Posted by zubair
Uttar Pradesh
05-04-2019 05:31 AM
ज़ुबैर जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार से 9050555757 संपर्क करें
Posted by zubair
Uttar Pradesh
05-04-2019 05:29 AM
ज़ुबैर जी कृपया आप बताएं कि आप कौन सी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करना चाहते है ताकि आपको इसके बारे में पूरी जानकारी दी जा सके, धन्यवाद

Posted by Prince Jain
Uttar Pradesh
05-04-2019 05:01 AM
Jain ji Moti ki kheti ke bare mein puri jankari ke liye aap Vinod Kumar 9050555757 se samparak kare.
Posted by Abhay Raj Dwivedi
Madhya Pradesh
05-04-2019 01:43 AM
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में हो, में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह फसल अम्लीय और .... (Read More)
इस फसल की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है जैसे कि रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी जिसमें जैविक तत्व उच्च मात्रा में हो, में उगाने पर अच्छे परिणाम देती है अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की पी एच 7-8.5 होनी चाहिए यह फसल अम्लीय और खारी मिट्टी में भी उगाई जा सकती है ज्यादा तेजाबी मिट्टी में खेती ना करें अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लिए चिकनी, दोमट और बारीक रेत वाली मिट्टी बहुत अच्छी है आप इसकी किस्मे जैसे Solan Bajr , Solan Gola,Yashwant,Marglobe की बिजाई कर सकते है टमाटर के बीज को पहले नर्सरी में बोया जाता है फिर मुख्य खेत में रोपण कर दिया जाता है मुख्य खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से जोती गई और समतल ज़मीन की आवश्यकता होती है खेत की 4-5 बार जोताई करें और फिर मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा लगाएं आखिरी जोताई के समय मिट्टी में अच्छी तरह से गला हुआ गाय का गोबर 60 किलो प्रति एकड़ मिट्टी में मिलायें रोपाई के लिए तैयार बैड की चौड़ाई 80-90 सैं.मी. रखें बिजाई का समय कम पर्वतीय क्षेत्रों के लिए : जून-जुलाई (बारानी क्षेत्रों में), नवंबर, फरवरी (सिंचित क्षेत्रों में) दरमियाने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए : फरवरी-मार्च (सिंचित क्षेत्रों में), मई-जून (बारानी क्षेत्रों में) अधिक पर्वतीय क्षेत्रों के लिए : मार्च-अप्रैल छोटे कद की किस्मों के लिए 60 x 45 सैं.मी. और अधिक फैलने वाली किस्मों के लिए 90 x 30 सैं.मी. फासले का प्रयोग करें नर्सरी में बीज को 0-5 सैं.मी. गहराई पर बोयें और मिट्टी से ढक दें नए पौधों का मुख्य खेत में रोपण किया जाता है टमाटर के बीज को 1 मीटर चौड़ाई और 5 मीटर लंबाई वाले तैयार बैडों पर 5-7 सैं.मी. के फासले पर कतारों में बोयें एक एकड़ में नए पौधे के लिए लगभग 25 तैयार बैडों की आवश्यकता होती है बीज को बोने से पहले कार्बोफिउरॉन 3G, 10 ग्राम प्रति वर्गमीटर को नर्सरी की मिट्टी में डालें पौधों को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए मैनकोजेब 2 ग्राम को प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें चार से पांच सप्ताह पुराने नए पौधे जो 10-15 सैं.मी. कद के हों, रोपाई के लिए प्रयोग किए जाते हैं नए पौधों की रोपाई से पहले 84 क्विंटल गाय का गला हुआ गोबर प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन 38 किलो (84 किलो यूरिया), फासफोरस 32 किलो (200 किलो एस एस पी) और पोटाश 22 किलो (38 किलो एम ओ पी) की मात्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन को रोपाई के बाद दो हिस्सों में 30वें और 50वें दिन डालें थोड़े थोड़े समय बाद गोडाई करते रहें और जड़ों को मिट्टी लगाएं 45 दिनों तक खेत को नदीन रहित रखें यदि नदीन नियंत्रण से बाहर हो जायें तो यह 70-90 प्रतिशत पैदावार कम कर देंगे रोपाई से पहले, मुख्य खेत में पैंडीमैथालीन 1 लीटर को प्रति एकड़ में डालें यदि नदीन जल्दी उग रहे हों तो नदीनों के अंकुरण से पहले सैंकर 800 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें नदीनों पर नियंत्रण करने और ज़मीन का तापमान कम करने के लिए मलचिंग भी एक प्रभावी तरीका है सर्दियों में 6 से 7 दिनों के फासले पर सिंचाई करें और गर्मियों के महीने में मिट्टी में नमी के मुताबिक 4-5 दिनों के फासले पर सिंचाई करें फूल निकलने के समय सिंचाई महत्तवपूर्ण होती है इस समय पानी की कमी से फूल झड़ सकते हैं और फल के साथ साथ पैदावार पर भी प्रभाव पड़ता है बहुत सारी जांचों के मुताबिक यह पता चला है कि हर पखवाड़े में आधा इंच सिंचाई करने से जड़ें ज्यादा फैलती हैं और इससे पैदावार भी अधिक हो जाती है पनीरी लगाने के 70 दिन बाद पौधे फल देना शुरू कर देते हैं कटाई का समय इस बात पर निर्भर करता है कि फलों को दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाना है या ताजे फलों को मंडी में ही बेचना है आदि पके हरे टमाटर जिनका 1/4 भाग गुलाबी रंग का हो, लंबी दूरी वाले स्थानों पर लेकर जाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं ज्यादातर सारे फल गुलाबी या लाल रंग में बदल जाते हैं, पर सख्त गुद्दे वाले टमाटरों को नज़दीक की मंडी में बेचा जा सकता है अन्य उत्पाद बनाने और बीज तैयार करने के लिए पूरी तरह पके और नर्म गुद्दे वाले टमाटरों का प्रयोग किया जाता है
Posted by P.K.Sharma
Madhya Pradesh
05-04-2019 12:04 AM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है
मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है .... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है
मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है
खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें
पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है
अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी
सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए
कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए
कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है
बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है

