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Posted by sunil
Madhya Pradesh
28-03-2019 08:26 PM
Punjab
03-29-2019 11:20 AM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारीऔर इस की ट्रेनिंग के लिए आप Bamoriya Pearl Farm Phone: 097700 85381 से सम्पर्क करे
Posted by ishwar kumar sharma
Rajasthan
28-03-2019 08:23 PM
Punjab
03-29-2019 03:55 PM
Moti ki kheti ke bare mein puri jankari ke lia aap Manish Vasudev 9417652857 se samparak kare.
Posted by abdulgaffar
Maharashtra
28-03-2019 08:22 PM
Punjab
03-28-2019 10:31 PM
यदि भैंस का बच्चा मर गया है और वो दूध निकालने के लिए हाथ नहीं लगाने देती तो आप उसे Lactomood होमियोपेथिक दवाई दें इसकी 10—10 बूंदों को दिन में तीन बार दें या आप उसे Fast-M होमियोपेथिक दवाई दूध निकालने से आधा घंटा पहले उसकी नाक पर स्प्रे करें इससे वह दूध आराम से उतार देगी यह आप होमोपेथिक स्टोर से पता कर सकते है, इसका रिजल्ट.... (Read More)
यदि भैंस का बच्चा मर गया है और वो दूध निकालने के लिए हाथ नहीं लगाने देती तो आप उसे Lactomood होमियोपेथिक दवाई दें इसकी 10—10 बूंदों को दिन में तीन बार दें या आप उसे Fast-M होमियोपेथिक दवाई दूध निकालने से आधा घंटा पहले उसकी नाक पर स्प्रे करें इससे वह दूध आराम से उतार देगी यह आप होमोपेथिक स्टोर से पता कर सकते है, इसका रिजल्ट बढ़िया है, इसके साथ आप milkout powder 2-2 चम्मच सुबह शाम रोज़ाना देना शुरू करें, इससे फर्क पड़ जायेगा
Posted by GYANENDRA KUMAR SINGH
Uttar Pradesh
28-03-2019 08:04 PM
Punjab
03-29-2019 04:38 PM
तरबूज़ गहरी उपजाऊ और अच्छे निकास वाली मिट्टी में अच्छा उगता है यह रेतली या रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर ज्यादा पैदावार देता है पानी के घटिया निकास वाली मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं है इस फसल के लिए फसली चक्र अपनायें, क्योंकि एक ही खेत में बार-बार एक ही फसल उगाने से पोषक तत्व नष्ट होते हैं, पैदावार कम.... (Read More)
तरबूज़ गहरी उपजाऊ और अच्छे निकास वाली मिट्टी में अच्छा उगता है यह रेतली या रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर ज्यादा पैदावार देता है पानी के घटिया निकास वाली मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त नहीं है इस फसल के लिए फसली चक्र अपनायें, क्योंकि एक ही खेत में बार-बार एक ही फसल उगाने से पोषक तत्व नष्ट होते हैं, पैदावार कम होती है और बीमारियों का हमला ज्यादा होता है मिट्टी की पी एच 6-7 के बीच होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Arka Jyoti,Arka Manik,Durgapur Kesar,Durgapur Lal मिट्टी के भुरभुरा होने तक खेत की जोताई करें तरबूज़ की बिजाई सीधी भी की जा सकती है और पनीरी लगाकर भी की जा सकती है तरबूज की खेती के लिए मध्य फरवरी से मध्य मार्च का समय अनुकूल होता है इसका फासला बिजाई के अलग-अलग तरीकों पर निर्भर करता है गड्ढा विधि द्वारा कतार से कतार की दूरी 2-3.5 मी. और पौधे से पौधे में 0.6-1.2 मी. की दूरी होनी चाहिए पौधे के बीज की गहराई 2-4 सैं.मी होनी चाहिए इसकी बिजाई के अलग अलग तरीके हैं जैसे क्यारियों पर लगाना, गड्ढा खोद के लगाना, मेड़ में मौसम और ऋतु के अनुसार लगाना बीज को क्यारी के एक ओर लगाएं एक समय पर 3-4 बीज बोयें और जमाव के बाद एक सेहतमंद बूटा रखें पौधों का आपस में फासला 60-90 सैं.मी. रखें एक टोए में 4 बीज बोयें गड्ढा 60x60x60 सैं.मी. का रखें दो कतारों में फासला 2-3.5 मीटर और पौधों में फासला 0.6-1.2 मीटर रखें गड्ढों को अच्छी तरह रूड़ी और मिट्टी से भरें जमाव के बाद एक बूटा एक गड्ढे में रखें यह तरीका गड्ढे खोदने वाले तरीके जैसा ही है इस में 30x30x30 सै.मी. के गड्ढे 1-1.5 मीटर के फासले पर लगाएं दो बीज एक मेड़ पर लगाएं एक एकड़ की बिजाई के लिए 1.5 से 2 किलो बीज की जरूरत होती है बिजाई के 20-25 दिन पहले 6 टन रूड़ी की खाद खेत में डालें खेत में 20 किलो नाइट्रोजन (45 किलो यूरिया),10 किलो फासफोरस (65 किलो सिंगल सुपरफासफेट) और 10 किलो पोटाश (18 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश) प्रति एकड़ में डालें पूरी फासफोरस, पोटाश और एक तिहाई नाइट्रोजन बीज बोने के समय खेत में डालें बिजाई के 30-45 दिनों के बाद बाकी की नाइट्रोजन की दूसरी किश्त बेलों के आस पास डालें और मिट्टी में पूरी तरह मिला दें फसल के 10-15 दिन बीजने के बाद एन पी के (19:19:19) + लघु तत्व 2-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिला के स्प्रे करें फूलों को गिरने से बचाने के लिए और ज्यादा पैदावार लेने के लिए 10 प्रतिशत 3 मि.ली. हयूमिक एसिड + 5 ग्राम एम ए पी प्रति लीटर का फूल आने पर प्रयोग करें सैलीसाइलिक एसिड (एसपरिन 350 एम जी 4-5 गोलियां) प्रति 15 लीटर फूल आने पर , पकने पर 35 दिनों बाद स्प्रे करें फसल बीजने के 55 दिनों के बाद 100 ग्राम 13:00:45+25 मि.ली. हैकसाकोनाज़ोल प्रति 15 लीटर को फलों के अच्छे विकास और सफेद रोग से बचाने के लिए स्प्रे करें फल के अच्छे आकार के लिए मिठास और रंग के लिए बीजने के 65 दिनों बाद 1.5 किलो 0:0:50 प्रति एकड़ को 100 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में घोल के स्प्रे करें शुरूआत में बैडों को नदीनों से मुक्त रखें नदीनों की समय पर रोकथाम ना करने पर 30 प्रतिशत पैदावार कम हो जाती है बीजने से 15-20 दिनों के बाद गोडाई करनी चाहिए नदीनों की रोकथाम के लिए 2 या 3 गोडाई की जरूरत पड़ती है बीजों के जल्दी अंकुरण के लिए बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई करें बाकी की सिंचाई 5-7 दिनों के अंतराल पर करें फसल पकने पर जरूरत के अनुसार पानी लगाएं फसल में पानी ना खडा होने दें पानी लगाते समय मेंड़ों को गीला ना होने दें, विशेष कर फूलों और फलों को पानी ना लगने दें भारी ज़मीनों को लगातार पानी ना लगाएं ज्यादा मिठास और अच्छे स्वाद के लिए फसल काटने पर 3-6 दिन पहले पानी लगाएं जब तने के साथ वाले रेशे सूख जाएं और ज़मीन में लगा फल पीला हो जाए और फल सफेद होने लग जाए तब फल तोड़ लें फल को थप-थपाने से भद्दी सी आवाज़ देना इसके पकने की निशानी है फल को पूरा पकने के बाद ही तोड़ना चाहिए आधे पके फलों में मिठास और रंग कम होता है पके फलों को चाकू से काट लें फलों को ठंडे और नमी वाले वातावरण में रखें फल को आकार के अनुसार छांट लें और 14 दिनों के लिए 15 डिगरी सै. तापमान पर रखें तरबूज़ को सेब और केलों के साथ ना रखें इससे इसकी सुगंध मर जाती है और फल गलना शुरू हो जाता है
Posted by jaibir singh
Haryana
28-03-2019 08:03 PM
Maharashtra
03-29-2019 04:43 PM
jaibir ji kripya btaye ke ye poore khet men ho raha hai ya ek adhe paudhe pe ta ki apako iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by satendra chaudhary
Uttar Pradesh
28-03-2019 08:00 PM
Punjab
03-29-2019 03:42 PM
Motio ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Bijender Chouhan 9719994499 se samparak kare.
