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Posted by satinder josan
Punjab
10-04-2019 03:39 PM
Punjab
04-11-2019 02:44 PM
ਤੁਸੀਂ ਇਸਨੂੰ Lactomood ਹੋਮਿਓਪੈਥੀ ਦਵਾਈ ਦੀਆਂ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਚ 3 ਵਾਰ ਦੇਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਾਂ ਤੁਸੀਂ ਉਸਨੂੰ Fast-M ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੁੱਧ ਚੋਣ ਤੋਂ ਅੱਧਾ ਘੰਟਾ ਪਹਿਲਾਂ ਉਸਦੇ ਨੱਕ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਇਸ ਨਾਲ ਉਹ ਦੁੱਧ ਆਰਾਮ ਨਾਲ ਉਤਾਰ ਦੇਵੇਗੀ ਇਹ ਤੁਸੀਂ ਹੋਮਿਓਪੈਥੀ ਸਟੋਰ ਤੋਂ ਪਤਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦਾ ਰਿਜ਼ਲਟ ਵਧੀਆ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀਂ Anabolite liquid 100ml , milkout powder 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜ਼ਾ.... (Read More)
ਤੁਸੀਂ ਇਸਨੂੰ Lactomood ਹੋਮਿਓਪੈਥੀ ਦਵਾਈ ਦੀਆਂ 10-10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਚ 3 ਵਾਰ ਦੇਣੀਆਂ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ ਜਾਂ ਤੁਸੀਂ ਉਸਨੂੰ Fast-M ਹੋਮਿਓਪੈਥਿਕ ਦਵਾਈ ਦੁੱਧ ਚੋਣ ਤੋਂ ਅੱਧਾ ਘੰਟਾ ਪਹਿਲਾਂ ਉਸਦੇ ਨੱਕ ਤੇ ਸਪਰੇਅ ਕਰੋ ਇਸ ਨਾਲ ਉਹ ਦੁੱਧ ਆਰਾਮ ਨਾਲ ਉਤਾਰ ਦੇਵੇਗੀ ਇਹ ਤੁਸੀਂ ਹੋਮਿਓਪੈਥੀ ਸਟੋਰ ਤੋਂ ਪਤਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ ਇਸਦਾ ਰਿਜ਼ਲਟ ਵਧੀਆ ਹੈ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀਂ Anabolite liquid 100ml , milkout powder 2-2 ਚਮਚ ਸਵੇਰੇ ਸ਼ਾਮ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ.
Posted by Amandeep Singh
Haryana
10-04-2019 03:37 PM
Punjab
04-11-2019 05:52 AM
बिजाई का समय बिजाई मध्य जुलाई से मध्य अगस्त में पूरी कर लें बीज की मात्रा बिजाई के लिए 8-10 किलो बीज प्रति एकड़ में प्रयोग करें
Posted by विशवेशवर सिंह
Himachal Pradesh
10-04-2019 03:32 PM
Maharashtra
04-11-2019 04:48 PM
नारियल पेड़ (कोकोस न्यूसीफेरा लिन) दुनिया का सर्वाधिक उपयोगी पेड़ है इसका प्रत्येक हिस्सा किसी न किसी रूप में मानव का लिए उपयोगी है अत: इसे प्यार से कल्पवृक्ष यानी स्वर्ग का वृक्ष कहा गया है नारियल का गरी सुखाकर प्राप्त किया जाने वाला खोपड़ा वनस्पतिक तेल का सर्वोत्तम स्रोत है जिसमें 65 से 70 प्रतिशत तेल निहित ह.... (Read More)
नारियल पेड़ (कोकोस न्यूसीफेरा लिन) दुनिया का सर्वाधिक उपयोगी पेड़ है इसका प्रत्येक हिस्सा किसी न किसी रूप में मानव का लिए उपयोगी है अत: इसे प्यार से कल्पवृक्ष यानी स्वर्ग का वृक्ष कहा गया है नारियल का गरी सुखाकर प्राप्त किया जाने वाला खोपड़ा वनस्पतिक तेल का सर्वोत्तम स्रोत है जिसमें 65 से 70 प्रतिशत तेल निहित है नारियल दोमट,मखराली,तटीय रेत,जलोढ़, मटियारी जैसे विभीन्न प्रकार के मृदाओं में और कच्छारी निम्न भूमि के मृदा में उगाया जाता है उचित जलनिकासी व्यवस्था, अच्छी जलधारण क्षमता, 3 मीटर के भीतर जलाशय की उपलब्धता और सतह से 2 मीटर के भीतर चट्टान या कोई ठोस वस्तु एवं न होना आदि ताड़ो के बेहतर बढ़वार और निष्पादन हेतु मृदा अनुकूल परिस्थितियाँ हैं नारियल के मुख्यत: दो किस्में हैं, लंबा और बौना लंबी प्रजातियों में व्यापक तौर पर पश्चिम तटीय और तटीय लंबा उगाए जाते हैं बौनी प्रजातियाँ आकार में कम होता है और इसकी आयु भी लंबी प्रजातियों की अपेक्षा कम होता है चुने गए बीजफलों से उगाए जाने वाले पौधों के जरिए नारियल बढ़ावा जाता है सामान्यतया 9 से 12 महीने आयु वाले बीजपौधे रोपण के लिए उपयोग किए जाते हैं 9 से 12 महीने आयु वाले उन पौधों को चुनना चाहिए जिनमें 6 से 8 पत्ते हो तथा जिनका गर्दनी घेरा 10-12 सें-मी. हो बीज पौधों को चुनने का दूसरा मानदंड पत्तियों का जल्दी निकलना भी है नीचे ठोस चट्टानों वाली ऊपरी मिट्टी, जल जमाव वाली निम्न भूमि और मटियारी मृदा आदि नारियल की खेती के लिए उचित नहीं हैं रोपण करने से पहले वर्षा या सिंचाई के जरिए मृदा के लिए आवश्यक नमी प्रदान करना सुनिश्चित कर लेनी चाहिए ढलान वाले क्षेत्रों में तथा लहरदार भूभागों में कोंटूर टेरसिंग या बांधो द्वारा भूमि की तैयारी की जाती है निम्नवर्ती क्षेत्रों में जलीय स्तर से 1 मीटर ऊँचाई में टीला बनाकर रोपण के लिए स्थान तैयार किया जाता है कृषि योग्य बनाए गए “कायल” क्षेत्रों में उन क्षेत्रों में पौध का रोपण