Posted by Shubhendra Tripathi
Uttar Pradesh
04-04-2019 11:39 PM
शुभेन्द्र त्रिपाठी जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करें

Posted by aasu
Punjab
04-04-2019 11:21 PM
ਤੁਸੀ Anabolite liqued 100ml, Fatmax powder 50gm ਰੋਜ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ 250 ਗ੍ਰਾਮ ਗੁੜ ਅਤੇ 3 ਕਿਲੋ ਦਲੀਆ ਚੰਗੀ ਤ੍ਰਾਹ ਰਿਨ ਕੇ ਫਿਰ ਉਸ ਵਿਚ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਸਰੋਂ ਦਾ ਤੇਲ ਮਿਕਸ ਕਰੋ, ਇਸ ਨੂੰ ਤੁਸੀ ਅੱਧਾ ਅੱਧਾ ਕਰਕੇ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ 5-7 ਦਿਨ ਦਿਓ.
Posted by kuldeep singh
Punjab
04-04-2019 11:05 PM
ਕੁਲਦੀਪ ਜੀ ਤੁਸੀ ਨਰਮੇ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਜਿਵੇ RCH134Bt, RCH 317Bt,MRC 6301Bt, MRC 6304BT,Ankur 651,Whitegold,LHH 144,F1861,F1378 ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ
Posted by Saab hundal
Punjab
04-04-2019 10:59 PM
उनको सरसों का तेल 100ml रोज़ाना दें और जख्मों पर Coolmac tube लगाएं
Posted by Sanjeev kumar
Uttar Pradesh
04-04-2019 10:59 PM
संजीव कुमार जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप विनोद कुमार 9050555757 से संपर्क करे

Posted by pawan
Punjab
04-04-2019 10:39 PM
Pawan Ji kripya aap btaye ke aap konsi fasl ki biaji karni hai ta ki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.

Posted by gurmeet
Punjab
04-04-2019 10:26 PM
गुरमीत जी यह पानी खारा और मिठा पानी के साथ एक नंबर या दो नंबर बोलते है इसके लिए धान की किस्मों को उसके हिसाब से सिफारिश की जाती हैं

Posted by rajveer singh
Punjab
04-04-2019 10:18 PM
201: ਇਹ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਰਮਲ ਕਿਸਮ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਪੱਕਣ ਲਈ 144 ਦਿਨ ਦਾ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 31 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੁੰਦਾ ਹੈ lਇਸਦੀ ਪਨੀਰੀ 20 ਮਈ ਤੋਂ ਲਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ.

Posted by Gurpreet Singh Sandhu
Punjab
04-04-2019 10:10 PM
उसे Liquid Laxovet 15ml 7 बूँदें दिन में 3 बार दें, इससे फर्क पड़ जायेगा

Posted by Devendra Pratap Singh Ranawat
Rajasthan
04-04-2019 10:03 PM
Devendra Pratap Singh Ranawat ji iske liye 100x50 ka shed bnana padega ji. or jo feed ka kharcha hoga woh apne local area ke hissab se pata chalega ji.

Posted by jaswinder singh
Punjab
04-04-2019 10:00 PM
jaswinder singh ji tusi dogla bajra pa sakde ho par ehde vich hara chara mix karke hi deo. eh jeyada garam hon karake pashu nu mok lag sakdi hai ji.

Posted by jaswinder singh
Punjab
04-04-2019 09:57 PM
jekar tuc chare de layi beejni hai ta eh jhone di bijai to pehln Kat sakde ho jekar pkavi beejni hai ta isdi ktayi late hundi hai fer tuc basmati di bijai Kar sakde ho.