Posted by vishal chahar
Haryana
28-03-2019 07:41 PM
Punjab
03-29-2019 04:37 PM
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है व्यापारिक खेती के लिए कम उपजाऊ भूमि का प्रयोग अरंडी की खेती के लिए किया जाता है पर यह गहरी, अच्छे निकास वाली, उपजाऊ, हल्की तेजाबी रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5 से 8.5 होनी चाहिए इसके लिए आप किस्मे जैसे GCH 7,D.C.... (Read More)
अरंडी मुख्य रूप से इसके बीजों के लिए उगाया जाने वाला वार्षिक पौधा है व्यापारिक खेती के लिए कम उपजाऊ भूमि का प्रयोग अरंडी की खेती के लिए किया जाता है पर यह गहरी, अच्छे निकास वाली, उपजाऊ, हल्की तेजाबी रेतली दोमट मिट्टी में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है मिट्टी की पी एच 5 से 8.5 होनी चाहिए इसके लिए आप किस्मे जैसे GCH 7,D.C.S 9 (Jyoti),R.H.C 1,G.C.H 5,G.C.H 4 की बिजाई कर सकते है गर्मियों में खेत की तीन से चार बार गहरी जोताई करें इससे नदीनों को खत्म करने और मिट्टी में नमी रखने में मदद मिलेगी डलियों को तोड़ने के लिए जोताई के बाद तवियों से जोताई करें फिर मिट्टी के स्तर अरंडी को पूरे वर्ष उगाया जा सकता है, जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो अरंडी की खेती के लिए जुलाई के दूसरे सप्ताह से लेकर अगस्त का पहला सप्ताह उपयुक्त होता है को समतल करें ताकि खेत में पानी ना खड़ा रह सके फासला किस्म और बिजाई के समय पर आधारित होता है सिंचित हालातों में 90सैं.मी.x60 सैं.मी. या 120 सैं.मी.x 60 सैं.मी.फासले का प्रयोग करें जब कि बारानी हालातों में 60 सैं.मी.x45 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें बीजों को ज्यादा गहराई में बोने से परहेज़ करें इन्हें 5 सैं.मी. की गहराई में बोयें इसकी बिजाई गड्ढा खोदकर की जाती है बीज की मात्रा बिजाई के ढंग पर आधारित होती है यदि बीजों को हल के पीछे डालना है तो ज्यादा बीजों की मात्रा 4.5 से 6 किलोग्राम प्रति एकड़ में आवश्यकता होती है यदि गड्ढा खोदकर बिजाई की जाए तो 2.5 से 3.3 किलोग्राम प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है बरानी क्षेत्रों के लिए : नाइट्रोजन 16 किलो (यूरिया 35 किलो), फासफोरस 8 किलो (एस एस पी 50 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बिजाई के समय डालें बाकी बची यूरिया की आधी मात्रा को बिजाई के 30 दिनों के बाद डालें सिंचित क्षेत्रों के लिए : नाइट्रोजन 32 किलो (यूरिया 70 किलो), फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा बीजों को बोने से पहले डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बिजाई के बाद 35वें और 90वें दिन डालें तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए बीज बोने से पहले सल्फर 16 किलो प्रति एकड़ में डालें अरंडी की पूरी फसल को 17-20 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है बारिश के मौसम में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती बारिश की तीव्रता और नियमितता के आधार पर सिंचाई दें पहली सिंचाई बिजाई के बाद 60-75 दिनों के बाद करें पौधों में फूल निकलने के समय पानी की कमी ना होने दें पकने की अवस्था में सिंचाई बंद कर दें शुरूआती अवस्था में नदीनों की रोकथाम बहुत महत्तवपूर्ण है बिजाई के 20वें और 50वें दिन बाद हाथों से दो बार गोडाई करें बिजाई के दूसरे और तीसरे दिन बाद पैंडीमैथालीन 1 लीटर को 250 लीटर पानी में मिलाकर डालें यह घास और चौड़े पत्तों वाले नदीनों को रोकने में सहायक होगा किस्म के आधार पर फसल 145-180 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है जब एक या दो फल सूखते या पीले होते दिखाई दें, तो अरंडी की गुच्छों में कटाई शुरू करें सभी गुच्छे समान समय पर नहीं पकते इसलिए दो-तीन तुड़ाइयां आवश्यक हैं तुड़ाई के बाद गुच्छों को धूप में चार से पांच दिन सुखाएं अच्छी तरह से सूखने के बाद बीजों को अलग कर लें फलों की जल्दी कटाई ना करें इससे तेल की प्रतिशतता कम हो जाती है इसकी मार्केटिंग आप इसका तेल बना कर कर सकते है धन्यवाद
Posted by jagraj
Punjab
28-03-2019 07:29 PM
Punjab
03-28-2019 09:54 PM
ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਪਾਲੀਹਾਉਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅਤੇ ਖੁੱਲੇ ਖੇਤ ਦੋਨਾਂ ਜਗ੍ਹਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੂਜੇ ਫਲਾਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਜਲਦੀ ਆਮਦਨੀ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਘੱਟ ਲਾਗਤ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਮੁੱਲ ਦਾ ਫਲ ਹੈ ਇਸ ਨਾਲ ਆਇਸ ਕਰੀਮ , ਕੰਫੇਕਸ਼ਨਰੀ , ਚੂਇੰਗਮ , ਸਾਫਟ ਡਰਿੰਕ ਆਦਿ ਬਣਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਜਿਆਦਾ ਖੇਤੀ ਉੱਤਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ , ਹਿਮਾਚਲ , ਕਸ਼ਮੀਰ ਅਤੇ ਠੰਡੇ ਏਰਿਆ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਪੰਜਾਬ, ਹਰਿਆਣਾ ਵ.... (Read More)
ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਪਾਲੀਹਾਉਸ ਦੇ ਅੰਦਰ ਅਤੇ ਖੁੱਲੇ ਖੇਤ ਦੋਨਾਂ ਜਗ੍ਹਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੂਜੇ ਫਲਾਂ ਦੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਜਲਦੀ ਆਮਦਨੀ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਘੱਟ ਲਾਗਤ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਮੁੱਲ ਦਾ ਫਲ ਹੈ ਇਸ ਨਾਲ ਆਇਸ ਕਰੀਮ , ਕੰਫੇਕਸ਼ਨਰੀ , ਚੂਇੰਗਮ , ਸਾਫਟ ਡਰਿੰਕ ਆਦਿ ਬਣਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਜਿਆਦਾ ਖੇਤੀ ਉੱਤਰ ਪ੍ਰਦੇਸ਼ , ਹਿਮਾਚਲ , ਕਸ਼ਮੀਰ ਅਤੇ ਠੰਡੇ ਏਰਿਆ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਪੰਜਾਬ, ਹਰਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਕਰ ਸੱਕਦੇ ਹਾਂ ਮਿੱਟੀ : ਚੀਕਣੀ , ਬਾਲੂ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਪਾਣੀ ਦੀ ਨਿਕਾਸੀ ਵਾਲੀ ਜ਼ਮੀਨ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਲਈ ਚੰਗੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਮਿੱਟੀ ਦੀ pH 5.0 to 6.5 ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਸਹੀ ਵਾਧੇ ਲਈ ਦਿਨ ਵੇਲੇ ਤਾਪਮਾਨ 