किया जाता है कम जल जमाव वाले दोमट मिट्टी में 1 मी. X 1 मी. X 1 मी. आकार का गढ्डा रोपण के लिए उचित हैं नीचे चट्टानों वाली मखरली मिट्टी में 1.2 मी. X 1.2 मी. आकार के बड़े गड्ढे बनाने चाहिए रेतीले मिट्टी में गड्ढे का आकार 0.75 मी. X 0.75 मी. X 0.75 मी. अधिक नहीं होना चाहिए दक्षिण पश्चिम मानसून की शुरूआत के समय बीज पौधों का प्रतिरोपण किया जा सकता है यदि सिंचाई सुविधाएँ उपलब्ध हो तो मानसून शुरू होने के एक महीने पहले पौधे लगाने चाहिए जो की भारी वर्षा शुरू होने से पहले यह अच्छी तरह बढ़ने लगे उत्तर–पूर्वी मानसून शुरू होने के पहले भी रोपण किया जा सकता है निम्नवर्ती इलाकों में मानसून के समय बाढ़ आने की संभावना के मद्देनजर मानसून समाप्त होने के बाद रोपण किया जा सकता है रोपण के पहले गड्ढों में 50 से 60 सें.मी. की गहराई तक ऊपरी मृदा और गोबर पाउडर/कम्पोस्ट से भर देना चाहिए फिर इसके अंदर बीच में एक छोटा गड्ढा बनाकर उसमें बीजफलों से संलग्न पौधा लगाएं बीजफल पूरी तरह छोटे गड्ढे के अंदर आने चाहिए फिर गड्ढा मिट्टी से भरें जल जमाव रोकने के लिए मिट्टी को अच्छी तरह दबाएँ यदि सफेद चींटी का प्रकोप हो तो रोपण से पहले छोटे गड्ढे के अंदर सेविडोल 8जी (5ग्राम) डाल दें मखरली मृदा वाले क्षेत्रों में मिट्टी की स्थिति सुधारने के लिए 2 कि. ग्राम साधारण नमक डाल दें प्रत्येक गड्ढे में 25 से 30 नारियल छिलका गाड़ना नमी संरक्षण के लिए सहायक होता है
Posted by jiwan singh
Punjab
10-04-2019 03:31 PM
Maharashtra
04-11-2019 09:13 AM
jiwan ji kmad Vich nadeena di roktham de tareeke de layi hetha diti photo dekh sakde ho.
Posted by ਡਾ ਭਰਪੂਰ ਸਿੰਘ ਮੰਨਣ
Punjab
10-04-2019 03:28 PM
Maharashtra
04-10-2019 10:29 PM
bharpoor ji eh fungus de karn ho reha hai isde layi tuc copper oxychloride@3 gm ko prati liter Pani ke hisab se spray kare.
Posted by rajendra
Madhya Pradesh
10-04-2019 03:27 PM
Punjab
04-11-2019 08:30 AM
राजेंदर जी कृपया आप बताएं कि यह कौन सी है, यह बासमती धान है या परमल, क्योंकि कई किस्मों के बीज में यह समस्या है
Posted by jaskaran
Haryana
10-04-2019 03:23 PM
Punjab
04-10-2019 04:05 PM
Jashkaran ji Is baar Gehu Ka Smarthan Mull 1840/q Hai.
Posted by Chain singh pundir
Uttar Pradesh
10-04-2019 03:15 PM
Punjab
04-10-2019 04:50 PM
तुलसी का वानस्पातिक नाम ओसिमम सैंकशम है यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Dru.... (Read More)
तुलसी का वानस्पातिक नाम ओसिमम सैंकशम है यह कई तरह की मिट्टी में उगाई जाती है इसकी पैदावार के लिए नमकीन, क्षारीय और पानी खड़ा होने वाली मिट्टी से बचाव करें यह बढ़िया निकास वाली मिट्टी जिसमे बढ़िया जैविक तत्व मौजूद हों, में बढ़िया परिणाम देती है इसके बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का pH 5.5-7 होना चाहिए प्रसिद्ध किस्में:- Drudriha Tulsi,Ram/Kali Tulsi (Ocimum canum),Babi Tulsi,Tukashmiya Tulsi ज़मीन की तैयारी:- तुलसी की खेती के लिए, अच्छी तरह से शुष्क मिट्टी की मांग की जाती है मिट्टी के भुरभुरा होने तक हैरो के साथ खेत की जोताई करें, फिर रूड़ी की खाद मिट्टी में मिलाएं तुलसी की रोपाई सीड बैड पर करें फरवरी के तीसरे महीने में नर्सरी बैड तैयार करें पौधे के विकास के अनुसार, 4.5 x 1.0 x 0.2 मीटर के सीड बैड तैयार करें बीजों को 60x60 सैं.मी. के फैसले पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के 6-7 हफ्ते बाद, फसल की रोपाई खेत में करें तुलसी की खेती के लिए 120 ग्राम बीजों का प्रयोग प्रति एकड़ में करें फसल को मिट्टी से पैदा होने वाली बीमारीयों से रोकथाम के लिए, बिजाई से पहले मैनकोजेब 5 ग्राम प्रति किलोग्राम से बीजों का उपचार करें फसल की बढ़िया पैदावार के लिए बिजाई से पहले 15 टन रूड़ी की खाद मिट्टी में डालें तुलसी के बीजों को तैयार बैडों के साथ उचित अंतराल पर बोयें मानसून आने के 8 हफ्ते पहले बीजों को बैड पर बोयें बीजों को 2 सैं.