सिंगल सुपर फासफेट की पूरी मात्रा शुरूआती खुराक के तौर पर डालें नाइट्रोजन और पोटाश की मात्रा प्रति महीना 10 खुराकें दी जाती है
अधिक सूखे पत्तों कीपैदावार के लिए बोरोन और मैगनीज़ की स्प्रे करें खेत में से नदीनों को निकालने के लिए मुख्यत: हाथों से गोडाई करें रोपाई के एक महीना बाद पहली गोडाई की जाती है और फिर हर दो सप्ताह में लगातार गोडाई की जाती है नदीनों को बाहर निकालने के लिए गोडाई करें क्योंकि फसल तैयार किये बैडों पर विकास करते है और यह मजदूरों के लिए भी आसान होता है सिंचाई मुख्य रूप से फुव्वारा और ड्रिप सिंचाई द्वारा की जाती है पौधे को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती इसलिए नियमित अंतराल पर हल्की सिंचाई करें गर्मियों में, 8 दिनों के फासले पर सिंचाई करें खेत में पानी ना खड़ा होने दें यह फसल के लिए नुकसानदायक है बिजाई के बाद 3 महीने में पौधा पैदावार देना शुरू कर देता है कटाई 90 दिनों के फासले पर लगातार की जाती है इस बात का ध्यान रखें कि कटाई करते समय 5-8 सैं.मी. तने को दोबारा पनपने के लिए जमीनी स्तर पर छोड़ देना चाहिए एक वर्ष में लगभग चार बार कटाई की जाती है

Posted by Imteyaz Ahmad
Bihar
25-03-2019 02:09 PM
इम्तेयाज़ अहमद जी मेथा और मेथी दोनों एक ही है आप वानस्पतिक उद्देश्य के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर का पहला सप्ताह बिजाई के लिए अनुकूल होता है जब कि बीज उद्देश्य के लिए नवंबर का महीना बिजाई के लिए उत्तम समय होता है बीजों को पूरी धूप में बोयें कतारों में 25-30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बैड पर 3-4 सैं.... (Read More)
इम्तेयाज़ अहमद जी मेथा और मेथी दोनों एक ही है आप वानस्पतिक उद्देश्य के लिए अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से लेकर नवंबर का पहला सप्ताह बिजाई के लिए अनुकूल होता है जब कि बीज उद्देश्य के लिए नवंबर का महीना बिजाई के लिए उत्तम समय होता है बीजों को पूरी धूप में बोयें कतारों में 25-30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बैड पर 3-4 सैं.मी. की गहराई पर बीज बोयें इसकी बिजाई बुरकाव विधि द्वारा या कतारों में की जाती है इसके बीज आपको लोकल मार्किट से ही मिल जायेगे, धन्यवाद
Posted by Gurvinder Singh
Uttarakhand
25-03-2019 02:08 PM
आप गाय को Nerokind इंजेक्शन 15 मि.ली. लगवायें यह एक एक दिन के फर्क से तीन लगवायें इसके साथ आप Buffzon पाउडर 50 ग्राम रोजाना दें इससे फर्क पड़ जाएबा
Posted by Manjot singh Khattra
Punjab
25-03-2019 02:04 PM
मनजोत जी इन कीटों को नियंत्रित करने के लिए आप इमिडाक्लोप्रिड@1.5 मिली प्रति लीटर पानी का छिड़काव कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by Varinder Singh
Punjab
25-03-2019 02:02 PM
ਤੁਸੀਂ ਨਿੰਬੂ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ Punjab Baramasi,Eureka,Punjab Galgal ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 4.5×4.5 ਮੀਟਰ ਰੱਖੋ ਨਵੇਂ ਪੌਦੇ ਬੀਜਣ ਲਈ 60×60×60 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਟੋਏ ਪੁੱਟੋ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 10 ਕਿਲੋ ਅਤੇ ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 500 ਗ੍ਰਾਮ ਬਿਜਾਈ ਸਮੇਂ ਟੋਇਆਂ ਵਿੱਚ ਪਾਓ ਨਵੇਂ ਪੌਦੇ ਬੀਜਣ ਲਈ 60×60×60 ਸੈ.ਮੀ. ਦੇ ਟੋਏ ਪੁੱਟੋ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਦਾ ਉਚਿੱਤ ਸਮਾਂ ਫ਼ਰਵਰੀ ਮਾਰਚ -ਅਗਸਤ ਸਤਬਰ ਹੁੰਦਾ ਹੈ

Posted by जितेन्द्र
Bihar
25-03-2019 01:59 PM
आप गाय को potasium-iodied दवाई देनी शुरू करें इसकी 20 ग्राम की पैकिंग होती है इसे रोजाना 7 ग्राम दें इसके साथ आप Ifer-h 5ml के इंजेक्शन लगवायें इसके 3 इंजेक्शन लगवाने है इससे गांठ कम होने लगेगी फिर दूध आसानी से आने लगेगा