20-25°ਸੈਲਸੀਅਸ ਅਤੇ ਰਾਤ ਵੇਲੇ 7-12° ਸੈਲਸੀਅਸ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਦਾ ਕੰਮ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੋਂ ਨਵੰਬਰ ਤਕ ਕਰ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਮਲਚਿੰਗ ਵਿਧੀ ਰਾਹੀਂ ਕਿਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਨੂੰ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਟਰੈਕਟਰ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਮਲਚਿੰਗ ਮਸ਼ੀਨ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਉਤਾਰਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਚਾਰ ਫੁੱਟ ਕਿਆਰੀ ਤਿਆਰ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਡਰਿੱਪ ਲਾਈਨ ਫਿੱਟ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਬਾਅਦ ਮਸ਼ੀਨ ਦੀ ਸਹਾਇਤਾ ਨਾਲ ਕਿਆਰੀਆਂ ਉੱਤੇ ਪਲਾਸਟਿਕ ਸ਼ੀਟ ਵਿਛਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਮਲਚਿੰਗ ਲਈ ਹਲਕਾ ਅਤੇ ਲਚਕੀਲਾ ਪਦਾਰਥ ਲਵੋ ਤਾਂ ਜੋ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਬੂਟੇ ਦੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਉੱਤੇ ਅਸਰ ਨਾ ਪਵੇ ਜਿਸਨੂੰ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਦੋਨਾਂ ਪਾਸਿਆਂ ਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਦਬਾ ਦਿਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਹੁਣ ਇਸ ਸ਼ੀਟ ਵਿਚ ਮੋਰੀਆਂ ਕੱਢ ਕੇ ਉਸ ਵਿਚ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਲਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਨੀਰੀ ਲਾਉਣ ਵੇਲੇ ਜੜ ਨੂੰ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਸੇਟ ਕਰ ਦਿਓ ਜੜ ਬਹਾਰ ਰਹਿਣ ਨਾਲ ਪੌਦੇ ਦੇ ਸੁੱਕਣ ਦਾ ਖ਼ਤਰਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਜਿਆਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਅਤੇ ਠੰਡ ਤੋਂ ਬਚਨ ਲਈ ਇਸਦੇ ਊਪਰ ਛਾਂ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜੋ ਤੁਸੀਂ ਲੋ ਟਨਲ ਵਿਧੀ ਨਾਲ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਮੌਸਮ ਦਾ ਬਹੁਤ ਖਿਆਲ ਰੱਖਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਥੋੜੀ ਜਿਹੀ ਲਾਪਰਵਾਹੀ ਨਾਲ ਸਾਰੀ ਫ਼ਸਲ ਖ਼ਰਾਬ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ ਆਪਣੇ ਖੇਤ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਕਿਸਾਨ ਦਾ ਕੁੱਲ ਖਰਚਾ ਢਾਈ ਤੋ ਤਿੰਨ ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਆ ਜਾਦਾ ਹੈ ਕਿਉਕਿ ਕਿਸਾਨ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਸਾਲ ਡਰਿੱਪ ਸਿਸਟਮ ਅਤੇ ਫੁਆਰਿਆਂ ਆਦਿ ਤੇ ਵੀ ਖਰਚ ਕਰਨਾ ਪੈਦਾ ਹੈ ਪਰ ਅਗਲੇ ਸਾਲਾ ਵਿੱਚ ਕਿਸਾਨ ਦਾ ਇਹ ਖਰਚ ਬਚ ਜਾਦਾ ਹੈ ਇਸਦੇ ਲਈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ 40 ਬੈਡ ਬਣਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇੱਕ ਬੈਡ ਤੇ 1000 ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਪੌਦੇ ਲੱਗਦੇ ਹਨ ਇਸ ਤਰਾਂ ਇੱਕ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਚਾਲੀ ਹਜ਼ਾਰ ਪੌਦੇ ਲਾਏ ਜਾਦੇ ਹਨ, ਇੱਕ ਪੌਦਾ 3 ਤੋ 4 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 50 ਤੋ 60 ਕੁਇੰਟਲ ਤੱਕ ਨਿਕਲ ਆਉਦਾ ਹੈ ਖਾਦਾਂ : – 70 to 80 ਟਨ ਗੋਬਰ ਦੀ ਖਾਦ ਇੱਕ ਹੇਕਟੇਅਰ ਵਿੱਚ ਪਾਓ .ਇਹ ਖਾਦ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ ਪਾਉਣੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਫਿਰ 20 : 40 : 40 NPK KG / ਹੇਕਟੇਅਰ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਚੰਗੀ ਫਸਲ ਲਈ ਯੂਰਿਆ ਦੋ ਫ਼ੀਸਦੀ ਜ਼ਿੰਕ ਸਲਫੱਤੇ , ਅੱਧਾ ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ , ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਸਲਫੇਟ ਅੱਧਾ ਫ਼ੀਸਦੀ ਅਤੇ ਬੋਰਿਕ ਏਸਿਡ 0 . 2 ਫ਼ੀਸਦੀ ਚੰਗੀ ਫਸਲ ਲਈ ਯੋਗ ਹੈ ਸਿੰਚਾਈ : – ਸਿੰਚਾਈ ਛੇਤੀ ਛੇਤੀ ਪਰ ਹਲਕੀ ਕਰਨੀਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਆਦਾ ਪਾਣੀ ਠੀਕ ਨਹੀਂ ਹੈ ਪੱਤੇ ਗਿੱਲੇ ਨਾ ਕਰੋ ਤੁਪਕਾ ਸਿੰਚਾਈ ਨਾਲ ਘੱਟ ਪਾਣੀ ਲੱਗ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਤੁਪਕਾ ਸਚਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੇ ਤਾਂ ਕਿਆਰੀਆਂ ਦੇ ਵਿਚਾਲੇ ਪਾਣੀ ਖਾਲ ਵਿੱਚ ਹੀ ਲਗਾਓ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ – ਨਦੀਨ ਹੱਥ ਨਾਲ ਹਟਾਓ ਜਾਂ ਫਿਰ ਸਿਮਜਿਨ ਤਿੰਨ ਕਿੱਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਹੇਕਟਏਰ ਪਾਓ 300 galen ਪਾਣੀ ਦੇ ਨਾਲ ਕੀੜੇ ਮਕੋੜੇ ਅਤੇ ਦੂਜੀਆ ਬਿਮਾਰਿਆ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਰੱਖਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਕੋਈ ਪੋਦਾ ਜਿਆਦਾ ਖਰਾਬ ਹੈ ਉਹਨੂੰ ਹਟਾ ਦਿਓ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਤੁੜਵਾਈ : – ਜਦੋਂ ਫਲ ਦਾ ਰੰਗ 70% ਅਸਲੀ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਤੋੜ ਲੈਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜੇਕਰ ਮਾਰਕਿਟ ਦੂਰੀ ਉੱਤੇ ਹੈ ਤਾਂ ਥੋੜ੍ਹਾ ਸਖ਼ਤ ਹੀ ਤੋੜਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਤੁੜਵਾਈ ਵੱਖ ਵੱਖ ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਪੈਕਿੰਗ :- ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਪਲਾਸਟਿਕ ਦੀਆਂ ਪਲੇਟਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਇਸਨ੍ਹੂੰ ਹਵਾਦਾਰ ਜਗ੍ਹਾ ਉੱਤੇ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਿੱਥੇ ਤਾਪਮਾਨ ਪੰਜ ਡਿਗਰੀ ਹੋ ਇੱਕ ਦਿਨ ਦੇ ਬਾਅਦ ਸਟਰਾਬੇਰੀ ਦੀ ਪੈਕਿੰਗ ਦਾ ਤਾਪਮਾਨ ਜ਼ੀਰੋ ਡਿਗਰੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਮਾਰਕੀਟ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਔਸਤ 200 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਤੱਕ ਵਿਕਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤਰਾਂ ਪੰਜ ਲੱਖ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਤੋ ਇਸ ਦੀ ਆਮਦਨ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਕੇ ਅੱਗੇ ਆਪਣੀ ਮਿਹਨਤ ਨਾਲ ਕਿਸਾਨ ਆਮਦਨ ਵਿੱਚ ਭਰਪੂਰ ਵਾਧਾ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੇ ਪੌਦੇ ਸਤੰਬਰ ਤੋ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਲਾਏ ਜਾਦੇ ਹਨ ਅਤੇ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਦ ਇਹ ਫਲ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀ ਫਸਲ ਅਪ੍ਰੈਲ ਤੱਕ ਚਲਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਤਰਾਂ ਦੀ ਪਰੇਸ਼ਾਨੀ ਨਹੀ ਹੈ ਉਹ ਏਲਨਾਬਾਦ,ਸਿਰਸਾ,ਹਨੂੰਮਾਨਗੜ,ਗੰਗਾਨਗਰ ਤੋ ਇਲਾਵਾ ਬਠਿੰਡਾ,ਮੋਗਾ ਜਲੰਧਰ,ਲੁਧਿਆਣਾ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਜੇਕਰ ਜ਼ਿਆਦਾ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਦਿੱਲੀ ਇਸ ਦੀ ਮੁੱਖ ਮਾਰਕੀਟ ਹੈ ਦੱਖਣੀ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਦੀਆ ਕਾਫੀ ਫੈਕਟਰੀਆਂ ਹਨ ਜੋ ਇਸ ਫਲ ਤੋ ਕਈ ਪ੍ਰੋਡੱਕਟ ਜਿਵੇ ਟੌਫੀਆਂ,ਆਈਸ ਕਰੀਮ,ਸਟ੍ਰਾਬੇਰੀ ਫਲੇਵਰ,ਜੈਮ,ਫੇਸ ਕਰੀਮਾਂ ਅਤੇ ਦਵਾਈਆ ਆਦਿ ਤਿਆਰ ਕਰਦੀਆ ਹਨ