मी. की गहराई पर बोयें बिजाई के बाद, रूड़ी की खाद और मिट्टी की पतली परत बीजों पर बना दें इसकी सिंचाई फुवारा विधि द्वारा की जाती है रोपाई के 15-20 दिनों के बाद, नए पौधों को तंदरुस्त बनाने के लिए 2% यूरिया का घोल डालें 6 हफ्ते पुराने और 4-5 पत्तों के अंकुरण होने पर अप्रैल के महीने में नए पौधे तैयार होते है तैयार बैडों को रोपाई 24 घंटे पहले पानी लगाएं ताकि पौधों को आसानी से उखाड़ा जा सकें और रोपाई के समय जड़ें मुलायम और सूजी हुई हो खेत की तैयारी के समय, रूड़ी की खाद को मिट्टी में मिलाएं खाद के तौर पर नाइट्रोजन 48 किलो(यूरिया 104 किलो), फासफोरस 24 किलो(सिंगल सुपर फासफेट 150 किलो) और पोटाश 24 किलो(मिउरेट 40 किलो) प्रति एकड़ में डालें नए पौधे लगाने के समय नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फासफेट पेंटोऑक्साइड की पूरी मात्रा शुरुआती समय में डालें Mn 50 पी पी एम कंसंट्रेशन और Co@100 पी पी एम कंसंट्रेशन सूक्ष्म-तत्व डालें बाकी की बची हुई नाइट्रोजन को 2 हिस्सों में पहली और दूसरी कटाई के बाद डालें खेत को नदीनों से मुक्त करने के लिए कसी की मदद से गोड़ाई करें नदीनों की रोकथाम कम न होने पर यह फसल को नुकसान पहुंचाते है रोपण के एक महीने बाद पहली गोड़ाई और पहली गोड़ाई के चार हफ्ते बाद दूसरी गोड़ाई करें रोपण के दो महीने बाद कसी से अनुकूल गोड़ाई करें गर्मियों में, एक महीने में 3 सिंचाइयां करें और बरसात के मौसम में, सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती एक साल में 12-15 सिंचाइयां करनी चाहिए पहली सिंचाई रोपण के बाद करें और दूसरी सिंचाई नए पौधों के स्थिर होने पर करें 2 सिंचाइयां करनी आवश्यक है और बाकी की सिंचाई मौसम के आधार पर करें रोपण के तीन महीने के बाद पौधा पैदावार देनी शुरू कर देता है इसकी तुड़ाई पूरी तरह से फूल निकलने के समय की जाती है पौधे को 15 सैं.मी. जमीन से ऊपर रखकर शाखाओं को काटें ताकि इनका दोबारा प्रयोग किया जा सकें भविष्य में प्रयोग करने के लिए इसके ताज़े पत्तों को धूप में सूखाया जाता है तुड़ाई के बाद, पत्तों को सूखाया जाता है फिर तेल की प्राप्ति के लिए इसका अर्क निकाला जाता है इसको परिवहन के लिए हवादार बैग में पैक किया जाता है पत्तों को सूखे स्थान पर स्टोर किया जाता है इसकी जड़ों से कई तरह के उत्पाद जैसे तुलसी अदरक, तुलसी पाउडर, तुलसी चाय और तुलसी कैप्सूल आदि तैयार किये जाते है
Posted by gautam
Bihar
10-04-2019 03:13 PM
Maharashtra
04-10-2019 10:32 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती ‌‌है
Posted by gautam
Bihar
10-04-2019 03:11 PM
Maharashtra
04-10-2019 10:32 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती ‌‌है
Posted by Chain singh pundir
Uttar Pradesh
10-04-2019 03:09 PM
Punjab
04-10-2019 04:51 PM
इनकी मार्केटिंग के लिए आप Growfurther.in 9826556880 कंपनी से संपर्क कर सकते है यह कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी कराते है धन्यवाद
Posted by Vipin Bahaar
Uttar Pradesh
10-04-2019 03:08 PM
Punjab
04-10-2019 05:26 PM
Vipin Bahaar जी मोती की खेती के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप बिजेंदर चौहान 9719994499 से संपर्क करें.
Posted by Vipin Bahaar
Uttar Pradesh
10-04-2019 03:05 PM
Punjab
04-10-2019 04:04 PM
Vipin Bahaar ji Moti ki kheti ke lia puran jankari or is ki training ke lia aap Bijender Chouhan 9719994499 se samparak kare.
Posted by gautam
Bihar
10-04-2019 02:55 PM
Punjab
04-10-2019 04:02 PM
Gautam ji Moti ki kheti ke lia puran jankari or is ki training ke lia aap Bijender Chouhan 9719994499 se samparak kare.
Posted by satyawan patole
Maharashtra
10-04-2019 02:36 PM
Punjab
04-11-2019 03:03 PM
यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्.... (Read More)
यदि आपने बकरी फार्म बनाना है तो बहुत बढ़िया सोच है आप बीटल नस्ल रखें यह दूध और मीट दोनों के लिए फायदेमंद है बाकि आप जैसे इस व्यवसायों में आएंगे उस हिसाब से आपके लिंक बनने शुरू हो जाएंगे और बाकि मार्केटिंग इस बात निर्भर है कि आपका लोगों के साथ लिंक कैसा है इसका दूध गाय के रेट के बराबर मिल जाता है और बाकि यदि फार्म हो तो बच्चे भी बेचे जाते है कुल मिलाकर यदि मोटा सा हिसाब लगाना है तो एक बकरी से लगभग 20000 तक कमाई हो जाती है बाकि यह भी सलाह है कि आप आपने नज़दीक से ट्रेनिंग ज़रूर लें और सफल बकरी पालकों के फार्म ज़रूर देखें.