Posted by jaswinder singh
Punjab
04-04-2019 09:56 PM
जसविंदर सिंह जी शेड्ढ बनवाने के लिए आप Moh Emran 7793851486 से संपर्क कर सकते हैं

Posted by Sukhwinder Pal
Punjab
04-04-2019 09:49 PM
हाइड्रोपोनिक की जानकारी के लिए सोमवीर सिंह जी से 9878733551 संपर्क कर सकते हैं, धन्यवाद
Posted by Raj Sharma
Punjab
04-04-2019 09:43 PM
ਨਿੰਮ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ, ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜ ਇਕੱਠੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਉਬਾਲੋ ਇਸ ਨੂੰ 40-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਉਬਾਲੋ, ਉਬਾਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਠੰਡਾ ਕਰੋ ਠੰਢਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਰਗੜੋ ਰਗੜਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਨੂੰ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਛਾਣ ਲਓ ਉਬਾਲਣ ਦੇ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ ਨਿੰਮ ਦੇ ਪੱਤੇ, ਧਤੂਰਾ ਦੇ ਪੱਤੇ .... (Read More)
ਨਿੰਮ ਦੇ ਤੇਲ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਤਿਆਰ ਕਰਨ ਲਈ, ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜ ਇਕੱਠੇ ਕਰੋ ਅਤੇ ਇਸਨੂੰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਉਬਾਲੋ ਇਸ ਨੂੰ 40-50 ਮਿੰਟ ਲਈ ਉਬਾਲੋ, ਉਬਾਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਾਣੀ ਅਤੇ ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਠੰਡਾ ਕਰੋ ਠੰਢਾ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਨਿੰਮ ਦੇ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਰਗੜੋ ਰਗੜਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਨੂੰ ਕੱਪੜੇ ਨਾਲ ਛਾਣ ਲਓ ਉਬਾਲਣ ਦੇ ਸਮੇਂ ਤੁਸੀਂ ਨਿੰਮ ਦੇ ਪੱਤੇ, ਧਤੂਰਾ ਦੇ ਪੱਤੇ ਅਤੇ Asafoetidia (ਹਿੰਗ) ਨੂੰ ਵੀ ਮਿਲਾ ਸਕਦੇ ਹੋ neem seeds@300ml ਨੂੰ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਨੁਕਸਾਨਦਾਇਕ ਕੀੜਿਆਂ ਤੋਂ ਫਸਲ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰਨ ਲਈ ਇਹ ਘਰੇਲੂ ਤਰੀਕਾ ਵੀ ਲਾਭਦਾਇਕ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਸਪਰੇਅ 7 ਦਿਨਾਂ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ
Posted by ਤਰਨਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
04-04-2019 09:42 PM
ਬਿਜਾਈ ਤੋ 1 ਮਹੀਨਾ ਪਹਿਲਾਂ ਪਨੀਰੀ ਬਿਜਾਈ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੇ ਹੈ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਅਕਤੂਬਰ ਵਾਲੇ ਗੰਨੇ ਦੀ ਸਤੰਬਰ ਵਿੱਚ, ਮਾਰਚ ਵਾਲੇ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਫਰਵਰੀ ਅਤੇ ਅਪ੍ਰੈਲ ਵਾਲੇ ਦੀ ਮਾਰਚ ਵਿੱਚ ਬੀਜਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਖਿਆਲ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਕਿ ਪਨੀਰੀ 25 ਤੋ 30 ਦਿੱਨ ਵਿੱਚ ਖੇਤ ਚ ਲੱਗ ਜਾਵੇ
Posted by amanjot singh
Punjab
04-04-2019 09:41 PM
ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਸੈਂਪਲ ਲੈਣ ਲਈ ਖੇਤ ਦੇ ਚਾਰੇ ਕਿਨਾਰਿਆਂ ਅਤੇ ਖੇਤ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰਲੇ ਹਿੱਸੇ ਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਲੈਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਦੇ ਚਾਰੇ ਕਿਨਾਰਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰਲੇ ਪਾਸਿਉ (ਤਿੰਨ ਤੋਂ ਚਾਰ ਫੁੱਟ) ਅੰਦਰੋ ਮਿੱਟੀ ਲਓ ਮਿੱਟੀ ਲੈਣ ਲਈ 6-8 ਸੈਟੀਮੀਟਰ ਡੂੰਘੇ ਟੋਏ ਪੁੱਟ ਕੇ ਇੱਕ ਮੁੱਠੀ ਮਿੱਟੀ ਲਓ ਇਸੇ ਤਰਾਂ ਚਾਰੇ ਕਿਨਾਰਿਆਂ ਤੋਂ ਇੱਕ-ਇੱਕ ਮੁੱਠੀ ਇਕੱਠੀ ਕਰੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ .... (Read More)
ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਸੈਂਪਲ ਲੈਣ ਲਈ ਖੇਤ ਦੇ ਚਾਰੇ ਕਿਨਾਰਿਆਂ ਅਤੇ ਖੇਤ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰਲੇ ਹਿੱਸੇ ਤੋਂ ਮਿੱਟੀ ਲੈਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਖੇਤ ਦੇ ਚਾਰੇ ਕਿਨਾਰਿਆਂ ਦੇ ਅੰਦਰਲੇ ਪਾਸਿਉ (ਤਿੰਨ ਤੋਂ ਚਾਰ ਫੁੱਟ) ਅੰਦਰੋ ਮਿੱਟੀ ਲਓ ਮਿੱਟੀ ਲੈਣ ਲਈ 6-8 ਸੈਟੀਮੀਟਰ ਡੂੰਘੇ ਟੋਏ ਪੁੱਟ ਕੇ ਇੱਕ ਮੁੱਠੀ ਮਿੱਟੀ ਲਓ ਇਸੇ ਤਰਾਂ ਚਾਰੇ ਕਿਨਾਰਿਆਂ ਤੋਂ ਇੱਕ-ਇੱਕ ਮੁੱਠੀ ਇਕੱਠੀ ਕਰੋ ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਖੇਤ ਦੇ ਬਿਲਕੁੱਲ ਵਿਚਕਾਰਲੀ ਜਮੀਂਨ ਤੋਂਂ ਵੀ ਇਸੇ ਤਰਾਂ ਮਿੱਟੀ ਲਓ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 5 ਅਲੱਗ-ਅਲੱਗ ਥਾਵਾਂ ਤੋਂ ਇਕੱਠੀ ਕਰੀ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਰਲਾ ਲਓ ਇਸ ਮਿੱਟੀ ਵਿਚਲੇ ਕੰਕਰ ਅਤੇ ਰੋੜ ਬਾਹਰ ਕੱਢ ਦਿਓ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਲੱਗਭੱਗ 800-1000 ਗ੍ਰਾਮ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮਿੱਟੀ ਨੂੰ ਲਿਫਾਫੇ ਵਿੱਚ ਪਾ ਕੇ ਆਪਣੇ ਨਾਮ ਦਾ ਲੇਬਲ ਨਾਲ ਲਗਾ ਕੇ ਆਪਣੇ ਜ਼ਿਲੇ ਦੇ ਕ੍ਰਿਸ਼ੀ ਵਿਗਿਆਨ ਕੇਂਦਰ ਦੇ ਮਿੱਟੀ ਜਾਂਚ ਕੇਂਦਰ ਭੇਜ ਦਿਓ ਇਹ ਮਿੋੱਟੀ ਦਾ ਟੈਸਟ 15-20 ਦਿਨਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਚੈਂਕ ਹੋ ਕੇ ਤੁਹਾਡੇ ਕੋਲ ਰਿਪੋਰਟ ਆ ਜਾਵੇਗੀ