Posted by vishwanath
Maharashtra
28-03-2019 07:28 PM
Punjab
03-29-2019 03:45 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by jagseer singh
Punjab
28-03-2019 07:12 PM
Punjab
03-28-2019 09:41 PM
ਮੂੰਗੀ ਦੀਆਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕਿਸਮਾਂ:- TMB-37 ਇਸਦਾ ਝਾੜ 4.9 ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ ਇਹ 60 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ SML 832 ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 4.6 ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ ਇਹ ਵੀ 60 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ SML 668 ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 4.5 ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ
Posted by Nirmal Singh
Punjab
28-03-2019 07:02 PM
Rajasthan
03-29-2019 01:47 PM
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਡੇਅਰੀ ਖੋਲਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਐਚ ਐਫ ਗਾਵਾਂ ਦੀ ਨਸਲ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਤਾਂ ਠੀਕ ਰਹੇਗਾ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਮੰਡੀ ਵਿੱਚੋ ਖਰਿਦਣ ਦੀ ਬਜਾਏ ਪਸ਼ੂ ਕਿਸੇ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮ ਤੋਂ ਖਰਿਦੋ ਤੇ ਹੋਰ ਕੁੱਝ ਗੱਲਾਂ ਡੇਅਰੀ ਕਿਤੇ ਲਈ ਹਨ ਕਿ ਡੇਅਰੀ ਲਈ ਖੁਦ ਨੂੰ ਥੋੜੀ ਬਹੁਤ ਜਾਣਕਾਰੀ ਹੋਣੀ ਬਹੁਤ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਖੁਦ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਬਣਾ ਕੇ ਵੇਚੋਗੇ ਤਾਂ ਫਾਇਦਾ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਡੇ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਡੇਅਰੀ ਖੋਲਣੀ ਹੈ ਤਾਂ ਐਚ ਐਫ ਗਾਵਾਂ ਦੀ ਨਸਲ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਤਾਂ ਠੀਕ ਰਹੇਗਾ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਮੰਡੀ ਵਿੱਚੋ ਖਰਿਦਣ ਦੀ ਬਜਾਏ ਪਸ਼ੂ ਕਿਸੇ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮ ਤੋਂ ਖਰਿਦੋ ਤੇ ਹੋਰ ਕੁੱਝ ਗੱਲਾਂ ਡੇਅਰੀ ਕਿਤੇ ਲਈ ਹਨ ਕਿ ਡੇਅਰੀ ਲਈ ਖੁਦ ਨੂੰ ਥੋੜੀ ਬਹੁਤ ਜਾਣਕਾਰੀ ਹੋਣੀ ਬਹੁਤ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਦੁੱਧ ਤੋਂ ਖੁਦ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਬਣਾ ਕੇ ਵੇਚੋਗੇ ਤਾਂ ਫਾਇਦਾ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮਰ ਦੀ ਡੇਅਰੀ ਤੇ ਕੁੱਝ ਦਿਨ ਤੱਕ ਰਹਿ ਕੇ ਇਸ ਕੰਮ ਦੀਆਂ ਬਰੀਕੀਆਂ ਨੂੰ ਜਾਣੋ ਕਿਓੁਂਕਿ ਕੁੱਝ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਗਿਆਨ ਸਿਰਫ ਖੁਦ ਕੰਮ ਨੂੰ ਦੇਖਕੇ ਹੀ ਪਤਾ ਚੱਲਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਕੁੱਝ ਹੋਰ ਗੱਲਾਂ ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ ਸ਼ੇਅਰ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ ਤੁਸੀ ਇੱਕੋ ਵਾਰ ਇਕੱਠੀਆਂ ਗਾਵਾਂ ਨਾ ਖਰੀਦੋ,ਗਾਵਾਂ ਨੂੰ 2 -2 ਮਹੀਨਿਆ ਤੇ ਵਕਫੇ ਤੇ ਖਰੀਦੋ ਜਾਂ ਫਿਰ 3 ਪਹਿਲਾਂ ਖਰੀਦ ਲਓ ਤੇ 3 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਫਿਰ ਖਰੀਦ ਲਵੋ ਇਸ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਦੀ ਕਮੀ ਨਹੀਂ ਆਵੇਗੀ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਨਸਲ ਸਭ ਤੋਂ ਜਿਆਦਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਪਸ਼ੂ ਖਰੀਦਣ ਵੇਲੇ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰੋ ਕਿ ਤਿੰਨ ਡੰਗ ਦੀ ਚੁਆਈ ਕਰਕੇ ਹੀ ਪਸ਼ੂ ਖਰੀਦੋ ਗਾਵਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ 16-17 ਲੀਟਰ ਤੋਂ ਘੱਟ ਨਾ ਹੋਵੇ ਸ਼ੈਡ ਆਵਾਜਾਈ ਵਾਲੀ ਸੜਕ ਤੇ ਨਾ ਬਣਾਓ ਅਤੇ ਸ਼ੈਂਡ ਸੜਕ ਤੋਂ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ 100 ਗਜ ਹਟਵਾ ਜਰੂਰ ਹੋਵੇ ਸ਼ੈਡ ਨੂੰ ਧੁੱਪ ਅਤੇ ਹਵਾ ਦਾ ਧਿਆਨ ਰੱਖ ਕੇ ਬਣਾਓ ਸ਼ੈਡ ਹਮੇਸ਼ਾ ਖੇਤ ਜਾਂ ਆਲੇ ਦੁਆਲੇ ਨਾਲੋ 2 ਫੁੱਟ ਉੱਚਾ ਬਣਾਓ ਕਿਉਕਿ ਨੀਵੀ ਥਾਂ ਤੇ ਪਾਣੀ ਖੜ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਗੰਦਗੀ ਪੈਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਤੇ ਬਾਕੀ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦਾ ਮਲ-ਮੂਤਰ ਦਾ ਨਿਕਾਸ ਵੀ ਅਸਾਨੀ ਨਾਲ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ ਬਣਾਈ ਜਾਣ ਵਾਲੀ ਖੁਰਲੀ ਢਾਈ-ਤਿੰਨ ਫੁੱਟ ਚੌੜੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਖੁਰਲੀ ਤੇ ਖੜਨ ਲਈ ਇੱਕ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਤਕਰੀਬਨ ਚਾਰ ਫੁੱਟ ਜਗਾਂ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਮਤਲਬ 10 ਪਸ਼ੂਆਂ ਲਈ 40 ਫੁੱਟ ਲੰਬੀ ਖੁਰਲੀ ਬਣੇਗੀ ਡੇਅਰੀ ਫਾਰਮ ਨਾਲ ਸਬੰਧਿਤ ਸਮਾਨ ਰੱਖਣ ਲਈ ਸਟੋਰ ਬਣਾਓ ਪਸ਼ੂਆਂ ਦੀ ਵੰਡ/ਦਾਣਾ ਸਟੋਰ ਕਰਨ ਲਈ ਕਮਰਾ ਸਿਲਾਬ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਹੋਣਾ ਬਹੁਤ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਸ਼ੈਡ ਦਾ ਫਰਸ਼ ਪੱਕਾ, ਤਿਲਕਣ ਰਹਿਤ ਤੇ ਜਲਦੀ ਸਾਫ ਹੋਣ ਵਾਲਾ ਹੋਵੇ ਸ਼ੈਡ ਵਿੱਚ ਜਿੰਨਾ ਹੋ ਸਕੇ ਪਸ਼ੂਆਂ ਨੂੰ ਖੁੱਲਾ ਛੱਡੋ ਤੇ ਪਾਣੀ ਤੇ ਦਾਣਾ ਪੂਰਾ ਦਿਓ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਖੁੱਲਾ ਛੱਡਣ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂਆਂ ਵਿੱਚ ਅਫਾਰੇ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆਂ ਘੱਟ ਆਉਂਦੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਆਪਣੀ ਲੋੜ ਤੇ ਸਮਰੱਥਾਂ ਮੁਤਾਬਿਕ ਹੀ ਸਮਾਨ ਖਰੀਦੋ
Posted by MD SHAHWAJ ALAM
Bihar
28-03-2019 06:53 PM
Punjab
03-29-2019 04:37 PM
मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bijender Chouhan 9719994499 से संपर्क करें
Posted by jashan
Punjab
28-03-2019 06:46 PM
Punjab
03-29-2019 11:20 AM
Punjab vich rabbit farming te subsidy nahi mildi ji. eh ta apne level te hi karna sahi rehnda hai. baki ehjo v company contact kardi hai oh hi khareed di hai. loan na miln da karan eh hai ke koe govt adara punjabi vich ehdi traning nai dinda ji.