Posted by PARMJEET SINGH
Punjab
10-04-2019 02:35 PM
Punjab
04-11-2019 05:54 AM
परमजीत सिंह जी आप planofix किसी भी दुकान से ले सकते हैं, यह हर एक डीलर से मिल जाएगी, यदि यह नहीं मिल रही तो का सोलुशन ले सकते हैं, यह भी planofix वाला काम ही करता है
Posted by kamal kishor
Uttar Pradesh
10-04-2019 02:34 PM
Maharashtra
04-10-2019 10:34 PM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है .... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है
Posted by ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
10-04-2019 02:32 PM
Punjab
04-10-2019 08:05 PM
PR 126 ਘਟ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਪਕਣ ਵਾਲੀ ਕਿਸਮ ਹੈ ਇਸ ਦੀ 1 ਮਹੀਨੇ ਦੀ ਪਨੀਰੀ ਨੂੰ ਖੇਤ ਵਿਚ 25 ਜੂਨ ਤਕ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਜੀ ਇਸ ਵਿੱਚ ਯੂਰੀਆ 110 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਅਤੇ ਪੋਟਾਸ਼ 20 ਕਿਲੋ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਪਾਓ ਜੇਕਰ ਖੇਤ ਵਿਚ ਫਾਸਫੋਰਸ ਦੀ ਘਾਟ ਹੈ ਤਾਂ 27 ਕਿਲੋ DAP ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਪੈਂਦਾ ਹੈ
Posted by omanreet singh sandhu
Punjab
10-04-2019 02:27 PM

Maharashtra
04-10-2019 10:34 PM
सुंडी की रोकथाम: सुंडी की रोकथाम के लिए हरी मिर्च 5 किलो, लहसुन 5 किलो, अक्क के पत्ते 5 किलो, सुखचैन के पत्ते 5 किलो, धतूरा 5 किलो, अरिंड 5 किलो को 10 लीटर गौमूत्र में 4 दिनों के लिए भीगोकर रखें 4 दिन के बाद इन पत्तों को गौमूत्र में मसलें और 1 दिन के लिए छाया में रखें इसको ढककर छाया में रखना ज़रूरी होता है इस घोल को किसी क.... (Read More)
सुंडी की रोकथाम: सुंडी की रोकथाम के लिए हरी मिर्च 5 किलो, लहसुन 5 किलो, अक्क के पत्ते 5 किलो, सुखचैन के पत्ते 5 किलो, धतूरा 5 किलो, अरिंड 5 किलो को 10 लीटर गौमूत्र में 4 दिनों के लिए भीगोकर रखें 4 दिन के बाद इन पत्तों को गौमूत्र में मसलें और 1 दिन के लिए छाया में रखें इसको ढककर छाया में रखना ज़रूरी होता है इस घोल को किसी कपडे के साथ पुन लें और 100 लीटर पानी के हिसाब से एक एकड़ में इसका छिड़काव करें, इससे सुंडी की रोकथाम होती है
Posted by ਗੁਰਦਾਸ ਮਾਨ
Punjab
10-04-2019 02:19 PM
Maharashtra
04-11-2019 02:45 PM
gurdas ji kansue di roktham de layi tuc coragen ja fame 20ml ja regent @10kg ja furadon@10kg ja cartap hydrochloride@10kg prati acre de hisab nal pao.
Posted by avtarsingh rai
Punjab
10-04-2019 02:17 PM
Punjab
04-11-2019 02:55 PM
ਉਸ ਨੂੰ powder Rumilax 200gm ਕੋਸੇ ਪਾਣੀ ਵਿਚ ਮਿਕਸ ਕਰਕੇ ਦਿਓ ਜੀ ਇਸਦੇ ਨਾਲ 250gm ਕੋੜਤੁੰਮੇ ਦੀ ਜੜ੍ਹਾਂ ਤੇ 50 ਗ੍ਰਾਮ ਅਜਵਾਇਨ ਚੰਗੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਬਾਲ ਕੇ ਠਾਰ ਲਵੋ, ਕੋਸਾ ਜਿਹਾ ਹੋਣ ਤੇ 100 ਗ੍ਰਾਮ ਮਿਠਾਸੋਡਾ ਪਾ ਕੇ ਦਿਉ ਜੀ.
Posted by saheb khan hasan khan sepai
Gujarat
10-04-2019 02:14 PM
Punjab
04-11-2019 02:46 PM
कृप्या आप अपना सवाल विस्तार से बताएं कि आप क्या जानकारी लेना चाहते है ताकि आपको सही जानकारी दी जा सके
Posted by arun kumar
Uttar Pradesh
10-04-2019 02:12 PM
Punjab
04-11-2019 04:06 PM
Arun kumar ji nimbu ki aisi koi variety nahi hoti hai jiska vajan 1 killo tak ho kripya aap btaye ke aapne yeh kahi se suna hai ja aapne iski koi video dekhi hai taki aapko iske bare men poori jankari di ja sake.dhanywad
Posted by arun kumar
Uttar Pradesh
10-04-2019 02:07 PM
Punjab
04-10-2019 02:44 PM
अरुण कुमार जी मोती की खेती की पूरी जानकारी और ट्रेनिंग के लिए आप बिजेन्दर चौहान 9719994499 से संपर्क करें
Posted by shubham
Rajasthan
10-04-2019 02:06 PM
Punjab
04-11-2019 04:01 PM
शुभम जी कृपया आप अपना सवाल विस्तार से पूछें कि आप किन्नू और संतरे की खेती के बारे में जानकारी लेना चाहत है ताकि आपको इसके बारे में उचित जानकारी दी जा सके, धन्यवाद
Posted by Deep Sandhawalia
Punjab
10-04-2019 02:06 PM
Punjab
04-11-2019 02:57 PM
ਤੁਸੀ Calcimust gel 300ml ਕਰਕੇ ਲਗਾਤਾਰ 3 ਦਿਨ ਦਿਓ, ਇਸਦੇ ਨਾਲ ਤੁਸੀ Lapnil-P ਪਾਊਡਰ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸਦੀ 1 ਪੁੜੀ 75 ਗ੍ਰਾਮ ਦੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਉਸ ਨੂੰ ਅੱਧਾ ਕਿਲੋ ਬੇਸਨ ਵਿਚ ਮਿਲਾ ਕੇ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰੋ, ਇਸ ਤ੍ਰਾਹ ਤੁਸੀ ਕੁੱਜ ਦਿਨ ਤਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ, ਇਸ ਨਾਲ ਫਰਕ ਪੈ ਜਾਵੇਗਾ, ਉਸਦਾ ਪਿੱਛਾ ਉਚਾ ਰੱਖੋ, ਤੂੜੀ ਘਟ ਪਾਓ.