Posted by AbhishekSingh
Uttar Pradesh
04-04-2019 09:35 PM
अभिषेक जी यह फंगस के कारण गिर रहे है, इसके लिए आप Planofix@4ml को 15 लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें, धन्यवाद

Posted by armaan
Punjab
04-04-2019 09:33 PM
Armaan ji kirpa karke isdi photo bhejo ta jo tuhanu is bare poori jankari diti ja sake.dhanwad

Posted by Gurjant singh
Punjab
04-04-2019 09:30 PM
ਜਦੋਂ ਕਿਤੇ ਪੰਜਾਬ ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦਾ ਕਿਸਾਨ ਮੇਲਾ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਤਾਂ ਤੁਸੀ ਉੱਥੋ ਮਸ਼ਰੂਮ ਵਾਲੀ ਕਿਤਾਬ ਖਰੀਦ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜਾ ਫਿਰ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ ਵੀ ਖਰੀਦ ਸਕਦੇ ਹੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉੱਥੋ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗੀ
Posted by Harbans singh gill
Punjab
04-04-2019 09:23 PM
Daljit singh Pussa 1718 da beej len lai tusi apne nere de KVK nal samparak kar sakde ho ja fir tusi Punjab Seed Company 9814130282 nal vi samparak kar sakde ho.

Posted by ashok sonavane
Maharashtra
04-04-2019 09:21 PM
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है अच्छे निकास वाली दोमट मिट्टी अंजीर की खेती के लिए उपयुक्त होती है इसकी खेती के लिए मिट्टी की पी एच 7—8 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Brown Turkey:- यह मध्यम से बड़ी आकार की, स्वादिष्ट और फल पर गहरे रंग की धारियां और मध्यम आकार की आंख होती है फल के छिल्के का रंग गहरा बैंगनी और तन.... (Read More)
इसे मिट्टी की कई किस्मों में उगाया जाता है अच्छे निकास वाली दोमट मिट्टी अंजीर की खेती के लिए उपयुक्त होती है इसकी खेती के लिए मिट्टी की पी एच 7—8 होनी चाहिए प्रसिद्ध किस्में :-Brown Turkey:- यह मध्यम से बड़ी आकार की, स्वादिष्ट और फल पर गहरे रंग की धारियां और मध्यम आकार की आंख होती है फल के छिल्के का रंग गहरा बैंगनी और तने के आखिरी तक हल्का रंग होता है फल का गुद्दा गुलाबी भूरे रंग और अत्याधिक स्वादिष्ट होता है फल मई के आखिरी सप्ताह से अंत जून में पक जाते हैं इसकी औसतन उपज 53 किलो प्रति वृक्ष होती है गड्डा तैयार करते समय 5 किलो गाय का गोबर नर्सरी गड्डों में डालें और फिर 20—25 किलो फासफोरस और पोटाश खाद डालें बिजाई के लिए मध्य जनवरी से फरवरी के पहले पखवाड़े का समय उपयुक्त होता है 6x6 मीटर फासले का प्रयोग करें प्रजनन विधि का प्रयोग किया जाता है प्रजनन मुख्यत: कलम विधि द्वारा किया जाता है कलम 30—45 सैंमी. लंबी लगभग 3—4 कलियों के साथ होनी चाहिए यह पिछले वर्ष के पौधे से ली जाती है प्रति एकड़ भूमि पर बिजाई के लिए 150 पौधों की आवश्यकता होती है अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए युवा के साथ साथ प्रौढ़ अंजीर के वृक्षों में पर्याप्त पोषण सुनिश्चित किया जाना चाहिए पौधे की उम्र और मिट्टी की किस्म के अनुसार पोषक तत्वों की मात्रा विभिन्न होती है नाइट्रोजन को तीन भागों में बांटे, पहले भाग में से आधी मात्रा को दो महीने बाद फलों के विकसित होने पर डालें अंजीर के वृक्षों को कम गहरी जड़ें होने के कारण गर्म और शुष्क मौसम जल्दी प्रभावित करता है फल की वृद्धि के दौरान हल्की और बराबर सिंचार्इ् करें और फल पकने के समय बहुत ज्यादा पानी देने से फल फट सकते हैं अंजीर के पौधों की सिधाई संशोधित जड़ ढंग से की जाती है सिधाई का काम बिजाई के 3—4 वर्ष के अंदर पूरा कर लिया जाता है अंजीर का फल आमतौर पर चल रहे मौसम के दौरान फूटी नई शाखाओं के पत्तों की धुरी पर लगता है सर्दियों में हल्की कांट — छांट से नई शाखाएं जल्दी बनती हैं और भरपूर फल लगता है हर तीसरे वर्ष अंजीर के पौधों की भरपूर कटाई करनी चाहिए इसके अलावा पिछले वर्ष की पतली, सूखी, टूटी हुई और बीमार टहनियां भी काट दें और काटे हुए सिरों पर बोर्डो पेस्ट लगाएं इसको आप लोकल मार्किट में बेच सकते है