Posted by Kamlash Banskar
Madhya Pradesh
25-03-2019 01:57 PM
Kamlash Banskar g pearl farming ki puri jankari ke liye aap Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 se samparak kare.
Posted by ਡਾਕਟਰ ਮੇਜਰ ਸਿੰਘ ਧਾਲੀਵਾਲ
Punjab
25-03-2019 01:53 PM
ਮੇਜਰ ਸਿੰਘ ਡਾਕਟਰ ਜੀ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਘਰ ਵਿਚ ਰੱਖਣ ਲਈ ਗਾਂ ਰੱਖਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਸਾਹੀਵਾਲ ਨਸਲ ਦੀ ਗਾਂ ਨੂੰ ਰੱਖੋ , ਕਿਉਕਿ ਇਸਦਾ ਦੁੱਧ ਵੀ ਵਧਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸਦੇ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਫੈਟ ਵੀ ਵਧਿਆ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਇਸ ਨੂੰ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਵੀ ਘੱਟ ਲਗਦੀਆਂ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਗਰਮੀ ਵੀ ਘਟ ਮੰਨਦੀ ਹੈ , ਤੁਸੀ ਇਸ ਨੂੰ ਵਧਿਆ ਖੁਰਾਕ , ਵਧਿਆ ਦੇਖ ਭਾਲ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਵਧਿਆ ਦੁੱਧ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋ

Posted by jaspreet Singh
Punjab
25-03-2019 01:52 PM
ਤੁਸੀ Terramycin-LA 30ml ਲੈ ਕੇ 15-15ml ਗਰਦਨ ਦੇ ਦੋਨਾਂ ਪਾਸੇ ਲਗਵਾਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ masticare ਪਾਊਡਰ ਦਿਓ ਇਸਦਾ ਰੋਜਾਨਾ 1 ਪੋਚ ਦੇਣ ਹੈ ਅਤੇ ਮੀਠਾ ਸੋਡਾ 30 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ.

Posted by Gorasingh Gorasingh
Punjab
25-03-2019 01:42 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से बताएं कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको पूरी जानकारी दी जा सके
Posted by manpreet singh
Punjab
25-03-2019 01:41 PM
manpreet singh you can repeat deworming after 2 month .

Posted by Anmol
Punjab
25-03-2019 01:29 PM
ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਗੋਡਾਈ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਰਸਾਇਣਾ ਦੁਆਰਾ ਰੋਕਿਆਂ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ 1.6 ਲੀਟਰ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਸਿਰਫ ਨਦੀਨਾਂ ਤੇ ਹੀ ਕਰੋ , ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਤੇ ਨਾਂ ਕਰੋ

Posted by karambir
Haryana
25-03-2019 01:29 PM
श्री करमबीर जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए विनोद कुमार जी से 9050555757 पर संपर्क करें

Posted by Beant Singh
Punjab
25-03-2019 01:22 PM
ਬੇਅੰਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਹੁਣ ਤੁਸੀਂ ਖਾਲੀ ਪਈ ਜਮੀਨ ਵਿੱਚ ਮੂੰਗੀ ਦੀ ਕਾਸ਼ਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਇਸ ਲਈ ਤੁਸੀਂ TMB-37 , SML 668 ਅਤੇ SML 832 ਕਿਸਮਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ

Posted by ramesh kumar
Haryana
25-03-2019 01:00 PM
आप उसे powder Buffzon 200gm 50gm रोज़ाना दें, powder Mamidum 50gm रोज़ाना और Ovumin advance bolus रोजाना एक गोली दें और 21 दिन तक दें इससे फर्क पड़ने लग जाएगा

Posted by mohandeep singh sekhon
Punjab
25-03-2019 12:57 PM
mohandeep ji kirpa karke daso ke tuc kehde medicinal plant di jankari laina chahunde ho ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake. dhanwad
Posted by ਲਖਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ
Punjab
25-03-2019 12:57 PM
PMH 1:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ,ਬਸੰਤ ਅਤੇ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵੇਲੇ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਲੰਮੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਹੈ ਜੋ 95 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਤਣਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਜਾਮਣੀ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 21 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PMH-2:-ਇਹ ਘੱਟ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਲਈ 83 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਸੇਂਜੂ ਅਤੇ ਘੱਟ ਵਰਖਾ ਵਾਲੇ ਖੇਤ.... (Read More)
PMH 1:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਸੇਂਜੂ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਉਣੀ,ਬਸੰਤ ਅਤੇ ਗਰਮੀ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵੇਲੇ ਬੀਜੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਲੰਮੇ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਫਸਲ ਹੈ ਜੋ 95 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਤਣਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਅਤੇ ਜਾਮਣੀ ਰੰਗ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 21 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ PMH-2:-ਇਹ ਘੱਟ ਸਮੇਂ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਅਤੇ ਪੱਕਣ ਲਈ 83 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਸੇਂਜੂ ਅਤੇ ਘੱਟ ਵਰਖਾ ਵਾਲੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਈ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇਹ ਹਾਈਬ੍ਰਿਡ ਕਿਸਮ ਸੋਕੇ ਨੂੰ ਸਹਿਣਯੋਗ ਹੈ ਇਸਦੇ ਬਾਬੂ ਝੰਡੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਆਕਾਰ ਦੇ ਅਤੇ ਦਾਣੇ ਸੰਤਰੀ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤ ਝਾੜ 16.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ

Posted by mohandeep singh sekhon
Punjab
25-03-2019 12:55 PM
ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਕੀ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਤਰੀਕਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਫਸਲਾਂ ਉਗਾਉਣ ਲਈ ਰਸਾਇਣਿਕ ਖਾਦਾਂ ਜਾਂ ਕੀਟਨਾਸ਼ੀਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਵੱਧਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਖੇਤੀ ਲਈ ਪਸ਼ੂਆਂ ਅਤੇ ਫਸਲਾਂ ਦੇ ਵਿਅਰਥ ਅਤੇ ਕੁੱਝ ਬਾਇਓਫਰਟੀਲਾਈਜ਼ਰ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਵਾਤਾਵਰਨ ਅਨ.... (Read More)
ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਕੀ ਹੈ ਇਹ ਇੱਕ ਤਰੀਕਾ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਫਸਲਾਂ ਉਗਾਉਣ ਲਈ ਰਸਾਇਣਿਕ ਖਾਦਾਂ ਜਾਂ ਕੀਟਨਾਸ਼ੀਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਨਹੀਂ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਵੱਧਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦੀ ਗੁਣਵੱਤਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਵਾਧਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਖੇਤੀ ਲਈ ਪਸ਼ੂਆਂ ਅਤੇ ਫਸਲਾਂ ਦੇ ਵਿਅਰਥ ਅਤੇ ਕੁੱਝ ਬਾਇਓਫਰਟੀਲਾਈਜ਼ਰ ਵਰਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਵਾਤਾਵਰਨ ਅਨੁਕੂਲ ਵਿਧੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਨੂੰ ਘੱਟ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਕਰਦੀ ਹੈ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ਤਾਵਾਂ: • ਇਸ ਨਾਲ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਉਪਜਾਊ ਸ਼ਕਤੀ ਲੰਬੇ ਸਮੇਂ ਤੱਕ ਬਣੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਖੇਤੀ ਲਈ ਮਸ਼ੀਨਾਂ ਦੀ ਲੋੜ ਘੱਟ ਪੈਂਦੀ ਹੈ • ਇਹ ਅਸਿੱਧੇ ਢੰਗ ਨਾਲ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਮਿੱਤਰ-ਸੂਖਮਜੀਵ ਪ੍ਰਦਾਨ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜੋ ਘੁਲਣਸ਼ੀਲ ਤੱਤਾਂ ਨੂੰ ਪੌਦਿਆਂ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ ਵਰਤੋਂ ਵਿੱਚ ਲਿਆਉਂਦੇ ਹਨ • ਇਸ ਕੁਦਰਤੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਦੀ ਕਮੀ ਪੂਰੀ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਨੂੰ ਬਾਰ-ਬਾਰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਰਸਾਇਣ ਪਾਉਣ ਦੀ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਪੈਂਦੀ ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੇ ਗੋਹੇ ਅਤੇ ਫਸਲਾਂ ਦੀ ਰਹਿੰਦ-ਖੂੰਹਦ ਨੂੰ ਮੁੜ ਵਰਤੋਂ ਵਿੱਚ ਲਿਆਂਦਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ • ਜੋ ਪਸ਼ੂ ਜੈਵਿਕ ਢੰਗ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀਆਂ ਫਸਲਾਂ ਨੂੰ ਖੁਰਾਕ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ ਵਰਤਦੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਵਧੇਰੇ ਸੰਤੁਲਿਤ ਤੱਤ ਮਿਲਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਸਿਹਤ ਵੀ ਚੰਗੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ • ਜੈਵਿਕ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਨਾਲ ਜੰਗਲੀ-ਜੀਵਨ ਅਤੇ ਕੁਦਰਤੀ ਅਵਾਸ ਵਿੱਚ ਸੁਧਾਰ ਆਉਂਦਾ ਹੈ
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