Posted by jay
Gujarat
10-04-2019 01:41 PM
Punjab
04-29-2019 12:11 PM
हांजी सर इसके लिए आप देखे के आपके नज़दीकी शहर में कौनसी कंपनी चल रही है जैसे मदर डेरी, वेरका या फिर किसी और डेरी के सेंटर चल रहे है फिर आप उसे बात करे वह आपको वह मिन्नी डेरी सेंटर दे सकते है गावों वाले आपके पास दूध ढालेंगे और उस कमपनी की गाड़ी आपके सेंटर दे दूध ले जाया करेगी
Posted by preet
Punjab
10-04-2019 01:37 PM
Punjab
04-10-2019 02:07 PM
ਸ੍ਰੀ ਮਾਨ ਜੀ ਕਣਕ ਦਾ ਸਰਕਾਰੀ ਰੇਟ ਸਰਕਾਰ ਦੁਆਰਾ @1840 ਰੁਪਏ ਪ੍ਰਤੀ ਕੁਇੰਟਲ ਤੈਅ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ ਜੀ
Posted by ਕੁਲਵੀਰ ਸਿੰਘ
Punjab
10-04-2019 01:36 PM
Punjab
04-10-2019 02:08 PM
ਝੋਨੇ ਦੀਆਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕਿਸਮਾਂ:-PR-126:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਘਟ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ 123 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PR:-127 ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 137 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ PR121 ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 140 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ PR 124 ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍.... (Read More)
ਝੋਨੇ ਦੀਆਂ ਸਿਫਾਰਿਸ਼ ਕਿਸਮਾਂ:-PR-126:-ਇਹ ਕਿਸਮ ਘਟ ਸਮਾਂ ਲੈਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ 123 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PR:-127 ਇਸਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 137 ਦਿਨਾਂ ਦੀ ਕਿਸਮ ਹੈ PR121 ਇਸ ਕਿਸਮ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 140 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ PR 124 ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 30.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 135 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸ ਵਿੱਚ ਭੂਰੇ ਧੱਬੇ ਦਾ ਹਮਲਾ ਜਿਆਦਾ ਆਉਂਦਾ ਹੈ PR 122 ਇਹ ਕਿਸਮ 147 ਦਿਨ ਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਝਾੜ 31.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ PR 123 ਇਸ ਦਾ ਔਸਤਨ ਝਾੜ 29 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ 143 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ PR-114 ਇਹ ਕਿਸਮ ਨਿਰਯਾਤ ਲਈ ਢੁੱਕਵੀਂ ਹੈ ਇਸ ਦਾ ਝਾੜ 27.5 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ ਅਤੇ 145 ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਪਕ ਕੇ ਤਿਆਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਝੋਨੇ ਦੀ ਪਨੀਰੀ 15-20 ਮਈ ਨੂੰ ਲਗਾ ਸਕਦੇ ਹੋ ਅਤੇ ਪੁੱਟ ਕੇ ਖੇਤ ਵਿਚ 20 ਜੂਨ ਤੋਂ ਲਗਾਓ
Posted by SATVANT SINGH
Rajasthan
10-04-2019 01:34 PM
Maharashtra
04-10-2019 05:48 PM
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है ब.... (Read More)
एलोवेरा का प्रयोग आयुर्वेदिक दवाईयों में बड़े स्तर पर होता है आजकल कई नेशनल और इंटर नेशनल कंपनियां इसका प्रयोग चिकित्सा के साथ साथ सुंदरता उत्पाद जैसे क्रीम, शैंपू, दंत पेस्ट और कई सारे उत्पाद में इसका प्रयोग होता है मिट्टी - एलोवेरा के पौधों को किसी भी प्रकार की उपजाऊ/अनउपजाऊ मिट्टी में उगाया जा सकता है बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि पौधा ज्यादा पानी वाली और ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगह पर नहीं लगाना है कम पानी और रेतली भूमि में लगाने के लिए यह सबसे अच्छी फसल है खेत की तैयारी - खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले खेत की 2 बार अच्छी तरह जोताई करके उसमें प्रति हेक्टेयर 10 से 20 टन में पुरानी रूड़ी की खाद डालें साथ ही 120 किलोग्राम यूरिया + 150 किलोग्राम फास्फोरस + 30 किलोग्राम पोटाश इन्हें खेत में समान रूप से बिखेर दें फिर एक बार हल्की जोताई और कराहे से भूमि को समतल कर लें फिर खेत में 50x50 सैं.