Posted by Navdeep
Punjab
04-04-2019 09:21 PM
tuci usde bethn wali jagah te safai da purra dian rkho ji, uss nu vitum-h liquid 10ml rojana, bovimin-gl liquid 7ml rojana dena suru kro ate jakham te Coolmac tube lgwao ji.

Posted by Navdeep
Punjab
04-04-2019 09:18 PM
Navdeep ji tusi Os di pic upload karo ji nall hi Age v dasso ji.

Posted by Ranjeet singh
Punjab
04-04-2019 09:16 PM
ਜੇਕਰ ਗਾਂ ਗਰਮੀ ਮੰਂਨਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਲਈ ਤੁਸੀਂ 1 ਕੋਰਾ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਘੜਾ ਲਵੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਅੱਧਾ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਭਰ ਲਵੋ ਰਾਤ ਨੂੰ ਉਸ ਘੜੇ ਵਿੱਚ 1 ਪੇਸੀ ( ਡਲਾ) ਗੁੜ ਦੀ ਅਤੇ 1 ਗੁੰਨੇ ਹੋਏ ਆਟੇ ਦਾ ਪੇੜਾ ਮਿਲਾ ਦੇਵੋ ਇਸ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਰਾਤ ਨੂੰ ਰੱਖ ਦਿਊ ਤੇ ਸਵੇਰ ਵੇਲੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰਾ ਘੋਲ ਲਵੋ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਘੋਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਸਵੇਰੇ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਗਾਂ ਨੂੰ ਪਿਆਉ ਇਸ ਤਰਾ.... (Read More)
ਜੇਕਰ ਗਾਂ ਗਰਮੀ ਮੰਂਨਦੀ ਹੈ ਤਾਂ ਉਸ ਲਈ ਤੁਸੀਂ 1 ਕੋਰਾ ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਘੜਾ ਲਵੋ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਅੱਧਾ ਪਾਣੀ ਨਾਲ ਭਰ ਲਵੋ ਰਾਤ ਨੂੰ ਉਸ ਘੜੇ ਵਿੱਚ 1 ਪੇਸੀ ( ਡਲਾ) ਗੁੜ ਦੀ ਅਤੇ 1 ਗੁੰਨੇ ਹੋਏ ਆਟੇ ਦਾ ਪੇੜਾ ਮਿਲਾ ਦੇਵੋ ਇਸ ਮਿਸ਼ਰਣ ਨੂੰ ਰਾਤ ਨੂੰ ਰੱਖ ਦਿਊ ਤੇ ਸਵੇਰ ਵੇਲੇ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਤਰਾ ਘੋਲ ਲਵੋ ਚੰਗੀ ਤਰਾਂ ਘੋਲਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇਸ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਸਵੇਰੇ ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਗਾਂ ਨੂੰ ਪਿਆਉ ਇਸ ਤਰਾਂ ਤੁਸੀ ਲਗਾਤਾਰ 8-10 ਦਿਨ ਤੱਕ ਪਿਆ ਦਿਉ ਇਸ ਨਾਲ ਗਾਂਵਾਂ ਗਰਮੀ ਨਹੀ ਮੰਨਦੀਆਂ ਬਾਕੀ ਖੁੱਲਾ ਰੱਖੋ ਤੇ ਪਾਣੀ ਖੁੱਲਾ ਪਿਆਓ.
Posted by navkiran singh
Punjab
04-04-2019 09:12 PM
navkiran ji hanji eh 1121 di hi sodh hai.isda beej tuci najdiki krishi vigyan kendra to lai sakde ho.dhanwad