Posted by manjot singh
Punjab
28-03-2019 06:45 PM
Punjab
04-05-2019 07:41 PM
मनजोत जी आप अपना सवाल एप में देख सकते है, आपके सवालों के जवाब दिए गए है
Posted by gurpreet singh
Punjab
28-03-2019 06:38 PM
Punjab
03-29-2019 04:45 PM
Gurpreet ji machar di roktham de layi tuc imidacloprid@1.5ml nu prati litre pani de hisab nal spray karo. eh machar de karn hi murjha rahe han.dhanwad
Posted by gurpreet singh
Punjab
28-03-2019 06:36 PM
Punjab
03-28-2019 09:42 PM
Knak vich tele di roktham lyi Actara(thiamethoxam 25WG) @40 gm prati acre de hisab nal spray kr skde ho.
Posted by gurpreet singh
Punjab
28-03-2019 06:34 PM
Maharashtra
04-01-2019 11:54 AM
गुरप्रीत जी कृपया बताएं कि प्रति पौधा तेला कितना है, ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by gurpreet singh
Punjab
28-03-2019 06:31 PM
Punjab
03-29-2019 04:46 PM
Gurpreet ji sundi di roktham de layi quinalphos@600ml nu 150 litre pani vich mila ke prati acre de hisab nal spray karo.dhanwad
Posted by Abhishek
Uttar Pradesh
28-03-2019 06:28 PM
Maharashtra
04-01-2019 11:39 AM
पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.म.... (Read More)
पुदीने को मिट्टी की कई किस्मों जैसे दरमियाने से गहरी उपजाऊ मिट्टी, जिसमें पानी को सोखने की क्षमता ज्यादा हो, में उगाया जाता है इसको जल-जमाव वाली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है उच्च नमी वाली मिट्टी में यह अच्छे परिणाम देती है इस फसल के लिए मिट्टी का pH 6-7.5 होना चाहिए MAS-1: यह छोटे कद की किस्म है जिसकी ऊंचाई 30-45 सैं.मी. होती है यह बीमारीयों की रोधक और जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 70-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है Hybrid-77: इसकी ऊंचाई 50-60 सैं.मी. होती है यह किस्म पत्तों के धब्बा रोग और कुंगी के रोधक होती है, और यह जल्दी पकने वाली किस्म है इसमें मैन्थोल की मात्रा 80-85% होती है इसकी औसतन पैदावार 80 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 50-60 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है यह रेतली दोमट मिट्टी में बढ़िया पैदावार देती है औरऐसी शुष्क मौसम में की आवश्यकता होती है Himalaya: इसके पत्तों का आकार बाकी किस्मों से बड़ा होता है यह किस्म कुंगी, झुलस, सफेद धब्बे और पत्तों पर धब्बे रोग की रोधक है इसमें मैन्थोल की मात्रा 78-80% होती है इसकी औसतन पैदावार 160 क्विंटल प्रति एकड़ जड़ी-बूटियां के तौर पर और 80-100 किलोग्राम प्रति एकड़ तेल के तौर पर होती है पुदीने की बिजाई के लिए सुविधाजनक आकार के बैड तैयार करें खेत की तैयारी के समय खेत की अच्छी तरह जोताई करें जैविक खाद जैसे रूड़ी की खाद 100-120 क्विंटल प्रति एकड़ रूड़ी की खाद डालें रूड़ी की खाद के बाद हरी खाद डालें इसकी बिजाई के लिए दिसंबर-जनवरी का समय अनुकूल होता है पौधे के भागों की बिजाई 40 सैं.मी. के फासले पर और पंक्तियों के बीच का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बीज को 2-3 सैं.मी. की गहराई में बोयें प्रजनन क्रिया जड़ के भाग या टहनियों द्वारा की जाती है अच्छी पैदावार के लिए 160 किलो भागों को प्रति एकड़ में प्रयोग करें जड़ें पिछले पौधों से दिसंबर और जनवरी के महीने में प्राप्त की जाती है बिजाई से पहले पौधे की बारीक जड़ 10-14 सैं.मी. काटें पुदीने की जड़ को आकार और जड़ के हिसाब से बोयें पौधे की बारीक जड़ की रोपाई 40 सैं.मी. के फासले पर और कतार से कतार का फासला 60 सैं.मी होना चाहिए बिजाई के बाद मिट्टी को नमी देने के लिए सिंचाई करें खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें हाथों से लगातार गोडाई करें और पहली कटाई के बाद खेत को नदीन मुक्त करें नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों को नियंत्रित करने के लिए जैविक मल्च के साथ ऑक्सीफलोरफिन 200 ग्राम या पैंडीमैथालीन बूटीनाशक 800 मि.ली को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि नदीन ज्यादा हो तो डालापोन 1.6 किलोग्राम प्रति एकड़ या ग्रामाक्ज़ोन 1 लीटर और डयूरॉन 800 ग्राम या टेरबेसिल 800 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें गर्मियों में मॉनसून से पहले जलवायु और मिट्टी के आधार पर 6-9 सिंचाइयां जरूर की जानी चाहिए मॉनसून के बाद 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है पहली सिंचाई सितंबर महीने में, दूसरी अक्तूबर में और तीसरी नवंबर महीने में की जानी चाहिए सर्दियों में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन यदि सर्दियों में बारिश ना पड़े तो एक सिंचाई जरूर देनी चाहिए कटाई करने के बाद तेल निकालने के लिए उसके नर्म तनों का प्रयोग किया जाता है फिर पुदीने के तेल को पैक करके बड़े स्टील के या एल्यूमीनियम के बक्सों में रखा जाता है फसल को नुकसान होने से बचाने के लिए जल्दी मंडी में भेजा जाता है पुदीने की पत्तियों से काफी तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं जैसे प्रक्रिया के बाद पुदीने का तेल और चटनी आदि
Posted by Veerendra Kumar
Uttar Pradesh
28-03-2019 06:12 PM
Punjab
03-29-2019 04:36 PM
वीरेंद्र जी आप ज्वार की किसम जैसे varsha,CSV13,CSVa15,SPB1388,Vijeta
Posted by Gurdhyan Singh
Haryana
28-03-2019 06:03 PM
Punjab
03-29-2019 04:32 PM
Gurdhyan ji Pr47 nam di koi kisam nahi hai jhone di kisam HKR47 hai jisda jhaad 26 quintal prati acre hunda hai ate eh pakkan de layi 135 din da sma laindi hai. isde uper fungus da koi hamla nahi hunda. dhanwad
Posted by Veerendra Kumar
Uttar Pradesh
28-03-2019 05:59 PM
Punjab
03-29-2019 04:17 PM
Veerendra Kumar ji kripya aap iski photo bheje taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by harp bajwa
Punjab
28-03-2019 05:52 PM
Maharashtra
03-29-2019 04:04 PM
ਇਸ ਫਸਲ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਕਈ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਇਹ ਭੁਰਭੁਰੀ, ਰੇਤਲੀ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਨਤੀਜਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਭਾਰੀ ਅਤੇ ਠੋਸ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਕਰੋ, ਇਸ ਦੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ(ਫਲ) ਟੇਢੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਫਸਲ ਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 5.5-6.8 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ:- Japanese white: ਇਹ ਕਿਸਮ ਨਵੰਬਰ-ਦਸੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਬੀਜਣ ਲਈ ਅਨ.... (Read More)