मी. की दूरी पर मेंड़ें बना लें पौधे की रोपाई और देख रेख - पौधे की रोपाई किसी भी समय की जा सकती है पर अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए जून- जुलाई या फरवरी- मार्च में कर सकते हैं एलोवेरा की रोपाई मेंड़ों पर होती है यह पौधे किसी पुरानी एलोवेरा फार्म या नर्सरी से प्राप्त किए जा सकते हैं यही पौधे बाद में पनीरी के रूप में प्रयोग किए जाते हैं इस विधि को रूट सक्कर कहा जाता है अच्छी उपज के लिए किस्में - सिम सितल, L 1 , 2 , 5 और 49 लगाएं जिसमें जैल की मात्रा ज्यादा पायी जाती है इसके अलावा नेशनल बोटनीकल और प्लांट जैनेटिक रिसोर्स, आई. सी. ए. आर द्वारा रिलीज़ की गई किस्में IC111271, IC111269, IC111280 आदि हैं मेंड़ों पर 50 x 50 सैं.मी. की दूरी पर पौधों को लगाएं पौधे से पौधे की दूरी 50 सैं.मी. रखने पर प्रति एकड़ में 15000 पौधों की रोपाई की जरूरत पड़ेगी सिंचाई - सिंचाई साल भर में इसे सिर्फ 4 से 5 बार सिंचाई की जरूरत होती है सिंचाई के लिए ड्रिप प्रणाली अच्छी रहती है इससे इसकी उपज में वृद्धि होती है गर्मी क दिनों में 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए कीट और बीमारियां - वैसे इस फसल पर कोई विशेष कीट और रोगों का प्रभाव नहीं होता है पर कहीं कहीं तने के सड़ने और पत्तियों पर दाग वाली बीमारियों का असर देखा गया है जो एक फंगस रोग होता है उसके उपचार के लिए मैनकोजेब 3 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए कटाई - यह फसल एक साल बाद काटने के लायक हो जाती है कटाई के दौरान पौधों की सबसे पहले निचली ठोस 3 या 4 पत्तों की कटाई करें उसके बाद लगभग 1 महीने के बाद उससे ऊपर वाली पत्तियों की कटाई करनी चाहिए कभी भी ऊपर वाली नई नाज़ुक पत्तियों की कटाई ना करें कटी हुई पत्तियों में फिर नई पत्तियां बननी शुरू हो जाती हैं प्रति हेक्टेयर में 50 से 60 टन ताजी पत्तियां प्रति वर्ष मिल जाती हैं दूसरे वर्ष में 15 से 20 फीसदी वृद्धि होती है बाजार में इसकी पत्तियों की अनुमानित कीमत 3 से 6 रूपये किलो होती है एक तंदरूस्त पौधे से एक साल में लगभग 3-4 किलो पत्तियां ली जा सकती हैं इस तरह एक वर्ष में एक एकड़ में से 1.5 से 3 लाख की फसल हो जाती है एलोवेरा का प्रयोग तंदरूस्त पत्तियों की कटाई के बाद साफ पानी से धोकर पत्तियों के निचली ओर ब्लेड या चाकू से कट लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ देते हैं जिसमें पीले रंग का गाढ़ा चिपचिपा रस (जेल) निकलता है उसे एक टैंक में इकट्ठा करके इस रस को सुखा लिया जाता है इस सूखे हुए रस को अलग अलग ढंग से तैयार करने के बाद अलग अलग नामों से जाना जाता है जैसे कि सकोतरा केप जब फसल पूरी तरह तैयार हो जाये और उसकी कटाई कर ली जाये तो उसे आप सब्जी मंडी में सीधे तौर पर बेच सकते हैं यदि आप खुद मंडी में बेचते हैं तो आपको अंदाजन 5 से 10 रूपये प्रति किलो तक मुल्य मिल सकता है पर यदि आप किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करते हो तो इसका रेट उस कंपनी की जरूरत और शर्तों के मुताबिक उस कंपनी के द्वारा तय होता है यह मुल्य आपकी उनके साथ डीलिंग पर निर्भर करता है
Posted by Nirvair Singh
Punjab
10-04-2019 01:32 PM
Punjab
04-11-2019 03:09 PM
ਉਸ ਨੂੰ Liquid Udder Pox 15ml 10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ ਜੀ ਇਸ ਨਾਲ Injection Avil 10ml, Injection Enthimelon 50ml ਲਓ ਅਤੇ 15ml ਇਕ ਦਿਨ ਛੱਡ ਕੇ ਲਗਵਾਓ ਜੀ ..
Posted by sidhu
Punjab
10-04-2019 01:30 PM
Punjab
04-11-2019 04:02 PM
Sidhu ji is bare visthar vich jankari lai tusi Lakhwinder Singh Gill 9463162531,9779205444 nal samparak kar sakde ho.
Posted by Nirvair Singh
Punjab
10-04-2019 01:27 PM
Punjab
04-11-2019 03:09 PM
ਉਸ ਨੂੰ Liquid Udder Pox 15ml 10 ਬੂੰਦਾਂ ਦਿਨ ਵਿਚ 3 ਵਾਰ ਦਿਓ ਜੀ ਇਸ ਨਾਲ Injection Avil 10ml, Injection Enthimelon 50ml ਲਓ ਅਤੇ 15ml ਇਕ ਦਿਨ ਛੱਡ ਕੇ ਲਗਵਾਓ ਜੀ.
Posted by ਸੰਦੀਪ ਸਿੰਘ
Punjab
10-04-2019 01:18 PM
Maharashtra
04-10-2019 10:36 PM
Sandeep ji aun vale mangalvar nu meeh pain di sambhavna hai baki din mausam saaf rahega.