Posted by manvir singh
Punjab
04-04-2019 09:08 PM
ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਵਿਆਪਕ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਵਧੀਆ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਪਹਾੜੀ ਮਿੱਟੀ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਭਾਰੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਨਾ ਕਰੋ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 6.5-7.0 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ, ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਸਮਤਲ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਆਖਰੀ ਵਾਰ ਵਾਹੀ ਸਮੇਂ, ਗਲੀ-ਸ.... (Read More)
ਇਸ ਨੂੰ ਮਿੱਟੀ ਦੀਆਂ ਵਿਆਪਕ ਕਿਸਮਾਂ ਵਿੱਚ ਉਗਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਵਧੀਆ ਨਿਕਾਸ ਵਾਲੀ ਪਹਾੜੀ ਮਿੱਟੀ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ ਅਨੁਕੂਲ ਹੈ ਰੇਤਲੀ ਅਤੇ ਭਾਰੀ ਮਿੱਟੀ ਵਿੱਚ ਇਸ ਦੀ ਖੇਤੀ ਨਾ ਕਰੋ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਲਈ ਮਿੱਟੀ ਦਾ pH 6.5-7.0 ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਪਪੀਤੇ ਦੀ ਖੇਤੀ ਦੇ ਲਈ, ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਤਿਆਰ ਜ਼ਮੀਨ ਦੀ ਲੋੜ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਜ਼ਮੀਨ ਨੂੰ ਸਮਤਲ ਕਰਨਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਆਖਰੀ ਵਾਰ ਵਾਹੀ ਸਮੇਂ, ਗਲੀ-ਸੜੀ ਰੂੜ੍ਹੀ ਦੀ ਖਾਦ ਪਾਓ 150-200 ਗ੍ਰਾਮ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਵਿੱਚ ਵਰਤੋ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ, ਮਿੱਟੀ ਤੋਂ ਪੈਦਾ ਹੋਣ ਵਾਲੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਬਚਾਅ ਲਈ ਕਪਤਾਨ 3 ਗ੍ਰਾਮ ਨਾਲ ਪ੍ਰਤੀ ਕਿਲੋ ਬੀਜਾਂ ਨੂੰ ਸੋਧੋ ਜੁਲਾਈ ਦੇ ਦੂਜੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਤੀਜੇ ਹਫਤੇ ਤੱਕ ਬੀਜਾਂ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਸਤੰਬਰ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਹਫਤੇ ਤੋਂ ਅੱਧ ਅਕਤੂਬਰ ਤੱਕ ਰੋਪਣ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਪੌਦਿਆਂ ਵਿੱਚਲਾ ਫਾਸਲਾ 1.5x1.5 ਮੀਟਰ ਰੱਖੋ ਬੀਜ ਨੂੰ 1 ਸੈ.ਮੀ. ਦੀ ਡੂੰਘਾਈ ਤੇ ਬੀਜੋ ਇਸ ਦੀ ਬਿਜਾਈ ਪ੍ਰਜਣਨ ਵਿਧੀ ਦੁਆਰਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਰੋਪਣ ਸਮੇਂ ਕੋਈ ਵੀ ਖਾਦ ਨਾ ਪਾਓ ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਫਰਵਰੀ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ N:P:K(19:19:19) @1 ਕਿਲੋ ਦੋ ਵਾਰ ਪਾਓ ਨਦੀਨਾਂ ਨੂੰ ਹੱਥ ਨਾਲ ਗੋਡਾਈ ਕਰਕੇ ਜਾਂ ਰਸਾਇਣਾ ਦੁਆਰਾ ਰੋਕਿਆਂ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ 1.6 ਲੀਟਰ ਨੂੰ ਪ੍ਰਤੀ 150 ਲੀਟਰ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਗਲਾਈਫੋਸੇਟ ਦੀ ਸਪਰੇਅ ਸਿਰਫ ਨਦੀਨਾਂ ਤੇ ਹੀ ਕਰੋ , ਮੁੱਖ ਫਸਲ ਤੇ ਨਾ ਕਰੋ ਮੌਸਮ, ਫਸਲ ਦੇ ਵਾਧੇ ਅਤੇ ਮਿੱਟੀ ਦੀ ਕਿਸਮ ਦੇ ਆਧਾਰ ਤੇ ਸਿੰਚਾਈ ਕਰੋ ਮੁੱਖ ਤੌਰ ਤੇ ਫਲ਼ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਆਕਾਰ ਲੈਣ ਅਤੇ ਹਰੇ ਤੋਂ ਹਲਕਾ ਪੀਲੇ ਰੰਗ ਦਾ ਹੋਣ ਤੇ ਤੁੜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਪਹਿਲੀ ਤੁੜਾਈ ਬਿਜਾਈ ਤੋਂ 14-15 ਮਹੀਨੇ ਬਾਅਦ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ ਹਰ ਮੌਸਮ ਵਿੱਚ 4-5 ਵਾਰ ਤੁੜਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ

Posted by Sukhwinder Pal
Punjab
04-04-2019 09:07 PM
सुखविंदर जी पोषक तत्वों के बारे में उचित जानकारी के लिए आप सोमवीर सिंह से 9878733551 पर संपर्क कर सकते हैं

Posted by gurbir singh
Punjab
04-04-2019 09:06 PM
beetal bakri de bache lain layi tusi 9317517763 number te sandeep singh ji nal gal karo ji.