ਇਸ ਫਸਲ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਕਈ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਪਰ ਇਹ ਭੁਰਭੁਰੀ, ਰੇਤਲੀ ਦੋਮਟ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਵਧੀਆ ਨਤੀਜਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਭਾਰੀ ਅਤੇ ਠੋਸ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਕਰੋ, ਇਸ ਦੀਆਂ ਜੜ੍ਹਾਂ(ਫਲ) ਟੇਢੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਫਸਲ ਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 5.5-6.8 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਇਸਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਹਨ:- Japanese white: ਇਹ ਕਿਸਮ ਨਵੰਬਰ-ਦਸੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਬੀਜਣ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਇਹ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਜਾਪਾਨ ਦੁਆਰਾ ਲਿਆਈ ਗਈ ਹੈ ਉੱਤਰੀ ਮੈਦਾਨਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਪਿਛੇਤੀ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਲਈ ਅਤੇ ਪਹਾੜੀ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਜੁਲਾਈ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਇਸਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਗਈ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫਲ ਜੜ੍ਹਾਂ ਬੇਲਨਾਕਾਰ ਅਤੇ ਸਫੇਦ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 160 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Pusa chetki: ਇਹ ਕਿਸਮ ਅਪ੍ਰੈਲ-ਅਗਸਤ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਬੀਜਣ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਇਹ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਵਿੱਚ ਖੇਤੀ ਕਰਨ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਇਸਦੇ ਫਲ ਨਰਮ, ਬਰਫ ਵਾਂਗ ਚਿੱਟੇ ਅਤੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਲੰਬੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 105 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਅਤੇ ਬੀਜ ਦੇ ਤੌਰ ਤੇ 4.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Himani: ਇਹ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਜਨਵਰੀ-ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਕਰੋ ਇਸਦੇ ਫਲ ਚਿੱਟੇ ਅਤੇ ਮੁੱਢ ਤੋਂ ਹਰੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 60-65 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 160 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ Punjab Pasand: ਇਹ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮਾਰਚ ਦੇ ਦੂਜੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਕਰੋ ਇਹ ਜਲਦੀ ਪੱਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ, ਇਹ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 45 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਇਸਦੇ ਪਲ ਲੰਬੇ, ਚਿੱਟੇ ਰੰਗ ਦੇ ਅਤੇ ਵਾਲਾਂ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮੁੱਖ ਮੌਸਮ ਅਤੇ ਮੌਸਮ ਤੋਂ ਬਿਨ੍ਹਾਂ ਵੀ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਮੁੱਖ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ, ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 215 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਅਤੇ ਮੌਸਮ ਤੋਂ ਬਿਨ੍ਹਾਂ 140 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਖੇਤ ਨੂੰ ਹਲ ਨਾਲ ਜੋਤੋ ਅਤੇ ਖੇਤ ਨੂੰ ਨਦੀਨਾਂ ਅਤੇ ਢੇਲਿਆਂ ਤੋਂ ਰਹਿਤ ਕਰੋ ਹਰ ਵਾਰ ਵਾਹੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਸੁਹਾਗਾ ਫੇਰੋ ਖੇਤ ਦੀ ਤਿਆਰੀ ਦੇ ਸਮੇਂ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸੜ੍ਹੀ ਹੋਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ 5-10 ਟਨ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾਓ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾ ਸੜ੍ਹੀ ਹੋਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ ਨੂੰ ਖੇਤ ਚ ਨਾ ਪਾਓ ਇਸ ਨਾਲ ਜੜ੍ਹਾਂ ਦੋ-ਮੂੰਹੀਆਂ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ Pusa Himani: ਇਹ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਜਨਵਰੀ-ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਕਰੋ Punjab Pasand: ਇਹ ਕਿਸਮ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਮਾਰਚ ਦੇ ਪੰਦਰਵਾੜੇ ਪੱਖਵਾੜੇ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਮੇਂ ਕਰੋ ਜਦਕਿ ਇਹ ਕਿਸਮ ਅਪ੍ਰੈਲ-ਅਗਸਤ ਵਿੱਚ ਬੀਜਣ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ Japanese white: ਇਹ ਕਿਸਮ ਨਵੰਬਰ-ਦਸੰਬਰ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਬੀਜਣ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 30-40 ਸੈ.ਮੀ. ਅਤੇ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚ ਫਾਸਲਾ 30-40 ਮੀਟਰ ਦਾ ਰੱਖੋ ਚੰਗੇ ਝਾੜ ਲਈ, ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ 1.5 ਸੈ.ਮੀ. ਡੂੰਘਾ ਬੀਜੋ ਬਿਜਾਈ ਕਤਾਰਾਂ ਵਿੱਚ ਜਾਂ ਛਿੱਟਾ ਦੇ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਇੱਕ ਏਕੜ ਖੇਤ ਵਿੱਚ 4-5 ਕਿਲੋਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਕਾਫੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਜੜ੍ਹਾਂ ਦੇ ਵਧੀਆ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਬਿਜਾਈ ਵੱਟਾਂ ਤੇ ਕਰੋ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਸਮੇਂ ਸੜ੍ਹੀ ਹੋਈ ਰੂੜੀ ਦੀ ਖਾਦ, ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ 25 ਕਿਲੋ (ਯੂਰੀਆ 55 ਕਿਲੋ), ਫਾਸਫੋਰਸ 12 ਕਿਲੋ(ਸਿੰਗਲ ਸੁਪਰ ਫਾਸਫੇਟ 75 ਕਿਲੋ) ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋ ਨਦੀਨਾਂ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਹਵਾਦਾਰ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਅਤੇ ਕਹੀ ਜਾਂ ਕਸੀਏ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਗੋਡੀ ਕਰੋ ਪਹਿਲੀ ਗੋਡੀ ਬਿਜਾਈ ਦੇ 2-3 ਹਫਤਿਆਂ ਬਾਅਦ ਕਰੋ ਗੋਡੀ ਦੇ ਬਾਅਦ ਵੱਟਾਂ ‘ਤੇ ਮਿੱਟੀ ਚੜਾਓ ਬਿਜਾਈ ਦੇ ਬਾਅਦ, ਪਹਿਲੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿੱਚ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਅਤੇ ਜਲਵਾਯੂ ਦੇ ਆਧਾਰ ‘ਤੇ ਬਾਕੀ ਦੀਆਂ ਸਿੰਚਾਈਆਂ 6-7 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ਅਤੇ ਸਰਦੀਆਂ ਵਿੱਚ 10-12 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਤਰਾਲ ‘ਤੇ ਕਰੋ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਿੰਚਾਈਆਂ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਲ ਦਾ ਆਕਾਰ ਵਧੇਗਾ ਅਤੇ ਫਲ ਉੱਤੇ ਬਾਲਾਂ ਦਾ ਵਿਕਾਸ ਬਹੁਤ ਜ਼ਿਆਦਾ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਗਰਮੀਆਂ ਦੇ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ, ਕਟਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਹਲਕੀ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਇਸ ਨਾਲ ਫਲ ਤਾਜ਼ਾ ਰਹਿੰਦੇ ਹੈ ਅਤੇ ਬਦਬੂ ਘਟ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਹ ਫਸਲ ਕਿਸਮ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ, ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 25-60 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਪੁਟਾਈ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦੀ ਪੁਟਾਈ ਹੱਥਾਂ ਨਾਲ ਪੌਦੇ ਨੂੰ ਉਖਾੜ ਕੇ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਉਖਾੜੇ ਗਏ ਫਲਾਂ ਨੂੰ ਧੋ ਕੇ ਆਕਾਰ ਅਨੁਸਾਰ ਛਾਂਟ ਲਓ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by aakash kumar
Haryana
28-03-2019 05:43 PM
Punjab
03-29-2019 11:47 AM
aakash kumar ji iske liye spray aati hai ji spray ka name B 904 spray hai ji.