Posted by Asad Khan
Uttar Pradesh
10-04-2019 01:16 PM
Maharashtra
04-11-2019 02:25 PM
हाथों से लगातार गोडाई करें और पहली कटाई के बाद खेत को नदीन मुक्त करें नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों को नियंत्रित करने के लिए जैविक मल्च के साथ ऑक्सीफलोरफिन 200 ग्राम या पैंडीमैथालीन बूटीनाशक 800 मि.ली को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि नदीन ज्यादा हो तो डालापोन 1.6 किलोग.... (Read More)
हाथों से लगातार गोडाई करें और पहली कटाई के बाद खेत को नदीन मुक्त करें नदीनों की रोकथाम के लिए सिनबार 400 ग्राम प्रति एकड़ में प्रयोग करें नदीनों को नियंत्रित करने के लिए जैविक मल्च के साथ ऑक्सीफलोरफिन 200 ग्राम या पैंडीमैथालीन बूटीनाशक 800 मि.ली को प्रति एकड़ में प्रयोग करें यदि नदीन ज्यादा हो तो डालापोन 1.6 किलोग्राम प्रति एकड़ या ग्रामाक्ज़ोन 1 लीटर और डयूरॉन 800 ग्राम या टेरबेसिल 800 ग्राम की प्रति एकड़ में स्प्रे करें
Posted by Asad Khan
Uttar Pradesh
10-04-2019 01:12 PM
Maharashtra
04-11-2019 02:24 PM
असद जी खेत की तैयारी के समय रूड़ी की खाद 80-120 क्विंटल प्रति एकड़ में डालें और अच्छी तरह मिलायें नाइट्रोजन 58 किलो (यूरिया 130 किलो), फासफोरस 32-40 किलो (सिंगल सुपर फासफेट 80-100 किलो), पोटाशियम 20 किलो (म्यूरेट ऑफ पोटाश 33 किलो) प्रति एकड़ में डालें, धन्यवाद
Posted by Manpreet Singh
Punjab
10-04-2019 01:07 PM
Punjab
04-20-2019 10:27 AM
Manpreet singh ji jekar tuci kisi private jgah to eh dwaia lende ho tan ehh 3 in one mill jangia, jo ki gall ghotu, muuh khurr ate black quarter lai hundi hai ate jekar tuci sarkari hospital ton lende ho tan ehh alag alag milengia..
Posted by Chetan Singh
Uttar Pradesh
10-04-2019 12:59 PM
Punjab
04-11-2019 04:07 PM
बोर्डो पेस्ट को त्यार करने का तरीका :- कॉपर सल्फेट (नीला थोथा): 2 किलो,चूना 3 किलो,पानी 15 लीटर बोर्डो पेस्ट बनाने का तरीका बोर्डो पेस्ट कॉपर सल्फेट 2 किलो को 15 लीटर पानी में घोलों एक और बर्तन में 15 लीटर पानी लें इस पानी में थोड़ा पानी लेकर इसमें 3 किलो चूना मिलाएं और फिर इस चूने के घोल को बर्तन में पानी में डाल दें फ.... (Read More)
बोर्डो पेस्ट को त्यार करने का तरीका :- कॉपर सल्फेट (नीला थोथा): 2 किलो,चूना 3 किलो,पानी 15 लीटर बोर्डो पेस्ट बनाने का तरीका बोर्डो पेस्ट कॉपर सल्फेट 2 किलो को 15 लीटर पानी में घोलों एक और बर्तन में 15 लीटर पानी लें इस पानी में थोड़ा पानी लेकर इसमें 3 किलो चूना मिलाएं और फिर इस चूने के घोल को बर्तन में पानी में डाल दें फिर कॉपर सल्फेट और चूने वाले अलग अलग तैयार किए घोल को आपस में अच्छी तरह मिला दें और अच्छी तरह हिलाएं इस तरह बनी पेस्ट को ब्रश से पौधों के काटे सिरों पर लगाएं
Posted by Ranbir Singh
Punjab
10-04-2019 12:47 PM
Maharashtra
04-11-2019 02:22 PM
रनबीर जी यह lady bird beetle है जो एक फायदेमंद कीट है, यह कोई नुकसान नहीं करता, धन्यवाद
Posted by milan gangly
Jharkhand
10-04-2019 12:47 PM
Maharashtra
04-10-2019 10:37 PM
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी ख.... (Read More)
खुम्ब की किस्में कई प्रकार की होती है जैसे कि बटन खुम्ब, डीगरी, शटाकी खुम्ब, पराली खुम्ब, और मिलकी खुम्ब इनमे से कुइ खुम्ब सर्दियो के मौसम में और कुछ गर्मीयों के मौसम में लगाये जाते है और हर खुम्ब को लगाने का समय अलग अलग है जैसे बटन खुम्ब का समय सितंबर से मार्च तक होता है इस समय में हम तीन फसले ले सकते है शटाकी खुम्ब का समय अक्तूबर से मध्य फरवरी तक हैं इस समय हम एक फसल ही ले सकते है पराली खुम्ब का समय अप्रैल से अगस्त तक है इस समय हम चार फसले ले सकते है मिलकी खुम्ब का समय अप्रैल से सितंबर तक है आप अब अप्रैल में मिलकी या पराली खुम्ब लगा सकते है पराली खुमब के लिए आपको पराली, बीज, बांस, सेबा, आदि की जरूरत है पराली के पूले, धानो की पराली 1-1 किलो के पूले दोनो सिरो से सेबे से बांध कर तैयार किये जाते है पूले के सिरे कांट कर एक सार कर लिए जाते है पूलो की क्यिारी लगाना पराली के पूलो को साफ पानी में 16-20 घंटो के लिए डूबो दे गिले पूलो को ढलान पर रख कर फालतू पानी को निकलने दे कमरे ईटो और बांस से एक पलेटफार्म बनाये इस पलेटफार्म पर 5 पूलो