Posted by ਸੁਖਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
04-04-2019 09:04 PM
mircha tat di kami de karn full sit dindiayn han isde layi tuc NPK 19:19:19@ 7gram nu prati litre pani de hisab nal spray karo.is to ilava M-45@4 gram prati litre pani de hisab nal spray karo.dhanwad

Posted by manvir singh
Punjab
04-04-2019 09:04 PM
manvir singh hnji poultry di waste tusi makki di fasal layi vart sakde ho ji.
Posted by sultan singh
Punjab
04-04-2019 09:03 PM
sultan singh ji 72 weeks me yeh 275 eggs deti hai.

Posted by Goldy Bhullar
Punjab
04-04-2019 09:03 PM
ਖਰਗੋਸ਼ ਪਾਲਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਕੰਪਨੀਆਂ ਨਾਲ ਕੋਨਟਰੈਕਟ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਤੁਸੀ 1 ਯੂਨਿਟ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਕ ਯੂਨਿਟ ਵਿੱਚ 3 ਮੇਲ ਤੇ 10 ਫੀਮੇਲ ਖਰਗੋਸ਼ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇੱਕ ਯੂਨਿਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੱਗਭੱਗ 30000 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਸ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ 30X35 ਦਾ ਸ਼ੈਡ ਬਣਾਉਣਾ ਪਵੇਗਾ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਫੀਡ ਅਤੇ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਪੱਠੇ.... (Read More)
ਖਰਗੋਸ਼ ਪਾਲਣ ਲਈ ਤੁਸੀ ਕੰਪਨੀਆਂ ਨਾਲ ਕੋਨਟਰੈਕਟ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਤੁਸੀ 1 ਯੂਨਿਟ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਇਕ ਯੂਨਿਟ ਵਿੱਚ 3 ਮੇਲ ਤੇ 10 ਫੀਮੇਲ ਖਰਗੋਸ਼ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇੱਕ ਯੂਨਿਟ ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੱਗਭੱਗ 30000 ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮਿਲ ਜਾਵੇਗਾ ਇਸ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ 30X35 ਦਾ ਸ਼ੈਡ ਬਣਾਉਣਾ ਪਵੇਗਾ ਬਾਕੀ ਜੇਕਰ ਇਹਨਾਂ ਦੀ ਖੁਰਾਕ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰੀਏ ਤਾਂ ਇਹਨਾਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਫੀਡ ਅਤੇ ਇੱਕ ਟਾਈਮ ਪੱਠੇ ਖਵਾਉਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਹ ਲੱਗਭੱਗ 3 ਮਹੀਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਵੇਚਣ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਤੁਸੀ ਇਸ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਲਈ ਪੈਰਾਡਾਈਜ਼ ਕੰਪਨੀ ਨਾਲ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਜਿੰਨਾਂ ਦਾ ਸੰਪਰਕ ਨੰਬਰ 9466419455 ਤੇ ਸੰਪਰਕ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋਂ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਅਤੇ ਮਾਰਕੀਟਿੰਗ ਦੀ ਸਾਰੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਇਹ ਕੰਪਨੀ ਹੀ ਦੇਵੇਗੀ ਜੀ.

Posted by guri singh
Punjab
04-04-2019 09:01 PM
Os da Brusilosis test karwao ji
Posted by Baldev Kamboj
Punjab
04-04-2019 08:56 PM
Baldev ji is vich koi fark nahi hai ehna dona da kam ik hi hai.dhanwad

Posted by Shivam singh
Uttar Pradesh
04-04-2019 08:55 PM
Shivam ji poly house ki poori jankari ke liye aap Puneet Gupta:- 9780200996 se samparak kare.dhanywad

Posted by gurmukh singh
Punjab
04-04-2019 08:52 PM
Gurmukh singh ji OS nu Injection Zoctim 2.5gm Intravenous ekk Injection lagwo te nall Injection Megludyne 20ml Injection Isoflud 5ml Injection C.R.B 20ml Injection Vitame-H 5ml 3din lao ekk din Zoctim to badh vich Injection Amoxirum Fort 4.5gm agle 2 din lao ji
Posted by alok kumar
Uttar Pradesh
04-04-2019 08:46 PM
सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 .... (Read More)
सिंचित और कम बारानी वाले क्षेत्रों के लिए लगभग 41-50 किलो नाइट्रोजन (यूरिया 90-110 किलो), 30 किलो फासफोरस (एस एस पी 190 किलो) और 27 किलो पोटाश (म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा रोपाई के समय डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटकर, नाइट्रोजन का 1/4 हिस्सा शाखाएं निकलने के समय और 1/4 हिस्सा बालियां निकलने के समय डालें जल जमाव वाले क्षेत्रों में नाइट्रोजन 30-41 किलो (यूरिया 65-90 किलो) प्रति एकड़ में शुरूआती खुराक के तौर पर डालें कम बारानी क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23-32 किलो (यूरिया 52-70 किलो) और फासफोरस 16 किलो (एस एस पी 100 किलो) प्रति एकड़ में प्रयोग करें नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफोरस की पूरी मात्रा रोपाई से पहले और बाकी बची नाइट्रोजन बालियां निकलने के समय डालें ऊंचे क्षेत्रों के लिए नाइट्रोजन 23 किलो (यूरिया 52 किलो), फासफोरस 12 किलो (एस एस पी 75 किलो) और पोटाश 12 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 20 किलो) प्रति एकड़ में डालें नाइट्रोजन की आधी और फासफोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बिजाई के तीन सप्ताह बाद डालें बाकी बची नाइट्रोजन को दो भागों में बांटे पहले भाग को बिजाई के 6 सप्ताह बाद और दूसरे भाग को बालियां निकलने के समय डालें