Posted by rakesh kumar ban
Madhya Pradesh
28-03-2019 05:35 PM
Maharashtra
03-29-2019 03:57 PM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है .... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है
Posted by ਜਸਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ
Punjab
28-03-2019 05:29 PM
Punjab
03-28-2019 06:37 PM
ਜਸਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਇਸ ਬਾਰੇ ਵਿੱਚ ਇੱਕੋ ਵਾਰ ਵਿੱਚ ਕਹਿਣਾ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਕਿੱਤਾ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੈ ਜਾਂ ਨਹੀ ਕਿਉਕੀ ਬਹੁਤ ਲੋਕੀ ਕਾਮਯਾਬ ਵੀ ਹੋਏ ਹਨ ਤੇ ਬਹੁਤ ਬੰਦ ਵੀ ਹੋਏ ਹਨ ਇਹ ਤੁਹਾਡੇ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਕਰਦੇ ਕਿਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਹੋ ਜੀ ਇਸ ਲਈ ਤੁਸੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੋਰ ਕਾਮਯਾਬ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮਾਂ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਆਓ ਬਾਕੀ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮ ਖੋਲਣ ਬਾਰੇ ਰਾਇ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦ.... (Read More)
ਜਸਪ੍ਰੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਇਸ ਬਾਰੇ ਵਿੱਚ ਇੱਕੋ ਵਾਰ ਵਿੱਚ ਕਹਿਣਾ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਕਿੱਤਾ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੈ ਜਾਂ ਨਹੀ ਕਿਉਕੀ ਬਹੁਤ ਲੋਕੀ ਕਾਮਯਾਬ ਵੀ ਹੋਏ ਹਨ ਤੇ ਬਹੁਤ ਬੰਦ ਵੀ ਹੋਏ ਹਨ ਇਹ ਤੁਹਾਡੇ ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਕਰਦੇ ਕਿਸ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਹੋ ਜੀ ਇਸ ਲਈ ਤੁਸੀ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੋਰ ਕਾਮਯਾਬ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮਾਂ ਤੇ ਜਾ ਕੇ ਆਓ ਬਾਕੀ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮ ਖੋਲਣ ਬਾਰੇ ਰਾਇ ਲੈਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ ਸਾਡੀ ਪੂਰੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਰਹੇਗੀ ਕਿ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੇ ਸਕੀਏ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲੀ ਗੱਲ ਜੇਕਰ ਤੁਸੀ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮ ਖੋਲਣਾ ਹੈ ਤਾਂ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਇਹ ਦੇਖੋ ਕਿ ਲੇਇਰ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨੀ ਹੈ ਬਰੈਲਰ ਫਾਰਮਿੰਗ ਕਰਨੀ ਹੈ ਦੂਸਰੀ ਗੱਲ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਜਰੂਰ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਫੀਡ ਵਗੈਰਾਂ ਦਾ ਪਤਾ ਚੱਲੇਗਾ ਕਿਉਕੀ ਪੋਲਟਰੀ ਵਿੱਚ ਬਾਇਉਸਕਿਉਰਟੀ ਰੱਖਣੀ ਬਹੁਤ ਜਰੂਰੀ ਹੈ ਜੇਕਰ ਇੱਕ ਵਾਰ ਬਿਮਾਰੀ ਫਾਰਮ ਵਿੱਚ ਆ ਗਈ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਸਾਰੇ ਫਾਰਮ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਦੀ ਹੈ ਇਸ ਲਈ ਸਾਰੀਆ ਗੱਲਾਂ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖ ਕੇ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਇਹ ਵੀ ਸਲਾਹ ਹੈ ਕਿ ਵੱਡੇ ਪੱਧਰ ਤੇ ਇਕਦਮ ਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਇੱਕ ਵਾਰ ਥੋੜੀਆ ਮੁਰਗੀਆ ਤੋਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਬਾਕੀ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੱਸ ਦੇਈਏ ਕਿ 5 ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀ 50000 ਮੁਰਗੀਆ ਰੱਖ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੇ ਇਸ ਤੇ ਤੁਹਾਡਾ ਕੁੱਲ 5-7 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਖਰਚਾ ਆ ਜਾਵੇਗਾ ਜੇਕਰ ਨਸਲ ਦੀ ਗੱਲ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਲੇਇਰ ਵਿੱਚ ਅੰਡਿਆ ਲਈ BV 300 ਨਸਲ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਰਹੇਗੀ ਇਹ ਨਸਲ 18 ਹਫਤਿਆ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਆਂਡੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਤੇ 19 ਹਫਤਿਆ ਤੋਂ 80 ਵੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਲੱਗਭੱਗ 370 ਆਂਡੇ ਦਿੰਦੀ ਹੈ ਪ੍ਰਤੀ ਮੁਰਗੀ ਲਈ 1.5-2.0 ਫੁੱਟ ਜਗਾਂ ਦੀ ਜਰੂਰਤ ਪੈਂਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੇ ਦਿਨ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਅੰਡੇ ਦੇਣ ਤੱਕ ਇੱਕ ਮੁਰਗੀ ਤੇ ਲੱਗਭੱਗ 250-300 ਰੁਪਏ ਖਰਚਾ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਬਾਕੀ ਤੁਹਾਡੇ ਰੱਖ ਰਖਾਵ ਤੇ ਬਿਮਾਰੀਆ ਤੇ ਟੀਕਾਕਰਣ ਦਾ ਖਰਚਾ ਅਲੱਗ ਹੈ ਇਹ ਕੁੱਝ ਮੁੱਢਲੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਸੀ ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਪਹਿਲਾ ਕਿਸੇ ਸਫਲ ਪੋਲਟਰੀ ਫਾਰਮਰ ਨੂੰ ਜਰੂਰ ਮਿਲੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਹੋਰ ਬਹੁਤ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਤੇ ਬਰੀਕੀਆ ਤਾਂ ਪਤਾ ਲੱਗੇਗਾ ਬਾਕੀ ਸਵਾਲ ਕਿ ਚੂਚੇ ਕਿੱਥੋ ਮਿਲਕਣਗੇ , ਇਸ ਲਈ ਦੋ ਹੀ ਭਰੋਸੇਮੰਦ ਅਦਾਰੇ ਹਨ ਜਿੰਨਾਂ ਤੋਂ ਚੂਚੇ ਖਰੀਦ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੈ ਸੈਟਰਲ ਪੋਲਟਰੀ ਡਿਵੈਲਪਮੈਂਟ ਦੇ ਦਫਤਰ ਚੰਡੀਗੜ ਫੇਸ-1 ਤੇ ਬੱਚੇ ਬੁੱਕ ਕਰਵਾਉਣ ਲਈ ਤੁਸੀ Central Poultry Development Industrial Area, Phase-I, Chandigarh – Tel.No: 0172-2655391 ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰਕੇ ਬੱਚੇ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਾਂ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੀ ਹੈਚਰੀ ਜਿਸ ਲਈ ਤੁਸੀ Dr Dubey 9888802905 ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by aakash kumar
Haryana
28-03-2019 05:20 PM
Maharashtra
03-29-2019 03:58 PM
Akash ji kripya aap apna swal vistar se btaye ke aap konsi spray ki jankari lena chahte hai ta ki aapko iske bare mein poori janakri di ja sake. dhanywad
Posted by aakash kumar
Haryana
28-03-2019 05:14 PM
Punjab
03-28-2019 06:58 PM
aakash kumar ji wese Egg koi ganda nahi hota gatte ke dibbe laga sakte ho.
Posted by ਡਾਕਟਰ ਮੇਜਰ ਸਿੰਘ ਧਾਲੀਵਾਲ
Punjab
28-03-2019 05:10 PM
Maharashtra
03-29-2019 03:56 PM
ਮੇਜਰ ਜੀ ਤੁਸੀ ਬਰਸੀਮ ਦੇ ਗਾਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਦੇ ਲਈ Saaf @500gm ਨੂੰ 150 ਲਿਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਸਪਰੇ ਕਰੋ. ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Rajvinder singh
Punjab
28-03-2019 04:45 PM
Punjab
03-29-2019 01:50 PM
Rajvinder singh ji white color de bater tohanu harbhajan singh ji kolo hi july tak mil sakde hai tusi 9815311687 number te harbhajan singh ji nal sampark karke rakho.