की एक तहय लगाये जिसके ऊपर 75 ग्राम बीज डाले इसके ऊपर की तहय उलट होती है इस प्रकार 5-5 पूलो की तहय में 300 ग्राम बीज डाल कर कियारी तैयार करे सबसे ऊपर दो पूलो को खोलकर रख दे खुम्बो का फूटना बिजाई से 7-9 दिनो के बाद खुम्ब फूटने लगती है पानी और हवा का संचार बिजाई के दो दिन के बाद हर रोज पानी का छिडका करे खुम्बो के फूटने के बाद हवा का संचार 6-8 घंटे प्रति दिन किया जाता है खुम्बो की तूडाई खुम्बो के फूटने के बाद 1-2 दिनो के बाद तोडाई के योग्य हो जाती है मिलकी खुम्ब मिलकी खुम्ब के लिए तूडी, बीज, मोमी लिफाफे, सेबा, केसिंग,मिट्टी आदि होने चाहिये तूडी की तैयारी सूकी तूडी को पक्के फर्श पर बिछा कर 16-20 घंटे पानी से गिला करे गिली तूडी को बोरी में भर कर सेबे से बांध दे इस बोरी को उबलते पानी में 45-50 मिनट रखें तूडी को निकालकर पक्के फर्श पर बिछा कर ठंडा करे यह तूडी बिजाई के लिए तैयार है बिजाई ठंडी तूडी में बीज मिलाकर मोमी लिफाफो में भर दें एक मोमी लिफाफें में लगभग 2 किलो गिली तूडी और 70-80 ग्राम बीज पडता है लिफाफे के मुंह को सेबे से अच्छी तरह बांध कर कमरे में रख दे केसिंग बिजाई के दो तीन हफतो के बाद लिफाफे खोलकर केसिंग की 1-1.5 की तहय लगा दें केसिंग में तूडी और रेतली मिट्टी होती है 24 घंटो के लिए 4 प्रतिशत फारमलेन के घोल से जीवाणु रहित किया जाता है खुम्बो का फूटना केसिंग मिट्टी डालने के लगभग दो हफतो में खुम्बो के छोटे छोटे किणके निकलने शुरू हो जाते है और 4-5 दिन के बाद तोडने योग्य हो जाते है खुम्बो की तूडाई लगभग 35-40 दिनो तक की जाती है
Posted by omanreet singh sandhu
Punjab
10-04-2019 12:39 PM
Punjab
04-10-2019 02:09 PM
बरसीम में सुंडी की रोकथाम के लिए Quinalphos @800 ml प्रति एकड़ की स्प्रे क्र सकते हैं
Posted by happy
Punjab
10-04-2019 12:39 PM
Punjab
04-11-2019 03:13 PM
ਹੈਪੀ ਜੀ ਤੁਸੀ ਪਸ਼ੂ ਨੂੰ ਵਧਿਆ ਖੁਰਾਕ ਦਿਓ, ਸਹੀ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਉਸਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਕਰੋ, ਟਾਈਮ ਟਾਈਮ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਪੇਟ ਦੇ ਕੀੜਿਆਂ ਲਈ ਗੋਲੀ ਦਿਓ, ਜਦੋ ਪਸ਼ੂ ਦੀ ਸਹੀ ਖੁਰਾਕ, ਦੇਖਭਾਲ ਹੋਵੇਗੀ ਤਾਂ ਗਰੋਥ ਵੀ ਵਧਿਆ ਹੋਵੇਗੀ, ਬਾਕੀ ਤੁਸੀ ਉਮਰ ਦਸੋ ਤਾਂ ਜੋ ਤੁਹਾਨੂੰ ਉਸ ਵਾਰੇ ਹੋਰ ਵੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਤੀ ਜਾ ਸਕੇ.
Posted by Davinder singh
Punjab
10-04-2019 12:38 PM
Punjab
04-11-2019 03:14 PM
Tuci powder rojana 50gm de hisab nal dinde rho ji, iss nal vdia growth howegi.
Posted by kuldeep singh
Punjab
10-04-2019 12:37 PM
Punjab
04-10-2019 02:10 PM
Raja 45 ਕਿਸਮ 130 ਦਿਨਾਂ ਵਿਚ ਪੱਕ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਇਸਦਾ ਝਾੜ 30-35 ਕੁਇੰਟਲ ਪ੍ਰਤੀ ਏਕੜ ਹੈ
Posted by Ganapati parida
Odisha
10-04-2019 12:37 PM
Punjab
04-11-2019 06:19 PM
Moti ki kheti Ke bare me poori jankari or is ki training ke liye aap ICAR-Central Institute of Freshwater Aquaculture(Indian Council of Agricultural Research) (An ISO 9001:2015 Certified Institute) Kausalyaganga, Bhubaneswar-751002, Odisha, India Tel: +91-674-2465421, 2465446, Fax: +91-674-2465407 E-mail: director.cifa@icar.gov.in, Website: www.cifa.nic.in se samparak kare.
Posted by Davinder singh
Punjab
10-04-2019 12:34 PM
Punjab
04-11-2019 03:15 PM
tuci jhoti nu rojana 50gm powder de skde ho, iss nal sarir di kami puri hundi hai ate vdia growth hundi hai.
Posted by Vipin Sunil Kamble
Maharashtra
10-04-2019 12:32 PM
Punjab
04-11-2019 06:07 PM
मोती की खेती और इसकी ट्रेनिंग के बारे में पूरी जानकारी के लिए आप Bamoriya Pearl Farm फ़ोन: 097700 85381 से संपर्क करें
Posted by Natt Jaspal
Punjab
10-04-2019 12:26 PM
Punjab
04-11-2019 05:55 AM
कमाद में यदि ढीला है तो उसके लिए sempra@36gm +coron@500gm को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ स्प्रे करें
Posted by Anil Kumar
Rajasthan
10-04-2019 12:22 PM
Maharashtra
04-11-2019 09:17 AM
anil Kumar ji aap iske uper machar ka hamla check Karen agar aapko iska hamla dikhai deta hai to aap iske uper imidacloprid@1.5ml ko prati litre Pani ke hisab se spray Karen.dhanywad