Posted by Billa Babani
Punjab
04-04-2019 08:38 PM
punjab vich gobhi saro da rate 3500-3600 /quental chal reha hai.
Posted by navkiran singh
Punjab
04-04-2019 08:32 PM
नवकिरण जी पौधे को 100-150 ग्राम यूरिया डालें, पौधा ग्रोथ करने लग जायेगा, धन्यवाद

Posted by Babbal
Punjab
04-04-2019 08:31 PM
babbal ji isde layi 1 ltr 2,4 D (38 % ) ik acar vich 120 ltr pani vich mila ke spray kro.dhanwad

Posted by Pritpal Sandhu
Punjab
04-04-2019 08:13 PM
ਉਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਘਰ ਵਿਚ ਖੁਰਾਕ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ), ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ, ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ), DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ), ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ .... (Read More)
ਉਸਦੇ ਲਈ ਤੁਸੀ ਘਰ ਵਿਚ ਖੁਰਾਕ ਤਿਆਰ ਕਰਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ ਸੰਤੁਲਿਤ ਖੁਰਾਕ 100 ਕਿਲੋ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸਮੱਗਰੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਜਿਵੇਂ 25 ਕਿਲੋ ਅਨਾਜ ( ਜਵਾਰ, ਬਾਜਰੀ (ਸਰਦੀਆਂ) , ਕਣਕ, ਜੌਂ ( ਗਰਮੀਆ) ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ ) , ਦਾਲ ਚੂਰੀ 20 ਕਿਲੋ( ਮੂੰਗੀ ਚੂਰੀ, ਮਾਂਹ ਚੂਰੀ, ਮੋਠ ਚੂਰੀ ( ਕੇਵਲ ਸਰਦੀਆਂ ਲਈ), ਮਸੁਰ ਚੂਰੀ, ਅਰਹਰ, (ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ ), DOC 25 ਕਿਲੋ ( ਚੌਲਾਂ ਦਾ ਚੂਰਾ ), ਫਾਈਬਰ ਛਿਲਕਾ 15 ਕਿਲੋ (ਕਣਕ, ਚੌਕਰ, ਚਨਾ ਛਿਲਕਾ, ਮਟਰ ਛਿਲਕਾ, ਇਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਇੱਕ), ਖਲ਼ 14 ਕਿਲੋ(ਸਰੋਂ, ਬਿਨੌਲਾ ਜਾਂ ਸੋਇਆ (ਇਹਨਾਂ ਵਿੱਚੋ ਕੋਈ ਇੱਕ), ਮਿੱਠਾ ਸੋਡਾ 250 ਗ੍ਰਾਮ, 1 ਕਿਲੋ ਨਮਕ, ਗੁੜ 1 ਕਿਲੋ, 1 ਕਿੱਲੋ ਹਲਦੀ (ਸਰਦੀਆ ਵਿੱਚ ), 1 ਕਿਲੋ ਮਿਨਰਲ ਮਿਕਸਰ ਇਹ ਨੂੰ ਰਲਾ ਲਵੋ ਇਹ ਫੀਡ ਪਸ਼ੂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਲਾਹੇਵੰਦ ਹੁੰਦੀ ਹੈ , ਬਾਕੀ ਇਸਦੇ ਨਾਲ Enerboost ਪਾਊਡਰ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਰੋਜਾਨਾ ਦਿਓ , ਇਸ ਨਾਲ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਕਮਜ਼ੋਰੀ ਦੂਰ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਬਾਕੀ ਫੀਡ ਤੁਸੀ ਉਸ ਨੂੰ 2 ਕਿਲੋ ਦੁੱਧ ਮਗਰ 1 ਕਿਲੋ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ.
Posted by sukhmander Singh
Punjab
04-04-2019 08:13 PM
SML 832: ਇਹ ਗਰਮੀ ਰੁੱਤ ਵਿੱਚ ਬੀਜਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਬੂਟਾ ਦਰਮਿਆਨੇ ਕੱਦ ਦਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਕਿਸਮ 60 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਦੀ ਹਰ ਫਲੀ ਵਿੱਚ 10 ਦਾਣੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੇ ਦਾਣੇ ਦਰਮਿਆਨੇ ਤੇ ਚਮਕੀਲੇ ਹਰੇ ਰੰਗ ਦੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਇਸ ਦੀ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 4.6 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਗਰਮੀ ਰੁੱਤ ਲਈ 12-15 ਕਿਲੋ ਬੀਜ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਬੀਜੋ ਇਸਦਾ ਕੱਦ 101cm ਹੁੰਦਾ ਹੈ
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