Posted by Amrinder singh
Punjab
28-03-2019 04:43 PM
Punjab
03-28-2019 06:02 PM
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਡੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਕਿ੍ਰਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਵਿੱਚ ਹੀ ਹੋਵੇਗੀ ਬਾਕੀ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਜੋ ਕਿ ਮਹੀਂਨੇ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਸ਼ੁੱਕਰਵਾਰ ਨੂੰ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਕਿਸਾਨ ਹੋਸਟਲ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਇਸ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਜਾਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ .... (Read More)
ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਣ ਦੀ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਤੁਹਾਡੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਕਿ੍ਰਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਵਿੱਚ ਹੀ ਹੋਵੇਗੀ ਬਾਕੀ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੀ ਮੀਟਿੰਗ ਜੋ ਕਿ ਮਹੀਂਨੇ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਸ਼ੁੱਕਰਵਾਰ ਨੂੰ ਗੁਰੂ ਅੰਗਦ ਦੇਵ ਵੈਟਨਰੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਲੁਧਿਆਣਾ ਦੇ ਕਿਸਾਨ ਹੋਸਟਲ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉੱਥੇ ਜਾ ਕੇ ਸਫਲ ਬੱਕਰੀ ਪਾਲਕਾ ਨੂੰ ਮਿਲੋ ਇਸ ਮੀਟਿੰਗ ਵਿੱਚ ਜਾਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਪ੍ਰੋਗੈਸਿਵ ਬੱਕਰੀ ਫਾਰਮਰ ਐਸੋਸੀਏਸ਼ਨ ਦੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਜਗਰਾਜ਼ ਸਿੰਘ ਨਾਲ 9023441504 ਤੇ ਗੱਲ ਕਰ ਲਵੋ ਜੀ ਉਹ ਤੁਹਾਨੂੰ ਬੱਕਰੀਆਂ ਦੀ ਚੋਣ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਵੀ ਗਾਈਡ ਕਰਨਗੇ
Posted by nigam shahi
Uttar Pradesh
28-03-2019 04:38 PM
Punjab
03-28-2019 06:20 PM
देसी मुर्गी पालन को हम कम पूँजी थोड़ी जमीन और थोड़ी सी मेहनत से आसानी से किया जा सकता है , मुर्गी पालन का चलन भारत में तेज़ी से बढ़ रहा है चीन और अमेरिका के बाद भारत अंडा उत्पादन में तीसरे स्थान पर और मांस उत्पादन में 5 स्थान पर है यह 3 देसी मुर्गी की प्रजातियां ज्यादा प्रचलित हैं ग्रामप्रिया श्रीनिधि वनराजा कुक्क.... (Read More)
देसी मुर्गी पालन को हम कम पूँजी थोड़ी जमीन और थोड़ी सी मेहनत से आसानी से किया जा सकता है , मुर्गी पालन का चलन भारत में तेज़ी से बढ़ रहा है चीन और अमेरिका के बाद भारत अंडा उत्पादन में तीसरे स्थान पर और मांस उत्पादन में 5 स्थान पर है यह 3 देसी मुर्गी की प्रजातियां ज्यादा प्रचलित हैं ग्रामप्रिया श्रीनिधि वनराजा कुक्कुट पालन परियोजना हैदराबाद के द्वारा यह तीनो प्रजातियां विकसित की गयीं हैं यह मुर्गियां अण्डों और मांस दोनों के लिए बहुत लाभदायक हैं देखा जाता है के जो हमारे किसान भाई ग्रामीण प्रजाति के मुर्गी पालन करते हैं उसके अपेक्षा में यह संकर नस्ल की प्रजाति अंडे और मांस में ज्यादा मुनाफा देता हैं आइये हम विस्तार से इन तीन प्रजाति के बारे में बात करें ग्रामप्रिया – ग्रामप्रिया प्रजाति की मुर्गियां भी दोहरी उपयोगिता वाली प्रजाति की मुर्गी है इसका अर्थ यह है के यह अंडा और मांस दोनों के लिए उपयोगी है , 18 महीने में यह 240 से 250 अंडे तक दे सकती है और इसका वजन 1.5 kg से 2 kg तक होता है श्रीनिधि प्रजाति की मुर्गी – यह प्रजाति ग्रामीण प्रजाति की मुर्गी के अपेक्षा में 230-250 अंडे तक देती है , श्रीनिधि मुर्गियों का वजन 2.5kg से लेकर 5 kg तक का होता है जो की ग्रामीण प्रजाति के मुर्गियों से बहुत ज्यादा है इसीलिए यह दोहरी उपयोगिता प्रजाति में गिनी जाती है इसके मांस और अंडे दोनों से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है ,इन प्रजातियों की मुर्गियां तेजी से बढ़ती हैं वनराजा – वनराजा प्रजाति की मुर्गियां भी ग्रामीण प्रवेश के लिए काफी अच्छी मानी जाती है यह मुर्गी 120 – 130 अंडे 3 महीने में देती है देसी मुर्गी पालन के लिए यह 3 विकसित प्रजातियां बहुत ही लाभदायक साबित हुई है आप भी अगर देसी मुर्गी पालन करना चाहते हैं तो यह तीनो प्रजातियों को जरूर अपनाएं इसे खरीदने के लिए आप 9075749975 पर कांटेक्ट करे
Posted by jatinder saini
Punjab
28-03-2019 04:35 PM
Punjab
03-28-2019 09:44 PM
Jatinder saini g kirpa krke apna swaal visthaar nal pucho g.Tuc eh dsso g knak vich ki problem ayi hoyi hai ta jo tuhanu poori jankari ditti ja ske g.
Posted by Deepak kumar
Haryana
28-03-2019 04:33 PM
Punjab
03-29-2019 03:54 PM
दीपक कुमार जी यह कई कंपनी की आती है आप कोई भी कंपनी का प्रोडक्ट खरीद सकते है जो आपके बजट में हो इसकी फोटो आप नीचे देख सकते है धन्यवाद
Posted by KULDEEP SINGH
Punjab
28-03-2019 04:29 PM
Punjab
04-02-2019 01:31 PM
ਤਕਰੀਬਨ 75000/- ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ
Posted by Rajendra kumar
Uttar Pradesh
28-03-2019 04:12 PM
Punjab
03-29-2019 03:44 PM
Motio ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Bijender Chouhan 9719994499 se samparak kare.
Posted by mandeep singh
Punjab
28-03-2019 04:05 PM
Punjab
03-29-2019 02:55 PM
ਮਨਦੀਪ ਜੀ ਕਣਕ ਦਾ ਰੇਟ 1840 ਰੁਪਏ ਕੁਇੰਟਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਚਲ ਰਿਹਾ ਹੈ
Posted by Jassie Jattana
Punjab
28-03-2019 04:01 PM
Haryana
03-29-2019 02:56 PM
jassie ji jekar makki chare de layi beejni hai ta tuc 20 killo prati acre de hisab nal beej di varto kiti jandi hai. jekar pkavi makki beejni hai ta 8-10 killo beej di varto kiti jandi hai. dhanwad
Posted by goppyy
Punjab
28-03-2019 03:59 PM
Punjab
03-29-2019 03:04 PM
goppy ji kanak nu akhri pani ktayi to 25 din pehla lao. is to bad kanak nu pani laun di lod nahi hai. chautha pani bijai to 80-85 dina tak kiti jandi hai. dhanwad
Posted by Jagjit Hundal
Punjab
28-03-2019 03:39 PM
Punjab
03-28-2019 09:44 PM
ਕਣਕ ਵਿੱਚ ਤੇਲੇ ਦੀ ਰੋਕਥਾਮ ਲਈ ਐਕਟਾਰਾ @80 ਗਰਾਮ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ 120 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਘੋਲ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by kumud kumar
Bihar
28-03-2019 03:34 PM
Punjab
04-01-2019 03:19 PM
Kumud kumar जी मोती की खेती के लिए विनोद कुमार जी से 9050555757 पर संपर्क करें
Posted by kumud kumar
Bihar
28-03-2019 03:32 PM
Punjab
04-01-2019 03:20 PM
Kumud kumar जी मोती की खेती के लिए विनोद कुमार जी से 9050555757 पर संपर्क करें
Posted by SHIVBHANSINGH
Uttar Pradesh
28-03-2019 03:25 PM
Punjab
03-29-2019 03:47 PM
Seep ki kheti bare puri jankari or is ki training ke lia aap Bijender Chouhan 9719994499 se samparak kare.
Posted by sunil
Uttar Pradesh
28-03-2019 03:08 PM
Punjab
04-01-2019 11:25 AM
सुनील जी आप NPK 19:19:19@7gm को प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, इससे फूल आने शुरू हो जाएंगे, धन्यवाद
Posted by gaggi singh
Punjab
28-03-2019 02:55 PM
Punjab
03-28-2019 09:46 PM
ਮੂੰਗੀ ਦੀਆਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕਿਸਮਾਂ:- TMB-37 ਇਸਦਾ ਝਾੜ 4.9 ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ ਇਹ 60 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ SML 832 ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 4.6 ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ ਇਹ ਵੀ 60 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ SML 668 ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 4.5 ਕੁਇੰਟਲ ਹੈ
Posted by mandeep singh
Punjab
28-03-2019 02:45 PM
Punjab
03-29-2019 03:05 PM
ਮਨਦੀਪ ਜੀ ਕਣਕ ਦਾ ਰੇਟ 1840 ਰੁਪਏ ਕੁਇੰਟਲ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਧੰਨਵਾਦ
Posted by Manish Kumar
Bihar
28-03-2019 02:36 PM
Punjab
03-29-2019 03:49 PM
Manish ji kripya aapko kis fasl ya animal husbandry ki contract farming ki jankari lena chahte hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake. dhanywad
Posted by surinder singh
Punjab
28-03-2019 02:33 PM
Punjab
03-29-2019 03:29 PM
surinder singh ji Approx 200 quantal per acre hundi hai par according to field conditions eh thodi ghat vad v ho sakdi hai.
Posted by chanan
Punjab
28-03-2019 02:31 PM
Punjab
03-28-2019 10:33 PM
uss nu tuci Cargil di Transition mix feed deni suru kro, isde nal tuci Vitum-H liquid 10-10ml swere sham deo ji, iss nal lewa vdia ho jawega.
Posted by abdulgaffar
Maharashtra
28-03-2019 02:24 PM
Punjab
03-28-2019 03:01 PM
Haji Injection Oxytocin harmon Injection he ji es lai es da nuksan hunda he tusi us nu Liquid Lactomood 15ml 10 bunda din vich 3 varr deo Liquid LDM 1 Litter 100ml swere 100ml shame nu deo es nall farak pe jawe ga ji